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India-Germany Relations: भारत ने जर्मनी से कर ली 8 अरब डॉलर की डील

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जर्मनी भारत के लिए प्रोजेक्ट 75 (I) के तहत 6 अत्याधुनिक स्टील्थ पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण में सहयोग करेगा. इसके लिए मुंबई स्थित मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड (MDL) और जर्मनी की जानी-मानी रक्षा कंपनी थिसेन क्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के बीच पहले ही अहम समझौता हो चुका है.

करीब 8 बिलियन डॉलर (लगभग 72 हजार करोड़ रुपये) की इस मेगा डील को भारतीय नौसेना के इतिहास की सबसे बड़ी पनडुब्बी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है. इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी खासियत इनमें इस्तेमाल होने वाली एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक होगी, जिससे ये लंबे समय तक बिना सतह पर आए समुद्र के भीतर ऑपरेशन को अंजाम दे सकेंगी.

यही एडवांस AIP तकनीक इस परियोजना के लंबे समय तक अटके रहने की मुख्य वजह रही. भारतीय नौसेना ऐसी पनडुब्बियां चाहती थी, जो ज्यादा स्टील्थ हों, कम शोर करें और दुश्मन की नजर से लंबे समय तक बची रहें. अब तकनीकी अड़चनों के सुलझने के बाद संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही इस डील को लेकर आधिकारिक घोषणा की जा सकती है.

मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा

इन 6 पनडुब्बियों का निर्माण भारत में ही मझगांव डॉकयार्ड में किया जाएगा, जिससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा. जर्मनी की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की निर्माण क्षमता का यह मेल भारतीय नौसेना को रणनीतिक बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा.

समुद्री सुरक्षा में भारत की मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि इन स्टील्थ सबमरीन के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री निगरानी, प्रतिरोधक क्षमता और रणनीतिक संतुलन और मजबूत होगा. बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच यह प्रोजेक्ट भारत के डिफेंस सिस्टम को पहले से ज्यादा मजबूत करने में मदद करेगा.

AIP तकनीक का मतलब क्या होता है?

AIP का पूरा नाम है एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन है. यह ऐसी आधुनिक तकनीक है, जो गैर-परमाणु पनडुब्बियों को बिना हवा लिए लंबे समय तक समुद्र के भीतर रहने की क्षमता देती है. डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को कुछ समय बाद बैटरी चार्ज करने के लिए सतह पर आना पड़ता है या स्नॉर्कल का इस्तेमाल करना होता है. इसी दौरान उनके दुश्मन की नजर में आने का खतरा सबसे ज्यादा होता है. AIP तकनीक इस कमजोरी को काफी हद तक खत्म कर देती है.

AIP पनडुब्बियां इतनी खतरनाक क्यों मानी जाती हैं?

AIP सिस्टम से लैस पनडुब्बियां हफ्तों तक पानी के नीचे छिपी रह सकती हैं. इस दौरान वे दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकती हैं और सही मौके पर अचानक हमला कर सकती हैं. चूंकि ये पनडुब्बियां बहुत कम शोर पैदा करती हैं, इसलिए दुश्मन के सोनार और निगरानी सिस्टम के लिए इन्हें ट्रैक करना काफी कठिन हो जाता है. आधुनिक नौसैनिक युद्ध में यही चुपचाप हमला करने की क्षमता इन्हें बेहद घातक बनाती है.

AIP लैस पनडुब्बियां में लगने वाले हथियार

IQPC की रिपोर्ट के मुताबिक AIP तकनीक से लैस पनडुब्बियां केवल लंबे समय तक पानी के नीचे छिपी रहने के लिए ही नहीं जानी जातीं, बल्कि इनमें लगे पारंपरिक हथियार इन्हें बेहद खतरनाक बना देते हैं. AIP पनडुब्बियों का मुख्य हथियार टॉरपीडो होता है. आमतौर पर इनमें भारी वजन वाले 533 मिमी कैलिबर के टॉरपीडो लगाए जाते हैं. इनका इस्तेमाल दुश्मन की पनडुब्बियों और बड़े सतह के युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है.

