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8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों-पेंशनर्स के लिए बड़ा अपडेट, 30 अप्रैल तक बढ़ी सुझाव देने की तारीख’

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भारत सरकार के 8वें वेतन आयोग ने साफ कर दिया है कि ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए मेमोरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख 30 अप्रैल तक खुली है. यह जानकारी 20 अप्रैल की प्रेस रिलीज में दी गई, जिससे लोगों का कन्फ्यूजन दूर हो गया और पूरी प्रक्रिया अब क्लियर है.

20 अप्रैल की जो डेडलाइन थी, वो सिर्फ उन यूनियनों और एसोसिएशनों के लिए थी जो शुरुआती मीटिंग्स में जल्दी बातचीत करना चाहते थे. बाकी सभी लोग जैसे सरकारी कर्मचारी, पेंशनर्स और अन्य जुड़े हुए लोग अभी भी अपने सुझाव और विचार दे सकते हैं. यानी अप्रैल के बाकी दिन इस प्रक्रिया में हिस्सा लेने का अच्छा मौका हैं.

8वां वेतन आयोग क्यों बनाया गया?

सरकार ने 8वां वेतन आयोग इसलिए बनाया है ताकि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी, भत्ते और पेंशन सिस्टम की समीक्षा की जा सके और जरूरत के हिसाब से उसमें बदलाव सुझाए जा सकें. सरकार हर 10 साल में ऐसा आयोग बनाती है, ताकि सैलरी और भत्ते महंगाई और बदलती जिम्मेदारियों के हिसाब से अपडेट रह सकें.

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की 28 अक्टूबर 2025 की एक प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के Terms of Reference को मंज़ूरी दे दी है. इसका मुख्य उद्देश्य निष्पक्षता बनाए रखना, मनोबल बढ़ाना और प्राइवेट सेक्टर में मिल रहे वेतन के साथ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना था.

अभी का लेटेस्ट अपडेट क्या है?

20 अप्रैल को जारी स्पष्टीकरण में दो अहम डेडलाइन बताई गईं. जो यूनियन और एसोसिएशन आयोग के साथ शुरुआती दौर में जल्दी बातचीत करना चाहते थे, उन्हें 20 अप्रैल तक अपना मेमोरेंडम जमा करना था, लेकिन यह समय सीमा अब खत्म हो चुकी है. हालांकि, वेबसाइट के जरिए मेमोरेंडम जमा करने की बड़ी और अहम डेडलाइन अभी भी 30 अप्रैल तक खुली हुई है. इसका मतलब है कि जो लोग पहले अपनी बात नहीं रख पाए थे, उनके पास अब भी मौका है कि वे अपने सुझाव, मांगें और विचार आयोग तक पहुंचा सकें.

कांग्रेस के साथ गठबंधन की जरूरत नहीं” आक्रामकता से चुनावी जंग में कूदने का ऐलान’

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महिला आरक्षण और परिसीमन के मसले का बंगाल चुनाव पर भी असर पड़ा है. टीएमसी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने को तैयार कांग्रेस नेतृत्व के तेवर नरम पड़ गए हैं. बंगाल में टीएमसी ने ऐलान किया कि उसे चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन की जरूरत नहीं है, जिसके बाद कांग्रेस ने इंडिया ब्लॉक की परवाह किए बगैर आक्रामकता से चुनावी जंग में कूदने का ऐलान किया है.

मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तरी दिनाजपुर, रायगंज में 14 अप्रैल को राहुल की रैलियां हुई, जहां राहुल ने बीजेपी के साथ ही ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा. कांग्रेस ने मुस्लिम बहुल इलाकों में राहुल-प्रियंका की और दलित-आदिवासी इलाकों में मल्लिकार्जुन खरगे की रैलियां तय कीं. वहीं राजीव गांधी और सुभाष घीसिंग के संबंधों को भुनाने की चाहत में दार्जिलिंग में भी गांधी परिवार के प्रचार का प्लान बनाया.

