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मुख्यमंत्री श्री बघेल ने नोबेल पुरस्कार के लिए अर्थशास्त्री श्री अभिजीत बनर्जी और उनकी पत्नि एस्थर डुफ्लो को दी शुभकामनाएँ…

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने अर्थशास्त्री श्री अभिजीत बनर्जी, एस्थर डुफ्लो और माइकल क्रेमर को वर्ष 2019 का अर्थशास्त्र (इकोनॉमिक्स )का नोबेल पुरस्कार के लिए चयनित होने पर शुभकामनाएँ दी है। अर्थशास्त्री अभिजीत, एस्थर और माइकल को वैश्विक गरीबी कम करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा।

पीएमओ की गलती की वजह से सांसदों की जगह पत्रकारों को चले गए सरकार के सीक्रेट डॉक्‍यूमेंट्स

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 ऑस्‍ट्रेलिया में एक बड़ा ही अजब-गजब मामला देखने को मिला है। यहां पर प्रधानमंत्री स्‍कॉट मॉरिसन के ऑफिस से एक भयंकर भूल हुई है। ऑफिस ने कुछ सीक्रेट डॉक्‍यूमेंट्स जो गठबंधन सरकार के सांसदों को भेजने थे, उन्‍हें जर्नलिस्‍ट्स को भेज दिया गया। अब पीएम को समझ नहीं आ रहा है कि क्‍या किया जाए। इन डॉक्‍यूमेंट्स को सांसदों को भेजना था ताकि जब सोमवार को संसद के सत्र की शुरुआत हो तो सांसदों को बहस के लिए तैयार किया जा सके। इन सीक्रेट डॉक्‍यूमेंट्स को गलती से जर्नलिस्‍ट्स को भेज दिया गया जिनमें चीन की न्‍यूज एजेंसी शिन्‍हुआ के जर्नलिस्‍ट्स भी शामिल थे। देश के हर जर्नलिस्‍ट्स के पास देखते ही देखते ही यह सीक्रेट डॉक्‍यूमेंट्स पहुंच गए थे।विपक्ष के सामने तैयारियों के निर्देश

इन डॉक्‍यूमेंट्स में कई अहम मुद्दों का जिक्र था जैसे देश में शरण लेने वाले लोगों की संख्‍या, टैक्‍स की दर, सीरिया, पेरिस समझौता और यहां तक कि विकीलीक्‍स के फाउंडर जूलियन असांजे तक के बारे में भी कई अहम बातें थीं। इस ई-मेल के जरिए राजनेताओं को उन मुश्किल सवालों पर रणनीतिक जवाब तैयार करने की का प्रस्‍ताव दिया गया था जो विपक्ष या फिर मीडिया की तरफ से पूछे जा सकते हैं। 8,200 शब्‍दों के इस डॉक्‍यूमेंट में पूछा गया था कि अगर अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की क्‍लाइमेट चेंज रिपोर्ट जिसमें दावा किया गया है कि ऑस्‍ट्रेलिया साल 2030 तक अपना लक्ष्‍य नहीं पूरा कर पाएगा तो सांसदों को इस पर जो जवाब देना होगा वह सकारात्‍मक होना चाहिए। जवाब में सांसदों से कहा गया था कि वे कहेंगे, ‘हम बिना कार्बन टैक्‍स लाए हुए ही अपना लक्ष्‍य पूरा कर लेंगे।’

विपक्ष पर कैसे साधना है निशाना

सांसदों को यह भी बताया गया था कि उन्‍हें कैसे विपक्षी पार्टी पर निशाना साधना है। जवाब में सांसदों को कहना था, ‘जब लेबर पार्टी सत्‍ता में थी तो उसने कार्बन टैक्‍स शुरू किया था, ऊर्जा की कीमतों में तेजी आई थी जिसकी वजह से उद्योगों के बाहर जाने की नौबत आ गई थी।’ एक और डॉक्‍यूमेंट में पार्टी मेंबर्स को शरण लेने वाले लोगों की वजह से ऑस्‍ट्रेलिया के नागरिकों के बीच मौजूद डर को कैसे दूर किया जा इसका जिक्र था।