आधुनिक टॉरपीडो अत्यधिक सटीक होते हैं और पानी के भीतर तेज़ी से लक्ष्य तक पहुंचकर भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके अलावा इसमें एंटी-शिप मिसाइलें, जमीन पर हमला करने वाली क्रूज़ मिसाइलें, समुद्री माइन का इस्तेमाल किया जाता है.

क्या ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से भारत की बढ़ सकती हैं मुश्किलें?

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अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष इस वक्त चरम पर है. बताया जा रहा है कि मध्य-पूर्व के इस देश में लोग अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हुए हैं.

इतने बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन बीते 47 साल के इतिहास में पहले भी नहीं देखा गया है. ईरान में 28 दिसंबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रियाल की कीमत गिरने और बढ़ती महंगाई को लेकर लोग सड़कों पर हैं.

अब सवाल यह आता है कि क्या ईरान में फैली इस आग की लपटें भारत को भी अपनी चपेट में लेगी? क्या ईरान में इस अशांति का असर भारत पर भी पड़ेगा? यह सवाल इसलिए दिमाग में आ रहा है क्योंकि भारत रणनीतिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से ईरान से जुड़ा हुआ है. आइए इसे थोड़ा और डिटेल में समझते हैं.

भारत के लिए क्या है चिंता की बात?

ईरान की बिगड़ती जा रही हालत और अमेरिका के साथ बढ़ता तनाव भारत के लिए इसलिए चिंताजनक है क्योंकि भारत सेंट्रल एशिया, रूस और यूरोप तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर फोकस करते हुए कई सारे प्रोजेक्ट्स में भारी पैसा लगा रखा है. इनमें सबसे अहम ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित चाबहार बंदरगाह है. यह एक ऐसी परियोजना है, जिस पर भारत लाखों डॉलर खर्च किए हैं. इसी बंदरगाह के जरिए भारत पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और मिडिल ईस्ट के देशों तक सीधे पहुंच पाता है.

क्यों अहम है चाबहार पोर्ट?

चाबहार पोर्ट इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का भी एक अहम हिस्सा है. सात हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबा यह कॉरिडोर जहाज, रेल और सड़क मार्गों का एक नेटवर्क है, , जो भारत को ईरान के साथ-साथ अफगानिस्तान, अजरबैजान, अर्मीनिया, रूस, मिडिल ईस्ट और यूरोप से कनेक्ट करता है. इससे INSTC स्वेज नहर वाले रूट के मुकाबले छोटा है, जिससे माल की ढुलाई में समय और लागत दोनों कम आता है. इससे दुनिया के कई देशों से भारत का कारोबार बढ़ता है, जिससे भारत की इकोनॉमी मजबूत होती है.

भारत और ईरान के बीच कारोबार

कॉमर्स डिपार्टमेंट की डेटा के मुताबिक, भारत और ईरान के बीच बड़े पैमाने पर कारोबार होता है. कारोबारी साल 2024-25 में यह लगभग 1.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया. इसमें से भारत ने 1.24 बिलियन डॉलर के सामान का एक्सपोर्ट किया. जबकि इम्पोर्ट महज 0.44 बिलियन डॉलर का ही किया. ईरान में तनाव बढ़ने से चाबहार बंदरगाह के बीच व्यापारिक गतिविधियां कम हो जाएंगी, जिससे INSTC के जरिए होने वाले कारोबार पर भी असर पड़ने की संभावना है.

SBI ATM Charges: एसबीआई ने बढ़ाए ATM ट्रांजेक्शन चार्ज, जानें!

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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने ATM ट्रांजेक्शन चार्जेज में बदलाव किया है. यह बदलाव 1 दिसंबर 2025 से ये बदलाव लागू हो गए हैं. इन बदलावों का सीधा असर सेविंग्स और सैलरी अकाउंट धारकों पर पड़ेगा जो दूसरे बैंकों के एटीएम का इस्तेमाल करते हैं.

