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‘सुनवाई के दौरान सारे सवाल मुस्लिम पक्ष से ही क्‍यों हो रहे हैं?’

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रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने इस पर ऐतराज जाहिर करते कहा- ये ग़लत, बेबुनियाद बात है.

विवादित इमारत पर हमेशा से मुसलमानों का कब्ज़ा बता रहे राजीव धवन से सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि जब बाहरी हिस्से में हिंदू राम चबूतरा, सीता रसोई बना कर पूजा करते थे फिर आपका पूरा कब्ज़ा कैसे हुआ? राजीव धवन ने कहा कि सारे सवाल हमसे किए जा रहे हैं और दूसरे पक्ष से कोर्ट सवाल नहीं करता. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह टिप्पणी अवांछित है.

इस बीच पूजा के अधिकार की अर्ज़ी देने वाले सुब्रमण्यम स्वामी को आगे बैठा देख मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने विरोध किया. कहा- ये जगह वकीलों की है और यहां किसी और को अधिकार नहीं है. अपने केस की खुद पैरवी करने वाले स्वामी आगे बैठते रहे हैं. राफेल केस में अरुण शौरी आगे बैठे थे.

राजीव धवन की दलीलें
पुरातत्व एक विज्ञान है. ये कोई विचार नहीं है. पुरातत्व विभाग का जो नोट सबूत के तौर पर कोर्ट ने स्वीकार किया, उसे कोर्ट द्वारा परखा जाना और ASI द्वारा उसकी सत्यता साबित किया जाना जरूरी है. इसे मुस्लिम पक्षकारों ने नकारा है. ब्रिटिश सरकार ने मस्जिद के रखरखाव के लिए 1854 से ग्रांट देना शुरू किया था. ये हमारे मालिकाना हक को दर्शाता है. यहां तक कि 1854 से 1989 तक किसी भी हिन्दू पक्षकार ने विवादित जमीन पर अपने मालिकाना हक का दावा कोर्ट में नहीं किया.

मुख्य मांग यह थी कि मस्जिद का उपयोग नहीं किया जाए. लेकिन मस्जिद पर अवैध कब्जा किया गया और उसके बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. धवन ने अवैध कब्जे पर सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया. परंपरा और आस्था कोई दिमाग का खेल नहीं है. इन्हें अपने मुताबिक नहीं ढाला जा सकता है.

जस्टिस चंद्रचूड़ के सवाल पर जवाब देते हुए धवन ने कहा कि 1886 के रिकॉर्ड यह साफ करते हैं कि भूमि किसकी है. प्वाइंट ये है कि इसमें हमारा अधिकार है. जब हिन्दुओं की ओर से अधिकार का सवाल 1886 में उठाया गया तब मजिस्ट्रेट ने वह सिविल सूट खारिज कर दिया. लेकिन रेस ज्यूडी काटा होने के बाद फिर अवैध कब्जे के बाद दावा किया गया.

धवन ने कहा कि हिन्दू पक्ष के पास कोई मालिकाना हक का दस्तावेज़ नहीं है और ना ही था. यह वक्फ की संपत्ति अंग्रेजों के समय से है और हिन्दुओं ने जबरन अवैध कब्जा किया. धवन ने कहा कि क्यों उन्हें पूजा का और सेवादार होने का अधिकार दिया गया जबकि उनके पास मालिकाना हक नहीं था.

जस्टिस DY चन्द्रचूड़ ने राजीव धवन से हिंदुओं के बाहरी अहाते पर कब्ज़े के बारे में पूछा. जस्टिस DY चन्द्रचूड़ ने कहा कि 1858 के बाद के दस्तावेजों से पता चलता है कि राम चबूतरा की स्थापना की गई थी, उनके पास अधिकार था. राजीव धवन ने कहा कि दिलचस्प बात ये है कि इस केस की सुनवाई के दौरान सभी सवाल हमसे ही किये जाते है..कभी हिन्दू पक्ष से सवाल नहीं किया जाता, सुनवाई के दौरान यह बहुत विचित्र बात हुई है…

मुस्लिम पक्ष के वकील धवन ने कहा कि विवादित ज़मीन पर लगातार हमारा कब्जा रहा है. हिंदू पक्ष ने बहुत देर से दावा किया. 1989 से पहले हिंदू पक्ष ने कभी ज़मीन पर मालिकाना दावा पेश नहीं किया. 1986 में राम चबूतरे पर मंदिर बनाने की महंत धर्मदास की मांग को फैज़ाबाद कोर्ट खारिज कर चुका है..

