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क्या है ई-फास्टिंग, जिसमें खाना-पीना नहीं बल्कि कुछ और मना है

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अमेरिकी महिला एलाना मगडैन इन दिनों सोशल मीडिया की सुर्खियां बनी हुई है. इस महिला ने लगभग 10 महीनों से स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं किया है और 2 महीने पूरे होते ही ये महिला एक प्रतियोगिता जीत जाएंगी. एक अमेरिकी कंपनी द्वारा आयोजित प्रतियोगिता Scroll Free for a Year में एलाना ने हिस्सा लिया और स्मार्टफोन छोड़ दिया. प्रतियोगिता जीतने पर उन्हें 71 लाख रुपयों का पुरस्कार मिलेगा, हालांकि इससे पहले उनका लाई डिटेक्टर टेस्ट भी किया जाएगा. बताया जाता है प्रतियोगिता की चुनौती स्वीकार करते ही एलाना से उनका आईफोन ले लिया गया और बदले में उन्हें बेसिक फोन दिया गया. 20 साल की एलाना ने इसके बाद से अपने तो क्या किसी के भी स्मार्टफोन का उपयोग नहीं किया.

 भारत में लगभग 323 मिलियन लोग किसी न किसी तरह से इंटरनेट का रोजाना इस्तेमाल करते हैं. ये देश की जनसंख्या का लगभग 25 प्रतिशत है. रिसर्च करने वाली संस्था Statista Research Department के ये आंकड़े साल 2018 के हैं, जो साथ में ये इशारा भी करते हैं कि ये प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है. साल 2011 में इंटरनेट यूजर्स 10 प्रतिशत थे.

भारत में लगभग 323 मिलियन लोग किसी न किसी तरह से इंटरनेट का रोजाना इस्तेमाल करते हैं. ये देश की जनसंख्या का लगभग 25 प्रतिशत है. रिसर्च करने वाली संस्था Statista Research Department के ये आंकड़े साल 2018 के हैं, जो साथ में ये इशारा भी करते हैं कि ये प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है. साल 2011 में इंटरनेट यूजर्स 10 प्रतिशत थे.

 इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने की वजह से एक तरफ कई फायदे हुए तो दूसरी ओर इसके नुकसान भी कम नहीं हैं. इन नुकसानों को Internet addiction disorder (IAD) के नाम से जाना जाता है. इंटरनेट के बहुत ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग और शरीर के कई हिस्सों पर खराब असर होता है. खासकर मानसिक स्वास्थ्य पर इससे बहुत बुरी तरह से प्रभावित होता है.द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार मानसिक तकलीफों जैसे डिप्रेशन, अनिद्रा, पैनिक अटैक जैसी समस्याओं से जुड़े लोगों में ज्यादातर ऐसे लोग हैं, जो ऑनलाइन काफी ज्यादा वक्त बिताते हैं. इसे online overload भी कहते हैं.

इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने की वजह से एक तरफ कई फायदे हुए तो दूसरी ओर इसके नुकसान भी कम नहीं हैं. इन नुकसानों को Internet addiction disorder (IAD) के नाम से जाना जाता है. इंटरनेट के बहुत ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग और शरीर के कई हिस्सों पर खराब असर होता है. खासकर मानसिक स्वास्थ्य पर इससे बहुत बुरी तरह से प्रभावित होता है.द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार मानसिक तकलीफों जैसे डिप्रेशन, अनिद्रा, पैनिक अटैक जैसी समस्याओं से जुड़े लोगों में ज्यादातर ऐसे लोग हैं, जो ऑनलाइन काफी ज्यादा वक्त बिताते हैं. इसे online overload भी कहते हैं.

 अगर आप भी बार-बार WhatsApp चेक करते हैं, फेसबुक खंगालते हैं या बिना मतलब दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जाते रहते हैं तो आप भी बीमारी की जद में हैं. यही वक्त है ई-फास्टिंग (E-Fasting) का. शरीर की आंतों को आराम देने के लिए जैसे हम उपवास करते हैं, उसी तरह से इंटरनेट से दूरी ई-फास्टिंग कहला सकती है.