हालांकि कुछ अकाउंट और ट्रांजेक्शन पर कोई बदलाव नहीं किया गया है. वहीं इन बदलावों को लेकर बैंक का कहना है कि इंटरचेंज फीस बढ़ने के बाद एटीएम सर्विस चार्ज की समीक्षा की गई, जिसके चलते यह फैसला लिया गया है. फरवरी 2025 के बाद यह पहली बार है जब SBI ने ATM चार्ज में बढ़ोतरी की है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि SBI के एटीएम ट्रांजेक्शन चार्ज में बदलाव के बाद अब आपको कितना एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा.

नॉन SBI ATM पर ट्रांजेक्शन अब होंगे महंगे

SBI की नई व्यवस्था के तहत SBI ग्राहक अगर दूसरे बैंकों के एटीएम से तय फ्री लिमिट के बाद कैश निकालते हैं, तो अब उन्हें प्रति ट्रांजेक्शन 23 रुपये प्लस GST देना होगा. वहीं पहले यह फीस 21 रुपये प्लस GST था. इसके अलावा बैलेंस चेक या मिनी स्टेटमेंट जैसे नॉन फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर अब 11 रुपये प्लस GST देना होगा, जो पहले 10 रुपये प्लस GST था. SBI ने यह भी साफ किया है कि रेगुलर सेविंग्स अकाउंट होल्डर्स के लिए नॉन SBI ATM पर मिलने वाली फ्री ट्रांजेक्शन लिमिट में कोई बदलाव नहीं किया गया है. ग्राहक पहले की तरह हर महीने दूसरे बैंकों के एटीएम से 5 फ्री ट्रांजेक्शन कर सकते हैं, जिसमें फाइनेंशियल और नॉन फाइनेंशियल दोनों शामिल हैं. वहीं इस लिमिट के बाद ही नए चार्ज लागू होंगे.

सैलरी अकाउंट धारकों के लिए भी बदले नियम

सैलरी पैकेज सेविंग्स अकाउंट रखने वाले ग्राहकों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है. पहले जहां दूसरे बैंकों के ATM पर अनलिमिटेड फ्री ट्रांजेक्शन की सुविधा मिलती थी, अब यह सीमा घटाकर 10 फ्री ट्रांजेक्शन प्रति माह कर दी गई है. वहीं फ्री लिमिट खत्म होने के बाद सैलरी अकाउंट धारकों को भी कैश विड्रॉल पर 23 रुपये प्लस GST और नॉन फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर 11 रुपये प्लस GST देना होगा.

किन खातों पर नहीं पड़ेगा असर?

SBI के अनुसार कुछ कैटेगरी के ग्राहकों पर इस बढ़ोतरी का कोई असर नहीं होगा.

बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट के चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

SBI डेबिट कार्ड से SBI के अपने ATM पर ट्रांजेक्शन पूरी तरह फ्री रहेंगे.

SBI ATM से कार्डलेस कैश विड्रॉल पहले की तरह अनलिमिटेड और फ्री रहेगा.

इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड अकाउंट भी इस बदलाव से बाहर रखे गए हैं.

“‘भारत जैसा कोई नहीं, पीएम मोदी-ट्रंप की दोस्ती रियल’, सर्जियो गोर ने किया बड़ा ऐलान’

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भारत में अमेरिकी राजदूत का पद संभालने के बाद सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को लेकर बड़ा बयान दिया है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती का भी जिक्र किया.

सर्जियो गोर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती का जिक्र करते हुए कहा कि ट्रंप और मोदी की दोस्ती रियल है. गोर ने पीएम मोदी को ट्रंप का ‘Dear Friend’ बताया और कहा कि दोनों नेताओं के बीच आपसी विश्वास और सम्मान है.

सर्जियो गोर ने किया बड़ा ऐलान

उन्होंने कहा कि अमेरिका के नेतृत्व वाली नई वैश्विक पहल पैक्ससिलिका (Pax Silica) में भारत को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने के लिए अगले महीने आमंत्रित किया जाएगा. इस घोषणा को दोनों देशों के बीच तकनीक, सप्लाई चेन और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.