जस्टिस SA बोबडे और जस्टिस DY चन्द्रचूड़ ने कहा कि क्या मुसलमानों का एकमात्र अधिकार होने का दावा करना उनकी दलील को हल्का नहीं करेगा.. जबकि हिंदुओं को बाहरी आंगन में प्रवेश करने का अधिकार था…धवन ने कहा कि इससे उन्हें अधिकार तो नहीं मिलता..

जस्टिस DY चन्द्रचूड़ ने कहा कि कई दस्तावेज़ है जो दिखाते है कि वह बाहरी आंगन में रहते थे.

धवन ने कहा कि यह दिखाने के लिए उनके पास कोई सबूत नहीं है कि हिंदू बाबरी मस्जिद की विवादित भूमि का मालिक है.. भूमि के उपयोग के अलावा कोई अधिकार हिंदुओं को नहीं दिया गया था.. उन्हें पूर्वी दरवाजे में प्रवेश करने और प्रार्थना करने का अधिकार दिया गया था.. और इससे ज्यादा कुछ नहीं था…

धवन ने कहा कि एक भी ऐसा दस्तवेज़ नहीं जो साबित करता हो कि हिंदुओं का वहां पर पहले कब्ज़ा रहा हो… हमने 6 दिसंबर 1992 को ढांचा गिराए जाने के बाद अपनी मांग बदली और हमारी यही मांग है कि हमें 5 दिसंबर 1992 की स्थिति में जिस तरह का ढ़ांचा था उसी स्थिति में हमें मस्जिद सौंपी जाय…

इससे पहले जब सोमवार को सुनवाई शुरू हुई तो सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने कोर्ट से कहा कि आज जिरह पूरी करना संभव नहीं हो पायेगा. उन्‍होंने आज के बाद डेढ़ धंटे का और वक्त अपनी जिरह पूरी करने के लिए मांगा. कोर्ट ने कहा कि आज ही अपनी बात पूरी करने की कोशिश कीजिए. हालांकि तय तय शेड्यूल के मुताबिक सोमवार को मुस्लिम पक्ष के पास अपनी बात रखने का अंतिम मौका है. मंगलवार और बुधवार को हिंदू पक्ष को जवाब देने का आखिरी मौका मिलेगा और 17 अक्‍टूबर को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया जाएगा.

इस बीच अयोध्‍या में 17 अक्‍टूबर तक सुनवाई पूरी होने की संभावना के मद्देनजर अयोध्या का जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है. 17 नवंबर से पहले संभावित फैसले को लेकर  दीपोत्सव, चेहल्लुम व कार्तिक मेले को लेकर 2 महीने तक अयोध्या जनपद में धारा 144 लागू रहेगी. जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने जनपद में निषेधाज्ञा लगा दी है.

37वें दिन की सुनवाई
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने कहा था कि वह इनटरवीनर, मठ, लिमिटेशन पर दलीलें देंगे. उन्‍होंने कहा था कि न्यायिक व्यक्ति का मामला उठाकर हिन्दू मुख्य मामले से भटकाना चाह रहे हैं. हिन्दू पक्ष का कहना था कि जन्म स्थान अपने आप में न्यायिक व्यक्ति होता है. जस्टिस बोबड़े ने राजीव धवन से सवाल करते हुए पूछा था कि क्या इस्लामिक शिक्षाओं के मुताबिक सिर्फ अल्लाह ही पवित्र या दिव्य है, सिर्फ उनकी ही इबादत होती है और किसी की नहीं? ऐसे में बाकी वस्तु व जगह क्‍या पवित्र मानी जा सकती है. क्या मस्जिद (Mosque) की अपने आप में दिव्यता को लेकर किसी इस्लामिक विद्वान ने कुछ कहा है?

राजीव धवन ने जवाब दिया था कि एक मस्जिद हमेशा पवित्र और दिव्य है. यह वह जगह है जहां कोई अपने ख़ुदा की इबादत करता है. यहां पांचों वक़्त नमाज पढ़ी जाती है. जिस चीज़ के जरिए खुदा की इबादत हो, वो अपने आप में हर चीज़ पवित्र है. धवन ने कहा था कि हिंदुओं ने हमारी मस्जिद को गिरा दिया और हिंदुओं ने उलटा कहा कि उनको प्रताड़ित किया गया.

