Home Blog Page 2504

बच्चों के विवाद पर देर रात को भिड़े दो गुट, जमकर चलीं तलवार, रॉड और लाठियां…

0

 रेलवे स्टेशन के नजदीक जयराम कॉलोनी में आयोजित गरबा कार्यक्रम के दौरान देर रात दो किशोरों के बीच झगड़ा हो गया। विवाद इतना ज्यादा बढ़ा कि किशारों के परिजन भी इसमें शामिल हो गए। दोनों लाठी, रॉड और तलवारें निकल आईं और जमकर मारपीट हुई। झगड़े में एक युवक की अंगुलि कट गई। वहीं चार की हालत गंभीर है और एक को रायपुर रेफर कर दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों के 22 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। खास बात यह है कि पुलिस रात भर गश्त करने का दावा करती रही और सार्वजनिक कार्यक्रम में ही हिंेसक झड़प हो गई। 

चार साल से दोनों परिवारों के बीच चल रहा है झगड़ा

  1. कोतवाली क्षेत्र की जयराम कॉलोनी में रविवार रात नवरात्र पर गरबा चल रहा था। समाज के अलावा आसपास के सैकड़ों लोग यहां गरबा करने आए थे। यहां अंकुर गोरख के भतीजे और कुलदीप नरसिंग के भांजे के बीच गाली-गलौज हुई। दोनों परिवारों में पहले अच्छा संबंध था लेकिन चार साल से झगड़ा चल रहा है। बच्चों के बीच झगड़े की बात पता चलते ही रात लगभग 1.30 बजे कुलदीप और राजा अपने परिजन और दोस्तों के साथ कालोनी के नजदीक पहुंचे। एक दूसरे को गालियां दीं, विवाद बढ़ा तो एक दूसरे पर लाठी, रॉड और तलवार से हमला कर दिया। 
  2. इस हिंसक झड़प में कुलदीप नरसिंह के छोटे भाई अखिलेश की अंगुली कट गई है। वहीं अंकुर गोरख सहित मां-बहन सभी अस्पताल पहुंच गए। सोमवार की सुबह अखिलेश की हालात बिगड़ने पर उसे रायपुर रेफर किया गया। शहर में एक बार फिर गुडांगर्दी चरम पर है। अलग-अलग मोहल्लों में गुंडे पनप रहे हैं। ये लोग आम लोगों को निशाना बनाने के साथ ही बड़े आोयजनों में लड़ाई झगड़ा कर अपनी दबदबा बनाने की कोशिश करते हैं। पुलिस अब पुराने बदमाशों के पेंडिंग मामलों में कार्रवाई करने की बात कह रही है। 

40 साल की उद्यमी तीन साल कैंसर से लड़ी ; घर से फैक्टरी संभाली, टर्नओवर 10 करोड़ सालाना…

0

इंदौर की 40 साल की उद्यमी जासमीन लूला की केक फैक्टरी का सालाना टर्नओवर करीब 10 करोड़ है। छह साल पहले दो लोगों को साथ लेकर इन्होंने केक बनाने की फैक्टरी शुरू की थी। सब कुछ सही चल रहा था, तभी जासमीन को पता चला कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है। डॉक्टरों ने बताया कि ये शुरुआती स्टेज है। जल्द इलाज शुरू कर देना चाहिए। बकौल जासमीन, ‘कैंसर के बाद मैं पूरी तरह टूट चुकी थी। ऐसा लगा कि जिंदगी खत्म हो गई है, लेकिन परिवार ने मुझे हौसला दिया। सबसे ज्यादा इस जंग से लड़ने का जज्बा मेरी उस छोटी सी फैक्टरी ने दिया, जहां मेरे अलावा दो और लोग थे। 


मेरे और उनके परिवार का ख्याल आते ही मैंने कैंसर से लड़ते हुए अपने केक बनाने का सफर भी जारी रखा। तीन साल बाद डॉक्टरों ने बताया कि मैं इस पीड़ा से बाहर निकल गई हूं। जब तक मेरी बीमारी दूर होती मेरी छोटी सी फैक्टरी ने एक कंपनी का रूप ले लिया था। आज मेरा केक ऑनलाइन ब्रांड बन चुका है। शुरुआत में तीन से चार तरह के केक बनाते थे, लेकिन अब 250 से ज्यादा किस्म के केक का निर्माण कर रही हूं। दो साथियों से शुरू हुआ सफर आज 100 को पार चुका है।

