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INDIA Alliance: INDIA गठबंधन के पीएम चेहरे पर बोले कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, ‘2024 का चुनाव मोदी बनाम मोदी’

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कांग्रेस से राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने INDIA गठबंधन की बैठक और विपक्षी दल के पीएम चेहरा को लेकर पूछे गए सवाल पर एक अर्थशास्त्री के इंटरव्यू का जिक्र करते हुए कहा कि 2024 का चुनाव मोदी बनाम मोदी होने वाला है.

पीएम मोदी ने 10 साल में क्या किया, जनता इसकी आलोचना करेगी. जनता हकीकत जानती है गरीब आदमी और गरीब होता जा रहा है. महंगाई इतनी ज्यादा है कि मिडल क्लास को अब ये लग रहा है कि इस मंहगाई में हम कैसे अपना जीवन यापन करेंगे. बीजेपी बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन इनके कोई परिणाम नहीं दिख रहे हैं.

‘क्या पता संविधान बदल दिया जाए’
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि बीजेपी के लोग खुद नाराज है लेकिन वो कुछ बोलते नहीं है और विपक्ष सोच रहा है कि अगर अब पीएम मोदी को नहीं हराया गया तो हो सकता है 2024 के बाद चुनाव ही ना हो. संविधान बदला जाए, तो, ऐसी स्थिति में INDIA गठबंधन में कोई पीएम उम्मीदवार हो या नहीं हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मुद्दा पीएम मोदी द्वारा उनके कार्यकाल में किए गए काम होंगे.

‘महिलाओं के लिए क्या हुआ, अराजकता बढ़ रही है’
कपिल सिब्बल ने आगे कहा कि 15 लाख आए ये नहीं आए, महंगाई हुई या नहीं हुई, बच्चों को शिक्षा मिल रही है या नहीं, डिजिटल इंडिया कहां जा रहा है. अमीर लोग कितने ज्यादा अमीर हो गए है. अमीर और गरीबों में जो गैप है वो कितना ज्यादा बढ़ रहा है. ये मुद्दे देश के सामने आएंगे. महिलाओं के लिए क्या हो रहा है, अराजकता बढ़ रही है, सांप्रदायिक टेंशन बढ़ रही है, हिंसा का माहौल बन गया है. बच्चे भी इस संदर्भ में भाषण देने लगे है, बिना सोच समझ के जो सरकारें है वो विश्व हिंदू परिषद् और बजरंग दल की काम पर रोक नहीं लगा रही है. यहीं मुद्दे देश के सामने रहने वाले है.

रक्षाबंधन पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की प्रदेशवासियों से अपील, गोबर की बनी राखियों से मनाएं त्योहार

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Happy Raksha Bandhan 2023: देश में रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) की धूम है. भारतवासी भाई-बहन के अटूट रिश्ते का पर्व बड़े उत्साह से मना रहे हैं. वहीं छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि रक्षाबंधन पर्व पर इस बार स्व-सहायता समूहों की बहनों द्वारा गोबर और अन्य स्थानीय उत्पादों से तैयार की गई राखियों का ही उपयोग करें, ताकि जब कोई बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधे, तो दूर गांव की एक और बहन के चेहरे पर मुस्कान खिल उठे.

मुख्यमंत्री ने कहा “मैं आपसे वादा लेना चाहता हूं कि इस बार राखी के त्योहार में छत्तीसगढ़ में बनी राखियों का जरूर इस्तेमाल करें. राखी के त्यौहार को खास बनाने के लिए गांव-गांव में हमारी बहनों ने खास तरह की राखियां तैयार की हैं. गोबर को हमारे यहां पवित्र माना जाता है. इसे गो-वर कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है मां लक्ष्मी का वरदान. स्व-सहायता समूह की बहनों ने इसी गोबर से राखियां तैयार की हैं. इसके साथ-साथ धान की, तरह-तरह के बीजों की, और अन्य स्थानीय उत्पादों की राखियां हमारी बहनों ने तैयार की हैं. ये राखियां बाजार में भी बेची जा रही हैं.”