इसके साथ ही बंगाल की बदहाली के लिए टीएमसी और बीजेपी को बराबर का जिम्मेदार ठहराने की रणनीति बनाई. पार्टी ने तय किया कि वो अपना चुनाव प्रचार, उम्मीदवार चयन और रणनीति इस हिसाब से बनाएगी कि उसकी सीटें बढ़ें. भले ही उसका नुकसान इंडिया ब्लॉक की दिल्ली में सहयोगी टीएमसी को हो. लेकिन महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर राहुल के टोंकने पर टीएमसी ने 5 की बजाय अपने 21 सांसद भेजे और संविधान संशोधन के विरोध में वोट कराया तो दोनों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने लगी.

बिल गिरने के बाद सोनिया ने फोन करके ममता बनर्जी को, तो राहुल ने अभिषेक बनर्जी को धन्यवाद दिया. इसी फेहरिस्त में 14 अप्रैल के बाद राहुल गांधी बंगाल प्रचार करने नहीं गए. प्रियंका गांधी का पूरा प्रचार का कार्यक्रम रद्द हो गया. जिन खरगे ने जोर-शोर से बंगाल कांग्रेस का घोषणापत्र जारी किया था, वो बाद में एक दिन के लिए प्रचार में गए भी तो उनके निशाने पर सिर्फ बीजेपी रही.

दिलचस्प ये है कि आज पहले चरण के चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है, लेकिन खरगे-राहुल-प्रियंका सब बंगाल से दूरी बनाए हैं जबकि, खरगे का आज तमिलनाडु में प्रेस कॉन्फ्रेंस और एक रैली का कार्यक्रम है. साथ ही राहुल गांधी के दफ्तर के सूत्र अब सफाई दे रहे हैं कि, वो कभी सेकुलर ताकतों को कमजोर नहीं करना चाहते. उनकी सीधी लड़ाई बीजेपी से है लेकिन अब बंगाल में कांग्रेस चुनाव लड़ेगी तो राहुल भाषणों में अपने उम्मीदवारो की जीत के लिए विरोधियों के खिलाफ तो बोलेंगे ही. वैसे राहुल ने 14 अप्रैल को 75 फीसदी बीजेपी के खिलाफ बोला और 25 फीसदी ममता और टीएमसी सरकार के खिलाफ, लेकिन मीडिया ने ममता के खिलाफ जो बोला उसे प्रमुखता से दिखाया.

पार्टी नेतृत्व के इस बदले रुख से 5 बार के सांसद, 3 बार के विधायक, लोकसभा में पूर्व नेता विपक्ष और ममता के धुर विरोधी अधीर रंजन चौधरी खासे असहज हैं. ममता ने टारगेट करके उनको पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान से लोकसभा चुनाव हरवा दिया था. कांग्रेस के अकेले लड़ने से उत्साहित होकर वो बरहामपुर से विधानसभा की जंग में कूदे और बीजेपी-टीएमसी की मिलीभगत-चुनावी नूराकुश्ती को मुख्य मुद्दा बनाया लेकिन अब बदले सियासी मंजर के सवाल पर वो टीवी 9 से बातचीत में उखड़ गए.

UPI से PF Withdrawal के लिए कितना और इंतजार? EPFO का नया IT सिस्टम तैयार, क्या है टाइमलाइन’

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EPFO UPI PF Withdrawal: अगर आप भी EPFO से UPI के जरिए PF निकालने का इंतजार कर रहे हैं, तो अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। पहले मार्च में लॉन्च की उम्मीद थी, लेकिन अब यह सुविधा कम से कम एक महीने और लेट हो गई है। इसके पीछे वजह है EPFO का नया और बड़ा IT सिस्टम अपग्रेड।

EPFO इस समय अपने पूरे IT सिस्टम को अपग्रेड कर रहा है। पुराने अलग-अलग सिस्टम्स को हटाकर एक नया सेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है, जिसे CITES 2.0 (Centralised IT Enabled System) कहा जा रहा है। यह सिस्टम पूरी तरह तैयार होने के बाद ही UPI से PF निकालने की सुविधा शुरू होगी।

CITES 2.0 में क्या खास है?

