Home Blog Page 21

cg” खरीफ मौसम में धान की जगह उद्यानिकी फसल अपनाकर बढ़ाई आय, कम पानी में लाभकारी खेती की ओर बढ़े कदम…”

0

राजनांदगांव जिले में खरीफ मौसम के दौरान फसल विविधीकरण की दिशा में किसानों का बढ़ता रूझान खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना रहा है।

कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग तथा निरंतर जागरूकता प्रयासों के परिणामस्वरूप किसान अब परंपरागत धान की खेती के स्थान पर उद्यानिकी, दलहन एवं तिलहन जैसी कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को अपना रहे हैं।

इससे उत्पादन लागत में कमी आने के साथ किसानों की आय में वृद्धि हो रही है तथा जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम जंगलेसर में इस खरीफ सीजन में किसानों ने लगभग 21 एकड़ से अधिक कृषि भूमि में धान के स्थान पर कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों की खेती करने का निर्णय लिया है।

इस बदलाव में ग्राम के प्रगतिशील किसान श्री दौलतराम साहू अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं। किसान श्री दौलतराम साहू ने बताया कि उनके पास लगभग 8 एकड़ कृषि भूमि में खेती-किसानी करते है।

जिसमें वे वर्षों से धान की खेती करते आ रहे थे। लेकिन अधिक पानी की आवश्यकता, बढ़ती उत्पादन लागत और मौसम पर अत्यधिक निर्भरता के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था।

इसी दौरान कृषि एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा आयोजित किसान संगोष्ठियों, फसल विविधीकरण अभियान तथा तकनीकी मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने पिछले वर्ष अपनी भूमि के एक हिस्से में उद्यानिकी फसल की खेती की।

इस प्रयोग से उन्हें अपेक्षा से अधिक लाभ प्राप्त हुआ, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा।

किसान श्री दौलतराम साहू ने बताया कि इस खरीफ मौसम में अपनी पूरी कृषि भूमि में धान के स्थान पर उद्यानिकी फसल की खेती करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि उद्यानिकी एवं अन्य वैकल्पिक फसलों में धान की तुलना में सिंचाई के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है, उत्पादन लागत भी कम आती है तथा बाजार में बेहतर मूल्य मिलने से अधिक मुनाफा प्राप्त होता है।

फसल विविधीकरण अपनाने के बाद उनकी खेती पहले की तुलना में अधिक लाभकारी बन गई है और उन्हें विश्वास है कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक फसलें अपनाकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।

श्री दौलतराम साहू ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा खरीफ वर्ष 2026 से किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। अब धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रूपए प्रति एकड़ की आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

उन्होंने इस किसान हितैषी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने जिले के अन्य किसानों से भी अपनी भूमि, पानी की उपलब्धता और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उद्यानिकी, दलहन एवं तिलहन जैसी कम पानी वाली फसलों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण केवल आय बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने का प्रभावी उपाय भी है।

cg” बिजली बिल हुआ शून्य, ईवी चार्जिंग भी हुई आसान” ” सरकार की सहायता से सौर ऊर्जा अपनाना हुआ आसान”

0

– श्री रमन नाहटा से प्रेरित होकर उनके दो मित्रों ने भी अपने घरों में लगवाया सोलर रूफटॉप”

राजनांदगांव। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के साथ-साथ बिजली खर्च में बचत का प्रभावी माध्यम बन रही है। जिले के डोंगरगांव निवासी एवं पेपर कप निर्माण इकाई संचालित करने वाले श्री रमन नाहटा इस योजना का लाभ लेकर न केवल अपने घर का बिजली बिल लगभग शून्य कर चुके हैं, बल्कि अपनी इलेक्ट्रिक कार की चार्जिंग भी सौर ऊर्जा से कर रहे हैं।

