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सरकार ने क्यों सोना और पेट्रोल-डीजल खरीदने से किया मना…

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देश की जनता से पीएम मोदी ने सोने और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील की. सरकार की इस मंशा के पीछे क्या-क्या वजह है, इसे आप अब आंकड़ों के जरिए समझिए.

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को देश की जनता से कई अपील कीं. पीएम मोदी ने कहा कि अगले एक साल तक सोना नहीं खरीदना है. साथ ही उन्होंने पेट्रोल-डीजल और खाने के तेल  का इस्तेमाल कम करने की भी अपील की. पीएम मोदी ने लोगों से विदेश यात्राओं को टालने का भी आह्वान किया. अब आंकड़ों से समझिए आखिरकार पीएम मोदी को ऐसी अपील क्यों करनी पड़ी. इसकी असल वजह क्या है.

दरअसल भारत हर साल विदेशों से 15 लाख करोड़ का कच्चा तेल खरीदता है और सात 7 लाख करोड़ का सोना भी खरीदता है. यह कीमत सरकार को डॉलर में चुकानी पड़ती है. बड़ी बात यह है कि कच्चा तेल और सोना, दोनों मिलकर देश के इंपोर्ट बिल का 30 फीसदी से ज्यादा है.

जितना खरीदेंगे, उतनी बढ़ेगी डॉलर की मांग

अब आसान भाषा में समझिए. तेल और सोने की जितनी ज़्यादा खरीद उतनी डॉलर की मांग भी बढ़ती है और जितनी मांग बढ़ती है, उतनी डॉलर की कीमत भी बढ़ जाती है. सीधे तौर पर हमारा रुपया कमजोर हो जाता है. अब रुपया जितना टूटता है, उतना कच्चा तेल और सोना खरीदना और महंगा हो जाता है. आज डॉलर का दाम करीब 96 रुपए है.

अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव

दरअसल ईरान युद्ध के बाद से भारत की बाहरी अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है. युद्ध शुरू होने के सिर्फ दो महीनों के अंदर भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 38 बिलियन डॉलर गिरकर 691 बिलियन डॉलर पर आ गया है. अभी वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100-105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ रहा है,

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोना आयात बिल लगभग दोगुना होकर 72 बिलियन डॉलर पहुंच गया है, जो 2022-23 में 35 बिलियन डॉलर था, इसमें सालाना 24 फीसदी की वृद्धि देखी गई है. विदेश यात्राओं और अन्य खर्चों के लिए भारत से बाहर जाने वाला पैसा काफी बढ़ गया है. अकेले विदेश यात्रा पर लगभग 15 बिलियन डॉलर खर्च हुए हैं. ऐसे में अगर जनता सोने की खरीद में 30 से 40 फीसदी की कमी करते हैं, तो देश की लगभग 20 से 25 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा बच सकती है.

सरकार की मंशा भी जान लीजिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस अपील का मकसद बिना किसी तत्काल वित्तीय सख्ती, जैसे आयात शुल्क बढ़ाना के जनता की सोच में बदलाव लाकर आयात बिल को नियंत्रित करना है. इससे चालू खाता घाटे यानी करंट अकाउंट डेफेसिट को कम करने और रुपए को स्थिरता देने में मदद मिलेगी. इसके विकल्प के रूप में सरकार ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है, ताकि घरों में रखे बेकार सोने को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में लाया जा सके.

राज्य शासन ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टरों को लिखा पत्र…

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नगरीय निकायों के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं का स्थल निरीक्षण एवं ऑडिट कर उनकी कार्यप्रणाली, तकनीकी और पर्यावरणीय स्थिति के परीक्षण के दिए निर्देश

ठोस अपशिष्ट के संग्रहण, परिवहन एवं प्रसंस्करण की अद्यतन स्थिति की नियमित समीक्षा करने कहा

निकायों में दर्शनीय स्वच्छता, जलाशयों की सफाई, बैकलेन की स्वच्छता, नालियों एवं नालों की नियमित सफाई, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के प्रसंस्करण की भी नियमित समीक्षा के निर्देश

राज्य शासन ने सभी कलेक्टरों को केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का क्रियान्वयन सभी नगरीय निकायों में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने मंत्रालय से परिपत्र जारी कर कलेक्टरों को स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अन्तर्गत परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए गठित जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष होने के नाते इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा है।