सीएम बघेल ने कहा- रक्षाबंधन प्रेम का एक अटूट बंधन है
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे तीज-त्योहारों में सबसे सुंदर राखी का त्योहार है, क्योंकि यह भाई और बहन की भावनाओं का त्यौहार है. यह भरोसे का त्योहार है. राखी केवल एक धागा नहीं होता, बल्कि यह प्रेम का अटूट बंधन होता है. हमारा समाज भी भरोसे के बंधन से ही बंधा हुआ है. एक-दूसरे का हाथ पकड़कर, एक दूसरे पर भरोसा करके और एक-दूसरे की मदद करके ही हम आगे बढ़ पाते हैं. छत्तीसगढ़ में बनी राखियों का इस पावन पर्व पर उपयोग करने से स्व-सहायता समूह की बहनों को बड़ा संबल मिलेगा.

दक्षिण भारत का खास पर्व ओणम, जानें क्या करते हैं इस दिन?

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बता दें कि वर्ष 2023 में ओणम की शुरुआत रविवार, 20 अगस्त से हो गई थी, ओणम का पर्व गुरुवार, 31 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन मलयाली समाजवासी भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के साथ-साथ राजा बलि का स्वागत भी करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार ओणम का पर्व दानवीर असुर बलि के सम्मान में मनाया जाता है, राजा बलि वहीं हैं, जिसने श्रीहरि विष्णु के अवतार भगवान वामन को तीन पग भूमि दान में दी थी। और श्री वामन अवतार विष्णु जी ने उन्हें अमरता का वरदान देकर पाताल लोक का राजा बना दिया था।”,

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धार्मिक मान्यता के अनुसार ओणम का पर्व दानवीर असुर बलि के सम्मान में मनाया जाता है, राजा बलि वहीं हैं, जिसने श्रीहरि विष्णु के अवतार भगवान वामन को तीन पग भूमि दान में दी थी। और श्री वामन अवतार विष्णु जी ने उन्हें अमरता का वरदान देकर पाताल लोक का राजा बना दिया था।”,

धार्मिक मान्यता के अनुसार ओणम का पर्व दानवीर असुर बलि के सम्मान में मनाया जाता है, राजा बलि वहीं हैं, जिसने श्रीहरि विष्णु के अवतार भगवान वामन को तीन पग भूमि दान में दी थी। और श्री वामन अवतार विष्णु जी ने उन्हें अमरता का वरदान देकर पाताल लोक का राजा बना दिया था। अत: राजधानी महाबलीपुरम के राजा बलि के स्वागत में ही यह पर्व मनाया जाता है।&

बता दें कि वर्ष 2023 में ओणम की शुरुआत रविवार, 20 अगस्त से हो गई थी, ओणम का पर्व गुरुवार, 29 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन मलयाली समाजवासी भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के साथ-साथ राजा बलि का स्वागत भी करते हैं।  ज्ञात हो कि 2023 में, ओणम यानी थिरुवोणम पर्व की मुख्य तिथि 29 अगस्त होगी। तथा रविवार, 20 अगस्त से शुरू हुआ 10 दिवसीय ओणम उत्सव 31 अगस्त तक चलेगा।

• ओणम पर्व फसल और उसकी उपज के लिए मनाया जाने वाला त्योहार हैं।             • घरों में आकर्षक साज-सज्जा की जाती है।
• फूलों की रंगोलियां बनाकर राजा बलि के स्वागत किया जाता है।
• ओणम पर्व पर कई तरह के पकवान बनाकर भोग अर्पित किया जाता है।
• इस दिन दीपक जलाने की भी परंपरा हैं।
• इन दिन घर के आंगन में फूलों की रंगोली ‘ओणमपुक्कलम’बनाई जाती हैं।
• ओणम पर साद्य, खीर आऊप्रथमन, चावल, नारियल के दूध व गुड़ से बने व्यंजन, पायसम, केले का हलवा, नारियल चटनी, चावल के आटे को भाप में पका कर कई तरह की सब्जियां मिलाकर अवियल, सांभर आदि के साथ 64 प्रकार के पकवान बनाने की परंपरा है।                                        
• केरल के पारंपरिक भोज ओनसद्या को केले के पत्ते पर परोसा जाता है।
• दीये की रोशनी के साथ फूलों की रंगोली को सजाया जाता है।
• इस दिन गले मिलकर शुभकामनाएं देने और साथ मिलकर पर्व मनाया जाता है।
• ओणम पर्व के दिन घर के आंगन में राजा महाबलि की मिट्टी से बनी त्रिकोणात्मक मूर्ति को कलाकृतियां से सजाया जाता है, तथा ओणम की समाप्ति पर यानी राजा बलि के चले के बाद उन्हें हटाया जाता हैं।      

