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दुनिया के सबसे महंगे सेव की कीमत जानकर हैरान रह जाएंगे आप, ये है कलर

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आज के समय में मोटापा लगभग हर इंसान के लिए एक समस्या बनता नजर आ रहा हैं। जिसके चलते इंसान कई दवाइयों का सेवन करता है और मेहनत करता हैं। लेकिन फिर भी कुछ असर नहीं होता है तो ऑपरेशन की नौबत आ जाती हैं। इसी मोटापा कम करने के लिए आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे है जहां मोटापा कम करने के लिए एक अलग ही तरीका अपनाते हैं। इस जगह पर मोटापा कम करने के लिए लोग न तो डाइट चार्ट फॉलो करते हैं और न ही वर्कआउट, बल्कि वह लोग शरीर पर आग लगाकर मोटापा कम करते हैं।

आज हम आपको चीन के मोटापा कम करने वाले इलाज के बारे में बताने जा रहें है। चीन में रहने वाला 11 साल का ली हैंग ‘प्रेडर विली सिंड्रोम’ नाम की बीमारी से ग्रस्त है। इस बीमारी के कारण उसका वजन करीब 147 किलो बढ़ गया है। इस बीमारी में इंसान जितना खाता है उसका वजन उतना ही बढ़ता चला जाता है। अब इस बच्चे का वजन इतना बढ़ गया है कि उसे कम करने के लिए डॉक्टर्स कई तरीके अपना रहे हैं। ली का वजन कम करने के लिए डॉक्टर्स ‘हुओ लियो’ नाम के ट्रीटमेंट कर रहे है। इस ट्रीटमेंट में शरीर पर आग लगाकर फैट को जलाया जाता है। चीन में यह ट्रीटमेंट आम है।

इस ट्रीटमेंट से वजन कम करने के लिए पहले व्यक्ति के शरीर पर गीला टॉवल रखा जाता है। इसके बाद उस पर आग लगा दी जाती है। ऐसा करने से शरीर का फैट कम होता है। इस ट्रीटमेंट को करने से कुछ महीनों में ही काफी हद तक चर्बी कम की जा सकती है।

छत्तीसगढ़ के धमतरी में 16 करोड़ की लागत से बनी तटबंध बहने के कगार पर

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तटबंध निर्माण में भारी अनियमता
लगतार चर्चाओं में रहने वाला जल संसाधन विभाग फिर एक बार सुर्खियों में…..

16 करोड़ की लागत से बनी तटबंध बहने के कगार पर…..

धमतरी—
धमतरी जिला के मगरलोड ब्लॉक, वनांचल क्षेत्र के ग्राम मारागांव के तटबंध निर्माण में भारी अनियमतायें की शिकायत ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा है।

16 करोड़ की लागत निर्मित तटबंध जल संसाधन विभाग कोड नं 90 द्वारा बनाई गई है, और निर्माण कार्य से पहले लगया जाने वाला सूचना पटल बोर्ड उखड़ गए हैं जो कि नया सूचना पटल भी नही बनाया गया है ।

तटबंध निर्माण में पिचिंग का कार्य किया गया है जो अभी से उखड़ने लगी है और पत्थर नदी में जा गिरी है, जिसमें उपयोग होने वाले मुरुम, ग्रामीणों के जमीन से निकली गई है, वही दूसरी ओर यह पिचिंग कार्य मे पत्थर का उपयोग सिर्फ एक तरफ ही किया गया है और उसमें भी पत्थरो के बीच सीमेंट न डालकर रेत को बिछा दिया गया है,
जिसके कारण तटबंध दोनो तरफ से बंधे न होने से बीचों-बीच दरार पड़ रहा है, और मुरुम बारिश के पानी के साथ बहकर ग्रामीण किसानों के खेत को चौपट कर रहा है, जिसके चलते ग्रामीणों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है,

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के चलते ,और पूर्ण हो के उपरांत कोई भी अधिकारी नही आते थे बल्कि सारा काम मुंशी के भरोसे छोड़ दिया जाता था, और मुंशी अपनी मनमानी किया करते थे जी,

