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सोनिया गांधी मुझे बना रही थीं मुख्यमंत्री, राहुल गांधी बने रोड़ा. हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा दावा…

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि 2014 में सोनिया गांधी ने उन्हें सीएम पद की शपथ लेने की तारीख तय करने को कहा था. क्योंकि उन्हें 58 विधायकों का समर्थन प्राप्त था.

इसी बीच USA से राहुल गांधी का एक फोन पार्टी नेताओं के पास आया और स्थिति पूरी तरह बदल गई. एक तरह से राहुल गांधी ने उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया था.

सरमा ने दावा किया कि यह उनके एक बहुत बड़ा झटका था. मंगलवार को विधानसभा में कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने यह दावा किया है. दरअसल 2011 में विधानसभा चुनावों के बाद असम कांग्रेस में अंसतोष देखा गया था. जब विधायकों के एक गुट ने मौजूदा तरुण गोगोई की जगह सरमा को मुख्यमंत्री के तौर पर समर्थन दिया था. इस पूरे मामले को लेकर हिमंत ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि उस समय उन्हें सोनिया गांधी मैडम का फोन आया और उन्होंने ‘मुझसे कहा कि CM पद की शपथ को लेकर तारीख तय करो. मैंने उनसे कहा कि मैं जून (2014) में कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेले के बाद शपथ लूंगा.’

मुझे उनसे कहीं ज्यादा बीजेपी ने दिया

हिमंत का दावा है कि इसी बीच उस समय राहुल गांधी के कॉल करने के बाद स्थिति बदल गई. तब मुझे दुख हुआ था, इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ने का मन बना लिया. उन्होंने आगे कहा कि लेकिन अब मेरा मानना ​​है कि किसी की जिंदगी में जो कुछ भी होता है, वह अच्छे के लिए होता है और भगवान ने मुझे उनसे कहीं ज्यादा बीजेपी ने दिया है, जितना मुझे कांग्रेस में रहने पर शायद नहीं मिलता. उन्होंने 2015 में BJP में शामिल होने के लिए पार्टी छोड़ दी और विधानसभा चुनावों में भगवा पार्टी की पहली जीत सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई.

भविष्य में लिख सकता हूं किताब

हिमंत ने कहा कि वह 2021 से असम के मुख्यमंत्री हैं. वह बीजेपी के सीएम के तौर पर पूरे दिल से असम और सनातन धर्म दोनों की सेवा करने का मौका मिला, जो कांग्रेस में रहने पर मुमकिन नहीं होता. उन्होंने कहा कि अगर वह भविष्य में कोई किताब लिखेंगे तो इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताएंगे. जिससे लोगों को कांग्रेस के बारे में सही जानकारी मिल पाए.

अब AI में पैर जमाएंगे अडानी, करने जा रहे हैं इतने लाख करोड़ का निवेश…

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अडानी ग्रुप ने 17 फरवरी को कहा कि समूह 2035 तक रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाले AI-रेडी डेटा सेंटर बनाने के लिए 100 अरब डॉलर यानी करीब 9 लाख करोड़ का निवेश करेगा. कंपनी ने कहा कि इस निवेश से अगले दशक में स्वदेशी क्लाउड प्लेटफॉर्म और सर्वर मैन्युफैक्चरिंग सहित कई जुड़े हुए सेक्टर में करीब 150 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च होने की उम्मीद है.

कंपनी ने आगे कहा कि अडानी के इस निवेश से भारत में एक दशक में 250 अरब डॉलर का AI इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम तैयार होगा.

इस पहल के तहत एक लॉन्ग-टर्म स्वदेशी एनर्जी और कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा, जिसका मकसद उभरते AI रिवोल्यूशन में भारत को ग्लोबल लीडर बनाना है. उम्मीद है कि यह निवेश 2035 तक सर्वर मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वदेशी क्लाउड प्लेटफॉर्म और सहायक इंडस्ट्रीज में 150 अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश को बढ़ावा देगा. अनुमान है कि इससे अगले दस साल में भारत में 250 अरब डॉलर का AI इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम तैयार होगा.

एआई में आगे रहेगा भारत

अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने कहा कि दुनिया अब एक नई एआई क्रांति में प्रवेश कर रही है, जो पहले की किसी भी औद्योगिक क्रांति से कहीं ज्यादा गहरी और असरदार है. जो देश एनर्जी और कंप्यूटिंग को साथ जोड़ पाएंगे, वही अगले दशक की दिशा तय करेंगे. भारत इस रेस में आगे रहने की मजबूत स्थिति में है.

यह रोडमैप अडानी कॉनेक्स के मौजूदा 2 गीगावॉट के नेशनल डेटा सेंटर नेटवर्क पर आधारित है और इसे बढ़ाकर 5 गीगावॉट तक ले जाने का लक्ष्य है, जिससे भारत को ग्लोबल AI इकोनॉमी के केंद्र में लाया जा सके. इस विजन को गूगल के साथ विशाखापत्तनम में देश का सबसे बड़ा गीगावॉट-स्केल AI डेटा सेंटर कैंपस बनाने की साझेदारी और नोएडा में अतिरिक्त कैंपस के विकास से बल मिला है. साथ ही Microsoft के साथ हैदराबाद और पुणे में होने वाली पार्टनरशिप भी इसका अहम हिस्सा हैं.

