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On Election: बंगाल, असम समेत 5 राज्यों में चुनाव की तारीखों का आज ऐलान, कांग्रेस का आया रिएक्शन, जानें क्या कहा?

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भारतीय निर्वाचन आयोग आज रविवार (15 मार्च 2026) को शाम 4 बजे 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव का पूरा कार्यक्रम घोषित करेगा. शेड्यूल घोषित होते ही चुनाव प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी.

कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही मॉडल ऑफ कंडक्ट यानी आचार संहिता भी लागू हो जाएगी. इस बीच प्रमुख विपक्षी पार्टी

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभियान में आरोप-प्रत्यारोप और तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिलेगी. कांग्रेस का कहना है कि चुनाव प्रचार में गलत जानकारी और डर का माहौल बनाने की कोशिश की जाती है.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा ‘चुनाव आयोग आज शाम 4 बजे 2026 के विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित करेगा. जी2 की ओर से इसे मंजूरी मिल चुकी होगी, क्योंकि जी1 ने उद्घाटन, रिबन काटने, ध्वजारोहण और शुभारंभ जैसे समारोहों का यह दौर पूरा कर लिया होगा. चुनाव आयोग की आदर्श आचार संहिता (MCC) जल्द ही लागू होने वाली है, लेकिन 2014 से इसे मोदी की चुनावी आचार संहिता का पर्याय माना जाता रहा है – जो मानहानि, गाली-गलौज, धमकियों, भय फैलाने और झूठ का वायरस फैलाने से भरी होगी.’

पूर्व सांसद संदीप दीक्षित का बयान

वहीं कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने कहा, ‘हम इसका स्वागत करते हैं. हम इसका लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. दरअसल, इसकी घोषणा बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी. मैं चुनाव आयोग से कहना चाहूंगा कि आपके बारे में पहले से ही बहुत संदेह हैं, लेकिन कम से कम इतनी बेशर्मी से घोषणा न करें. प्रधानमंत्री लगातार घोषणाएं करते रहते हैं और फिर अचानक आपको तारीखों की घोषणा करने का ख्याल आता है.’

आचार संहिता लागू होने के बाद क्या होगा?

आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार और राजनीतिक दलों को चुनाव से जुड़े नियमों का पालन करना होगा और नई योजनाओं या बड़े सरकारी फैसलों की घोषणा पर रोक लग जाती है. चुनाव आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम में मतदान की तारीख, नामांकन की अंतिम तिथि, मतगणना की तारीख और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी. इसके बाद सभी राजनीतिक दल और उम्मीदवार अपने चुनाव अभियान को तेज कर देंगे. अब सबकी नजर चुनाव आयोग की घोषणा पर टिकी है, जिसके बाद राज्यों में चुनावी माहौल और तेज होने की संभावना है.

चाबहार अब परिदृश्य में दिखाई नहीं दे रहा. कांग्रेस ने उठाए पीएम मोदी की मध्य एशिया कूटनीति पर सवाल…

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ईरान के चाबहार पोर्ट परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि इस परियोजना की शुरुआत 1990 के दशक के अंत में भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग रणनीति के तहत हुई थी और बाद में इसे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे आगे बढ़ाया था.

रमेश ने कहा कि मई 2013 में केंद्र सरकार ने चाबहार बंदरगाह में शुरुआती तौर पर 115 मिलियन डॉलर के निवेश को मंजूरी दी थी. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उस समय भारत भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते को लागू करने की दिशा में भी बड़े कदम उठा रहा था.

कांग्रेस ने परियोजना को लेकर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार ने मनमोहन सिंह की इस पहल को रीपैकेज कर इसे प्रधानमंत्री की नई दृष्टि के रूप में पेश किया. उन्होंने कहा कि 2026-27 के बजट में चाबहार परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया है, जिससे इस परियोजना के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.

जयराम रमेश ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में क्या-क्या लिखा?

जयराम रमेश ने लिखा कि शासन में निरंतरता एक बुनियादी सच्चाई है, जिसे आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री कभी स्वीकार नहीं करते हैं. साल 1990 के दशक के उत्तरार्ध से ही भारत ने भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग रणनीति के तहत ईरान के चाबहार बंदरगाह में निवेश की संभावनाओं की तलाश शुरू कर दी थी. अंततः तेहरान में आयोजित 16वें गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने इन योजनाओं को नई गति दी और मई 2013 में केंद्रीय कैबिनेट ने चाबहार में प्रारंभिक तौर पर 115 मिलियन डॉलर के निवेश को मंजूरी दी. यह याद रखना चाहिए कि यह फैसला उस समय लिया गया था, जब भारत अक्टूबर 2008 में हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को लागू करने के लिए बड़े कदम उठा रहा था.

शासन में निरंतरता एक बुनियादी सच्चाई है, जिसे आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री कभी स्वीकार नहीं करते।

1990 के दशक के उत्तरार्ध से ही भारत ने भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग रणनीति के तहत ईरान के चाबहार बंदरगाह में निवेश की संभावनाओं की तलाश शुरू कर दी थी। अंततः तेहरान में आयोजित 16वें…

भारत परियोजना से हो गया बाहर?- जयराम

आगे लिखा कि इसके बाद अक्टूबर 2014 में मोदी सरकार ने, जैसा कि वह अक्सर करती रही है, डॉ. मनमोहन सिंह की चाबहार पहल को रीपैकेज किया और उसे पीएम मोदी की विज़न का हिस्सा बताकर पेश किया. साल 2026-27 के बजट में चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया. क्या इसका मतलब यह है कि भारत इस परियोजना से बाहर हो गया है, या फिलहाल उसके निवेश संबंधी दायित्व पूरे हो चुके हैं?