ग्रामीणों की माने तो पिछले वर्ष की तुलना में इस साल कम बारिश होने की वजह से अभी तक रुका हुआ है नही तो बाढ़ आने की स्थिति में पूरा तटबंध बह जाने की बात कही है, वही तटबंध बनने से जो लाभ किसानों को होना चाहिए वो नही मिल पा रहा है,
इस संबंध में सम्बंधित विभाग और मुंशी को कई बार अवगत कराया गया लेकिन उनके द्वारा कोई भी कार्यवाही नहीं किया गया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और सम्बन्धित विभाग से यह मांग की है कि जल्द से जल्द दोनो ओर पत्थरो से पिचिंग करके पत्थरों के बीच में सीमेंट डाला जाये जिससे फसल को नुकसान न हो,

यूपी के शेर हैं ये 6 अभिनेता, सारी दुनिया को दिखा दिया कि यूपी वाले किसी से कम नहीं

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1. जिम्मी शेरगिल

जिम्मी का जन्म 3 दिसंबर 1970 को उत्तर प्रेदश के गोरखपुर में हुआ। बॉलीवुड का यह अभिनेता बेहद भाग्यशाली है कि उसे ऐसी फिल्मों में काम करने का मौका मिला जिसकी कहानी और किरदार यूपी से ताल्लुक रखते हैं। ‘तनु वेड्स मनु’, जैसी फिल्म में इस अभिनेता ने कानपुर के एक डॉन का किरदार निभाया है। ऐसी ही कई और फिल्मों में काम कर चुके जिम्मी शेरगिल बॉलीवुड के पॉपुलर एक्टर हैं।

2. नसीरुद्दीन शाह

बीते जमाने के मशहूर बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का जन्म 16 अगस्त 1950 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले मे हुआ। आज के समय में उनकी उम्र 66 साल है। उन्होंने अब तक के करियर में तमाम बेहतरीन फिल्में में की हैं।

3. सौरभ शुक्ला

सौरभ शुक्ला को तो हर कोई अच्छी तरीके से जानता है। वह अरसे से बॉलीवुड के लिए काम कर रहे हैं। ‘सत्या’ से लेकर ‘जौली एलएलबी 2’ तक में उनके सभी किरदारों में उनकी शानदार अभिनय को देखा जा सकता है। यह अभिनेता उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का है।

4. राजपाल यादव

इस एक्टर के अंदाज में ही उनके यूपी होने का सबूत मिलता है शायद वह बॉलीवुड के एकमात्र ऐसे अभिनेता हैं, जिन्होंने अपने प्रदेश के नाम को सबसे ज्यादा रोशन किया है। बॉलीवुड के हर बड़े सितारों के साथ 50 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले राजपाल यादव यूपी के शाहजहांपुर से हैं।

5. नवाजुद्दीन सिद्दीकी

गैंग्स ऑफ वासेपुर फिल्म में फैजल खान बनकर नवाजुद्दीन ने सबसे ज्यादा लोकप्रियता हासिल की है। उनका का जन्म 19 मई 1974 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हुआ, गांव का नाम बुढ़ाना है। नवाज ने अब तक कई फिल्मों में काम किया है।

6. अमिताभ बच्चन

बहुत से लोग ऐसे हैं जिनको नहीं पता है कि अमिताभ बच्चन भी यूपी के ही हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम हरिवंश राय बच्चन था, जो एक महान लेखक थे।

तकनीक की मदद से रेगिस्तान पर हो रहा है ये अनोखा कमाल

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विज्ञान और तकनीक का विकास लोगों के जीवन को दिन प्रतिदिन सहज बनाते जा रहे हैं। तकनीक ने हमें वो सुख-सुविधाएं प्रदान की है, जिसके बारे में हम कभी सोच नहीं सकते थे। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में तकनीक के विकास का महत्वपूर्ण योगदान है। नए-नए तकनीक ऐसा काम करते जा रहे हैं, जिसे करना कुछ समय पहले असंभव सा लगता था। अब इस तकनीक का ऐसा नया विकास हुआ है कि रेगिस्तान पर भारी मात्रा में फल और सब्जियां उगाई जा रही हैं। साधारण तौर पर रेगिस्तान का वातावरण अत्यंत गर्म होता है। लेकिन इसके बावजूद तकनीक का इस्तेमाल कर हजारों किलो फल व सब्जियां उगाई जा रही हैं।