नया सिस्टम 6 बड़े मॉड्यूल्स में काम करेगा:

  • मेंबर अकाउंट
  • एम्प्लॉयर फाइलिंग
  • क्लेम प्रोसेस
  • पेंशन
  • फाइनेंस

कंप्लायंस और शिकायत निवारण

अभी तक इनमें से 5 मॉड्यूल्स की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन आखिरी मॉड्यूल (कंप्लायंस और ग्रिवांस) की टेस्टिंग अभी जारी है।

कब तक मिलेगा UPI से PF निकालने का ऑप्शन?

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर सब कुछ प्लान के हिसाब से चलता है तो मई के अंत (May-end) तक यह सुविधा शुरू हो सकती है। यानी अभी लगभग एक महीने का और इंतजार तय है।

2 दिन के लिए बंद रहेंगी सेवाएं

इस नए सिस्टम को लागू करने के दौरान EPFO को पूरे डेटा और सॉफ्टवेयर को माइग्रेट करना होगा। इस वजह से करीब 2 दिन तक कोई भी ट्रांजैक्शन नहीं हो पाएगा- यानी सिस्टम पूरी तरह बंद रहेगा।

नया मोबाइल ऐप भी आएगा

अभी EPFO की सेवाएं UMANG App पर मिलती हैं, लेकिन नए सिस्टम के साथ एक डेडिकेटेड EPFO ऐप* भी लॉन्च किया जाएगा।

इस ऐप की खास बातें:

  • सीधे PF अकाउंट से लिंक होगा
  • UPI से कनेक्ट रहेगा
  • पैसा सीधे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर होगा

कितना पैसा निकाल पाएंगे?

नई सुविधा के तहत यूजर्स एक बार में अपने PF का 75% तक पैसा निकाल सकेंगे, वो भी तेज और आसान प्रोसेस के साथ। EPFO का यह IT अपग्रेड कोई छोटा बदलाव नहीं है- यह पूरा सिस्टम बदलने जैसा है। थोड़ी देरी जरूर है, लेकिन इसके बाद PF निकालना उतना ही आसान हो सकता है जितना UPI से पेमेंट करना।

Chardham Yatra 2026: चारधाम यात्रा हरिद्वार से ही क्यों होती है शुरू? जानें सभी धामों की क्या हैं कथाएं”

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Chardham Yatra Significance: चारधाम यात्रा 2026 का शंखनाद हो चुका है. 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. परंपरा के अनुसार, 22 अप्रैल को बाबा केदारनाथ और 23 अप्रैल को भगवान बद्रीविशाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस पावन यात्रा की शुरुआत हमेशा हरिद्वार से ही क्यों होती है? और इन चारों धामों का धार्मिक महत्व क्या है? आइए, विस्तार से जानते हैं.

हरिद्वार से ही क्यों शुरू होती है चारधाम यात्रा?

हिंदू धर्म में हरिद्वार को देवताओं का द्वार कहा जाता है. मान्यता है कि यहीं से देवभूमि उत्तराखंड के पवित्र तीर्थों की यात्रा का प्रवेश द्वार शुरू होता है. यह शहर गंगा नदी के किनारे बसा है और यहां स्नान करने से व्यक्ति अपने पापों से मुक्त हो जाता है. इसलिए श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर निकलने से पहले हरिद्वार में गंगा स्नान कर आत्मशुद्धि करते हैं. धार्मिक मान्यता यह भी है कि बिना हरिद्वार से यात्रा शुरू किए चारधाम यात्रा अधूरी मानी जाती है. यही कारण है कि सदियों से यह परंपरा चली आ रही है.