नगरीय प्रशासन विभाग ने कलेक्टरों को अपने जिले के सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों व अन्य संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की वर्तमान स्थिति के सूक्ष्म आकलन के निर्देश दिए हैं। सभी निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं जैसे मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF), कंपोस्टिंग फैसिलिटी, अपशिष्ट प्रसंस्करण एवं पुनर्चक्रण इकाईयाँ, ट्रांसफर स्टेशन, सैनिटरी लैंडफिल तथा लिगेसी वेस्ट डम्प-साइट्स का स्थल निरीक्षण एवं ऑडिट करते हुए उनकी कार्यप्रणाली, तकनीकी और पर्यावरणीय स्थिति के परीक्षण के लिए भी निर्देशित किया गया है।

विभाग ने कलेक्टरों को नगरीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कार्य के लिए स्वीकृत सभी परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए निकायों में क्रियान्वित परियोजनाओं के जियो-टैग्ड फोटोग्राफ्स हर महीने ई-मेल के माध्यम से मंगाकर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक में जियो-टैग्ड फोटोग्राफ्स का परीक्षण करने को कहा है। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं का चिन्हांकन कर उनके समयबद्ध निराकरण के निर्देश कलेक्टरों को दिए गए हैं।

नगरीय प्रशासन विभाग ने निकायों में उत्सर्जित हो रहे ठोस अपशिष्ट के संग्रहण, परिवहन एवं प्रसंस्करण की अद्यतन स्थिति, दर्शनीय स्वच्छता, जलाशयों की सफाई, बैकलेन की स्वच्छता, नालियों एवं नालों की नियमित सफाई तथा निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट के प्रसंस्करण की नियमित समीक्षा के निर्देश दिए हैं। विभाग ने इन कार्यों की सतत निगरानी के लिए निकायों द्वारा स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के स्वच्छतम पोर्टल पर स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति एवं स्वच्छता गतिविधियों से संबंधित प्रविष्टियों की भी जिला स्तर पर नियमित समीक्षा करने को कहा है। विभाग द्वारा इन कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कलेक्टरों को अपेक्षित कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है।

’पाली शिव मंदिर में श्रद्धा और धरोहर का समागम, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का भव्य आयोजन’

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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 08 से 11 जनवरी सोमनाथ मंदिर पर 1026 में हुए पहले अभिलिखित आर्क्रमण के हजार वर्ष पर स्मरणोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में कोरबा जिले के पाली नगर में स्थित पुरातात्विक महत्व के अति प्राचीन शिव मंदिर परिसर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। पूरे दिन वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बना रहा।

सुबह कार्यक्रम की शुरुआत रुद्राभिषेक से हुई। नगर पंचायत पाली के अध्यक्ष श्री अजय जायसवाल अपनी धर्मपत्नी के साथ, पार्षदगण तथा नगर के गणमान्य नागरिकों ने शिवलिंग का विधि-विधान से अभिषेक कर नगर की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

रुद्राभिषेक के पश्चात मंदिर परिसर में लगाए गए एलईडी स्क्रीन के माध्यम से सोमनाथ मंदिर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया, जिसे जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने बड़े उत्साह से देखा। प्रसारण के बाद आयोजित परिचर्चा में नगर पंचायत अध्यक्ष श्री अजय जायसवाल एवं श्री संजय जायसवाल ने अपने उद्बोधन के माध्यम से सोमनाथ की ऐतिहासिक महत्ता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता पर प्रकाश डाला। सायंकालीन सत्र में स्थानीय भजन मंडली द्वारा शिव भजनों की प्रस्तुतियों ने पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय कर दिया। श्रद्धालुओं ने भजनों का आनंद लेते हुए आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।

संपूर्ण कार्यक्रम का सफल संचालन श्री विशाल मोटवानी द्वारा किया गया। अंत में मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पंचायत पाली ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी उपस्थित जनों, जनप्रतिनिधियों, भजन मंडली और आयोजन टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। पाली शिव मंदिर में संपन्न यह आयोजन नगर की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को पुनः उजागर करने वाला साबित हुआ तथा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के प्रति आमजन की आस्था को और अधिक प्रगाढ़ करने वाला रहा।

AI क्रांति की ओर बड़ा कदम, अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर…

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AI Upskilling Course Entrance Exam 2026; सफल आयोजन चयनित युवाओं को मिलेगा अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर…