अगर आप भी बार-बार WhatsApp चेक करते हैं, फेसबुक खंगालते हैं या बिना मतलब दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जाते रहते हैं तो आप भी बीमारी की जद में हैं. यही वक्त है ई-फास्टिंग (E-Fasting) का. शरीर की आंतों को आराम देने के लिए जैसे हम उपवास करते हैं, उसी तरह से इंटरनेट से दूरी ई-फास्टिंग कहला सकती है.

 Electronic fasting या ई फास्टिंग में किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और सर्विस से दूर रहना है जैसे स्मार्टफोन और सोशल मीडिया. चूंकि इंटरनेट से पूरी तरह से दूरी मुमकिन नहीं इसलिए हफ्ते में एक दिन या रोज कुछ घंटों के लिए (सोने के वक्त के अलावा) ई फास्टिंग की जा सकती है.

Electronic fasting या ई फास्टिंग में किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और सर्विस से दूर रहना है जैसे स्मार्टफोन और सोशल मीडिया. चूंकि इंटरनेट से पूरी तरह से दूरी मुमकिन नहीं इसलिए हफ्ते में एक दिन या रोज कुछ घंटों के लिए (सोने के वक्त के अलावा) ई फास्टिंग की जा सकती है.

 हफ्ते में एक दिन तय करें, जिसमें आप सोशल मीडिया से एकदम दूर रहेंगे. शुरुआत में इससे एंजाइटी या बेचैनी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. यही बेचैनी संकेत है कि आपको इंटरनेट एडिक्शन है. Centre for Internet and Technology Addiction (CITA) की मदद से आप चेक कर सकते हैं कि आपका इंटरनेट एडिक्शन कितना बढ़ा-चढ़ा है. इसके लिए virtual internet addiction test होता है.

हफ्ते में एक दिन तय करें, जिसमें आप सोशल मीडिया से एकदम दूर रहेंगे. शुरुआत में इससे एंजाइटी या बेचैनी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. यही बेचैनी संकेत है कि आपको इंटरनेट एडिक्शन है. Centre for Internet and Technology Addiction (CITA) की मदद से आप चेक कर सकते हैं कि आपका इंटरनेट एडिक्शन कितना बढ़ा-चढ़ा है. इसके लिए virtual internet addiction test होता है.

 सबसे पहले तो अपने मोबाइल से गैरजरूरी या कम काम आने वाले एप हटा दें. इससे मोबाइल का बोझ कम हो जाएगा. साथ ही साथ एप्स के नोटिफिकेशन बंद कर दें. अगर मोबाइल पर गेम खेलने का शौक है तो इसे तुरंत रोक दें. अगर खेलना ही हो तो वक्त तय करें और उसी वक्त पर खेलें. स्मार्टफोन पर ब्राउजिंग टाइम पर नियंत्रण के लिए भी कई एप आते हैं. इन्हें लगा लेने पर आप अपनी लिमिट तय कर सकते हैं और टेक्नोलॉजी ही इसमें आपकी मदद करेगी.

सबसे पहले तो अपने मोबाइल से गैरजरूरी या कम काम आने वाले एप हटा दें. इससे मोबाइल का बोझ कम हो जाएगा. साथ ही साथ एप्स के नोटिफिकेशन बंद कर दें. अगर मोबाइल पर गेम खेलने का शौक है तो इसे तुरंत रोक दें. अगर खेलना ही हो तो वक्त तय करें और उसी वक्त पर खेलें. स्मार्टफोन पर ब्राउजिंग टाइम पर नियंत्रण के लिए भी कई एप आते हैं. इन्हें लगा लेने पर आप अपनी लिमिट तय कर सकते हैं और टेक्नोलॉजी ही इसमें आपकी मदद करेगी.