रेगिस्तान में समुद्र के खारे पानी और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर वैज्ञानिकों ने फल, टमाटर और खीरा जैसी सब्जियों को उगाने की तकनीक विकसीत की है। दरअसल, ब्रिटेन की ग्रीनहाउस कंपनी सीवाटर ग्रीनहाउस ने ऑस्ट्रेलिया, आबूधाबी, सोमालीलैंड, ओमान और टेनेराइफ के रेगिस्तानों पर एक नवीनतम तकनीक वाली ग्रीनहाउस बनाई है। रेगिस्तान में होने वाली अत्यंत गर्मी से बचने के लिए इस ग्रीनहाउस में मोटे गत्तों का खास तरह से इस्तेमाल कर ठंडक की व्यवस्था की गई है। कंपना का यह तकनीक बिल्कुल सफल है, जिससे भारी मात्रा में फल और सब्जियां उगाई जा रही हैं।

रेगिस्तान क्षेत्र में बने इस ग्रीन हाउस को शीशे से बनाया गया है। ग्रीन हाउस को कुछ इस तरह से डिजायन किया गया है कि यह अंदर के वातावरण को अनुकूल रखता है। इस ग्रीन हाउस के अंदर ठंडक और नमी बनाए रखने के लिए गत्तों से बने कुलिंग हाउस का निर्माण किया गया है। कुलिंग हाउस बनाने में लगे गत्तों को गीला किया जाता है और जब गत्तों पर बाहर से गर्म हवा पड़ती है तो वाष्पीकरण की वजह से भीतर का तापमान कम हो जाता है।

गत्तों को गीला करने के लिए सोलर पंप लगाए गए हैं। यह पंप गत्तों के ऊपर समुंद्र का खारा पानी छिड़कते हैं। यह पानी गत्ते की दीवारों से होता हुआ वाष्पित हो जाता है। वाष्पीकरण होने की वजह से ग्रीन हाउस के अंदर ठंडक पैदा हो जाती है। ग्रीन हाउस की इस अनोखी तकनीक के माध्यम से अंदर का वातारण खेती के अनुकूल हो जाता है।

समुद्र का खारा पानी वजह से गत्तों पर नमक भी जमा हो जाता है। इस नमक के जमा होने के भी दो फायदे हैं। एक तो नमक के वजह से गत्ते मजबूत बनते हैं और दूसरा इस नमक को व्यावसायिक तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है।

सोमालीलैंड में इस खेता के माध्यम से हर साल करीब 750 टन टमाटर उगाई जा रही है। ग्रीन हाउस का निर्माण करने वाली कंपनी के संस्थापक चार्ली पैटन ने बताया कि वह दूनिया के और खे इलाकों में वह इस तरह के प्रोजेक्ट शुरू करने को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने ये भी बताया कि सोमीलैंड में अगर मात्र 2000 हेक्टेयर में ऐसी खेती की जाए तो करीब 40 लाख जनसंख्या का पेट भरा जा सकता है।

सेना के जवानों ने जमा देने वाली ठंड में किया गरबा, वीडियो शेयर कर कहा- ‘कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी’

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केन्द्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भारतीय सेना के जवानों का गरबा करते हुए वीडियो शेयर किया है। ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। भारतीय सेना के जवान सियाचिन में गरबा कर रहे हैं। सियाचिन में तापमान शून्य से नीचे होता है। गुजरात के लोग नवरात्री में गरबा और डांडिया का करते हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि जवान बर्फ से ढके इस इलाके में किस तरह झूमते हुए गरबा कर रहे हैं। जवानों का ये वीडियो सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया जा रहा है।

केन्द्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, #IndianArmy पर गर्व है। ये शून्य से भी कम तापमान में गरबा करके त्योहार का जश्न मना रहे हैं। यही भावना है जो कि भारत को अजेय बनाती है…’कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी’।

भगवान का शुक्र है कि अब इतने खतरनाक जानवर हमारी धरती पर नहीं रहते

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2. मेगालोडन शार्क

मेगालोडन शार्क समुद्र में रहने वाली सबसे खूंखार मछली थी। इसका एक दांत लगभग 2 से 3 फुट का होता था। इसके एक दांत को देखकर आप इसकी विशालता का अंदाजा लगा सकते है।

3. सीप

सीप की हजारों प्रजातियां हैं इन सभी प्रजातियों का आकार बहुत छोटा होता है। परंतु करोड़ों साल पहले सीप इतनी बड़ी होती थी की इनका आकार ट्रक के टायर से भी बड़ा होता था।

मैमथ हाथी का पूर्वज है और वर्तमान हाथी से 2 गुना बड़ा था कमाल की बात यह है कि मैमथ सिर्फ 10000 साल पहले ही विलुप्त हुआ है।

6. Sarcosuchus

आज से 11 करोड़ साल पहले जो मगरमच्छ इस धरती पर रहते थे वह वर्तमान मगरमच्छ से 10 गुना बड़े थे।

7. Platybelodons

जिस हाथी को आज हम जानते हैं वह लंबे क्रम विकास के दौर से गुजरा है। 2 करोड़ साल पहले हाथी कुछ ऐसा दिखाई देता।

8. Archelon

दूसरे जीवों की तरह कछुए भी बहुत विशाल होते थे यह महासागरों में रहते थे।

9. साइबेरियन यूनिकॉर्न

गैंडे का यह पूर्वज साइबेरिया में रहता था और गैंडे से कई गुना बड़ा था।

हमारे कुछ पाठक ऐसे होते हैं जो किसी भी जानकारी पर आसानी से यकीन नहीं करते। वह हर जानकारी को फेक बताते हैं। ऐसे लोगों से अनुरोध है कि वह गूगल पर इस जानकारी को चेक कर सकते हैं। हमने सभी जानवरों के वैज्ञानिक नाम भी दिए हैं।

2. मेगालोडन शार्क

मेगालोडन शार्क समुद्र में रहने वाली सबसे खूंखार मछली थी। इसका एक दांत लगभग 2 से 3 फुट का होता था। इसके एक दांत को देखकर आप इसकी विशालता का अंदाजा लगा सकते है।

3. सीप

सीप की हजारों प्रजातियां हैं इन सभी प्रजातियों का आकार बहुत छोटा होता है। परंतु करोड़ों साल पहले सीप इतनी बड़ी होती थी की इनका आकार ट्रक के टायर से भी बड़ा होता था।

मैमथ हाथी का पूर्वज है और वर्तमान हाथी से 2 गुना बड़ा था कमाल की बात यह है कि मैमथ सिर्फ 10000 साल पहले ही विलुप्त हुआ है।

6. Sarcosuchus

आज से 11 करोड़ साल पहले जो मगरमच्छ इस धरती पर रहते थे वह वर्तमान मगरमच्छ से 10 गुना बड़े थे।

7. Platybelodons

जिस हाथी को आज हम जानते हैं वह लंबे क्रम विकास के दौर से गुजरा है। 2 करोड़ साल पहले हाथी कुछ ऐसा दिखाई देता।

8. Archelon

दूसरे जीवों की तरह कछुए भी बहुत विशाल होते थे यह महासागरों में रहते थे।

9. साइबेरियन यूनिकॉर्न

गैंडे का यह पूर्वज साइबेरिया में रहता था और गैंडे से कई गुना बड़ा था।

हमारे कुछ पाठक ऐसे होते हैं जो किसी भी जानकारी पर आसानी से यकीन नहीं करते। वह हर जानकारी को फेक बताते हैं। ऐसे लोगों से अनुरोध है कि वह गूगल पर इस जानकारी को चेक कर सकते हैं। हमने सभी जानवरों के वैज्ञानिक नाम भी दिए हैं।

