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“ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, अब 18 मार्च को होगी अगली सुनवाई”

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आई- पैक रेड मामले में ममता बनर्जी के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी। अदालत में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ईडी आज ही अपना जवाब दाखिल कर देगी।

प्रवर्तन निदेशालय ने आई-पैक के दफ्तरों पर छापेमारी के दौरान कथित दखलअंदाजी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज कुमार को पक्षकार बनाया गया है। ईडी ने इन तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

दूसरी ओर ममता बनर्जी ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में ईडी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कोलकाता स्थित आई-पैक कार्यालयों में तलाशी के नाम पर ईडी अधिकारियों ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा गोपनीय और चुनावी रणनीति का डेटा जब्त कर लिया। उनके अनुसार यह कार्रवाई न केवल अवैध थी, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल देने जैसी भी है।

ममता बनर्जी ने अपने हलफनामे में कहा कि जैसे ही उन्हें जानकारी मिली कि आई-पैक के दफ्तरों में तलाशी चल रही है और वहां पार्टी का संवेदनशील डेटा मौजूद है, वह खुद वहां पहुंचीं। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल पार्टी की गोपनीय सामग्री को सुरक्षित रखना था, ताकि उसका किसी तरह से दुरुपयोग न हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने ईडी की कार्रवाई में किसी प्रकार की बाधा नहीं डाली।

अब इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें 18 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में सुनी जाएंगी। अदालत के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह मामला जांच एजेंसी की कार्रवाई और राज्य सरकार के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

“16 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा, राजनीति में उठे नए सवाल”

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भारत निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और बिहार की 16 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की तारीखें घोषित कर दी हैं। इस ऐलान के बाद कई राज्यसभा सांसदों के भविष्य को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

एनसीपी के शरद गुट के नेता शरद पवार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह अब राजनीति से संन्यास लेंगे। उनके संन्यास की घोषणा के बाद यह सवाल उठ रहा है कि राज्यसभा में उनकी जगह कौन आएगा और पार्टी की रणनीति क्या होगी।

बिहार की राजनीति में भी राज्यसभा सीटों को लेकर हलचल तेज है। यहां गठबंधन की आंतरिक राजनीति के कारण उपेंद्र कुशवाहा की स्थिति और उनकी राज्यसभा संभावनाओं पर नजरें लगी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर चर्चा जोरों पर है।

महाराष्ट्र में भी राजनीतिक समीकरण बदलते दिख रहे हैं। उद्धव ठाकरे की घटती सियासी शक्ति और प्रियंका चतुर्वेदी के संसदीय भविष्य को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राज्यसभा चुनाव में पार्टी की रणनीति और गठबंधन सहयोगियों के रुख का फैसला महत्वपूर्ण साबित होगा।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव केवल सीट जीतने का मामला नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में राज्यों और केंद्र के बीच राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करने वाला भी है। शरद पवार के संन्यास, बिहार और महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरण, सभी को मिलाकर यह चुनाव कई नई दिशा तय करेगा।

हालांकि, सभी दलों ने अभी तक औपचारिक उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व इस पर अंतिम निर्णय लेगा। इस बीच मीडिया और राजनीतिक हलकों में भविष्य के संभावित दावेदारों और गठबंधनों को लेकर अटकलें जारी हैं।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों का चयन केवल राजनीतिक समीकरण और सीटों के बंटवारे पर आधारित नहीं होगा, बल्कि इसमें गठबंधन की ताकत, उम्मीदवार की लोकप्रियता और भविष्य की रणनीति को भी महत्व दिया जाएगा।

कुल मिलाकर, 16 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा ने राजनीतिक माहौल को गरम कर दिया है। शरद पवार के संन्यास और बिहार व महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों ने इस चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। आने वाले दिनों में इस पर पार्टियों की रणनीति और उम्मीदवारों के चयन से ही वास्तविक दिशा स्पष्ट होगी।

पीएम मोदी से मिले स्पेन के राष्ट्रपति सांचेज: द्विपक्षीय बैठक में डिफेंस, ट्रेड और तकनीक को लेकर हुई बात…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज के साथ बैठक में द्विपक्षीय मुद्दों पर बात की। दोनों ने व्यापार, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और कई दूसरे जरूरी सेक्टर्स में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री ने बाद में कहा बैठक काफी अच्छी रही।

एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शामिल होने के लिए सांचेज नई दिल्ली पहुंचे। यह एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म है जो उद्योग-धंधे और सरकार चलाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर फोकस करता है।

समिट में शामिल होने से पहले सांचेज ने पीएम मोदी के साथ अहम बैठक की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी।

उन्होंने लिखा, “दिल्ली में राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज के साथ एक अच्छी मीटिंग हुई। इंडिया-स्पेन दोस्ती को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा हुई, खासकर डिफेंस, सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी और दूसरे क्षेत्रों में। हमारे देश 2026 को इंडिया-स्पेन ईयर ऑफ कल्चर, टूरिज्म और एआई के तौर पर मना रहे हैं। इससे लोगों के बीच जुड़ाव और गहरा होगा। स्पेन के विश्वविद्यालय का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है; यह देखकर खुशी हुई। यह भी हमारे लोगों को जोड़ने में बहुत मदद करेगा।”

पीएम ने आगे लिखा, “ईयू के साथ ऐतिहासिक एफटीए का स्पेन के साथ इकोनॉमिक पार्टनरशिप पर बहुत अच्छा असर पड़ेगा और दोनों देशों के लोगों को नए अवसर उपलब्ध कराएगा।”

इससे पहले नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता के बाद, विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक्स पर बातचीत का ब्योरा शेयर करते हुए कहा, “पीएम मोदी ने एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शामिल होने आए स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने इंडिया-स्पेन साझेदारी को गहरा करने के मकसद से कई मुद्दों पर चर्चा की।”

प्रधानमंत्री के साथ अपनी मीटिंग से पहले, प्रेसिडेंट सांचेज ने स्पेन-इंडिया सीईओ फोरम में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने स्पेन में निवेश की संभावनाओं पर बल दिया और भारत के प्रमुख उद्यमियों से बिजनेस संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की।

एक्स पोस्ट में, राष्ट्रपति सांचेज ने कहा, “स्पेन एक ऐसा देश है जिसमें निवेश करना चाहिए। यह एक स्ट्रेटेजिक पार्टनर भी है, जो ग्रोथ, स्टेबिलिटी, टैलेंट और इनोवेशन देता है। यही बात मैंने नई दिल्ली में भारतीय कंपनियों के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स से मिलकर उन्हें बताई है।”

स्पेनिश राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी के साथ वार्ता भारत-स्पेन के बीच लंबे समय से चले आ रहे और अच्छे रिश्तों को और मजबूती प्रदान करती है, ये 1956 में राजनयिक रिश्ते बनने के समय से हैं।

राष्ट्रपति सांचेज इससे पहले 28-29 अक्टूबर, 2024 को भारत आए थे। वह दौरा उनका पहला भारत दौरा था और 18 सालों में स्पेन सरकार के किसी राष्ट्रपति का भारत दौरा था।

CG: 24 फरवरी को विधानसभा में पेश होगा छत्तीसगढ़ का बजट, वित्त मंत्री ओपी चौधरी बोले- इस बार नई थीम…

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ओपी चौधरी ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है, उसी दिशा में छत्तीसगढ़ को भी विकसित राज्य बनाने के लिए काम किया जाएगा. सरकार शॉर्ट टर्म प्लानिंग के तहत एक-एक कदम आगे बढ़ाते हुए दीर्घकालीन लक्ष्यों को हासिल करेगी.

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत 23 फरवरी से होगी. इसके अगले दिन 24 फरवरी को विधानसभा में बजट पेश किया जा सकता है. इसकी जानकारी प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दी. यह मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार का तीसरा बजट होगा.

इस बार का बजट नई थीम पर होगा 

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का पहला बजट ज्ञान आधारित था, जिसे गरीब, युवा, किसान और महिलाओं को समर्पित किया गया था. दूसरा बजट गति की रणनीति पर केंद्रित रहा, जिसमें गुड गवर्नेंस, एक्सीलरेटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल ग्रोथ पर विशेष फोकस किया गया. अब तीसरा बजट कुछ नई थीम और विजन के साथ पेश किया जाएगा.

विकसित प्रदेश बनाने का लक्ष्य 

ओपी चौधरी ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है, उसी दिशा में छत्तीसगढ़ को भी विकसित राज्य बनाने के लिए काम किया जाएगा. सरकार शॉर्ट टर्म प्लानिंग के तहत एक-एक कदम आगे बढ़ाते हुए दीर्घकालीन लक्ष्यों को हासिल करेगी.