आगे लिखा कि किसी भी स्थिति में, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह-जिसे चीन ने बनाया है-से लगभग 170 किलोमीटर पश्चिम स्थित चाबहार अब परिदृश्य में दिखाई नहीं दे रहा है. यह भारत की मध्य एशिया कूटनीति के लिए दूसरा रणनीतिक झटका है, क्योंकि इससे पहले भारत ताजिकिस्तान के दुशांबे के पास अयनी में स्थित अपने वायुसेना अड्डे को बंद कर चुका है.

क्यों खास है भारत के लिए चाबहार पोर्ट?

साउथ-ईस्ट ईरान में मौजूद चाबहार पोर्ट, भारत के लिए स्ट्रैटेजिकली सबसे इम्पोर्टेंट मैरीटाइम प्रोजेक्ट्स में से एक है. ये ईरान के थ्रू अरेबियन सी तक भारत का ओनली डायरेक्ट एक्सेस पॉइंट है, इस प्रोजेक्ट का पर्पज अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया, स्पेशली उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान जैसे कंट्रीज के लिए एक शॉर्टर और मोर रिलायबल ट्रेड रूट प्रोवाइड करना है.

Meen Sankranti 2026: मीन संक्रांति पर रखें ये सावधानियां, वरना सूर्य देव हो सकते हैं नाराज..

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Meen Sankranti 2026: संक्रांति सूर्य देव से जुड़ा पर्व माना जाता है. ये पर्व सूर्य देव को समर्पित किया गया है. संक्रांति के पर्व का संबंध ज्योतिष और धर्म शास्त्र में सूर्य देव के गोचर से बताया गया है.

यानी सूर्य जब भी एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं, तो उस राशि के नाम पर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. मकर संक्रांति सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, लेकिन सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही सभी राशियों के नाम से ये पर्व मनाया जाता है.

आज मीन संक्रांति मनाई जा रही है. आज से खरमास भी लग गया है. जोकि 14 अप्रैल को सूर्य देव के मेष राशि में जाने पर समाप्त होगा. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को आत्मा और पिता का कारक माना गया है. मीन संक्रांति पर और पूरे खरमास के दौरान पूजा-पाठ विशेषकर सूर्य पूजन का महत्व बहुत अधिक होता है, लेकिन धर्म शास्त्रों में मीन संक्रांति पर कुछ सावधानियां रखने के लिए भी कहा गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

मीन संक्रांति पर रखें ये सावधानियां

मीन संक्रांति से खरमास या मलमास की शुरुआत हो जाती है, इसलिए खरमास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या यज्ञोपवीत जैसे शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है. ऐसे में इस दौरान ये सभी काम न करें. इस दौरान किसी बड़े निवेश या नई संपत्ति की खरीदारी से बचें. इस पूरे महीने सात्विक भोजन करें. क्रोध-अहंकार से दूर रहें. खरमास में मंत्र-जप और ध्यान करना न भूलें. इस समय में अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों की सेवा अवश्य करें.

मीन संक्रांति का महत्व

धार्मिक दृष्टि से मीन संक्रांति को अत्यंत पुण्य प्रदान करने वाला दिन माना गया है. मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश हो जाता है और अध्यात्मिक शुद्धि होती है. इसके साथ ही दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है. जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, गुड़, तिल और धन का दान बहुत ही शुभ माना गया है.

“शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी? इस हफ्ते के ये 9 फैक्टर्स बदल सकते हैं किस्मत”

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ईरान-इजराइल वॉर, गिरता रुपया, लगातार FII का बाहर जाना और फ्यूल सप्लाई की चिंताओं के चलते घरेलू बाजारों पर इस महीने में काफी दबाव देखने को मिला. खास बात तो ये है कि इस प्रेशर की वजह से पिछल हफ्ते शेयर बाजार में 5.3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली.

जब सोमवार को ट्रेडिंग फिर से शुरू होगी, तो इस हफ्ते होने वाले कई अहम इवेंट्स का निवेशकों के मूड पर असर पड़ने की संभावना है. वैसे शुक्रवार को 50 शेयरों वाला निफ्टी 488.05 अंक, या 2.06 फीसदी गिरकर 23,151.10 पर बंद हुआ था.

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे ईटी की रिपोर्ट में कहा कि जैसे-जैसे बिकवाली बढ़ी, इंडेक्स 200-DMA से और दूर चला गया. उन्होंने आगे कहा कि RSI ओवरसोल्ड ज़ोन में चला गया है और ट्रेंड कमजोर बना हुआ है. RSI के गहरे ओवरसोल्ड दायरे में बने रहने के कारण उन्हें और गिरावट की उम्मीद है.

डे ने कहा कि कम समय के लिए, ट्रेंड कमजोर बना रह सकता है, और किसी भी बढ़त पर बिकवाली होने की संभावना है. नीचे की तरफ, इंडेक्स 23,000-22,800 की ओर गिर सकता है, जबकि रेजिस्टेंस 23,400 पर है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर वो कौन से 9 बड़े फैक्टर्स हैं, जो शेयर बाजार की दशा और दिशा तय करने वाले हैं?