Mukesh Ambani House: एंटीलिया में इस खास मशीन से बनाई जाती हैं रोटियां, कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश

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Mukesh Ambani House: 
रिलायंस इंडस्ट्री के मालिक मुकेश अंबानी के परिवार की कोई भी चीज खास ही होती है। यही वजह है कि अंबानी परिवार के बारे में लोग ज़्यादा से ज़्यादा जानना चाहते हैं, उनके बारे में पढ़ना चाहते हैं।

अपने हर काम से अंबानी परिवार सोशल मीडिया पर लाइम लाइट में रहते हैं। वो कल्चरल सेंटर का उद्घाटन हो या फिर नीता अंबानी की साड़ी, इनके घर का स्टाफ हो या इनके घर का खाना। अंबानी परिवार जो भी करता है देखने-सुनने लायक होता हैं।

हम सभी जानना जानते हैं कि अंबानी परिवार के लाइफस्टाइल ही लग्जरी है लेकिन उनके पूरे परिवार को खाना सिंपल ही पसंद है। इनके परिवार में गुजराती खाने को काफी पसंद किया जाता है। साथ ही, मुकेश अंबानी को खाने में दाल, चावल और रोटी पसंद है। वैसे तो लोगों में बहुत दिलचस्पी रखते हैं कि इनके 27 मंजिला घर एंटीलिया में खाना कैसे बनता होगा? ये चांदी के बरतन में खाते हैं या कैसा खाते हैं। तो आज हम आपको उनके किचन के बारे में बताएंगे की अंबानी परिवार में कैसे खाना या रोटी बनती हैं।

अंबानी परिवार में इस तरह से बनती हैं रोटी

मीडिया रिपोर्टस की मानें तो अंबानी परिवार में रोटियां मशीन से बनती हैं। इस रोटी मेकिंग मशीन से एक बार में हज़ारों की संख्या में रोटी बनती है। आटा भी मशीन में ही गूंथता है और रोटी की लोई भी मशीन से ही कटती है। कुम मिलाकर सारा काम ये मशीन करती है। इस मशीन को बनाने वाले ने दावा किया है कि, ये मशीन अंबानी परिवार के घर से लेकर ताज होटल तक में है। इसकी कीमत लाखों में है।

अंबानी परिवार के घर में सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि उनके घर में काम करने वाले 400 नौकरों के लिए हजार से ज्यादा रोटियां बनाई जाती है। लगभग रोजाना हजार से ज्यादा रोटियां बनाई जाती हैं रोटियां कुछ खास अंदाज में होती है। अब बात करें उनके शेफ की तो मुकेश अंबानी अपने कर्मचारियों की सुख-सुविधाओं का पूरा ध्यान रखते हैं।

मुकेश अंबानी के शेफ की सैलरी से उड़े होश

जानकारी के मुताबिक, मुकेश अंबानी के शेफ़ की प्रतिमाह सैलरी 2 लाख रुपये हैं। अगर आपको लग रहा है कि मुकेश अंबानी का शेफ बहुत स्पेशल खाना बनाने के इतने पैसे ले रहा है, तो ऐसा नहीं हैं। मुकेश अंबानी वेजिटेरियन हैं और उन्हें खाने में सादा खाना ही पसंद है।

