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“हृदय रोग: एक गंभीर समस्या” भौगोलिक संदर्भ भाषा के संसाधन”

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भारत में हृदय रोग मृत्यु का प्रमुख कारण है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हृदयाघात से बचने की संभावना केवल लक्षणों को पहचानने पर निर्भर नहीं करती।

Tier 2 और Tier 3 शहरों में विशेषज्ञ देखभाल की कमी लाखों लोगों को जोखिम में डाल रही है। इस लेख में, हम हृदय रोग की जागरूकता, उपचार में देरी, और स्वास्थ्य देखभाल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की आवश्यकता पर चर्चा करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बुनियादी ढाँचे और सशक्त चिकित्सकों के माध्यम से इस स्वास्थ्य देखभाल विभाजन को पाटना हर साल हजारों जीवन बचा सकता है।

हृदय रोग: एक गंभीर समस्या

भारत में हृदय रोग मृत्यु का प्रमुख कारण है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हृदयाघात से बचने की संभावना केवल लक्षणों को पहचानने पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप कहाँ रहते हैं।

देशभर में हृदय संबंधी बीमारियों के प्रति जागरूकता में सुधार हुआ है, फिर भी Tier 2 और Tier 3 शहरों में विशेषज्ञ देखभाल की पहुँच में कमी लाखों लोगों को जोखिम में डाल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की हृदय देखभाल की चुनौती अब केवल लोगों को शिक्षित करने की नहीं है, बल्कि समय पर निदान और उपचार की पहुँच सुनिश्चित करने की भी है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों, डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफार्मों और आयुष्मान भारत जैसे पहलों ने हृदयाघात के लक्षणों, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद की है।

आज, अधिक लोग चेतावनी संकेतों जैसे छाती में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, और हाथ या जबड़े में दर्द को पहचानते हैं। हालांकि, केवल जागरूकता से जीवन नहीं बच सकता यदि विशेषज्ञ देखभाल घंटों दूर हो।

“छोटे शहरों में लोग आज हृदय संबंधी घटनाओं के चेतावनी संकेतों, रक्तचाप प्रबंधन के महत्व, और मधुमेह और हृदय रोग के बीच के संबंध को समझते हैं।

फिर भी, यह मूल समस्या का समाधान नहीं करता – एक मरीज जो जानता है कि उसे एक हृदय रोग विशेषज्ञ की आवश्यकता है लेकिन वह एक चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक समय में नहीं पहुँच सकता, वह उस मरीज से बेहतर नहीं है जो नहीं जानता,”

भौगोलिक संदर्भ भाषा के संसाधन

कई मरीजों के लिए, महानगरों के बाहर रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी बाधा एक हृदय रोग विशेषज्ञ या उन्नत हृदय देखभाल केंद्र तक पहुँचने में है।

भारत में हृदय देखभाल की कमी हृदय रोग भारत में सभी मौतों का 28 प्रतिशत है

हृदय रोग भारत में सभी मौतों का लगभग 28 प्रतिशत है, और यह बोझ छोटे शहरों और ग्रामीण समुदायों में तेजी से बढ़ रहा है। फिर भी, स्वास्थ्य संसाधन असमान रूप से वितरित हैं।

ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञों की लगभग 80 प्रतिशत कमी है, जबकि भारत में लगभग 300,000 लोगों पर केवल एक हृदय रोग विशेषज्ञ है। यह अनुपात बड़े शहरी केंद्रों के बाहर और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

कई जिला अस्पतालों और छोटे स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक हृदय सेवाओं जैसे ईसीजी निगरानी, इकोकार्डियोग्राफी, होल्टर निगरानी, हृदय इमेजिंग और आपातकालीन हृदय हस्तक्षेप की सुविधाएँ नहीं हैं।

इसके परिणामस्वरूप, मरीज अक्सर मेट्रो शहरों में तृतीयक अस्पतालों में भेजे जाते हैं, जिससे जीवन-धातक आपात स्थितियों के दौरान मूल्यवान समय बर्बाद होता है।

