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छत्तीसगढ़ के किसानों के फैन हुए पीएम मोदी, अन्नदाताओं ने किया ऐसा काम कि ‘मन की बात’ में हुई तारीफ…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 132वें एपिसोड में मिडिल ईस्ट संकट के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की किसानों की सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 132वें एपिसोड में मिडिल ईस्ट संकट के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की किसानों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कोरिया जिले के किसानों ने अपनी मेहनत और नवाचार से गांव के जल संकट को कम करने में अहम भूमिका निभाई है।

‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का जिक्र

पीएम मोदी ने विशेष रूप से ग्राउंड वाटर के सुधार पर किए गए कार्य की तारीफ़ की और इसे अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बताया। प्रधानमंत्री ने बताया कि कोरिया के किसान छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाने जैसे प्रभावशाली उपायों पर काम कर रहे हैं। इन उपायों से बारिश का पानी सीधे खेतों में रुकता है, जिससे भूमिगत जल स्तर में सुधार हुआ है। पीएम मोदी ने बताया कि इस मॉडल को कोरिया जिले के 12 सौ से अधिक किसानों ने अपनाया है और इस प्रयास से उनकी फसलों की पैदावार में भी सुधार देखने को मिला है।

पीएम ने की कोरिया की तारीफ

पीएम मोदी ने कहा कि इस पहल के कारण गांव का ग्राउंड वाटर लेवल बहुत अच्छा हो गया है और स्थानीय किसानों को जल संरक्षण में मदद मिल रही है। उन्होंने किसानों की मेहनत और नवाचार की सराहना की और कहा कि इस तरह के प्रयास पूरे देश के किसानों के लिए सीख और प्रेरणा बन सकते हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी जोर दिया कि सामूहिक प्रयास और नई तकनीक अपनाने से कृषि और जल संरक्षण के क्षेत्र में स्थायी और सकारात्मक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

CG: पश्चिम एशिया की परिस्थितियों पर मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय समीक्षा: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कमिश्नर, आईजी और कलेक्टरों को दिए निर्देश’

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पेट्रोलियम, गैस और उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धताअफवाहों से दूर रहने की अपील’

आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी करने वालों पर कड़ी करवाई के निर्देश’

आमजनों की सुविधा के लिए बनाया गया है राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम:1800-233-3663 पर कॉल कर ले सकते है सही जानकारी’

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनज़र आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में पेट्रोलियम उत्पादों, एलपीजी गैस, उर्वरकों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता एवं आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि और संवेदनशील नेतृत्व के कारण कोविड जैसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी देश एकजुट रहा और सफलतापूर्वक उसका सामना किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में कोविड जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन सतर्क रहना आवश्यक है। प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों, गैस सिलेंडरों और उर्वरकों की कोई कमी नहीं है, अतः नागरिक किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम एशिया संकट पर सभी राज्यों के साथ विस्तृत चर्चा की गई है और यह आश्वस्त किया गया है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है। राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है तथा उच्च स्तरीय समिति द्वारा स्थिति की सतत निगरानी की जा रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में भी कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए तथा प्रभारी सचिव और कलेक्टर नियमित समीक्षा करें। अफवाहों और भ्रामक खबरों से बचने के लिए आमजन तक समय पर तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी या जमाखोरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। सभी पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों के भंडारण एवं आपूर्ति की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।उन्होंने अधिकारियों से टीम भावना के साथ कार्य करते हुए हर परिस्थिति में आमजन तक सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसीएल के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि प्रदेश में गैस एवं पेट्रोलियम पदार्थों की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति नियमित रूप से जारी है। गैस सिलेंडरों की ऑनलाइन बुकिंग सामान्य रूप से संचालित है।
उज्ज्वला गैस कनेक्शन के लिए 45 दिन तथा सामान्य गैस कनेक्शन के लिए 25 दिन की समय सीमा निर्धारित है और वर्तमान में उसी अंतराल के अनुसार बुकिंग की जा रही है। पेट्रोलियम पदार्थों के परिवहन में भी किसी प्रकार की बाधा नहीं है और पूरे प्रदेश में स्थिति सामान्य है।