युवाओं को भविष्य की आधुनिक तकनीकों से जोड़ने तथा उन्हें रोजगारोन्मुख एवं तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में जिला प्रशासन धमतरी द्वारा एक अभिनव पहल करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता कौशल उन्नयन पाठ्यक्रम प्रवेश परीक्षा 2026 (AI Upskilling Course Entrance Exam 2026 ) का सफल आयोजन किया गया।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) एवं डिजिटल तकनीकों के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।

आज के डिजिटल एवं तकनीक-प्रधान दौर में AI विश्व की सबसे तेजी से विकसित होने वाली और सर्वाधिक मांग वाली तकनीकों में शामिल हो चुका है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा युवाओं को आधुनिक कौशलों से सशक्त बनाने हेतु यह विशेष पहल की गई है।

परीक्षा का आयोजन पीजी बीते रविवार को पी.जी.कॉलेज धमतरी स्थित IT भवन में किया गया, जिसमें जिले के विभिन्न महाविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

परीक्षा में कुल 107 विद्यार्थियों ने ऑफलाइन तथा 59 विद्यार्थियों ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की। बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि जिले के छात्र-छात्राओं में AI, डिजिटल स्किलिंग एवं नई तकनीकों के प्रति तेजी से जागरूकता और रुचि विकसित हो रही है।

परीक्षा के माध्यम से चयनित विद्यार्थियों को आगे विशेष AI Skill Training Program से जोड़ा जाएगा।

यह प्रशिक्षण प्रतिष्ठित संस्था Learnijoy Bangalore द्वारा संचालित किया जाएगा, जिसमें प्रतिभागियों को AI Video Generation, Website Development, AI Agents Making, Automation Tools, Digital Productivity, Prompt Engineering तथा आधुनिक तकनीकी समाधान विकसित करने जैसी अत्याधुनिक स्किल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल तकनीकी जानकारी देना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार, इंटर्नशिप, फ्रीलांसिंग, डिजिटल उद्यमिता एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना भी है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उद्योगों की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप Practical एवं Industry-Oriented Learning उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध डिजिटल अवसरों का लाभ उठा सकें।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि “आने वाला समय AI एवं डिजिटल टेक्नोलॉजी का है। यदि युवाओं को समय रहते आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाए, तो वे न केवल बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि स्वयं स्टार्टअप एवं नवाचार के माध्यम से रोजगार सृजक भी बन सकते हैं। जिला प्रशासन धमतरी का प्रयास है कि जिले के युवाओं को वैश्विक स्तर की स्किलिंग उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों एवं अवसरों के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।”

उन्होंने आगे कहा कि जिला प्रशासन द्वारा भविष्य में भी युवाओं के लिए नवाचार आधारित प्रशिक्षण, स्टार्टअप प्रमोशन, डिजिटल उद्यमिता एवं टेक्नोलॉजी आधारित रोजगार कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व आयोजित Yuva Fest में भी AI Workshop का आयोजन किया गया था, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 4 विद्यार्थियों को इंटर्नशिप का अवसर प्रदान किया गया था। इस उपलब्धि से प्रेरित होकर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने AI Upskilling Course Entrance Exam में भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। कई प्रतिभागियों ने इसे अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि AI एवं आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण भविष्य में उन्हें बेहतर रोजगार, स्टार्टअप एवं वैश्विक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कार्य करने के नए अवसर प्रदान करेगा।

जिला प्रशासन धमतरी की यह पहल जिले को तकनीकी नवाचार एवं डिजिटल स्किलिंग के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह प्रयास “स्किल डेवलपमेंट”, “डिजिटल इंडिया” एवं आत्मनिर्भर युवा निर्माण की भावना को मजबूत करने की दिशा में सार्थक पहल साबित होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय की मंशा के अनुरूप सूखते तालाबों को’ जीवनदान देने जल संसाधन विभाग का विशेष अभियान…

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वर्तमान में भीषण गर्मी के दौरान तालाबों में पानी की कमी से जूझ रहे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश में सूख रहे 4 हजार 755 तालाबों को अब तक विभाग द्वारा त्वरित पहल करते हुए नहरों के माध्यम से भरा जा चुका है और जरूरत के मुताबिक शेष तालाबों में भी पानी भरने का कार्य तेजी से जारी है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में भीषण गर्मी नेे पूरे देश को अपने चपेट में ले रखा है, इससे छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं है। इससे जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है और ग्रामीण क्षेत्र में पानी का प्रमुख स्त्रोत तालाब भी जलविहीन हो रहे हैं। ऐसे हालात में लोगों को राहत पहुंचाने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप जल संसाधन विभाग द्वारा राज्य में सूख रहे तालाबों में जल भराव का कार्य तेजी से चलाया जा रहा है।

जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इनमें सर्वाधिक रायपुर जिला के अंतर्गत निस्तारी हेतु प्रस्तावित कुल 783 तालाबों में से अब तक 663 तालाबों में जल भराव हेतु नहर से पानी दिया जा चुका है। इसी तरह बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के 586 तालाबों में से 504 तालाबों, धमतरी जिले के 508 तालाबों में से 329 तालाबों में पानी भरा जा चुका है। इस तरह प्रदेश के अमूमन सभी जिलों के तालाबों में पानी भराव का कार्य किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में लोगों के निस्तारी आदि की समस्या का तत्काल समाधान हो सके।

उल्लेखनीय है कि जल संसाधन विभाग द्वारा विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के तहत नहरों के माध्यम से पानी को तालाबों तक पहुंचाने के लिए यह योजना जल संरक्षण  और वाटर रिचार्ज की दिशा में एक दूरदर्शी और प्रभावी कदम साबित हो रही है। यह पहल केेवल सरकारी योजना नहीं बल्कि जल संरक्षण की सामूहिक सोच को मजबूत करती है। जब गांवों के तालाब भरते हैं और लोगों को उनका प्रत्यक्ष लाभ मिलता है, तब समाज में जल बचाने और जल-स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ती है।

जल संसाधन विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ में जल दोहन सहित अन्य कारणों से सूखते तालाबों के लिए नहरों से पानी का पहुंचाया जाना अत्यंत लाभकारी साबित हो रहा है। इसके माध्यम से तालाबों के भू-जल स्तर में वृद्धि अहम साबित होगी। नहरों से तालाबों में छोड़ा गया पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसता है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भू-जल का पुर्नभरण होता है। इससे कुएं, हैण्डपम्प लम्बे समय तक जलयुक्त बने रहते हैं। इस तरह तालाबों के भरने से जहां ग्रामीणों को गर्मी के मौसम में पानी के कमी से राहत मिल रही है, वहीं आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।

‘सुशासन तिहार’ अभियान: शिविर बना उम्मीद की नई किरण…

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कभी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रहे ‘सुशासन तिहार’ अभियान ने शासन को सीधे गाँवों तक पहुँचा दिया है। इसका असर अब ग्रामीणों की जिंदगी में साफ दिखाई देने लगा है।

सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखंड के नर्मदापुर गाँव में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में एक ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब ग्रामीण केदारनाथ यादव के चेहरे पर राहत और संतोष साफ झलक रहा था। वर्षों से आयुष्मान कार्ड बनवाने की सोच रहे केदारनाथ को यह उम्मीद नहीं थी कि उनके गाँव में लगे शिविर में कुछ ही मिनटों में उनका कार्ड बन जाएगा।

केदारनाथ बताते हैं कि पहले उन्हें लगता था कि आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए शहर जाना पड़ेगा, कई दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे और प्रक्रिया भी काफी कठिन होगी। जानकारी के अभाव में वे लंबे समय तक इससे वंचित रहे। लेकिन ‘सुशासन तिहार’ के शिविर ने उनकी यह चिंता दूर कर दी। शिविर में पहुँचते ही अधिकारियों ने उनकी प्रक्रिया पूरी कराई और कुछ ही देर में उनका आयुष्मान कार्ड तैयार हो गया। कार्ड हाथ में आते ही केदारनाथ के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। अब उन्हें विश्वास है कि बीमारी की स्थिति में आर्थिक तंगी उनके इलाज में बाधा नहीं बनेगी।

आयुष्मान कार्ड के जरिए अब केदारनाथ और उनका परिवार सूचीबद्ध अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज करा सकेगा। ग्रामीण परिवेश में रहने वाले परिवारों के लिए यह सुविधा किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है। केदारनाथ यादव ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि गाँव में शिविर लगाकर योजनाओं का लाभ देना बहुत सराहनीय पहल है। इससे गरीब और जरूरतमंद लोगों का काम आसान हुआ है।

दरअसल, राज्य सरकार का उद्देश्य यही है कि कोई भी पात्र हितग्राही सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे। ‘सुशासन तिहार’ अभियान के जरिए प्रशासन गाँव-गाँव पहुँचकर लोगों की समस्याओं का समाधान कर रहा है और योजनाओं का लाभ सीधे उनके घर तक पहुँचा रहा है। यही वजह है कि अब ग्रामीणों के मन में शासन के प्रति भरोसा और मजबूत होता दिखाई दे रहा है।