गंगोत्री धाम की कथा

गंगोत्री धाम को मां गंगा का उद्गम स्थल माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं. माना जाता है कि गंगा का वास्तविक उद्गम गौमुख ग्लेशियर से होता है, लेकिन गंगोत्री धाम में ही मां गंगा की पूजा की जाती है.

यमुनोत्री धाम की कथा

यमुनोत्री धाम को मां यमुना का उद्गम स्थल माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमुना सूर्य देव और संज्ञा की पुत्री हैं और यमराज की बहन हैं. कहा जाता है कि यमुनोत्री में स्नान करने से मृत्यु का भय समाप्त होता है और व्यक्ति को अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है.

केदारनाथ धाम की कथा

केदारनाथ धाम भगवान भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए शिव की शरण में गए. भगवान शिव उनसे नाराज होकर बैल का रूप धारण कर यहां छिप गए. बाद में जब पांडवों ने उन्हें पहचान लिया, तो शिव जी ने उन्हें दर्शन दिए और यहीं ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए.

बद्रीनाथ धाम की कथा

बद्रीनाथ धाम भगवान भगवान विष्णु को समर्पित है. मान्यता है कि भगवान विष्णु यहां तपस्या कर रहे थे, तब माता लक्ष्मी ने उन्हें ठंड से बचाने के लिए बद्री (जंगली बेर) के वृक्ष का रूप धारण कर लिया. इसी कारण इस स्थान का नाम बद्रीनाथ पड़ा. यह भी माना जाता है कि यहां दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

क्यों खास मानी जाती है चारधाम यात्रा?

चारधाम यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग मानी जाती है. गंगोत्री (जल) यमुनोत्री (शक्ति) केदारनाथ (शिव) और बद्रीनाथ (विष्णु) ये चारों धाम जीवन के चार महत्वपूर्ण तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं. हर साल लाखों श्रद्धालु इस कठिन लेकिन पवित्र यात्रा पर निकलते हैं और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं.

CG” जन आक्रोश रैली में शामिल हुए सीएम साय; विपक्ष को दे दी ये चेतावनी’ नारी शक्ति के सम्मान पर चोट बर्दाश्त नहीं’

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज रायपुर में आयोजित जन आक्रोश रैली को संबोधित किया। उन्होंने नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को पारित नहीं होने देने पर कांग्रेस एवं INDI गठबंधन पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह देश की 70 करोड़ माताओं-बहनों के अधिकार, सम्मान और भविष्य के साथ किया गया खुला विश्वासघात है।

उन्होंने कहा कि इस गंभीर विषय को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार विधानसभा का एकदिवसीय विशेष सत्र आयोजित कर निंदा प्रस्ताव लाएगी, ताकि इस अन्याय के खिलाफ प्रदेश की आवाज़ लोकतांत्रिक तरीके से बुलंद की जा सके।

मातृशक्ति को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता मिली

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में देश का नेतृत्व संभाला है, तब से नारी सशक्तिकरण को नई दिशा और नई ऊर्जा मिली है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से लेकर सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से धुएं से मुक्ति दिलाने का कार्य, जन-धन योजना के जरिए आर्थिक समावेशन, तथा करोड़ों शौचालयों का निर्माण – इन सभी प्रयासों ने मातृशक्ति को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मातृशक्ति का विराजमान होना भी इसी परिवर्तन का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का ऐतिहासिक संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने लिया और इसके लिए 16, 17 एवं 18 अप्रैल को विशेष संसद सत्र बुलाया गया, जो इस विषय के प्रति सरकार की गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक पहल नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में सहभागी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था।

सीएम साय ने विपक्षी दलों पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण रूप से कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस सहित INDI गठबंधन के दलों ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते इस ऐतिहासिक अवसर को विफल कर दिया। यह कदम देश की करोड़ों माताओं-बहनों की आशाओं और आकांक्षाओं को ठेस पहुंचाने वाला है और देश की नारीशक्ति इसे कभी माफ नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की मातृशक्ति से क्षमा भी मांगी है और उन्हें आश्वस्त किया है कि महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने का संघर्ष लगातार जारी रहेगा, जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिल जाता।

