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छत्तीसगढ़ : केएसके एमपीसीएल गेट के सामने प्रदर्शन कर रहे 70 आंदोलनकारी गिरफ्तार

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आमरण अनशन के दौरान आंदोलनकारियों की तबीयत खराब होने पर बीती रात जिला प्रशासन व पुलिस की टीम उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाने पहुंची। इसी दौरान पावर मजदूर संघ कार्यकर्ता व उनके परिजनों द्वारा प्रशासन व प्लांट प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर इसका विरोध किय गयाा। विरोध करने पर पुलिस ने 67 आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर जिला जेल पहुंचाया। वहीं आज अन्य तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके विरोध में आंदोलनकारियों के परिजनों ने जेल के बाहर आंदोलन किया। केएसके महानदी पावर कम्पनी लिमिटेड नरियरा के लॉक आउट होने के बाद प्लांट प्रबंधन द्वारा दो मजदूर संगठनों के लगभग 35 से अधिक मजदूर नेताओं व कार्यकर्ताओं को निलंबित कर दिया है।

प्लांट प्रबंधन के निर्णय का विरोध करते हुए 25 सितम्बर को एचएमएस के कर्मचारी प्लांट के बाहर तक आए मगर निलंबित कर्मचारियों को प्रवेश नहीं देने के कारण वे काम करने नहीं गए और गेट के बाहर नारेबाजी करते रहे। उनके निलबंन के द्वारा मजदूर संगठनों द्वारा लगातार निलंबित कर्मचारियों को वापस लेने की मांग की जा रही है। इस दौरान लगातार संगठन द्वारा विभिन्न् माध्यमों से प्लांट प्रबंधन को निर्णय वापस लेने व निलंबित कर्मचारियों को वापस कार्य में रखने की मांग की जा रही है, मगर प्रबंधन निलंबित कर्मचारियों को वापस काम पर नहीं लेने के निर्णय पर अडिग है। इस दौरान जिला प्रशासन, प्लांट प्रबंधन व श्रमिक संगठनों द्वारा लगातार त्रिपक्षीय बैठकों का दौर जारी रहा, बावजूद इसके प्रबंधन द्वारा मजदूर संगठनों की बात नहीं मानी गई।

यहां प्लांट प्रबंधन के खिलाफ 12 अक्टूबर से छग पावर मजदूर संघ (एचएमएस) यूनियन ने प्लांट के मुख्य गेट पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया। वहीं संगठन द्वारा 17 अक्टूबर से आमरण अनशन करने का निर्णय लिया गया। छग पावर मजदूर संघ ने केएसके महानदी पावर कंपनी नरियरा के खिलाफ 17 अक्टूबर से मजदूर नेता नवापारा निवासी पारस दुबे, नरियरा निवासी लोभन साहू, अविनाश महिलपाल, रामकृष्ण धीवर, दाऊलाल लहरे और रोगदा निवासी रवि नोरगे व मन्नू मरावी आमरण अनशन शुरू कर दिया।

इसी दिन शाम 4 बजे अतिरिक्त कलेक्टर के कार्यालय में बैठक बुलाई गई। जिसमे कम्पनी प्रबन्धन के द्वारा 18 सितम्बर के त्रिपक्षीय समझौते के उल्लंघन के मुद्दे पर बात नहीं बन पायी। संघ ने बैठक का बहिष्कार भी कर दिया। मजदूर संगठन का आमरण अनशन जारी था। शक्रवार को डॉक्टरी परीक्षण के दौरान उनकी तबीयत खराब पायी गई। जानकारी मिलने पर बीती रात एडीएम लीना कोसम, एसडीएम मेनका प्रधान, एसडीओपी जितेन्द्र चंद्राकर उन्हें समझाने मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों की तबीयत खराब होने व उन्हें अस्पताल पहुंचाने की समझाइश परिजनों को दी, मगर इससे आक्रोशित मजदूर संघ के कार्यकर्ता व परिजनों ने इसका विरोध किया और जमकर नारेबाजी की। जिला प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों की समझाइश के बाद फिर से वे आक्रोशित हो गए।