सर्जियो गोर ने बताया कि पैक्ससिलिका अमेरिका द्वारा पिछले महीने शुरू की गई एक नई रणनीतिक पहल है. इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा इनपुट, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेवलपमेंट और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी एक सुरक्षित, समृद्ध और इनोवेशन-आधारित सिलिकॉन सप्लाई चेन तैयार करना है. उन्होंने बताया कि इस पहल में पहले ही जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और इजरायल शामिल हो चुके हैं और अब भारत को भी इस समूह का पूर्ण सदस्य बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.

अमेरिका छूट गया पीछे! दुनियाभर में सबसे तेज AI अपनाने वाला देश बना भारत

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थॉटवर्क्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल अपनाने के मामले में पूरी दुनिया में सबसे आगे निकल चुका है. खास तौर पर बड़े लैंग्वेज मॉडल यानी LLM का इस्तेमाल भारत में सबसे तेज़ी से बढ़ा है.

ChatGPT, Gemini और Perplexity जैसे पॉपुलर AI ऐप्स के सबसे ज्यादा मंथली और डेली एक्टिव यूज़र्स अब भारत में हैं जिससे देश की मजबूत मौजूदगी साफ नजर आती है.

सस्ते डेटा और बड़ी आबादी बना रही है भारत को AI हब

BofA की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की यह तेज बढ़त किसी एक वजह से नहीं बल्कि कई बड़े फैक्टर्स के मेल से संभव हुई है. भारत के पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ऑनलाइन आबादी है जहां 70 से 75 करोड़ लोग मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. इसके साथ ही सस्ते डेटा प्लान्स ने AI टूल्स तक पहुंच को बेहद आसान बना दिया है. आज भारत में यूज़र्स सिर्फ करीब दो डॉलर खर्च करके महीने में 20 से 30GB तक डेटा इस्तेमाल कर पा रहे हैं जो कई देशों के मुकाबले बहुत सस्ता है.

युवा आबादी और टेक्नोलॉजी के लिए तैयार भारत

भारत की इंटरनेट यूज़र आबादी का बड़ा हिस्सा युवा है. रिपोर्ट के अनुसार, 60 प्रतिशत से ज्यादा इंटरनेट यूज़र्स की उम्र 35 साल से कम है. इनमें से काफी लोग अंग्रेज़ी समझते और बोलते हैं जिससे वे नए डिजिटल टूल्स और AI ऐप्स को तेजी से अपनाते हैं. यही वजह है कि भारत में AI सिर्फ एक्सपेरिमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की ज़िंदगी और काम का हिस्सा बनता जा रहा है.

टेलीकॉम कंपनियों से मिल रहा AI को बढ़ावा

AI को लोकप्रिय बनाने में टेलीकॉम कंपनियों की भूमिका भी अहम बताई गई है. BofA की रिपोर्ट में कहा गया है कि Jio और Bharti Airtel जैसी कंपनियां अपने ग्राहकों को Gemini और Perplexity जैसे AI ऐप्स के पेड वर्ज़न का फ्री सब्सक्रिप्शन दे रही हैं. इससे यूज़र्स को बिना ज्यादा खर्च किए एडवांस AI टूल्स इस्तेमाल करने का मौका मिल रहा है जबकि AI कंपनियों और टेलीकॉम ऑपरेटर्स दोनों को अपने-अपने फायदे मिल रहे हैं.

पढ़ाई और कामकाज में AI से बढ़ रही क्षमता

भारत में यूज़र्स AI टूल्स का इस्तेमाल सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि पढ़ाई, स्किल डेवलपमेंट और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए कर रहे हैं. अलग-अलग भारतीय भाषाओं में AI मॉडल उपलब्ध होने से भाषा की बाधा भी कम हो रही है. BofA इसे AI का डेमोक्रेटाइजेशन यानी हर वर्ग तक तकनीक की पहुंच बढ़ने की प्रक्रिया मानता है.

