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” यात्री वाहन बाजार” “मारुति सुजुकी इंडिया की बिक्री जून में 2 लाख यूनिट्स के पार…”

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भारत के यात्री वाहन बाजार के लिए जून का महीना काफी अच्छा रहा है। इस दौरान देश की बड़ी ऑटो मोबाइल कंपनियों ने मजबूत बिक्री दर्ज की है। इसमें मारुति सुजुकी इंडिया, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और हुंडई मोटर इंडिया का नाम शामिल है।

मारुति सुजुकी इंडिया ने जून में 2,00,390 यूनिट्स की बिक्री की है। इसमें घरेलू बाजार में बिक्री 1,50,150 यूनिट्स और निर्यात 41,768 यूनिट्स रहा है। इसमें से 7,472 यूनिट्स मारुति ने दूसरी वाहन कंपनियों को बेचे हैं।

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने जून में कुल 31,016 यूनिट की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल इसी महीने में हुई 28,869 यूनिट की बिक्री से 7 प्रतिशत अधिक है। कंपनी की बिक्री में 28,441 घरेलू यूनिट्स और 2,575 यूनिट्स का निर्यात शामिल था।

कंपनी के प्रदर्शन पर टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के सेल्स-सर्विस-यूज्ड कार बिजनेस के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट सबरी मनोहर ने कहा कि कंपनी ग्राहकों की मांग पर ध्यान केंद्रित करने की अपनी नीति से मिली सकारात्मक गति से उत्साहित है। हाल ही में लॉन्च की गई नई इनोवा क्रिस्टा, जिसमें अपडेटेड स्टाइलिंग और डिजाइन एलिमेंट्स हैं, को उसकी अपील और वैल्यू प्रपोजिशन के लिए बाजार से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है।

हुंडई मोटर इंडिया ने जून 2026 में कुल 51,335 यूनिट्स की मासिक बिक्री दर्ज की, जिसमें घरेलू बाजार में बेची गई 39,635 यूनिट्स और निर्यात की गई 11,700 यूनिट्स शामिल हैं।

हुंडई मोटर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ तरुण गर्ग ने कहा कि कंपनी ने यह बिक्री प्रदर्शन तब हासिल की जब उसके एक आपूर्तिकर्ता की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में आग लगने की घटना के कारण 13,900 यूनिट्स का प्रोडक्शन नुकसान हुआ, जिससे कुछ समय के लिए कंपोनेंट्स की सप्लाई बाधित हो गई थी। उन्होंने कहा कि हुंडई ने वैकल्पिक सोर्सिंग जगहों से पार्ट्स का इंतजाम किया और 22 जून 2026 से अपनी सभी फैसिलिटीज में सामान्य प्रोडक्शन बहाल कर दिया। कंपनी को उम्मीद है कि वह वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही के दौरान हुए प्रोडक्शन नुकसान की भरपाई कर लेगी।

 

” भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक” ” साझेदारी आर्थिक सहयोग और निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और नवाचार को बढ़ावा…”

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, आर्थिक और निवेश संबंधों को नई मजबूती देने पर रहेगा फोकस…

केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को फ्रांस के आधिकारिक दौरे की शुरुआत की, जहां वह भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने, आर्थिक सहयोग को गहरा करने और निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगी।

इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम फ्रांस के ऐक्स-एन-प्रोवेंस में आयोजित होने वाला भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (ईएफडी) होगा। इस बैठक की सह-अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त, औद्योगिक ऊर्जा और डिजिटल संप्रभुता मंत्री रोलैंड लेस्क्योर करेंगे।

इस संवाद के दौरान दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों की तलाश करेंगे और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगे।

फ्रांस प्रवास के दौरान वित्त मंत्री कई वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ अलग-अलग बैठकें भी करेंगी। इसके अलावा वह शीर्ष उद्योगपतियों के साथ एक गोलमेज चर्चा (राउंडटेबल) में भी हिस्सा लेंगी।

इन बैठकों में भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, सरकार द्वारा किए गए संरचनात्मक सुधार, बढ़ते निवेश अवसरों और दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को वैश्विक निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