हमारे कुछ पाठक ऐसे होते हैं जो किसी भी जानकारी पर आसानी से यकीन नहीं करते। वह हर जानकारी को फेक बताते हैं। ऐसे लोगों से अनुरोध है कि वह गूगल पर इस जानकारी को चेक कर सकते हैं। हमने सभी जानवरों के वैज्ञानिक नाम भी दिए हैं।

पैरों वाली कुश्ती लड़ते हैं इस देश के लोग…

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आपने आजतक स्विमिंग कॉम्पिटिशन को होते हुए देखा होगा या फिर कौन सबसे ज्यादा देर तक पानी में रह सकता है। इस तरह के कॉम्पिटिशन को होते हुए देखा होगा। कौन सबसे ज्यादा समय तक एक दूसरे की आंखों में देख सकता हैं ये कॉम्पिटिशन जरूर देखा होगा, लेकिन आज हम आपको जिस कॉम्पिटिशन के बारे में बताने जा रहे हैं वह बहुत ही हैरान कर देने वाला है।

चीन के चोंगकिंग शहर में एक ऐसा कॉम्पिटिशन होता है, जिसमें एक दो लोग पानी में पैर को लेकर बैठते हैं और अपने पैरों की ऊंगलियों को अपने पार्टनर की ऊंगली के नीचे फंसा लेते हैं। आपको बता दें इस कॉम्पिटिशन में एक प्लास्टिक से बना हुआ बड़ा सा पैर को पानी में रखा जाता है, जिसके ऊपर सभी प्रतियोगी अपने पैर को रखते है और फिर इसी पैर के ऊपर ही दो लोगों के पैर की ऊंगलियों के बीच में कुश्ती होती है।

चीन के वाटर पार्क में इस कॉम्पिटिशन का आयोजन किया गया, जिसमें 80 लोगों ने हिस्सा लिया था। इस कॉम्पिटिशन को जीतने वाले को चैंपियन का ताज पहनाया गया। जिसके साथ सम्मान के रूप में वाटर पार्क के 90 युआन के मुफ्त टिकट भी दिए गए। इस कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने वाले लोगों ने पानी को एक दूसरे के ऊपर फैक कर ध्यान भडकाने की कोशिश भी की।

CM भूपेश बघेल की सुरक्षा में होगी कटौती, काफिले में कम चलेंगी गाड़ियां

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 छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सुरक्षा में कटौती होगी. सुरक्षा व्यवस्था में कटौती की पहल खुद सीएम भूपेश बघेल ने ही की है. सीएम की पहल पर अब उनके उनके कारकेड (काफिले) में कम गाड़ियां चलेंगी. वर्तमान में उनके कारकेड में 7 गाड़ियां चलती हैं. सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सीएम भूपेश बघेल ने पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह पर तंज भी कसा है.

रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में भेंट मुलाकात जनचौपाल कार्यक्रम के दौरान सीएम भूपेश बघेल ने मीडिया से चर्चा की. सीएम भूपेश ने बिना नाम लिए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह पर तंज कसा. सीएम बघेल ने कहा कि मितव्यता से ही फ़िज़ूलख़र्च रोक सकते हैं. मैंने अपने कारकेड में कटौती की है, लेकिन पुराने लोग आज भी लम्बी कारकेट में हैं. मैं इस मामले में किसी को सलाह नहीं दे सकता, लेकिन ऐसे लोगों को ख़ुद ही सोचना चाहिए. बता दें कि भूपेश बघेल ने सीएम का पदभार ग्रहण करने के बाद ही वीआईपी कल्चर को बंद करने की बात कही थी. इसके बाद अब सुरक्षा कम करने की बात सीएम भूपेश ने कही है.

मवेशियों की मौत पर कही ये बात सड़कों पर मवेशियों की मौत पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बयान दिया. सीएम बघेल ने क​हा कि सड़क पर मवेशी 15 साल के कुशासन का परिणाम हैं. 35 लाख आवारा पशु खुले में हैं. हमारी सरकार आते ही 2000 से ज्यादा गौठान बन चुके हैं. अब शहरी निकायों में गौठान बनाना भी हमारा लक्ष्य है. सालभर में हम इसका निदान कर देंगे. सीएम ने कहा कि वित्तीय अनुशासन से हमने कई काम किए हैं और आगे भी करेंगे.