धवन ने निर्मोही अखाड़ा की याचिका का अंश पढ़ते हुए कहा कि याचिका में कहा गया था कि वहां पर तीन गुम्बद की कोई मस्जिद नहीं थी. भारतवर्ष में इस्लामिक कानून लागू नहीं होता. यह भी कहा गया कि गुम्बद वैदिक समयकाल से मिलता-जुलता है और बाबर ने नहीं मीर बाकी ने मन्दिर को गिराया. उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह एक फकीर से बहुत प्रभावित था.राजीव धवन ने कहा था कि हिंदू पक्ष मुस्लिमों पर सांप्रदायिक हिंसा का आरोप लगाता रहा है. वो मुस्लिम बादशाहों के हमले व विध्वंस की बात करते हैं लेकिन 6 दिसंबर 1992 को क्या हुआ, जब बाबरी मस्जिद गिरा दी गई. सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए ज़िम्मेदार वो भी हैं और ये कोई मुगलकाल की बात तो है नहीं.

आम जनता को त्योहारों में मिली राहत, सितंबर में 0.33 फीसदी रही थोक महंगाई दर….

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सितंबर महीने में आम लोगों को महंगाई से बड़ी राहत मिली है। इस महीने थोक महंगाई दर 0.33 फसदी रही जबकि यह अगस्त में 1.08 फीसदी थी। प्याज के मूल्यों में बढ़ोतरी के बावजूद सितंबर में थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर घटकर 0.33 प्रतिशत दर्ज की गयी है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सोमवार को यहां जारी आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2018 की तुलना में सितंबर 2019 में थोक मुद्रास्फीति की दर 0.33 प्रतिशत रही है। सितंबर 2018 में यह आंकडा 5.22 प्रतिशत था। जुलाई 2019 में थोक मुद्रास्फीति की दर 1.08 प्रतिशत दर्ज की गयी थी।
चालू वित्त वर्ष में अभी तक बिल्ड अप मुद्रास्फीति की दर 1.17 प्रतिशत रही है जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकडा 3.96 प्रतिशत था।
आंकड़ों में कहा गया है कि पिछले छह महीनों के दौरान प्याज के दामों में असाधारण 122. 40 प्रतिशत की तेजी आयी है। इसके उलट कच्चे तेल 21.41 प्रतिशत, रसोई गैस 27.51 प्रतिशत और आलू में 22.50 प्रतिशत की गिरावट हुई है।

सितंबर 2019 के दौरान खाद्य वस्तु समूह के फल एवं सब्जियां और सूअर के मांस के दाम तीन तीन प्रतिशत घटे हैं। ज्वार,बाजरा और अरहर दो प्रतिशत, समुद्री मछली, चाय और बकरे का मांस एक प्रतिशत नीचे आये हैं। इसी समूह में मसाले चार प्रतिशत, पान पत्ता एवं मटर तीन प्रतिशत, अंडा एवं रागी दो प्रतिशत तथा राजमा, गेंहू, जौ, उडद, मछली, गाय एवं भैंस का मांस, मूंग, मुगेर्ं का मांस, धान और मक्का के दाम एक प्रतिशत चढे हैं।

गैर खाद्य वस्तु समूह में फूल 25 प्रतिशत, कच्ची रबड़ आठ प्रतिशत, कच्ची खाल चार प्रतिशत, कच्ची कपास तीन प्रतिशत, चारा दो प्रतिशत तथा नारियल रेशा और सूरजमुखी के दाम एक प्रतिशत गिरावट में रहे हैं। इसी समूह में कच्ची सिल्क आठ प्रतिशत, सोयाबीन पांच प्रतिशत, तिल तीन प्रतिशत, कच्चा जूट दो प्रतिशत और सरसों एक प्रतिशत महंगे हुए हैं।

सितंबर 2019 में कच्चे तेल तीन प्रतिशत घटा है जबकि रसोई गैस तीन प्रतिशत और केरोसीन एक प्रतिशत चढ़े हैं।

विनिर्मित खाद्य समूह में मैकरोनी और नूडल प्पांच प्रतिशत महंगे हुए हैं। सूखी मछली और नारियल तेल तीन प्रतिशत और काफी , वनस्पति, चावल छिलका तेल, मक्खन और घी दो प्रतिशत की तेजी में रहे हैं। पशु आहार, मसाले, पाम ऑयल, गुड, चावल, चीनी, सूजी, गेंहू छिलका, सरसों तेल और मैदा के दाम एक प्रतिशत चढ़े हैं। हालांकि अरंडी तेल तीन प्रतिशत, कोकोआ दो प्रतिशत, तैयार खाद्य उत्पाद, बिनौला तेल, मूंगफली तेल, आइसक्रीम और बेसन के दाम एक प्रतिशत गिरे हैं।

छत्तीसगढ़ : प्रदेश का मॉडल टाउन बनेगा रायगढ़, चुनाव के बाद लगेंगे सिम युक्त स्मार्ट मीटर…