 घर में कुछ जगहें तय कर सकते हैं जो नो इंटरनेट जोन (no internet zone) हों. जैसे कि बेडरूम, लिविंग रूम या फिर खाने की टेबल. नो इंटरनेट जोन का नो स्मोकिंग जोन की तरह ही सख्ती से पालन करें. ये नियम घर के हरेक सदस्य के लिए हो. नियम तोड़ने पर किसी तरह का फाइन भी तय किया जा सकता है.

घर में कुछ जगहें तय कर सकते हैं जो नो इंटरनेट जोन (no internet zone) हों. जैसे कि बेडरूम, लिविंग रूम या फिर खाने की टेबल. नो इंटरनेट जोन का नो स्मोकिंग जोन की तरह ही सख्ती से पालन करें. ये नियम घर के हरेक सदस्य के लिए हो. नियम तोड़ने पर किसी तरह का फाइन भी तय किया जा सकता है.

आम आदमी की बढ़ी मुश्किलें, टमाटर-प्याज के बाद अब इस सब्जी ने तोड़ा महंगाई का रिकॉर्ड

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बढ़ती महंगाई का असर सबसे ज्यादा सब्जियों पर दिख रहा है. सब्जियों के रेट लगातार महंगे होते जा रहे हैं. प्याज और टमाटर के दाम बढ़ने के बाद अब सरकार के लिए लहसुन गले की फांस बनने जा रहा है. वजह ये है कि लहसुन के दाम आसमान छूने लगे हैं. देश की राजधानी दिल्ली में लहसुन के रिटेल दाम 300 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं. पिछले हफ्ते से लहसुन के दामों में तेजी आई है. होलसेल मार्केट में दाम में कोई बदलाव नहीं आया है, लेकिन रिटेल दामों में आग लगी हुई है.

लहसुन का प्रोडक्शन पिछले साल के मुकाबले 76% अधिक 
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2018-19 में 28.36 लाख टन लहसुन का प्रोडक्शन हुआ, जबकि पिछले साल 16.11 लाख टन प्रोडक्शन हुआ था. इस तरह देश में इस साल लहसुन का प्रोडक्शन पिछले साल के मुकाबले 76 फीसदी अधिक हुआ है. इसके बावजूद लहसुन के दाम चीते की रफ्तार से भाग रहे हैं. लहसुन के दाम अगर इसी तरह आसमान छूते रहे, तो आम लोगों के खाने के जायके में असर पड़ सकता है.

भारी बारिश के चलते लहसुन का स्टॉक खराब
बाजार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि भारी बारिश के चलते लहसुन का बहुत स्टॉक खराब हो गया है. जिसकी वजह से सही तरीके से सप्लाई नहीं हो पा रही है. इसीलिए लहसुन के दाम आसमान छू रहे हैं. आपको बता दें कि दो हफ्ते पहले राजधानी में लहसुन 150-200 रुपये प्रति किलो बिक रहा था. मौजूदा समय में दिल्ली के मदर डेयरी बूथ पर 300 रुपये किलो लहसुन बिक रहा है. जबकि दिल्ली-NCR में सब्जी की दुकानों में लहसुन 250-300 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. इसके साथ ही लहसुन के बड़े उत्पादक राज्य जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान में 200 रुपये प्रति किलो के आसपास हैं.

21,700 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा लहसुन


होलसेल मार्केट में नजर दौड़ाएं तो मध्य प्रदेश के नीमच में शनिवार को विभिन्न क्वालिटी के लहसुन का भाव 8,000-17000 रुपये क्विंटल था. हालांकि स्पेशल क्वालिटी का लहसुन 21,700 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका. कारोबारियों का मानना है कि सप्लाई कम होने से दाम में और बढ़ोतरी हो सकती है. दुनिया के लहसुन उत्पादक देशों में भारत प्रमुख रूप से गिना जाता है, जबकि जबकि चीन दुनिया का सबसे बड़ा लहसुन उत्पादक देश है.