हजारों महिलाएं जन आक्रोश रैली में हुई शामिल

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ में भी व्यापक जनआक्रोश देखने को मिला है। प्रदेशभर से हजारों की संख्या में माताएं-बहनें रायपुर में आयोजित जन आक्रोश महिला पदयात्रा में शामिल हुईं और अपने अधिकारों के समर्थन में एकजुट होकर आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि स्थानीय पर्व-त्योहारों के बावजूद महिलाओं का इस प्रकार बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरना यह दर्शाता है कि नारी शक्ति अब अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक, सजग और संगठित हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि जल्द ही एक दिवसीय विधानसभा सत्र बुलाकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित नहीं होने देने के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा और उसे पारित कर विपक्ष के इस रवैये के खिलाफ एक सशक्त और स्पष्ट संदेश दिया जाएगा।

140 करोड़ देशवासियों की सेवा की जा रही

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश की जनता का विश्वास भारतीय जनता पार्टी, एनडीए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर लगातार मजबूत हुआ है। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मूल मंत्र के साथ 140 करोड़ देशवासियों की सेवा की जा रही है और इसका सकारात्मक प्रभाव आने वाले चुनावों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों की यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है, यह देश की आधी आबादी के आत्मसम्मान से जुड़ा विषय है और छत्तीसगढ़ सरकार इस संघर्ष में पूरी मजबूती के साथ मातृशक्ति के साथ खड़ी है।

CG” भाजपा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर कांग्रेस के खिलाफ पैदल मार्च निकाला’

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छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को रायपुर में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को पारित करने में रुकावट डालने का आरोप लगाया और इस कदम के विरोध में पैदल मार्च निकाला।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पार्टी गांधी परिवार से बाहर किसी महिला को लोकसभा या विधानसभा में नेतृत्व करते हुए बर्दाश्त नहीं कर सकती।

पार्टी के पदाधिकारियों के अनुसार, राज्यभर से सैकड़ों महिलाओं ने ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ में हिस्सा लिया।

इस पदयात्रा ने इंडोर स्टेडियम से नेताजी सुभाष स्टेडियम तक तीन किलोमीटर की दूरी तय की।

इस दौरान मुख्यमंत्री साय, प्रदेश इकाई के अध्यक्ष किरण देव और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का विरोध कर कांग्रेस और विपक्षी दलों ने यह साबित किया है कि वे महिला विरोधी हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल नहीं चाहते कि गांधी परिवार के अलावा कोई महिला लोकसभा और विधानसभा में नेतृत्व करें।

किरण देव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए यह अधिनियम पेश किया लेकिन कांग्रेस ने इसका विरोध कर इसे पारित नहीं होने दिया।

उन्होंने कांग्रेस पर मातृशक्ति को केवल ‘वोट बैंक’ समझने का आरोप लगाया। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल ने भाजपा पर जवाबी आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा अपनी नाकामियों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए महिला आरक्षण के नाम पर राजनीति कर रही है।

उन्होंने सवाल किया कि भाजपा महिला आरक्षण विधेयत को लागू क्यों नहीं कर रही है जबकि वह कानून बन चुका है।

CG” स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट, लोगों को दी ये चेतावनी’

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”गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी तेजी से हो सकती है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के साथ-साथ ओआरएस, नींबू पानी, छाछ, लस्सी एवं अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी गई है।”

”हल्के रंग के ढीले एवं सूती वस्त्र पहनना भी लाभदायक बताया गया है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा पूर्व से बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता बताई गई है।”