Agentic AI के लिए भारत बन सकता है टेस्टिंग ग्राउंड

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाले समय में भारत अगली पीढ़ी की AI टेक्नोलॉजी, यानी एजेंटिक AI के लिए एक बड़ा टेस्टिंग प्लेटफॉर्म बन सकता है. इस तरह के AI सिस्टम खुद से सोचने, योजना बनाने और काम को अंजाम देने में सक्षम होते हैं. भारत की विशाल और विविध यूज़र बेस के चलते इन तकनीकों को रियल वर्ल्ड कंडीशन्स में परखना आसान होगा, इससे पहले कि इन्हें वैश्विक स्तर पर लॉन्च किया जाए.

भारतीय कंपनियों के साथ बढ़ सकती है ग्लोबल साझेदारी

BofA का मानना है कि भविष्य में ग्लोबल AI कंपनियां भारतीय फर्म्स के साथ मिलकर सर्विस और फुलफिलमेंट मॉडल पर काम कर सकती हैं. यह मॉडल कुछ हद तक वैसा ही हो सकता है जैसा अमेरिका में AI एजेंट्स ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह संकेत देती है कि AI की अगली बड़ी कहानी भारत से निकल सकती है.

The Raja Saab Worldwide BO: ‘द राजा साब’ ने दुनियाभर में किया बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

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प्रभास की ‘द राजा साब’ थिएटर में लगी है. फिल्म को क्रिटिक्स की तरफ से अच्छे रिव्यू नहीं मिले हैं. इसी के साथ बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म खास अच्छा परफॉर्म नहीं कर रही है. 400 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने अभी तक 200 करोड़ का भी आंकड़ा पार नहीं किया है.

हालांकि, घटती कमाई के बीच फिल्म ने दो तेलुगू फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है.

आइए जानते हैं फिल्म ने 3 दिनों में दुनियाभर में कितनी कमाई कर ली है.

द राजा साब का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

द राजा साब ने ओपनिंग डे पर दुनियाभर में 100 करोड़ की कमाई की. शनिवार को फिल्म की कमाई में 51 परसेंट की कमी देखने को मिली. रविवार को भी घरेलू बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की कमाई में 20 परसेंट गिरावट आई है. रविवार तक फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर नेट 109 करोड़ और 130 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है.

दुनियाभर में द राजा साब ने की इतनी कमाई

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, फिल्म ने तीन दिन में 158 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन क्या है. इसी के साथ फिल्म ने अखांडा 2 और मिराई का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. अखांडा 2 ने 128 करोड़ का लाइफटाइम कलेक्शन किया था. वहीं मिराई ने 150 करोड़ का कलेक्शन किया था. हालांकि, ट्रेड एनालिस्ट का मानना है कि फिल्म जिस हिसाब से कमाई कर रही है, ऐसे में 400 करोड़ का बजट निकाल पाना भी मुश्किल लग रहा है. हालांकि, 14 जनवरी को मकर संक्रांति की छुट्टी है, इस हॉलिडे का फायदा फिल्म को मिलने की उम्मीदें हैं.

फिल्म को Maruthi ने डायरेक्ट किया है. फिल्म में प्रभास लीड रोल में हैं. प्रभास के अलावा इस फिल्म में संजय दत्त, निधि अग्रवाल, मालविका मोहनन, रिद्धि कुमार, बोमन ईरानी, जरीना वहाब जैसे स्टार्स हैं. मालूम हो कि द राजा साब को लेकर प्रभास के फैंस में काफी क्रेज था. प्रभास की एंट्री पर फैंस ने थिएटर में आरती की और पटाखे जलाए थे.

अगर बैंक डूब जाए तो ग्राहकों को कितना मिलता है पैसा, क्या है RBI का नियम?

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आमतौर पर लोग अपने पैसों को और अपनी बचत को बैंक अकाउंट में ही जमा कराते हैं. इसके अलावा अपनी सेविंग्स को भी लोग बैंक एफडी और आरडी में भी निवेश करते हैं. लेकिन सोचिए कि आपको पता चले कि जिस बैंक में आपकी सालों की मेहनत की कमाई जमा है, वह बैंक दिवालिया हो गया है.