निर्मला सीतारमण ‘नई मध्यम वर्गीय आबादी के विकास को कैसे बढ़ावा दिया जाए’ विषय पर आयोजित एक विशेष पैनल चर्चा में भी भाग लेंगी। यह चर्चा लेस रेनकॉन्ट्रेंस इकोनॉमिक्स डी’ऐक्स-एन-प्रोवेंस के तहत आयोजित होगी, जिसे यूरोप के सबसे प्रतिष्ठित वार्षिक आर्थिक और सार्वजनिक नीति मंचों में से एक माना जाता है।

इस सम्मेलन का आयोजन ले सर्कल डेस इकोनॉमिस्ट्स द्वारा किया जाता है, जिसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, केंद्रीय बैंक प्रमुख, उद्योगपति, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करते हैं।

अपने दौरे के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री कैडाराचे स्थित इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (आईटीईआर) परियोजना का भी दौरा करेंगी, जो दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है, जिसमें भारत और फ्रांस सहित 30 से अधिक देश साझेदार हैं।

इसके अलावा, वह कैम्पस साइबर का भी दौरा करेंगी, जिसे फ्रांस का राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास केंद्र माना जाता है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, डिजिटल अर्थव्यवस्था में नवाचार बढ़ाने और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान पर चर्चा होने की उम्मीद है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण प्रोवेंस-आल्प्स-कोटे डी’अजूर (पीएसीए) क्षेत्र के अध्यक्ष रेनॉड मुसेलियर से भी मुलाकात करेंगी। इस बैठक में निवेश, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की जाएगी।

” छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस” समय बदला, नाम बदले, मगर शान वही, 2004 में मिला यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा…”

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भारत की विरासत सिर्फ इतिहास की किताबों में नहीं, बल्कि हमारे संस्कारों, हमारी मिट्टी और हमारे किलों की दीवारों में आज भी जिंदा है। यह वो धरती है, जहां हर हर किला और हर इमारत कोई कहानी कहती है।

यह गाथा होती है वीरता, आत्मसम्मान और संस्कृति की। इसी अमिट गाथाओं में से एक है, मुंबई का छत्रपति शिवाजी टर्मिनस।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के लिए 2 जुलाई 2004 की तारीख सबसे अहम मायने रखती है, क्योंकि इस दिन छत्रपति शिवाजी टर्मिनस स्टेशन को यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति की ओर से विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। पूरी इमारत का ढांचा आज भी वैसा ही है जैसा पहले था। इसका बाहरी हिस्सा, बाहर से दिखने वाला रूप और इस्तेमाल का तरीका ओरिजिनल है।

एक दौर था, जब मुंबई में छत्रपति शिवाजी टर्मिनस को विक्टोरिया टर्मिनस स्टेशन के रूप में जाना जाता था। यह इमारत भारत में विक्टोरियन गोथिक वास्तुकला के पुनरुद्धार का एक शानदार उदाहरण है, जिसमें भारतीय पारंपरिक वास्तुकला से प्रेरित तत्वों का मिश्रण है।

यह दो संस्कृतियों के संगम का भी बेहतरीन उदाहरण है, क्योंकि ब्रिटिश वास्तुकारों ने भारतीय शिल्पकारों के साथ मिलकर भारतीय वास्तुकला की परंपरा और शैलियों को शामिल किया, इस प्रकार मुंबई के लिए एक नई अनूठी शैली का निर्माण किया। इसका शानदार पत्थर का गुंबद, बुर्ज, नुकीले मेहराब और बारीक नक्काशी, इटैलियन गोथिक और भारतीय महल वास्तुकला, दोनों की झलक दिखाते हैं।

यह उपमहाद्वीप का पहला टर्मिनस स्टेशन था। मुंबई शहर के दक्षिणी हिस्से में स्थित इस स्टेशन का उद्घाटन 20 जून 1887 को ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया के राज्याभिषेक की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर किया गया था। इसका निर्माण ब्रिटिश इंजीनियर फ्रेडरिक विलियम स्टीवंस की देखरेख में पूरा हुआ था। नए ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ की रिपोर्ट कहती है कि स्टेशन को बनाने में 10 साल लगे और कुल 260,000 स्टर्लिंग पाउंड का खर्च आया।