Trains : छग से दिल्ली चलेगी आम आदमी की ट्रेन, एसी नहीं, 11 जनरल, 12 स्लीपर, चार पार्सल कोच भी

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Trains : छग से दिल्ली चलेगी आम आदमी की ट्रेन, एसी नहीं, 11 जनरल, 12 स्लीपर, चार पार्सल कोच भी
Trains : छग से दिल्ली चलेगी आम आदमी की ट्रेन, एसी नहीं, 11 जनरल, 12 स्लीपर, चार पार्सल कोच भी

रायपुर। लंबी दूरी की ट्रेनों (trains)में भीड़ की समस्या दूर करने रेलवे (Railways)जल्द देश के विभिन्न राज्यों में स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू करने जा रहा है, जिसमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है।

रेलवे ने बीते दिनों सर्वे किया था, जिसमें दिल्ली से पूर्व दिशा को जाने वाली ट्रेनों में पूरे वर्ष अधिक भीड़ पाई गई। अब सर्वे के आधार पर भीड़ वाली ट्रेनों का छत्तीसगढ़, उप्र, बिहार, बंगाल, असम, ओडिशा, झारखंड, व आंध्रप्रदेश (Chhattisgarh, Uttar Pradesh, Bihar, Bengal, Assam, Odisha, Jharkhand, and Andhra Pradesh)के लिए जल्द गैर वातानुकूलित ट्रेनों का संचालन शुरू होगा।

इन ट्रेनों में खास बात यह भी है कि इसमें 11 जनरल और 12 स्लीपर कोच के साथ चार पार्सल कोच भी लगेंगे, ताकि यात्रियों को सामान बुक कराकर ले जाने में आसानी हो । एलएचबी कोच के आने से ट्रेनों में जनरल और स्लीपर कोच कम हो गए हैं, लेकिन इस स्पेशल ट्रेन में एसी कोच नहीं होगा। इसीलिए इस ट्रेन को आम आदमी की ट्रेन कहा जा रहा है।

ट्रेन की एक रैक बनकर तैयार

रेलवे बोर्ड ने ट्रेनों के संचालन के लिए रैक तैयार करना शुरू कर दिया है। जानकारी के मुताबिक एक रैक तैयार हो चुकी है। रेलवे बोर्ड के सदस्य नवीन गुलाटी और परिचालन एवं व्यवसाय विकास सदस्य जय सिन्हा ने नई दिल्ली स्टेशन पर रैक की जांच की है। अब उनकी रिपोर्ट के आधार पर इसे चलाने का निर्णय लिया जाएगा। उम्मीद लगाई जा रही है कि पहली ट्रेन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रूट पर चलाई जा सकती है। आम चुनाव से पहले चुने गए अधिकतर शहरों के बीच इस तरह की ट्रेनें चलाने की तैयारी है। नई ट्रेन छत्तीसगढ़ के साथ उप्र, बिहार, बंगाल, असम, ओडिशा, झारखंड, पंजाब, गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश के लिए ये ट्रेनें चलाने की योजना है

यात्रियों का सफर होगा आसान

दिल्ली से पूर्व दिशा की ट्रेनों में पूरे वर्ष भीड़ होती है। लंबी प्रतीक्षा सूची रहती है। त्योहार के दिनों में यात्रियों की संख्या और बढ़ जाती है। सर्वे में पता चला है कि दपूमरे से दिल्ली आने वाले जनरल कोच में लोगों को कष्टदायक स्थिति में यात्रा करनी पड़ती है। साथ ही स्लीपर कोच में भी भीड़ बढ़ रही है। बहुत यात्री वेटिंग टिकट लेकर यात्रा करते हैं। ऐसे में त्योहार व गर्मी की छुट्टियों में विशेष ट्रेनें भी चलाई जाती हैं। अब इसका स्थायी हल निकालने के लिए ऐसे रूट पर पूरे वर्ष गैर वातानुकूलित ट्रेनें चलाने का फैसला किया गया है। जल्द ही ट्रेनों में भीड़ की समस्या दूर होगी और सफर आसान होगा।

पेट्रोल-डीजल से नहीं, गन्ने के रस से बने ईंधन से चलेगी देश की पहली एथेनॉल कार, आज नितिन गडकरी करेंगे लॉन्च

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नई दिल्ली. केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी आज देश के पहले एथेनॉल कार को लॉन्च करेंगे जो 100% एथेनॉल से चलने में सक्षम होगी. गडकरी टोयोटा इनोवा के फ्लेक्स फ्यूल मॉडल को लॉन्च करेंगे.