एआई हब बनाने में अडानी ग्रुप की भूमिका

अडानी समूह ने यह भी कहा कि वह भारत में बड़े स्तर पर कैंपस बनाने के इच्छुक अन्य प्रमुख कंपनियों से बातचीत कर रहा है, जिससे भारत का AI इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में रोल और मजबूत होगा. Flipkart के साथ अपनी डेटा सेंटर पार्टनरशिप को और मजबूत करते हुए, समूह अगली पीढ़ी के डिजिटल कॉमर्स, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और बड़े AI वर्कलोड को सपोर्ट करने के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए दूसरे AI डेटा सेंटर के निर्माण पर काम करेगा.

5 गीगावॉट की यह परियोजना दुनिया का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म बनाने का लक्ष्य रखती है, जिसमें रिन्यूएबल पावर प्रोडक्शन, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और हाइपरस्केल AI कंप्यूटिंग को एक साथ जोड़ा जाएगा. कंपनी के मुताबिक, पारंपरिक डेटा सेंटर विस्तार के विपरीत, यह प्रोग्राम एक संयुक्त एनर्जी-और-कंप्यूट सिस्टम के रूप में तैयार किया गया है, जहां बिजली उत्पादन, ग्रिड की मजबूती और हाई-डेंसिटी प्रोसेसिंग क्षमता को साथ-साथ विकसित किया जाएगा.

कर्नाटक हाई कोर्ट से राहुल गांधी को बड़ी राहत, BJP नेता की याचिका खारिज, जानें क्या है पूरा मामला…

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कर्नाटक हाई कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ दायर एक मानहानि याचिका को खारिज कर दिया है. यह याचिका बीजेपी सरकार को निशाना बनाने वाले एक विज्ञापन से जुड़ी थी. राहुल गांधी ने 2023 में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान इसे अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से पोस्ट किया था.

जिसके बाद बीजेपी नेता ने राहुल गांधी के खिलाफ निजी शिकायत दर्ज कराई थी. जिसे बाद में राहुल गांधी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.

कर्नाटक BJP नेता केशव प्रसाद ने राहुल गांधी, सीएम सिद्धारमैया, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के खिलाफ कोर्ट में मानहानि का केस दायर किया था. बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रस पोर्टी के विज्ञापनों और कैंपेनिंग नारों का जिक्र किया था. विज्ञापनों के जिए कांग्रेस ने राज्य में उस समय सत्ता में काबिज बीजेपी पर सरकारी कामों को पूरा करने के लिए ठेकेदारों पर दूसरों से 40 प्रतिशत तक कमीशन लेने का आरोप लगाया था.

बीजेपी नेता ने लगाए थे गंभीर आरोप

केशव का आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने उस समय राज्य के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई समेत अन्य पार्टी नेताओं पर झूठा आरोप लगाया था. इतना ही नहीं झूठे विज्ञापन के जरिए इसे पूरे राज्य में फैलाया गया. जनता के बीच उनकी पार्टी और नेताओं के बारे में गलत मैसेज सर्कुलेट कराया गया. जिसका नतीजा यह हुआ कि उनकी पार्टी को विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर राहुल और दूसरे नेताओं पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया था.

सिद्धारमैया और शिवकुमार को मिली थी जमानत

इस पूरे मामले में मौजूदा सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को 1 जून 2024 को ही मजिस्ट्रेट कोर्ट ने जमानत दे दी थी. जबकि राहुल गांधी ने इस याचिका को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. इस मामले में जस्टिस सुनील दत्त यादव की अध्यक्षता वाली पीठ ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली. जस्टिस ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिका को खारिज कर दिया.

मुंबई में PM मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की मुलाकात, 114 राफेल-हैमर मिसाइल की खरीद पर लगेगी मुहर…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मुंबई के लोकभवन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात की. मुलाकात के बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी. इस दौरान 114 राफेल और हैमर मिसाइल की खरीद पर मुहर लगेगी.

इसके अलावा और भी कई मुद्दों पर चर्चा होगी. सूत्रों के मुताबिक, रक्षा व्यापार, कौशल, स्वास्थ्य और आपूर्ति श्रृंखला क्षेत्र में कई समझौते होंगे.

लगभग एक दर्जन समझौतों/एमओयू पर हस्ताक्षर होने की संभावना है. दोनों नेता संयुक्त रूप से भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष का उद्घाटन करेंगे. दोनों देशों में वर्ष 2026 को बतौर India France innovation year मनाया जाएगा. मैक्रों गुरुवार को दिल्ली में AI शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे. राष्ट्रपति मैक्रों पीएम मोदी के निमंत्रण पर 17 से 19 फरवरी तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए हैं.

मैक्रों ने मुंबई आतंकी हमले के पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि

यह उनकी भारत की चौथी और मुंबई की पहली यात्रा है. दोनों नेता मुंबई के लोक भवन में द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. आधिकारिक बयान के मुकाबिक, दोनों नेता भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सोमवार देर रात मुंबई पहुंचे. इसके बाद उन्होंने मुंबई के ताज महल पैलेस होटल में 26/11 मुंबई आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी.