विपक्ष पर कैसे लगाने हैं आरोप

सरकार के मंत्रियों को जो जवाब देने के लिए कहा गया था उसके मुताबिक, ‘लेबर का दावा है कि मजबूरों का शोषण हो रहा है लेकिन वह सरकार में थे तब उन्‍होंने 20 मिलियन ऑस्‍ट्रेयिन डॉलर की फंडिंग को कम कर दिया था। स्‍टाफ में 23 प्रतिशत की कटौती की गई है और साथ ही संवेदनशील वर्कर्स को बचाने के लिए कोई नीति ही नहीं थी।’ अभी तक पीएम मॉरिसन की ओर से इस पर कोई भी टिप्‍पणी नहीं की गई है। अटॉर्नी जनरल क्रिश्चियन पोर्टर ने हालांकि इस गलती को कोई ज्‍यादा तवज्‍जो नहीं दी है। उन्‍होंने एबीसी रेडियो मंडे मॉर्निंग को बताया है कि इस तरह की घटनाएं आज के दौर की राजनीति के लिए नई नहीं हैं।

अभिजीत और एस्टेयर को मिले नोबेल में दाल का कमाल

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अभिजीत, एस्टेयर ड्यूफ़्लो और माइकल क्रेमर ने ग़रीबी मिटाने के प्रयासों के लिए नोबेल सम्मान के लिए चुना गया है. इससे पहले अमर्त्य सेन को भी ग़रीबी उन्मूलन की दिशा में काम करने के लिए नोबेल सम्मान मिला था.

अमर्त्य सेन ने कहा, “नोबेल समिति ने इस बार सबसे योग्य लोगों को चुना है.” क्या आप जानते हैं कि इन तीनों ने ऐसा क्या कमाल कर दिखाया.

अभिजीत बनर्जी का कहना है कि “लोग ग़रीबी के बारे में बहुत बातें करते हैं, हमेशा बड़े और बुनियादी सवाल उठाते हैं, मसलन, ग़रीबी की मूल वजह क्या है, क्या विदेशी अनुदान से ग़रीबी हटाई जा सकती है, या फिर ये कि सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका क्या होनी चाहिए. इस तरह ग़रीबी बड़ी बहसों में उलझी रहती है. होना यह चाहिए कि ग़रीबी को सुलझाने लायक टुकड़ों में तोड़ा जाए.”

इसका मतलब यह है कि शिक्षा, पोषण और टीकाकरण जैसे कामों पर ध्यान दिया जाए और ग़रीबों को थोड़ी मदद दी जाए तो ऐसे कार्यक्रमों की सफलता की दर बढ़ जाएगी और ग़रीबी उन्मूलन की दिशा में छोटे-छोटे हज़ारों लाखों काम करने की ज़रूरत है, न कि बड़ी-बड़ी बहसों की.

नोबेल समिति की वेबसाइट पर एक ग्राफ़िक प्रकाशित किया गया है जिसमें समझाया गया है कि इन अर्थशास्त्रियों ने किस तरह दाल जैसी मामूली चीज़ को प्रोत्साहन के तौर पर इस्तेमाल करके टीकाकरण की एक परियोजना को कामयाब बना दिया.

ये है दाल का कमाल

एस्टेयर ड्यूफ़्लो ने बताया कि जिन बच्चों का पूरी तरह टीकाकरण हो चुका है उनकी तादाद राजस्थान में बहुत कम है, जब यह रिसर्च किया गया तो पूरी तरह इम्युनाइज़्ड बच्चों की तादाद पांच प्रतिशत के करीब थी. इसकी वजह ये बताई गई कि इम्युनाइज़ेशन करने वाले कर्मचारी लोगों तक पहुंच नहीं पा रहे हैं.