श्री रमन नाहटा ने बताया कि लगभग 6 माह पूर्व उन्होंने अपने आवास में 3 किलोवॉट क्षमता का रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कराया। इसके पहले उनके घर का मासिक बिजली बिल लगभग 1600 रूपए से 1800 रूपए तक आता था। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के बाद बिजली की खपत और बढ़ गई थी। ऐसे में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना उनके लिए काफी लाभकारी साबित हुई।

उन्होंने बताया कि उन्हें इस योजना की जानकारी बैंक के माध्यम से मिली। बैंक अधिकारियों ने योजना की पूरी प्रक्रिया में सहयोग किया, जिससे आवेदन, वित्तीय सहायता एवं अन्य औपचारिकताएं आसानी से पूरी हो गई। सोलर संयंत्र की कुल लागत लगभग 2 लाख 5 हजार रूपए आई, जिसमें डाउन पेमेंट के बाद लगभग 1 लाख 80 हजार रूपए का बैंक ऋण मिला। इसके साथ ही केन्द्र एवं राज्य शासन की ओर से लगभग 1 लाख 8 हजार रूपए की सब्सिडी भी शीघ्र ही समय में प्राप्त हो गई।

श्री नाहटा ने बताया कि सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद उनका बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है। सामान्य दिनों में संयंत्र से पर्याप्त बिजली उत्पादन हो रहा है, जिससे घरेलू जरूरतों के साथ इलेक्ट्रिक वाहन की चार्जिंग भी आसानी से हो जाती है। इससे हर महीने होने वाला बिजली खर्च काफी कम हो गया है और भविष्य में यह निवेश उनके लिए और अधिक लाभकारी साबित होगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से आम लोगों को निश्चित रूप से लाभ मिलेगा। सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के कारण सोलर संयंत्र लगाना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। उन्होंने बताया कि उनके सोलर प्लांट को देखकर उनके दो मित्र भी अपने घरों में रूफटॉप सोलर लगवा चुके हैं तथा आसपास के कई लोग भी इस योजना की जानकारी लेकर इसे अपनाने में रूचि दिखा रहे हैं। श्री नाहटा ने कहा कि सौर ऊर्जा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ घरेलू बजट को संतुलित रखने का भी प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि जो भी परिवार बिजली पर नियमित खर्च करते हैं, उन्हें इस योजना का लाभ अवश्य लेना चाहिए। इससे लंबे समय में बिजली पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाता है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जिले में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ आम नागरिकों की बिजली लागत कम करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हो रही है।

cg” विकसित भारत जी-राम-जी योजना ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास तथा गरीब व जरूरतमंद परिवारों के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल…”

0

– योजना से ग्रामीण मजदूरों को 125 दिवस का मिलेगा रोजगार”
– विकसित भारत – रोजगार गारंटी एवं आजीवका मिशन ग्रामीण का हुआ शुभारंभ”

राजनांदगांव। विकसित भारत – रोजगार गारंटी एवं आजीवका मिशन ग्रामीण के शुभारंभ अवसर पर आज वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह अपने विधानसभा निवास कार्यालय से तथा जिला पंचायत सभाकक्ष से सांसद श्री संतोष पाण्डेय, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव, कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी कार्यक्रम से जुड़े।

सांसद श्री संतोष पाण्डेय ने कहा कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास तथा गरीब परिवारों के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत रोजगार के अवसरों का विस्तार किया गया है तथा जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, कृषि विकास, भूमि सुधार, ग्रामीण सड़क निर्माण एवं सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण जैसे कार्यों को शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि योजना में रोजगार की अवधि बढ़ाकर 125 दिवस किए जाने से ग्रामीण मजदूरों को अतिरिक्त रोजगार मिलेगा तथा गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के गरीब कल्याण और किसान हितैषी संकल्प को यह योजना और अधिक प्रभावी बनाएगी।

उन्होंने योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

अध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती किरण वैष्णव ने कहा कि योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ-साथ आजीविका, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन तथा आधारभूत अधोसंरचना विकास को नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत 100 दिवस का रोजगार मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिवस कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से सड़क, पुल-पुलिया, नहर, जल संरक्षण सहित विभिन्न विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीणों का पलायन कम होगा।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को साकार करने में यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से ग्रामीण क्षेत्रों में योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक लोगों को इससे जोडऩे का आग्रह किया।

कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने कहा कि विकसित भारत – रोजगार गारंटी एवं आजीवका मिशन ग्रामीण योजना में रोजगार की अवधि 100 दिवस से बढ़ाकर 125 दिवस किए जाने से श्रमिक परिवारों को अतिरिक्त रोजगार और आय का अवसर मिलेगा।

उन्होंने बताया कि योजना का दायरा बढ़ाते हुए जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, ग्रामीण आवश्यकताओं पर आधारित निर्माण कार्यों तथा अन्य विकास कार्यों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि योजना का विशेष फोकस ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर है।

जिले में एक लाख 30 हजार से अधिक महिला स्वसहायता समूह सदस्य सक्रिय हैं और उनकी भागीदारी से योजना के बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता तथा पलायन रोकने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती प्रतिमा चंद्राकर, अध्यक्ष राजगामी संपदा न्यास श्रीमती पूर्णिमा साहू, उपाध्यक्ष जनपद पंचायत श्रीमती अनिता सिन्हा, उपाध्यक्ष राजगामी संपदा न्यास श्री मनोज निर्वाणी, जिला पंचायत सदस्य श्री गोपाल सिंह भूआर्य, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती बिरम बाई मंडावी, जिला पंचायत सदस्य श्री अंगेश्वर देशमुख, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती शीला सिन्हा, श्री कोमल सिंह राजपूत, श्री संतोष अग्रवाल, श्री राजेश श्यामकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

cg” छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा मंच, वार्षिक आयोजनों के लिए कलाकारों से आवेदन आमंत्रित…”

0

” 15 जुलाई तक कर सकते हैं आवेदन, शास्त्रीय संगीत, लोककला, नाट्य एवं वाद्ययंत्र प्रस्तुतियों के लिए होगा चयन”

छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को नई पहचान देने और लोक एवं शास्त्रीय कलाओं को व्यापक मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा, छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2026-27 के वार्षिक सांस्कृतिक आयोजनों के लिए कलाकारों एवं सांस्कृतिक दलों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। विभाग द्वारा आयोजित इन प्रतिष्ठित आयोजनों के माध्यम से प्रदेश के प्रतिभाशाली कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा, वहीं विलुप्त होती लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन को भी नई गति मिलेगी।

संस्कृति विभाग प्रतिवर्ष प्रदेशभर में विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों का आयोजन करता है, जिनमें शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य, लोकसंगीत, लोकनृत्य, नाट्य प्रस्तुतियां तथा पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियां शामिल रहती हैं। इसी क्रम में वर्ष 2026-27 के लिए पावस प्रसंग (शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य), रंगतरंग वाद्ययंत्र संगम, रंगपरब नाट्य श्रृंखला तथा लोकरंग पर्व के लिए कलाकारों का चयन किया जाएगा।

विशेष रूप से लोकरंग पर्व के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककलाओं एवं लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा, गम्मत, सुआ, करमा, पंथी, बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत, संस्कार गायन सहित अन्य पारंपरिक लोकविधाओं में दक्ष कलाकार आवेदन कर सकते हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य प्रदेश की  लोक-सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और कलाकारों को सशक्त मंच उपलब्ध कराना है।

आवेदन करने वाले कलाकारों एवं सांस्कृतिक दलों का चिन्हारी पंजीकरण होना आवश्यक है तथा समूह प्रस्तुति के इच्छुक कलाकार निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा, द्वितीय तल, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल व्यवसायिक परिसर, सेक्टर-27, नवा रायपुर स्थित कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं। निर्धारित ई-मेल  ैंदेातपजपण्तंरइींेीं/हउंपसण्बवउ  के माध्यम से भी आवेदन भेजने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