पेंशनर्स की बल्ले-बल्ले! ₹1,000 की जगह मिल सकते हैं ₹3,570 से ₹12,500, जानें पूरा गणित…

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लेबर यूनियंस ने एक बार फिर ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 9,000 रुपए प्रति माह करने की मांग तेज कर दी है. लेकिन क्या मौजूदा 1,000 रुपए से इतनी बड़ी बढ़ोतरी संभव है? यह मुद्दा संसद और सुप्रीम कोर्ट में फिर से उठ खड़ा हुआ है, जिससे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा संचालित कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) 1995 के तहत पेंशन कैलकुलेशन पर फिर से ध्यान केंद्रित हो गया है.

आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर यूनियन की ओर से किस तरह की डिमांड की जा रही है. साथ ही इस पूरा कैलकुलेशन क्या है?

न्यूनतम पेंशन 9,000 रुपए की मांग

हाल ही में लोकसभा में एक प्रश्न में सांसद डॉ. किरसन नामदेव ने पूछा कि क्या भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) सहित विभिन्न श्रमिक यूनियनों ने सरकार से न्यूनतम ईपीएस पेंशन को बढ़ाकर 9,000 रुपये करने का आग्रह किया है. सदन को उत्तर देते हुए श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने पुष्टि की कि ट्रेड यूनियनों और जन प्रतिनिधियों से मौजूदा 1,000 रुपये प्रति माह से वृद्धि की मांग करते हुए अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं.हालांकि, सरकार ने वृद्धि के लिए कोई समयसीमा नहीं बताई.

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ईपीएस-95 एक “डिफाइंड कंट्रीब्यूशन-डिफाइंड बेनिफिट” योजना है. पेंशन फंड का कॉपर्स इन चीजों से बनता है:

– वेतन का 8.33 फीसदी इंप्लॉयर कंट्रीब्यूशन

– 15,000 रुपए तक की सैलरी पर केंद्र सरकार का 1.16 फीसदी कंट्रीब्यूशन

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार 1.16 फीसदी कंट्रीब्यूशन के अतिरिक्त बजटीय सहायता के माध्यम से न्यूनतम 1,000 रुपए प्रति माह पेंशन प्रदान कर रही है.

महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्तमान में 47,04,270 सक्रिय पेंशनर्स 9,000 रुपए प्रति माह से कम पेंशन प्राप्त कर रहे हैं. यह संख्या बताती है कि पेंशन रिविजन की डिमांड राजनीतिक और सामाजिक रूप से इतनी महत्वपूर्ण क्यों बनी हुई है.

9,000 रुपए तक की बढ़ोतरी मुश्किल क्यों दिखती है

1,000 रुपए से 9,000 रुपए तक की सीधी बढ़ोतरी का मतलब नौ गुना वृद्धि होगी. चूंकि ईपीएस निश्चित अंशदान प्रतिशत द्वारा वित्तपोषित है और लॉन्गटर्म स्थिरता के लिए हर साल इसका मूल्यांकन किया जाता है, इसलिए इतनी बड़ी वृद्धि से पेंशन फंड से होने वाला व्यय काफी बढ़ जाएगा. सरकार ने बार-बार यह दोहराया है कि किसी भी निर्णय लेने से पहले निधि की स्थिरता और भविष्य की देनदारियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है. यहीं पर सैलरी लिमिट का महत्व सामने आता है.

एससी ने दिया ये निर्देश

2026 की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार महीने के भीतर ईपीएफओ की 15,000 रुपए की सैलरी लिमिट की समीक्षा करने और संभवतः इसे बढ़ाने का निर्देश दिया. वर्तमान वेतन सीमा 1 सितंबर, 2014 से लागू है, जब इसे 6,500 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए कर दिया गया था. इससे पहले 6,500 रुपए की वेतन सीमा 1 जून, 2001 से प्रभावी थी.

कोर्ट के इस निर्देश से यह उम्मीद फिर से जगी है कि वेतन सीमा में संशोधन से पेंशन राशि में स्वतः वृद्धि हो सकती है – क्योंकि पेंशन सीधे पेंशन योग्य वेतन से जुड़ी होती है.

यदि सैलरी लिमिट 25 हजार हुई तो क्या होंगे बदलाव?

रिपोर्टों के अनुसार, सरकार सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने पर केंद्रित नए श्रम कानूनों के लागू होने के बाद ईपीएफओ की वेतन सीमा को 25,000 रुपए से 30,000 रुपए तक बढ़ाने पर विचार कर सकती है. अगर ऐसा हुआ तो ईपीएस:95 के तहत मंथली पेंशन क्या होगी. इसे एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं…

ईपीएस-95 के तहत, मंथली पेंशन का कैलकुलेशन एक फॉर्मूले से तय होता है.

(पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) / 70

पेंशन योग्य सैलरी : पिछले 60 महीनों के मूल वेतन और महंगाई भत्ते का औसत

न्यूनतम सेवा अवधि: 10 वर्ष

अधिकतम पेंशन योग्य सेवा अवधि: 35 वर्ष

न्यूनतम पेंशन (10 वर्ष की सेवा)

25,000 रुपए × 10 / 70 = 3,570 रुपए प्रति माह

अधिकतम पेंशन (35 वर्ष की सेवा)

25,000 रुपए × 35 / 70 = 12,500 रुपए प्रति माह

इससे पता चलता है कि यदि सैलरी लिमिट सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपए भी कर दी जाए, तो मात्र 10 वर्ष की सेवा वाले व्यक्ति के लिए न्यूनतम पेंशन लगभग 3,570 रुपए होगी, न कि 9,000 रुपए. 9,000 रुपए की एक साथ इजाफे की उम्मीद करने के बजाय, अधिक व्यावहारिक परिणाम सैलरी लिमिट में वृद्धि के साथ एक मामूली वृद्धि हो सकती है. यदि लिमिट को संशोधित करके 25,000 रुपए या 30,000 रुपए कर दिया जाता है, तो मौजूदा फार्मूले के तहत पेंशन आपने आप बढ़ जाएगी. सटीक राशि सर्विस के वर्षों पर निर्भर करेगी. सरकार ने संसद में अपने जवाब में, फंड की स्थिरता को ध्यान में रखते हुए, ईपीएफ, ईपीएस-95 और ईडीएलआई योजनाओं के तहत “मजबूत सोशल सिक्योरिटी कवरेज” के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है.

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के दौरे से क्या-क्या हो सकता है, टकटकी लगाकर देख रहे; चीन-PAK और अमेरिका…

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जर्मनी के पड़ोसी देश फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत पहुंच रहे हैं. मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे.

फ्रांस, भारत का सदाबहार मित्र है. आजकल फ्रांस को भारत का रफाल वाला यार भी कहा जाता है. इसलिए आपको ये जानना चाहिए कि जिस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड के मुद्दे पर मैक्रों के रुख से काफी नाराज हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का ये चौथा भारत दौरा है. लेकिन वो पहली बार देश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले शहर मुंबई में जाएंगे. प्रधानमंत्री मोदी मुंबई में मैक्रों से मुलाकात करेंगे. ये दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब रक्षा सहयोग और एआई टेक्नोलॉजी वैश्विक एजेंडे में सबसे ऊपर है और दुनिया के प्रभावशाली देश अपने अपने सहयोगियों का चुनाव कर रहे हैं.

भारत-फ्रांस के बीच कौन से अहम समझौते हो सकते?

भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी पहले से मजबूत है. अब इसे नई तकनीकों, स्पेस, साइबर सिक्योरिटी और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा तक बढ़ाने की तैयारी है. पहले दुनिया को दो अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों हिंद महासागर और प्रशांत महासागर में देखा जाता था. अब रणनीतिक दृष्टि से इन्हें एक ही बड़े क्षेत्र के रूप में देखा जाता है. जिसे इंडो-पैसिफिक कहा जाता है.

भारत और फ्रांस इसी क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता और समुद्री सुरक्षा को लेकर एक जैसी सोच रखते हैं. इसीलिए भारत और फ्रांस हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास और लॉजिस्टिक सपोर्ट बढ़ाने पर समझौता करने वाले हैं. फ्रांस भारत का भरोसेमंद रक्षा साझेदार रहा है. इस दौरे में दोनों देशों के बीच हेलीकॉप्टर, पनडुब्बी और जेट इंजन टेक्नोलॉजी में नए समझौते संभव हैं.

मैक्रों के दौरे पर चीन-PAK-अमेरिका की नजर

इसके अलावा भारत अपने एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए रफाल फाइटर जेट का मरीन वर्जन भी खरीद रहा है. इस दौरे में रफाल मरीन के दामों पर भी चर्चा हो सकती है. रफाल ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीनी फाइटर जेट से लड़ रहे पाकिस्तान के परखच्चे उड़ाए थे. इसलिए मैक्रों के भारत दौरे पर चीन और पाकिस्तान की भी नजर रहेगी.

भारत की योजना 10 साल के लिए फ्रांस के साथ रक्षा सहयोग समझौते का नवीनीकरण करने की भी है. इसके अलावा भारत और फ्रांस के बीच हैमर मिसाइलों के संयुक्त निर्माण के लिए समझौता हो सकता है. भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस मिसाइल का इस्तेमाल करने पाकिस्तान में जैश और लश्कर के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था.

मैक्रों AI इम्पैक्ट समिट में भी भाग लेंगे. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक और स्टार्टअप सहयोग पर भी कुछ बड़ा ऐलान हो सकता है.

भारत और फ्रांस के बीच छठा भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद होने जा रहा है. ये संवाद दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच होगा. पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों कर्नाटक के वेमगल में टाटा एयरबस की एच 125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे. H125 हेलीकॉप्टर डिजाइन और मूल तकनीक फ्रांस की है. जिसका भारत में निर्माण किया जा रहा है. यानी मैक्रों का ये दौरा भारत के लिए रक्षा और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में गेमचेंजर साबित हो सकता है. इस दौरे के जरिए भारत और फ्रांस वैश्विक शक्तियों को संदेश भी देंगे. दोनों देश किसी भी स्थिति में आंख मूंदकर किसी महाशक्ति के पीछे चलने को तैयार नहीं है, बस इतनी सी बात ट्रंप को परेशान कर सकती है.

भारत AI में महाशक्ति बनकर उभर रहा, उधर PAK में ‘टेरर इंटेलिजेंस’ की तैयारी से बढ़ी चिंता…

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दिल्ली में ग्लोबल साउथ की सबसे बड़ा AI समिट की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें 20 देशों को राष्ट्राध्यक्ष शामिल हो रहे हैं. दुनिया के टॉप क्लास टेक एक्सपर्ट भारत में हैं.