ऐसे में लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक दूर चलकर जाना पड़ता था और इसमें कई बार उनका पूरा दिन लग जाता था जिसका मतलब ये था कि उनकी एक दिन की दिहाड़ी मारी गई, कई बार तो वे बिना टीका लगवाए लौट आते थे क्योंकि कभी टीका ख़त्म हो जाता तो कभी कर्मचारी चले जाते, या कभी कतार बहुत लंबी होती. ऐसे में लोगों ने टीका लगवाने का इरादा छोड़ दिया.

ऐसी हालत में इन अर्थशास्त्रियों ने एक प्रयोग करने की सोची, उन्होंने एक स्वयंसेवी संस्था सेवा मंदिर की मदद ली. अर्थशास्त्री टीकाकरण की कामयाबी का स्तर बढ़ाना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने 120 गांवों को लॉटरी के आधार पर चुना, इन गांवों को तीन श्रेणियों में बांटा गया.

पहली श्रेणी में ऐसे गांव थे जहां लोगों से स्वास्थ्य केंद्र में जाकर टीके लगवाने को कहा गया.

दूसरी श्रेणी में ऐसे गांव थे जहां टीका लगाने वाली मोबाइल क्लिनिकें लोगों के दरवाज़े तक पहुंचीं.

तीसरी श्रेणी में ऐसे गांव थे जहां टीका लगाने के मोबाइल क्लिनिक तो लोगों तक पहुंचे ही, साथ ही, टीका लगवाने को प्रोत्साहित करने के लिए लोगों को एक किलो दाल भी दी गई.

इसका नतीजा ग्राफ़िक में आप साफ़ देख सकते हैं, जिन गांवों में दाल को प्रोत्साहन के तौर पर इस्तेमाल किया गया वहां पूरी तरह इम्युनाइज़्ड बच्चों की तादाद 39 प्रतिशत तक पहुंच गई जबकि बिना दाल वाले गांवों में यह दर आधी से भी कम रही.

इस तरह अर्थशास्त्री ये साबित कर पाए कि ग़रीबी से निबटने के लिए ग़रीबों को छोटे-मोटे आर्थिक प्रोत्साहन देने के चमत्कारी फ़ायदे होते हैं. अर्थशास्त्री ने पक्के तौर पर साबित किया कि टीकाकरण की वजह से हज़ारों बच्चे स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ नहीं बनेंगे इस तरह सरकार को बहुत मोटी बचत होगी, एक किलो दाल की तुलना में कई हज़ार गुना बचत.

ये लोगों की ज़रूरतें-मजबूरियों को समझने वाले अर्थशास्त्रियों का कमाल है जिन्होंने दाल जैसी मामूली लगने वाली चीज़ से ग़रीबी उन्मूलन की दिशा में इतना बड़ा अंतर पैदा कर दिया.

इस दिवाली 5 लाख दीपों से जगमगाएगी अयोध्या, पहली बार थानों में जलाए जाएंगे दीप

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डीजीपी व मुख्य सचिव ने दीपोत्सव स्थल राम की पैड़ी का निरीक्षण भी किया. डीजीपी ओपी सिंह ने कड़ी सुरक्षा के बीच दीपोत्सव मनाए जाने की बात कही है. वहीं मुख्य सचिव आरके तिवारी ने राम की पैड़ी में चल रहे कार्यों से संतुष्टि जताते हुए ऐतिहासिक दीपोत्सव मनाए जाने की बात कही है.

यह दीपोत्सव 24-26 तक चलेगा. मंगलवार को दीपोत्सव की तैयारी का जायजा लेने मुख्य सचिव आरके तिवारी व डीजीपी ओपी सिंह अयोध्या पहुंचे, जहां उन्होंने राम की पैड़ी , राम कथा पार्क का निरीक्षण किया. डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि इस बार दीपोत्सव का आयोजन बहुत भव्य होगा. सरकारी इमारतों सहित पहली बार थानों में भी दीपक जलाएं जाएंगे. अयोध्या हमेशा हाई अलर्ट जोन रहा है. डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि इस बार दीपोत्सव का आयोजन बहुत भव्य होगा. सरकारी इमारतों सहित पहली बार थानों में भी दीपक जलाएं जाएंगे. अयोध्या हमेशा हाई अलर्ट जोन रहा है. उन्होंने कहा कि अयोध्या की सुरक्षा में कोई कमी नहीं रहेगी.