मुख्य सचिव श्री विकास शील ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों की सतत निगरानी के लिए राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। उपभोक्ता घरेलू गैस आपूर्ति से संबंधित समस्याओं, शिकायतों अथवा कालाबाजारी की सूचना  1800-233-3663 पर दे सकते हैं।उन्होंने निर्देश दिए कि उक्त नंबर का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि आमजन को सही जानकारी समय पर उपलब्ध हो सके और शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में निर्देश दिए गए कि गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति से संबंधित समाचारों पर सतत निगरानी रखी जाए। भ्रामक खबरों से भय की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, अतः ऐसी खबरों का तत्काल संज्ञान लेकर वास्तविक जानकारी जनता तक पहुंचाई जाए। सोशल मीडिया की भी विशेष निगरानी रखने और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता, किसानों को समय पर मिलेगा खाद

वीडियो कांफ्रेंस के दौरान अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उर्वरकों की होल्डिंग पर रोक लगाई जाए और दैनिक स्टॉक की नियमित समीक्षा की जाए। सभी किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समान रूप से उर्वरक उपलब्ध कराया जाए।साथ ही खाद वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए सॉफ्टवेयर आधारित मॉनिटरिंग की जानकारी भी साझा की गई।

महत्वपूर्ण संस्थानों में गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश

मुख्यमंत्री श्री साय ने अस्पतालों, छात्रावासों, शैक्षणिक संस्थानों, रेलवे, भारत सरकार की संस्थाओं, सैन्य एवं अर्धसैनिक बलों, समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित संस्थानों और एयरपोर्ट कैंटीनों में गैस आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने के निर्देश दिए।

राज्यभर में सतत कार्रवाई—3841 सिलेंडर जब्त, 97 एफआईआर दर्ज

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेशभर में 335 स्थलों पर छापेमारी की गई, जिसमें कालाबाजारी की कोई पुष्टि नहीं हुई। हालांकि जमाखोरी की सूचना पर कार्रवाई करते हुए 3841 गैस सिलेंडरों को जब्त किया गया तथा 97 एफआईआर दर्ज की गई हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सीमावर्ती चेक पोस्टों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। गैस सिलेंडरों एवं पेट्रोल-डीजल वाहनों की आवाजाही पर निगरानी रखने के साथ ही निर्देश दिए गए कि पेट्रोल-डीजल को कंटेनरों में आम जनता को उपलब्ध न कराया जाए। केवल अधिकृत मोबाइल टावर एवं जेनसेट संचालित आवश्यक प्रतिष्ठानों को ही कंटेनर में ईंधन उपलब्ध कराया जाए।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संभागायुक्त, आईजी एवं जिला कलेक्टर भी बैठक में शामिल हुए।

बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजू एस, कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, खाद्य विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार सहित आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के पेट्रोल, डीजल एवं गैस डिवीजन के अधिकारी उपस्थित थे।

CG: 79 हजार से अधिक श्रमिकों को 27.15 करोड़ की सीधी सहायता…

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मेहनतकश श्रमिकों का सशक्तिकरण ही विकसित छत्तीसगढ़ की नींव है — मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर में आयोजित जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन में 79,340 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिजनों को 27.15 करोड़ रुपए की राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बावजूद छत्तीसगढ़ में पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ईंधन आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है, लेकिन केंद्र सरकार की प्रभावी विदेश नीति और विभिन्न देशों के साथ मजबूत संबंधों के कारण आपूर्ति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें और अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिससे लोगों में अनावश्यक भय और भ्रम का वातावरण बन रहा है।उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और पेट्रोल, डीज़ल या गैस का अनावश्यक भंडारण न करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे पहले ईंधन की उपलब्धता बनी रही है, वैसे ही आगे भी निर्बाध रूप से मिलती रहेगी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रमिकों के कल्याण के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित 12 विभिन्न योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों को बच्चे के जन्म पर 20,000 रुपए की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा मकान निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। श्रमिकों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ई-रिक्शा खरीदने में भी सहायता दी जा रही है, जिसे पहले 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। यदि किसी श्रमिक का बच्चा 10वीं या 12वीं बोर्ड परीक्षा में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करता है, तो उसे 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
इसके साथ ही मेधावी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पहले 100 बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 200 सीट कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए “दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना” संचालित की जा रही है, जिसके तहत ऐसे मजदूरों को सालाना 10,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
उन्होंने जानकारी दी कि हाल ही में लाखों भूमिहीन मजदूरों के खातों में लगभग 495 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि जनधन खातों के माध्यम से अब योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले भेजी गई राशि का बड़ा हिस्सा बीच में ही खत्म हो जाता था, लेकिन अब पूरी राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों मजबूत हुए हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रोविडेंट फंड (PF) प्रणाली को यूनिवर्सल बनाया गया है, जिससे श्रमिक देश के किसी भी हिस्से में काम करने पर अपना पीएफ लाभ जारी रख सकते हैं।