एथेनॉल की खास बात यह है कि ये तेल के कुएं से नहीं बल्कि किसान के खेतों से आता है और पेट्रोल-डीजल के मुकाबले प्रदूषण भी कम करता है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया है कि आने वाले दिनों में एथेनॉल के इस्तेमाल से देश में पेट्रोल की कीमत 15 रुपये प्रति लीटर पर आ सकती है.

आपको बता दें कि भारत सरकार फिलहाल पेट्रोल में 20% एथेनॉल को मिलाने की योजना बना रही है. E20 योजना के तहत 2025-2026 तक देश भर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लॉन्च किया जाएगा. भारत सरकार ने 2021-22 में अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए 86 प्रतिशत ईंधन आयात किया था. 11 जुलाई 2023 को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि E20 पेट्रोल अभी 1,350 पेट्रोल पंप पर मिल रहा है और 2025 तक ये पूरे देश में उपलब्ध होगा.

क्या है एथेनॉल और कैसे होता है तैयार

एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जिसे गन्ने के रस, मक्का, आलू, कसावा और सड़ी सब्जियों के फर्मेंटेशन से तैयार किया जाता है. स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से बने एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर बायोफ्यूल या फ्लेक्स फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है. तैयार किए गए फ्लेक्स फ्यूल को पेट्रोल पंप में भेजा जाता है जहां से फ्यूल वाहनों में जाता है. फ्लेक्स फ्यूल से चलने वाले वाहन भी अलग तरह के होते हैं. दरअसल, इन वाहनों के इंजन को फ्लेक्स फ्यूल या बायो फ्यूल से चलाने के लिए खासतौर पर तैयार किया जाता है.

एथेनॉल बनाने में ये देश है नंबर-1

ब्राजील दुनिया में सबसे ज्यादा फ्लेक्स फ्यूल का उत्पादन करता है. 1975 में ब्राजील ने तेल में ममले में खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एथेनॉल का उत्पादन शुरू कर दिया था. आज ब्राजील में चलने वाली 93% गाड़ियां एथेनॉल मिश्रित फ्लेक्स फ्यूल पर चलती हैं. अनुमान है कि 2030 तक ब्राजील की ईंधन डिमांड का 72% हिस्सा बायो फ्यूल से पूरा किआ जाएगा.

क्या हैं फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियां?

फ्लेक्स इंजन वाली गाड़ियां पेट्रोल, डीजल, एथेनॉल या फ्लेक्स फ्यूल किसी से भी चल सकती हैं. नितिन गडकरी आज जो कार भारत में लॉन्च करने वाले हैं वो 100% एथेनॉल पर चलने में सक्षम होगी. यानी ये कार फ्लेक्स फ्यूल के साथ पूरी तरह एथेनॉल से भी चलाई जा सकती है. फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों इस्तेमाल से कच्चे ईंधन के आयत में कमी आएगी. इससे हर साल 16 लाख रुपये बचेंगे.

क्या हैं फ्लेक्स फ्यूल के फायदे

एथेनॉल की कीमत पेट्रोलियम पदार्थों से कम होती है. ऐसे में जब एक लीटर पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाएगा तो कीमत कम होना स्वाभाविक है. एथेनॉल पर पेट्रोल की तुलना में कम टैक्स लगाए जाते हैं. फ्लेक्स फ्यूल के सस्ता होने की एक वजह है. फ्लेक्स फ्यूल जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड और मोनोऑक्साइड जैसी गैसों का कम उत्सर्जन करता है. इसका इस्तेमाल बढ़ने से प्रदूषण कम होने की उम्मीद है. एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने और मक्के जैसी फसलों की पैदावार बढ़ाने की जरूरत होगी. इससे इन फसलों की मांग बढ़ेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी. भारत में मौजूदा समय में केवल पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है. डीजल में एथेनॉल मिलाए जाने के प्रोजेक्ट पर भी काम हो रहा है.