इस दौरान सरयू नदी सहित सभी जगहों पर सुरक्षा बल तैनात होंगे. वहीं, मुख्य सचिव ने कहा कि दीपोत्सव की तैयारियां तेजी से चल रही है. सरकारी और प्राइवेट भवनों पर भी दीपक जलाएंगे. पांच लाख दीपों से अयोध्या जगमगाएगी. आपको बता दें कि 17 अक्टूबर को अयोध्या विवाद की सुनवाई पूरी हो, ऐसे में प्रदेश की सुरक्षा के लिए सरकार दृढ़ संकल्पित है.

कार्ति चिदंबरम ने पीएम के समुद्रतट की सफाई को लेकर भ्रामक तस्वीरें शेयर की,

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पीएम मोदी की तमिलनाडु में शी जिनपिंग के साथ मुलाक़ात की चर्चा देश भर में हुई। इस मुलकात के बाद मोदी ने समुद्र तट पर कचरा उठाते हुए एक

ट्वीट किया, जो की सोशल मीडिया पर काफी वायरल भी हुआ था । कई सोशल मीडिया पर लोगों ने इसकी तारीफ़ की तो वहीँ कुछ लोगों ने इसको मोदी की आलोचना करते हुए एक नाटकीय कार्य बताया था। वहीँ पूर्व गृह मंत्री और शिवगंगा से कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने तीन तस्वीरों को ट्वीट किया, जिनमें से दो में प्रधानमंत्री मोदी को कचरा उठाते हुए दिखाया गया, जबकि तीसरी तस्वीर में कैमरा और प्रकाश उपकरणों के साथ कई व्यक्ति दिखाई दे रहे हैं। हालाँकि इस फोटो की जांच की तो उस जांच सच्चाई कुछ और ही निकली।

https://twitter.com/KartiPC/status/1183048817685319693

यहां छोटे-छोटे काम पर भी मिलती है लाखों की सैलरी

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पूरी दुनिया में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो पैसा कमाना नहीं चाहता। हर कोई अच्छी नौकरी के साथ अच्छा पैसा कमाना चाहता है, लेकिन कई बार कड़ी मेहनत के बाद भी इंसान को अपनी जरूरत पूरी करने लायक पैसा नहीं मिल पाता।

ऐसे में लोग दूसरे देशों की तरफ रुख करते हैं। अगर आप या आपका कोई जानकार कमाई के लिए दूसरे देश जाने का मन बना रहा है तो एक बार इन देशों के बारे में भी जान लें। ये दुनिया के कुछ ऐसे देशहैं जहां सबसे अच्छी सैलरी मिलती है। ये लिस्ट 2016 के आंकड़ों पर आधारित है।

अमेरिका

दुनिया में सबसे अधिक सैलरी देने वाले मुल्‍कों में अमेरिका सबसे ऊपर है। अमेरिका में 31.6 फीसदी टैक्‍स देने के बाद एक व्‍यक्ति को साल में औसतन कम से कम 41,355 डॉलर सैलरी मिल जाती है, यानि अमेरिका में अगर आप छोटे से छोटा काम भी करते हैं तो आप एक साल में 26 लाख रुपए से ज्यादा कमा सकते हैं।

लक्‍जमबर्ग

लिस्‍ट में दूसरे नंबर पर लक्‍जमबर्ग है। लक्‍जमबर्ग को पूरे यूरोप में आर्थिक केंद्र के तौर पर जाना जाता है। लक्‍जमबर्ग को पूरे यूरोप में स्‍टील उपलब्‍ध के लिए भी जाना जाता है। लक्‍जमबर्ग में एक व्‍यक्ति को 38,951 यूरो का सालाना भुगतान बतौर सैलरी किया जाता है। यह सैलरी व्‍यक्ति को तब मिलती है जब उसकी मूल सैलरी से 37.7 फीसदी टैक्‍स काट लिया जाता है। यानि एक साल में आप लगभग 31 लाख रुपए कमा सकते हैं।

