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गठबंधन तो है लेकिन जोर अपनी ताकत और सीटें बढ़ाने पर : महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव

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  • भाजपा के प्रचार में शिवसेना और शिवसेना के प्रचार में भाजपा नहीं दिखती
  • भाजपा-शिवसेना को नेतृत्व के संकट से जूझती कांग्रेस के मुकाबले एनसीपी से ज्यादा कड़ी टक्कर

यूं तो महाराष्ट्र में दो गठबंधनों के बीच चुनावी मुकाबला है लेकिन मैदान में गठबंधन से ज्यादा दलों को अपनी सीट संख्या बढाकर अपनी ताकत ज्यादा से ज्यादा करने की होड़ साफ दिखती है।

जमा राशियों की हिफाजत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई, अब तक 3 की हो चुकी है मौत…

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मुंबई। संकट से घिरे पंजाब एंड महाराष्ट्र को-आपरेटिव पीएमसी) बैंक के खाताधारकों का विरोध प्रदर्शन तेज होने के बीच बैंक से संबंधित एक याचिका पर उच्चतम न्यायालय आज सुनवाई करेगा। यह याचिका पीएमसी बैंक में पड़ी खाताधारकों की जमाराशि की सुरक्षा के वास्ते तुरंत अंतरिम उपाय किए जाने के बारे में निर्देश देने को लेकर दायर की गई है। गौरतलब है कि पिछले दिनों में पीएमसी बैंक में घोटाले को लेकर कम से कम तीन मौतें हुई हैं और लाखों खाताधारक परेशान हैं।

बता दें कि याचिका पीएमसी बैंक में पड़ी खाताधारकों की जमाराशि की सुरक्षा के वास्ते तुरंत अंतरिम उपाय किए जाने के बारे में निर्देश देने को लेकर दायर की गई थी। गौरतलब है कि पिछले दिनों में पीएमसी बैंक में घोटाले को लेकर कम से कम तीन मौतें हुई हैं और लाखों खाताधारक परेशान हैं। इसी घटनाक्रम को देखते हुये उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की गई थी।

याचिका में कहा गया है कि केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक को यह निर्देश दिया जाना चाहिये कि राष्ट्रीयकृत बैंकों सहित विभिन्न सहकारी बैंकों में रखी खाताधारकों की खून पसीने की कमाई की पूरी तरह से सुरक्षा और बीमा होना चाहिये। इसके लिये बैंकों में जमा राशि की शत प्रतिशत सुरक्षा के लिये उचित उपाय और बीमा कवरेज सुनश्चित किया जाना चाहिये। याचिका में जमा राशि की निकासी की सीमा तय किये जाने संबंधी रिजर्व बैंक की अधिसूचना को भी निरस्त करने का आग्रह किया गया है।

उधर, मुंबई में जे बी भोरिया ने रिजर्व बेंक के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात के बाद एक वक्तव्य जारी किया। जे बी भोरिया को रिजर्व बैंक ने पीएमसी बैंक का प्रशासक नियुक्त किया है। इसमें कहा गया है कि बैंक सभी जमाकर्ताओं और दूसरे संबंधित पक्षों के हितों की सुरक्षा के लिये सभी प्रयास करेगा। इसमें यह भी कहा गया है कि बैंक अपनी बैलेंस सीट को नये सिरे से तैयार करने में लगा है ताकि उसकी सही और उचित तस्वीर सबके समक्ष रखी जा सके।

रिजर्व बैंक ने लगा रखे हैं कई प्रतिबंध

उधर पीएमसी बैंक के प्रशासक ने रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास सहित शीर्ष पदाधिकारियों से मुलाकात की है और बैंक के खाताधारकों को आश्वासन दिया है कि उनके हितों की सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। पीएमसी बैंक में 6500 करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ने बैंक पर लेनदेन संबंधी कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं।

अब तक 5 लोग हो चुके हैं गिरफ्तार

बता दें कि इस घोटाले में अबतक 5 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। मुंबई की एक अदालत ने पीएमसी बैंक घोटाले में बैंक के पूर्व निदेशक सुरजीत सिंह अरोड़ा को 22 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत पर भेज दिया है। अदालत ने बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस को भी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अरोड़ा और थॉमस के अलावा इस घोटाले में एचडीआईएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राकेश वधावन, उनके पुत्र सारंग वधावन और पीएमसी बैंक के पूर्व चेयरमैन वरयाम सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है।