CG Weather Update: छत्‍तीसगढ़ में मानसून पर लगा ब्रेक, गर्मी और उमस बढ़ी तो सावन में चलने लगे एसी-कूलर, जानें ताजा अपडेट

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रायपुर। CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल गया है और मानसून ब्रेक की स्थिति बन गई है। अधिकतम व न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी के चलते उमस में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और घरों में एसी-कूलर चलने शुरू हो गए है।

सावन के मौसम में भी गर्मी के मौसम जैसा अहसास होने लगा है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले तीन दिनों में भी अधिकतम तापमान में विशेष बदलाव नहीं होगा। हालांकि प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश के आसार है। रक्षाबंधन के बाद ही अब प्रदेश में मौसम का मिजाज थोड़ा बदलेगा।

गर्मी के साथ उमस में लगातार हो रही बढ़ोतरी

बारिश ने होने के कारण अब गर्मी व उमस में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सोमवार को रायपुर का अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से दो डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। इसी प्रकार न्यूनतम तापमान 25.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य रहा। मंगलवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहने व हल्की बारिश के आसार है।

अगले महीने सितंबर में बदलेगा मौसम का मिजाज

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी मौसम का रुख इस प्रकार ही रहेगा। अगले महीने सितंबर से ही मौसम का मिजाज थोड़ा बदलेगा और बारिश के आसार बने हुए है। इस वर्ष बारिश की स्थिति भी खराब बनी हुई है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एक जून से लेकर अब तक की स्थिति में इस वर्ष प्रदेश में सामान्य से 20 फीसद कम वर्षा हुई है। प्रदेश में अब तक की स्थिति में बीजापुर में सर्वाधिक और सरगुजा में सबसे कम बारिश हुई है।

यह बन रहा सिस्टम

मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने बताया कि मानसून द्रोणिका हिमालय की तराई में स्थित है और मानसून ब्रेक की स्थिति बनी हुई है।साथ ही एक पश्चिम विक्षोभ द्रोणिका के रूप में मध्य क्षोभमंडल में 72 डिग्री पूर्व और 28 डिग्री उत्तर में स्थित है। इसके प्रभाव से मंगलवार को प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में हल्की वर्षा होने के आसार है। विशेषकर बस्तर संभाग में हल्की वर्षा की संभावना है।

ये हैं दुनिया की सबसे महंगी 3 सब्जियां, 1 किलो के दाम में हो जाएगी ढेर सारी शॉपिंग

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Most Expensive Vegetables: भारत ही नहीं दुनिया के लगभग सभी घरों में सब्जियां बनती हैं. सब्जियां कई प्रकार की होती हैं सभी का स्वाद भी अलग-अलग ही होता है. लेकिन इनके जब भाव बढ़ जाते हैं तो इनका जायका भी बदलने लगता है.

बीते कुछ समय में भारत में टमाटर सहित कुछ अन्य सब्जियों के दाम बढ़ जाने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. कुछ जगह तो सब्जी की दुकानों पर टमाटर 200 रुपये प्रति किलो से भी ज्यादा कीमत का बिका है. टमाटर को लेकर सरकार को भी एक्शन में आना पड़ा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई सारी ऐसी सब्जियां भी हैं जिनकी कीमत कुछ सौ या हजार रुपये किलो नहीं बल्कि लाखों में है. आइए जानते हैं…

फ्रांस में एक ऐसा आलू मिलता है जो साल में केवल और केवल 10 दिन के लिए मिल पाता है. द्वीप के कारण नमकीन हवा के कारण उगाए गए ला बोनोटे आलू थोड़े से नमकीन होते हैं. लेकिन आप इनकी आप कीमत सुनकर चौक जाएंगे. आपके यहां तो आलू ज्यादा से ज्यादा 50 रुपये किलो मिल जाता होगा, लेकिन इस आलू की कीमत करीब 1 लाख रुपये प्रति किलो है.