नॉर्वे

नॉर्वे को दुनिया के सबसे धनी देशों में एक माना जाता है। इसका मुख्‍य कारण उसके पास मौजूद नेचुरल रिसोर्सेेज हैं। नॉर्वे में तेल, हाइड्रोपॉवर, फिशिंग और मिनरल अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। नॉर्वे में लोगों को जो सैलरी मिलती है, उसका 37 फीसदी टैक्‍स काट लिया जाता है। इसके बाद उन्‍हें सालाना औसतन 33,492 नार्वे क्रोन सैलरी मिलती है। इसके अलावा यहां पर अतिरिक्‍त घंटे काम करने पर अलग से पैसों का भुगतान होता है। भारत के हिसाब से आप एक साल में टैक्स वगैरह देने के बाद 27 लाख रुपए आराम से कमा सकते हैं।

स्विट्जरलैंड

स्विट्जरलैंड को दुनिया के सबसे उम्‍दा देशों में एक माना जाता है। यह सरकारी पारदर्शिता, जीवन की गुणवत्‍ता, आर्थिक और मानव विकास के लिए जाना जाता है। स्विट्जरलैंड में एक व्‍यक्ति की औसत इनकम सालाना 33,491 स्विस फ्रैंक है। साथ ही वहां पर सप्‍ताह में काम करने का समय भी निर्धारित है और वहां काम करने वालों को अधिकतम 35 घंटे ही सप्‍ताह में काम करना होता है। इस हिसाब से आप एक साल में यहां कम से कम 23 लाख रुपए कमा सकते हैं।

ऑस्‍ट्रेलिया

ऑस्‍ट्रेलिया को दुनिया में ऑयल और मिनरल का सबसे बड़े निर्यातक देश माना जाता है। ऑस्‍ट्रेलिया में औसतन एक व्‍यक्ति को सालाना 31,588 आस्ट्रेलियाई डॉलर सैलरी मिलती है। यह सैलरी 27.7 फीसदी टैक्‍स काटने के बाद दी जाती है। ऑस्‍ट्रेलिया में हर सप्‍ताह में 36 घंटे काम करना होता है। आप एक साल में ऑस्ट्रेलिया में नौकरी कर कम से कम 16 लाख रुपए कमा सकते हैं।

यहां बिल्ली और कुत्ते भी करते हैं रक्तदान, जगह-जगह बनाए गए हैं ब्लड बैंक

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इंसानों के लिए ब्लड बैंक का होना तो आम बात है, लेकिन क्या आपने कभी जानवरों के ब्लड बैंक के बारे में सुना है? जी हां, दुनिया में कई ऐसे देश हैं, जहां ‘पेट्स ब्लड बैंक’ बनाए गए हैं। इन ब्लड बैंकों में ज्यादातर कुत्ते और बिल्लियों के खून मिलते हैं, क्योंकि ये ऐसे जानवर हैं, जिन्हें लोग सबसे ज्यादा पालते हैं। जब भी कोई कुत्ता या बिल्ली बीमार या घायल हो जाता है और उन्हें खून की जरूरत पड़ती है, तो यही ब्लड बैंक उनके काम आते हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी कि कुत्ते और बिल्लियों में भी इंसानों की तरह अलग-अलग प्रकार के ब्लड ग्रुप होते हैं। जहां कुत्तों में 12 प्रकार के ब्लड ग्रुप होते हैं, तो वही बिल्लियों में तीन प्रकार के ब्लड ग्रुप पाए जाते हैं।

उत्तरी अमेरिका में स्थित ‘पशु चिकित्सा ब्लड बैंक’ के प्रभारी डॉक्टर केसी मिल्स के मुताबिक, कैलिफोर्निया के डिक्सन और गार्डन ग्रोव शहरों के अलावा मिशिगन के स्टॉकब्रिज, वर्जीनिया, ब्रिस्टो और मैरीलैंड के अन्नापोलिस शहर समेत उत्तरी अमेरिका के कई शहरों में पशु ब्लड बैंक हैं। यहां लोग समय-समय पर अपने पालतू जानवरों को ले जाकर रक्तदान करवाते हैं।