ईरान-इजराइल वॉर

जब सोमवार को ग्लोबल बाजारों में ट्रेडिंग शुरू होगी, तब तक ईरान-इजराइल वॉर अपने 17वें दिन में प्रवेश कर चुका होगा. जब तक यह संघर्ष जारी रहेगा, बाजारों में घबराहट बने रहने की उम्मीद है. युद्धरत पक्षों के बीच किसी भी तरह की सुलह के संकेत दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं. AFP ने बताया कि ईरान ने कसम खाई है कि वह अमेरिका और इजराइल में अपने दुश्मनों को बड़ा सबक सिखाएगा, जिसे वह कभी नहीं भूल पाएंगे.

AFP ने ईरानी राजनयिक इस्माइल बाकाई के हवाले से कहा कि हम यह स्वीकार नहीं कर सकते कि वे कभी-कभार बातचीत और सीजफायर की बात करें, और उसके बाद हमें उन्हीं अपराधों और युद्ध की पुनरावृत्ति का सामना करना पड़े. हमारी सेना दुश्मन को कड़ा और कभी न भूलने वाला सबक सिखाने के लिए पूरी तरह से दृढ़ है.

फेड मीटिंग

इस हफ्ते US फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि इस बात की चिंता है कि अगर मौजूदा संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इससे महंगाई के समीकरण बिगड़ सकते हैं. रेट तय करने वाली कमेटी मंगलवार, 17 मार्च को अपनी दो-दिवसीय बैठक शुरू करेगी और बुधवार, 18 मार्च को अपने पॉलिसी फैसले की घोषणा करेगी.

केंद्रीय बैंक से व्यापक रूप से यह उम्मीद की जा रही है कि वह दरों को स्थिर रखेगा, क्योंकि US में महंगाई फेड के 2 फीसदी के टारगेट से ऊपर बनी हुई है. ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के ताजा डेटा के मुताबिक, फरवरी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स साल-दर-साल आधार पर 2.4 फीसदी बढ़ा.

अमेरिकी बाजार

घरेलू बाजार भी वॉल स्ट्रीट से संकेत लेंगे. शुक्रवार को US के प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए. डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 119.38 अंक, या 0.26 फीसदी गिरकर 46,558.50 पर बंद हुआ. नैस्डैक कंपोजिट 206.62 अंक, या 0.93 फीसदी गिरकर 22,105.40 पर आ गया, जबकि S&P 500 0.61 फीसदी या लगभग 40 अंक गिरकर 6,632.19 पर बंद हुआ.

कच्चे तेल के दाम

सभी की नजरें कच्चे तेल की कीमतों पर होंगी. बेंचमार्क ब्रेंट और US WTI क्रूड पिछले सत्र में 3 फीसदी से ज़्यादा उछले थे, और जब ट्रेडिंग फिर से शुरू होगी तो इनमें और बढ़त देखने को मिल सकती है. US WTI क्रूड वायदा 99.31 डॉलर प्रति बैरल पर सेटल हुआ, जिसमें 3.58 या 3.74 फीसदी की बढ़त देखने को मिली. जबकि ब्रेंट क्रूड 3.43 फीसदी या 3.41 डॉलर चढ़कर 103.14 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ.

FII/DII की मुनाफावसूली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने शुक्रवार को 10,716.64 करोड़ रुपए के भारतीय शेयर बेचे. वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) 9,977.42 करोड़ रुपए के शुद्ध खरीदार रहे. FIIs ने मार्च के पहले पखवाड़े में 52,704 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं, जिसमें शुक्रवार को 2026 का अब तक का सबसे बड़ा एक-दिवसीय आउटफ्लो दर्ज किया गया. साल-दर-तारीख आधार पर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने 66,051 करोड़ रुपए के भारतीय शेयर बेचे हैं.

सेक्टर पर नजर

ईरान-इजराइल/US संघर्ष कई सेक्टरों पर असर डाल रहा है. अगर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो तेल विपणन कंपनियां (OMCs) दबाव में आ सकती हैं, क्योंकि इनपुट कॉस्ट बढ़ने से उनके मार्जिन पर असर पड़ सकता है. दूसरी ओर, ONGC और Oil India जैसी Upstream Exploration Companies तेल की बढ़ती कीमतों से फायदा उठा सकती हैं.

पेंट और टायर कंपनियां, जो कच्चे तेल से बने प्रोडक्ट्स को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल करती हैं, उन्हें भी दबाव का सामना करना पड़ सकता है. जब बाजार दोबारा खुलेंगे, तो एयरलाइन और टूरिज्म कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. LPG की कमी पहले से ही रेस्टोरेंट पर असर डाल रही है, ऐसे में क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) के शेयरों में और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

टेक्नीकल इंडीकेटर्स

निफ्टी चार्ट का विश्लेषण करते हुए, मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर, डॉ. रवि सिंह ने कहा कि इंडेक्स ने अपने अहम 23,800 के सपोर्ट लेवल को निर्णायक रूप से तोड़ दिया है और अब यह पिछले 10 महीनों के सबसे निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो बाजार पर बिकवाली के मजबूत दबाव का संकेत है.

आने वाले हफ्ते के लिए, 23,000 का मनोवैज्ञानिक स्तर बेहद अहम होगा. उन्होंने कहा कि अगर इंडेक्स इस स्तर से नीचे गिरता है, तो यह 22,800 और यहां तक कि 22,500 के स्तर तक भी पहुंच सकता है. उन्होंने आगे कहा कि ऊपरी स्तर पर, 23,800 और 24,050 अब मजबूत रुकावट (resistance) के तौर पर काम करेंगे.

जब तक इंडेक्स निर्णायक रूप से 24,000 के स्तर को दोबारा हासिल नहीं कर लेता, तब तक हमारी रणनीति तेजी आने पर बेचने (sell on rise) की ही रहेगी. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच बाजार अभी भी अपने निचले स्तर (bottom) की तलाश में है, इसलिए बाज़ार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है.