छत्तीसगढ़ : डॉ. रमन सिंह पर सीएम भूपेश बघेल ने ली चुटकी, स्टार प्रचारकों की लिस्ट से बाहर होने की बताई ये वजह

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को बड़ा पॉलिटिकल झटका लगा है. दरअसल, रविवार को महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है. इसमें छत्तीसगढ़ से तीन बार के सीएम रहे रमन सिंह का ही नाम गायब था. जबकि कांग्रेस की सूची में सीएम भूपेश बघेल को विशेष रूप से जगह मिली है. वे दोनों राज्यों में प्रचार के लिए जा सकते हैं. लेकिन बीजेपी द्वारा जारी की गई 40 लोगों की सूची में छत्तीसगढ़ से केवल एक ही नाम सरोज पाण्डेय का शामिल किया गया. डॉ.रमन सिंह का नाम हटाने से सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गयी है. बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों ही राज्यों में पार्टी ने उन्हें प्रचार के लिए बुलाया था. महाराष्ट्र छत्तीसगढ़ की सीमा से जुड़ा हुआ है. छत्तीसगढ़ के हजारों लोग विदर्भ इलाके में रहते हैं और यही वजह है कि यहां के नेताओं को विशेष रूप से प्रचार प्रसार के लिए बुलाया जाता है. ऐसे में कांग्रेस (Congress) को रमन सिंह पर निशाना साधने का एक और मौका मिल गया है.

नागपुर रवाना हुए सीएम भूपेश बघेल

महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सोमवार को रवाना हुए. नागपुर में सीएम भूपेश तीन प्रमुख चुनावी सभाएं करेंगे. इसके अलावा हरियाणा के भी चुनाव में सीएम भूपेश बघेल कांग्रेस के स्टार प्रचारक हैं. नागपुर रवाना होने से पहले एयरपोर्ट में पत्रकारों से चर्चा करते हुए सीएम ने कहा कि तीन दिन का चुनाव प्रचार कार्यक्रम होगा. इसके बाद उत्तर प्रदेश और फिर हरियाणा के लिए चुनाव प्रचार का कार्यक्रम तय किया गया है.

रमन सिंह-raman singh
वहीं इस मसले पर डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जहां उपयोगिता होगी, प्रचार करने वहां जाएंगे. (फाइल फोटो

डॉ. रमन सिंह पर किया कटाक्ष

वहीं बीजेपी के स्टार प्रचारकों की सूची में डॉ. रमन सिंह का नाम नहीं होने पर सीएम भूपेश बघेल ने कटाक्ष किया है. उन्होंने कहा कि पूरा देश जान चुका है कि गरीबों का चावल किसने चुराया. 36 हजार करोड़ का घोटाला किसने किया. ये सारे घोटाले पूर्व प्रदेश शासन के हैं. इसलिए उन्हें अब स्टार प्रचारकों की लिस्ट में शामिल नहीं किया गया. तो वहीं इस मसले पर डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जहां उपयोगिता होगी, प्रचार करने वहां जाएंगे.

चित्रकोट चुनाव में बीजेपी को लेकर उठाया सवाल


सूबे में कुछ दिनों में  होने वाले चित्रकोट उपचुनाव में बीजेपी की सक्रिया को लेकर सीएम भूपेश बघेल ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने दंतेवाड़ा में पूरी ताकत लगा दी थी. लेकिन वहां पर मुंहकी खाई है. इसलिए पहले से ही भारतीय जनता पार्टी में निराशा दिख रही है. वे दंतेवाड़ा की हार से उबर नहीं पाए हैं.

सरकार टोल प्लाजा पर जल्द लागू करने जा रही है नया नियम, हाइवे पर नहीं लगेगा ट्रैफिक जाम

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मालवाहनों के लिये बिना रुके टोल भुगतान की फास्टैग सुविधा को जीएसटी ई-वे बिल ) प्रणाली से जोड़ने के लिए भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (IHMCL) और माल एवं सेवा कर नेटवर्क (GSTN) समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करेंगे. यह करार ‘एक राष्ट्र एक फास्टैग’ पर आयोजित एक सम्मेलन में किया जाएगा. इस सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग नितिन गडकरी करेंगे.