भारत की पहली ट्रेन 1853 में ठाणे और बोरीबंदर के बीच चली थी। 1853 से 1887 तक इस स्टेशन को बोरीबंदर स्टेशन के नाम से जाना जाता था। 1887 से 1996 तक इसका नाम विक्टोरिया टर्मिनस था और फिर 1996 से 2017 तक इसका नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी टर्मिनस कर दिया गया। 2017 में, इसे इसका मौजूदा नाम ‘छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस’ मिला।

 ” पूरे देश में लागू हुई VB-G RAM G योजना, मजदूरी की दर, पात्रता और फायदे…”

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आज, 1 जुलाई से, देश भर में नई ग्रामीण रोज़गार योजना – ‘विकसित भारत गारंटी फॉर एम्प्लॉयमेंट एंड लाइवलीहुड मिशन (ग्रामीण) एक्ट 2025’ (VB-G RAM G) – पूरी तरह से लागू हो गई है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के ज़मीनी स्तर पर लागू होने से, यह लंबे समय से चल रही MGNREGA व्यवस्था से काफी बेहतर नज़र आ रही है। इस योजना के तहत मज़दूरों को मिलने वाली दिहाड़ी तो बढ़ी ही है, साथ ही साल भर मिलने वाले काम के दिनों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। आइए, इसके बारे में और जानते हैं।

हाथ में ज़्यादा मज़दूरी

केंद्र सरकार द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन के अनुसार, ग्रामीण मज़दूरों की औसत दिहाड़ी में 10 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी की गई है। जहाँ पहले MGNREGA के तहत देश भर में मज़दूरों को औसतन ₹298.8 प्रतिदिन मिलते थे, वहीं G RAM G योजना के तहत यह राशि अब बढ़कर ₹327.4 प्रतिदिन हो गई है। इसका मतलब है कि मज़दूरों को अब काम के हर दिन औसतन ₹28.6 ज़्यादा मिलेंगे। यह नई दर देश के सभी 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू कर दी गई है।

नई योजना के तहत कितने दिन का काम

इस नई योजना की सबसे बड़ी खूबी इसका कानूनी ढांचा है। नए कानून के तहत, पात्र ग्रामीण परिवारों के लिए सालाना रोज़गार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इसका मतलब है कि मज़दूरों को अब 25 दिन का अतिरिक्त काम मिलेगा। इसके अलावा, सरकार ने देश भर में ₹300 प्रतिदिन की न्यूनतम मज़दूरी सीमा तय की है। इसका मतलब है कि देश के किसी भी हिस्से में किसी मज़दूर को ₹300 से कम का भुगतान नहीं किया जा सकता।

राज्यों को कितना फ़ायदा?

मंत्रालय के अनुसार, 21 राज्यों में मज़दूरी को ₹300 की नई न्यूनतम सीमा तक बढ़ाने के लिए उसमें बढ़ोतरी की गई है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मौजूदा मज़दूरी दरों में 15% से 25% तक की उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी पूर्वोत्तर राज्यों अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में हुई है, जहाँ मज़दूरी दरों में लगभग 24.5% की वृद्धि हुई है। इस बदलाव से इन राज्यों के पिछड़े ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार होने की उम्मीद है।

हरियाणा और सिक्किम में कमाई

इस स्कीम के तहत मज़दूरी में बढ़ोतरी उन राज्यों में भी लागू की गई है जहाँ मज़दूरी की दरें पहले से ही ज़्यादा थीं। नई दरें लागू होने के बाद, मज़दूरों की रोज़ाना की कमाई हरियाणा में ₹409, गोवा में ₹406, केरल में ₹401 और सिक्किम के पहाड़ी इलाकों में ज़्यादा से ज़्यादा ₹450 होगी। सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹95,692.31 करोड़ की बड़ी अंतरिम राशि भी जारी की है।

cg’  नि:शुल्क सरस्वती सायकल योजना से बालिकाओं की शिक्षा को मिली नई रफ्तार…”