चंपारण्य धाम छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का केंद्र, भक्ति, इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम…

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महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली के रूप में विश्वविख्यात है राजिम के समीप स्थित चंपारण्य धाम’

चंपारण्य धाम छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का एक ऐसा पावन केंद्र है, जहां भक्ति, इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। धार्मिक नगरी राजिम के समीप स्थित यह धाम महान वैष्णव संत महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली के रूप में पूरे देश में प्रसिद्ध है। आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर यह स्थान वर्षभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

वैष्णव संप्रदाय और विशेष रूप से गुजरात के श्रद्धालुओं के लिए चंपारण्य का अत्यंत विशेष महत्व है। महाप्रभु वल्लभाचार्य पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक माने जाते हैं और गुजरात में उनके अनुयायियों की संख्या बहुत अधिक है। श्रीनाथजी और कृष्ण भक्ति से जुड़े वैष्णव समाज के लिए चंपारण्य तीर्थ के समान माना जाता है। यही कारण है कि गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और देश के अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। कई वैष्णव परिवार अपने जीवन में कम से कम एक बार चंपारण्य धाम की यात्रा को अत्यंत शुभ मानते हैं।

महाप्रभु वल्लभाचार्य के जन्म से जुड़ी कथा भी अत्यंत रोचक और आस्था से परिपूर्ण है। मान्यता के अनुसार उनके माता-पिता दक्षिण भारत से काशी की यात्रा पर निकले थे। उस समय देश में राजनीतिक अस्थिरता और आक्रमणों का दौर था। यात्रा के दौरान वे वर्तमान चंपारण्य क्षेत्र में पहुंचे, जहां घने जंगल और शांत वातावरण था। इसी स्थान पर उनकी माता को प्रसव पीड़ा हुई और एक शमी वृक्ष के नीचे बालक का जन्म हुआ।

कहा जाता है कि बालक जन्म के समय निश्चेष्ट प्रतीत हो रहा था, इसलिए माता-पिता ने उसे ईश्वर की इच्छा मानकर वहीं सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया। बाद में रात्रि में उन्हें स्वप्न में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन हुए और बताया गया कि बालक दिव्य स्वरूप है। जब वे वापस लौटे तो उन्होंने देखा कि बालक अग्नि मंडल से सुरक्षित घिरा हुआ है। यही बालक आगे चलकर महाप्रभु वल्लभाचार्य के रूप में प्रसिद्ध हुए और उन्होंने भक्ति आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।

महाप्रभु वल्लभाचार्य ने वैष्णव भक्ति परंपरा में “पुष्टिमार्ग” की स्थापना की। उनके उपदेशों में प्रेम, सेवा, समर्पण और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति का संदेश निहित है। उन्होंने समाज को सहज भक्ति और मानवता का मार्ग दिखाया। यही कारण है कि चंपारण्य धाम आज भी वैष्णव संप्रदाय के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है।

चंपारण्य नाम के पीछे भी एक ऐतिहासिक मान्यता जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में यह क्षेत्र चंपा के वृक्षों से आच्छादित था, जिसके कारण इसका नाम “चंपारण्य” पड़ा। आज भी यहां का हरित और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है।

चंपारण्य स्थित मंदिर अपनी प्राचीन वास्तुकला और धार्मिक महत्व के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र है। मंदिर परिसर में महाप्रभु वल्लभाचार्य की प्रतिमा स्थापित है। यहां भगवान श्रीकृष्ण, श्रीनाथजी और वैष्णव परंपरा से जुड़े अन्य पूजनीय स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर परिसर में महाप्रभु की बैठक, चरणचिह्न, साधना स्थल और यज्ञशाला श्रद्धालुओं के लिए विशेष श्रद्धा के केंद्र हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना, आरती, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। देशभर से आने वाले श्रद्धालु यहां दर्शन कर आत्मिक शांति और आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करते हैं।

महाप्रभु वल्लभाचार्य जयंती के अवसर पर चंपारण्य धाम में विशेष धार्मिक उत्सव आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और पूरा वातावरण भक्ति एवं श्रद्धा से सराबोर हो उठता है। भजन, संकीर्तन, कथा और धार्मिक प्रवचनों के साथ यहां छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पारंपरिक जीवन शैली की सुंदर झलक भी देखने को मिलती है।