ऐसे में लोगों का सबसे पहला यही उठता है कि आपका पैसा सुरक्षित रहेगा या नहीं. इस डर को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक और उसकी सब्सिडियरी संस्था डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन की ओर से दी गई जरूरी जानकारी काम आती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि अगर बैंक डूब जाए तो ग्राहकों को कितना पैसा मिलता है और RBI का नियम क्या है?

बैंक डूब जाने पर क्या है RBI का नियम?

RBI और DICGC के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2025 तक देश के करीब 97.6 प्रतिशत बैंक खाते बीमा कवर के दायरे में आते हैं. यानी अगर कोई बैंक डूब भी जाता है, तो ज्यादातर खाताधारकों को उनकी जमा राशि वापस मिलने की गारंटी रहती है. RBI के नियमों के अनुसार DICGC हर जमाकर्ता को एक बैंक में अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर देता है. इसमें सेविंग अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और करंट अकाउंट शामिल होते हैं. इसके अलावा आपको बता दें कि बीमा कवर की यह सीमा प्रति जमाकर्ता और प्रति बैंक के आधार पर भी तय होती है. 5 लाख से ज्यादा राशि पर बैंक की दिवालियापन प्रक्रिया लागू होती है. इसमें बैंक की संपत्ति बेचकर अन्य जमाकर्ताओं को पैसा लौटाने की कोशिश की जाती है, लेकिन इसमें समय लग सकता है.

छोटे जमाकर्ता सुरक्षित, बड़े अमाउंट पर खतरा

RBI के नियमों के अनुसार भले ही खातों की संख्या के हिसाब से 97.6 प्रतिशत अकाउंट इंश्योर्ड है, लेकिन कुल जमा रकम में से केवल करीब 41.5 प्रतिशत पैसा ही बीमा कवर के तहत आता है. अगर इसे आसान शब्दों में समझे तो छोटे जमाकर्ताओं का पैसा काफी हद तक सुरक्षित है, लेकिन जिन खातों में बड़ी रकम जमा होती है, उनका एक बड़ा हिस्सा खतरे में रहता है.

बैंक डूबने पर पैसा कहां से मिलता है?

अगर कोई बैंक अपने जमाकर्ताओं का पैसा लौटाने की स्थिति में नहीं होता तो RBI उस पर मोरेटोरियम लगा सकता है या उसे किसी दूसरे बैंक में मर्ज कर सकता है. वहीं पूरी तरह रास्ता बंद होने पर बैंक को दिवालिया भी घोषित किया जाता है. ऐसी कंडीशन में DICGC अपने बीमा फंड से जमाकर्ताओं को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की रकम लौटाता है. यह फंड बैंकों से लिए जाने वाले इंश्योरेंस प्रीमियम से तैयार किया जाता है.

SSC GD Constable Result: SSC GD फाइनल रिजल्ट जल्द होगा जारी, कटऑफ और

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कर्मचारी चयन आयोग यानी SSC किसी भी समय SSC GD फाइनल रिजल्ट 2025 जारी कर सकता है. आयोग यह रिजल्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर जारी करेगा. लंबे समय से रिजल्ट का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों की नजर अब आयोग की वेबसाइट पर टिकी हुई है.

SSC की ओर से जारी होने वाला GD फाइनल रिजल्ट पुरुष और महिला उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग सूची में होगा. इस रिजल्ट में उन उम्मीदवारों के नाम और रोल नंबर होंगे, जिन्हें अलग-अलग बलों के लिए चयनित किया गया है. रिजल्ट PDF फॉर्मेट में जारी किया जाएगा, जिसे उम्मीदवार आसानी से डाउनलोड कर सकेंगे.

कब तक आ सकता है SSC GD फाइनल रिजल्ट

मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, SSC GD फाइनल रिजल्ट 2025 केआज जारी होने की उम्मीद है. हालांकि आयोग की ओर से अभी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है. जैसे ही रिजल्ट जारी होगा, उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इसे देख सकेंगे.

कटऑफ भी होगी जारी

SSC GD फाइनल रिजल्ट के साथ-साथ आयोग SSC GD कटऑफ 2025 भी जारी करेगा. कटऑफ पुरुष और महिला उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग होगी. यह कटऑफ सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांग और अन्य वर्गों के लिए अलग-अलग तय की जाएगी.