यहां अधिकारियों के निर्देश पर बीती रात 67 आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन पहुंचाया गया और आमरण अनशन में बैठे आंदोलनकारियों को उपचार के लिए बिलासपुर भेजा गया। पुलिस ने सभी आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन पहुंचाया गया और आज सुबह उन्हें जिला जेल पहुंचाया गया। इधर आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी की सूचना मिलने पर उनके परिजन बड़ी संख्या में जिला जेल पहुंचे और उनकी रिहाई की मांग करने लगे। यहां बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व प्लांट प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जेल के सामने धरना पर बैठ गए।

दो मजदूर संगठनों के विवाद के बाद हुआ था लॉक आउट

10 सितम्बर को दो मजदूर संघों में आपसी विवाद के चलते केएसके महानदी पावर कंपनी लिमिटेड नरियरा में तनाव का माहौल निर्मित हो गया था, तनाव बढ़ने पर 18 सितंबर को कंपनी प्रबंधन के द्वारा लॉक-आउट करने का निर्णय लेते हुए प्लांट को बंद कर दिया गया था। प्रशासन के हस्तक्षेप पर आयोजित त्रिपक्षीय वार्ता के दौरान प्लांट को पुन: चालू करने पर सहमति बनी थी, लेकिन एचएमएस मजदूर संघ के पदाधिकारियों पर कंपनी प्रबंधन द्वारा मारपीट का आरोप लगाकर लगभग 20 कर्मचारियों को निलंबित करने का आदेश दिया गया। वहीं यूनाईटेड मजदूर संघ के 13 कर्मचारियों को भी निलंबित कर दिया गया है, जिसके चलते प्लांट के पुन: चालू होने में अनिश्चितता जताई जा रही थी।

‘मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा आमरण अनशन किया जा रहा है। यहां रूटिन चेकअप के दौरान आंदोलनकारियों की तबीयत खराब होने लगी थी। डॉक्टर द्वारा उन्हें हास्पिटल ले जाने की सलाह दी गई थी। बीती रात आंदोलनकारियों को समझाइश देने पहुंचे थे, मगर उनके संगठन के कार्यकर्ता व उनके परिजनों द्वारा हंगामा किया जाने लगा। बीती रात 67 व आज 3 लोगों के खिलाफ 151 की कार्रवाई की गई है।’ – जितेन्द्र चंद्राकर, एसडीओपी, जांजगीर

त्योहारी सीजन में घर खरीदने का बढ़िया मौका! GST बेनिफिट के साथ कार, फर्नीचर मिल रहा मुफ्त

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त्योहारी सीजन में घर खरीदने वालों के लिए अच्छी खबर है. गुजरात) में मंदी की मार से निपटने के लिए रियल एस्टेट घर खरीदारों को ढेरों ऑफर्स दे रहे हैं. आपको घर खरीद पर कई तरह के ऑफर मिल रहे हैं जो कि पहले नहीं मिलते थे. अब अहमदाबाद जैसे शहर में भी बिल्डर्स फेस्टिवल सीजन के नाम पर खूब ऑफर दे रहे हैं. अहमदाबाद में बिल्डर्स की तरफ से मकान की खरीदारी पर पहली बार मिल रहे इन ऑफर्स को मंदी का असर कहे या फिर ग्राहकों का फायदा?

GST बेनिफिट के साथ कार, फर्नीचर मुफ्त
इन दिनों गुजरात, खासकर अहमदाबाद से प्रकाशित होने वाले अखबार, घर खरीदने को लेकर तरह-तरह के ऑफर से भरे हुए हैं. अफोर्डेंबल हो या हाई एंड अपार्टमेंट या फिर वीकेंड होम्स हर सेगमेंट में कुछ खास डिस्काउंट हैं. सपनों के घर के साथ आपको GST बेनिफिट, कार, फर्नीचर मुफ्त में मिलेंगे.