वो इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि कैसे AI का प्रयोग मानव कल्याण के लिए हो. लेकिन पाकिस्तान में इस बात पर माथापच्ची हो रही है कि कैसे आतंकवाद का हाईब्रिड मॉडल तैयार किया जाए. मतलब एक तरफ भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान टेरर इंटेलिजेंस यानी TI वाली साजिश का ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है. इसलिए अब बात हिंदुस्तान के AI बनाम पाकिस्तान के TI का विश्लेषण करने वाले हैं.

हिंदुस्तान का एआई Vs पाकिस्तान टीआई

महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि ‘विज्ञान और तकनीक मानवता को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम हैं’. विज्ञान और तकनीक को नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए नई दिल्ली में आज से AI समिट शुरू हो गई है.

भारत मंडपम में 26 फरवरी तक तक ये AI समिट होने वाली है. इस समिट को लिडिंग ग्लोबल AI फोरम कहा जा रहा है. समिट में 2 लाख से ज्यादा डेलिगेट्स शामिल हो रहे हैं. इसमें गूगल, Open AI, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी बड़ी टेक कंपनियों के CEO शामिल हैं. 800 से अधिक AI प्रॉडक्ट्स की प्रदर्शनी लगी है. इससे पहले ब्रिटेन, कोरिया, फ्रांस में AI समिट जरूर हुई थी, लेकिन जैसा भारत में हो रहा है, वैसा कहीं और कभी नहीं हुई.

इससे पहले AI को लेकर जो बैठकें हुई थी, वो इस बात पर फोकस था कि AI कितना खतरनाक है या AI को कैसे कंट्रोल किया जाए? लेकिन इस AI समिट का थीम है लोग, धरती और प्रगति. यानी इस बात पर चर्चा हो रही है कि AI से लोगों की जिंदगी को बेहतर कैसे बनाएं. मतलब ये सीधे तकनीक से आमलोगों की जिंदगी को बिल्कुल आसान बनाने वाला AI सम्मेलन है. इसमें दुनिया के लिए AI के नए नियम-कायदे बनाने की प्लानिंग भी हो रही है.

इस सम्मेलन से आमलोगों के जीवन पर कैसे व्यावहारिक असर पड़ने वाला है. ये हम आपको उदाहरण देकर समझाएंगे.

सोमवार को AI समिट में क्या-क्या हुआ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्सपो का उद्घाटन किया और वहां लगी प्रदर्शनी देखी. भारत ने इस सम्मेलन में खुद को AI के क्षेत्र में ग्लोबल साउथ के लीडर के तौर पर पेश किया. समिट में IndiaAI मिशन के तहत किए गए निवेश और स्वदेशी फाउंडेशन मॉडलों की उपलब्धि को भी साझा किया गया. वैश्विक टेक दिग्गजों ने भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर चर्चा की और ‘AI फॉर ऑल’ के तहत समावेशी विकास पर जोर दिया गया.

भारत AI में महाशक्ति बनकर कैसे उभर रहा है? भारत AI में आगे..PAK ‘टेरर इंटेलिजेंस’ में आगे दिल्ली में हो रहे सबसे बड़े AI समिट का विश्लेषण

AI समिट में शामिल हुए भारत के आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि डीपफेक लोगों का भरोसा तोड़ रहा है ऐसे में भरोसे वाली तकनीक बनाने की जरूरत है. भारत सरकार के जिन-जिन मंत्रालय ने AI तकनीक पर काम किया है, AI तकनीक का प्रयोग किया है उसको लेकर अलग-अलग मंत्रालय ने प्रदर्शनी लगाई है. भारत सरकार का पंचायती मंत्रालय बता रहा है कि कैसे AI के प्रयोग से फर्जीवाड़े को रोका जा रहा है. हम आपको वो AI तकनीक दिखाना चाहेंगे, जिससे पंचायती राज विभाग में भ्रष्टाचार को बेहद कम किया जा सकता है.

2025 की सबसे भ्रष्ट विभागों की सूची में ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर को चौथा सबसे भ्रष्ट विभाग माना गया है. भ्रष्टाचार को रोकने में ऐसी AI तकनीक महत्वपूर्ण हो सकती है. इसका सीधा फायदा आमलोगों को होगा. इस समिट में इस पर विस्तार से चर्चा हो रही है कि नौकरी, स्वास्थ, शिक्षा, खेती और जलवायु पर AI से कैसे मदद मिलेगी.

समिट में 300 से ज्यादा कंपनियां अपने AI प्रोडक्ट दिखा रही हैं. AI समिट में ऐसी तकनीकें दिखाई जा रही हैं जो एक साधारण एक्सरे या स्कैन देखकर कैंसर जैसी बीमारी का बहुत पहले पता लगा लेंगी. इससे इलाज सस्ता होगा और छोटे गांवों तक इसका फायदा पहुंचेगा. AI से गांव में भी तुरंत मेडिकल मदद और उचित डॉक्टरी सलाह मिलेगी. मेडिकल रिपोर्ट जल्दी चेक होगी, दवाइयां सस्ती होंगी.

AI से खेती में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है. AI मिट्टी की सेहत और मौसम का हाल देखकर बता देगा कि कौन सी फसल कब लगानी है और कब पानी देना है, जिससे किसानों की कमाई बढ़ेगी.