बैंकों में घोटाला होने पर नियामक, आडिटर को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए: ठाकुर ​

पंजाब एंड महाराष्ट्र कोआपरेटिव पीएमसी) बैंक हो या कोई अन्य बैंक, बैंकों में घोटाला होने पर नियामक, आडिटर और प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने गुरुवार को यह बात कही। ठाकुर ने कहा कि पीएमसी बैंक के मामले में भारतीय रिजर्व बैंक ने निकासी की सीमा बढ़ाकर 40,000 रुपए कर दी है। इसके तहत बैंक के करीब 77 प्रतिशत प्रभावित लोग आ गए हैं, इन लोगों को एक लाख रुपए तक की निकासी का आश्वासन दिया गया है।

छत्तीसगढ़ – प्रदेश में नशीली दवाएं मेडिकल स्टोर्स ही नहीं, पंक्चर दुकानों तक में िबक रही हैं; कार्रवाई के बाद भी नहीं चेत रहे नशेड़ी…

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युवाओं के बड़े वर्ग को हिंसक और पागल बनाने वाली नशीली दवाइयों पर सरकार सख्ती से बैन के दावे करती हो, लेकिन पूरे प्रदेश में नशे के कारोबारियों के नेटवर्क की पहुंच शहरों से गांवों की गलियों तक है। ये दवाइयां प्रतिबंधित हैं, डाॅक्टर के प्रेस्क्रिप्शन (पर्ची) के बिना नहीं बेची जा सकतीं। लेकिन नशेड़ियों से डाॅक्टर पर्ची मांगी जानी बंद है। दिलचस्प ये है कि नशेड़ियों को ये दवाइयां गल्ले से लेकर पंक्चर की दुकानों में भी मिल रही हैं। प्रदेश के प्रमुख शहरों रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण इलाकों में स्टिंग कर खुलासा किया कि इन दवाइयों पर सरकारी बैन की धज्जियां किस तरह उड़ाई जा रही हैं। 

प्रदेश में कुछ मेडिकल स्टोर्स नशे का कारोबार कर रहे हैं। दोगुनी-तिगुनी कमाई के चक्कर में दवा दुकान वाले ऐसी दवाएं बेच रहे हैं, जिनका उपयोग करते ही नशा छा जाता है। ये दवाएं जीवन रक्षक तो हैं, लेकिन नशीली होने के कारण डाॅक्टर की पर्ची के बिना बेचना बैन है। पर बाजार मेंे दवाएं धड़ल्ले से मिल रही हैं। सैकड़ों युवा इन दवाओं की गिरफ्त में फंसकर पागलपन की दहलीज तक पहुंच चुके हैं। रायपुर में ही पिछले एक महीने में हत्या की पांच वारदातें हुईं और पुलिस ने खुलासा किया कि हत्या के अारोप में पकड़े गए सभी लोगों ने इन्हीं दवाइयों का नशा किया हुअा था। 

क्यों किया राज्यभर में स्टिंग : प्रदेश में चाकूबाजी, छिनताई के साथ घरेलू हिंसा के केस लगातार बढ़ रहे हैं। राजधानी में इसी महीने से एक युवक ने अपने तीन बच्चों को चाकू मारकर उनकी जान लेने की कोशिश की। बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने जब पिता को पकड़ा तो पता चला उसने नशे की गोलियां खाईं थी। नशे में उसने अपने ही बच्चों को मारने की कोशिश की। झांकी के दौरान एक ही रात में हत्या की 3 वारदातें हुईं। तीनों हत्या गोली के नशे में हुई। राज्यभर में ऐसी वारदातें हो रही हैं। डीजी डीएम अवस्थी ने नशे के खिलाफ मुहिम के निर्देश दिए। इसकी पड़ताल की तो पता चला मेडिकल स्टोर्स ही नशे की दुकान चला रहे हैं। उसके बाद ही बड़े शहरों में एक साथ स्टिंग किया गया।