इसके अलावा न्यूनतम पेंशन राशि को बढ़ाकर 1000 रुपए किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ईएसआईसी अस्पतालों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों को बेहतर और निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन के अंत में श्रमिकों को प्रदेश के विकास की रीढ़ बताते हुए कहा कि उनके परिश्रम और योगदान से ही राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सभी श्रमिकों का सम्मान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रदेशभर में आयोजित हो रहे श्रमिक सम्मेलन—श्रम मंत्री

श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश में श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि श्रमिकों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचे और उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 20,000 रुपए, मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता, छात्रवृत्ति सहित कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही 10वीं और 12वीं में टॉप-10 में आने वाले श्रमिकों के बच्चों को 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले सवा दो वर्षों में 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे ट्रांसफर की गई है।

इसके अलावा “अटल शिक्षा योजना” के तहत श्रमिकों के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि श्रमिकों को योजनाओं का पूरा लाभ मिले और उनके जीवन स्तर में सुधार हो।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने भी राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए श्रमिकों से इनका अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।

इस अवसर पर श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती, नगर पालिका जशपुर के अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यशप्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष जशपुर श्री गंगाराम भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, श्रमिक बंधु एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

अर्थ आवर: आज पृथ्वी के लिए जिम्मेदारी निभाने का समय, रात 8:30 से 9:30 बजे तक बंद रखें लाइट…

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पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने वाला विश्व का सबसे बड़ा जन आंदोलन है अर्थ आवर। मार्च महीने के अंतिम शनिवार को अर्थ आवर मनाया जाता है। आज दुनियाभर में 8.30 से 9.30 के बीच यह मनाया जाएगा।

अर्थ आवर दुनियाभर के लोगों से अपील करता है कि वे अपनी अनावश्यक बत्तियां बंद कर दें। यह अभियान एक घंटा (60 मिनट) पृथ्वी के लिए समर्पित करने को कहता है। इस दौरान कोई भी सकारात्मक कार्य करने की सलाह देता है जैसे बिजली बचाना, पेड़ लगाना या पर्यावरण की रक्षा के लिए छोटा कदम उठाना।

अर्थ आवर की शुरुआत साल 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से हुई थी। विश्व वन्यजीव कोष द्वारा शुरू किया गया यह अभियान लोगों से अपील करता है कि वे रात में एक घंटे के लिए लाइट बंद कर दें। शुरुआत के समय यह सिर्फ एक शहर तक सीमित था और कुछ हजार लोगों ने इस मुहिम में हिस्सा लिया था, लेकिन पिछले 19 वर्षों में यह आंदोलन पूरे विश्व में फैल गया। आज 190 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में लाखों-करोड़ों लोग इसमें शामिल होते हैं।

इसके लिए संगठन रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक एक घंटे के लिए अपने घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों की अनावश्यक बत्तियां बंद करने की सलाह देते हैं। इस साल 2026 में अर्थ ऑवर अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। दो दशकों से यह अभियान पृथ्वी की रक्षा के लिए सामूहिक कार्रवाई और जागरूकता का प्रतीक बन गया है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सिर्फ एक घंटे की बिजली बचाना नहीं है। इसका मकसद लोगों को यह समझाना है कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी ऊर्जा का सही और जिम्मेदाराना उपयोग किया जा सकता है। बिजली की बचत से कार्बन उत्सर्जन कम होता है, जो जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में मदद करता है। एक घंटे की यह छोटी सी पहल बड़े स्तर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है।

भारत में अर्थ आवर का प्रभाव हर साल बढ़ रहा है। देश के प्रमुख शहरों में प्रसिद्ध स्मारक, सरकारी भवन, होटल, मॉल और निजी संस्थान इस मुहिम में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। सिर्फ लाइट बंद करने के अलावा पर्यावरण अनुकूल गतिविधियां, पेड़ लगाने, प्लास्टिक कम करने और सस्टेनेबल जीवन शैली अपनाने जैसे संदेशों पर जोर दिया जा रहा है। समुदाय स्तर पर कहानी कहने और सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा दिया जा रहा है।

Dollar vs Rupee: रुपया 95 के करीब पहुंचा, जानिए इतनी भारी गिरावट के पीछे क्या है कारण ?