ये समिट भारत को AI में लीडर बना रहा है. मतलब हम विदेशी AI पर निर्भर नहीं रहेंगे. भारतीय भाषाओं में AI बनेगा, सस्ते फोन में चलेगा, जिससे गांव के लोगों को भी इससे फायदा मिल पाएगा. इससे सरकारी काम भी आसान हो जाएगा. घोटाले कम हो सकते हैं. भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा. काम तेजी से होंगे. ट्रैफिक कंट्रोल करने की तकनीक पर चर्चा हो रही है. कुल मिलाकर आप कह सकते हैं कि नई दिल्ली में होने वाला AI समिट, AI को आम आदमी का साथी बनाने का प्लेटफॉर्म है. इसलिए इस समिट पर दुनिया की नज़र है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो भी इसमें शामिल हुए.

आज नई तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी दुनिया की जरूरत बन चुका है. कैसे पूरी दुनिया AI के ईर्द-गिर्द खड़ी दिख रही है.

2024 में ही AI पर प्राइवेट निवेश में करीब 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई. ओलिवर वायमेन फोरम के मुताबिक 2030 तक ग्लोबल जीडीपी में AI 20 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त योगदान देगा. वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के फ्यूचर ऑफ जॉब्स की रिपोर्ट के मुताबिक AI से 8 करोड़ 30 लाख नौकरियां खत्म हो जाएंगी लेकिन AI की वजह से करीब 7 करोड़ नई नौकरियां भी आएंगी. मतलब लोगों की नौकरी पर AI से खतरा है.

एक्सरे या स्कैन जैसी जांच पड़ताल हो, दवाइयों की खोज हो या फिर वित्तीय लेनदेन में फ्रॉड को पकड़ने का साधन हो, हर जगह AI एक ‘बेस लेयर’ तकनीक बन चुका है.

यही कारण है कि आज AI सिर्फ टेक ट्रेड नहीं बल्कि हर अर्थव्यवस्था की एक कोर जरूरत बन चुका है. आज की तारीख में राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा, सुरक्षा और विकास तीनों इस AI के इर्द-गिर्द है. पिछले दिनों युद्धभूमि में भी AI का प्रयोग हुआ.

इसी साल 3 जनवरी को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका ने घर से उठा लिया था, इसमें भी अमेरिकी सेना ने AI का प्रयोग किया था. एंथ्रोपिक के AI क्लाउड का इस्तेमाल किया गया था, जिससे टारगेट के लोकेशन, उसे पहचानने और ऑपरेशन को एग्जिक्यूट करने में मदद मिली.

इससे पहले इजरायल ने भी गाजा में अपने ऑपरेशन के दौरान AI आधारित टार्गेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया था. रूस-यूक्रेन युद्ध में भी दोनों तरफ से AI का प्रयोग हो रहा है. भारत ने जब ऑपरेशन सिंदूर किया था, तब उसमें भी भारतीय सेना ने AI का इस्तेमाल किया था. यह भारत का पहला AI वाला ऑपरेशन था. जिसमें AI सिस्टम ने सेना को टारगेट की पिन प्वाइंट जानकारी दी.

DRDO की जिस तकनीक ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कमाल किया था, उसने भी AI के महाकुंभ में अपनी प्रदर्शनी लगाई है. DRDO किस तरह अपनी AI तकनीक को विकसित कर रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी AI की दुनिया में भारत समेत कई देश अपना दबदबा बना चुके हैं. इसमें अमेरिका अब भी शीर्ष पर है. हम आपको बताते हैं कि भारत कितने नंबर पर है. दुनियाभर के सभी बड़े मानकों के आधार पर 2026 की रिपोर्ट में ओवरऑल लीडरशिप में अमेरिका पहले स्थान पर है. दूसरे स्थान पर चीन है. जबकि तीसरे स्थान पर भारत है. AI तकनीक के क्षेत्र में भारत फिलहाल तीसरे स्थान पर है. निवेश, टैलेंट और एप्लिकेशन स्केल की वजह से भारत AI महाशक्ति के तौर पर तेजी से उभर रहा है.

2025 में भारत का AI बाजार 11 हजार 773 करोड़ रुपये का था. जो 2032 में बढ़कर करीब 12 लाख करोड़ रूपये तक पहुंचने की संभावना है. यानी 7 साल में भारत करीब 100 गुना ज्यादा बड़ा AI बाजार बन सकता है.

जबकि 2035 में AI का भारतीय बाजार 153 लाख करोड़ रूपये तक पहुंच सकता है.

अभी 62 प्रतिशत भारतीय कर्मचारी नियमित रूप से AI का उपयोग कर रहे हैं

जबकि 83 फीसदी भारतीय कर्मचारी साप्ताहिक रूप से AI उपयोग करते हैं

दुनिया भारत की तरफ देख रही है. दिल्ली में हो रहा AI समिट इसकी एक अहम कड़ी है. भारत विशुद्ध रूप से AI तकनीक का प्रयोग जीवन को बेहतर बनाने में कर रहा है. विकास का नया आयम गढ़ने में कर रहा है. लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान इस AI का प्रयोग भी आतंकवाद के लिए ही कर रहा है. पाकिस्तान की नेशनल काउंटर टेररिज्म अथॉरिटी खुद मानती है कि आतंकी समूह AI के माध्यम से डीपफेक वीडियो बनाते हैं और ऑनलाइन आतंकवाद को बढ़ाते हैं.