चंपारण्य धाम केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक पहचान का भी जीवंत प्रतीक है। राजिम, सिरपुर और अन्य धार्मिक स्थलों के साथ यह स्थान प्रदेश के धार्मिक पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की सादगी, लोक संस्कृति, ग्रामीण जीवन और आतिथ्य का अनुभव भी करते हैं।

रायपुर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चंपारण्य सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। रायपुर, अभनपुर और राजिम से यहां नियमित बस एवं निजी वाहन सुविधा उपलब्ध है। निकटतम रेलवे स्टेशन रायपुर तथा निकटतम हवाई अड्डा स्वामी विवेकानंद विमानतल है। ऐतिहासिक महत्व से समृद्ध चंपारण्य धाम आज भी श्रद्धालुओं को सेवा, समर्पण और भक्ति का संदेश दे रहा है। यह पावन स्थल छत्तीसगढ़ की धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक चेतना का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बना हुआ है।

’32 लाख वोट से जीती बीजेपी, 35 लाख को तो SIR में बाहर कर दिया…

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कल्याण बनर्जी ने पिछली सुनवाई में जस्टिस जॉयमाल्या बागची की ओर से की गई टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि अगर जीत का अंतर लिस्ट से हटाए गए लोगों की संख्या से कम होगा तो कोर्ट दखल देगा.

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी

ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने सोमवार (11 मई, 2026) को सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि पश्चिम बंगाल की कई विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर उससे बहुत कम है, जितने लोगों की अपील अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित हैं. उन्होंने बंगाल में चल रहे स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह दावा किया है. टीएमसी ने कहा कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि अगर ऐसी स्थिति होती है तो वह उसमें दखल देगा.

टीएमसी की तरफ से सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने कहा कि 31 विधानसभा सीटों पर टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच जीत और हार का अंतर एसआईआर में वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों की संख्या से कम है और इन लोगों की अपील ट्रिब्यूनल के पास लंबित हैं. उन्होंने कहा कि कई जगह पर लिस्ट से हटाए गए लोगों की संख्या और हार का मार्जिन बराबर है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार कल्याण बनर्जी ने कोर्ट को बताया कि एक विधानसभा सीट पर टीएमसी उम्मीदवार सिर्फ 863 वोटों के अंतर से हार गया और यहां वोटर लिस्ट से हटाए गए 5432 लोगों की अपील अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित है. एसआईआर के दौरान लिस्ट से हटाए गए लोग, जिनकी अपील अपीलेट ट्रिब्यूनल के पास लंबित हैं, उन्हें इस विधानसभा चुनाव में वोट करने की इजाजत नहीं दी गई थी.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को कल्याण बनर्जी ने बताया कि टीएमसी और बीजेपी के बीच जीत और हार का अंतर करीब 32 लाख वोट हैं और 35 लाख लोग वोट नहीं कर सके क्योंकि उनकी अपील ट्रिब्यूनल में पेंडिंग हैं. कल्याण बनर्जी ने जस्टिस जॉयमाल्या बागची की उस टिप्पणी का जिक्र करते हुए हस्तक्षेप का अनुरोध किया है, जिसमें जज ने कहा था कि अगर जीत का अंतर लिस्ट से हटाए गए लोगों की संख्या से कम होगा तो कोर्ट दखल देगा. उन्होंने कहा कि इस मामले में न्यायिक जांच का जरूरत हो सकती है.

बेंच ने कल्याण बनर्जी को निर्देश दिया कि वह विस्तृत डिटेल के साथ अंतरिम आवेदन दाखिल करें. कोर्ट ने उनसे कहा, ‘आप चुनाव के नतीजों को लेकर जो भी कहना चाहते हैं… अगर आप कह रहे हैं कि वोटर लिस्ट से लोगों को हटाए जाने का असर रिजल्ट पर पड़ा है तो उसके लिए आपको अंतरिम आवेदन करने की जरूरत है.’ उनकी दलीलों पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि फिलहाल हम यह देखना चाहते हैं कि ट्रिब्यूनल में काम तेजी से हो.

सुनवाई के दौरान टीएमसी का पक्ष रखने के लिए सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी भी पेश हुईं. मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट में कहा कि अपीलेट ट्रिब्यूनल्स के पास लंबित अपीलों का निपटारा करने में तो चार साल लग जाएंगे,  तब तक कई और चुनाव हो जाएंगे.