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शुक्रवार को, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.7 के स्तर से नीचे गिर गया। यह अब तक का इसका सबसे कमज़ोर स्तर है। हालाँकि यह आँकड़ा शायद बहुत बड़ा न लगे, लेकिन यह उन बढ़ते दबावों को दिखाता है जो पिछले कुछ हफ़्तों से बन रहे हैं-ऐसे दबाव जिन्हें अब नज़रअंदाज़ करना मुश्किल हो गया है। रुपया चुपचाप देश के भीतर बढ़ते आर्थिक तनाव का एक मुख्य संकेतक बनकर उभरा है।

तेल की कीमतें: मुख्य वजह

फिलहाल, इस रुझान को बढ़ाने वाला सबसे अहम कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी है। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच, तेल की कीमतें एक बार फिर बढ़कर लगभग $110 प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं। इसके साथ ही, भारत के कच्चे तेल की बास्केट की कीमत भी लगभग $157 प्रति बैरल तक पहुँच गई है। यह देखते हुए कि भारत अपनी तेल की ज़रूरतों का 85-90% हिस्सा आयात करता है, कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का अर्थव्यवस्था पर सीधा और तुरंत असर पड़ता है।

महँगा तेल रुपये पर दबाव और बढ़ाता है

तेल की कीमतें बढ़ने का मतलब है कि भारत को उतनी ही मात्रा में तेल आयात करने के लिए ज़्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। डॉलर की इस बढ़ी हुई माँग से रुपये पर नीचे की ओर दबाव पड़ता है। इसके अलावा, इस समय वैश्विक पूँजी भारत से बाहर जा रही है।

विदेशी निवेशकों द्वारा निकासी

रॉयटर्स के अनुमानों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने हाल के हफ़्तों में भारतीय इक्विटी बाज़ार से लगभग $9.5 बिलियन निकाल लिए हैं। अनिश्चितता भरे माहौल में, निवेशक ज़्यादा सुरक्षित बाज़ारों, जैसे कि संयुक्त राज्य अमेरिका, की ओर रुख करते हैं। जब निवेशक किसी बाज़ार से निकलते हैं, तो वे अपनी भारतीय संपत्तियाँ बेच देते हैं और उससे मिली रकम को रुपये से डॉलर में बदल लेते हैं; इस प्रक्रिया से रुपये पर दबाव और भी बढ़ जाता है।

मज़बूत होता डॉलर: एक और वजह

अमेरिकी डॉलर भी लगातार मज़बूत हो रहा है, जिसे ऊँची बॉन्ड यील्ड और सुरक्षित निवेश (safe-haven investments) की बढ़ी हुई माँग से सहारा मिल रहा है। डॉलर के इस तरह मज़बूत होने से रुपये जैसी मुद्राओं के लिए अपनी स्थिरता बनाए रखना और भी मुश्किल होता जा रहा है।

समय के साथ गिरावट और तेज़ होती गई

पिछले कुछ सालों पर नज़र डालें तो यह गिरावट और भी साफ़ तौर पर दिखाई देती है। 2022 की शुरुआत में, डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 74 के स्तर पर था; अब यह 95 के स्तर के करीब पहुँच गया है। इसका मतलब है कि चार सालों के दौरान रुपये में लगभग 20 रुपये की गिरावट आई है। सिर्फ़ पिछले एक साल में ही, रुपये की कीमत 10% से ज़्यादा गिर गई है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, अगर ये दबाव बने रहे, तो रुपया और भी नीचे गिर सकता है, और डॉलर के मुकाबले 98 तक पहुँच सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर असर

रुपये की कमज़ोरी का असर सिर्फ़ एक्सचेंज रेट तक ही सीमित नहीं है। भारत का इंपोर्ट बिल FY27 में बढ़कर लगभग $911 बिलियन तक पहुँच सकता है; इससे पहले, यह आँकड़ा लगभग $814 बिलियन था। इस बीच, चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़कर GDP का 2.6% होने का अनुमान है। इसका मतलब है कि देश से ज़्यादा मात्रा में डॉलर बाहर जा रहे हैं-एक ऐसा कारण जो रुपये पर और भी ज़्यादा दबाव डालता है।

आम आदमी पर इसका क्या असर होगा?