ऐसे ही वीडियो दिखाकर वे महिलाओं को भी अब आत्मघाती बना रहे हैं. 9 फरवरी को लाहौर के ऐवान-ए-इकबाल कॉम्प्लेक्स में लश्कर-ए-तैयबा की महिला विंग ‘तैयबात’ का एक बड़ा कार्यक्रम हुआ. बैठक में महिलाओं का माइंडवॉश किया गया. इससे पहले जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग ने भी ऐसी ही बैठकें की थी.

यही कारण है कि एक साथ आजाद हुए दो देशों में से पाकिस्तान जहां आतंकी बनाने में शीर्ष पर है तो भारत तकनीक का नया धुरंधर है. ये बताता है कि ‘सही दिशा में इस्तेमाल ज्ञान दुनिया बदल सकता है लेकिन गलत दिशा में वही ज्ञान विध्वंसक हथियार बन सकता है.

भारत ने रोका ईरान का ‘तेल खेल’! समुद्र में पकड़े गए 3 संदिग्ध टैंकर, वजह अमेरिका है या कुछ और?

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भारतीय तटीय अधिकारियों ने इस महीने की शुरुआत में ईरान से जुड़े और अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित तीन तेल टैंकरों को जब्त कर लिया है. सूत्रों के अनुसार, ये टैंकर स्टेलर रूबी, डामर स्टार और अल जाफजिया है.

जानकारी के अनुसार, ये टैंकर 6 फरवरी को भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों के बाद रोके गए थे.

भारतीय अधिकारियों ने मुंबई से लगभग 100 समुद्री मील पश्चिम में इन जहाजों को इंटरसेप्ट किया था. हालांकि इस संबंध में एक्स पर की गई आधिकारिक पोस्ट बाद में हटा दी गई. बताया गया है कि ये जहाज तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा थे, जो प्रतिबंधों से बचने के लिए बार-बार अपनी पहचान और पंजीकरण बदलते रहे हैं.

अमेरिका भी तीनों जहाजों पर लगा चुका है बैन

वॉशिंगटन डीसी स्थित शोध संस्थान फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज (FDD) के अनुसार, इन तीनों जहाजों पर पहले ही अमेरिका द्वारा ईरान से संबंधों के कारण प्रतिबंध लगाए जा चुके थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये टैंकर यूएई-आधारित भारतीय नागरिक जुगविंदर सिंह बराड़ द्वारा प्रबंधित 30-जहाजों के बेड़े का हिस्सा थे. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अप्रैल 2025 में उन्हें ईरानी पेट्रोलियम क्षेत्र में गतिविधियों के आरोप में नामित किया था. जब्ती के समय स्टेलर रूबी पर ईरानी झंडा फहरा रहा था.

बता दें कि ये कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब भारत और अमेरिका के संबंधों में हालिया सुधार देखा गया है. वाशिंगटन ने हाल ही में भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क को 50% से घटाकर 18% करने की घोषणा की थी. इसी दिन दोनों देशों ने एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार ढांचे का भी अनावरण किया था. इस घटना के बीच अमेरिकी सैन्य बलों ने वेनेजुएला से जुड़े अवैध तेल व्यापार के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए हिंद महासागर में एक अन्य प्रतिबंधित टैंकर पर चढ़ाई की.

पेंटागन के अनुसार, अमेरिकी सेना ने वेरोनिका III नामक जहाज को कैरेबियन सागर से ट्रैक करते हुए हिंद महासागर तक पीछा किया और राइट-ऑफ-विजिट, मैरीटाइम इंटरडिक्शन और बोर्डिंग की कार्रवाई की. अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि जहाज ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी क्वारंटाइन आदेश का उल्लंघन करने की कोशिश की थी.

इससे पहले वेनेजुएला के तेल पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को लागू करने के तहत कई टैंकरों को निशाना बनाया गया था. इस बीच, ईरान ने भी 8 दिसंबर को एमटी वैलिएंट रोअर नामक एक तेल टैंकर को जब्त किया था, जिसके चालक दल की रिहाई की मांग उनके परिवार कर रहे हैं.

DMK-कांग्रेस में तनातनी, सीट शेयरिंग को लेकर छिड़ी जुबानी जंग, अपनी ही पार्टी के नेता पर क्यों भड़के TNCC चीफ?

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तमिलनाडु में इसी साल विधानसभा चुनाव होना है. जिसे लेकर सभी पार्टियां दमखम लगा रही है. DMK की कोशिश है कि फिर से एक बार सरकार बनाई जाए जबकि विपक्षी पार्टियां उलटफेर के इरादे से मैदान में उतर रही है.

इससे पहले कांग्रेस और DMK के बीच गठबंधन को लेकर अंदरूनी तकरार छिड़ी है. सीट बंटवारे और सरकार में भागीदारी को लेकर तनाव फिर से उभर आया है. ऐसा तब हुआ जब कांग्रेस सांसद ने डीएमके को साल 2021 के चुनाव का याद दिलाया, आखिर क्या है पूरा माजरा? समझते हैं विस्तार के साथ.

क्या है माजरा?