डॉक्टर मिल्स ने बताया कि पशुओं के रक्तदान की प्रक्रिया में लगभग आधे घंटे का समय लगता है और सबसे खास बात कि उन्हें एनेस्थेसिया देने की भी जरूरत नहीं पड़ती।

हालांकि जिन जगहों पर पशु ब्लड बैंक नहीं है, वहां लोगों को जागरूक करने के लिए रक्त और प्लाज्मा दान कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन और अमेरिका में लोग पशुओं के रक्तदान के प्रति जागरूक हैं, जबकि बाकी जगहों पर पशुओं के रक्तदान के प्रति अभी जागरूकता फैलाने की जरूरत है।

खाना-खजाना : रेस्टोरेंट स्टाइल चॉकलेट बारबेक्यू चिकन विंग्स बनाएं अब घर पर, जानें इसकी रेसिपी

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अगर आपको चिकन की अलग-अलग तरह की डिश खाना पसंद है तो चॉकलेट बारबेक्‍यू चिकन विंग्‍स जरूर बनाकर खाएं। आप इसे घर पर आसानी से बना सकते हैं। ये बनाने में जितनी आसान है, खाने में उतनी ही स्वादिष्ट है। इस बारबेक्‍यू चिकन विंग्‍स को बनाने के लिए इसे सॉस में मैरीनेट करके बनाया जाता है।

बाद में इसमें डार्क चॉकलेट भी मिक्स की जाती है। यह डिश खाने में हल्की सी मीठी होती है। इस तरह की चिकन रेसिपी शायद आपने कभी न खाई हो, इसलिए इसे एक बार घर पर बनाकर जरूर खाएं। तो आइए जानते हैं चॉकलेट बारबेक्‍यू चिकन विंग्‍स की रेसिपी.

चॉकलेट बारबेक्‍यू चिकन विंग्‍स सामग्री

  • 6 चिकन विंग
  • 1/2 कप मैदा
  • 1 ½ कप कटी हुई डार्क चॉकलेट
  • 1 अंडा
  • 2 चम्मच सिरका
  • 1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर
  • 1 चम्मच प्याज पाउडर
  • 1/3 कप ब्राउन शुगर
  • 2 चम्मच सरसों
  • 1 चम्मच सॉस
  • 1 चम्मच काली मिर्च पाउडर
  • 1 चम्मच काली मिर्च
  • नमक (स्‍वादानुसार)
  • 2 चम्मच कोको पाउडर
  • 1 ½ टमाटर केचप
  • 2 चम्मच शहद
  • 1 चम्मच लहसुन पाउडर
  • ½ चम्मच धनिया पाउडर

चॉकलेट बारबेक्‍यू चिकन विंग्‍स बनाने की विधि

  • सबसे पहले चिकन विंग्‍स को धोकर इसमें प्‍याज पाउडर, लहसुन पाउडर और काली मिर्च पाउडर डालकर स्‍वादानुसार नमक मिलाएं। फिर इसे 2 घंटे के लिए मैरीनेट होने के लिए रख दें।
  • मैरीनेटेट चिकन विंग्‍स में मैदा लपेटकर बाद में इसे अंडे में डुबोएं। फिर इस पर ब्रेड क्रब्‍स लगाएं।
  • एक पैन में तेल डालकर, इसे गैस पर धीमी आंच पर चढ़ाएं। फिर इसमें चिकन विंग्‍स को डालकर इसे गोल्डेन ब्राउन होने तक डीप फ्राई करें।
  • चॉकलेट बारबेक्‍यू चिकन विंग्‍स का सॉस बनाने के लिए गैस पर चढ़ाकर इसमें सभी सामग्रियों को डालकर मिलाएं। अब इसे 5 मिनट तक धीमी आंच पर गाढ़ा होने तक पकाएं।
  • इस तैयार सॉस में चिकन विंग्‍स को डालकर मिलाएं। आपका टेस्‍टी चॉकलेट बारबेक्‍यू चिकन विंग्‍स तैयार है। आप इसे गरम-गर्म ही सर्व करें।