रुपये के कमज़ोर होने से इंपोर्ट महँगा हो जाता है। इसमें तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद और दूसरी ज़रूरी चीज़ें शामिल हैं। इसका असर धीरे-धीरे साफ़ दिखाई देने लगता है: ईंधन की कीमतें बढ़ जाती हैं, ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता है, और खाने-पीने की चीज़ें भी महँगी हो जाती हैं। इसके अलावा, विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों को ज़्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं।

ईरान के खिलाफ जंग का एक महीना पूरा! जानिए अबतक जंग में कितनी हुई जान-माल की हानि, जाने कितने अरब का नुकसान ?

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अमेरिका-इजरायल गठबंधन ने यह सोचा था कि ईरान के खिलाफ हवाई हमलों का एक सीमित अभियान उसके शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर देगा, जिससे इस मुस्लिम देश में पश्चिमी समर्थक सरकार बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।

हालाँकि, ऐसा नहीं हुआ; संघर्ष शुरू होने के एक महीने बाद, स्थिति और भी ज़्यादा जटिल हो गई है। कई वरिष्ठ सैन्य और खुफिया अधिकारियों-जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला खामेनेई भी शामिल हैं-की मौत के बावजूद, तेहरान ने हार मानने से इनकार कर दिया है।

यह कैसे शुरू हुआ?

28 फरवरी को, वाशिंगटन और तेल अवीव ने मिलकर ईरान के कई शहरों, जिनमें तेहरान और मिनाब शामिल हैं, के खिलाफ हवाई हमले शुरू किए-ये हमले आज भी जारी हैं। ईरानी आंकड़ों के अनुसार, इन हमलों में अब तक लगभग 1,900 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 175 स्कूली छात्राएँ भी शामिल हैं। इस बीच, 32 लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए हैं। हाल ही में हुई एक ब्रीफिंग में, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने दावा किया कि ईरान में 10,000 से ज़्यादा ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है, जिनमें भूमिगत सुविधाएँ और रक्षा उद्योग से जुड़ी महत्वपूर्ण इमारतें शामिल हैं।

अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान के 150 से ज़्यादा नौसैनिक जहाजों को डुबो दिया है। जवाबी कार्रवाई में, ईरान ने मिसाइलें और ड्रोन दागे। इजरायल के अलावा, कुवैत, UAE, सऊदी अरब और जॉर्डन पर भी हमले किए गए। अबू धाबी में गिरते मलबे की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कुवैत के शुवैख बंदरगाह को सीधे तौर पर नुकसान पहुँचा।

मरने वालों की संख्या चिंताजनक है

*द इंडिपेंडेंट* के अनुसार, 28 फरवरी से अब तक, इस संघर्ष के परिणामस्वरूप 12 से ज़्यादा देशों में 4,500 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है-जिनमें अकेले ईरान में 1,900 लोगों की जान गई है। ईरानी मीडिया ने बताया कि दो बड़े स्टील संयंत्रों को नुकसान पहुँचा, और देश के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया गया। पेंटागन के पूर्व अधिकारी एल्ब्रिज कोल्बी का अनुमान है कि, सिर्फ़ पहले तीन हफ़्तों के भीतर ही, युद्ध से संबंधित नुकसान और क्षति की भरपाई के लिए अमेरिका को 1.4 अरब डॉलर से लेकर 2.9 अरब डॉलर (लगभग ₹27,510 करोड़) तक का खर्च उठाना पड़ा। लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच हुई झड़पों में 1,100 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई और लाखों लोग विस्थापित हुए।

ईरान को आर्थिक झटका

भारी बमबारी के बावजूद, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली-यह दुनिया की 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति का मुख्य रास्ता है। विरोधी देशों से जुड़े जहाज़ों को रोककर, उसने तेल की कीमतों को आसमान पर पहुँचा दिया।

अभी क्या स्थिति है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर आगे होने वाले हमलों को 10 दिनों के लिए टाल दिया है। उन्होंने कहा कि शांति वार्ता “बहुत अच्छी चल रही है।” हालाँकि, ईरान ने इन प्रस्तावों को “एकतरफ़ा और अनुचित” बताते हुए खारिज कर दिया। तेहरान की शर्तें अभी भी अटल हैं: होर्मुज जलडमरूमध्य पर संप्रभुता और युद्ध की क्षतिपूर्ति। इज़राइल के रक्षा मंत्री ने साफ़ तौर पर कहा है कि ईरान के खिलाफ हमलों में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