हृदयाघात के दौरान हर मिनट महत्वपूर्ण है हर मिनट महत्वपूर्ण है

डॉक्टर अक्सर कहते हैं “समय मांसपेशी है।” हृदयाघात के दौरान, हर मिनट बिना उपचार के हृदय की मांसपेशी को अपरिवर्तनीय क्षति पहुँचाता है।

देर से निदान और उपचार से मृत्यु दर में वृद्धि, गंभीर हृदय मांसपेशी क्षति, हृदय विफलता, खतरनाक अतालता, स्थायी विकलांगता, और जीवन की गुणवत्ता में कमी हो सकती है।

छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए, लंबी यात्रा के समय, परिवहन की चुनौतियाँ, और वित्तीय बाधाएँ अक्सर जीवन-रक्षक उपचार में देरी करती हैं। “पहुँच भी बीमारी के ज्ञान द्वारा निर्धारित होती है: यदि आप जानते हैं कि आपको कौन सी बीमारी है, तो आप जानते हैं कि आपको किस प्रकार की देखभाल की आवश्यकता है।

जबकि निदान हर स्तर पर पहुँच को आसान बनाते हैं, बार-बार यात्रा, रेफरल, और देरी मरीजों को सिस्टम से बाहर जाने का कारण बन सकती हैं,”

पहली देखभाल की बुनियाद को मजबूत करना

Tier 2 और Tier 3 भारत में, सामान्य चिकित्सक (GPs) आमतौर पर पहले डॉक्टर होते हैं जिनसे मरीज हृदय के लक्षणों का अनुभव करते समय परामर्श करते हैं।

IoT-सक्षम दूरस्थ ईसीजी निगरानी प्रणाली अब स्थानीय क्लीनिकों को वास्तविक समय में हृदय रिकॉर्डिंग को सीधे हृदय रोग विशेषज्ञों को भेजने की अनुमति देती हैं।

इससे GP को रेफरल और आपातकालीन देखभाल के संबंध में तेजी से, साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में मदद मिलती है, बिना मरीजों को लंबी दूरी तय करने की प्रतीक्षा किए।

ये प्रौद्योगिकियाँ मौजूदा स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को प्रतिस्थापित करने के बजाय उन्हें मजबूत करती हैं।

अस्पताल से छुट्टी के बाद हृदय देखभाल समाप्त नहीं होती

पहुँच की कमी आपातकालीन उपचार से कहीं आगे बढ़ती है। कई मरीज जो हृदयाघात से बच जाते हैं, उन शहरों में लौटते हैं जहाँ संरचित हृदय फॉलो-अप सीमित होता है।

चुनौतियों में अनियमित दवा निगरानी, खराब रक्तचाप नियंत्रण, अनदेखी अतालता, हृदय विफलता का देर से निदान, या यात्रा लागत के कारण फॉलो-अप अपॉइंटमेंट छूटना शामिल हैं।

लगातार विशेषज्ञ निगरानी के बिना, रोकथाम योग्य जटिलताएँ जीवन-धातक बन सकती हैं.

स्वास्थ्य देखभाल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण

भारत का स्वास्थ्य देखभाल परिदृश्य धीरे-धीरे सुधार रहा है क्योंकि विशेषज्ञ विभाग, उन्नत निदान, न्यूनतम आक्रामक प्रक्रियाएँ, और बहु-विषयक देखभाल Tier 2 और Tier 3 शहरों में अधिक सुलभ हो रही हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी प्रगति के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों, टेलीमेडिसिन, दूरस्थ हृदय निगरानी, पुनर्वास सेवाओं, आपातकालीन तैयारी, और निरंतर मरीज शिक्षा सहित व्यापक स्वास्थ्य देखभाल पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश की आवश्यकता है।

“आगे बढ़ने पर ध्यान केवल बड़े अस्पतालों के निर्माण पर नहीं होना चाहिए। यह मजबूत स्वास्थ्य देखभाल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर होना चाहिए। इसमें प्रशिक्षित विशेषज्ञ, उन्नत प्रौद्योगिकी, आपातकालीन तैयारी, पुनर्वास सेवाएँ, और निरंतर मरीज शिक्षा शामिल हैं।