रुपया बनाम डॉलर

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए की चाल पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी. शुक्रवार को भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गया. इसकी वजह यह चिंता थी कि ईरान वॉर के कारण तेल की कीमतों में आई तेजी भारत की ग्रोथ-महंगाई की गतिशीलता को बिगाड़ सकती है और पूंजी प्रवाह को नुकसान पहुंचा सकती है.

रुपया कमजोर होकर 92.4750 प्रति डॉलर पर आ गया, जो गुरुवार को बने अपने पिछले रिकॉर्ड निचले स्तर 92.3575 से भी नीचे था. आखिरकार यह 92.4550 पर बंद हुआ, जो इस हफ्ते 0.7 फीसदी की गिरावट दिखाता है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने के बाद से बेंचमार्क निफ्टी 50 ‘करेक्शन ज़ोन’ में फिसल गया है; शुक्रवार को इंडेक्स में लगभग 2 फीसदी की गिरावट आई.

विश्लेषकों ने रॉयटर्स को बताया कि मध्य पूर्व में लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष रुपए के भविष्य को काफी हद तक खराब कर सकता है, और लगातार ऊंची बनी हुई ऊर्जा कीमतें रुपए को 95 प्रति डॉलर के स्तर से भी नीचे धकेल सकती हैं.

IPO पर नजर

प्राइमरी मार्केट में गतिविधियां मजबूत रहने की उम्मीद है; इस हफ्ते तीन IPO सब्सक्रिप्शन के लिए खुल रहे हैं और तीन कंपनियों की लिस्टिंग होनी है. GSP Crop Science और Central Mine Planning and Design Institute (CMPDI) के मेनबोर्ड IPO पर खास नजर रहेगी.

एग्रोकेमिकल निर्माता GSP Crop Science अपने पब्लिक ऑफरिंग के जरिए 400 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही है.

यह IPO 16 मार्च को खुलेगा. 18 मार्च को बंद होगा. इसका प्राइस बैंड 304320 रुपए प्रति शेयर तय किया गया है. Coal India की कंसल्टेंसी शाखा CMPDI का IPO 20 मार्च को खुलेगा और 24 मार्च को बंद होगा. इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) फिलहाल लगभग 24 रुपए है.

इस बीच, Novus Loyalty का SME IPO 17 मार्च को खुलेगा और 20 मार्च को बंद होगा. इसका प्राइस बैंड 139146 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, और कंपनी का लक्ष्य लगभग 60.15 करोड़ रुपए जुटाना है. Rajputana Stainless, Apsis Aerocom और Raajmarg Infra Investment Trust के शेयर भी इस हफ्ते स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट होने वाले हैं.

ममता बनर्जी ने पुजारियों और मुअज़्ज़िनों के मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि की घोषणा की…

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने पुजारियों और मुअज़्ज़िनों के मासिक मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि करने का ऐलान किया है।

यह निर्णय चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस से कुछ समय पहले आया है, जो राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह घोषणा आदर्श आचार संहिता के लागू होने से पहले की गई है, जो चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ प्रभावी हो जाती है।

चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग, जिसमें अन्य चुनाव आयुक्त भी शामिल हैं, आज शाम 4 बजे नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा। इस दौरान तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी।

ममता बनर्जी का बयान

ममता बनर्जी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि राज्य सरकार ने पुजारियों और मुअज़्ज़िनों के मासिक मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा, “मुझे अपने पुरोहितों और मुअज़्ज़िनों को दिए जाने वाले मासिक मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है, जिनकी सेवा हमारे समुदायों के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को बनाए रखती है।”

मानदेय में वृद्धि का प्रभाव

इस संशोधन के बाद, दोनों समूहों के लिए मासिक भुगतान 2,000 रुपये हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मानदेय के लिए सभी नए आवेदनों को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है।

उन्होंने कहा, “साथ ही, पुरोहितों और मुअज़्ज़िनों द्वारा विधिवत जमा किए गए सभी नए आवेदनों को भी राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है।”

सरकार की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह कदम समाज में धार्मिक पदाधिकारियों की भूमिका को मान्यता देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने लिखा, “हमें ऐसे माहौल को बढ़ावा देने पर गर्व है जहाँ हर समुदाय और हर परंपरा को महत्व दिया जाता है और उसे मजबूती प्रदान की जाती है,” और यह भी जोड़ा कि सरकार का प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की आध्यात्मिक परंपराओं की रक्षा करने वालों को उचित मान्यता और समर्थन मिले।

आचार संहिता का प्रभाव

यह घोषणा चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा किए जाने की उम्मीद से कुछ समय पहले की गई थी; इसके बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी, जो सरकारों को मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से नई नीतियों या वित्तीय प्रतिबद्धताओं की घोषणा करने से रोक देगी।

इसलिए, मानदेय में बढ़ोतरी और नए आवेदनों की मंजूरी चुनाव आचार संहिता के लागू होने से ठीक पहले की गई है।

“गुवाहाटी में युवा शक्ति समारोह में अमित शाह का संबोधन”

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रविवार को खानापारा के पशु चिकित्सा महाविद्यालय के मैदान में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) द्वारा आयोजित युवा शक्ति समारोह में युवा समर्थकों की भारी भीड़ जुटी।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए। यह आयोजन असम में विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत किया गया, जहां चुनाव आयोग द्वारा मतदान कार्यक्रम की घोषणा की उम्मीद थी।