संस्कृति विभाग ने आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2026 निर्धारित की है। विभाग ने प्रदेश के पात्र कलाकारों एवं सांस्कृतिक दलों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन प्रस्तुत कर इन महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजनों में सहभागिता सुनिश्चित करने तथा छत्तीसगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की अपील की है।

cg” जनदर्शन में मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं, त्वरित समाधान के दिए निर्देश…”

0

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने जनदर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत आज विकासखंड लखनपुर की ग्राम पंचायत परसोंडी पहुंचकर ग्रामीणजनों से आत्मीय भेंट-मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं, सुझावों एवं आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जनदर्शन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। उन्होंने पेयजल, सड़क, विद्युत, राजस्व, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य स्थानीय आवश्यकताओं से जुड़े विषय मंत्री श्री अग्रवाल के समक्ष रखे। मंत्री श्री अग्रवाल ने प्रत्येक आवेदन पर गंभीरता से चर्चा करते हुए अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने तथा पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का शीघ्र लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

ग्रामीणों से संवाद करते हुए मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जनदर्शन कार्यक्रम शासन और जनता के बीच विश्वास का मजबूत माध्यम है, जहां आम नागरिक अपनी बात सीधे रख सकता है और समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को गति मिलती है।

उन्होंने कहा कि जनता का स्नेह, विश्वास और सहयोग ही उन्हें निरंतर जनसेवा के लिए प्रेरित करता है। क्षेत्र के प्रत्येक नागरिक की अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए विकास के संकल्प को साकार करना उनकी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास, मूलभूत सुविधाओं के विस्तार तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है।

मंत्री श्री अग्रवाल ने अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन समस्याओं का तत्काल समाधान संभव है, उनका शीघ्र निराकरण किया जाए।

जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के सहज, सरल एवं संवेदनशील व्यवहार की सराहना करते हुए अपनी समस्याओं को गंभीरता से सुनने और उनके समाधान के लिए त्वरित पहल करने पर आभार व्यक्त किया। जनदर्शन के इस कार्यक्रम ने शासन और आमजन के बीच संवाद, विश्वास और सहभागिता को और अधिक सुदृढ़ करने का कार्य किया।

cg” सेवा सेतु – आसान सेवाएं, सशक्त नागरिक…

0

” समय पर मिला निवास प्रमाण पत्र, मोहित राम की पुत्री के शैक्षणिक कार्यों को मिली गति”

” त्वरित और पारदर्शी सेवा से ग्रामीणों को मिल रही बड़ी सुविधा “

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन सुशासन और जनसेवा की भावना को साकार करते हुए नागरिकों तक शासकीय सेवाएं सरल, सहज और समयबद्ध ढंग से पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी उद्देश्य से संचालित ‘‘सेवा सेतु‘‘ पहल आमजन के लिए एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। सेवा सेतु के माध्यम से विभिन्न प्रमाण पत्रों एवं अन्य नागरिक सेवाओं का लाभ अब एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे लोगों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। इससे समय, श्रम और धन तीनों की बचत हो रही है तथा लोगों को त्वरित सेवाओं का लाभ मिल रहा है।

इसी पहल का लाभ कोरबा जिले के ग्राम लबेद निवासी श्री मोहित राम को भी मिला। उनकी पुत्री सुश्री पदमा राठिया जो कक्षा 9वीं की छात्रा हैं, के लिए निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। पहले इस प्रकार के दस्तावेज बनवाने के लिए कई बार संबंधित कार्यालयों में जाना पड़ता था, जिससे ग्रामीण परिवारों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता था। उन्होंने कलेक्ट्रेट स्थित सेवा सेतु केंद्र में निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। आवेदन प्रक्रिया सरल और सुगम रही तथा निर्धारित समय में उनकी पुत्री का निवास प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इससे उन्हें बिना किसी अनावश्यक भागदौड़ के आवश्यक दस्तावेज प्राप्त हो गया।