बहन की शादी में भाई को रोना पड़ा भारी, सार्वजनिक रूप से मांगनी पड़ी माफी

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बहन की शादी में विदाई के समय भाई का रोना एक आम बात है और इस पर किसी को बुरा भी नहीं लगना चाहिए लेकिन मॉस्को के चेचन्या में लोगों को यह पसंद नहीं आया। पिछले हफ्ते भाई का बहन की विदाई के दौरान रोने का वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो पर इतना विवाद हुआ कि भाई को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। इतिहासविद जेलिमखान मुसाइव कहते हैं, ‘चेचन शादियों में लोगो अपनी भावनाओं का प्रदर्शन करना सही नहीं माना जाता, न सिर्फ लड़कों का बल्कि लड़कियों के लिए भी। इसलिए उस लड़के का रोने वाला वीडियो वायरल होने अधिकारियों का गुस्सा होना लाजमी था।’ यह वीडियो धर्मिक नेता रमजान कदीरोव ने भी देखा था और उनके मुताबिक शादी में रोकर लड़के ने चेचन्या की परंपराओं का उल्लंघन किया था। परंपरा के मुताबिक तो उसे बहन की शादी में भी नहीं जाना चाहिए था। इसलिए उसे ढूंढकर माफी मांगने के लिए कहा गया।

ऐसा माना जाता है कि चेचन्या के पुरूष दुनिया में सबसे शक्तिशाली और मजबूत होते हैं। इसीलिए माफी की मांग की गई और दबाव बनाया गया। इस माफी से कई लोग नाखुश हैं, क्योंकि इनका मानना है कि बहन की विदाई किसी को भी रुआंसा कर देती है। ऐसे में अगर भाई रो ही पड़ा तो उस पर माफी मांगने का फरमान जारी करना सही नहीं है।

इसके बाद लड़के की माफी वाला वीडियो इंस्टाग्राम समेत कई सोशल साइट्स पर अपलोड कर दिया गया है। कदीरोव के एक सहयोगी ने बताया कि शादियों में पुरुषों का रोना चेचन लोगों को स्वीकार्य नहीं होता। शादी को लेकर हमारे यहां कुछ नियम बने हुए हैं, जिनका पालन करते हुए हम अपनी संस्कृति को कायम रख सकते हैं।

वायरल: LIC को लेकर बड़ी खबर, डूब सकता है कई लोगों का रुपया!

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वैसे सोशल मीडिया ख़बरें वायरल करने का सबसे अच्छा साधन है। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक खबर बहुत वायरल हो रही थी. इस खबर के अनुसार एलआईसी कम्पनी नुकसान में चल रही है और बहुत जल्द डूबने वाली है, पर भारतीय जीवन बीमा निगम ने बीते बुधवार को इस खबर की पुष्टि की कि सोशल मीडिया पर कंपनी की आर्थिक स्थिति को लेकर जो अफवाह फैलाई जा रही है, वह सभी बातें झूठ है।

एलआईसी ने किया खुलासा:

एलआईसी ने बताया कि एलआईसी कंपनी के सभी पॉलिसीहोल्डर्स के पैसे डूबे नहीं हैं और पूरी तरह से सुरक्षित है। एलआईसी कंपनी ने इस बात को स्पष्ट किया कि अभी कंपनी पर किसी भी प्रकार का कोई भी आर्थिक संकट नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए मैसेज के बाद एलआईसी कंपनी ने लोगों को यह स्पष्टीकरण दिया।

क्या था वायरल मैसेज:

इस मैसेज में बताया गया था कि एलआईसी कंपनी की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है और जिन लोगों ने यहां पर अपने पैसे निवेश किए हैं उनके पैसे खतरे में है। इस वायरल हुए मैसेज को पूरी तरह से झूठ बताते हुए एलआईसी ने एक बयान में कहा की एलआईसी की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से सही है और पॉलिसीहोल्डर्स को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। यह मैसेज पूरी तरह से निराधार और झूठी खबरों पर आधारित है।