क्या है FASTag?
फास्टैग (FASTag) फिर से चार्ज होने वाला टैग है, जिसके माध्यम से टोल नाकों पर टोल भुगतान अपने आप कट जाता है और माल वाहन नकद लेनदेन के बिना टोल नाके से गुजर जाता है.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि फास्टैग का जीएसटी ई-वे बिल प्रणाली के साथ एकीकरण के लिए आईएचएमसीएल और जीएसटीएन के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. इस प्रक्रिया के लिए जीएसटी परिषद पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी दे दी चुकी है.

होंगे ये फायदे
बयान में कहा गया है कि ई-वे बिल प्रणाली को फास्टैग से जोड़ने पर राजस्व अधिकारियों को वाहन के आवाजाही के बारे में पता करने में आसानी होगी. साथ ही यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि वाहन वहीं जा रहा हैं, जहां कि जानकारी ट्रांसपोर्टर या कारोबारी ने ई-वे बिल निकालते समय दी थी. इस सम्मेलन में देशभर में एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक समाधान लाने के लिए राज्य सरकार के विभागों, अन्य एजेंसियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.

करण जौहर ने आलिया भट्ट से पूछा सवाल, ‘कभी सोचा था, करीना कपूर ननद बनेगी?’

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रणबीर कपूर और अलिया भट्ट के बीच रिश्‍ते और प्‍यार की खबरें पिछले एक साल से लगातार सुर्खियों में बनी रही हैं. पिछले कुछ समय से तो अक्सर यह जोड़ी साथ ही नजर आती है. ऐसे में जब रविवार को रणबीर कपूर की कजिन करीना कपूर और आलिया भट्ट एक साथ नजर आईं तो करीना से इस रिश्‍ते से जुडे कुछ सवाल हो गए. करीना की बातों से तो यह साफ है कि वह भी आलिया को अपनी भाभी बनाने के लिए काफी ज्‍यादा एक्‍साइटेंड हैं.

रविवार को मुंबई में जियो मामी मूवी मेला विद स्टार्स 2019 इवेंट में आलिया और करीना एक साथ नजर आईं. इन दोनों से काफी मजेदार सवाल पूछते हुए नजर आए निर्देशक फिल्‍म प्रोड्यूसर करण जौहर करण जौहर ने इस मौके का फायदा उठाते हुए आलिया भट्ट से पूछा कि क्‍या उन्‍होंने कभी भी सोचा था कि एक दिन करीना कपूर खान उनकी ननद बनेगी? इस पर करीना बीच में ही बोल उठीं, ‘मैं दुनिया की सबसे खुश लड़की होंगी.’

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हालांकि करण के इस सवाल पर शर्माते हुए आलिया ने जवाब दिया, ‘सच कहूं, तो मैंने ऐसा कभी नहीं सोचा था. वैसे मैं अब भी इसके बारे में क्‍यों सोचूं. जब हम यहां पहुंचे हैं, हम यह ब्रिज पार कर चुके हैं.’ हालांकि आलिया के इस टालमटोल वाले जवाब के बाद करण चुप नहीं रह सके और उन्‍होंने कहा, ‘जब भी ऐसा होगा, करीना और मैं बहुत खुश होंगे और थाली लेकर खड़े होंगे.’

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दरअसल आलिया भट्ट, करीना की काफी बड़ी फैन रही हैं और अक्‍सर इस बात का जिक्र करती रही हैं. आलिया करीना को अपनी प्रेरणा भी मानती हैं. बता दें कि आलिया और रणबीर कपूर के बीच की नजदीकियां फिल्‍म ‘ब्रह्मास्‍त्र’ के सेट से शुरू हुई हैं. दोनों बुल्‍गेरिया में इस फिल्‍म की शूटिंग साथ की है. यह फिल्‍म भी करण जौहर के धर्मा प्रोडक्‍शन में ही बन रही है.