श्री मोहित राम ने बताया कि सेवा सेतु केंद्र के कारण उनका कार्य बेहद आसानी और कम समय में पूरा हो गया। उन्होंने कहा कि अब शासकीय सेवाओं के लिए इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ती। एक ही स्थान पर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध होने से ग्रामीणों का समय, श्रम और आर्थिक व्यय तीनों की बचत हो रही है।

उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा सेतु ने उनकी पुत्री के लिए आवश्यक निवास प्रमाण पत्र समय पर उपलब्ध कराकर उनकी बड़ी चिंता दूर कर दी। उन्होंने कहा कि शासन की यह पहल आम नागरिकों की आवश्यकताओं और सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिसका लाभ आज गांव-गांव तक पहुंच रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सेवा सेतु के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को समय पर शासकीय सेवाओं का लाभ मिलेगा। साथ ही उन्होंने इस जनहितकारी पहल के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन का भी धन्यवाद ज्ञापित किया।

cg” राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन और सहकार संकल्प दौड़ का भव्य आयोजन…”

0

“मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय होंगे मुख्य अतिथि, सहकारिता को नई दिशा देने जुटेंगे प्रदेशभर के प्रतिनिधि”

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में 3 और 4 जुलाई को राजधानी रायपुर में राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकार संकल्प दौड़ का भव्य आयोजन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन के सहकारिता विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स बैंक) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप करेंगे।

इस आयोजन का उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाना, किसानों और सहकारी संस्थाओं को सशक्त करना तथा “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है। सम्मेलन में प्रदेशभर से सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, किसान और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे।

3 जुलाई को होगी सहकार संकल्प दौड़

सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत 3 जुलाई को सुबह 6 बजे रायपुर के मरीन ड्राइव, तेलीबांधा में सहकार संकल्प दौड़ आयोजित की जाएगी। इस दौड़ का उद्देश्य स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ सहकारिता के संदेश को आमजन तक पहुंचाना है।

दो दिवसीय राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन

3 और 4 जुलाई को सुबह 11 बजे से कृषि मंडपम ऑडिटोरियम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन आयोजित होगा। सम्मेलन में सहकारी नीतियों, कृषि विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने तथा सहकारी संस्थाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

प्रदेशभर के सहकारिता प्रतिनिधि होंगे शामिल

सम्मेलन में अपेक्स बैंक, राज्य सहकारी संघ, मार्कफेड, लघु वनोपज सहकारी संघ, हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ, अन्त्यावसायी वित्त एवं विकास निगम सहित विभिन्न जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के अध्यक्ष, सहकारिता क्षेत्र के विशेषज्ञ और जनप्रतिनिधि अपनी सहभागिता देंगे।

सहकार से समृद्धि का मिलेगा संदेश

सहकारिता विभाग और अपेक्स बैंक ने प्रदेश के किसानों, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, युवाओं और आम नागरिकों से इस आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आग्रह किया है। यह आयोजन सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण विकास, किसान सशक्तीकरण और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई मजबूती प्रदान करेगा।

cg” एआई के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री साय…”

0

एआई मिशन के जरिए युवाओं को कौशल, रोजगार और नवाचार के मिलेंगे नए अवसर”

शासन-प्रशासन को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए एआई आधारित व्यवस्था होगी विकसित”

मोबाइल नेटवर्क विस्तार, भारतनेट फेज-3, सेवा सेतु और डिजिटल नवाचार परियोजनाओं की समीक्षा”

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित”

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित हुई।

बैठक में राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास एवं विस्तार, मोबाइल नेटवर्क सुदृढ़ीकरण, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सेवा सेतु, ई-प्रगति पारस (प्रोजेक्ट असेसमेंट रिव्यू एवं एनालिसिस सिस्टम), सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स तथा विभिन्न डिजिटल नवाचार परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।