जापान के इस मशरूम के दाम सुनकर उड़ जाएंगे आपके होश

बाजार में मशरूम की कई किस्में मौजूद हैं जिनकी कीमत 200 से लेकर 2000 रुपये प्रति किलो तक है. लेकिन जापान में एक ऐसा मशरूम है जिसकी कीमत करीब-करीब 73 हजार रुपये किलो है. इस मशरूम का नाम मत्सुटेक मशरूम है. ये जापानी मशरूम है, जोकि पतझड़ के मौसम में मिलता है.ये मशरूम ‘लाल देवदार के जंगलों’ में मिलता है. लेकिन धीरे-धीरे इस मशरूम की खेती खत्म होती जा रही है. जापान में इन मशरूमों की सालाना फसल 1000 टन से कम है.

72 हजार रुपये किलो मिलते हैं हॉप शूट्स

वहीं, एक ऐसी सब्जी भी है जिसकी कीमत करीब 72 हजार रुपये प्रति किलो भी है. हॉप शूट्स की फसल उत्तरी अमेरिका के हॉप शूट में होती है. ये हरे और शंकु के आकार के फूल हैं, जिनका इस्तेमाल पेय पदार्थ, विशेष रूप से बीयर बनाने में किया जाता है. टीबी के इलाज में इसकी डंठल को काफी प्रभावी माना जाता है. ये औषधीय गुणों से भरपूर होती है. इसके उपयोग से दवाइयां भी बनाई जाती हैं.

कोविड वैक्सीन से बढ़े हार्ट अटैक के मामले! ICMR के इस दावे से सामने आई सच्चाई

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कोविड के बाद हार्ट अटैक से होने वाली मौतों के पीछे वैक्सीन को एक बड़ी वजह बताया जा रहा है. हालांकि, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने इसे खारिज कर दिया है. आईसीएमआर ने दावा किया है कि कोविड से हुई मौतों की वजह वैक्सीनेशन के चलते आया हार्ट अटैक नहीं है.

दरअसल, पिछले एक साल में देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों ने हार्ट अटैक की वजह से जान गंवाई है. कहा जाने लगा कि हार्ट अटैक से होने वाली मौतों के लिए कोविड वैक्सीनेशन जिम्मेदार है.

आईसीएमआर लंबे समय से हार्ट अटैक से होने वाली मौत के मामलों और कोविड-19 वैक्सीन के बीच संभावित कनेक्शन का आकलन करने के लिए स्टडी कर रहा था. भारत में कोविड ने मार्च 2020 से रफ्तार पकड़ना शुरू कर दिया. कोविड को रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया. 2020 में कोविड महामारी के फैलने के बाद दुनियाभर में वैक्सीन बनाने की शुरुआत हुई. भारत में भी स्वदेशी वैक्सीन तैयार करने का काम हुआ. हालांकि वैक्सीनेशन की शुरुआत होने में काफी वक्त लगा.

देश में कब शुरू हुआ वैक्सीनेशन?

भारत में वैक्सीनेशन की शुरुआत जनवरी के महीने से हुई. 16 जनवरी 2021 को वैक्सीन की पहली डोज लगाई गई. धीरे-धीरे वैक्सीनेशन ने रफ्तार पकड़ी. आबादी के एक बड़े हिस्से को कवर करने के बाद वैक्सीन की दूसरी डोज लगाने का काम भी शुरू हुआ. देश में लोगों को वैक्सीन की तीसरी डोज भी लगाई गई है. अब तक देश में लोगों को 2 अरब से ज्यादा वैक्सीन की डोज लगाई गई है. वैक्सीनेशन के मामले में भारत दुनिया के टॉप देशों में है.