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स्मार्ट मीटरिंग में रायगढ़ पूरे छत्तीसगढ़ का मॉडल टाउन बनेगा। रायगढ़ प्रदेश का पहला ऐसा शहर होगा, जहां सर्वर कनेक्टेड सिम युक्त स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। इसकी रीडिंग महीने के आखिर में सर्वर पर लोड हो जाएगी। जिसके चलते 42 हजार उपभोक्ताओं की बिलिंग एक दिन में की जा सकेगी। खास बात यह है कि बिजली विभाग को हर माह 13 लाख रुपए की बचत होगी। 

टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई, नवंबर में इंजीनयरों की दिल्ली में होगी ट्रेनिंग

  1. बिजली कंपनी ने रायगढ़ टाउन के लिए आरएपीडीआरपी योजना अंतर्गत राज्य स्तर पर टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। यह काम निकाय चुनाव के तुरंत बाद शहर के दोनों जोन में शुरू किया जाएगा। नंवबर में स्थानीय इंजीनियर ट्रेनिंग के लिए दिल्ली जाएंगे। चीफ इंजीनियर कार्यालय के अफसरों ने बताया कि कंपनी ने स्मार्ट मीटरिंग के लिए सभी जिलों से उपभोक्ताओं की संख्या, लाइन लॉस से संबंधित डेटा समेत कई जरूरी जानकारियां मांगी थीं। 
  2. जांच के बाद कंपनी ने रायगढ़ टाउन के डेटा और डॉक्यूमेंटेशन बेहतर होने और पूर्व में दी गई सभी कार्यों को समय से पहले पूरा करने की गति को ध्यान में रखते हुए यह काम रायगढ़ शहर से शुरू करने की योजना बनाई है। शहर में सफल होने के बाद स्मार्ट मीटर दूसरे जिलों में लगाए जाएंगे। इसके पूरी तरह से ऑटोमैटिक होने के कारण उपभोक्ताओं को मीटर की रीडिंग में होने वाली गड़बड़ी से भी छुटकारा मिल जाएगा। 
  3. अभी एक उपभोक्ता की रीडिंग पर 5 रुपए खर्च कंपनी वर्तमान में 5 रुपए प्रति उपभोक्ता के हिसाब से मीटर रीडिंग के लिए खर्च कर रही है। संसाधन उपलब्ध कराने वाला ठेकेदार को सवा रुपए और पौने चार रुपए रीडिंग लेने वाले मीटर रीडर को मिलते हैं। सर्किल में पौने तीन लाख कनेक्शनों की रीडिंग पर करीब 13 लाख रुपए हर महीने खर्च हो रहे हैँ। स्मार्ट मीटर लगने के बाद विभाग इन पैसों से वितरण व्यवस्था बेहतर बनाने मेंटेनेंस स्टाफ की संख्या बढ़ा सकती है। 
  4. कंपनी और उपभोक्ताओं को होंगे यह फायदें 
    1. मैनुअल रीडिंग बंद – उपभोक्ता और कंपनी दोनों के लिए हर महीने रीडिंग का झंझट खत्म हो जाएगा। मैन पावर का इस्तेमाल विभाग दूसरे कामों में कर सकेगा। 
    2. बिजली की बचत- मीटर लगाते समय विभाग खपत के अनुरूप लोड की सेटिंग कर देगा, बिजली का अधिक इस्तेमाल करने पर सप्लाई ऑटोमेटिक बंद हो जाएगी। 
    3. एडवांस वर्क- इस मीटर से विभाग कंज्यूमरों के घर व आसपास के मोहल्लों का लोड के अनुरूप लोगों की डिमांड से पहले अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाए जा सकेंगे। 
    4. थमेगी चोरी – रीडिंग में हेराफेरी, बिजली की चोरी और लोड कम बता कर अधिक बिजली इस्तेमाल करने वालों की पहचान विभाग आसानी से कर सकेगा। 
    5. बेहतर सप्लाई- मीटर सर्वर से कनेक्टेड होने के कारण सप्लाई बंद होने की शिकायत पर संबंधित क्षेत्र में फाल्ट ढूंढने में आसानी होगी, शिकायतों का निराकरण में तेजी आएगी। 
  5. इलेक्ट्रॉनिक मीटर में 36 करोड़ से ज्यादा खर्च बिजली कंपनी ने साल 2004 के बाद जिले के पौने तीन लाख कनेक्शनों में इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीटर लगाए हैं। इस काम को पूरा करने में विभाग को 7 साल से अधिक समय लग गया। विभाग ने सर्किल के 2.40 लाख सिंगल फेज में एक हजार प्रति कनेक्शन के हिसाब से 24 करोड़ रुपए, तो करीब 40 हजार थ्री फेज और पंप के लिए प्रति कनेक्शन तीन हजार के हिसाब से 12 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। 
  6. डाक्यूमेंट्स परफेक्ट हैं कंपनी स्मार्ट मीटरिंग का काम सबसे पहले रायगढ़ टाउन से शुरू कराने की योजना है, क्योंकि हमारे डेटा और डाक्यूमेंट्स दूसरे जिलों की तुलना में बेहतर हैं। टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो गई है, इसके लगने से कंपनी और उपभोक्ता को दोनों फायदे में रहेंगे। शिकायत पर संबंधित क्षेत्र में फाल्ट ढूंढने में आसानी होगी, शिकायतों का निराकरण में तेजी आएगी।