इसके साथ ही युवाओं के लिए कौशल विकास, रोजगार सृजन, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने तथा तकनीक आधारित सुशासन को नई गति देने के विभिन्न आयामों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और राज्य इस क्षेत्र में देश का अग्रणी प्रदेश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि एआई केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, दक्षता और जनसेवा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रभावी माध्यम है। एआई के प्रभावी उपयोग से शासन-प्रशासन को अधिक सक्षम, पारदर्शी, त्वरित एवं नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नई तकनीक को अपनाना नहीं है, बल्कि प्रदेश के लोगों को एआई के लिए तैयार करना, व्यवसायों की उत्पादकता बढ़ाना, नागरिकों की आय में वृद्धि करना तथा बेहतर सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कौशल विकास और दैनिक प्रशासनिक कार्यों में एआई के व्यापक उपयोग से आम नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इसके लिए राज्य में मजबूत एआई इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा तथा सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार एआई के उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

बैठक में प्रस्तुत विजन दस्तावेज में बताया गया कि राज्य का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को एआई के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है, जहां प्रत्येक नागरिक अपनी भाषा में एआई सीख सके, सरकार तकनीक आधारित भरोसेमंद सेवाएं प्रदान करे और उद्योगों तथा व्यवसायों को नई गति मिले।

इस मिशन के अंतर्गत पांच प्रमुख स्तंभों – एआई कौशल विकास, नवाचार एवं स्टार्टअप, जागरूकता एवं आउटरीच, सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई तथा शासन में एआई के उपयोग – पर कार्य किया जाएगा।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में विद्यार्थियों तथा सरकारी कर्मचारियों को एआई का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत स्कूलों में एआई जागरूकता कार्यक्रम, एआई एवं रोबोटिक्स क्लब तथा हैकाथॉन आयोजित किए जाएंगे।

महाविद्यालयों में एआई सर्टिफिकेशन कार्यक्रम, छात्र परियोजनाओं के लिए अनुदान, आईटीआई में एआई लैब तथा विश्वविद्यालयों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे।

राज्य में नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एआई डेटा लैब्स, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, एआई आधारित स्टार्टअप, डेटा सेट तथा अनुसंधान परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त क्लाउड कंप्यूटिंग सुविधा, सीड फंडिंग तथा उद्योगों एवं शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से अत्याधुनिक एआई आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने की भी कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।

बैठक में सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई उपयोग को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तर पर एआई नीति तैयार की जाएगी, जिसमें डेटा सुरक्षा, नागरिकों की निजता का संरक्षण, नियमित तकनीकी ऑडिट तथा केंद्र सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।

शासन में एआई के प्रभावी उपयोग के लिए विभिन्न विभागों में एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली विकसित की जाएगी, प्रत्येक विभाग का अलग रोडमैप तैयार होगा, एआई नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।

इसके साथ ही सरकारी एआई पायलट परियोजनाएं प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भाषिणी प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे सरकारी सेवाएं अधिक सरल, सुलभ और समावेशी बन सकें।

बैठक में मोबाइल नेटवर्क विस्तार की समीक्षा के दौरान बताया गया कि पिछले ढाई वर्षों में डीबीएन वित्तपोषित लगभग एक हजार मोबाइल टॉवर स्थापित कर राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

इसके अतिरिक्त 577 नए मोबाइल टावरों की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इनमें से 406 टावरों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि शेष 171 प्रकरणों का निराकरण आगामी एक माह के भीतर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

भारतनेट फेज-3 की समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि राज्य की 4,114 ग्राम पंचायतों को रिंग टोपोलॉजी आधारित आधुनिक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

इसके साथ ही आईपी-एमपीएलएस आधारित एकीकृत नेटवर्क विकसित किया जाएगा तथा गांवों तक एफटीटीएच सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध हो सकें और डिजिटल सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

सेवा सेतु पोर्टल की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्तमान में राज्य के 36 विभागों की 520 सेवाएं इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, जिनमें 111 होस्टेड तथा 409 रीडायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं।

प्रदेशभर में संचालित 16 हजार 726 सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।

एक अप्रैल 2025 से अब तक सेवा सेतु के माध्यम से 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण करते हुए 94.3 प्रतिशत सफलता दर प्राप्त की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि सेवा सेतु में क्यूआर आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर एकीकरण, ट्रेजरी एवं ई-चालान प्रणाली तथा डीबीटी आधारित भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे सेवाओं की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