देश में बढ़े हार्ट अटैक के मामले

कोविड महामारी थम चुकी है और देश की 95 फीसदी से ज्यादा आबादी का वैक्सीनेशन भी हो चुका है. मगर पिछले एक साल से हार्ट अटैक के मामलों में इजाफा हुआ है. सोमवार को हरियाणा पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर ने हार्ट अटैक से जान गंवा दी. वहीं, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में रविवार को फिल्म देखने गए 32 वर्षीय एक शख्स की हार्ट अटैक से मौत हो गई. हार्ट अटैक के इस तरह के केस देशभर से सामने आए हैं. ज्यादातर हार्ट अटैक के मामले युवाओं में रिपोर्ट किए गए हैं.

आम आदमी को और परेशान करेगी महंगाई! मानसून में कम बारिश से बढ़ सकते हैं दलहन और तिलहन के दाम

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Pulses and Oilseed Prices Hike: अगस्त में कमजोर मानसून आने वाले वक्त में मुश्किल का कारण बन सकती है. मौसम विभाग (IMD) के आकलन के अनुसार इस साल अगस्त में पिछले 8 सालों में सबसे कम बारिश दर्ज की गई है.

ध्यान देने वाली बात ये है कि कमजोर मानसून का सिलसिला सितंबर में भी जारी रह सकता है. इसके पीछे El Nino फैक्टर को जिम्मेदार बताया जा रहा है. ऐसे में कम हुई बारिश से दलहन और तिलहन के दाम में इजाफा हो (Pulses and Oilseed Prices Hike) सकता है. हालांकि देश के ज्यादातर हिस्सों में खरीफ की फसल की बुआई का काम लगभग पूरा हो चुका है मगर कमजोर मानसून के कारण फसल की पैदावार पर असर पड़ने की संभावना है.

ज्यादातर हिस्सों में कम हुई बारिश

फाइनेंशियल टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक दलहन और तिलहन की बुआई के बाद अब यह फसल फूल आने के चरण में है. ऐसे में इन्हें ज्यादा से ज्यादा पानी की आवश्यकता है. ऐसे में कमजोर मानसून इस फसलों की पैदावार पर बहुत बुरा असर डाल सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक सोमवार तक भारत में मानसून का लॉग पीरियड एवरेज 92 फीसदी के आसपास रहा है. केवल देश के उत्तर पश्चिम भाग में ही पिछले साल के मुकाबले 6 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है. वहीं मध्य हिस्से में तय मानक से 7 फीसदी, पूर्व उत्तर भारत में 15 फीसदी और दक्षिण भाग में 17 फीसदी कम बारिश हुई है.

फाइनेंशियल टाइम्स से बात करते हुए मौसम विभाग के सीनियर अधिकारी ने कहा कि ऐसे में पूरे देश में अगस्त के महीने में पिछले सालों के मुकाबले 35 फीसदी कम बारिश हुई है. ऐसे में अगर सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश भी होती है तो भी इतनी बड़ी कमी को पूरा करना मुश्किल हो सकता है.

कम बारिश से बढ़ सकते है दलहन और तिलहन के दाम!

गौरतलब है कि खरीफ सीजन में अगस्त और सितंबर की बारिश से पर फसलों की पैदावार निर्भर करती है. ऐसे में इन दो महीनों में हुई कम बारिश से देश में धान, गन्ना, दलहन और तिलहन की पैदावार पर असर पड़ सकता है. ध्यान देने वाली बात ये है कि वित्त वर्ष 2022-23 में भारत में खाद्यान्न उत्पादन में सालाना के आधार पर 5 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई थी और यह बढ़कर 330.5 मिलियन टन (MT) पर पहुंच गया था. वहीं इस साल का खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 332 मिलियन टन तय किया गया है. ऐसे सामान्य से कम बारिश खाद्यान्न उत्पादन के लक्ष्य के लिए तगड़ा झटका हो सकता है. इसके साथ ही इसका असर दलहन और तिलहन की कीमत पर भी दिख सकता है.