चुनाव आयोग के वकील दामा शेषाद्री ने टीएमसी की दलीलों पर कहा कि किसी सीट के नतीजे को हाईकोर्ट में चुनाव याचिका के जरिए चुनौती दी जा सकती है. इसके बाद कल्याण बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट से यह आदेश पारित करने का अनुरोध किया कि एसआईआर में नाम हटाए जाने को चुनाव याचिका दाखिल करने का आधार माना जा सकता है. सीजेआई सूर्यकांत ने उनके अनुरोध पर कहा, ‘हम ऐसा आदेश कैसे दे सकते हैं?’

Railway Recruitment 2026: रेलवे में नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी… ट्रेड अप्रेंटिस के 1644 पदों पर भर्ती.. नोटिफिकेशन जारी…

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Railway Recruitment 2026: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की ओर से फाइटर, इलेक्ट्रीशियन, वेल्डर, मशीनिस्ट, सीओपीए, डीजल मैकेनिक, रेफ्रिजरेशन और एसी मैकेनिक, स्टेनोग्राफर हिंदी और अंग्रेजी समेत कई ट्रेड में भर्ती निकाली गई है.

रेलवे में नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने 2026-27 के लिए ट्रेड अप्रेंटिस के 1644 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. खास बात यह है कि इस भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों को न तो किसी लिखित परीक्षा से गुजरना होगा और न ही इंटरव्यू देना पड़ेगा. अभ्यर्थियों का चयन सीधे मेरिट लिस्ट के आधार पर किया जाएगा. यह भर्ती रायपुर डिवीजन और वैगन रिपेयर शॉप के अलग-अलग ट्रेडों के लिए निकाली गई है. आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 4 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. रेलवे की यह भर्ती आईटीआई पास युवाओं के लिए बड़ा मौका मानी जा रही है.

कई ट्रेडों में निकली भर्ती

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की ओर से फाइटर, इलेक्ट्रीशियन, वेल्डर, मशीनिस्ट, सीओपीए, डीजल मैकेनिक, रेफ्रिजरेशन और एसी मैकेनिक, स्टेनोग्राफर हिंदी और अंग्रेजी समेत कई ट्रेड में भर्ती निकाली गई है. रायपुर डिवीजन में कुल 1363 पदों पर भर्ती होगी, जबकि वैगन रिपेयर शॉप रायपुर के लिए 281 पद तय किए गए हैं. सबसे ज्यादा वैकेंसी फाइटर, इलेक्ट्रीशियन और वेल्डर ट्रेड में निकाली गई है.

क्या है योग्यता और कितनी रखी गई है आयु सीमा?

इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना जरूरी है. साथ ही दसवीं में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए. इसके अलावा उम्मीदवार के पास संबंधित ट्रेड में एनसीवीटी या एससीवीटी से मान्यता प्राप्त आईटीआई सर्टिफिकेट भी होना अनिवार्य है. वहीं भर्ती के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 15 वर्ष और अधिकतम 24 वर्ष तय की गई है. आयु की गणना 5 मई 2026 के आधार पर की जाएगी. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी. एससी और एसटी वर्ग को 5 साल जबकि ओबीसी वर्ग को 3 साल की छूट मिलेगी.

बिना परीक्षा ऐसे होगा चयन

इस भर्ती की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी तरह की लिखित परीक्षा या इंटरव्यू नहीं रखा गया है. उम्मीदवारों का चयन 10वीं और आईटीआई में मिले अंकों के आधार पर तैयार की गई मेरिट लिस्ट से होगा. मेरिट बनाते समय 10वीं और आईटीआई दोनों को बराबर वेटेज दिया जाएगा, यानी दोनों परीक्षाओं के औसत अंकों के आधार पर फाइनल मेरिट तैयार होगी. मेरिट में शामिल उम्मीदवारों को बाद में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा.

ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

  • उम्मीदवार Apprenticeship India Portal या SECR की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.
  • इसके लिए सबसे पहले पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें.
  • इसके बाद लॉगिन करके SECR Raipur सर्च करें.
  • अब अपने ट्रेड के अनुसार आवेदन लिंक पर क्लिक करें.
  • आवेदन फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरें.
  • अब दसवीं की मार्कशीट, आईटीआई सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, फोटो और सिग्नेचर अपलोड करें.
  • फॉर्म सबमिट करने से पहले सभी जानकारी अच्छी से चेक करें और इसके बाद फॉर्म सबमिट करके आवेदन फार्म का प्रिंट निकाल लें.