ऑस्ट्रेलियन स्कूल ऑफ पतेश्री से ऑनलाइन बेकरी कोर्स 
मैंने बच्चों को बीमारी का एहसास नहीं होने दिया। पहली कीमोथैरेपी लेने के बाद मैं बहुत निराश हो गई। दूसरी कीमोथैरेपी के बाद मुझे चिकन पॉक्स हो गया। तब मुझे लगा कि अब मैं नहीं बच पाऊंगी, तब पति और दोस्तों ने हौसला दिया। डॉक्टर ने मुझे कमरे से बाहर निकलने से इनकार कर दिया। मैंने घर पर ही बैठकर ऑस्ट्रेलियन स्कूल ऑफ पतेश्री से ऑनलाइन बेकरी कोर्स किया। घर में ही कैमरे लगवा लिए और वहीं से फैक्टरी का संचालन करने लगी। 

तीसरी कीमोथैरेपी के बाद मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और थैरेपी लेने के अगले ही दिन फैक्टरी आने लगी। इस दौरान मैंने छह कीमोथैरेपी ली और 31 रेडिएशन थैरेपी कराई। कैंसर की बीमारी का इलाज बहुत ही दर्दनाक होता है। इसलिए मेरा दूसरे मरीजों से कहना है कि परिवार का सोचकर इलाज पूरा जरूर कराएं, क्योंकि दर्द के कारण मरीज इलाज बीच में ही छोड़ देते हैं।


सीख… मरीज अकेले न रहें, योग करें
इस बीमारी में मरीज को अकेले नहीं रहना चाहिए। योग करें, व्यायाम करें, गेम्स खेलें। खुद से और परिवार से प्यार करना सीखें, क्योंकि खुद से प्यार करने वाला ही इस बीमारी को हरा सकता है। अब मैं कैंसर फाउंडेशन से जुड़ चुकी हूं और दूसरे पीड़ितों को बीमारी से लड़ने का हौसला देती हूं।

चार्टर्ड अकाउंटेंट ने गोद लीं अपने गांव की 9 बेटियां, पढ़ाई से शादी तक का पूरा खर्च उठाएंगे…

0

रतलाम जिले के ढिकवा गांव के रहने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट कैलाश नेहरा ने अपने गांव की बेटियों को आर्थिक संरक्षण देने के लिए गोद लिया है। वे इनकी पढ़ाई से लेकर शादी तक का पूरा खर्च उठाएंगे। 20 साल पहले सीए बनने के बाद वह इंदौर बस गए थे, लेकिन अपने गांव से लगाव तब भी कम नहीं हुआ।

बेटियों के चुनाव के लिए उन्होंने हायर सेकंडरी स्कूल के प्राचार्य गोपाल चौहान की मदद ली। प्राचार्य से ही कहा कि वे ऐसी बेटियों की सूची उन्हें दे दें जो पढ़ने में अव्वल हों पर आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण भविष्य में उनकी पढ़ाई पर संकट आने की आशंका हो।

9वीं-10वीं की छात्राएं
प्राचार्य चौहान ने गांव के लोगों की मदद से सूची तैयार की। बेटियों से पूछा गया कि उन्हें कोई आपत्ति तो नहीं, फिर उनके अभिभावकों से भी चर्चा की गई। ये बेटियां ढिकवा के हायर सेकंडरी स्कूल में 9 एवं 10वीं में पढ़ती हैं। अब ये बेटियां अपनी पढ़ाई पर होने वाले खर्च की चिंता और उनके अभिभावक शादी में होने वाले खर्च से मुक्त हैं।

जरूरतमंदों की मदद करना हर सक्षम का काम
कैलाश नेहरा कहते हैं- “मैं भी गांव से ही निकला हूं। मुझे पता कि पढ़ाई में कितना खर्च होता है और मां बाप कैसे जुटाते हैं। पैसों की कमी के कारण कई लड़कियां आगे पढ़ भी नहीं पाती हैं। ऐसे में जो सक्षम हैं उन्हें दूसरों की मदद करना चाहिए, ताकि ऐसे बच्चे जो भविष्य में कुछ करना चाहते हैं वे अपना लक्ष्य पा सकें।”