मुख्यमंत्री बघेल ने की घोषणा : बलौदा बाजार जिले के लवन को मिलेगा तहसील का पूर्ण दर्जा

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बलौदा बाजार जिले के लवन से आए नागरिकों के आग्रह पर लवन उप तहसील को पूर्ण तहसील का दर्ज देने की घोषणा की है।

बघेल ने आज यहां अपने निवास पर आयोजित जनचौपाल भेंट मुलाकात कार्यक्रम में वहां से आए प्रतिनिधिमंडल की मांग पर यह घोषणा की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि उप तहसील में 70 ग्राम पंचायतें हैं। नागरिकों को तहसील के कार्य से बलौदाबाजार जाना पड़ता है, लवन क्षेत्र के कई गांवों से काफी अधिक दूरी होने से ग्रामीणों को असुविधा होती है।लवन में तहसील कार्यालय खुलने से काफी आसानी होगी।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर रायगढ़ जिले के बोतल्दा निवासी रविन्द्र पटेल को किडनी के इलाज के लिए तीन लाख रूपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की।इसके अलावा भी मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में जरूरतमंदों को आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की।

छत्तीसगढ़ : रायपुर में बढ़े सब्जियों के दाम, दिवाली बाद ही राहत की उम्मीद

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कुछ महीने पहले तक जो लोग एक किलो सब्जी खरीदते थे, उन्हें एक पाव सब्जी खरीदने में भी पसीना आ रहा है. पिछले दो महीनों से सब्जियों के दाम बढ़े हैं. ग्राहक तो ग्राहक सब्जी विक्रेता भी इन बढ़े हुए दामों से परेशान हैं. प्रदेश थोक सब्जी विक्रेता संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि दीपावली के बाद ही लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है. दीपावली के बाद सब्जियों की आवक बढ़ने से दाम कम होने के आसार हैं.

राजधानी रायपुर में सब्जियों के बढ़े हुए दाम ने लोगों का मुंह कड़वा कर दिया है. थोक सब्जी बाजार हो या फूटकर सभी जगह सब्जियों के दाम लोगों का मुंह तीखा कर रहे हैं. राजधानी रायपुर के सबसे बड़े सब्जी बाजार शास्त्री बाजार में भी सब्जियों के दाम काफी बढ़े हुए हैं. सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि वो खुद परेशान हैं. सब्जी विक्रेता निर्मला साहू का कहना है कि लगातार हो रही बारिश ने बाड़ियों की सब्जी गला दी है. इसके चलते सब्जियों की आवक कम हो रही है और यही कारण है दाम बढ़ें हैं.

रायपुर में ये हैं सब्जियों के दाम
रायपुर में बरबट्टी 40 से 60 रुपये, करेला 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही है. फूल गोभी 50 से 60 रुपये, टिंडा 120 से 180 रुपये, बैगन 40 से 60 रुपये, लौकी 30 से 40 रुपये, भिंडी 50 से 60 रुपये, टमाटर 40 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर बिक रही है. इसके अलावा मुनगा 60 से 80 रुपये, 80 से 100 रुपये, मिर्ची- 60 से रुपये, मेथी 120 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम, अदरक 90 से 100 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है. 

प्रदेशभर में यही हालात
ऐसा नहीं है कि केवल स्थानीय बाजार में ही माल महंगा है. प्रदेश सब्जी विक्रेता संघ के सदस्य दिलीप केशरवानी का कहना है कि रायपुर के डूमरतराई में स्थित डूमरतराई थोक सब्जी मार्केट में भी प्रदेश भर में सब्जियों को सप्लाई करने वाले भी परेशान हैं. यहां से पूरे छत्तीसगढ़ में सब्जियां सप्लाई होती हैं. बाहरी राज्यों से भी सब्जियां नहीं आ रही हैं. इससे परेशानी और बढ़ रही है.