सौरव गांगुली का अगला BCCI अध्यक्ष बनना तय- रिपोर्ट

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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली का भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) का नया अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है. नए अध्यक्ष पद की रेस में बृजेश पटेल भी मजबूत दावेदार हैं. हालांकि पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, गांगुली BCCI के नए अध्यक्ष बनने के बाद सर्वसम्मति के उम्मीदवार के तौर पर उभरे हैं. 47 साल के गांगुली वर्तमान में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के अध्यक्ष हैं. अगर वो बीसीसीआई के नए अध्यक्ष बनते हैं तो उन्हें सितंबर 2020 तक इस पद को संभालना होगा.

खबर है कि 23 अक्टूबर को होने वाली बीसीसीआई की ऐनुअल जनरल मीटिंग में चुनाव कराया जा सकता है. इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह नए सचिव और अरुण धूमल नए कोषाध्यक्ष चुने जा सकते हैं. अरुण धूमल बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर के भाई हैं. वहीं असम के देबाजीत सैकिया संयुक्त सचिव बनाए जा सकते हैं.  उत्‍तर पूर्व से पहली बार किसी व्‍यक्ति को बीसीसीआई में इतना बड़ा पद मिला है.

हफ्तों की लॉबीइंग के बाद बनी सहमति

बीसीसीआई अध्‍यक्ष बनने के लिए गांगुली और पटेल का नाम चल रहा था और हफ्तों की लॉबीइंग और मान-मनौव्‍वल के बाद ये फैसला लिया गया है. मुंबई में रविवार रात को एन श्रीनिवासन, अनुराग ठाकुर और राजीव शुक्ला के साथ राज्यों के प्रतिनिधियों की अनाधिकारिक मीटिंग इस फैसले तक पहुंचा जा सका है.

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बीसीसीआई के चुनाव 23 अक्टूबर को होंगे

‘चुनाव नहीं होंगे’
कल (सोमवार) नामांकन दाखिल किए जाएंगे लेकिन कोई चुनाव नहीं होंगे. आईपीएल चेयरमैन व उपाध्‍यक्ष के पद के लिए बात चल रही है. गांगुली और बृजेश के बीच अध्यक्ष पद के लिए कड़ी टक्कर मानी जा रही थी.

मामा-भांजा WAR: गोविंदा के चलते कृष्‍णा अभिषेक हुए कपिल शर्मा शो से गायब

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कॉमेडियन कृष्‍णा अभिषेक को कपिल शर्मा के कॉमेडी शो में सपना के किरदार में देखा जाता है और उनका यह कैरेक्‍टर काफी हिट भी है. कपिल के शो में कीकू शारदा का बच्चा यादव और कृष्‍णा का सपना वाला किरदार काफी हिट है और वह लगभग इस शो के हर एपिसोड में नजर आते हैं. चाहे सपना बने हों या फिर कृष्‍णा किसी और किरदार में हों, उनके डांस से लेकर उनकी कॉमेडी तक में मामा गोविंदा की झलक दिख ही जाती है.

अक्‍सर अपने जोक्‍स में भी कृष्‍णा मामा का जिक्र करते हुए दिख जाते हैं, लेकिन रविवार को कपिल के शो पर जब कृष्‍णा के मामा गोविंदा अपनी पत्‍नी सुनीता और बेटी टीना आहूजा के साथ पहुंचे तो कृष्‍णा ने इस एपिसोड से खुद को दूर ही रखा.

रविवार के एपिसोड में गोविंदा पत्‍नी सुनीता के साथ अपनी बेटी टीना आहूजा का पहला गाना प्रमोट करने पहुंचे. टीना का यह गाना ‘इसमें तेरा घाटा’ फेम सिंगर गजेंद्र के साथ है और इसे इंटरनेट पर काफी व्‍यूज मिल रहे हैं. लेकिन मामा और मामी से चल रहे अपने झगड़े के चलते कृष्‍णा ने कपिल के इस शो से खुद को दूर ही रखा. हालांकि शो के शुरुआती हिस्‍से में जब कॉमेडी का पार्ट हुआ तो कृष्‍णा सपना के किरदार में नजर आए, लेकिन जब गोविंदा अपनी फैमिली के साथ पहुंचे तो कृष्‍णा शो में नजर नहीं आए.