पंचायत आजीवन उनकी ऋणी रहेगी 
ढिकवा के उपसरपंच छगन जाट ने कहा, “नेहरा परिवार के इस कदम से गांव की लड़कियों को बढ़ावा मिलेगा और उन्हें पढ़ाई में किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी। इसके लिए गांव के साथ ही पंचायत उनकी हमेशा ऋणी रहेगी।

सॉफ्ट ड्रिंक्स से बिगड़ी सेहत, पानी से सुधारी ; फ्लेवर्ड पानी बेचकर 700 करोड़ की कंपनी बना दी…

0

अमेरिका की सिलिकॉन वैली में ऊंची तनख्वाह पाने वाली महत्वाकांक्षी कारा गोल्डिन का वजन लगातार बढ़ रहा था। सुस्ती, थकान ज्यादा और जल्दी होने लगी थी। तब एक डॉक्टर दोस्त ने कारा से कहा कि अगर वह अपनी पीने की डाइट सही कर ले, तो स्वास्थ्य से संबंधित ज्यादातर चीजें अपने आप सही हो सकती हैं। तब कारा ने सॉफ्ट डिंक छोड़ पानी पीना शुरू किया, लेकिन लगातार सादा पानी पीकर बोर हो गईं। इसके बाद वह पानी में कुछ फल के टुकड़े काट के रखने लगी। इससे पानी ज्यादा स्वादिष्ट हो गया। इस अनुभव से कारा को बिजनेस आईडिया आया। 

साल 2005 में कारा ने नेचुरल फ्रूट के साथ फ्लेवर्ड पानी की बॉटल का काम शुरू किया। बिना कोई प्रिजरवेटिव, शुगर या स्वीटनर इस्तेमाल किए कारा ने फ्लेवर्ड पानी की सप्लाई शुरू की। आज उनकी कंपनी हिन्ट की सालाना बिक्री 10 करोड़ डॉलर (700 करोड़ रुपए) से ज्यादा है। हिन्ट 26 फ्लेवर में ड्रिंक बना रही है। गूगल, फेसबुक सहित सिलिकॉन वैली की सैकड़ों कंपनियां अपने ऑफिस में इन ड्रिंक्स का इस्तेमाल करती हैं।
 
पानी पीने से 30 दिनों में 9 किलो वजन कम हुआ 
परेशानी के दिनों में कारा ने देखा था, वह हर दिन डाइट कोला की लगभग 10 केन पी रही थीं। यानि हर दिन 3 से 4 लीटर कैफीनयुक्त, कृत्रिम रूप से मीठा किया हुआ लिक्विड। इसी वजह से उन्हें सुस्ती और थकान ज्यादा हो रही थी। वजन और मुंहासे बढ़ रहे थे। इसके बाद कारा ने एओएल टेक ग्रुप की अपनी शीर्ष स्तर की नौकरी छोड़ दी। पूरी लाइफस्टाइल को बदला। तब एक महीने के अंदर उसका वजन 9 किलो कम हो गया, मुंहासे साफ हो गए। वह खुद को फिर से ऊर्जावान महसूस करने लगीं। 


सॉफ्ट ड्रिंक्स हमेशा विवादों में रहा
कई विशेषज्ञों और हेल्थ रिपोर्ट का दावा है कि ये ड्रिंक्स हेल्थ के लिए नुकसानदायक हैं। यह दांत से लेकर हमारी हड्डियों तक को नुकसान पहुंचाते हैं। सितंबर 2019 में आई वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार अर्ली डेथ के लिए भी ये ड्रिंक्स जिम्मेदार हैं। इसमें मौजूद फॉस्फोरिक एसिड हड्डियों को कमजोर बनाता है। इसमें मौजूद आर्टिफिशियल शुगर और प्रिजर्वेटिव भी हानिकारक है। हालांकि कंपनियां इससे इनकार करती रही हैं।

मिस इंग्लैंड ने कोलकाता के बच्चों के लिए टिकट बेचकर 17 लाख रुपए का फंड जुटाया…

0

 भारतीय मूल की मिस इंग्लैंड-2019 भाषा मुखर्जी ने कोलकाता में सड़कों और झुग्गियों में रहने वाले बच्चों के लिए 20 हजार पाउंड (करीब 17 लाख रुपए) का फंड जुटाया और एक संस्था को दे दिया। उन्होंने यह राशि एक कार्यक्रम के टिकट बेचकर और चैरिटी के जरिए एकत्रित की। भाषा इंग्लैंड के लिंकनशायर में जूनियर डॉक्टर के तौर पर काम करती हैं।