बाइक से भी चल रहा रैकेट
नशीली दवाओं का धंधा करने वाले मेडिकल स्टोर्स संचालक रैकेट बनाकर काम कर रहे हैं। मेडिकल स्टोर्स से तो दवाएं परमानेंट कस्टमर को ही दी जाती हैं, लेकिन नए ग्राहकों के लिए वे पुराने कस्टमर की ही मदद ले रहे हैं। कई पुराने कस्टमर को कमीशन पर दवाओं का स्टॉक दे दिया जाता है। वे बाइक और आटो में घूमते-फिरते नशीली दवाएं बेच रहे हैं। रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई की घनी आबादी और झुग्गी इलाके में नशीली दवाइयों का पागलपन ज्यादा है। फनसीडील हो या एल्प्राजोलम, नेट्रावेट हो या कोडीन और टोरेक्स सिरप नशे के आदी लोगों को आसानी से मिल रही है। ड्रग विभाग के अफसर लगातार जांच और कार्रवाई का हवाला देकर खामोश बैठे हैं और नशे का धंधा गली-गली फैल रहा है।

पान और चाय वालों से लेकर छोटी गुमटियों में सेटिंग से मिल रही दवाइयां 
 

स्टिंग-1 : नशीली दवा के उपयोग के लिए चर्चित संतोषी नगर में गुरुवार दोपहर 2 बजे एक मेडिकल स्टोर में भास्कर संवाददाता ने नाइट्रोजेपाम गोली मांगी। संचालक ने मना कर दिया। अासपास के लोगों ने बताया कि एक दिव्यांग और एक महिला की मेडिकल स्टोर से सेटिंग हैं। उनसे मांगने पर दवा मिल जाएगी। महिला के घर पहुंचने पर उसने साफ मना कर दिया। उसने एक पान ठेले में बात की, फिर दूर खड़े एक दुबले-पतले युवक को बुलाकर पैसे दे दिए। वह 5 मिनट में नाइट्राेजेपाम का पत्ता ले अाया। 

स्टिंग-2 : लोधीपारा अवंति बाई चौक के पास एक मेडिकल स्टोर में शाम करीब 4 बजे। दुकान में संचालक के अलावा एक सेल्समैन था। सेल्समैन को बुलाकर धीरे से उससे नाइट्रोटेन का एक पत्ता मांगा। उसने अपने मालिक से दवा का नाम लेकर पूछा। उसने मना कर दिया। उसने कहा- उससे भी अच्छी चीज ले जाओ, ये भी नशा देगी। फिर कफ सिरप निकालकर दे दिया। इसके बदले में 80 रुपए मांगे और पर्ची के बिना ही दे दिया। 

स्टिंग-3 : सड्‌डृू कॉलोनी के पास की पंक्चर दुकान नशीली टेबलेट और दवा के लिए चर्चित है। यहां सालूशन भी मिलता है। करीब में चाय का ठेला है। लोगों ने बताया कि वह कमीशन पर दवा दिलवा देता है। मांगने पर उसने एक लड़के को 100 का नोट देकर भेजा। वह लड़का चंद मिनट में टेबलेट का पूरा पत्ता लेकर आ गया। उसकी कीमत 40 रुपए थी, लेकिन 100 रुपए देने पड़े। चायवाले ने साफ कहा-इससे कम में नहीं मिलेगा।

छत्तीसगढ़ : सीएम भूपेश के खिलाफ एसीबी में केस खत्म, पिछली सरकार ने दर्ज किया था…

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विरुद्ध एसीबी में दर्ज मामले का खात्मा प्रतिवेदन एडीजे दुर्ग अजित कुमार राजभानू ने स्वीकार लिया है। भूपेश पर उनके पीसीसी अध्यक्ष रहते एसीबी ने पिछले साल तत्कालीन कलेक्टर दुर्ग आर संगीता के द्वारा गठित समिति की सिफ़ारिश के आधार पर अपराध दर्ज किया था।पाटन विधायक रहते हुए साडा सदस्य रहे भूपेश बघेल पर उनके भतीजे विजय बघेल, पूर्व विधायक विरेंद्र पांडेय और अधिवक्ता अशोक शर्मा ने आरोप लगाए थे। 
शुरुआती दौर में शिकायत मिलने पर एसीबी ने शिकायत वापस शासन को सौंप दी, जिसके बाद तत्कालीन कलेक्टर आर संगीता ने समिति गठित की। इसने भूपेश के खिलाफ रिपोर्ट दी। समिति की इस रिपोर्ट के बाद शासन ने फिर एसीबी को प्रकरण में अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए थे।

 जबकि यह प्रकरण दर्ज हुआ, भूपेश बघेल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे और तब इस मामले को दबाव बनाने की रणनीति के रूप में कांग्रेस ने पेश किया और प्रकरण को फर्जी बताया था। कांग्रेस का आरोप था कि भूपेश बघेल लगातार रमन सरकार पर हमला कर रहे हैं और गड़बड़ियों को उजागर कर रहे हैं, इसलिए उनके खिलाफ फर्जी केस बनाए जा रहे हैं।


एसीबी ने बीते पांच सितंबर इस मामले में दुर्ग न्यायालय में एडीजे अजित कुमार राजभानू स्पेशल कोर्ट के समक्ष खात्मा प्रतिवेदन पेश किया। एसीबी ने साफ तौर पर कहा कि जांच में ये बात साबित हो गई है कि भूपेश बघेल के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। वकील ने भी कहा कि जानबूझकर परेशान करने की नीयत से उन्हें एसीबी का इस्तेमाल कर फंसाया गया। कोर्ट ने इस पर तीनों शिकायतकर्ताओं को नोटिस दिया और 20 सितंबर को विजय बघेल ने आपत्ति दर्ज कराई। लेकिन, कोर्ट ने उसे स्वीकार नही किया। कोर्ट ने गुरुवार शाम इस मामले में घोषणा की कि एसीबी का खात्मा प्रतिवेदन स्वीकार किया जाता है।

छत्तीसगढ़ – हाथी प्रभावित 24 गांव के किसानों ने निकाला मोर्चा, बोले- हमारे साथ एक दिन रहकर दिखाएं कलेक्टर…

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हाथियों को क्षेत्र से खदेड़ने सहित 10 मांगों मांगों को लेकर 24 गांव के किसानाें ने कलेक्टोरेट का घेराव किया। यहां किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन साैंपा। गुरुवार को जनपद अध्यक्ष धरमदास महिलांग के नेतृत्व में कुकराडीह, जोबा, अछोला, अछोली, गढ़सिवनी, अमलोर, परसाडीह सहित हाथियों से परेशान सिरपुर क्षेत्र के 24 गांव के किसानों ने कलेक्टोरेट में करीब दो घंटे तक प्रदर्शन किया। कहा कलेक्टर एक दिन गांव में रहकर दिखाएं।
ग्रामीणों को समझाइश देने डिप्टी कलेक्टर सीमा ठाकुर और नायब तहसीलदार देवेंद्र नेताम मुख्य गेट पर पहुंचे। आखिरकार 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भीतर जाकर कलेक्टर सुनील कुमार जैन और डीएफओ मयंक पाण्डेय से चर्चा की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगों पर चर्चा हुई। स्थानीय स्तर की समस्या पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा और प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। 

शाम 5 बजे के बाद घर 
से निकल नहीं सकते
ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र के ग्रामीण शाम 5 बजे के बाद घर से निकल नहीं सकते। उन्हें भय रहता है कि कब सामना हाथियों से हो जाए और उनकी मौत हो जाए। इसके पहले सुबह 10 बजे से क्षेत्र के किसान जनपद कार्यालय में एकत्रित हुए। यहां से दोपहर 1 बजे ग्रामीण रैली निकालकर कलेक्टोरेट घेराव के लिए रवाना हुए। इस दौरान भाजपा नेता व समाजसेवी योगेश्वर राजू सिन्हा, गिरधर आवड़े, नंद कुमार, पुरुषोत्तम सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे। 

ऐसे बनाए घर में ढाबे जैसा लच्छा पराठा

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लच्छा पराठे का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है. खाने की बात करें तो इसके लिए हर कोई यही चाहता है कि अच्छे से अच्छा खाना खाएं. लेकिन बहुत सारी कोशिशों के बाद भी अगर आप घर में ढाबे या होटल जैसा लच्छा पराठा नहीं बना पाई हैं. लेकिन अगर आप भी ये चाहते हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे टिप्स जिससे आप घर पर भी पराठा बना सकते हैं. घर में ही कुरकुरा और बेहद खस्ता लच्छा पराठा रेसिपी बता रहे हैं. जो बनाने में भी बेहद आसान है. इसके लिए आपको-

आटा डेढ़ कप

मैदा आधा कप

घी या तेल 3 बड़ा चम्मच

तलने के लिए तेल

स्वादानुसार नमक

चीनी 1 छोटा चम्मच

दूध आधा कप

पानी आधा कप

आधा कप सूखा आटा

1. लच्छा पराठा रेसिपी (Laccha Parantha Recipe)बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में आटा, मैदा और नमक डालकर अच्छी तरह मिक्स करके तेल, दूध और पानी को थोड़ा-थोड़ा डालकर एक नरम आटा गूंद लें. 2. इसके बाद आटे को 15-20 मिनट के लिए ढककर रेस्ट के लिए अलग रख दें.

3. अब आटे को निकालें और 2-3 बार तेल लगाकर

4. इसके बाद आटे की छोटी-छोटी लोईयां तोड़ लें, फिर सूखा आटा लगाकर बेलन की मदद से एक मोटी रोटी बेल लें.

5. अब बेली हुई रोटी पर तेल लगाएं और सूखा आटा छिड़के, फिर रोटी को कागज की तरह फोल्ड करें.

6. इसके बाद रोटी के किनारों को पकड़कर थोड़ा खींचकर लंबा करें और फिर जलेबी की तरह रोल कर लें.

7. अब एक तवे या पैन धीमी आंच पर गर्म कर लें.

8. इसके बाद जलेबी की तरह रोल की हुई रोटी को बेलन की मदद से बेल लें. याद रखें कि रोटी को ज्यादा पतला न करें, उसे मोटा ही रखें.

9. अब लच्छे पराठे को गर्म तवे पर डालकर दोनों तरफ तेल लगाकर सुनहरा होने तक से सेंक लें.

10. इसके बाद लच्छे पराठे को प्लेट पर रखें और थोड़ा सा ठंडा होने पर हथेलियों के बीच रखकर मसल लें. जिससे पराठे की परतें खुल सकें.

11. अब तैयार लच्छे पराठे को मनपसंद सब्जी, रायते और अचार के साथ गर्मागर्म सर्व करें.

राहुल गांधी ने दिया ऐसा भाषण कि हो गए ट्रोल, इस बार वीडियो विपक्ष ने नहीं बल्कि खुद कांग्रेस ने किया जारी

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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी हमेशा ही अपने बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रोल होते रहते हैं। राहुल गांधी फिर से अपने बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर घिर गए हैं। कांग्रेस के अधिकाकिर ट्विटर हैंजल पर 13 अक्टूबर 2019 को एक वीडियो शेयर किया गया। जिसमें राहुल गांधी चांद पर जाना और देश में आए बेरोजगारी पर बात कर रहे थे। इस भाषण के बीच वो ‘खतम’, ‘टाटा, और ‘बाय-बाय’ बोलेत हैं, जिसको लेकर ट्विटर पर उनको ट्रोल किया जा रहा है। सोशल मीडिया की ट्विटरबाजों ने राहुल गांधी के वीडियो को शेयर कर और इस वीडियो पर कई मीम्स भी बना रहे हैं।

क्या था राहुल गांधी का वह पूरा बयान

कांग्रेस ने राहुल गांधी के इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, ”चांद पर जाना अच्छी बात है, चांद पर दो दिन में नहीं पहुंचा गया। उसमें सालों की मेहनत है। मगर, चांद पर पहुंचने से भूखे को रोटी नहीं मिलेगी, उसके लिए रोजगार देना पड़ेगा। रोजगार की बात करनी पड़ेगी: राहुल गांधी” । वीडियो में भी राहुल गांधी यही बोलते नजर आ रहे हैं।

राहुल गांधी वीडियो में मेक इन इंडिया के बारे में कह रहे हैं, ” आप पुणे चले जाइए। वहां के किसी भी फैक्ट्री में जाइए और पूछिए, मेक इन इंडिया कैसा चल रहा है? खतम, बाय-बाय, टाटा, गुड बाय. कहा जाएगा गया।’

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी हमेशा ही अपने बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रोल होते रहते हैं। राहुल गांधी फिर से अपने बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर घिर गए हैं। कांग्रेस के अधिकाकिर ट्विटर हैंजल पर 13 अक्टूबर 2019 को एक वीडियो शेयर किया गया। जिसमें राहुल गांधी चांद पर जाना और देश में आए बेरोजगारी पर बात कर रहे थे। इस भाषण के बीच वो ‘खतम’, ‘टाटा, और ‘बाय-बाय’ बोलेत हैं, जिसको लेकर ट्विटर पर उनको ट्रोल किया जा रहा है। सोशल मीडिया की ट्विटरबाजों ने राहुल गांधी के वीडियो को शेयर कर और इस वीडियो पर कई मीम्स भी बना रहे हैं।

क्या था राहुल गांधी का वह पूरा बयान

कांग्रेस ने राहुल गांधी के इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, ”चांद पर जाना अच्छी बात है, चांद पर दो दिन में नहीं पहुंचा गया। उसमें सालों की मेहनत है। मगर, चांद पर पहुंचने से भूखे को रोटी नहीं मिलेगी, उसके लिए रोजगार देना पड़ेगा। रोजगार की बात करनी पड़ेगी: राहुल गांधी” । वीडियो में भी राहुल गांधी यही बोलते नजर आ रहे हैं।

राहुल गांधी वीडियो में मेक इन इंडिया के बारे में कह रहे हैं, ” आप पुणे चले जाइए। वहां के किसी भी फैक्ट्री में जाइए और पूछिए, मेक इन इंडिया कैसा चल रहा है? खतम, बाय-बाय, टाटा, गुड बाय. कहा जाएगा गया।’

राहुल गांधी के इसरो और रोजगार वाले बयान पर लोगों की क्या रही प्रतिक्रिया

एक यूजर ने लिखा, पहले विदेश यात्रा से आपको वक्त मिल जाए फिर बेरोजगार पर बात करेंगे’ और देश तरक्की कर रहा है जीडीपी बढ़ रहा है।

राहुल गांधी के इसरो और रोजगार वाले बयान पर लोगों की क्या रही प्रतिक्रिया

एक यूजर ने लिखा, पहले विदेश यात्रा से आपको वक्त मिल जाए फिर बेरोजगार पर बात करेंगे’ और देश तरक्की कर रहा है जीडीपी बढ़ रहा है।

आखिर खाकी ही क्यों होता है भारतीय पुलिस की वर्दी का रंग, क्या आपको है इसके बारे में कोई जानकारी

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हर देश में कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए पुलिस का गठन किया जाता है। पुलिस की पहचान उसकी वर्दी से होती है। हमारे देश की पुलिस खाकी वर्दी पहनती है। लेकिन यह बात बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि आखिर पुलिस की वर्दी का रंग खाकी क्यों होता है?

भारतीय पुलिस की वर्दी का रंग क्यों होता है खाकी

जब भारत में ब्रिटिश राज चलता था तब पुलिस सफेद रंग की वर्दी पहनती थी। लेकिन लंबे समय तक ड्यूटी करने की वजह से उनकी वर्दी जल्दी गंदी हो जाती थी। इस वजह से उन्होंने अपनी वर्दी को अलग-अलग रंगों में रखना शुरू कर दिया। लेकिन उनकी वर्दी में विभिन्न रंग दिखने लगे तो अफसरों ने खाकी रंग की डाई तैयार करवाई थी। यह रंग हल्का पीला और भूरे रंग का मिश्रण है। इसके लिए उन्होंने चाय की पत्ती या फिर कॉटन फैब्रिक कलर को डाई की तरह उपयोग करके खाकी वर्दी तैयार करवाई।

खाक का हिंदी में अर्थ है गद्दी मिट्टी का रंग। खाकी रंग की डाई लगाने के बाद पुलिस की वर्दी में धूल मिट्टी के दाग कम दिखेंगे। 1847 में सर हैरी लम्सडेन ने इस वर्दी को पहनना शुरू किया। तभी से भारतीय पुलिस की वर्दी खाकी रंग की है।

आखिर सर हैरी लम्सडेन क्यों अपनाई खाकी वर्दी

सर हैरी लम्सडेन नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर के गवर्नर के एजेंट थे, जिन्होंने 1846 मे Corps of Guides फ़ोर्स खड़ी की थी। उस समय सर हैरी लम्सडेन को कमांडेंट और विलियम हडसन को सेकंड ऑफ़ कमांड बनाया गया और उनको फ़ोर्स को बढ़ाने की जिम्मेदारी मिली। शुरुआती दिनों में इस फ़ोर्स के जवान लोकल ड्रेस में ड्यूटी करते थे। लेकिन 1847 में सर हैरी लम्सडेन खाकी वर्दी को अपनाया।

आखिर पुलिस यूनिफॉर्म का इतिहास क्या है

BPRD मैन्युअल के मुताबिक, पहली आधुनिक पुलिस जो लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस थी, उसने 1829 में डार्क ब्लू रंग की यूनिफॉर्म बनवाई थी, जो पैरामिलिटरी स्टाइल यूनिफॉर्म थी। उस समय ब्रिटिश आर्मी लाल और सफेद रंग की यूनिफॉर्म पहनती थी। इस वजह से पुलिस की वर्दी ब्लू रंग की चुनी गई। 1853 में लंदन पुलिस को ध्यान में रखते हुए न्यूयॉर्क पुलिस ने भी अपना यूनिफॉर्म ब्लू रंग का बनवाया, जिसको देखकर अमेरिका और अन्य राज्यों में भी पुलिस की यूनिफॉर्म बनवाना शुरू कर दिया।

अजब गज़ब : 13 तोते कोर्ट में हाजिर हुए और मालिक को जेल हुई,जानिए क्यों

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आज पटियाला हाउस कोर्ट में एक तोते के दिखने से कई लोग हैरान थे। अदालत में कार्रवाई के दौरान दो तोते लाए गए थे। इसलिए, कई लोग अब सवाल करते हैं कि क्या तोते को सजा दी जाएगी। इसलिए, अदालत में लाया गया तोता एक अच्छी दृष्टि साबित हुआ।

मंगलवार को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक विदेशी को गिरफ्तार किया। सुरक्षाकर्मियों को उसके पास 13 तोते मिले।आरोपी तस्कर को भी कोर्ट में पेश किया गया।

बताया जा रहा है कि इन तोतों को तस्करी कर भारत से तास्कंद ले जाया जा रहा था, लेकिन दिल्ली एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ जवानों ने तस्कर को रंगेहाथों धर दबोचा लिया गया। आरोपी तोते के साथ उज्बेकिस्तान के ताशकंद जाने वाला था। उस समय सुरक्षाकर्मियों को उस पर शक हुआ। बाद में, उसे एक पक्षी की तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

आज, आरोपी के साथ दो तोते को पटियाला हाउस कोर्ट में लाया गया।

अदालत ने आरोपी को सात दिन जेल की सजा सुनाई। आरोपी अवैध रूप से तोते को जूट की जेब से ताशकंद ले जा रहा था। न्यायालय में सीमा शुल्क विभाग की ओर से पी.के. सी अग्रवाल के पक्षधर हैं। वन्यजीव अधिनियम के अनुसार, पशु पक्षियों को खरीदना मना है।

छत्तीसगढ़ : 22 सूत्रीय मांगों को लेकर शिक्षकों ने दिया धरना, मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

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 छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन राजनांदगांव के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने जिला प्रशासन पर अड़ियल रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए अपनी 22 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टोरेट का घेराव कर मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष शिक्षकों ने आज जिला मुख्यालय कलेक्टोरेट के सामने फ्लाईओवर के नीचे बैठकर नियम विरुद्ध अध्यापन व्यवस्था को तत्काल रद्द करने सहित वर्षों से लम्बित एरियर्स राशि भुगतान, नियम विरुद्ध हुए सभी 150 शिक्षकों के ट्रांसफर रद्द करने, समयमान वेतन सहित पुनरीक्षित वेतनमान का लम्बित एरियर्स भुगतान, मृत शिक्षकों के परिजनों को अनुकम्पा नियुक्ति देने, अतिशेष शिक्षकों को संकुल स्तर पर समायोजित करने सहित अपनी 22 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और जिला प्रशासन तथा जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ नारेबाजी की। शाम को रैली की शक्ल में कलेक्टोरेट पहुंचकर कलेक्टर आफिस का घेराव किया और कलेक्टर तथा जिला शिक्षा अधिकारी से मिलने की बात पर अड़े रहे। आंदोलनकारी शिक्षकों से मिलने एसडीएम पहुंचे और उनकी बातें उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। शिक्षकों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि जब तक 150 शिक्षकों को स्थानांतरण आदेश निरस्त नही करते तब तक आंदोलन करते रहेंगे।