लंबा गिफ्ट आइटम डिजाइन कर कॉलेज छात्रा ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह बनाई…

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 कर्नाटक के मंगलुरु की अपेक्षा कोट्टारी को सबसे लंबा गिफ्ट आइटम डिजाइन करने के लिए इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह मिली है। गिफ्ट का साइज  25×25 सेमी है। इसकी कुल लंबाई 10 मीटर (1000 सेंटीमीटर) है। इस पर देश के सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों की महान हस्तियों और स्वतंत्रता सेनानियों के नामों की जानकारी उनकी फोटो के साथ दी गई है।

अपेक्षा ने कहा है कि वह गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के लिए भी आवेदन करेंगी।  इस यूनिक गिफ्ट की थीम ‘अतुल्य भारत’ पर आधारित है। अपेक्षा होम ट्यूटर हैं। वह शहर के बेसंत इवनिंग कॉलेज से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं। अब तक 35 तरह के अनोखे गिफ्ट आइटम तैयार कर चुकी हैं। अपेक्षा ने बताया, “मैं मंगलुरु से हूं। बचपन से ही मेरा रुझान क्राफ्ट आइटम को बनाने में रहा है। मैं अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए उनके जन्मदिन और सालगिरह पर तोहफे बनाती हूं। हाल ही में मैंने यूट्यूब पर तोहफे बनाने के लिए वीडियो देखना शुरू किया है। इस तरह अनोखे गिफ्ट बॉक्स बनाने का विश्व रिकॉर्ड बन गया।”

2002 में शुरू हुआ था अतुल्य भारत अभियान

भारतीय पर्यटन विभाग ने सितंबर 2002 में अतुल्य भारत अभियान शुरू किया था। इसका मकसद देश में पर्यटन को बढ़ावा देना था। इसके तहत हिमालय, वन्य जीव, योग और आयुर्वेद पर अंतर्राष्ट्रीय समूह का ध्यान खींचा गया था। 

75 की उम्र में आरंगेत्रम की प्रस्तुति देने वाली पहली महिला, 68 की थीं तब सीखना शुरू किया…

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सूरत की 75 साल की बकुलाबेन पटेल ने शनिवार को आरंगेत्रम की शानदार प्रस्तुति दी। इस उम्र में आरंगेत्रम की प्रस्तुति देने वाली वे देश की पहली महिला बन गई हैं। आरंगेत्रम भरतनाट्यम नृत्य का एक हिस्सा है। इसमें 90 मिनट तक भरतनाट्यम की 9 कलाओं की प्रस्तुति दी जाती है। बकुलाबेन पेशेवर एथलीट भी हैं। 58 वर्ष की उम्र में स्विमिंग के साथ स्पोर्ट्स जगत में शुरुआत की। 75 वर्ष की होने तक 185 सर्टिफिकेट-ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और मेडल जीत चुकी हैं।

हार नहीं मानी : बकुलाबेन ने 68 की उम्र में आरंगेत्रम सीखना शुरू किया। वे बताती हैं, इसे सीखने में सात साल लगते हैं। इसलिए उम्मीद थी कि 75 साल की हाेने तक भरतनाट्यम में विशारद होने का सपना पूरा हाे जाएगा। शुरुआत सीनियर केजी और कक्षा-1 के बच्चों के साथ की। जो स्टेप सामान्य लोग एक दिन में सीख लेते हैं, उसे सीखने में मुझे 15 दिन लगे। मुझे 43 वर्षीय भावनाबेन पटेल ने सिखाया। जब वह खीजतीं, तो बुरा भी लगता था।