अमित शाह का विश्वास

शाह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सरमा के नेतृत्व में असम में सत्ता में लौटेगी और इसे पार्टी के ‘सबसे बड़े जनादेश’ के रूप में वर्णित किया।

उन्होंने मतदाताओं से भाजपा का समर्थन करने की अपील की और अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर पार्टी के रुख को दोहराया।

शाह ने कहा, “कांग्रेस ने घुसपैठ को वैध किया, लेकिन भाजपा हर एक को मतदाता सूची से हटाएगी। राहुल बाबू को आश्वस्त रहना चाहिए कि न केवल उनके नाम हटाए जाएंगे, बल्कि उन्हें बाहर भी निकाला जाएगा।”

कांग्रेस पर आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में असम में हिंसा की छवि बनी और कई युवाओं की जान गई। शाह ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व अपने परिवारों के हितों के लिए अधिक चिंतित था।

विकास की दिशा में कदम

सरमा ने हाल के विकासों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई शांति समझौतों ने 10,000 से अधिक युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने में मदद की है।

उन्होंने कई प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भी जिक्र किया, जैसे धोला-सदिया पुल, बोगीबील पुल, और अन्य।

भविष्य की योजनाएँ

सरमा ने कहा कि असम 25 मेडिकल कॉलेजों की ओर बढ़ रहा है और नए विश्वविद्यालयों के माध्यम से छात्रों के लिए अवसर बढ़ रहे हैं।

उन्होंने युवा उद्यमियों को वित्तीय सहायता देने की बात भी की। “हमने एक लाख युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 2 लाख रुपये की सहायता दी है,” उन्होंने कहा।

चुनावों की तैयारी

आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में, सरमा ने कहा कि यदि भाजपा तीसरी बार सत्ता में आती है, तो वे रोजगार और वित्तीय सहायता कार्यक्रमों का विस्तार करेंगे।

हम दो लाख और सरकारी नौकरियों का निर्माण करने का वादा करते हैं,” उन्होंने कहा।

अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई

सरमा ने सरकार द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया। “हमने पहले ही 1.5 लाख बिघा भूमि को अतिक्रमण से मुक्त किया है,” उन्होंने कहा।

खतरे में 350 करोड़ Chrome यूजर्स, Google ने जारी किया इमरजेंसी अपडेट, तुरंत करें ये काम…

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दुनिया के सबसे लोकप्रिय वेब ब्राउजर में से एक Google Chrome को लेकर एक गंभीर सुरक्षा चेतावनी सामने आई है. गूगल ने पुष्टि की है कि Chrome में दो खतरनाक Zero-Day कमजोरियां पाई गई हैं जिनका हैकर्स पहले से फायदा उठा रहे हैं.

ये सुरक्षा खामी इतनी गंभीर मानी जा रही है कि कंपनी को इमरजेंसी सिक्योरिटी अपडेट जारी करना पड़ा. अनुमान है कि करीब 3.5 अरब क्रोम यूजर्स इस खतरे से प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए सभी यूजर्स को तुरंत ब्राउजर अपडेट करने की सलाह दी गई है.

Chrome में मिली Zero-Day खामियां

फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, गूगल ने बताया कि क्रोम में CVE-2026-3909 और CVE-2026-3910 नाम की दो गंभीर सुरक्षा खामियां मिली हैं. इन दोनों को Zero-Day Vulnerability कहा जाता है, जिसका मतलब है कि हैकर्स इन कमजोरियों का इस्तेमाल तब भी कर सकते हैं जब कंपनी को इनके बारे में पूरी जानकारी न हो. इन खामियों को हाई सीवेरिटी कैटेगरी में रखा गया है क्योंकि ये ब्राउजर के मुख्य सिस्टम कंपोनेंट्स को प्रभावित करती हैं. खास बात यह है कि इनका इस्तेमाल करके हमलावर किसी यूजर के सिस्टम में कोड चला सकते हैं या डेटा तक पहुंच बना सकते हैं.

हैकर्स कैसे कर सकते हैं हमला?

रिपोर्ट के मुताबिक CVE-2026-3909 Chrome के ग्राफिक्स लाइब्रेरी सिस्टम Skia से जुड़ी कमजोरी है. इस खामी का फायदा उठाकर हमलावर किसी यूजर को एक खतरनाक वेबसाइट पर भेज सकते हैं और वहां से सिस्टम में मेलिसियस (Malicious) कोड चला सकते हैं. वहीं CVE-2026-3910 Chrome के JavaScript इंजन V8 में पाई गई कमजोरी है. यह खामी किसी खास HTML पेज के जरिए हमलावर को ब्राउजर के अंदर कोड चलाने की अनुमति दे सकती है. इसका मतलब है कि सिर्फ एक संदिग्ध वेबसाइट खोलना भी जोखिम भरा हो सकता है.

Google देता है करोड़ों का इनाम

गूगल ने सुरक्षा खामियों को खोजने के लिए एक Vulnerability Reward Program भी चला रखा है. इस प्रोग्राम के तहत सिक्योरिटी रिसर्चर्स को कमजोरियां खोजने पर इनाम दिया जाता है. कंपनी के अनुसार पिछले 15 वर्षों में इस प्रोग्राम के तहत करीब 81.6 मिलियन डॉलर का भुगतान किया जा चुका है. केवल 2025 में ही 17 मिलियन डॉलर से ज्यादा का इनाम दिया गया. क्रोम की सुरक्षा मजबूत रखने में दुनिया भर के रिसर्चर्स की बड़ी भूमिका मानी जाती है.

क्रोम यूजर्स को अभी क्या करना चाहिए?