बैठक में नवा रायपुर में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप की स्थापना, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स, सुरक्षा संचालन केंद्र, जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली तथा डिजिटल निगरानी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।

अधिकारियों ने बताया कि इन पहलों से प्रदेश में आईटी एवं आईटीईएस क्षेत्र को नई गति मिलेगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा हजारों युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव श्री प्रभात मलिक , सुशासन तथा अभिसरण विभाग के संयुक्त एवं  चिप्स के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर श्री मयंक अग्रवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

केंद्र सरकार ‘प्रधानमंत्री विकास भारत रोजगार योजना’ के तहत पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को बढ़ावा…

0

अगर आपने हाल ही में अपनी पहली नौकरी शुरू की है या जल्द ही शुरू करने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है। केंद्र सरकार ‘प्रधानमंत्री विकास भारत रोजगार योजना’ के तहत पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को बढ़ावा दे रही है।

इस योजना के तहत, योग्य कर्मचारियों को ₹15,000 तक की आर्थिक मदद मिलेगी। यह रकम सीधे कर्मचारी के आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजी जाएगी। आइए जानते हैं कि इस योजना के लिए कौन योग्य है और इसका फायदा कैसे उठाया जा सकता है।

इस योजना का फायदा कौन उठा सकता है?

इस योजना का फायदा सिर्फ़ उन कर्मचारियों को मिलेगा जो पहली बार औपचारिक नौकरी (formal employment) शुरू करेंगे और पहली बार EPFO ​​के साथ रजिस्टर करेंगे।

कर्मचारी जिस कंपनी या संस्थान में काम शुरू करेगा, उसका कामकाज 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच शुरू होना चाहिए।

साथ ही, कर्मचारी 1 अगस्त 2025 से पहले EPFO ​​या किसी छूट प्राप्त ट्रस्ट (exempted trust) का सदस्य नहीं होना चाहिए।

इसके अलावा, कर्मचारी की मासिक सैलरी ₹1 लाख या उससे कम होनी चाहिए। इसमें रोजगार अनुबंध (employment contract) के अनुसार सभी वेतन और भत्ते शामिल हैं।

रकम कितनी होगी और कैसे मिलेगी?

सरकार की ओर से दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि (incentive amount) एक महीने की EPF-संबंधित सैलरी के बराबर होगी, जिसकी अधिकतम सीमा ₹15,000 होगी। यह रकम दो किस्तों में दी जाएगी।

पहली किस्त तब दी जाएगी जब कर्मचारी उसी संस्थान में लगातार छह महीने की सेवा पूरी कर लेगा।

दूसरी किस्त 12 महीने की नौकरी पूरी होने के बाद दी जाएगी। यह दूसरी किस्त बचत की आदत डालने के लिए कर्मचारियों के बचत खाते (savings vehicle) में जमा की जाएगी।

इस योजना का फायदा उठाने के लिए क्या करना होगा?

सबसे पहले, कर्मचारी के पास यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) होना चाहिए।
साथ ही, कर्मचारी ने उसी संस्थान में कम से कम छह महीने तक लगातार काम किया हो।

दूसरी किस्त पाने के लिए, कर्मचारी को 12 महीने की अवधि पूरी होने से पहले सरकार द्वारा उपलब्ध कराया गया मुफ्त वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम (financial literacy programme) भी पूरा करना होगा। ऐसे में, अगर आप पहली बार EPF के दायरे में आने वाली नौकरी कर रहे हैं और सभी पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं, तो आप इस योजना का फायदा उठा सकते हैं।

देशभर में लागू होगी डिजिटल पुलिसिंग, FIR से चार्जशीट तक पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन…