बता दें कि अपने स्‍टारडम से लेकर अपनी कॉमेडी में अक्‍सर चीची मामा यानी गोविंदा का जिक्र करने वाले कृष्‍णा और उनके मामा-मामी में सब कुछ ठीक नहीं है. कृष्‍णा और उनकी पत्‍नी कश्‍मीरा का कहना है कि गोविंदा और उनका पूरा परिवार उनकी पत्‍नी सुनीता के कहने पर चलता है और अब उनके बीच की दूरी कभी खत्‍म नहीं हो सकती. वहीं हाल ही में एक इंटरव्‍यू में कश्‍मीरा शाह ने अपने जुड़वां बच्‍चों का जिक्र करते हुए कहा था कि मेरे बच्‍चों से वो अभी तक नहीं मिले और शायद वह भविष्‍य में कभी नहीं जानेंगे कि उस परिवार से उनका कभी कोई रिश्‍ता भी था.

गहलोत सरकार राज्य कर्मचारियों को आज दे सकती है Diwali का तोहफा

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राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार सोमवार को प्रदेश के राज्य कर्मचारियों को दिवाली गिफ्ट यानी डीए में वृद्धि की घोषणा कर सकती है. इस घोषणा का सीधा लाभ 8 लाख कर्मचारियों और 4 लाख पेंशनर्स को होगा. यह घोषणा गहलोत कैबिनेट की करीब 4 महीने बाद सोमवार को होने जा रही बैठक के बाद की जा सकती है. दरअसल, वित्त विभाग दिवाली से पहले डीए के तोहफे का प्रस्‍ताव तैयार कर चुका है और अब सीएम गहलोत की हरी झंडी का इंतजार है. मुख्यमंत्री कार्यालय में दोपहर 12:30 बजे प्रस्तावित कैबिनेट बैठक के बाद शाम तक दिवाली (Diwali 2019) से पहले डीए दिए जाने के संबंध में आदेश जारी हो सकते हैं.

4 महीने बाद हो रही है कैबिनेट की बैठक
गहलोत कैबिनेट की बैठक करीब 4 महीने बाद सोमवार को होने जा रही है. इससे पहले लोकसभा चुनाव के बाद 26 जून को बैठक हुई थी. इस लिहाज से इस बैठक में कई अहम मसलों पर सरकार की घोषणा हो सकती है.

कैबिनेट में इन बड़े फैसलों का इंतजार

बैठक में स्थानीय निकाय चुनाव और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के बाद फैसलों पर मुख्यमंत्री की मुहर लगने वाली है.राज्य कर्मचारियों और पेंशनर्स को डीए के साथ स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर भी सरकार बड़ा फैसला ले सकती है. कयास लगाए जा रहे हैं कि इस कैबिनेट की बैठक में गहलोत सरकार स्थानीय निकाय प्रमुख के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने को भी मंजूरी दे सकती है. 

यूडीएच मंत्री करेंगे मंत्रियों से चर्चा
कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री के निकाय प्रमुख के चुनाव पर फैसले से पहले यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल मंत्रियों से इस विषय पर चर्चा करेंगे. मंत्रियों की फीडबैक के बाद धारीवाल कैबिनेट में इसे लेकर प्रस्ताव पेश करेंगे. इस वर्ष के अंत में स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं और उसके बाद आगामी वर्ष की शुरुआत में पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं.

Amazon से मंगाते थे महंगा सामान, फिर डुप्लीकेट माल लौटा कर ले लेते थे रिफंड, कंपनी को लगी करोड़ों की चपत, जाने कैसे

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 ऑनलाइन शॉपिंग जहां एक ओर लोगों को सहूलियत दे रही है, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो ठगी कर इससे करोड़ाें रुपये का हेर फेर कर रहे हैं. हाल ही में ऐसी एक ठगी का खुलासा करते हुए उत्तर प्रदेश की साइबर सेल ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. दोनों आरोपियों ने अमेजन कंपनी को करोड़ाें रुपये का चूना लगाया. लगाने का तरीका भी ऐसा अनोखा कि कई दिनों तक अमेजन को भी पता नहीं चला कि उसे कोई इस तरह से धोखा दे रहा है. आरोपी यह काम करीब ढाई साल से कर रहे थे.