गूगल ने इस खतरे से बचने के लिए नया सिक्योरिटी अपडेट जारी करना शुरू कर दिया है. हालांकि यह अपडेट सभी यूजर्स तक पहुंचने में कुछ दिन या हफ्ते लग सकते हैं. इसलिए यूजर्स को खुद भी अपडेट चेक करना जरूरी है. इसके लिए Chrome के तीन डॉट मेन्यू में जाकर Help और फिर About Google Chrome विकल्प चुनना होगा. अगर नया अपडेट उपलब्ध होगा तो ब्राउजर उसे डाउनलोड करके इंस्टॉल कर देगा. अपडेट के बाद ब्राउजर को रीस्टार्ट करना जरूरी है ताकि नई सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय हो सके.

‘BJP के नफरत वाले बीज पंजाब में कभी नहीं उगेंगे’- मुख्यमंत्री मान ने शाह के दौरे को बताया फ्लॉप शो…

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे के दौरान राज्य के मुख्य मुद्दों का कोई हल न करने के लिए कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि लोगों को एमएसपी, किसान कर्ज माफी और खास पैकेज की उम्मीद थी, लेकिन लोगों के हाथ सिर्फ निराशा ही लगी.

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पंजाब के साथ लगातार पक्षपात कर रही है, राज्य के हकदार फंड रोक रही है, किसानों की मांगों को नजरअंदाज कर रही है और राज्य के बाहर जब्त की गई नशे की बड़ी खेपों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही, बल्कि पंजाब को बदनाम कर रही है.

उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद पंजाब सरकार नशे पर काबू पाने, अर्थव्यवस्था मजबूत करने और निवेश आकर्षित करने के लिए उचित कदम उठा रही है. उन्होंने बताया कि प्रोग्रेसिव पंजाब निवेशक सम्मेलन को उद्योग जगत से बड़ा समर्थन मिल रहा है और निवेशक राज्य में नए कारोबारी अवसरों की तलाश कर रहे हैं.

पंजाबियों को भला-बुरा कहकर चले गए शाह- सीएम मान

प्रगतिशील पंजाब निवेशक सम्मेलन के अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब के किसानों और नागरिकों को उम्मीद थी कि उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए ठोस फैसले लिए जाएंगे. उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद थी कि अमित शाह पंजाब के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, कर्ज माफी या विशेष पैकेज के बारे में बात करेंगे, लेकिन वह सिर्फ पंजाबियों को भला-बुरा कहकर चले गए.” उन्होंने आगे कहा कि पंजाब के लोग फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, कृषि ऋणों की माफी और किसानों के लिए अन्य उपायों जैसे बड़े एलानों की उम्मीद कर रहे थे.

मुख्यमंत्री ने केंद्र द्वारा पंजाब के वैध फंडों को रोके जाने की भी आलोचना की. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मोदी सरकार ने पंजाब के आरडीएफ और जीएसटी फंड रोक दिए हैं और अभी तक 1,600 करोड़ रुपये की बाढ़ राहत राशि भी जारी नहीं की है.” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1,600 करोड़ रुपये बाढ़ राहत के बारे में किए गए बड़े-बड़े दावों के बावजूद, पंजाब को उनके एलान से 16 रुपये भी नहीं मिले. उन्होंने आगे कहा कि विनाशकारी बाढ़ के दौरान केंद्र के नेता पंजाब सिर्फ “पर्यटन” के लिए आए और तस्वीरें खिंचवाकर चले गए.

गैंगस्टरवाद एक राष्ट्रीय मुद्दा, विफल है केंद्र- सीएम मान

गैंगस्टरवाद का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर इस समस्या को हल करने में विफल रही है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को बीजेपी सरकार ने गुजरात जेल में शरण दे रखी है और उसे पंजाब लाने की इजाजत भी नहीं दी जा रही है.” उन्होंने गैंगस्टरवाद को एक राष्ट्रीय मुद्दा बताया, जो देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा है और इसे रोकने में विफल रहने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की.

नशों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से तस्करी को रोकना मुख्य रूप से केंद्र की जिम्मेदारी है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सीमा पार से नशों की तस्करी रोकना केंद्र की जिम्मेदारी है, फिर भी हमारी सरकार इसे रोकने के लिए अपने फंडों से एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित कर रही है.” उन्होंने आगे कहा कि पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से कोई समर्थन न मिलने के बावजूद सीमा पार से तस्करी रोकने के लिए सीमा पर 550 किलोमीटर लंबी एंटी-ड्रोन तकनीक स्थापित की है.

गुजरात में नशे के कारोबारियों पर नहीं होती कार्रवाई- सीएम मान

उन्होंने पंजाब के बाहर नशीले पदार्थों की बड़ी जब्ती के खिलाफ कार्रवाई न होने पर भी सवाल उठाया. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “गुजरात में लाखों टन नशीले पदार्थ जब्त किए जा रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जाती, जबकि पंजाब ने नशों के खिलाफ देश का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया है.” उन्होंने कहा कि पूरा देश जानता है कि गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर लगभग 3,000 किलो नशीला पदार्थ जब्त किया गया था, लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की गई है.

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब में फूट डालने वाली राजनीति कभी भी सफल नहीं होगी. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब की मिट्टी उपजाऊ है, लेकिन बीजेपी के धर्म और नफरत की राजनीति के बीज यहां कभी नहीं उगेंगे.”