”नोडल अधिकारी, जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य ने जानकारी दी कि लू लगना एक चिकित्सकीय आपात स्थिति है, जो शरीर के अत्यधिक गर्म होने एवं तापमान नियंत्रण प्रणाली के प्रभावित होने के कारण होती है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार (40 डिग्री सेल्सियस या अधिक), लाल व गर्म त्वचा, पसीना कम आना, सिरदर्द, चक्कर, घबराहट, कमजोरी, उल्टी तथा अचेतावस्था शामिल हो सकते हैं।”

”जिले में लगातार बढ़ते तापमान एवं आगामी दिनों में हीट वेव (लू) की संभावित स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग, जिला सरगुजा द्वारा आम नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।”

”अप्रैल एवं मई माह के दौरान तापमान में वृद्धि के साथ लू का प्रभाव बढ़ने की संभावना जताई गई है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला सरगुजा द्वारा जारी अपील में नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे अनावश्यक रूप से तेज धूप में बाहर निकलने से बचें।”

”विशेष रूप से दोपहर 12ः00 बजे से 3ः00 बजे के बीच अत्यधिक आवश्यकता न होने पर घर से बाहर न निकलें। यदि बाहर जाना आवश्यक हो, तो सिर को कपड़े, टोपी या छाते से ढककर ही निकलें।”

”उन्होंने बताया कि इन दिनों “हीट हेडेक” यानी गर्मी से संबंधित सिरदर्द की समस्या भी बढ़ सकती है, जो डिहाइड्रेशन, अधिक धूप, इलेक्ट्रोलाइट की कमी, नींद की कमी और अधिक कैफीन सेवन के कारण होती है।”

”स्वास्थ्य विभाग ने सलाह दी है कि लोग खाली पेट न रहें, समय पर भोजन करें, पर्याप्त नींद लें तथा कैफीनयुक्त पेयों का सेवन सीमित रखें। मजदूर, किसान, यात्री, ट्रैफिक कर्मी एवं फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।”

”यदि किसी व्यक्ति में लू के लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत छायादार स्थान पर लाकर ठंडा करने का प्रयास करें, ठंडे पानी की पट्टी रखें तथा होश में होने पर पानी या ओआरएस दें। गंभीर स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।”

”स्वास्थ्य विभाग ने यह भी बताया कि जिले के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में लू से प्रभावित मरीजों के उपचार हेतु आवश्यक दवाएं एवं सुविधाएं उपलब्ध हैं। अंत में विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे स्वयं सतर्क रहें तथा अपने परिवार और आसपास के कमजोर वर्गों का विशेष ध्यान रखें। जागरूकता एवं सावधानी ही गर्मी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।”

CG” आम चुनाव और उपचुनाव 2026: अवैध सोशल मीडिया सामग्री पर ईसीआई की कार्रवाई’

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भारत निर्वाचन आयोग ने दोहराया है कि सभी हितधारक सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, आईटी नियम, 2021 और आदर्श आचार संहिता सहित मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुपालन में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिम्मेदार और नैतिक उपयोग सुनिश्चित करेंगे।आयोग ने निर्देश दिया है कि किसी भी भ्रामक या अवैध एआई-जनित या हेरफेर की गई सामग्री पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के संज्ञान में लाए जाने के 3 घंटे के भीतर कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और अभियान प्रतिनिधियों के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि प्रचार के लिए उपयोग की जाने वाली किसी भी सिंथेटिक रूप से निर्मित या एआई-परिवर्तित सामग्री को स्पष्ट रूप से “एआई-जनित”, “डिजिटल रूप से संवर्धित” या “सिंथेटिक सामग्री”  के रूप में लेबल किया जाए, साथ ही पारदर्शिता और मतदाता विश्वास बनाए रखने के लिए मूल इकाई का खुलासा भी किया जाए।

असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के चल रहे चुनावों में, ऐसी सोशल मीडिया सामग्री जैसे कि पोस्ट जो आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन हैं, कानून और व्यवस्था को बाधित करते हैं या जिनमें बाधित करने की क्षमता है, और मतदान प्रक्रिया या मशीनरी के खिलाफ झूठी कहानियों की निगरानी की जा रही है और आईटी अधिनियम के तहत अधिसूचित संबंधित राज्य आईटी नोडल अधिकारियों द्वारा उन पर कार्रवाई की जा रही है। तदनुसार 15 मार्च 2026 को चुनावों की घोषणा के बाद से चल रहे चुनावों में सामग्री को हटाने, एफआईआर , स्पष्टीकरण और खंडन सहित 11 हजार से अधिक ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट/यूआरएल  की पहचान की गई है और उन पर कार्रवाई की गई है।

आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत प्रावधानों को भी दोहराया, जो मतदान की समाप्ति से पहले 48 घंटे की मौन अवधि के दौरान मतदान क्षेत्रों में किसी भी चुनावी मामले के प्रदर्शन को प्रतिबंधित करते हैं। टेलीविजन, रेडियो, प्रिंट और सोशल मीडिया सहित मीडिया प्लेटफॉर्मों को इन प्रावधानों का सख्ती से पालन करना आवश्यक है।इसके अतिरिक्त, नागरिक/राजनीतिक दल/उम्मीदवार ईसीआई-नेट पर ‘सी-विजिल’ मॉड्यूल का उपयोग करके आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट कर सकते हैं। 15 मार्च से 19 अप्रैल तक, इन चुनावों में सी-विजिल ऐप का उपयोग करके 3,23,099 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 3,10,393 शिकायतें यानी 96.01% शिकायतों का समाधान 100 मिनट की निर्धारित समय अवधि के भीतर किया गया।

CG” शहरों में पेयजल आपूर्ति, अवैध प्लॉटिंग और अवैध निर्माण पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव सख्त’

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अगले एक वर्ष में पेयजल समस्याओं के स्थायी समाधान के निर्देश, अवैध प्लॉटिंग और अवैध निर्माण पर कड़ाई बरतने को कहा’

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने दिनभर चली बैठक में नगर निगमों और नगरपालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की’

31 मई तक सभी नगर निगमों में बड़े नालानालियों और ड्रेनेज की सफाई के निर्देश, बरसात में जल भराव रोकने जरूरी कदम उठाने कहा’

धमतरी में पेयजल योजना में लेटलतीफी पर कार्यपालन अभियंता को निलंबित करने कहा, ठेकेदार पर लगेगी पेनाल्टी’

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने आज प्रदेश के सभी नगर निगमों और नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर के सिविल लाइन स्थित सर्किट हाउस में दिनभर चली बैठक में शहरों में पेयजल आपूर्ति की समस्याओं, अवैध प्लॉटिंग और अवैध निर्माण पर नाराजगी जाहिर करते हुए इनके निराकरण के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने धमतरी में पेयजल योजना के काम में लेटलतीफी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कार्यपालन अभियंता को निलंबित करने तथा ठेकेदार पर पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने दिनभर चली बैठक में नगर निगमों और नगरपालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की

नगर निगमों और नगर पालिकाओं की आज दो अलग-अलग हुई समीक्षा बैठकों में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., संचालक श्री आर. एक्का और राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ श्री शशांक पाण्डेय सहित सभी नगर निगमों के आयुक्त, नगर पालिकाओं के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, वरिष्ठ अभियंता एवं नगरीय प्रशासन विभाग के पांचों संभागीय क्षेत्रीय कार्यालयों के संयुक्त संचालक भी बैठक में मौजूद थे।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने समीक्षा बैठक में नगर निगमों और नगर पालिकाओं के अधिकारियों को शहरों की जरूरत के मुताबिक कार्ययोजना बनाकर काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने निकायों की व्यवस्था और छवि सुधारने सक्रियता व गंभीरता से काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि नगर निगम ऐसा काम करें जिससे राज्य की नगर पालिकाएं प्रेरणा ले सकें और नगर पालिका इस तरह से काम करें जिनसे नगर पंचायतें प्रेरित हो सकें। उन्होंने निकायों के अभियंताओं से कहा कि काम की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें नहीं आना चाहिए। सभी निर्माण कार्य समय-सीमा में पूर्ण हों, इस पर विशेष ध्यान दें।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने पेयजल आपूर्ति की लगातार आ रही शिकायतों पर नाखुशी और नाराजगी जाहिर करते हुए अगले वर्ष तक सभी नगर निगमों में इसके स्थाई समाधान के  निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहरों में केवल बजट खर्च करने के उद्देश्य से काम न करें, बल्कि समस्याओं का स्थाई समाधान करें। पेयजल समस्या की शिकायतों पर जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगामी 31 मई तक सभी नगर निगमों में बड़े नाला-नालियों और ड्रेनेज की सफाई के काम पूर्ण करने के साथ ही बरसात में जल भराव रोकने जरूरी उपाय करने को कहा। जून के पहले सप्ताह में राज्य स्तरीय टीम नगर निगमों में इसका भौतिक निरीक्षण करेंगी। कार्य संतोषजनक न मिलने पर स्वास्थ्य अधिकारी और इंजीनियर पर कार्रवाई की जाएगी।

श्री साव ने बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत अपूर्ण आवासों को सितम्बर-2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने अप्रारंभ आवासों के निर्माण एक माह के भीतर हर हाल में शुरू करने के साथ ही मार्च-2026 में स्वीकृत सभी आवासों को वर्षा ऋतु के पहले प्रारंभ करने को कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत निर्धारित 18 माह की अवधि में निर्माण पूर्ण करने वाले हितग्राहियों के प्रस्ताव अविलंब विभाग को भेजने के निर्देश दिए, ताकि ऐसे हितग्राहियों को मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना की 32 हजार 850 रुपए की अतिरिक्त राशि प्रदान की जा सके।

श्री साव ने पीएम स्वनिधि योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा स्ट्रीट वेंडर्स को दिलाने बैंकों से बात कर ऋण स्वीकृत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने शहरों में भूजल को रिचार्ज करने के लिए डीएमएफ, सीएसआर और जन सहयोग से अधिक से अधिक संख्या में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य कराने को कहा। श्री साव ने शहरों को सुंदर, स्वच्छ और सुविधापूर्ण बनाने के मिशन में वर्तमान समय की जरूरतों और तकनीकों के साथ नई कार्य पद्धति अपनाने के निर्देश निकायों के अधिकारियों को दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के उप सचिव श्री भागवत जायसवाल, अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य और मुख्य अभियंता श्री राजेश शर्मा भी समीक्षा बैठक में उपस्थित थे।

इन कार्यों और योजनाओं की हुई समीक्षा

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज दो सत्रों में मैराथन बैठकों में नगरीय निकायों में राजस्व वसूली, विद्युत देयकों के भुगतान, वेतन भुगतान, अधोसंरचना विकास व 15वें वित्त आयोग के कार्यों, नालंदा परिसरों, नगरोत्थान योजना, जलप्रदाय योजनाओं, आपदा प्रबंधन, गोधाम योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम स्वनिधि योजना, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, आई-गॉट (I-got) कर्मयोगी तथा रेन वाटर हार्वेस्टिंग के कार्यों की समीक्षा की। वे 21 अप्रैल को दिनभर नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा करेंगे।

CG” मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आईओसीएल के मुख्य महाप्रबंधक ने की सौजन्य मुलाकात’

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में इंडियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) श्री अजय कुमार श्रीवास्तव ने सौजन्य मुलाकात की। मुलाकात के दौरान राज्य में पेट्रोलियम क्षेत्र के विस्तार, ईंधन आपूर्ति की सुदृढ़ व्यवस्था तथा जनसुविधाओं को और अधिक सुलभ बनाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर आईओसीएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।