भाषा ने कहा- “मैं कोलकाता से हूं। इसलिए ‘होप’ फाउंडेशन मेरे लिए बेहद खास है। होप सिर्फ कोलकाता के बच्चों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के बच्चों के लिए है।” भाषा के मुताबिक, वह 9 साल की उम्र में लंदन चली गई थीं। संस्था के मुताबिक, यह रकम कोलकाता में झुग्गियों में रहने वाले बच्चों पर खर्च की जाएगी।

1999 में स्थापित हुई थी होप संस्था

1999 में आयरलैंड की मॉरीन फॉरेस्ट ने कोलकाता में होप फाउंडेशन की स्थापना की थी। संस्था सड़कों पर रहने के लिए मजबूर 14 युवा लड़कियों को सुरक्षा और संरक्षण देने के लिए बनाई थी। तब इसका एक सेंटर था लेकिन अब इसकी तादाद 12 है।

803 किलोग्राम का कद्दू लाकर दंपत्ति ने जीता 1.60 लाख रुपए का पुरस्कार…

0

कनाडा की ब्रुस काउंटी स्थित गांव पोर्ट एल्गिन में शनिवार को 33वां सालाना पम्पकिन फेस्ट का आयोजन हुआ। इसमें कैमरॉन के जेन और फिल हंट दंपती अपने साथ करीब (1771 पाउंड)  803.54 किलो वजनी कद्दू लेकर पहुंचे। इन्होंने सबसे बड़े आकार का कद्दू लाकर इस फेस्टिवल में 3000 कनाडियन डॉलर (1.60 लाख रुपए) का पुरस्कार जीता है।

जेन हंट ने कहा, निश्चित रूप से यह टीम का प्रयास है। मैंने सभी बीजों को ठीक से लगाया। बेलों के पास से उगे खरपतवार को हटाया। बर्मी खाद डाली, कड़ी मेहनत की। जिसके परिणाम आपके सामने हैं।

1990 से रिकॉर्ड बनाना चाहते थे
कपल अपने खेतों में 1990 से ही बड़ी-बड़ी सब्जियों को उगाने की प्रतियोगिता देखने के बाद से ही जुनूनी है। जेन भी रिकॉर्ड बनाना चाहते थे और अब जाकर पूरा हुआ है। 

पांच देशों के रेगिस्तान में वैज्ञानिक सौर ऊर्जा और खारे पानी से उगा रहे फल-सब्जियां…

0

 ब्रिटेन की कंपनी ग्रीनहाउस सीवाटर ग्रीनहाउस के वैज्ञानिकों ने रेगिस्तान में समुद्र के खारे पानी और सौर ऊर्जा से फल, खीरा व टमाटर जैसी सब्जियां उगाने की तकनीक विकसित की है। इस कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया, आबूधाबी, सोमालीलैंड,  ओमान और टेनेराइफ जैसे सूखे और रेगिस्तानी इलाकों में यह परियोजना शुरू की है।

इन इलाकों में अत्यंत गर्म वातावरण के बावजूद इस तकनीक से यहां हजारों किलो फल व सब्जियां उगाई जा सकी हैं। इसके लिए मोटे गत्ते से खास तरह के कूलिंग हाउस बनाकर खेती की गई।

गत्ते गार्डन को कूल और नमीयुक्त रखता है
सामान्यत: शीशे से बने ग्रीन हाउस को इस तरह से डिजायन किया जाता है कि वह गार्डन को नम और गर्म रखता है, लेकिन गत्ते से बने इन कूलिंग हाउस का इस्तेमाल गार्डन को नम और ठंडा रखने के लिए किया गया। इन्हें इस तरह से बनाया गया कि जब गीले गत्ते के पैनलों पर बाहर से गर्म हवा पड़े तो वाष्पीकरण की वजह से भीतर का तापमान कम हो जाए।

इन पैनलों को गीला करने के लिए सोलर पंप लगाए गए जो इन पर ऊपर से खारा पानी छिड़कते रहते हैं। यह पानी गत्ते की दीवारों से होता हुआ वाष्पित हो जाता है। इस वाष्पीकरण से ठंडक पैदा करने की तकनीक ने रेगिस्तान में खेती के लिए आदर्श वातावरण निर्मित कर दिया।