राज्य में बीजेपी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर व्यंग्य करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने टिप्पणी की, “पंजाब में बीजेपी ‘स्कूटर पार्टी’ तक सीमित है, जो 2027 में कांग्रेस की मदद से सत्ता पर काबिज होने का सपना देख रही है.” उन्होंने यह भी कहा कि अमित शाह का पंजाब दौरा लोगों के सामने आ रहे वास्तविक मुद्दों को हल करने में विफल रहा है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अमित शाह सिर्फ हमारे बारे में बुरा-भला कहने के लिए पंजाब आए थे और बिना कुछ किए चले गए.”

चुनाव लड़ने के लिए बीजेपी के पास नेता नहीं- सीएम मान

आगामी विधानसभा चुनावों के संबंध में बीजेपी के दावों पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पार्टी के पास अकेले चुनाव लड़ने के लिए संगठनात्मक ताकत की कमी है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “बीजेपी पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने के लिए 117 उम्मीदवार कहां से लाएगी?” उन्होंने आगे कहा कि चूंकि बीजेपी के पास राज्य में नेता नहीं हैं, इसलिए संभावना है कि वह चुनाव लड़ने के लिए दूसरी पार्टियों के नेताओं को शामिल करने की कोशिश करेगी.

नशों का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पूछा, “गुजरात के एक बंदरगाह पर 3,000 किलो नशीला पदार्थ जब्त किया गया था, वहां कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?” उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार इतनी बड़ी जब्ती के बावजूद नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में विफल रही है.

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पंजाब के लोग बीजेपी की राजनीतिक फितरत से अच्छी तरह वाकिफ हैं. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब, बीजेपी को अच्छी तरह जानता है; पंजाब में नफरत की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है.” उन्होंने याद दिलाया कि कैसे कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान पंजाब के किसानों को अपमानित किया गया था और उस संघर्ष के दौरान 700 से अधिक किसान शहीद हुए थे.

बीजेपी का दो करोड़ नौकरियां देने का वादा अभी भी अधूरा- सीएम मान

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब सरकार की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि उसने पहले ही राज्य के युवाओं को 65,000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं, जबकि बीजेपी का दो करोड़ नौकरियां देने का वादा अभी भी अधूरा है. उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि वादे के मुताबिक 15 लाख रुपये कभी भी आम नागरिकों के बैंक खातों में नहीं आए.

केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि केंद्र सरकार ने आरडीएफ, जीएसटी, एनएचएम और अन्य फंडों में पंजाब के वैध हिस्से को रोक लिया है, जिससे राज्य के विकास पर असर पड़ रहा है. उन्होंने इसे पंजाब की प्रगति, शांति और खुशहाली को पटरी से उतारने की कोशिश बताया.

उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब सरकार ने किसानों के हित के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की बार-बार सिफारिश की है, लेकिन केंद्र ने उस पर कार्रवाई नहीं की है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे चेतावनी दी कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका समझौता किसानों पर बुरा प्रभाव डाल सकता है.

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पंजाब भी उन्हीं स्रोतों से फंड उधार लेता है, जिनसे बीजेपी शासित राज्य लेते हैं और इस उत्पादक ऋण का उपयोग लोगों को सेवाएं और सुविधाएं देने के लिए किया जाता है. उन्होंने टिप्पणी की कि पंजाब सरकार की लोक-कल्याणकारी नीतियों को बीजेपी हजम नहीं कर पा रही है.

केंद्र के पास विदेश नीति का अभाव- सीएम मान

केंद्र सरकार के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश ऐसी स्थिति का सामना कर रहा है, जहां केंद्र सरकार के पास राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट विदेश नीति का अभाव दिखता है.

इस बीच प्रोग्रेसिव पंजाब निवेशक सम्मेलन के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन को उद्योगपतियों और निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रोग्रेसिव पंजाब निवेशक सम्मेलन को भारी समर्थन मिला है.” उन्होंने आगे कहा कि इस सम्मेलन ने सहयोग और निवेश के लिए एक मजबूत मंच तैयार किया है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “निवेशक एक दूसरे के साथ पंजाब में व्यापारिक अवसरों पर चर्चा कर रहे हैं.”

Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में पहला और अष्टमी व्रत है बहुत महत्वपूर्ण, लेकिन रखें इन बातों का ध्यान…

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Chaitra Navratri 2026: हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है. इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रही है. इसका समापन 27 मार्च को होगा.

मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि के समय देवी दुर्गा धरती पर आती हैं औऱ अपने भक्तों के कष्ट हरती हैं. नवरात्रि के समय में भक्तों द्वारा देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों का पूजन किया जाता है. साथ ही व्रत किया जाता है.

नवरात्रि में बहुत से लोग पूरे नौ दिनों तक उपवास रखते हैं, तो वहीं कई श्रद्धालु ऐसे भी हैं जो सिर्फ पहला और अष्टमी का व्रत रखते हैं. शास्त्रों में इन दोनों व्रतों का विशेष महत्व हैं, क्योंकि पहला दिन संकल्प का माना जाता है और अष्टमी पूर्णता का प्रतीक होता है. अगर आप इस साल ये दो व्रत रखने वाले हैं, तो इनसे जुड़े सही नियमों को जानना आपके लिए आवश्यक है. नियमों के सही पालन से पूजा सफल होती है.

पहले व्रत का संकल्प और कलश स्थापना

नवरात्रि के पहले दिन का व्रत मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का संकल्प लेना माना जाता है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. फिर साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थल पर कलश स्थापना करें. फिर व्रत की शुरुआत करें. पहला व्रत रखने वालों को पूरे दिन अपने विचारों में शुद्धता रखनी चाहिए. यह दिन अपनी बड़ी इच्छाएं मां के सामने रखने का होता है. पूजा के समय जो अखंड ज्योत जलाई जाती है वो घर में सकारात्मकता लेकर आती है.