कटऑफ सूची में बल के अनुसार, राज्य के अनुसार, क्षेत्र के अनुसार और श्रेणी के अनुसार अंक बताए जाएंगे. SSC की ओर से कटऑफ भी PDF फॉर्मेट में जारी की जाएगी, जिसे उम्मीदवार डाउनलोड कर सकेंगे.

किन आधारों पर तय होगी कटऑफ

पोस्टिंग की बात करें तो उसमें करीब 2 से 4 महीने का समय लग सकता है. SSC GD फाइनल कटऑफ कई चरणों के आधार पर तय की जाएगी. इसमें कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT), शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET), शारीरिक मानक परीक्षा (PST) और मेडिकल जांच के प्रदर्शन को शामिल किया जाएगा. सभी चरणों को पास करने वाले उम्मीदवारों को ही फाइनल मेरिट लिस्ट में जगह मिलेगी.

रिजल्ट कैसे चेक करें

रिजल्ट देखने के लिए उम्मीदवारों को SSC की वेबसाइट पर जाना होगा. वहां SSC GD रिजल्ट का लिंक दिया जाएगा. इस लिंक पर क्लिक करते ही रिजल्ट की PDF खुल जाएगी. उम्मीदवार इसमें अपना नाम या रोल नंबर खोज सकते हैं. वेबसाइट पर लॉगिन करने के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए यह जानकारी पहले से तैयार रखें.

चीन ने दुनिया का पहला रोबोट लॉन्च किया जो 24/7 अपने आप चल सकता है – नए फुटेज में इसे अपनी बैटरी बदलते हुए देखें

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वहां कई हैं वहाँ अजीब और अद्भुत ह्यूमनॉइड रोबोट हैंलेकिन इस साल लॉन्च की गई सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली मशीनों में से एक अपना बैटरी पैक बदल सकती है – जिससे यह सप्ताह के सातों दिन, दिन में 24 घंटे स्वायत्त रूप से चलने में सक्षम हो जाती है।

चीनी कंपनी यूबीटेक द्वारा बनाया गया वॉकर एस2 रोबोट 5 फुट 3 इंच (162 सेंटीमीटर) लंबा है और इसका वजन 95 पाउंड (43 किलोग्राम) है – जो इसे एक छोटे वयस्क के आकार और वजन के बराबर बनाता है।

दोहरी-बैटरी प्रणाली में 48-वोल्ट लिथियम बैटरी का उपयोग करके, रोबोट दो घंटे तक चल सकता है या अपनी बिजली खत्म होने से पहले चार घंटे तक खड़ा रह सकता है। एक बार ख़त्म होने के बाद बैटरी को पूरी तरह रिचार्ज होने में 90 मिनट का समय लगता है।

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इसकी सबसे दिलचस्प विशेषता – जिसे यूबीटेक प्रतिनिधियों का कहना है कि यह दुनिया में सबसे पहले है – यह है कि अपने बैटरी पैक को हटाने और रिचार्ज करने के लिए मानव ऑपरेटर पर निर्भर रहने के बजाय, मशीन इस कार्य को पूरी तरह से अपने दम पर कर सकती है।

यूट्यूब पर 17 जुलाई को प्रकाशित नए प्रचार फुटेज में, वॉकर एस2 रोबोट अपनी बैटरी की आपूर्ति को बदलने के लिए बैटरी चार्जिंग स्टेशन के पास जाता हुआ दिखाई दे रहा है। स्टेशन से दूर की ओर मुख करके, यह अपनी भुजाओं का उपयोग करके इसके पीछे लगे बैटरी पैक को निकालता है और इसे रिचार्ज करने के लिए एक खाली स्लॉट में रख देता है। फिर यह यूनिट से एक ताजा बैटरी पैक निकालता है और इसे अपने पोर्ट में डालता है।