0

पुलिस स्टेशन के बार-बार चक्कर लगाने और कागज़ी कार्रवाई की परेशानी से जल्द ही छुटकारा मिलने वाला है। सरकार ने 1 जनवरी 2027 तक पूरे देश में FIR दर्ज करने और पुलिस जांच से लेकर सबूत इकट्ठा करने और कोर्ट में चार्जशीट जमा करने तक की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल करने का लक्ष्य रखा है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस डिजिटल सिस्टम का ढांचा इस साल 31 दिसंबर तक सभी राज्यों में तैयार हो जाएगा। पुलिस केस डायरी, गवाहों के बयान, सबूत और चार्जशीट जैसी चीज़ें पूरी तरह से ऑनलाइन होंगी।

तीन नए आपराधिक कानूनों के दो साल

आज, 1 जुलाई 2026 को देश के तीन नए आपराधिक कानूनों – इंडियन कोड ऑफ़ ज्यूडिशियल प्रोसीजर (ICJ), इंडियन कोड ऑफ़ सिविल सिक्योरिटी (ICJ) और इंडियन इनेबलिंग एक्ट (BSA) – को लागू हुए दो साल पूरे हो गए हैं। इन दो सालों में, हरियाणा इन नए नियमों को अपनाने और सफलतापूर्वक लागू करने में देश में सबसे आगे रहा है। शीर्ष पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हरियाणा के बाद गोवा, असम, चंडीगढ़ और पंजाब का स्थान है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इस बार शीर्ष पांच राज्यों की सूची में जगह नहीं बना पाई। एक सकारात्मक नतीजा यह है कि इस नए सिस्टम से लगभग 25% समय की बचत हुई है, और देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 23 राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

31 दिसंबर तक पूरी होंगी तकनीकी व्यवस्थाएं

गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस सिस्टम के लिए ज़रूरी तकनीकी व्यवस्थाएं इस साल 31 दिसंबर तक सभी राज्यों में पूरी कर ली जाएंगी। इसके बाद, पुलिस डायरियां पूरी तरह से डिजिटल हो जाएंगी, जिससे पेपरलेस सिस्टम की शुरुआत होगी।

कहीं से भी किसी भी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई जा सकती है

नया सिस्टम “ज़ीरो FIR” प्रावधान के महत्वपूर्ण लाभों को उजागर करता है। पिछले दो वर्षों में, देश भर में 63,572 ज़ीरो FIR दर्ज की गईं, जिनमें से लगभग 13,000 मामले अन्य राज्यों से संबंधित थे। इस नियम के तहत, पीड़ित देश भर में किसी भी राज्य के किसी भी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकता है; इसके बाद FIR को जांच के लिए संबंधित पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय से मिले आंकड़ों से पता चलता है कि तय 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल करने की दर 2024 में सिर्फ़ 40% थी, लेकिन अब यह बढ़कर 61% हो गई है। इसी तरह, यौन अपराधों के मामलों में दो महीने के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की दर 2018 के 44% से बढ़कर 2025 में 75% हो गई है।

e-FIR के ज़रिए शिकायत दर्ज करना आसान हुआ

सरकार के अनुसार, नए कानून के तहत किए गए डिजिटल बदलावों से लोग अब e-FIR और डिजिटल माध्यमों से आसानी से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा, जांच के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए अपराध स्थल और ज़ब्त किए गए सबूतों की वीडियोग्राफी अनिवार्य कर दी गई है। ईमेल, मोबाइल डॉक्यूमेंट और फोरेंसिक रिपोर्ट जैसे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को अब पूरी कानूनी मान्यता मिल गई है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कोर्ट की सुनवाई करने से काफी समय बचता है और मामलों के तेज़ी से निपटारे में मदद मिलती है। साथ ही, e-समंस और ऑनलाइन केस मैनेजमेंट सिस्टम लागू होने से कानूनी कार्यवाही में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिल रही है।

गृह मंत्रालय का मानना ​​है कि यह व्यापक ऑनलाइन सिस्टम पुलिस के कामकाज को ज़्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाएगा। इससे फाइलों और डॉक्यूमेंट्स को आसानी से ट्रैक करने, मामलों में देरी कम करने और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने में भी मदद मिलेगी।