जब ये सभी तत्व एक साथ आते हैं, तो पहुँच में सुधार होता है, उपचार जल्दी शुरू होता है, और परिणाम बेहतर होते हैं,” उन्होंने कहा। गुणवत्ता वाली हृदय देखभाल कभी भी मरीज के पिन कोड पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।

जबकि भारत ने हृदय स्वास्थ्य जागरूकता में महत्वपूर्ण प्रगति की है, समय पर निदान, विशेषज्ञ परामर्श, और उन्नत हृदय उपचार की समान पहुँच सुनिश्चित करना अगली महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।

इस स्वास्थ्य देखभाल विभाजन को मजबूत बुनियादी ढाँचे, जुड़े प्रौद्योगिकियों, और सशक्त अग्रिम चिकित्सकों के माध्यम से पाटना हर साल हजारों जीवन बचा सकता है और यह सुनिश्चित कर सकता है कि भूगोल अब जीवित रहने का निर्धारण नहीं करता।

cg ” प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना” केंद्र एवं राज्य शासन की सब्सिडी से घर की छत पर लगा सोलर रूफटॉप…”

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– केंद्र एवं राज्य शासन की सब्सिडी से घर की छत पर लगा सोलर रूफटॉप**
– मोर बिजली ऐप से प्रतिदिन कर रहे बिजली उत्पादन एवं खपत की निगरानी**
– आम नागरिकों से योजना का लाभ उठाने की अपील**

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जिले में स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ आम नागरिकों के बिजली खर्च को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

इससे वे स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं तथा भविष्य में बिजली खर्च में बचत का लाभ प्राप्त करेंगे।

श्री विद्यासागर साहू ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत आवेदन कर अपने घर में सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित कराया।

योजना का बैंकिंग प्रक्रिया छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक भर्रेगांव शाखा से पूरी हुई।

योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रूपए तथा राज्य शासन से 30 हजार रूपए की सब्सिडी स्वीकृत हुई है।

सब्सिडी दावा की प्रक्रिया भी पूर्ण हो चुकी है तथा शीघ्र ही राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हो जाएगी।

श्री विद्यासागर साहू ने बताया कि सोलर रूफटॉप सिस्टम का स्थापना कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है और वर्तमान में संयंत्र सुचारू रूप से कार्य कर रहा है।

मोर बिजली मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रतिदिन सोलर पैनल द्वारा उत्पादित बिजली एवं बिजली की खपत की जानकारी आसानी से देख रहे हैं।

इससे ऊर्जा उत्पादन की निगरानी सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक हो गई है। श्री विद्यासागर ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए अत्यंत लाभकारी है।

यह योजना न केवल बिजली खर्च कम करने में सहायक है, बल्कि स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

“उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी से सोलर रूफटॉप लगवाना पहले की अपेक्षा अधिक सुलभ हो गया है।”

उन्होंने जिले के सभी नागरिकों से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की दिशा में आगे आना चाहिए।”

इससे बिजली पर होने वाले खर्च में कमी आएगी, ऊर्जा की बचत होगी तथा पर्यावरण संरक्षण में भी सभी की सहभागिता सुनिश्चित होगी।”

श्री विद्यासागर साहू ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के लिए केन्द्र एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।”

उन्होंने कहा कि यह योजना आत्मनिर्भर भारत, ऊर्जा संरक्षण और स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण की दिशा में एक दूरदर्शी एवं जनहितकारी पहल है।”

इससे नागरिकों को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ हरित ऊर्जा को भी बढ़ावा मिल रहा है।

सीएम हेल्पलाइन 1076 से श्रीमती तीजन बाई को मिला नया राशन कार्ड…

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– शिकायत के त्वरित निराकरण से मिली राहत – हितग्राही ने शासन के प्रति जताया आभार

राजनांदगांव। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है।

जिले में प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किए जाने से आमजन को राहत मिल रही है।

डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंढा निवासी श्रीमती तीजन बाई मंडावी को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नया राशन कार्ड प्राप्त हुआ है।

ग्राम मेंढा निवासी श्री बलराम मंडावी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कर बताया था कि श्रीमती तीजन बाई मंडावी का नया राशन कार्ड नहीं बन पा रहा है।

जिससे उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ प्राप्त करने में कठिनाई हो रही थी।

शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा मामले का परीक्षण कर त्वरित कार्रवाई की गई।

आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करते हुए श्रीमती तीजन बाई मंडावी का नया राशन कार्ड जारी कर दिया गया।

इसके पश्चात विभाग द्वारा दूरभाष के माध्यम से हितग्राही से संपर्क कर जानकारी प्राप्त की गई।

जिसमें श्रीमती तीजन बाई मंडावी ने नया राशन कार्ड प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए समाधान पर संतोष व्यक्त किया।

श्रीमती तीजन बाई मंडावी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से उनकी समस्या का शीघ्र निराकरण हुआ और अब उन्हें राशन कार्ड प्राप्त हो गया है।

उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की प्रभावी व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद ज्ञापित किया है।

cg” सौर ऊर्जा से बिजली बिल हुआ शून्य, हर माह हो रही हजार रूपए की बचत…”

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“प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से रोशन हुआ श्रीमती कामती साहू का घर”

राजनांदगांव। छुरिया विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम मोरकुटूम्ब की निवासी मितानीन प्रशिक्षक श्रीमती कामती बाई साहू के घर में अब सूरज की रोशनी केवल उजाला ही नहीं करती, बल्कि आर्थिक समृद्धि का भी माध्यम बन गई है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत उनके घर की छत पर स्थापित 3 किलोवॉट क्षमता के सोलर रूफटॉप प्लांट ने उनके परिवार की मासिक बिजली लागत लगभग समाप्त कर दी है।

श्रीमती कामती साहू ने बताया कि वे मितानीन प्रशिक्षक के रूप में कार्य करती हैं तथा उनके पति का किराने की दुकान है। पहले हर माह बिजली बिल एक हजार रूपए से अधिक आता था, जिससे घरेलू खर्च पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था।

योजना के बारे में जानकारी मिलने पर उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत आवेदन किया और घर की छत पर 3 किलोवॉट क्षमता का सोलर पैनल स्थापित कराया। सोलर पैनल लगने के बाद इस माह उनका बिजली बिल शून्य आया, जिससे लगभग एक हजार रूपए की बचत हुई।

उन्होंने बताया कि सोलर पैनल की स्थापना के लिए उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रूपए तथा राज्य सरकार से 30 हजार रूपए की सब्सिडी प्राप्त हुई।

कुल 1 लाख 8 हजार रूपए की सहायता मिलने से बिना आर्थिक कठिनाई के सोलर प्लांट लगाना संभव हो सका। अब उनका परिवार अपनी आवश्यकता की बिजली स्वयं तैयार कर रहा है तथा अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजकर उसका भी लाभ प्राप्त कर रहा है।

श्रीमती कामती साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना केवल आर्थिक बचत ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। सौर ऊर्जा के उपयोग से पारंपारिक ऊर्जा स्त्रोतों पर निर्भरता कम होती है, जिससे प्रदूषण में कमी आती है और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है।

उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को इस योजना का लाभ उठाना चाहिए, ताकि हर घर, हर गांव और हर मोहल्ला स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा से जुड़ सके।

उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के परिवारों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। इससे आर्थिक बचत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षणकृतीनों उद्देश्यों की एक साथ पूर्ति हो रही है।

cg” 125 दिवस का रोजगार, 300 रूपए प्रतिदिन मजदूरी और मेट का दायित्व बना आत्मनिर्भरता का आधार…”

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“वीबी-जीरामजी योजना से दिव्यांगजनों को मिला सम्मान और रोजगार का संबल”

राजनांदगांव। शासन की महत्वाकांक्षी विकसित भारत-जीरामजी (ग्रामीण रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन) योजना जिले के दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। योजना के माध्यम से रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने के साथ ही उन्हें जिम्मेदारीपूर्ण कार्य सौंपकर आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिल रहा है। पहले जहां मनरेगा के तहत 100 दिवस का रोजगार मिलता था, वहीं अब वीबी-जीरामजी योजना के अंतर्गत 125 दिवस का रोजगार तथा 300 रूपए प्रतिदिन की मजदूरी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे दिव्यांग हितग्राहियों की आय बढऩे के साथ उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है।

राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम सुंदरा निवासी दिव्यांग श्री चंद्रप्रकाश साहू ने बताया कि वीबी-जीरामजी योजना के अंतर्गत उन्हें 100 मजदूरों के लिए मेट का दायित्व सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए गर्व की बात है। पहले उन्हें मनरेगा के तहत 100 दिवस का रोजगार मिलता था, लेकिन अब 125 दिवस का रोजगार और 300 रूपए प्रतिदिन की मजदूरी मिल रही है।

इससे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की अपेक्षा अधिक सुदृढ़ होगी। श्री चंद्रप्रकाश ने बताया कि राजनांदगांव प्रवास के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने उन्हें शॉल, श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए अविस्मरणीय क्षण है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और समाज में सम्मानपूर्वक आगे बढऩे की प्रेरणा मिली है। उन्होंने राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वीबी-जीरामजी योजना दिव्यांगजनों को केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि सम्मान और आत्मनिर्भरता का अवसर भी प्रदान कर रही है।

इसी प्रकार विकासखंड डोंगरगांव के ग्राम कोहका निवासी दिव्यांग सुश्री रंभा मंडावी ने बताया कि उन्हें भी वीबी-जीरामजी योजना के अंतर्गत मेट का कार्य मिला है। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा में 261 रूपए प्रतिदिन की मजदूरी दर से 100 दिवस का रोजगार मिलता था। अब वीबी-जीरामजी योजना के तहत 125 दिवस का रोजगार और 300 रूपए प्रतिदिन की मजदूरी मिल रही है। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी और परिवार को आर्थिक संबल मिलेगा। उन्होंने बताया कि राजनांदगांव प्रवास के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने उन्हें शॉल, श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।

इस सम्मान से उनका उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि मेट के रूप में कार्य करने के साथ-साथ वे गांव के लोगों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी देती हैं, ताकि पात्र हितग्राही समय पर योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सके। दोनों हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वीबी-जीरामजी योजना दिव्यांगजनों के लिए सम्मानजनक आजीविका का सशक्त माध्यम बन रही है। योजना के माध्यम से बढ़े कार्य दिवस, बेहतर मजदूरी और जिम्मेदारीपूर्ण दायित्व ने उनके जीवन में नई आशा, आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा मिला है।

” विश्व बैंक समूह ने विभिन्न देशों के आय वर्ग के नवीनतम आंकड़े जारी…”

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विश्व बैंक का आय वर्गीकरण 

हाल ही में विश्व बैंक समूह ने विभिन्न देशों के आय वर्ग के नवीनतम आंकड़े जारी किए हैं। 2026 में, छह देशों को उच्च आय श्रेणी में शामिल किया गया है। इसके साथ ही, पांच देशों ने निम्न-मध्यम आय वर्ग से उच्च-मध्यम आय वर्ग में प्रवेश किया है। एक देश ने निम्न आय वर्ग से निम्न-मध्यम आय वर्ग में स्थानांतरित किया है। इस साल के वर्गीकरण में कोई भी देश निम्न आय श्रेणी में नहीं आया है। यह वर्गीकरण 2025 की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय के आधार पर तैयार किया गया है।

  • उच्च आय: $14,375 या उससे अधिक
  • उच्च-मध्यम आय: $4,636 से $14,375 तक
  • निम्न आय: $1,175 या उससे कम
  • निम्न-मध्यम आय: $1,176 से $4,635 तक

उच्च आय श्रेणी में शामिल देश

पिछले वर्ष वियतनाम, फिलीपींस, श्रीलंका, माइक्रोनेशिया और जॉर्डन उच्च आय श्रेणी में शामिल हुए थे। टोगो को निम्न आय से निम्न-मध्यम आय वर्ग में स्थानांतरित किया गया है। इस वर्गीकरण में कुल 218 देशों को शामिल किया गया है, जो 2025 के आंकड़ों पर आधारित है।

  • निम्न आय: 25 देश
  • निम्न-मध्यम आय: 47 देश
  • उच्च-मध्यम आय: 59 देश
  • उच्च आय: 187 देश

इस वर्ष, उच्च आय और निम्न आय श्रेणी में देशों की संख्या में कोई बदलाव नहीं आया है।

भारत की स्थिति

विश्व बैंक ने 218 देशों को चार आय वर्गों में विभाजित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय $2,760 है, जिससे यह निम्न-मध्यम आय श्रेणी में बना हुआ है। पिछले वर्ष की तुलना में, वियतनाम ने निर्यात-आधारित विकास के कारण बेहतर प्रदर्शन किया है। पिछले दो वर्षों में वियतनाम के निर्यात में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, जबकि इसके सकल घरेलू उत्पाद में क्रमशः 7 प्रतिशत और 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2021 से 2025 के बीच वियतनाम की सकल राष्ट्रीय आय में औसतन 10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई है। निम्न आय वर्ग वाले देशों की संख्या 1987 में 30% और 2025 में 11% तक घट गई थी। आय के आधार पर विश्व बैंक समूह 1987 से देशों का वर्गीकरण कर रहा है, जिसमें हर साल देशों की संख्या में उतार-चढ़ाव संभव है।

अमेज़न और फ्लिपकार्ट की मेगा सेल 2026: लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर शानदार छूट…

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अमेज़न और फ्लिपकार्ट की मेगा सेल 2026 अमेज़न प्राइम डे सेल और फ्लिपकार्ट GOAT सेल 4 जुलाई से आरंभ हो चुकी हैं। इन दोनों सेल्स में स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर शानदार छूट उपलब्ध है। iPhone के विभिन्न मॉडल्स पर भी आकर्षक ऑफर्स दिए जा रहे हैं। अमेज़न की सेल केवल प्राइम मेंबर्स के लिए है, जबकि फ्लिपकार्ट सभी उपयोगकर्ताओं के लिए खुली है।

अमेज़न ने कई उपकरणों पर विशेष छूट की घोषणा की है। प्रमुख ऑफर्स में शामिल हैं:

OnePlus 13 (12GB/256GB) ₹54,999 में (25% छूट)
ASUS Vivobook 15 (i3 13th Gen) ₹44,990 में (42% छूट)
Samsung 55-inch 4K Smart TV ₹39,490 में (28% छूट)
LG 1.5 Ton Smart AC ₹35,490 में (53% छूट)
Godrej 600L Smart Refrigerator ₹69,990 में (40% छूट)
BenQ 4K Smart Projector ₹1,14,490 में (42% छूट)

Motorola के कई मॉडल्स पर भी सेल के दौरान छूट और बैंक ऑफर्स उपलब्ध हैं। Edge और G सीरीज के फोन विभिन्न कीमतों पर उपलब्ध हैं, जिनमें बैंक ऑफर के तहत ₹1,000 से ₹5,000 तक की अतिरिक्त छूट शामिल है।

” अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस पर भारत का संदेश…”

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भारत के न्यूयॉर्क स्थित महावाणिज्य दूतावास ने शनिवार को संयुक्त राज्य अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस पर बधाई दी।

महावाणिज्य दूतावास ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में स्वतंत्रता, लोकतंत्र और ‘हम लोग’ की भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को उजागर किया।

पोस्ट में लिखा गया, “इंडिया इन न्यूयॉर्क की टीम अमेरिका के लोगों को 250वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देती है। हम ‘हम लोग’, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता का जश्न मनाते हैं। हैप्पी अमेरिकन इंडिपेंडेंस डे!”

इस अवसर पर एक विशेष वीडियो भी जारी किया गया, जिसे भारत में अमेरिकी दूतावास ने प्रस्तुत किया। यह वीडियो भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है।

वीडियो की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात से होती है।

इसके बाद, वीडियो में कई भारतीय और अमेरिकी हस्तियों ने दोनों देशों के साझा मूल्यों और सहयोग पर अपने विचार साझा किए। इसमें कांग्रेस नेता शशि थरूर, पूर्व सीईओ इंदिरा नूयी, व्यवसायी ईशा अंबानी, और खेल जगत की प्रमुख हस्तियां जैसे मिताली राज, पीवी सिंधु, और राहुल द्रविड़ शामिल हैं।