अष्टमी व्रत और कन्या पूजन

अष्टमी को महाष्टमी कहा जाता है. ये नवरात्रि के महत्वपूर्ण दिनों में से एक है. पहले दिन का व्रत रखने वालों के अष्टमी का दिन संकल्प पूरा करने का समय होता है. इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. माता पवित्रता और शांति की देवी मानी जाती है. अष्टमी व्रत के दौरान कन्या पूजन किया जाता है. कन्या पूजन का विशेष महत्व है. इसमें छोटी बच्चियों को मां का रूप मानकर भोग लगया जाता है. मान्यता है कि नवरात्रि में बिना कन्या पूजन के इसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है.

व्रत का खानपान

व्रत के दौरान सिर्फ फलाहार ही लें और अनाज या भारी भोजन से पूरी तरह दूर रहें.

साबूदाना, कुट्टू का आटा या फल खाएं.

इस समय बहुत ज्यादा नमक या मसालों का प्रयोग न करें.

देवी ने आपको भक्ति मार्ग पर चलने की शक्ति दी है, इसलिए उनका आभार व्यक्त करें.

Android में बड़ा बदलाव करने जा रहा Google! आपका स्मार्टफोन होगा पहले से तेज और चलेगा ज्यादा समय…

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स्मार्टफोन की स्पीड और बैटरी लाइफ को बेहतर बनाने के लिए

Google अब Android सिस्टम में एक अहम बदलाव करने की तैयारी कर रहा है. कंपनी ने Android के कोर सिस्टम यानी कर्नेल को ऑप्टिमाइज़ करने के लिए एक नई तकनीक पेश की है जिसे Automatic Feedback-Directed Optimisation (AutoFDO) कहा जाता है.

इस नई तकनीक का उद्देश्य Android फोन की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाना, ऐप्स को जल्दी खोलना और बैटरी की खपत को कम करना है.

Android Kernel में सुधार पर Google का फोकस

दरअसल Android का कर्नेल स्मार्टफोन के हार्डवेयर, प्रोसेसर और ऐप्स के बीच एक कड़ी की तरह काम करता है. यही सिस्टम यह तय करता है कि फोन का प्रोसेसर किस काम में कितना इस्तेमाल होगा. जानकारी के मुताबिक किसी भी Android फोन के कुल CPU समय का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा कर्नेल मैनेज करता है. ऐसे में अगर इसमें थोड़ा भी सुधार किया जाए तो फोन की कुल स्पीड और स्मूदनेस पर बड़ा असर पड़ सकता है. इसी वजह से Google अब इस हिस्से को ज्यादा स्मार्ट तरीके से ऑप्टिमाइज़ करने पर काम कर रहा है.

असली इस्तेमाल के डेटा से होगा ऑप्टिमाइजेशन

नई AutoFDO तकनीक की खासियत यह है कि यह केवल अनुमान के आधार पर काम नहीं करती. इसके लिए लैब में ऐसे टेस्ट किए जाते हैं जिनमें लोकप्रिय Android ऐप्स का इस्तेमाल बिल्कुल उसी तरह किया जाता है जैसे लोग रोजमर्रा में करते हैं. इन टेस्ट के दौरान खास टूल्स यह रिकॉर्ड करते हैं कि सिस्टम के कौन-कौन से हिस्से सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं. टेक्निकल भाषा में इन्हें हॉट कोड पाथ कहा जाता है. बाद में यही जानकारी कर्नेल को दोबारा तैयार करते समय इस्तेमाल की जाती है ताकि सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले हिस्सों को पहले ऑप्टिमाइज किया जा सके.

पुराने तरीके से कैसे अलग है नई तकनीक

पारंपरिक तरीके से कर्नेल तैयार करते समय डेवलपर्स आमतौर पर यह मानकर चलते हैं कि सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किस तरह होगा. लेकिन AutoFDO इस अनुमान को खत्म कर देता है और असली उपयोग के आंकड़ों के आधार पर कोड को व्यवस्थित करता है. इससे कंपाइलर बेहतर फैसले ले पाता है और सिस्टम के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले हिस्से ज्यादा तेज और कुशल तरीके से काम करने लगते हैं.

शुरुआती टेस्ट में दिखा बेहतर प्रदर्शन

Google के शुरुआती परीक्षणों में इस तकनीक से सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं. कंपनी के मुताबिक स्मार्टफोन के बूट होने का समय करीब 2.1 प्रतिशत तक कम हुआ है. वहीं फोन में पहली बार ऐप खोलने की स्पीड यानी कोल्ड ऐप लॉन्च में लगभग 4.3 प्रतिशत तक सुधार देखा गया है. इसके अलावा सिस्टम की कुल परफॉर्मेंस से जुड़े कई अन्य पैमानों में भी बेहतर परिणाम मिले हैं.

आने वाले Android वर्ज़न में मिलेगा फायदा

Google इस नई तकनीक को Android के नए कर्नेल वर्ज़न में लागू कर रहा है, जिनमें android16-6.12 और android15-6.6 जैसी ब्रांच शामिल हैं. आगे चलकर इसे आने वाले वर्जन जैसे android17-6.18 में भी शामिल करने की योजना है. कर्नेल स्तर पर किए जा रहे इस बदलाव की वजह से आने वाले समय में Android स्मार्टफोन में ऐप्स पहले से ज्यादा तेजी से खुलेंगे, मल्टीटास्किंग स्मूद होगी और फोन की कुल परफॉर्मेंस ज्यादा रिस्पॉन्सिव महसूस होगी.