गुजरात में रियल एस्टेट की चमक फीकी
दरअसल गुजरात में रियल एस्टेट की चमक फीकी पड़ी है. मंदी की वजह से सिर्फ निवेश के लिए घर खरीदने वाले घट गए हैं जो जरूरतमंद घर खरीदार होते हैं वो घर के साथ कुछ ना गिफ्ट चाहते हैं. बिल्डरों को लगता है ऑफर्स से घर की बिक्री बढ़ सकती है. अब इन ऑफर्स से रियल एस्टेट की रौनक लौटती है या नहीं ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन अगर आप गुजरात में घर खरीदने का सोच रहे हैं तो ये सही समय हो सकता है.

अहमदाबाद का रियल एस्टेट मार्केट 2-3 साल पहले इन्वेस्टर्स से चलता था, लेकिन अब इन्वेस्टर्स मार्किट से बाहर हो गए है और सही में जिसको घर की जरूरत है ऐसे लोग ही खरीदार है. ऐसे में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बिल्डर्स जो ऑफर दे रहे हैं वो मकान की कीमत का 2 से 5 फीसदी का होता है. अहमदाबाद के मार्किट में पूर्वी विस्तार में पहले ही भारी डिस्काउंट मिल रहे थे लेकिन अब पश्चिम अहमदाबाद में भी ऑफर्स मिलने शुरू हुए है. फेस्टिवल के नाम पर मिल रहे ऑफर्स का सही में कितना फायदा ग्राहकों को मिलेगा और कितना बिल्डर्स को वो देखने वाली बात होगी.

CGPSC : छत्तीसगढ़ में आरक्षण के पेच से अटक सकती है पीएससी की नई भर्ती

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 छत्तीसगढ़ में नए आरक्षण की घोषणा के साथ सरकारी नौकरी में भर्ती का पेच फंस गया है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) हर वर्ष संविधान दिवस पर नई भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करता रहा है, लेकिन इस बार यह विज्ञापन अटक गया है। सरकार ने आरक्षण की सीमा बढ़ा दी है, जिसके कारण नए सिरे से विज्ञापन की प्रक्रिया शुरू हुई है। वहीं, आरक्षण को लेकर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। ऐसे में नई भर्ती और प्रमोशन पर भी असर पड़ रहा है। नए आरक्षण के आधार पर प्रमोशन भी अटक गया है। पीएससी के चेयरमैन केआर पिस्दा ने बताया कि रिक्त पदों के लिए विज्ञापन जारी करने से पहले विभागों से जानकारी मंगाई गई थी। विभाग ने पुराने आरक्षण के आधार पर जानकारी दी, जिसे वापस कर दिया गया है। अब नए आरक्षण के आधार पर भर्तियां निकाली जाएंगी। पदोन्नति में भी पेच फंसने के कारण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों की दिक्कत बढ़ गई है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने एससी और ओबीसी का आरक्षण बढ़ाया है। आरक्षण की तय सीमा से ज्यादा होने के बाद सामाजिक संगठन कोर्ट पहुंचे थे, जिसके बाद कोर्ट ने स्टे दे दिया है। उच्च न्यायालय ने न केवल याचिका को स्वीकार किया, बल्कि पहली ही पेशी में इस बात का भी निर्णय दिया था कि भर्ती परीक्षा उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। इसका सीधा मतलब है कि जब तक उच्च न्यायालय याचिका में अपना अंतिम निर्णय नहीं सुनाती है, तब तक नियुक्ति नहीं हो सकती। अब अगली सुनवाई 18 नवंबर को होनी है।

दस्तावेज सत्यापन के बाद भी नौकरी अटकी

व्यापमं और पीएससी की परीक्षा में रिजल्ट घोषित होने के बाद भी नौकरी अटक रही है। चयनित उम्मीदवार दस्तावेजों का सत्यापन भी करा रहे हैं, लेकिन कोर्ट का निर्णय आने के बाद ही नौकरी पक्की होगी। व्याख्यता की भर्ती के लिए व्यापमं ने परीक्षा ली। रिजल्ट भी जारी कर दिया। अब दस्तावेजों का परीक्षण 4 नवंबर से 11 नवंबर के बीच किया जाएगा। इस भर्ती को लेकर भी उम्मीदवारों ने कोर्ट में आवेदन किया है। ऐसे में निर्णय कोर्ट के फैसले के बाद ही लिया जाएगा।