यदि किसी एक बैटरी की शक्ति समाप्त हो जाती है तो रोबोट अपनी स्वयं की बैटरी बदल देगा। चीनी प्रकाशन की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह यह पता लगाने में भी सक्षम है कि इसमें कितनी बिजली बची है और यह निर्णय लेता है कि अपने कार्यों की प्राथमिकता के आधार पर अपनी बैटरी में से किसी एक को बदलना या चार्ज करना सबसे अच्छा है या नहीं।

वॉकर एस2, जिसे कारखानों जैसी सेटिंग में या सार्वजनिक स्थानों पर ग्राहकों से मिलने और स्वागत करने के लिए मानव-जैसे रोबोट के रूप में उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसमें 20 डिग्री की स्वतंत्रता है (जोड़ों या तंत्रों को स्थानांतरित करने के तरीकों की संख्या) और यह वाई-फाई और ब्लूटूथ के साथ भी संगत है।

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बंपर मुनाफे का लालच देकर ठगी, 76 लोगों को लगाया चूना, गिरफ्तार हुआ आरोपी

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छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन ठगी, साइयबर ठगी और अब क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग के नाम पर फ्रॉड ने पुलिस की चुनौती बढ़ा दी है. दुर्ग भिलाई पुलिस ने क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर 3.80 करोड़ रुपए की ठगी के आरोपी को गिरफ्तार किया है.

बंपर मुनाफे का लालच देकर ठगी

पूरी वारदात भिलाई के सुपेला थाने की है. आरोपी हार्दिक कुदेशिया ने क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग में निवेशकों को बंपर मुनाफे का लालच दिया और 76 लोगों से ठगी की वारदात को अंजाम दिया. आरोपी निवेशकों को हर माह 6 प्रतिशत मुनाफे का लालच देकर लोगों को झांसे में लिया और निवेश कराकर एक ऐप के माध्यम से इंडियन करेंसी को डॉलर में कन्वर्ट करता था. कुछ माह तक आरोपी ने निवेशकों को मुनाफा दिया और मूलधन अपने पास ही रखा. इसके बाद अपना दफ्तर बंदकर भाग गया. उसके बाद से वह फरार था.

कैसे ठगी का हुआ खुलासा ?

भिलाई नगर सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि सुपेला थाने में सुमित साहू और उसके पिता ने साल 2025 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. पीड़ित ने बताया कि हार्दिक कुदेशिया ने उन्हें क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग में मुनाफे का लालच दिया. इस लालच में आकर सुमित ने 20 लाख रुपये उसे दे दिए. कुथ दिन तक उसको 6 प्रतिशत के हिसाब से हार्दिक कुदेशिया ब्याज देता रहा. उसके बाद अक्टूबर 2025 से वह फरार हो गया. उसका दफ्तार बंद मिला. जिसके बाद नवंबर 2025 में पीड़ित सुमित साहू ने रिपोर्ट दर्ज कराई.

मोबाइल एप के जरिए क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेड

भिलाई पुलिस ने खुलासा किया है कि आरोपी मोबाइल एप के जरिए क्रिप्टो करेंसी में ट्रेड करता था. वह ट्रेड के जरिए मिलने वाले डॉलर को ऐप के जरिए ही भारतीय रुपये में तब्दील करता था. उसके बाद उसे बैंक खाते में जमा करता था.

आरोपी हार्दिक कुदेशिया फाइनेंस एप में लगभग 4 से 5 महीने तक ट्रेडिंग का काम किया है. वह मूलधन के लाभ और उससे मुनाफे की 6 प्रतिशत राशि को निवेशकों को देता था. उसके बाद 3 फीसदी राशि अपने अन्य साथी को कमीशन के रूप देता था. इसके बाद जो मूलधन का पैसा बचता था उसे आरोपी अपने पास रखता था. इस तरह बाद में पैसा देना बंद कर वह ठगी की वारदात को अंजाम देता था.

आरोपी ने कुल 76 निवेशकों से धोखाधड़ी की है. उनसे करीब तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी को अंजाम दिया है. पुलिस ने आरोपी से रुपये गिनने की मशीन बरामद किया है. इसके अलावा डिजिटल डिवाइस भी आरोपी से बरामद किए गए हैं. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया है.