गत्ते पर जमा नमक बेचने के काम आता
समुद्र का खारा पानी बार-बार इन गत्ते की दीवारों से गुजरने की वजह से इनकी बाहरी दीवारों पर नमक जमा हो जाता है। यह नमक गत्ते को तो मजबूत बनाता ही है, साथ ही इस नमक का इस्तेमाल व्यावसायिक तौर पर भी किया जा सकता है।

2000 हेक्टेयर में खेती कर 40 लाख का पेट भर सकते हैं
वाटर ग्रीनहाउस के संस्थापक चार्ली पैटन बताते हैं कि सोमालीलैंड की करीब 40 लाख जनसंख्या का पेट भरने के लिए सिर्फ 2000 हेक्टेयर में ऐसी खेती करने की जरूरत है। सोमालीलैंड में प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद अब वहां पर इस खेती से हर साल करीब 750 टन टमाटर पैदा हो रहे हैं। पैटन कहते हैं कि दुनिया के और सूखे इलाकों में वह इस तरह के प्रोजेक्ट शुरू करने को लेकर उत्साहित हैं।

लूूटपाट के आरोपियों की कोर्ट में पेशी से पहले रास्ते में पुलिस की शराब पार्टी, दो कांस्टेबल सस्पेंड…

0

 छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में लूटपाट के आरोपियों को कोर्ट में पेश करने से पहले रास्ते में पुलिस कर्मियों ने जमकर शराब पार्टी की। इसके बाद कैदियों को लाकर वापस छोड़ दिया और पुलिस लाइन चले गए। इन सबके बावजूद अधिकारियों को पता नहीं चल सका। पुलिस की इस शराब पार्टी का तीन दिन बाद वीडियो वायरल हो गया। इस पर संज्ञान लेते हुए मंगलवार को एसपी ने जांच के आदेश दे दिए। रिपोर्ट आने के बाद दो कांस्टेबल को संस्पेंड कर दिया गया है। 

पुलिस लाइन से मंगवाई गई थी फोर्स, अधिकारियों को शराब पीने की भनक तक नहीं लगी

  1. जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला 4 अक्टूबर का है। सेंट्रल जेल में बंद लूटपाट के आरोपी सुनील रजक, जितेंद्र यादव, बलवा का आरोपी रमेश बाबा और आर्म्स एक्ट आरोपी शुभम वर्मा व चेतन दास की बिल्हा कोर्ट में पेशी थी। सेंट्रल जेल प्रबंधन ने शुक्रवार को पांचों आरोपियों को कोर्ट ले जाने के लिए पुलिस लाइन से फोर्स की मांग की। इस पर कैदियों को ले जाने के लिए प्रधान आरक्षक राजेंद्र सिंह, आरक्षक नानूराम डहरिया, दिलीप वैष्णव और रवि वानखेड़े की ड्यूटी लगाई गई।  
  2. ड्यूटी लगने के बाद पांचों बंदियों को शासकीय वाहन में लेकर पुलिसकर्मी बिल्हा कोर्ट के लिए रवाना हुए। इस बीच कोर्ट पहुंचने से पहले पुलिसकर्मियों ने शनीचरी बाजार में शराब की दुकान के पास गाड़ी खड़ी कर दी। यहां बंदियों को गाड़ी में छोड़कर पुलिसकर्मी दुकान के पास बैठकर शराब पीने लगे। इसके बाद नशे में ही आरोपियों को लेकर कोर्ट पहुंच गए। पुलिसकर्मी पेशी के बाद बंदियों को जेल छोड़कर लाइन के लिए रवाना हो गए। यहां भी अधिकारियों को पुलिसकर्मियों के नशे में होने की भनक नहीं लगी। 
  3. इसके बाद सोमवार देर शाम सभी पुलिसकर्मियों को शराब पीते वीडियो वायरल हो गया। इसमें कुछ पुलिसकर्मी वर्दी में भी दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एसपी तक बात पहुंची तो उन्होंने मामले की जांच के निर्देश दे दिए। मंगलवार दोपहर तक जांच रिपोर्ट एसपी को सौंप दी गई। रिपोर्ट मिलने के बाद उन्होंने दो कांस्टेबल को फिलहाल सस्पेंड कर दिया है। वहीं पूरे मामले की जांच अभी जारी है। संभावना है कि इस मामले में अन्य पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिर सकती है।

छत्तीसगढ़ : बच्चा चोरी के संदिग्ध काे ग्रामीणों ने पीटा, पुलिस पर भी बरसाईं लाठियां…