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” शासन की नि:शुल्क सरस्वती सायकल योजना जिले की बालिकाओं के लिए शिक्षा की राह को आसान बना रही है।”

इस योजना के माध्यम से छात्राओं को विद्यालय आने-जाने के लिए नि:शुल्क सायकल उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनकी नियमित उपस्थिति बढऩे के साथ-साथ आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास में भी वृद्धि हो रही है।

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी एवं हिन्दी माध्यम विद्यालय राजनांदगांव में अध्ययनरत कक्षा 9वीं की छात्रा साधना साहू ने बताया कि उन्हें योजना के अंतर्गत नि:शुल्क सायकल मिली है।

साधना ने बताया कि वे वार्ड क्रमांक 1 बजरंगपुर नवागांव से विद्यालय आती हैं। पहले उन्हें स्कूल आने के लिए ऑटो का इंतजार करना पड़ता था या अन्य साधनों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे समय पर विद्यालय पहुंचने में कठिनाई होती थी।

अब सायकल मिलने से वे बिना किसी परेशानी के समय पर स्कूल पहुंच सकेंगी और पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे पाएंगी। इसी विद्यालय की कक्षा 9वीं की छात्रा पूजा भिमनानी ने भी योजना के अंतर्गत नि:शुल्क सायकल प्राप्त की है।

उन्होंने कहा कि यह योजना बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। सायकल मिलने से विद्यालय आने-जाने की सुविधा आसान हो गई है, जिससे नियमित रूप से अध्ययन करने में मदद मिलेगी।

विद्यालय की अन्य छात्राओं खुशबू साहू एवं लता साहू को भी नि:शुल्क सरस्वती सायकल योजना का लाभ मिला है। छात्राओं ने शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना न केवल उनकी शिक्षा को गति दे रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी दे रही है।

नि:शुल्क सरस्वती सायकल योजना बालिकाओं के लिए केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ाया गया एक सशक्त कदम है। यह योजना शिक्षा तक आसान पहुंच सुनिश्चित कर बालिकाओं के सपनों को नई उड़ान देने का कार्य कर रही है।

cg” व्यापारिक संगठनों की शिकायतों पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अभिहित अधिकारी के विरूद्ध जांच समिति गठित…”

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राजनांदगांव। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने जिले के विभिन्न व्यापारी एवं व्यावसायिक संगठनों द्वारा अभिहित अधिकारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन श्री तरूण बिरला के कार्य व्यवहार एवं कार्यप्रणाली को लेकर प्रस्तुत शिकायतों के आधार पर जांच समिति का गठन किया है।

प्राप्त जानकारी अनुसार छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज, थोक किराना व्यापारी संघ, होटल हलवाई संघ, फूड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सहित अन्य व्यापारी संगठनों द्वारा अभिहित अधिकारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन श्री तरूण बिरला के कार्यप्रणाली के कारण व्यापारियों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अनावश्यक रूप से प्रताडि़त एवं परेशान करने की शिकायत की गई है। साथ ही व्यापारिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पडऩे के संबंध में आरोप लगाए गए है।

कलेक्टर ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित किया है। जांच समिति द्वारा प्राप्त शिकायतों में लगाए गए आरोपों की बिंदुवार जांच करते हुए संबंधित पक्षों के कथन एवं उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण किया जाएगा तथा तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन, स्पष्ट अभिमत एवं आवश्यक अनुशंसाओं सहित 7 दिवस के भीतर कार्यालय कलेक्टर राजनांदगांव में प्रस्तुत करने निर्देशित किए गए है।

cg” ग्राम सभाओं एवं कृषक चौपाल के माध्यम से किसानों को दी जा रही योजनाओं की जानकारी…”

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**”ग्राम सभाओं एवं कृषक चौपाल के माध्यम से किसानों को दी जा रही योजनाओं की जानकारी”**

” राजनांदगांव जिले की ग्राम पंचायतों में किसानों को शासन की कृषि एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम सभा एवं कृषक चौपाल का आयोजन किया जा रहा है।”

“कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने किसानों को शासन की योजनाओं से अधिक से अधिक लाभान्वित करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए पात्र हितग्राहियों को लाभ लेने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए है।”

“जिसके तहत डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम सम्बलपुर में आयोजित ग्राम सभा में फसल परिवर्तन एवं फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के संबंध में जानकारी दी गई। किसानों को शासन द्वारा धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं मक्का जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर प्रति एकड़ 15 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि, संतुलित उर्वरक उपयोग, बीजीए टांका निर्माण, फसल बीमा योजना तथा अन्य कृषि संबंधी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई।”

“इसी प्रकार ग्राम पंचायत सिवनीकला में आयोजित कृषक चौपाल में फसल विविधीकरण के अंतर्गत धान के स्थान पर अन्य फसलों की खेती करने पर शासन द्वारा दिए जाने वाले प्रोत्साहन तथा पीएम-आशा योजना के तहत दलहन एवं तिलहन की खरीदी संबंधी जानकारी किसानों को दी गई।”

“साथ ही रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग एवं उनके लाभों के बारे में भी विस्तार से अवगत कराया गया।”

“छुरिया विकासखंड के ग्राम पंचायत दैहान, कुहीकला, साल्हे एवं रतनभाट में भी कुषक चौपाल आयोजित कर किसानों को कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं, फसल विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा शासकीय प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी दी गई।”

“कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में कृषकों ने भाग लिया। इस अवसर पर संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, कृषि विकास अधिकारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी उपस्थित रहे।”

cg” खनिज विभाग की कार्रवाई – चूना पत्थर (गिट्टी) का अवैध परिवहन करने पर 3 वाहन को किया गया जप्त…”

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राजनांदगांव*। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार खनिज विभाग द्वारा जिले में खनिज का अवैध उत्खनन, भण्डारण एवं परिवहन करने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में खनिज विभाग की टीम द्वारा अर्जुनी, रायतापायली, बीजेभांठा, डोंगरगांव, खुज्जी, कुमरदा, लक्ष्मणभरदा, किरगी, सुरगी, सिंघोला, तुमड़ीबोड़, इन्दामारा, सोमनी सहित अन्य क्षेत्र का आकस्मिक निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान चूना पत्थर (गिट्टी) का अवैध परिवहन करने पर 3 वाहनों को जप्त किया गया।

इसके तहत ग्राम करेली में कोटगुल महाराष्ट्र निवासी चंदन शेखावत के स्वामित्व के हाईवा एमएच 33 टी 5852 से बिजरावन मध्यप्रदेश निवासी वाहन चालक बहादुर सिंह एवं ग्राम खुर्सीपार में डोंगरगांव निवासी गोविन्द देवांगन के स्वामित्व के माजदा सीजी 08 एएन 8053 से बाजार नवागांव निवासी वाहन चालक उमेश यादव द्वारा चूना पत्थर (गिट्टी) का अवैध परिवहन करने पर कार्रवाई करते हुए जप्त कर थाना डोंगरगांव को सुपुर्द किया गया।

इसी तरह ग्राम फरहद में दुर्ग निवासी अमर इन्फ्रा के स्वामित्व के हाईवा सीजी 07 एएक्स 9196 से अज्ञावबाजार निवासी वाहन चालक अभिषेक पाण्डे द्वारा चूना पत्थर (गिट्टी) का अवैध परिवहन करने पर कार्रवाई करते हुए जप्त कर थाना पुलिस लाईन राजनांदगांव को सुपुर्द किया गया।

प्रकरणों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण की रोकथाम के लिए लगातार गस्त व निगरानी की जा रही है।

cg” खेल प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराएगी हमारी सरकार : मुख्यमंत्री श्री साय…”

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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति की बैठक, उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन प्रक्रिया में 156 खिलाड़ी पात्र”

अधिसूचना के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी जाएगी सूची”

उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में नियुक्त करने की होगी व्यवस्था, प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को निखारने में निभाएंगे अहम भूमिका”