क्या ट्रंप-मोदी की बातचीत में एलन मस्क भी थे शामिल? विदेश मंत्रालय ने दिया स्पष्ट बयान…

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पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मौजूदा हालात को लेकर फोन पर बातचीत की। एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इस बातचीत में तीसरे प्रतिभागी के तौर पर एलन मस्क भी शामिल थे।

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अब इस मामले पर सफाई दी है।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हमने वह खबर देखी है।” उन्होंने आगे कहा कि 24 मार्च को हुई फोन पर बातचीत सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई थी। उन्होंने दोहराया कि, जैसा कि पहले बताया गया था, दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा का मुख्य विषय मध्य पूर्व में संघर्ष से पैदा हुई मौजूदा स्थिति थी।

रिपोर्ट में एलन मस्क के शामिल होने का दावा

यह ध्यान देने लायक है कि *द न्यूयॉर्क टाइम्स* की एक पिछली रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच हुई फोन कॉल में एलन मस्क भी शामिल थे। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि बातचीत में मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा हुई, जिसमें विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पर ध्यान केंद्रित किया गया था। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया था कि मस्क की मौजूदगी उनके और ट्रंप के बीच संबंधों में सुधार का संकेत हो सकती है; पिछले साल दोनों के बीच कुछ अनबन की खबरें सामने आई थीं। मस्क अंतरिक्ष, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से जुड़े हैं-ये ऐसे क्षेत्र हैं जिनका खाड़ी देशों और भारत जैसे क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

मोदी और ट्रंप के बीच क्या चर्चा हुई?

ट्रंप और मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर चर्चा की। बातचीत के दौरान, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया। यह समुद्री मार्ग भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके तेल और गैस आयात का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत इस क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति बनाए रखने के पक्ष में है।

शनिवार को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष पिछले एक महीने से जारी है, और भारत-अपने नागरिकों के भरोसे से ताकत पाकर-पूरी दृढ़ता के साथ इस संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत प्रभावित देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस आयात करता है; इसलिए, सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है कि इस संकट का बोझ आम परिवारों या देश के किसानों पर न पड़े।

हूती और हिज्बुल्लाह की एंट्री ने अब मिडल ईस्ट में बढ़ाया तनाव, परमाणु जंग की ओर बढ़ रही जंग ?

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अमेरिका-इजरायल गठबंधन और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुए ठीक एक महीना हो गया है। हर गुज़रते दिन के साथ, यह संघर्ष और भी ज़्यादा भीषण होता जा रहा है, क्योंकि अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच ईरान भी जवाबी हमले करना जारी रखे हुए है।

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को फिर से खोलने की अमेरिका की कोई भी रणनीति कारगर साबित नहीं हुई है। इस बीच, ईरान के परमाणु ठिकानों पर इजरायल के हमलों ने इस संघर्ष को एक और भी ज़्यादा खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है। हौथी विद्रोहियों के हाल ही में इस लड़ाई में शामिल होने से युद्ध का स्वरूप और भी ज़्यादा तीव्र होता जा रहा है। लेबनान में, हिज़्बुल्लाह पहले ही यह कसम खा चुका है कि वह इस संघर्ष से पीछे नहीं हटेगा। इन घटनाक्रमों के बीच, मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध हौथी विद्रोहियों के हमलों के कारण लगातार एक विनाशकारी रूप लेता जा रहा है।

ईरान, इजरायल के ठिकानों और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर लगातार हमले कर रहा है। ईरान की तरफ से, हिज़्बुल्लाह मोर्चे की अगली कतारों पर मज़बूती से डटा हुआ है। हौथी विद्रोहियों के शामिल होने से अब यह संघर्ष और भी ज़्यादा खतरनाक हो गया है। नतीजतन, व्यापक रूप से यह माना जा रहा है कि अमेरिका निकट भविष्य में ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है। कई मोर्चों पर ईरान की घेराबंदी-साथ ही उसके परमाणु ठिकानों को लगातार निशाना बनाना-इस व्यापक रणनीति का एक अभिन्न अंग माना जा रहा है।

अमेरिका की तैयारियों का स्वरूप क्या है?