0

पंडरिया थाना क्षेत्र के पाढ़ी गांव में सोमवार को बच्चा चोरी के शक में गुस्साई भीड़ ने एक संदिग्ध की पिटाई कर दी। सूचना पर पहुंची पुलिस पर भी भीड़ ने लाठियां बरसाई और पथराव किया। मामला शांत नहीं होने पर लोगों ने पुलिसकर्मियों काे घेर लिया। घेराव करने वालों में महिलाएं भी शामिल रहीं।

करीब 4 घंटे बाद मामला शांत होने के बाद करीब दोपहर 3 बजे ग्रामीणों के चंगुल से छूटकर पुलिसकर्मी पंडरिया थाने पहुंचे। इस घटना में एसडीओपी नरेन्द्र वेंताल, टीआई संदीप टंडन समेत करीब 10 पुलिसकर्मियों को चोटें आई है। पुलिस गाड़ी को भी नुकसान पहुंचा है। पुिलस के अनुसार संदिग्ध से पूछताछ की जा रही है।  वह ठीक से अपना नाम भी नहीं बता पा रहा है। वह पंडरिया में घूम रहा था। भटकते हुए वह पाढ़ी गांव पहुंच गया, जहां उसे बच्चा चोर समझ ग्रामीणों ने पिटाई कर दी।

छत्तीसगढ़ : रायपुर में धार्मिक आयोजन, रैली या जुलूस में िबना अनुमति डीजे बजा तो एफआईआर…

0

 राजधानी में किसी भी धार्मिक आयोजन, जुलूस या रैली, उत्सव, विसर्जन या झांकी में डीजे बजाना बैन कर दिया गया है। राज्य बनने के बाद एेसा पहली बार निर्णय लिया गया है।  िबना प्रशासन की अनुमति डीजे बजाया तो सिस्टम जब्त कर लिया जाएगा। साथ ही दोिषयों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा इसकी जांच के लिए प्रशासन और निगम अफसरों की पांच टीम भी बना दी गई है।  दरअसल पिछले हफ्ते ही महापौर प्रमोद दुबे ने दावा किया था कि डीजे की तेज आवाज की वजह से दो बुजुर्गों की मौत हो गई थी।

इसके बाद ही कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन ने प्रशासन और निगम अफसरों से प्रस्ताव मांगा था कि किन नियमों के आधार पर डीजे को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जा सकता है। सोमवार को अफसरों की रिपोर्ट मिलने के बाद कलेक्टर ने आदेश जारी कर साफ कर दिया है कि डीजे बजाने के लिए प्रशासन की अनुमति जरूरी है। 


उन्होंने आदेश में कहा है कि छात्रों की पढ़ाई, बुजुर्गों, निशक्तजनों, मरीजों को डीजे की तेज आवाज की वजह से कई तरह की परेशानियां होती हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट और आवास एवं पर्यावरण विभाग की ओर से जनहित में दिए गए निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाएगा। इसके तहत रायपुर जिले में बिना अनुमति के डीजे के साथ ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके अलावा मल्टी टोंड और प्रेशर हॉर्न पर भी कार्रवाई कर उसे जब्त किया जाएगा।

ऐसे मिलेगी अनुमति : डीजे बजाने के लिए संबंधित लोगों या संस्थाओं को निगम सीमा के अाधार पर जिम्मेदार अफसरों के पास आवेदन देना होगा। निगम क्षेत्र की शहरी सीमा के लिए यह आवेदन एडीएम के पास लिए जाएंगे। बाकी तहसीलों में एसडीएम के पास आवेदन देना होगा। आवेदन में इस बात की जांच की जाएगी कि डीजे कहां और कितने समय बजाया जाएगा। वहां आसपास अस्पताल, स्कूल या बड़ी आबादी तो नहीं है। सभी बिंदुओं पर जांच के बाद ही किसी को अनुमति मिलेगी। 

इन अफसरों की टीमें : शहर के अलावा बाकी तहसीलों में डीजे की जांच के लिए एसडीएम प्रणव सिंह, राजीव पांडेय, संदीप अग्रवाल, डिप्टी कलेक्टर अंकिता गर्ग और पूनम शर्मा को जिम्मेदारी दी गई है। ये अफसर अपनी टीम के साथ लगातार इस बात की जांच करेंगे कि बिना अनुमति के कहीं भी डीजे बज तो नहीं रहा है।