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होना है, इसे लेकर तमिलनाडु सरकार में मंत्री राजा कन्नप्पन ने एक कार्यक्रम में कहा था कि डीएमके आगामी विधानसभा चुनाव में 160 से 170 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और पार्टी को भरोसा है कि वह 160 सीटें तक जीत सकती है. उनके इस बयान के बाद कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने DMK को साल 2021 का चुनाव याद दिला दिया और कहा कि 2021 में आपने 173 सीटों पर चुनाव लड़ा और 133 सीटें जीतीं. इसके बाद से दोनों के बीच चल रही अंदरूनी तकरार खुलकर सामने आ गई.

कांग्रेस में हो रही है आलोचना

उनके बयान के बाद जब सियासी माहौल खराब हआ तो TNCC (तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी) प्रमुख के. सेल्वापेरुन्थागाई ने उनके बयानों की आलोचना की. साथ ही कहा मैं एआईसीसी के निर्देशों का सख्ती से पालन करता हूं. हमें सार्वजनिक मंचों पर गठबंधन के बारे में बात न करने के लिए कहा गया है. कांग्रेस में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और के.सी. वेणुगोपाल ने हमें सार्वजनिक रूप से राय जाहिर न करने के लिए कहा है. साथ ही कहा कि आलाकमान के निर्देशों की अवहेलना करना गलत है. बता दें कि तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के चीफ के सेल्वापेरुंथगई को कांग्रेस प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खड़गे और के सी वेणुगोपाल का करीबी माना जाता है.

सीट साझेदारी को लेकर चर्चा

कांग्रेस सांसद का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब कुछ ही दिनों बांद DMK गठबंधन के साथ बैठक करने वाली है. कांग्रेस चाहती है कि सरकार में उन्हें भी हिस्सेदारी मिले लेकिन इससे पहले मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेन्नई में एक कार्यक्रम में साफ किया था कि तमिलनाडु में गठबंधन सरकार की कोई संभावना नहीं है. ऐसे में पेंच फंस गया है. कांग्रेस के एक सीनियर लीडर ने कहा कि सीटों की संख्या पर बातचीत अभी भी हो सकती है.

DMK कर सकती है बैठक

विधानसभा चुनाव को देखते हुए आगामी 22 फरवरी को डीएमके गठबंधन दलों के साथ सीट-बंटवारे पर बातचीत कर सकती है. इससे पहले कांग्रेस नेताओं का सार्वजनिक तौर पर बोलने से कांग्रेस में भी नाराजगी है. साथ ही साथ DMK नेता भी नाराज हैं.

‘सबूतों के साथ मामला केंद्र को सौंपा…’ गौरव गोगोई के पाकिस्तानी संबंधों पर CM सरमा का बड़ा बयान…

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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बार फिर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर निशाना साधते हुए कहा है कि गोगोई के कथित पाकिस्तानी संबंधों की जांच सभी साक्ष्यों के साथ केंद्र सरकार को सौंप दी गई है.

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब इस मामले की आगे की जांच केंद्र स्तर पर की जाएगी.

केंद्र सरकार करेगी मामले की जांच: सीएम सरमा

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि हमने इस मामले को सबूतों के साथ केंद्र सरकार को सौंप दिया है और केंद्र सरकार इस मामले की जांच करेगी. इससे पहले राज्य सरकार ने इस प्रकरण की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया था. मुख्यमंत्री ने बताया कि अब एसआईटी की जांच एक केंद्रीय एजेंसी को स्थानांतरित की गई है ताकि मामले की व्यापक और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके.

बता दें कि ये बयान असम की राजनीति में जारी तीखे आरोप-प्रत्यारोप के बीच आया है. मुख्यमंत्री सरमा पिछले कुछ समय से गौरव गोगोई और उनकी पत्नी पर पाकिस्तान से संबंध होने का आरोप लगाते रहे हैं. मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में दावा किया कि ये कार्रवाई भारत को अस्थिर करने के उद्देश्य से पाकिस्तान से जुड़े एक व्यापक नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख ने कथित तौर पर एक एजेंट के माध्यम से भारत के विकास का अध्ययन कर उसे बाधित करने की साजिश रची थी. सरमा के अनुसार, इस नेटवर्क में पर्यावरण सक्रियता जैसे मुद्दों का इस्तेमाल कर देश के विकास कार्यों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी.

गोगोई ने की थी पाकिस्तान की गुप्त की यात्रा: सीएम सरमा

मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि पूर्व सीएम तरुण गोगोई के पुत्र गौरव गोगोई ने इस नेटवर्क में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भूमिका निभाई थी. सरमा के अनुसार, गोगोई ने संवेदनशील संसदीय जानकारी जुटाने, पाकिस्तान की गुप्त यात्राएं करने और कई कार्यक्रमों के बहाने पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए रखने जैसे कदम उठाए थे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संदिग्ध रोजगार अनुबंधों, वित्तीय लेन-देन और यात्रा गतिविधियों के माध्यम से एक व्यापक भारत-विरोधी नेटवर्क संचालित किया गया.

मुख्यमंत्री के इन आरोपों ने असम की राजनीति में हलचल मचा दी है. हालांकि, गौरव गोगोई या कांग्रेस पार्टी की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. केंद्र को जांच सौंपे जाने के बाद यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्रीय एजेंसी जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं.