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छत्तीसगढ़ – राज्यपाल ने इंडोर स्टेडियम में आयोजित देसी टॉक कवि सम्मेलन का किया शुभांरभ…

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राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने कल इंडोर स्टेडियम में आयोजित देसी टॉक कवि सम्मेलन का शुभांरभ किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की। इस अवसर पर राज्यपाल सुश्री उइके ने संबोधित करते हुए कहा कि साहित्य जगत में ऐसा माना जाता है कि जहां रवि नहीं पहुंच पाता है, वहां कवि पहुंच जाते हैं। कवि और उसकी कविता समाज का दर्पण होता है।

समाज में जो भी घटना घटती है या परिवर्तन आता है उसे वह देखता है उसको अपनी कविता के माध्यम से सभी के समक्ष प्रस्तुत करता है। कविता के माध्यम से कही गई बातें सभी व्यक्तियों के दिलों-दिमाग तक पहुंच जाती है और व्यक्ति उस पर आचरण करना प्रारंभ कर देता है। इसलिए कवियों को चाहिए कि वे समाज के समक्ष उन सभी बातों और परिवर्तनों को लाएं जो आदर्श समाज के निर्माण के लिये आवश्यक हों।  

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कई प्रतिष्ठित कवि हुए हैं, जिन्होंने प्रदेश का मान बढ़ाया है, उन्हें मैं नमन करता हूं। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव, वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर, खाद्य मंत्री श्री अमरजीत भगत, रायपुर के महापौर श्री प्रमोद दुबे, पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री सत्यनारायण शर्मा, श्री बृजमोहन अग्रवाल, श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय, विधायक श्री कुलदीप जुनेजा, श्री विकास उपाध्याय सहित राज्यपाल के सचिव श्री सोनमणि बोरा भी उपस्थित थे। आयोजकों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित अन्य अतिथियों को प्रतीक चिन्ह भेंट किया। कवि सम्मेलन में विख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने काव्यपाठ से समा बांधा। साथ ही पद्मश्री श्री सुरेंद्र दुबे, सर्वश्री मीर अली मीर, विनीत चौहान, रमेश मुस्कान, अंकिता सिंह, किशोर तिवारी, पद्मलोचन शर्मा अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी।

छत्तीसगढ़ : इस बीमारी को दूर भगाती है यह ‘अमृत’ वाली खीर, आधी रात स्वाद चखने जुटे 5 राज्यों के लोग

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छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव शहर में शरद पूर्णिमा पर पांच राज्यों के लोग आधी रात जुटे। यहां दमा और अस्थमा को दूर भगाने वाली अमृत खीर का वितरण हर साल शरद पूर्णिमा की रात में किया जाता है। छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश, ओड़िशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र के हजारों लोग अमृत चखने हर साल यहां पहुंचते हैं।

बर्फानी सेवा श्रम समिति के सचिव गणेश प्रसाद शर्मा बताते हैं कि बीते 22 वर्षों से यहां शरद पूर्णिमा के दिन आधी रात को लंबी कतार लगने का क्रम जारी है। साल दर साल यहां बीमारी दूर करने वाली खीर का स्वाद चखने वालों की संख्या बढ़ रही है। इस साल भी रविवार-सोमवार की रात करीब 35 हजार लोगों ने औषधीय गुणों वाली खीर प्रसाद के रूप में ग्रहण की। रात दो बजे से सुबह तक लंबी कतार लगी रही।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1997 में अमरकंटक के बर्फानी दादा के सान्निध्य में उनके शिष्य स्वर्गीय कांशीप्रसाद पांडेय के संयोजन में शुरूआत हुई थी। तब शरद पूर्णिमा की रात पांच सौ लोगों की भीड़ जुटी थी। पांच सौ से पैंतीस हजार तक का सफर इस बात का प्रमाण है कि औषधीय गुणों वाली यह अमृत खीर का प्रसाद कितना कारगर है। ज्यादातर पांच राज्य के लोग तो हर साल आते हैं, इस साल राजस्थान, पश्चिम बंगाल और उत्तरप्रदेश के लोग भी यहां अमृत चखने पहुंचे थे।

डेढ़ लाख रुपये खर्च कर तैयार किया खीर

बर्फानी सेवा श्रम समिति के सचिव शर्मा ने बताया कि भारी भीड़ के लिए खीर का प्रसाद तैयार कराना बड़ी चुनौतीपूर्ण होती है। श्रमदान और जनसहभागिता से इस साल करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च कर 35 हजार लोगों के लिए खीर का प्रसाद तैयार कराया गया था। श्वांस, दमा और अस्थमा के लिए यह अमृत खीर रामबाण दवा मानी जाती है। इस वजह से लोग शरद पूर्णिमा की रात का सालभर इंतजार करते हैं।

मीठी खीर में कड़वा दवा मिलाने से बच्चे-बड़े सभी आसानी से ग्रहण कर लेते हैं। यहां प्रसाद ग्रहण करने आने वालों को पखवाड़ेभर तक खटाई, मुनगा और बैंगन की सब्जी नहीं खाने का परहेज करना होता है। साथ ही प्रसाद ग्रहण करने के पहले और बाद में कम से कम चार-चार घंटे तक नींद लेने की मनाही होती है। इस तरह शरद पूर्णिमा की रात को प्रसाद वितरण के लिए चुना गया है। रात में यहां पहुंचने वालों के मनोरंजन के लिए नाच-गाने का प्रबंध भी किया जाता है। जिससे मनोरंजन के साथ ही उपचार भी सुलभ हो पाता है।

अजगर ने दबोच लिया था, लोगों ने ऐसे बचाया, देखें हैरतअंगेज वीडियो

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केरल से एक हैरतअंगेज वीडियो सामने आया है। एक शख्स को खतरनाक अजगर ने चपेट में ले लिया था। बुरी तरह शिकंजे में फंसा यह आदमी तमाम प्रयासों के बाद भी अपने आप को अजगर से छुड़ाने में सफल नहीं हो पाया। गांव वालों ने मिलकर उसे बचाया। लेकिन अजगर की पकड़ इतनी मजबूत थी कि इस रेस्क्यू में भी तीन लोगों को लगना पड़ा। जब ग्रामीणों ने इस व्यक्ति को आखिरकार अजगर से बचा लिया तब अजगर की लंबाई का पता चला। यह बेहद खौफनाक अजगर था। यह घटना तिरुअनंतपुरम की है।

समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा इस घटना का वीडियो जारी किया गया है। इसके अनुसार यह आज बुधवार को तिरुअनंतपुरम के जंगली क्षेत्र में हुई। बाद में इस अजगर को वन अधिकारियों को सौंप दिया गया और उसे जंगल में छोड़ दिया गया। हालांकि इस घटना के संबंध में अधिक जानकारी सामने नहीं आई है।

यह व्यक्ति अजगर के चंगुल में कैसे आ गया यह तो अभी पता नहीं चल पाया है लेकिन उसके लिए यह संतोष की बात रही कि उसे ठीक समय पर ग्रामीणों ने बचा लिया। पायथन एशिया और अफ्रीका में पाए जाते हैं जहां वे विभिन्न प्रकार की जंगली जगहों पर रहते हैं। बताया जाता है कि आज दुनिया में अजगर की 11 प्रजातियां हैं।

छत्तीसगढ़ 2.5 लाख की बाइक पाने के चक्कर में गंवा बैठा 8 लाख, ऐसे हुई धोखाधड़ी

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कोल माईंस परसाकेते अदानी कम्पनी में कार्यरत अदानी टाउनशीप शांतिग्राम गुमगा उदयपुर निवासी कार्तिक गौड़ ढाई लाख रुपये की बाइक पाने के चक्कर में आठ लाख रुपये ठगा गया। दरअसल कार्तिक के पास अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल आया कि उसका लक्की ड्रा में चयन हुआ है। जिसमें ढाई लाख रुपये की शानदार विदेशी बाइक निकलने का झांसा दिया गया। जालसाज के झांसे में आए कार्तिक ने बैंक से कर्ज लेकर लाखों रुपये ठग के बताए बैंक खाते में जमा कर दिया। ठगे जाने का जब उसे अहसास हुआ, तब तक वह आठ लाख रुपये गंवा चुका था।

पुलिस के अनुसार घटना 7 फरवरी से 11 अक्टूबर के बीच की है। कार्तिक गौड पिता शशि कुमार गौड निवासी हिंडाल्को कॉलोनी रेनुकूट जिला सोनभद्र (उत्तरप्रदेश) वर्ष 2017 से अदानी कम्पनी उदयपुर में नौकरी कर रहे हैं। उसका सेविंग खाता आईसीआईसी बैंक की अम्बिकापुर शाखा में है। बीते 07 फरवरी 2019 को उसके मोबाइल में मोबाइल नम्बर 858032730, 9205661232 से फोन आया।

फोन करने वाले ने अपना परिचय संजीव जायसवाल बताते हुए कहा कि उसका चयन लक्की ड्रा के लिए किया गया है। उसे करीब 2.49 लाख रूपये का बाइक मिलेगा। जिसकी प्रक्रिया के लिए 1499 रूपये बताए गए बैंक खाते में आनलाइन ट्रांसफर करना होगा। ठग ने खाता नम्बर भेजा । जिसमें कार्तिक ने 1499 रुपये 20 फरवरी 2019 को ट्रांसफर कर दिया। 21 फरवरी को पुनः 78 सौ रूपये ट्रांसफर कराया गया।

धीरे धीरे करके ठग ने एक लाख 60 हजार रुपये ठग लिया। इस बीच तरह-तरह के लालच दिया और कहा कि कहीं से उधार लेकर या बैंक से कर्ज लेकर रुपये दें, जिससे उसे लाभ मिल सके। इसके बाद वह ट्रांसफर कराए गए रकम को सुरक्षित करने के च-र में आईसीआईसी बैंक से 08 मार्च 19 को दो लाख 37 हजार रुपये लोन लिया और इस रकम को भी ठग के खाता नम्बर में डाल दिया।

रुपये हाथ लगने के बाद ठग ने कहा कि आपको और करीब 3 लाख रूपये देने होंगे तो वह एचडीएफसी बैंक से भी दो लाख 40 हजार रुपये निकालकर उसके खाता में जमा किया। किश्तों में करीब सात लाख रूपये जमा कराने के बाद ठग ने अपना मोबाइल बंद कर लिया।

इस बीच नेहा और अरूण नाम के दो लोग मोबाइल से संपर्क कर ठगे गए रुपये वापस दिलाने का झांसा देकर दो-तीन किश्तों में करीब 72 हजार रुपये ठग लिया। रिपोर्ट पर पुलिस ने संजीव जायसवाल, नेहा, चेतन, आशुतोष नाम के खाता धारकों के विरूद्घ धारा 419, 420 का मामला दर्ज कर लिया है।

छत्तीसगढ़ के इस शहर में सुअरों की भरमार, भूख हड़ताल पर बैठा बुजुर्ग

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खेती और बागवानी के लिए ख्यात नयापारा निवासी 75 वर्षीय बीपी बिसाई ने बुधवार से बेमियादी भूख हड़ताल शुरू की है। बिसाई सुअर मुक्त नगर की मांग को लेकर आंदोलन पर बैठ गए। इसकी जानकारी होने पर पालिका प्रशासन हरकत में आया और गुरुवार से सुअरों को शहरी क्षेत्र से हटाने के आश्वासन के बाद हड़ताल स्थगित किया। गौरतलब है कि बिसाई ने बेमियादी भूख हड़ताल शुरू करने से पहले नगर पालिका प्रशासन को पत्र लिखकर इस पर कार्रवाई की मांग की, साथ ही अल्टीमेटम भी दिया कि ठोस कार्रवाई नहीं होने पर वे 16 अक्टूबर से बेमियादी भूख हड़ताल करेंगे।

वादे के अनुरूप बुधवार सुबह से ही बिसाई पालिका गेट के सामने पहुंचे और धरना पर बैठ गए। शहर में सूअरों का आतंक शहर में सुकर पालन व्यवस्थित नहीं है। कई परिवार की आजीविका का यह साधन है, लेकिन अब तक इस व्यवसाय को व्यवस्थित करने प्रशासनिक प्रयास नहीं किया गया। हालात यह है कि नगर का हर क्षेत्र सुअरों के डेरे से भरा पड़ा है।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत कूड़ादान जरूर हटे हैं, लेकिन सुअरों से हो रही गंदगी पर कोई प्रयास नहीं किया गया। वहीं सुअरों के दौड़ाने और काटने की भी घटनाएं शहर में घट चुकी है। फसल बर्बादी को लेकर किसानों ने कई बार थाना में आवेदन दिया है और सुअरों का अव्यवस्थित कारोबार पर नियंत्रण लगाने की मांग की है। बावजूद कुछ हुआ नहीं। इसी से व्यथित एक बुजुर्ग अब आंदोलन की राह पर है।

प्रशासन से हुई सुलह

देर शाम धरनारत बिसाई से नगर पालिकाध्यक्ष पवन पटेल और सीएमओ रमेश जायसवाल ने मुलाकात की। दोनों पक्षों की चर्चा हुई। जिस पर पालिकाध्यक्ष और सीएमओ ने सुअर मुक्त महासमुंद के लिए बिसाई को भरोसा दिलाया। कहा गया कि गुरुवार से पालिका अमला सुअरों को शहर के बाहर करने के अभियान में जुटेगा। प्रशासन से हुई सकारात्मक चर्चा के बाद बिसाई ने आंदोलन स्थगित कर लिया।

सात साल पहले 498 परिवारों का था व्यवसाय

जिले में 19वीं पशु संगणना अक्टूबर 2012 की रिपोर्ट्स के अनुसार 498 सुअर पालक परिवार थे। 18वीं पशु संगणना में जिले में सुअरों की संख्या 3957 थी। 19वीं संगणना में जिले में सुकरों की संख्या 3826 रही। 20वीं पशु संगणना की रिपोर्ट अब तक अप्राप्त है। नगर में सुअर पालन के कई केंद्र नयापारा, बेमचा भाठा, आदर्श नगर, सुभाष नगर क्षेत्र में है।

HIV Mothers: एचआईवी से जीती जंग, 113 एड्स पीड़ित महिलाओं ने दिया स्वस्थ बच्चों को जन्म

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 एचआइवी संक्रमण अब मां बनने के लिए अभिशाप नहीं रह गया है। अब ऐसी तकनीक का ईजाद कर लिया गया है, जिससे मां के एचआईवी संक्रमित होने के बाद भी उनके गर्भस्थ का बचाव मुमकिन कर दिया है। बड़े चकाचौंध वाले शहरों में एड्स और एचआईवी को लेकर जागरूकता तो आम बात है। शहरों में तमाम तरह की मेडिकल सुविधाएं होती हैं। लेकिन एड्स को लेकर जागरूकता बिहार के किसी शहर में हो तो अचरज होता है, लेकिन हकीकत यह है कि बिहार के समस्तीपुर में एडस पीड़ित 113 महिलाओं ने स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है। ऐसा इसलिए संभव हुआ क्योंकि सभी गर्भवती महिलाओं ने बच्चे के जन्म से पहले अपना एचआईवी टेस्ट कराया था। एचआईवी टेस्ट में पॉजिटिव रिपोर्ट आते ही पीड़ित गर्भवती महिलाओं का इलाज शुरू कर दिया गया। इस इलाज से गर्भ में पल रहे बच्चे पर बीमारी का असर नहीं पड़ा।

इस बीमारी के इलाज के तहत समस्तीपुर स्थित सदर अस्पताल के एंटी रेट्रोवायरल ट्रीटमेंट (एआरटी) सेंटर में एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला का खास ख्याल रखा गया। इसके बाद दवा खाने के लिए विशेष रूप से निर्देश दिए गए। इन सभी महिलाओं की दिनचर्या नए सिरे से तय की जाती है। साथ ही क्या करें और क्या न करें, जैसे तमाम निर्देश दिए जाते हैं। इस वजह से गर्भस्थ शिशु पर बीमारी का असर नहीं पड़ता है। गर्भधारण का समय पूरा होने पर पीड़ित गर्भवती को सुरक्षित प्रसव के लिए मुजफ्फरपुर स्थित श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) रेफर किया जाता है।

नवजात की मिल रही उत्साहजनक रिपोर्ट

बिहार के समस्तीपुर में पिछले चार सालों के दौरान (जनवरी 2016 से सितंबर 2019) 2,982 लोगों की एचआईवी जांच और काउंसलिंग की गई है। जांच करवाने वालों में 1555 पुरुष, 1218 महिलाएं और 209 बच्चे शामिल थे। इनमें से 113 महिलाएं एचआईवी पीड़ित पाई गई। बाद में इन महिलाओं ने स्वस्थ बच्चों के जन्म दिया। 2016 में यह संख्या 33, 2017 में 36, 2018 में 30 और 2019 में अब तक 14 हैं । इन महिलाओं की एचआईवी रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही स्वास्थ्य विभाग ने इलाज शुरू कर दिया था, बाद में सभी नवजात की एचआईवी रिपोर्ट निगेटिव आई है। 113 बच्चों को जागरूकता की वजह से ही बचाया जा सका है। समस्तीपुर के सदर अस्पताल के एआरटी सेंटर में एचआईवी पीड़ितों के इलाज से संबंधित सारी सुविधाएं, टेस्ट एवं दवाइयां उपलब्ध हैं।

जागरूकता से ही एड्स का इलाज संभव है। 113 बच्चों को जागरूकता की वजह से ही बचाया जा सका। सदर अस्पताल के एआरटी सेंटर में एचआइवी पीड़ितों के इलाज के लिए सारी सुविधाएं, टेस्ट एवं दवाइयां उपलब्ध हैं। -श्रीराम प्रसाद, नोडल पदाधिकारी, एआरटी सेंटर, सदर अस्पताल

छत्तीसगढ़ : फोरेंसिक के स्टूडेंट्स के लिए बेहतर होती है इस तरह की जानकारी

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बिलासपुर रीजनल फोरेंसिक साइंस लैब के निदेशक पीएस भगत पीएस भगत ने फोरेंसिक साइंस के स्टूडेंट से कहा कि वे क्राइम सीन व पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पर फोकस करें। साक्ष्य जुटाने के दौरान अनिवार्य रूप से कैमरा, टॉर्च, स्केल, हेंडग्लोब एवं पैकेजिंग मटेरियल अपने पास रखें।

गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान अध्ययनशाला के अंतर्गत फोरेंसिक साइंस विभाग में छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीजीकॉस्ट), रायपुर द्वारा पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। एक्सप्लोरेशन ऑफ इम्पॉरटेंस ऑफ फोरेंसिक टेक्नीक्स बाय हेंड्स ऑन ट्रेनिंग टू दि बेनिफिट्स ऑफ सोसायटी विषय पर दूसरे दिन आज विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

प्रथम तकनीकी सत्र में मुख्य वक्ता निदेशक भगत ने आगे कहा कि बिलासपुर एवं उससे सटे क्षेत्र के विभिन्न घटना स्थलों पर लिए गए फोटोग्राफ को प्रदर्शित करते हुए बताया कि किस प्रकार घटना स्थल से साक्ष्यों को एकत्र किया जाना चाहिए। दूसरे सत्र में व्याख्यान डॉ अभय कुमार, एमडी पलमो डायबिटिक क्लीनिक, बिलासपुर ने प्रतिभागियों को बताया कि वर्तमान समय में उद्योगों से निकलने वाले विषाक्त पदार्थों को पर्यावरण में जाने से बचाने में टॉक्सीकोलॉजी की तकनीकी प्रभावकारी है।

तीसरे व्याख्यान में डॉ एसएस गोले, मेडिकोलीगल एक्सपर्ट, सिम्स, बिलासपुर द्वारा दिया गया जिसमें पोस्टमार्टम और फोरेंसिक साइंस प्रयोगशाला में मानक संचालन प्रक्रिया को समझाया।

इस दौरान प्रयोगशाला में किए गए प्रयोगों के पश्चात दस्तावेजीकरण में अगर किसी प्रकार की त्रुटि रह जाती है तो पीड़ित को न्याय मिलने में विलंब होने की बात कही। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक साइंस के स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थी शोध प्रबंध हेतु सिम्स में पोस्टमार्टम डेमो से संबंधित जानकारी प्रदान करने की बात कही।

छत्तीसगढ़ : धुंधली आंखों को रोशन करने के लिए पहुंची लाइफ लाइन एक्सप्रेस, मगर नहीं हो सका इलाज

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लाइफ लाइन एक्सप्रेस में पिछले पांच दिन से चल रहे मोतियाबिंद व नेत्र संबंधित रोगियों की ओपीडी बुधवार को बंद कर दी गई। अंतिम दिन तक दो हजार से अधिक लोग पंजीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 362 मरीज ऐसे भी हैं, जिनकी धुंधली आंखों से मोतिया निकालने ऑपरेशन की जरूरत है। पर उन्हें उनकी बीमारी से मुक्त कर दृष्टि को रौशन करने उनका बढ़ा हुआ बीपी और शुगर आड़े आ रहा है। 18 अक्टूबर तक नेत्ररोगियों का इलाज जारी रहेगा, तब तक बीपी-शुगर नॉर्मल होने का इंतजार किया जाएगा।

इन पांच दिनों में चिन्हांकित किए गए मोतियाबिंद से पीड़ित ऐसे मरीज, जिनका बीपी-शुगर बढ़ा हुआ है, उनका ऑपरेशन बीपी-शुगर सामान्य होने के बाद करने की बात कही जा रही है। नेत्र व अन्य रोगों के उपचार के लिए पांचवें दिन तक दो हजार से अधिक मरीजों ने पंजीयन कराया है।

800 से अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका है। इसमें ऑपरेशन कराने वाले में 347 मरीज हैं। लाइफ लाइन एक्सप्रेस में नेत्र रोग का इलाज कराने खासी तादाद में लोग पहुंच रहे हैं। इलाज कराने के लिए पहुंचने वाले मरीजों का बीपी और शुगर चेक को प्राथमिकता दी जा रही है।

ऑपरेशन की प्रक्रिया में चिकित्सकों की ओर से प्राथमिक परीक्षण के तौर पर बीपी और शुगर का माप अनिवार्य है। पिछले चार दिन के भीतर ऑपरेशन के लिए पहुंचने वाले मरीजों में 362 ऐसे में मरीज भी पाए गए हैं, जिनका बीपी और शुगर असामान्य होने के कारण उन्हें सामान्य होने की स्थिति तक इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। शुगर सामान्य नहीं होने के कारण कई मरीज ठहरने के लिए चिन्हांकित जगह की बजाय घर वापस होना उचित समझ रहे हैं।

14 ओरल व गर्भाशय कैंसर में 27 स्क्रीनिंग

नेत्र रोग के अलावा कैंसर, अस्थिरोग, कान, मिरगी, दांत के रोगों का इलाज भी किया जाएगा। उनका पंजीयन भी जारी है। अब तक की स्थिति पर गौर करें तो मुख के कैंसर से पीड़ित अब तक 14 व गर्भाशय कैंसर के लिए 27 मरीजों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनका आगामी दिनों में इलाज किया जाएगा।

नेत्र रोग ऑपरेशन के बाद उक्त रोगों का भी क्रमिक इलाज शुरू होगा। ऑपरेशन बोगी के सामने मरीजों की बढ़ रही भीड़ के चलते निर्धारित पंजीकृत सीरियल से प्रवेश दिया जा रहा है।

ओपीडी बंद पर नहीं लौटाए जाएंगे नए मरीज

नेत्र रोग के लिए परीक्षण और लाइफ लाइन एक्सप्रेस के प्रभारी अनिल प्रेमसागर का कहना है कि पंजीयन का बुधवार को अंतिम दिन था, बावजूद इसके अगर आगे भी नए मरीज आते हैं तो उन्हें बिना इलाज के नहीं लौटाया जाएगा।

बाह्यरोगियों के साथ अब तक पंजीकृत किए जा चुके नेत्र संबंधी रोगों से ग्रसित मरीजों का इलाज भी 18 अक्टूबर तक किया जाता रहेगा। बुधवार से केवल ओपीडी खत्म हुआ है, इलाज 18 अक्टूबर तक जारी रहेगा। इसके बाद भी नए मरीज आए तो उन्हें भी जरूर देखा जाएगा।

18 से शुरू होगा ईएनटी में पंजीयन

लाइफ लाइन एक्सप्रेस में मोतियाबिंद व नेत्ररोग से संबंधित केवल बुधवार को 51 ऑपरेशन किए गए। बुधवार तक की स्थिति में पिछले पांच दिन के दरम्यान दो हजार से अधिक मरीज पंजीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें 800 से अधिक की जांच व इलाज किया जा चुका है, जबकि पंजीकृत हुए शेष मरीजों का इलाज आगामी दिनों में किया जाएगा। इस दौरान 800 से अधिक चश्में के ऑर्डर दिए जा चुके हैं, जिनका वितरण भी किया जाएगा। अब तक 347 ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जाने की बात कही गई है।

अब बने दिखत हे, लाइफ लाइन ला धन्यवाद

कलेक्टर से ग्रामीणों ने जताई खुशी

बुधवार की सुबह जिला अस्पताल पहुंची कलेक्टर किरण कौशल से मोतियाबिंद के सफल ऑपरेशन के बाद ग्रामीणों ने खुशी-खुशी मुलाकात की। उन्होंने लाइफलाइन एक्सप्रेस व डॉक्टरों का आभार जताया। कलेक्टर के पूछने पर काशीनगर की संतोषी बाई, केराबाई और अन्य ग्रामीणों ने कहा कि अब बनें दिखत हे, सब साफ-साफ नजर आवत हे, दुनिया के रंग ला फिर से देखथन।

कलेक्टर ने मरीजों के बाद जांच कर रहे डॉक्टरों से भी मुलाकात की व भर्ती मरीजों का हाल-चाल जाना। मरीजों ने एक ओर खाने-पीने, इलाज-दवाई व रहने की व्यवस्था की तारीफ की तो रोज-रोज इलाज के लिए लगने वाले इंजेक्शनों का भय भी कलेक्टर के समक्ष व्यक्त किया।

छत्तीसगढ़ : सड़क पर शोरूम का कचरा फेंका, संचालक पर 35 हजार रुपये जुर्माना

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 शहर में कचरा फेकने वालों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। नगर के एमजी रोड स्थित एक बड़े व्यवसायी पर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना लगाया है। शोरूम का प्लास्टिक कचरा सड़क के किनारे फेंके जाने और ढेर बना दिए जाने को लेकर कई बार निगम के स्वास्थ्य अमले ने रोक-टोक किया था पर सुधार ना आने पर 35,000 का जुर्माना ठोका है।

निगमायुक्त के नाम बाकायदा चेक लेकर भुगतान कराया गया है। शहर में अन्य स्थानों पर भी कचरा फेंकने वालों पर इसी तरह की कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम आयुक्त ज्वाइंट कलेक्टर हरेश मंडावी के निर्देश पर इन दिनों शहर में साफ सफाई का अभियान तेज हो गया है। शहरवासियों से अपील की गई है कि घर दुकान का कचरा सड;क पर ब फेंके। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने वाली महिलाओं को दें या फिर निगम में सूचित करें ताकि तत्काल उसका उठा हो सके।

इसके बावजूद कुछ लोग शहर के सफाई व्यवस्था में खलल डाल रहे हैं। लिहाजा निगम आयुक्त के निर्देश पर पहुंचे स्वच्छता निरीक्षक स्वर्ण मेहता ने एमजी रोड के वाहन शोरूम के संचालक पर 35,000 का जुर्माना लगाया है। बताया जा रहा है किसी भी संस्थान से अब तक का यह सर्वाधिक जुर्माना है। शहर के व्यवसायियों से कहा गया है कि दीपावली के समय दुकानों की साफ-सफाई कराई जा रही है ऐसे में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक व अन्य कचरा निकल रहा है जिसे एक जगह सहेज कर रखें, सड़क पर निकालकर ना फेंके। शहर में कहीं भी कचरे का ढेर ना बनाएं यदि इस तरह कहीं भी कचरा नजर आया तो कार्रवाई तय है।

कचरा प्रबंधन की महिलाएं भी सक्रिय

कचरा प्रबंधन कार्य में लगी महिलाएं भी शहर में सक्रिय हो गई हैं। डोर टू डोर कलेक्शन करने नियमित पहुंच रही है और इनकी टीम के द्वारा सड़क पर कचरा फेंकने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। बड़े जुर्माने के साथ कचरा फेंकने वालों पर रंगे हाथ पकड़ने की कार्रवाई और 100 से लेकर 500 तक का जुर्माना अलग से वसूला जा रहा है। कचरा फेंकने वालों पर लगातार कार्रवाई हो रही है और निदान -1100 में ऑनलाइन शिकायत में भी हो रही हैं।

व्यवस्था में हुआ सुधार

अंबिकापुर शहर में सूखा गीला कचरा के साथ अब डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने वाली महिलाओं को खतरनाक कचरा अलग पैकेट बनाकर दिया जा रहा है। इसकी संख्या में अचानक बढ़ोतरी आई है। नईदुनिया ने हाल ही में इसको लेकर एक बड़ी खबर प्रकाशित की थी।

तब से लोगों ने कचरा प्रबंधन कार्य में लगी महिलाओं की मदद के लिए हाथ बढ़ाना शुरू किया है। खतरनाक कचरे में डायपर, सेनेटरी पैड, सिरिंज, मेडिकल वेस्ट सहित कई ऐसी सामग्रियां है जिसे अलग पैकेट बनाकर महिलाओं को दिया जा रहा है, जिसे सीधे मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल करने वाली इंसीनरेटर मशीन में पहुंचाया जा रहा है।

कार्रवाई होने लगी तो नेताओं की सिफारिशें भी

शहर में कचरा फेंकने वाले लोगों पर जुर्माने की बड़ी रकम वसूली जाने लगी तो नेताओं के द्वारा सिफारिश भी शुरू हो गई है। एमजी रोड में बड़े संचालक पर जुर्माना ठोका गया तो कुछ नेताओं ने अधिकारियों पर दबाव बनाना शुरू किया, पर रसीद कट जाने के बाद कोई गुंजाइश ही नहीं बचती। लिहाजा उक्त राशि का भुगतान कचरा फेंकने वाले शोरूम के संचालक को देनी पड़ी।

BCCI की कमान संभालते ही सौरव गांगुली को लगेगा 7 करोड़ का झटका

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टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और प्रिंस ऑफ कोलकाता कहे जाने वाले सौरव गांगुली जल्द ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल(BCCI) की कमान संभालने वाले हैं। बीसीसीआई की कमान अपने हाथों में लेने से पहले ही दादा ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। 10 महीनों तक बीसीसीआई की कमान संभालने वाले सौरव गांगुली ने साफ कर दिया है कि वो भारतीय क्रिकेट को लेकर क्या तैयारी कर रहे हैं। इन सब के बीच बीसीसीआई की कमान संभालने से दादा को करोड़ों का नुकसान होगा।बीसीसीआई की कमान संभालते ही दादा को करोड़ों का नुकसान

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान रहे सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। बीसीसीआई की कमान संभालने के साथ ही दादा अगले 10 महीनों के लिए बीसीसीआई की कमान संभालेंगे। 23 अक्टूबर से गांगुली के नेतृत्व में प्रशासकों की नई टीम कमान संभालेगी, लेकिन बीसीसीआई के अध्यक्ष बनते ही सौरव गांगुली को करोड़ों का नुकसान होगा। दरअसल दादा क्रिकेट की कॉमेंट्री करते हैं, क्रिकेट से जुड़े टीवी शो में एक्सपर्ट्स की भूमिका में निभाते हैं, आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स की टीम के साथ बतौर मेंटर काम कर रहे थे, लेकिन बीसीसीआई के अध्यक्ष पद की कमान संभालने के बाद वो ये सब नहीं कर पाएंगे।

7 करोड़ का होगा नुकसान

बीसीसीआई की कमान संभालने की वजह से दादा को बड़ी रकम का नुकसान होगा। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो उन्हें 7 करोड़ रुपए का भारी नुकसान हो सकता है। बीसीसीआई प्रमुख की जिम्मेदारी संभालने के बाद गांगुली कॉ मेंट्री छोड़नी पड़ेगी। उन्हें मीडिया कॉन्ट्रैक्ट करार से भी अलग होना होगा। सभी विज्ञापनों के लिए मौजूदा सभी कमर्शियल करार खत्म करने होंगे। ऐसे में इन सबसे होने वाली इनकम खत्म हो जाएगी, जो तकरीबर करीब 7 करोड़ के आसपास की है।

दो पदों पर नहीं रह सकते गांगुली

बीसीसीआई के नियम के अनुसार कोई भी व्यक्ति बोर्ड से जुड़े दो पदों पर नहीं रह सकता हैं। बीसीसीआई की कमान संभालने के बाद बतौर अध्यक्ष अपने सभी कमर्शियल करार को खत्म करने होंगे। गौरतलब है कि सैरव गांगुली पांच साल से बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। बोर्ड के नए नियमों के अनुसार कोई भी सदस्य लगातार छह साल तक ही किसी पद पर रह सकता है।