डरावनी फिल्मों को देखकर लोगों को रोमांच महसूस होता है। मगर, ऐसा क्यों होता है इसका जवाब वैज्ञानिकों ने तलाश कर लिया है। उन्होंने पाया कि डरावनी फिल्में देखने से दिमाग में उत्साह बढ़ाने की गतिविधि में हेरफेर होता है। फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन किया है। उन्होंने प्रतिभागियों को दो डरावनी फिल्में इन्सीडिअस (Insidious) और द कॉन्ज्यूरिंग 2 (The Conjuring 2) देखने के दौरान प्रतिभागियों की न्यूरल एक्टिविटी यानी तंत्रिका गतिविधि की मैपिंग की।

तुर्कु में ह्यूमन इमोशन सिस्टम लेबोरेटरी में किए गए अध्ययन में प्रतिभागियों ने दो अलग-अलग तरीकों से खतरों के जवाब में मस्तिष्क को लगातार कार्रवाई का अनुमान लगाया। उन्होंने पाया कि मस्तिष्क के वे क्षेत्र जो देखने और सुनने के बाद धारणा बनाने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं, वे अचानक किसी खौफनाक दृश्य के सामने आने के बाद सक्रिय हो जाते हैं, ताकि व्यक्ति सामने दिख रहे खतरे से बचने के लिए तेजी से विकासवादी प्रतिक्रिया का इस्तेमाल कर सके।

दिमाग के कुछ क्षेत्रों को आने वाले डरावने सीन के दौरान तेजी से सक्रिय होते हुए देखा गया, क्योंकि उनके दिमाग में चिंता धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी और इसकी वजह से मस्तिष्क लगातार सतर्क बना रहा। सबसे बड़ी डर की प्रक्रिया स्क्रीन पर दिखाए गए दृश्यों की बजाय उन दृश्यों को लेकर थी, जो दिखाए ही नहीं गए थे। फिनलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ तुर्कू के मनोवैज्ञानिक डॉक्टर मैथ्यू हडसन ने कहा- ‘हॉरर फिल्में हमारे उत्साह को बढ़ाने के लिए इस विशेषता का विशेष रूप से फायदा उठाती हैं।

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