गर्मी शुरू होते ही घर में लाल चीटियों ने बना लिया है घर, इन तरीकों से रख सकते हैं दूर…

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सफेद सिरका लाल चीटियों को दूर करने के सबसे आसान उपायों में गिना जाता है. चीटियां चलते समय एक तरह की गंध छोड़ती है, जिससे बाकी चीटियां उसी रास्ते पर चलती है. सिरका इस गंध को खत्म कर देता है.

भारत में गर्मी का मौसम शुरू होते ही घरों में परेशानी तेजी से बढ़ने लगती है जो कि लाल चीटियों का आतंक है. खासकर किचन में चीटियों का दिखाई देना लोगों के लिए बड़ी समस्या बन जाती है. कभी चीनी के डिब्बे में, कभी ब्रेड पर तो, कभी खाने की प्लेट तक यह पहुंच जाती है. एक बार अगर चीटियों ने घर के अंदर आने का रास्ता बना लिया तो फिर उनकी लंबी लाइन लग जाती है और उन्हें हटाना मुश्किल हो जाता है. अक्सर लोग चीटियों से छुटकारा पाने के लिए बाजार में मिलने वाले केमिकल वाले स्प्रे या पाउडर का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन ये छोटे बच्चों, जानवरों और खाने पीने की चीजों के लिए खतरनाक हो सकता है.  ऐसे में कई लोग ऐसे घरेलू उपाय तलाशते हैं, जिससे बिना जहरीले केमिकल के चीटियों को दूर रखा जा सके. दरअसल घर में मौजूद कुछ आसान चीजें ही लाल चीटियों को भगाने में बहुत असरदार मानी जाती है. इनकी तेज गंध चीटियों के रास्ते को बिगाड़ देती है, जिससे वह दोबारा उस जगह पर नहीं आती.

सिरका का इस्तेमाल 

सफेद सिरका लाल चीटियों को दूर करने के सबसे आसान उपायों में गिना जाता है. चीटियां चलते समय एक तरह की गंध छोड़ती है, जिससे बाकी चीटियां उसी रास्ते पर चलती है. सिरका इस गंध को खत्म कर देता है और उनकी लाइन टूट जाती है. इसके लिए एक स्प्रे बोतल में आधा पानी और आधा सफेद सिरका मिलकर उन जगहों पर छिड़काव करें, जहां चीटियां ज्यादा दिखाई देती है. दिन में एक दो बार इस्तेमाल करने पर ही असर दिखने लगता है.

दालचीनी की तेज खुशबू 

दालचीनी की खुशबू इंसानों को भले पसंद आती हो, लेकिन चीटियां इससे दूर भागती है. इसकी तेज महक चीटियों को रास्ता बदलने पर मजबूर कर देती है. चीटियों के आने-जाने वाले रास्तों या बिल के आसपास दालचीनी पाउडर छिड़का जा सकता है. इसके अलावा दालचीनी के तेल में रुई भिगोकर भी उन जगहों पर रखा जा सकता है, जहां चीटियां ज्यादा आती है. ‌

नींबू और उसके छिलके 

नींबू में मौजूद खट्टापन और उसकी तेज गंध भी चीटियों को दूर करने में मदद करती है. नींबू का रस उस जगह पर डाला जा सकता है, जहां चीटियां दिखाई देती है. इसके अलावा नींबू के छिलकों को छोटे टुकड़ों में काटकर किचन के कोने में रखने से भी चीटियां दूर रहती है. कई लोग पोछा लगाते समय पानी में नींबू का रस मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं.

नमक और बेकिंग सोडा 

नमक भी चीटियों को रोकने का आसान तरीका माना जाता है. पानी में नमक मिलाकर गोल तैयार करें और उसे चीटियों के रास्ते पर डाल दें. सुखा नमक भी उनके आने जाने वाले रास्तों पर छिड़का जा सकता है. कुछ लोग नमक के साथ बेकिंग सोडा मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे चीटियां उस जगह से दूर रहने लगती है.

पुदीना भी है असरदार 

पुदीने की तेज खुशबू चीटियों को पसंद नहीं आती है. ऐसे में पुदीने की पत्तियां या उसका तेल उन जगहों पर रखा जा सकता है, जहां चीटियां ज्यादा दिखाई देती है. पुदीने के तेल की कुछ बूंदे पानी में मिलाकर स्प्रे करने से भी फायदा मिल सकता है.