परीक्षा में अव्वल आई तो आत्मविश्वास बढ़ा 

कभी-कभी लगा कि मुझसे नहीं होगा। हर साल इसे छोड़ देने का विचार आया। चार साल यूं ही बीत गए। परीक्षा हुई और जब मैं अव्वल आई तो आत्मविश्वास बढ़ गया। इसी के साथ ठान लिया कि अब पीछे नहीं हटना है। पिछले 4 महीनाें से मैं हर दिन 10 घंटे प्रैक्टिस कर रही थीं। 

बैंकों ने बदला लोन देने का तरीका, सैलरी नहीं अब ये स्कोर देखकर देंगे लोन

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अगर आप घर खरीदने के लिए लोन लेना चाहते हैं तो आपके लिए ये खबर महत्वपूर्ण है. क्योंकि कुछ सरकारी बैंकों ने लोन देने के तरीके में बदलाव किया है. बैंक अब लोन के लिए सैलरी की जगह क्रेडिट स्कोर को तवज्जो दे रहे हैं. बैंक नए होम लोन के लिए क्रेडिट स्कोर का उपयोग करेंगे. अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है तो आपको होम लोन कम ब्याज दर पर मिलेगा. वहीं अगर आपका क्रेडिट स्कोर खराब है तो आपको मिलने वाले होम लोन का ब्याज दर भी ज्यादा होगा.

इन तीन बैंकों ने की शुरुआत
तीन सरकारी बैंकों बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) और सिंडिकेट बैंक (Syndicate Bank) ने अपने ग्राहकों को क्रेडिट स्कोर (Credit Score) के आधार पर लोन देना शुरू किया है. इन तीनो बैंकों ने क्रेडिट इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ऑफ इंडिया (CIBIL) से मिले क्रेडिट स्कोर स्लैब (Credit Score Slab) के आधार पर लोन देंगे.

1 फीसदी सस्ता मिलेगा लोन

नए एक्सटर्नल बेंचमार्किंग व्यवस्था के तहत, अब बैंक ऑफ बड़ौदा नया लोन जारी करने के लिए सिबिल स्कोर (CIBIL Score) की मदद लेगा. अगर किसी ग्राहक का कुल क्रे​डिट स्कोर 900 में से 760 व इससे अधिक है तो उन्हें 8.1 फीसदी की ब्याज दर से लोन मिलेगा. 725 से 759 के बीच क्रेडिट स्कोर रहने पर लोन के लिए ब्याज दर 8.35 फीसदी तय की गई है. वहीं, 675 से 724 के बीच क्रेडिट स्कोर रहने पर 9.1 फीसदी का ब्याज देना होगा. इस प्रकार देखें तो न्यूनतम और अधिकतम ब्याज दरों में 1 फीसदी का अंतर होगा. ऐसे में यदि किसी ग्राहक का क्रेडि​ट स्कोर बेहतर है तो वे 1 फीसदी कम दर पर लोन ले सकता है.

बेहद जरूरी हो जाएगा क्रेडिट स्कोर को मेंटेन करना

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने सभी बैंकों को इस बात की अनुमति दे दी है कि एक्सटर्नल बेंचमार्क के आधार पर ब्याज दर तय करने के लिए क्रेडिट रिस्क प्रीमियम चार्ज करें. RBI के इस अनुमति के बाद अब लोन के लिए क्रेडिट स्कोर की जरूरत और बढ़ गई है. 1 अक्टूबर से ही बैंकों ने नए फ्लोटिंग रेट पर रिटेल लोन तय करने के लिए एक्सटर्नल बेंचमार्क अपना लिया है. लोन की पूरी अवधि के दौरान क्रेडिट स्कोर का महत्व उतना ही होगा, जितना की लोन के अप्रुवल के वक्त होगा.

क्रेडिट स्कोर गिरने पर बढ़ जाएगा प्रीमियम
अगर लोन लेने वाले का क्रेडिट स्कोर 760 से नीचे चला जाता है, तो ब्याज ज्यादा देना होगा. अगर किसी उधारकर्ता का सिबिल स्कोर 50 अंक से ज्यादा गिर जाता है तो सिंडिकेट बैंक ने प्रीमियम को बढ़ाने का फैसला किया है.

700 से कम स्कोर वाले को 0.10% अधिक देना होगा ब्याज
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 700 से नीचे के क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों के लिए 10 बेसिस प्वाइंट्स अधिक ब्याज लेगा. बता दें कि सिबिल स्कोर 300 से 900 तक होता है, जिसमें 900 हाई लेवल का स्कोर माना जाता है और 300 सबसे कम माना जाता है.