अमेरिका ईरान को घुटनों पर लाने की हरसंभव कोशिश कर रहा है; हालाँकि, ईरान किसी भी कीमत पर पीछे न हटने के अपने फैसले पर अडिग है। ईरान के लगातार जवाबी हमलों को देखते हुए, क्या अमेरिका ने अब एक निर्णायक और अंतिम प्रहार करने की अपनी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं? क्या यह संघर्ष अब एक परमाणु युद्ध की ओर बढ़ता हुआ प्रतीत हो रहा है? वास्तव में, मध्य पूर्व में चल रही शत्रुता अब एक ऐसे नाजुक मोड़ पर पहुँच गई है जहाँ एक अत्यंत अशुभ प्रश्न स्पष्ट रूप से सामने आ खड़ा हुआ है: क्या अब ईरान परमाणु बम बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा?

ईरान में परमाणु हथियार बनाने की मांग

विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के भीतर धार्मिक नेताओं का एक गुट अब खुले तौर पर परमाणु हथियार विकसित करने की वकालत कर रहा है। ईरान पहले ही यूरेनियम को उस स्तर तक संवर्धित कर चुका है जो हथियार-ग्रेड शुद्धता के काफी करीब है; काफी समय से, इजरायल यह दावा करता रहा है कि तेहरान के पास कुछ ही महीनों के भीतर परमाणु बम बनाने की क्षमता मौजूद है। ऐसा माना जाता है कि यही कारण है कि अमेरिका और इजरायल अब लगातार ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से, ईरान के परमाणु ठिकानों पर लगातार हमले हो रहे हैं। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी ज़ोर देकर कहा है कि अमेरिका मध्य पूर्व में परमाणु खतरों को खत्म करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

इन घटनाक्रमों के बीच, ट्रंप ने कहा, “हम मध्य पूर्व में परमाणु खतरों को खत्म कर रहे हैं। मेरे नेतृत्व में, अमेरिका इस कट्टरपंथी शासन से पैदा हुए खतरे को बेअसर कर रहा है और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के ज़रिए ईरान की ताकत को तबाह कर रहा है। हमारे पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है-जिसे मैंने अपने पहले कार्यकाल के दौरान बनाया था। हमारे पास ऐसे हथियार हैं जिन्हें पहले किसी ने नहीं देखा है, और जिनके बारे में-कुछ चुनिंदा लोगों को छोड़कर-किसी को पता भी नहीं है। 47 सालों तक, ईरान को मध्य पूर्व का दादा माना जाता था; लेकिन अब, वह भाग रहा है।”

यूरेनियम प्रोसेसिंग प्लांट पर हमला

शुक्रवार को, इज़रायल ने ईरान के यज़्द में एक यूरेनियम प्रोसेसिंग प्लांट को निशाना बनाया। इज़रायली सेना के अनुसार, यह हमला उस खास सुविधा पर किया गया जहाँ यूरेनियम संवर्धन के लिए ज़रूरी प्रोसेसिंग होती है। परमाणु ठिकानों पर अमेरिका और इज़रायल के इन संयुक्त हमलों ने ईरान के गुस्से को और भड़का दिया है। ईरान के उप विदेश मंत्री, अब्बास अराक़ची ने चेतावनी दी है कि इज़रायल को इन हमलों के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

क्या युद्ध कुछ ही हफ्तों में खत्म हो सकता है?

इस बीच, कूटनीतिक बातचीत को लेकर अलग-अलग दावों के बीच, अमेरिका लगातार ईरान को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। फ़ारसी खाड़ी में द्वीपों पर कब्ज़ा करने की रणनीति से जुड़ी रिपोर्टें भी सामने आई हैं। क्या इसका मतलब यह है कि अमेरिका ने अब ईरान के साथ निर्णायक टकराव के लिए पूरी तैयारी कर ली है? यह सवाल हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो द्वारा इस संघर्ष के बारे में किए गए एक बड़े दावे की रोशनी में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। रूबियो ने दावा किया कि यह युद्ध संभवतः कुछ ही हफ्तों में खत्म हो सकता है। इस दावे के बाद, यह व्यापक रूप से माना जा रहा है कि अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए जाने वाले हमलों की तीव्रता और बढ़ सकती है। ईरान के सैन्य ठिकानों के साथ-साथ, उसके परमाणु संयंत्रों को भी निशाना बनाया जाएगा। नतीजतन, इन हमलों के कारण संघर्ष के और बढ़ने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: द्रमुक ने सहयोगियों के साथ सीट बंटवारा पूरा किया…

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द्रमुक और सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे की प्रक्रिया

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक ने शनिवार को विधानसभा चुनावों के लिए अपने सहयोगियों के साथ सीटों के बंटवारे की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