कोर्ट ने आरक्षण अध्यादेश के कुछ बिंदुओं पर रोक लगाई है। इसको लेकर 100 बिंदुओं का आरक्षण रोस्टर बनाया जा रहा है। यह रोस्टर जल्द बन जाएगा, जिसके बाद भर्ती की समस्या नहीं रहेगी। डॉ कमलप्रीत सिंह, सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग

फैक्ट फाइल

वर्ष-पदों की संख्या- डिप्टी कलेक्टर-डीएसपी

2014- 109 – 21 – 02

2015- 352 – 10 – 18

2016- 293 – 10 – 33

2017- 299 – 36 – 33

2018- 160 – 03 – 09

(राज्य सेवा के लिए पीएससी की ओर से जारी विज्ञापन)

एक Ticket ने पलटी रिक्शेवाले की किस्मत, पलभर में बना 50 लाख का मालिक

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कहते हैं कि किस्मत कब फर्श से उठाकर अर्श तक पहुंचा दे इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता है। ऐसा ही एक वाकया हाल ही में एक रिक्शे वाले के साथ भी हुआ है जिसकी किस्मत महज एक टिकट ने बदल दी। यह रिक्शावाला पश्चिम बंगाल का का रहने वाला है जो बहुत ही मुश्किल से अपने परिवार का पेट भर पाता था। लेकिन अब रातों रात लाखों का मालिक बन चुका है। जी हां, इस रिक्शेवाले ने नागालैंड की स्टेट लॉटरी में 50 लाख रुपये की लॉटरी जीत ली है। पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्धमान जिले के गुस्करा के रहने वाले गौर दास ने रविवार को नागालैंड सरकार की स्टेट लॉटरी में प्रथम इनाम जीता है।

खबर है कि दास और उनकी यूनियन के साथी पिकनिक जाने की तैयारी कर रहे थे लेकिन बारिश वो नहीं जा पाए। उसी समय एक लॉटरी विक्रेता ने दास पर टिकट खरीदने के लिए दबाव डाला जिसको देखकर उन्होंने टिकट खरीद लिया। हालांकि दास कत्तई भी टिकट खरीदने के मूड में नहीं थे, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।

दास का कहना है कि उस उनकी जेम में 70 रुपये थे और टिकट विक्रेता उन पर टिकट खरीदने का जोर दे रहा था। इसके बाद रविवार दोपहर दास एक दुकान पर लॉटरी का परिणाम जानने गए तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। क्योंकि उस लॉटरी नंबर में पहला इनाम 50 लाख रुपये का था जो दास का ही था। यह खुशखबरी उन्होंने अपनी पत्नी को सुनाई लेकिन सुरक्षा की वजह से यह खबर को पड़ोसियों को नहीं सुनाई। इसके बाद सोमवार को वो नजदीकी बैंक में गए और टिकट जमा करा दिया।

खबर है कि 50 लाख रूपयों की लॉटरी जीतने वाले दास के परिवार में उनकी विधवा मां, पत्नी और दो बेटियां और एक बेटा है। ऐसे में 6 लोगों का पेट भरना उनके लिए आसान नहीं था। इसी वजह से उनकी मां और पत्नी को भी दिहाड़ी मजदूरी करनी पड़ती थी। हालांकि अब लॉटरी जीतने की खुशी के बाद पूरा परिवार जश्न में डूबा हुआ है।

छत्तीसगढ़ : सुपेबेड़ा पर राज्यपाल अनुसुईया उइके और सीएम भूपेश बघेल आमने-सामने

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छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा में किडनी खराब होने से परेशान ग्रामीणों से मिलने की राज्यपाल की घोषणा के बाद सियासी हलचल तेज हो गई। शनिवार को पूरे दिन सियासी बयानबाजी सुपेबेड़ा के इर्द-गिर्द होती रही। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने कहा था कि हेलिकॉप्टर मिले या न मिले, वह सुपेबेड़ा जाएंगी। सुपेबेड़ा के हालात बहुत खराब है, राज्य सरकार को गंभीर होना चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि वे सुपेबेड़ा को लेकर राज्यपाल के बयान से हतप्रभ हैं। राज्यपाल वहां जाएं, उनका स्वागत है। साथ ही इससे केंद्र सरकार को भी अवगत कराएं। सरकार भी जानना चाहती है कि सुपेबेड़ा में किडनी की बीमारी की वास्तविक वजह क्या है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्यपाल के दौरे के बाद केंद्र सरकार भी इसमें पहल करे।

राज्य से समस्या नहीं सुलझती तो केन्द्र आकर देख

मुख्यमंत्री के बयान के बाद राज्यपाल अनुसुईया उइके ने एक बार फिर सुपेबेड़ा दौरे को लेकर स्थिति को साफ किया। राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने जो कुछ कहा था, वो मानवीय दृष्टिकोण से कहा था। वहां के प्रभावितों के लिए राज्य सरकार कोई काम करती है, तो ये अच्छी बात है। वहां के पीड़ित लोगों को मदद दी जानी चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि वो इस मामले में केंद्र को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराएंगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भूपेश बघेल प्रदेश के मुखिया होने के नाते इस समस्या के समाधान के लिए भरसक कोशिश कर रहे हैं। वहां बहुत बड़ा स्वास्थ्य शिविर लगाया गया है।

राज्यपाल ने कहा कि मैं समझती हूं कि अगर वहां पर भारत सरकार की आवश्यकता है, तो निश्चित रूप से मैं उनको अवगत कराऊंगी कि जिम्मेदारी भारत सरकार की भी है। अगर कोई समस्या राज्य सरकार से नहीं सुलझ सकती तो केंद्र सरकार को चाहिए कि वो भी आकर देखें। राज्यपाल के बयान के कुछ घंटे बाद ही डीकेएस और एम्स के डाक्टरों की टीम शनिवार की सुबह ही प्रभावित गांव पहुंची और कैंप लगाकर लोगों का इलाज किया।

अजय करेंगे पहली बार साउथ की इस हसीना के साथ फिल्म में काम, जानिए

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बॉलीवुड सुपरस्टार अजय देवगन का स्टारडम ऐसा है कि कई अभिनेत्रियां उनके साथ काम करना चाहती हैं, और प्रणिता सुभाष को भी खुद को भाग्यशाली समझना चाहिए। ‘भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया’ की शूटिंग शुरू हो गई है, जिसका निर्देशन अभिषेक दुधिया कर रहे हैं। इस फिल्म का बजट 100 करोड़ बताया गया है, इसलिए इस फिल्म में अजय देवगन, प्रणिता सुभाष, परिणीति चोपड़ा, सोनाक्षी सिन्हा, संजय दत्त, अम्मी विर्क और राणा दग्गुबती जैसे बड़े स्टारकास्ट दिखाई देंगे। यह फिल्म 14 अगस्त 2020 को सिनेमाघरों में उतरने वाली है।

अगर आप साउथ फिल्मों के फैन हैं तो आपको इस एक्ट्रेस के बारे में जरूर पता होना चाहिए। आपको बता दें कि प्रणिता सुभाष ने न केवल तमिल बल्कि तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम जैसी भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया है।

अभिनेत्री ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 2004 में कन्नड़ फिल्म पोखरी से की थी, जिसके बाद वह मांस, ब्रह्मा, जग्गू दादा, मास लीडर सहित कई सुपरहिट फिल्मों में दिखाई दीं। यह देखा जाना बाकी है कि प्रणिता सुभाष बॉलीवुड में अपने अभिनय से लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ती हैं या नहीं।

छत्तीसगढ़ : खेत में फसल के साथ बिजली भी होगी पैदा

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राजधानी रायपुर के शंकर नगर स्थित बीटीआई मैदान पर आयोजित 46वीं जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय विज्ञान, गणित एवं पर्यावरण प्रदर्शनी के पांचवें दिन दिल्ली की बाल वैज्ञानिक माला बिस्ट ने खेती करने का अनोखा मॉडल दिखाया। मॉडल की खासियत यह है कि खेत में लगी फसल बिजली पैदा करेगी। साथ ही बिजली की क्षमता भी 1.46 मेगावाट होगी। बाल वैज्ञानिक माला ने बताया कि यह प्रयोग अभी नीदरलैंड में किया जा रहा है, हमारे देश में इस तरह का प्रयोग किया जाए तो बिजली की समस्या पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।