इस संदेश में अमेरिका को नवाचार, अवसर और वैश्विक प्रगति का केंद्र बताते हुए दोनों देशों के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के बीच संबंधों की मजबूती पर जोर दिया गया।

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस विशेष दिन को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने अमेरिका के माउंट रशमोर पर जाकर आजादी का जश्न मनाया और राष्ट्रपति ट्रंप के डकोटा स्पीच का उल्लेख किया।

” El Nino, मानसून पर बुरे प्रभाव के संकेत… मौसमी घटनाओं का खतरा…”

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विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने हाल ही में चेतावनी दी है कि उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थितियां आने वाले महीनों में तेजी से मजबूत हो सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भीषण गर्मी, सूखा, मूसलधार बारिश और अन्य चरम मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।

अल नीनो का प्रभाव

डब्ल्यूएमओ की ग्लोबल सीजनल क्लाइमेट अपडेट रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से सितंबर के बीच अल-नीनो के प्रभाव में वृद्धि की संभावना है। संगठन का कहना है कि इसका असर वैश्विक मौसम पर व्यापक रूप से देखने को मिलेगा।

हीटवेव की तीव्रता में वृद्धि

डब्ल्यूएमओ की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने बताया कि अल-नीनो की परिस्थितियां पहले से ही बन चुकी हैं और इसके तेजी से मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं। इससे कई देशों में सूखे और भारी बारिश जैसी चरम मौसमी घटनाओं के साथ-साथ जमीन और समुद्र दोनों पर हीटवेव की तीव्रता बढ़ सकती है।

भारत में बारिश की कमी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 12 जून को अल नीनो की दस्तक की घोषणा की थी और कहा था कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह और मजबूत होगा। जून में बारिश में 40% की कमी देखी गई, जिसमें मध्य भारत सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 50.4% कम वर्षा दर्ज की गई। आईएमडी ने जुलाई में भी औसत से कम बारिश की आशंका जताई है।

देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में डिपॉजिट और लोन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि….

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एचडीएफसी बैंक की वित्तीय स्थिति

देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में डिपॉजिट और लोन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई है।

30 जून को समाप्त तिमाही के लिए जारी किए गए बिजनेस अपडेट के अनुसार, बैंक की जमा राशि और कर्ज वितरण में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है।

एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, जून 2026 के अंत तक बैंक का कुल डिपॉजिट 14.7 प्रतिशत बढ़कर 31.70 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इसमें टर्म डिपॉजिट सालाना आधार पर 17 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 21.45 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि करंट और सेविंग अकाउंट (सीएएसए) डिपॉजिट लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 10.25 लाख करोड़ रुपए रहा।

बैंक के कर्ज वितरण में भी अच्छी वृद्धि देखी गई है। ग्रॉस एडवांस (कुल लोन) एक साल पहले की तुलना में 15.4 प्रतिशत बढ़कर 30.61 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

इसके अलावा, बैंक का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) जून तिमाही के अंत तक 31.27 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 12.4 प्रतिशत अधिक है।

हालांकि, यह बिजनेस अपडेट ऐसे समय में आया है जब बैंक कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े विवादों के कारण चर्चा में रहा है।

इस वर्ष की शुरुआत में, बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने इस्तीफा देते हुए कहा था कि बैंक में कुछ प्रक्रियाएं उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में बैंक की गवर्नेंस, नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमेटी (एनआरसी) की बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की पुनर्नियुक्ति पर विचार नहीं किया गया।

चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे से संबंधित कानूनी समीक्षा पर भी सवाल उठाए थे, जिसमें उन्होंने कहा कि समीक्षा में अनुपालन संबंधी मुद्दों पर ध्यान दिया गया, जबकि उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया गया।

मार्च में उनके इस्तीफे के बाद केकी मिस्त्री को अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया था। हाल ही में, केंद्र सरकार के पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को तीन वर्ष की अवधि के लिए एचडीएफसी बैंक का नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया है।

शेयर बाजार में शुक्रवार को एचडीएफसी बैंक का शेयर 1.77 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,001.50 रुपए पर बंद हुआ। पिछले छह महीनों में शेयर में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि पिछले एक वर्ष में इसमें लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।