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज उनके निवास कार्यालय में उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव सहित समिति के सदस्यों ने वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 के लिए प्राप्त आवेदनों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया तथा सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन को अंतिम स्वरूप प्रदान किया। इनमें 20 अलग-अलग खेलों के खिलाड़ी शामिल हैं।

बैठक में अनुमोदित 156 खिलाड़ियों की सूची को सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इसे अधिसूचित करने के बाद खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में लेने के लिए आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ होगी। राज्य के खिलाड़ी लंबे समय से इस सूची की प्रतीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री साय की अध्यक्षता में आज हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद खिलाड़ियों का यह इंतजार जल्द समाप्त हो जाएगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए पारदर्शी, समयबद्ध और प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि चयनित उत्कृष्ट खिलाड़ियों को पात्रता के अनुरूप उन्हें शासकीय सेवा में नियुक्ति दिलाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया और व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन खिलाड़ियों का अनुभव और उपलब्धियां प्रदेश की नई खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, इसलिए उनकी सेवाओं का उपयोग खेल प्रशिक्षण, प्रतिभा संवर्धन और खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में भी किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल खिलाड़ियों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि ऐसी मजबूत खेल व्यवस्था विकसित करना है, जहां गांव से लेकर राज्य स्तर तक प्रतिभाओं की समय रहते पहचान हो, उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण, बेहतर संसाधन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने अधिकारियों से खेल गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने तथा खेल प्रतिभाओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में खेलों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। खेल अधोसंरचना के विस्तार, आधुनिक सुविधाओं के विकास तथा नई खेल अकादमियों की स्थापना की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य ऐसे उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार करना है जो राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि आज चयनित खिलाड़ी भविष्य में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर प्रदेश में खेल संस्कृति को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बैठक में बताया गया कि राज्य में अब तक 182 उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किए जा चुके हैं। इसी क्रम में वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 के लिए पूर्व में विज्ञापन जारी कर आवेदन आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त आवेदनों के परीक्षण और निर्धारित मानकों के आधार पर 156 खिलाड़ियों को पात्र पाया गया।

बैठक में वन मंत्री श्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती तनुजा सलाम उपस्थित थीं।

cg” मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा का अनुपम संगम” ” फॉरेस्ट रेस्ट हाउस “राम वाटिका में स्थापित भगवान श्री राम की प्रतिमा को नमन कर प्राप्त किया आशीर्वाद”

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मुख्यमंत्री ने आमजन से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का किया आह्वान, भगवान श्री राम के आदर्श पथ पर चलने का दिया संदेश”

“एक पेड़ माँ के नाम 3.0” अभियान के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण का दिया प्रेरक संदेश

: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय**

“मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  आज अपने सरगुजा प्रवास के दौरान विकासखंड उदयपुर स्थित रामगढ़ के फॉरेस्ट रेस्ट हाउस “राम वाटिका” में स्थापित भगवान श्री राम की प्रतिमा को नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की, इसके साथ ही उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम 3.0″ अभियान के अंतर्गत रुद्राक्ष का पौधारोपण किया।”

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा तथा आत्मीय जुड़ाव का प्रतीक बताया।

“उन्होंने कहा कि माँ के नाम पर लगाया गया एक पौधा न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित भविष्य की सुदृढ़ आधारशिला भी है।”

“उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक पौधे लगाएँ तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लें, ताकि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करते हुए प्रकृति के संतुलन को बनाए रखा जा सके।”

“भगवान श्री राम की प्रतिमा को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्री राम का जीवन मर्यादा, सत्य, त्याग एवं कर्तव्यपरायणता का अनुपम आदर्श है, जो युगों-युगों से समस्त मानवता का मार्गदर्शन करता आ रहा है।”

“उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से प्रभु श्री राम द्वारा प्रशस्त आदर्श पथ पर चलते हुए सेवा, सद्भाव एवं समर्पण के भाव से समाज एवं राष्ट्र के उत्थान में सहभागी बनने का आह्वान किया।”

“इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, लुण्ड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज, सीतापुर विधायक श्री रामकुमार टोप्पो सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।”