इस तरह बिजली होगी पैदा

माला ने बताया कि खेत में जो भी फसल उगाई जाती है, उसमें जिंक और कॉपर होने के कारण निचले स्तर पर इलेक्ट्रॉड बनते हैं। खेते के चारो ओर अंडरग्राउंड बिजली के तार लगा दिए जाएं और कोयला- ग्रेफाइड को गोंद में लगाकर इलेक्ट्रान की तरह उपयोग किया जाए तो बिजली पैदा होने लगती है। इसका कारण होता है कि इलेक्ट्रोड और इलेक्ट्रान आपस में क्रिया करने लगते हैं और इससे 1.46 मेगावाट/ किलोमीटर स्कॉयर तक पैदा की जा सकती है।

ओस से तैयार करें पानी

मेघालय की छात्रा दामिनी पावरा ने ऐसा धागा तैयार किया है जो ओस से पानी तैयार करेगा। दामिनी ने बताया कि पहाड़ी इलाकों में पानी की काफी समस्या होती है। नीचे से पहाड़ी तक पानी लाने में बहुत परेशानी होती है। इसका सबसे अच्छा उपाय है कि एक पाइप में चारो ओर धागा लगा दिया जाए। जैसे ही कोहरा आएगा और ओस चालू होगी धागे से टकराकर वह पानी बनने लगेगी। उसे किसी भी टब्बे में सहेजा जा सकता है। यह पानी काफी शुद्घ होता है। उक्त पानी को दो सौ से पांच सौ रुपए लीटर बेच कर व्यापार भी किया जाता है।

कमलेश तिवारी हत्याकांड में छठवां संदिग्ध नागपुर से गिरफ्तार..महाराष्ट्र एटीएस कर रही है पुछताछ

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 हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी हत्याकांड के तार उत्तर प्रदेश, गुजरात के बाद अब महाराष्ट्र से भी जुड़ गए हैं। महाराष्ट्र एटीएस ने नागपुर से एक शख्स को हिरासत में लिया है। कमलेश तिवारी की शुक्रवार को दो बदमाशों ने लखनऊ में बेरहमी से हत्या कर दी थी।

तिवारी की हत्या के सिलसिले में इससे पहले तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें 3 की गिरफ्तारी गुजरात के सूरत से हुई है। सूरत से गिरफ्तार बदमाशो से हुई पूछताछ में मिली जानकारी के बाद शनिवार को महाराष्ट्र के नागपुर से छठे को हिरासत में लिया गया है। इस मामले में महाराष्ट्र एटीएस गिरफ्तार किये गये शख्स से कडाई से पूछताछ कर रही है।

भाजपा नेता का विवादित बयान, धनतेरस पर बर्तन नहीं, तलवार खरीदें…

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 उत्तर प्रदेश के देवबंद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता ने हिंदू समुदाय से ‘धनतेरस पर बर्तनों के बजाय लोहे से बनी तलवारें’ खरीदने के लिए कहा है। धनतेरस हर साल दीपावली से पहले मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार, धनतेरस पर लोग बर्तन या धातु से बनी चीजें खरीदते हैं। इस वर्ष, धनतेरस 25 अक्टूबर (शुक्रवार) को मनाया जाएगा।

देवबंद नगर के भाजपा अध्यक्ष गजराज राणा ने शनिवार रात मीडिया से कहा, “अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला जल्द ही आने की उम्मीद है और हमें भरोसा है कि यह राम मंदिर के पक्ष में होगा। हालांकि, इससे माहौल बिगड़ सकता है, इसलिए सोने के आभूषणों और चांदी के बर्तनों के बजाय लोहे की तलवारें इकट्ठा करना उचित है। जरूरत के समय में ये तलवारें हमारी रक्षा करने में काम आएंगी।”