जनता को परेशान किया 

बजट को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए जाने वाले सवालों पर पलटवार करते हुए ओपी चौधरी ने कहा कि कांग्रेस ने राजीव गांधी न्याय योजना के नाम पर किसानों और आम जनता को परेशान किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने किसानों के साथ अन्याय किया, जबकि मौजूदा सरकार एकमुश्त दुगनी राशि दे रही है.

कांग्रेस ने पांच रुपये तक नहीं दिए 

ओपी चौधरी ने उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने माताओं को 500 रुपये देने का वादा किया था, लेकिन 5 रुपये तक नहीं दिए. वहीं वर्तमान सरकार हर साल करीब 8000 करोड़ रुपये माताओं को दे रही है. ओपी चौधरी ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कांग्रेस करती रहेगी, क्योंकि विष्णु देव साय की सरकार कांग्रेस को पच नहीं रही है.

CG: कांग्रेस का सरकार पर हमला, कानून-व्यवस्था पर सवाल, SIR प्रक्रिया पर भी कांग्रेस के आरोप…

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कांग्रेस का सरकार पर हमला

छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी ने गर्मी बढ़ा दी है. कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के छत्तीसगढ़ प्रभारी डॉ. अमीनुल खान सूरी ने राजीव भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि “आज छत्तीसगढ़ बांग्लादेश बनता जा रहा है”, और आरोप लगाया कि राज्य में अल्पसंख्यकों के साथ प्रताड़ना की घटनाएं बढ़ रही हैं.

कानूनव्यवस्था पर सवाल, ”अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना

डॉ. सूरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ को लंबे समय तक “शांति का टापू” कहा जाता रहा है, लेकिन वर्तमान हालात चिंताजनक हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है और प्रशासन संवेदनशील मामलों में गंभीरता नहीं दिखा रहा. सूरी ने कहा कि कब्रिस्तान से जुड़े मामलों में अनावश्यक विवाद खड़े किए जा रहे हैं. साथ ही क्रिसमस के दिन मॉल में सांता क्लॉज की प्रदर्शनी में तोड़फोड़ जैसी घटनाएं सामाजिक सौहार्द पर चोट करती हैं. कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी परिस्थितियां क्यों बन रही हैं? शासन-प्रशासन इन मामलों पर मौन क्यों है? क्या प्रदेश में सामाजिक सौहार्द को कमजोर करने की कोशिश हो रही है?

SIR प्रक्रिया पर भी कांग्रेस के आरोप

डॉ. सूरी ने SIR की प्रक्रिया पर भी गंभीर आपत्ति जताई. आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि उनके संगठन के एक पदाधिकारी का नाम भी SIR के दौरान सूची से हटा दिया गया है. कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए तथा जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें न्याय मिले. उन्होंने राज्य सरकार से उन्मादी तत्वों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए.

सरकार का पलटवार: अवैध घुसपैठ पर सख्ती जारी

इधर राज्य सरकार ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने का दावा किया. हाल ही में आयोजित पत्रकार वार्ता में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि बीते दो वर्षों में 34 अवैध घुसपैठियों को डिपोर्ट किया गया है. उन्होंने कहा कि अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए विशेष एसटीएफ का गठन किया गया है, नागरिकों से सूचना प्राप्त करने हेतु टोल-फ्री नंबर जारी किया गया है. संदिग्धों के लिए होल्डिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं. उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में अवैध रूप से रहने वालों के खिलाफ आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी कीमत पर घुसपैठियों को बख्शा नहीं जाएगा.

सियासी बयानबाजी से बढ़ा तापमान

एक ओर कांग्रेस राज्य में कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सरकार को घेर रही है, तो दूसरी ओर सरकार अवैध घुसपैठ और सुरक्षा के मुद्दे पर अपनी सख्ती को प्रमुखता से पेश कर रही है. अब सवाल यह है कि क्या यह केवल सियासी बयानबाजी है या प्रदेश में वाकई सामाजिक ताने-बाने पर असर पड़ रहा है? आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान और तेज होने के संकेत हैं.

CG: राज्यसभा सीटों पर चुनाव का ऐलान, इन नेताओं का खत्म होगा कार्यकाल…

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छत्तीसगढ़ की दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव का ऐलान हो गया है. कांग्रेस के दो राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है.

छत्तीसगढ़ में दो सीटों पर होगा राज्यसभा चुनाव

छत्तीसगढ़ की दो राज्यसभा सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं, जिनके लिए चुनाव का ऐलान हो गया है. 16 मार्च 2026 को देश के अलग-अलग राज्यों से खाली हो रही राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ की भी दो सीटें हैं, जिन पर चुनाव होगा. राज्यसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ में सुगबुगाहट पहले से ही शुरू हो चुकी थी. बता दें कि बीजेपी और कांग्रेस विधायकों की संख्या को देखते हुए एक-एक राज्यसभा सीट बीजेपी और कांग्रेस को मिल सकती है. इसके लिए अब सुगबुगाहट और तेज होने वाली है.

इन नेताओं का कार्यकाल पूरा 

छत्तीसगढ़ से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी का कार्यकाल खत्म हो रहा है. दोनों नेताओं का कार्यकाल अप्रैल में ही खत्म हो रहा है, ऐसे में मार्च में सीटों को भरने के लिए राज्यसभा चुनाव होंगे. दोनों नेताओं का कार्यकाल खत्म होने के बाद छत्तीसगढ़ में नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं, क्योंकि अब एक सीट बीजेपी के खातें में जाने वाली है, ऐसे में बीजेपी के नेता भी सक्रिए हो रहे हैं, जबकि कांग्रेस के नेता भी एक सीट के लिए एक्टिव हो रहे हैं. क्योंकि यह देखना भी दिलचस्प होगा कि बीजेपी और कांग्रेस स्थानीय नेताओं को राज्यसभा भेजेगी या बाहरी नेताओं को भी मौका मिलेगा.

छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की पांच सीटें 

बता दें कि छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की पांच सीटें आती है. वर्तमान में कांग्रेस के पास चार और बीजेपी के पास एक सीट है. कांग्रेस से केटीएस तुलसी, फूलोदेवी नेताम, राजीव शुक्ला, रंजीता रंजन हैं, जबकि बीजेपी से देवेंद्र प्रताप सिंह राज्यसभा सांसद हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की वापसी के बाद अब राज्यसभा के समीकरण भी बदलते दिख रहे हैं, जहां छत्तीसगढ़ में बीजेपी के राज्यसभा सांसदों की संख्या बढ़ सकती है. क्योंकि बीजेपी के पास 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 विधायक हैं, इसके अलावा एक विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हैं, ऐसे में अब बीजेपी के राज्यसभा सांसदों की संख्या 3 हो सकती है, जबकि कांग्रेस के सांसदों की संख्या 2 हो सकती है.

CG: आदिवासी क्षेत्रों में मतांतरण को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम सभाओं के अधिकारों पर लगाई मुहर, धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव…

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छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में मतांतरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने ग्राम सभाओं के अधिकारों को मजबूती दी है।

16 फरवरी 2026 को दिए गए निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ‘पेसा’ कानून के तहत ग्राम सभाओं को अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा का पूर्ण अधिकार है।

इस फैसले के बाद बस्तर से सरगुजा तक जनजातीय समाज को अपनी परंपराओं की सुरक्षा के लिए कानूनी आधार मिल गया है। मामला कांकेर जिले की उन ग्राम पंचायतों से जुड़ा था, जिन्होंने बाहरी धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया था। ग्रामीणों ने गांवों में सूचना पट्ट लगाकर इस संबंध में स्पष्ट संदेश भी दिया था।

हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट की मुहर

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पहले ही ग्राम पंचायतों के इस निर्णय को वैध माना था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे बरकरार रखते हुए कहा है कि अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए ग्राम सभाओं द्वारा उठाए गए एहतियाती कदम पूरी तरह वैधानिक हैं। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि ग्राम सभाएं केवल औपचारिक संस्था नहीं, बल्कि वास्तविक स्वशासन की इकाई हैं।

फैसले पर सियासी प्रतिक्रिया

निर्णय के बाद प्रदेश की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने धर्म प्रचारकों से सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने की बात कही। वहीं आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के चेयरमैन विकास मरकाम ने इसे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान की बड़ी जीत बताया।

गांव-गांव जनजागरण अभियान

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा और अन्य संगठनों ने गांवों में जनजागरण अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। पूर्व मंत्री और जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने कहा कि अब जब सर्वोच्च न्यायालय ने ग्राम सभाओं के अधिकारों को मान्यता दे दी है, तो समाज को जागरूक कर परंपराओं की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