क्या होता है क्रेडिट स्कोर?
क्रेडिट स्कोर को आम बोलचाल की भाषा में सिबिल स्कोर भी कहा जाता है. ग्राहक का सिबिल स्कोर क्रेडिट सूचना रिपोर्ट (सीआईआर) का 3-अंकीय संख्यात्मक सारांश है, जो कि पिछले क्रेडिट व्यवहार और पुनर्भुगतान इतिहास पर आधारित होता है. इसकी रेंज 300 से 900 तक होती है. स्कोर जितना अधिक होगा, बेहतर ऋण स्वीकृति की संभावना है. ज्यादातर बैंक ऋण को मंजूरी देने से पहले उपभोक्ता के सिबिल स्कोर और रिपोर्ट की जांच करते हैं.

दोस्तों के सामने 12 साल के बच्चे को पानी में खींचकर ले गया मगरमच्छ

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राजस्थान के सवाई माधोपुर में चंबल नदी में नहाने गए एक 12 वर्षीय लड़के को मगरमच्छ ने पानी में खींच लिया. सर्च ऑपरेशन चलाने के बाद भी बच्चे का अभी तक कोई पता नहीं चला है. वहीं, इस घटना से घर वालों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है. कहा जा रहा है कि बच्चा अपने तीन दोस्तों के साथ नदी में नहाने गया था. जब मगरमच्छ बच्चे को खींच कर गहरे पानी में ले जाने लगा तो उसके दोस्तों ने बचाने की भरपूर कोशिश की पर उन लोगों का जलीय प्राणी के सामने कुछ नहीं चला.

जानकारी के मुताबिक, मामला सवाई माधोपुर स्थित खंडार उपखंड क्षेत्र का है. खटकड़ निवासी 12 वर्षीय खुशीराम अपने तीन दोस्तों के साथ चम्बल किनारे बने घाट पर नहाने गया था. उसके तीन दोस्त अपनी मस्ती में चम्बल में नहा रहे थे, तभी एक मगरमच्छ ने खुशीराम का पैर पकड़ लिया. मगरमच्छ ने जैसे ही खुशीराम का पैर अपने मजबूत जबड़ों में जकड़ा वैसे ही खुशीराम जोर-जोर से चिल्लाने लगा. तभी साथ में नहा रहे तीनों दोस्तों ने खुशीराम का हाथ पकड़ लिया और पूरी ताकत के साथ उसे बाहर खींचना शुरू कर दिया. मगर तीनों बच्चे मगरमच्छ की मजबूत पकड़ से खुशीराम को नहीं छुड़ा पाए. खुशीराम को बचाने के लिए तीनों बच्चों ने करीब 10 मिनट तक अपनी पूरी ताकत के साथ उसे मगरमच्छ के चंगुल से छुड़ाकर बाहर खींचने का प्रयास किया, लेकिन तीनों चाहकर भी मगरमच्छ की मजबूत पकड़ के आगे कुछ नहीं कर सके. फिर, मगरमच्छ खुशीराम को गहरे पानी में लेकर चला गया. इसके बाद तीनों बच्चों ने गांव में जाकर ग्रामीणों को सारी घटना बताई.

खुशीराम की तलाश शुरू की गई
घटना की जानकारी मिलने के साथ ही खुशीराम के परिजन सहित सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंचे और चम्बल में खुशीराम की तलाश शुरू की गई. इस दौरान सूचना मिलने पर खंडार थाना पुलिस व एसडीएम भी मौके पर पहुंचे गए. इसके बाद एनडीआरएफ टीम बुलाई गई और चम्बल में सर्च ऑपरेशन चलाया गया. कई घंटों तक सर्च ऑपरेशन चलाने के बाद भी खुशीराम के शव का कहीं कोई पता नहीं चला. रात होने की वजह से फिलहाल सर्च ऑपरेशन रोक दिया गया. आज एक बार फिर सर्च ऑपरेशन चलाया जाएगा. वहीं, बालक खुशीराम के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है और गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है.

VIDEO : रामलीला में दिखीं क्यूट सीता मां, ड्रम बीट्स पर नाचते हुए जीता सबका दिल

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 त्योहार का सीजन चल रहा है. ऐसे में स्कूल-कॉलेजों में पौराणिक कथाओं पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. ज्यादातर रामलीला में मां सीता को शांत और सौम्य दिखाया गया है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में नन्ही मां सीता ड्रम बीट्स पर नाच रही हैं. लोग इस वीडियो को खूब पसंद कर रहे हैं.

ये वीडियो किस कार्यक्रम का है, फिलहाल इसका पता तो नहीं चल पाया है. ये वीडियो शायद किसी प्ले या कविता पाठ का हिस्सा है. इसमें दिख रही नन्ही सीता मां अपनी क्यूटनेस से सबका मन मोह रही हैं. वीडियो में दिख रहा कि राम लक्ष्मण और मां सीता के वेश में तीन स्कूली बच्चे स्टेज पर खड़े हैं. जहां राम-लक्ष्मण थोड़े गंभीर और शांत नज़र आ रहे हैं, वहीं सबसे बेफिक्र मां सीता ड्रम बीट्स पर नाच रही हैं.

बड़ी खबर : गरीब सवर्णों को सरकारी नौकरी में नहीं मिलेगी आयु सीमा की छूट, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

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सामान्य वर्ग के गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के बाद, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की तरह अधिकतम आयु सीमा में भी छूट देने संबंधी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. याचिका खारिज करने के साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून के अनुसार ईडब्ल्यूएस (EWS) उम्मीदवारों के लिए केवल 10 प्रतिशत कोटा आरक्षित है. उन्हें उम्र में छूट नहीं दी जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उन उम्मीदवारों को झटका लगा है जो काफी समय से सरकारी नौकरी में उम्र में छूट दिए जाने की मांग कर रहे थे.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की नौकरियों में सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए 10 फीसदी आरक्षण एक फरवरी से लागू कर दिया गया है. केंद्र सरकार ने इसको लेकर पहले ही आदेश जारी कर दिया था. केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम के जरिये संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन किया गया है. इसके जरिये एक प्रावधान जोड़ा गया है, जो सरकार को ‘नागरिकों के आर्थिक रूप से कमजोर किसी तबके की तरक्की के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति देता है.’

अभी कौन होता है आरक्षण का हकदार

आरक्षण पाने के लिए सरकार ने कुछ मानदंड तय किए हैं. इन मानदंड को फॉलो करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण का लाभ मिल पाएगा. ये मानदंड हैं-
>> सालाना आय 8 लाख रुपये से कम
>> खेती योग्य जमीन 5 हेक्टेयर से कम हो
>> आवासीय घर 1000 स्क्वॉयर फुट से कम
>> नगरपालिका द्वारा नोटिफाइड आवासीय प्लॉट 109 यार्ड से कम
>> नगरपालिका एरिया में नॉन नोटिफाइड आवासीय प्लॉट 209 यार्ड से कम होना चाहिए.

Karva Chauth 2019 : करवा चौथ पर गलती से भी न करें ये काम, माने गए हैं अशुभ!

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विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं. इस बार करवा चौथ 17 अक्टूबर गुरुवार के दिन पड़ रहा है. करवा चौथ का व्रत पति पत्नी के लिए प्रेम और विश्वास की सौगात होता है. इस दिन पत्नी सूर्योदय से पहले सरगी खाकर पूरे दिन भर निर्जला व्रत रहती हैं. इसके बाद शाम के समय करवा माता की पूजा के बाद चांद को अर्घ्य देकर और चलनी से चांद देखने के बाद पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं. माना जाता है कि इस व्रत में कई सावधानियां भी बरतनी पड़ती हैं. आइए जानते हैं कि करवा चौथ पर किन गलतियों को करने से बचना चाहिए

करवा चौथ पर ना करें इनका इस्तेमाल:
1. सुहाग सामग्री जैसे, चूड़ी, लहठी, ब‌िंदी, स‌िंदूर को कचड़े में नहीं फेंके। अगर पहनते समय चूड़ी टूट जाए तो उसे न‌िर्माल के साथ पूजा स्‍थान पर रख दें और अपने सुहाग की लंबी उम्र के ल‌िए कामना करें।

2. करवा चौथ के दिन किसी भी धार वाली चीज जैसे कि चाकू, सुई, कैंची का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ऐसा करना अशुभ फलदायक माना जाता है.

3. करवा चौथ के दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को काला और सफ़ेद रंग का कपड़ा पहनने से बचना चाहिए. हिंदू धर्म में धार्मिक और शुभ आयोजन के लिए इन रंगों को शुभ नहीं माना गया है.

4. करवा चौथ की शुरुआत सरगी खाकर ही करें. सरगी खाने पीने और सुहाग के सामान से बनाकर सास पानी बहू को आशीर्वाद के रूप में देती है. इसका मतलब होता है ‘हमेशा सुखी और सुहागिन रहो.’

5. करवा चौथ के दिन सुहाग की सामग्री का विशेष महत्व होता है. इसलिए अगर गलती से भी इस दिन सुहाग की कोई चीज (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी) गिर जाती है या टूट जाती है तो उसे फेंकना नहीं चाहिए. बल्कि पूजा के निर्माल (प्रवाहित किए जाने वाले सामान) के साथ रख देनी चाहिए.