मंगाते थे महंगा सामान और…
पुलिस ने बताया कि आरोपी पहले कंपनी से महंगा सामान मंगवाते थे, फिर सामान में कुछ खराबी बता कर अमेजन को वापस लौटा देते थे. इस दौरान वे ऑरिजिनल सामान निकाल कर उसमें सस्ता या फिर डुप्लीकेट सामान रख कर भेज दिया करते थे. इसके बाद कंपनी से रिफंड ले लेते थे. बाद में वह ऑरिजिनल सामान को बाजार में बेच दिया करते थे.

अलग-अलग पते और फोन नंबर

आरोपी इतने शातिर थे कि कभी भी सामान को एक पते पर नहीं लगाते थे. वे हमेशा सामान अलग-अलग पते पर मंगाते थे जिससे उन पर शक न हो. साथ ही वे इसके लिए हर बार अलग फोन नंबर का इस्तेमाल करते थे. इसके चलते उनको पकड़ना और भी मुश्किल हो गया.

कई राज्यों से कर रहे थे जालसाजी
पुलिस ने बताया कि अरोपी वारदात को अंजाम देने के लिए कई राज्यों में अपना नेटवर्क फैलाए हुए थे. इस पूरे गिरोह में कई लोगों के और शामिल होने की खबर है. पुलिस अब अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है.

वंदे भारत एक्सप्रेस में आई खराबी, AC-पंखे बंद, परेशान यात्रियों ने किया हंगामा

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 वाराणसी से दिल्ली आने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस में तकनीकी खराबी आ गई. इस कारण यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. ट्रेन में सवार यात्रियों को करीब एक घंटे से ज्यादा बिना एयर कंडिशन, पंखे और लाइट के बिताने पड़े. स्थिति को ठीक करने में हो रही देरी के कारण यात्रियों ने हंगामा भी किया. खराबी के कारण ट्रेन एक घंटे से ज्यादा खड़ी रही और खामियों को दूर करने के बाद ही उसे रवाना किया गया.

यात्रियों ने स्टेशन पर किया हंगामा
अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन में बिजली मुहैया कराने वाले कन्वर्टर फेल होने से यात्रियों को यह परेशानी हुई. उन्होंने बताया कि ट्रेन के एसी ने इलाहाबाद पहुंचने से 10 मिनट पहले शाम चार बजकर 50 मिनट पर काम करना बंद कर दिया.  इलाहाबाद पहुंचने के बाद यात्रियों ने रेल अधिकारियों से ट्रेन के सी 11, 12, 13 और 14 कोच में एसी के काम न करने की शिकायत की. शिकायत के काफी देर बाद तक जब रेलवे का कोई कर्मचारी खराब एसी स्विच को ठीक करने नहीं पहुंचा तो यात्रियों ने स्टेशन पर ही हंगामा शुरू कर दिया.

एक घंटे बाद रवाना हुई ट्रेन

हंगामे की जानकारी मिलते ही रेलवे के अधिकारी और आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची. अधिकारियों ने टेक्निशियन को बुलाकर खामी को ठीक कराया. सबकुछ सही हो जाने के बाद ट्रेन शाम छह बजे इलाहाबाद से दिल्ली के लिए रवाना हुई. खराबी के दौरान ट्रेन में मूलभूत सुविधाएं मौजूद नहीं थी.

मार्च में लग गई थी आग
इससे पहले मार्च में रेलवे की इस महत्वाकांक्षी ट्रेन में आंशिक तौर पर आग लग गई थी. इस साल की शुरुआत में इस स्वचालित इंजन रहित ट्रेन सेट का निर्माण भी रोक दिया गया, क्योंकि ऐसे आरोप लग रहे थे कि निर्माण में पारदर्शिता नहीं है और पक्षपात हो रहा है.