इस निर्णय ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संरचना की रक्षा के लिए व्यापक अधिकार प्राप्त हैं।

CG: 7 अधिकारियों को मिला प्रमोशन, बनाए गए IAS, आप भी देखें लिस्ट…

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छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के 7 अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में प्रमोशन मिला है। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) ने 17 फरवरी 2026 मंगलवार की शाम इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। यह नियुक्तियां वर्ष 2024 की चयन सूची के तहत 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2024 के बीच उत्पन्न रिक्तियों के आधार पर की गई हैं। सभी अधिकारियों को प्रोबेशन पर नियुक्त करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल किया गया है और उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित किया गया है।

इन अधिकारियों को मिला प्रमोशन

  • तीरथराज अग्रवाल
  • लीना कोसम
  • सौमिल रंजन चौबे
  • बीरेंद्र बहादुर पंचभाई
  • सुमित अग्रवाल
  • संदीप कुमार अग्रवाल
  • आशीष कुमार टिकारिहा

यह प्रमोशन राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अब ये अधिकारी आईएएस के रूप में नई जिम्मेदारियां संभालेंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, आशीष टिकरिया वित्त मंत्री ओ पी चौधरी के ओएसडी है और तीरथ राज अग्रवाल मंत्री केदार कश्यप के ओएसडी है।

CG: जन्म-मृत्यु पंजीयन योजना का कार्यान्वयन, जिला स्तरीय अन्तर्विभागीय समन्वय समिति का गठन…

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राजनांदगांव: भारत सरकार के जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969, संशोधित अधिनियम 2023 तथा छत्तीसगढ़ राज्य जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जन्म-मृत्यु पंजीयन योजना के कार्यान्वयन में किसी भी स्तर पर उत्पन्न गतिरोध को दूर करने एवं कार्यान्वयन एजेंसी को मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए राज्य शासन द्वारा जिला स्तरीय अन्तर्विभागीय समन्वय समिति का गठन किया गया है।

समिति में कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव अध्यक्ष है। समिति मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, सिविल सर्जन जिला चिकित्सालय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, उप संचालक पंचायत विभाग, उप संचालक जनसंपर्क विभाग, महिला एवं बाल विकास अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), स्थानीय रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) नगरीय सदस्य है तथा जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं उप संचालक जिला योजना एवं सांख्यिकी
सदस्य-सचिव बनाया गया है।

जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 के क्रियान्वयन के संबंध में 31 दिसम्बर 2007 तक ग्रामीण क्षेत्रों में घटित जन्म व मृत्यु की घटनाओं को संबंधित थानों द्वारा जन्म-मृत्यु पंजीयन का कार्य किया जाता था एवं नगरीय निकाय की स्थापना दिवस से जन्म-मृत्यु पंजीयन का कार्य किया जाता है।

राज्य शासन द्वारा इस व्यवस्था में परिवर्तन किया गया एवं 1 जनवरी 2008 से ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत द्वारा जन्म-मृत्यु पंजीयन का कार्य किया जा रहा है, जबकि नगरीय क्षेत्रों में अब भी संबंधित नगरीय निकायों द्वारा यह कार्य यथावत जारी है। वर्ष 2014 से जिले के समस्त शासकीय अस्पतालों (सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और उप स्वास्थ्य केन्द्र) में संस्था में हुए जन्म-मृत्यु की घटना का पंजीयन का कार्य किया जा रहा है।

CG: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एवं लीड बैंक कार्यालय द्वारा वित्तीय साक्षरता शिविर का किया गया आयोजन…

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राजनांदगांव: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एवं लीड बैंक कार्यालय द्वारा 13 फरवरी 2026 को होटल एबिस ग्रीन में जिले में वरिष्ठ नागरिकों के लिए वित्तीय साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कीर्तन सिंह राठौर उपस्थित थे। आरबीआई के एजीएम श्री सत्येन्द्र कुमार राठौर ने बताया कि वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 के विषय एवं उप विषयों के संबंध में बताया। उन्होंने केवायसी मानदंड, सीकेवायसी, खाता स्वच्छता एवं अनुशासन के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

शिविर में मनी म्युल खाते एवं केवायसी के बारे में जागरूक किया गया। आरबीआई के प्रबंधक श्री अविनाश टोप्पो, अग्रणी बैंक प्रबंधक श्री मुनीश शर्मा सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक उपस्थित थे।