बिहार के ग्रामीण विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री ने आज बताया कि राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष में ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना’ के कार्यान्वयन के लिए 102 करोड़ रुपये की राशि विमुक्ति एवं व्यय की स्वीकृति प्रदान कर संबंधित जिलों को राशि उपलब्ध कराई जा रही है। कुमार ने बताया कि इस राशि से पूर्व से आवास सहायता प्राप्त वैसे लाभुक जिन्हें 01 जनवरी, 1996 के पूर्व विभिन्न ग्रामीण योजनाओं के तहत समूह में निर्मित आवास प्रदान किया गया था और उनके घर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में होने के कारण रहने के लायक नहीं रह गये हैं, उन लाभुकों को वर्तमान में जारी प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई-ग्रामीण) के प्रावधान के अनुरूप आवास मुहैया नहीं कराया जा सकता है।

सरकार ने ऐसे पात्र एवं जरूरतमंद लाभुक को पूर्व से आवास सहायता प्राप्त होने के कारण गृहविहीन होने के बावजूद पीएमएवाई (ग्रामीण) के लाभ से वंचित होने के कारण उनके आवास संबंधी कठिनाईयों का समाधान का प्रयास किया है। मंत्री ने बताया कि आवास ऐप के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक जातीय जनगणना (एसईसीसी)-2011 के गृहविहीन परिवारों की सूची में छूटे हुए योग्य परिवारों में से पात्र परिवारों को मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना का लाभ दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम-एईएस) से गंभीर रूप से प्रभावित मुजफ्फरपुर के पांच प्रखंडों मुशहरी, बोचहा, कांटी, मीनापुर एवं मोतीपुर के आवास ऐप के माध्यम से जोड़े गये 4565 एवं छूटे हुए अन्य योग्य पात्र परिवारों को तत्काल मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना से सहायता मुहैया कराने का निदेश दिया गया है।

कुमार ने बताया कि सरकार ने वैसे गरीब पात्र परिवारों की दयनीय स्थिति एवं आवास की समस्या को ध्यान में रखते हुये ‘सबके लिये घरÓ के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना की शुरुआत की है। इस योजना में लाभुकों को पीएमएवाई (ग्रामीण) की तरह ही उनके द्वारा नये आवास के निर्माण के लिये तीन किस्तों में आवास निर्माण की प्रगति के अनुसार एक लाख 20 हजार रुपये सहायता राशि प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।

मंत्री ने बताया कि बिहार के 11 आईएपी जिले औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, गया, रोहतास, जमुई, नवादा, मुंगेर, कैमूर, सीतामढ़ी एवं पश्चिम चम्पारण के लाभुकों को प्रति ईकाई एक लाख 30 हजार रुपये सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। लाभुकों के लिये चयन की शर्तें भी लगभग पीएमएवाई के प्रावधान के अनुरूप ही हैं। लेकिन, इसमें वैसे लाभुक ही सम्मिलित होंगे, जिन्हें वर्ष 1996 से पूर्व समूह में निर्मित आवास आवंटित हुये हैं। श्री कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्र के गरीबों के हित में नित कल्याणकारी कार्यों के प्रति तत्पर है। ग्रामीण जीवन स्तर का उन्नयन करने, गरीबों को ससम्मान से जीने का हक दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढीकरण के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिये सरकार सतत प्रयासरत है।

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