इस प्रक्रिया में कांग्रेस, वामपंथी दलों, वीसीके और डीएमडीके जैसे अन्य दलों द्वारा चुनाव लड़े जाने वाले निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान की गई है।

राज्य में मतदान 23 अप्रैल को होगा। द्रमुक, धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) का नेतृत्व कर रही है। समझौते के अनुसार, द्रमुक की प्रमुख सहयोगी कांग्रेस को 28 सीटें आवंटित की गई हैं, जिनमें पोन्नेरी, इरोड ईस्ट, विलावंकोड, शिवकाशी और कराईकुडी शामिल हैं।

प्रेमलता विजयकांत के नेतृत्व वाली डीएमडीके को पहले से ही 10 सीटें दी गई हैं, जिनमें विरुधाचलम और पल्लावरम शामिल हैं। थोल थिरुमावलवन के नेतृत्व वाली वीसीके को आठ सीटें मिली हैं, जिनमें कट्टुमन्नारकोइल, पनरुत्ती और तिंडीवनम शामिल हैं। माकपा को पद्मनाभपुरम और पलानी सीटें दी गई हैं, जबकि भाकपा थल्ली और भवानीसागर (एससी) सहित अन्य सीटों पर चुनाव लड़ेगी। दोनों वामपंथी दलों को पांच-पांच सीटें आवंटित की गई हैं।

इसके अलावा, द्रमुक ने अन्य सहयोगी दलों के लिए भी सीटें निर्धारित की हैं, जिसमें वाइको के नेतृत्व वाली एमडीएमके भी शामिल है, जो चार सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

बोडोलैंड क्षेत्र में विकास के लिए भाजपा और बीपीएफ का एकजुट होना आवश्यक: मुख्यमंत्री…

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मुख्यमंत्री का विकास पर जोर

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को बोडोलैंड क्षेत्र (BTR) में गठबंधन-आधारित विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में प्रगति तभी संभव है जब भाजपा और बीपीएफ एक साथ हों।

उन्होंने कहा, “आज के समय में, BTR में विकास तभी होगा जब भाजपा और बीपीएफ एकजुट हों। यदि गठबंधन में कोई अन्य पार्टी शामिल है, तो वह क्षेत्र के लिए काम नहीं कर सकेगी।” यह बयान उस समय आया जब यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (UPPL) ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।

बिजनी में अपने “विजय संकल्प यात्रा” के दौरान भाजपा उम्मीदवार अरूप कुमार डे के समर्थन में एक चुनावी रैली के दौरान, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में भाजपा, बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (BPF) और असम गण परिषद (AGP) शामिल हैं।

UPPL के स्वतंत्र चुनावी प्रयास पर टिप्पणी करते हुए, उन्होंने कहा कि यह पार्टी अब NDA का हिस्सा नहीं है और स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है। उन्होंने विकास और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भाजपा और बीपीएफ के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह विधानसभा में लगभग 20-25 सीटों तक सीमित रहेगा।

रैली में महिलाओं को संबोधित करते हुए, सरमा ने कल्याणकारी पहलों का उल्लेख किया और नए राशन कार्ड जारी करने और ओरुनोडोई योजना के तहत 10,000 महिलाओं को शामिल करने की घोषणा की, जिसमें प्रत्येक को 9,000 रुपये मिलेंगे।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल का समर्थन करने की खबरों पर, मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है।

इस कार्यक्रम में उपस्थित BPF प्रमुख हाग्रामा मोहिलारी ने मतदाताओं से क्षेत्र से एकजुट जनादेश देने की अपील की।

उन्होंने कहा, “हमारी जिम्मेदारी है कि हम BTR से 15 विधायक एकजुट होकर डिसपुर भेजें।”

समावेशी विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “मुस्लिम, बंगाली, गारो, राभा या राजबोंगशी समुदायों की परवाह किए बिना, BTC को विकास, शांति और एकता की आवश्यकता है।”

उन्होंने प्रतिकूल उम्मीदवारों पर मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगाया।

जब सरमा बिजनी से तमुलपुर की ओर बढ़े, तो उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आने वाले दिनों में क्षेत्र में प्रचार करेंगे।

UPPL के स्वतंत्र चुनावी प्रयास और NDA द्वारा भाजपा-BPF संयोजन को विकास के लिए केंद्रीय बताने के साथ, BTR एक करीबी मुकाबले के लिए तैयार है क्योंकि प्रचार अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है।