हालांकि, राणा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी समुदाय या धर्म के खिलाफ ‘एक शब्द’ भी नहीं कहा है। उन्होंने कहा, “यहां तक कि हम अपने धार्मिक रिवाजों में हथियारों की पूजा करते हैं और हमारे देवी-देवताओं ने भी परिस्थितियों के आधार पर हथियारों का इस्तेमाल किया है। मेरा बयान वर्तमान में बदलते परिवेश और मेरे समुदाय के सदस्यों के लिए एक सुझाव के संदर्भ में है। इसका कुछ और मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए।”

इस बीच, राणा के बयान से भाजपा ने दूरी बना ली है।

उत्तर प्रदेश के पार्टी प्रवक्ता चंद्रमोहन ने कहा, “भाजपा इस तरह की भाषा का समर्थन नहीं करती..अगर यह उनके द्वारा इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने जो कुछ भी कहा है वह उनकी व्यक्तिगत सोच है। पार्टी के नेताओं के लिए एक बहुत ही स्पष्ट दिशानिर्देश है। कोई भी काम या बयान कानून के दायरे में किया जाना चाहिए या कहा जाना चाहिए और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।”

बता दे, राणा विवादित बयान देने के लिए जाने जाते हैं। लोकसभा चुनाव प्रचार की पूर्व संध्या पर, भाजपा नेता ने कहा था कि ‘दारुल उलूम (देवबंद में) आतंकवाद का पर्याय है।

लड़की को ‘कॉल गर्ल’ कहना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में लड़की को ‘कॉल गर्ल’ कहने के मामले में लड़के और उसके माता-पिता को राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘कॉल गर्ल’ कहने मात्र से आरोपियों को आत्महत्या करने के लिए उकसाने का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. 15 साल पहले एक लड़के के माता-पिता ने उसकी गर्लफ्रेंड को ‘कॉल गर्ल’ कहा दिया था, जिसके बाद उसकी गर्लफ्रेंड ने आत्महत्या कर ली थी. आत्महत्या के इस मामले में लड़के और उसके माता-पिता पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था.

 ने अपने फैसले में कहा कि लड़की की ओर से की गई आत्महत्या का कारण ‘अपमानजनक’ भाषा का इस्तेमाल था, ये कहना सही नहीं है. जजों ने कहा कि गुस्से में कहा गया एक शब्द, जिसके बारे में कुछ सोचा-समझा नहीं गया हो उसे उकसावे के रूप में नहीं देखा जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के एक पुराने फैसले में एक व्यक्ति को पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मुक्त कर दिया था. बताया जाता है कि पति-पत्नी के बीच हुए झगड़े के दौरान पति ने गुस्से में पत्नी से कहा था कि ‘जाकर मर जाओ’. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का हवाला देते हुए कहा कि गुस्से में कही गई बात को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं कहा जा सकता.

 क्या है मामला
कोलकाता की लड़की आरोपी से अंग्रेजी भाषा का ट्यूशन लिया करती थी. इस दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए और दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया. लड़की और लड़का अपनी शादी के बारे में जब लड़के के माता-पिता से मिलने गए तो गुस्से में लड़के के परिजनों ने लड़की को बहुत कुछ कह दिया. इस दौरान गुस्से में लड़के के माता-पिता ने लड़की को ‘कॉल गर्ल’कह दिया. इस बात से दुखी लड़की ने घर आने के बाद आत्महत्या कर ली.

सुसाइड नोट में कॉल गर्ल का किया था जिक्र
लड़की ने आत्महत्या करने से पहले दो सुसाइड नोट लिखे थे. इन दोनों में ही उसने लड़के के माता-पिता पर उसे ‘कॉल गर्ल’ कहने का आरोप लगाया था. इसी के साथ उसने बताया था कि जिससे वह प्यार करती थी, उसने भी माता-पिता को ऐसा करने से नहीं रोका. पुलिस ने जांच के बाद लड़के और उसके माता-पिता के खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया. तीनों आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट में इसका विरोध किया लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई.