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यहां मुसलमान बनाते हैं दशहरा पर रावण के पुतले

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उत्तर प्रदेश के बिजनौर शहर में नवरात्रों के बाद मनाए जाने वाले विजय दशमी को लेकर मुस्लिम कारीगर रावण दहन के लिए पुतला बनाने के काम में जी जान से जुटे हैं। ये मुस्लिम कारीगर पिछले कई सालों से रावण का पुतला बनाकर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। जहां विजय दशमी यानी दशहरा के त्योहार को हिन्दू बड़े धूम धाम से मनाते हैं।

वहीं, यहां के मुस्लिम परिवार का भी इस त्योहार से गहरा नाता है। हालात ये है कि बुराई पर अच्छाई की जीत को लेकर मनाए जाने वाले दशहरा का त्योहार मुस्लिम परिवार भी मनाते हैं। इनके हाथों से बनाए गए रावण के पुतले का ही बिजनौर के रामलीला मैदान में दहन किया जाएगा। 8 अक्टूबर यानी मंगलवार के दिन पूरे भारत में दशहरे के त्योहार को धूमधाम से मनाने की तैयारी चल रही है। इसी दिन रावण के पुतले को जलाकर लोग इस त्योहार को मनाते चले आये हैं। इस त्योहार को जहां हिन्दुओं का बड़ा त्योहार माना जाता है। वहीं, बिजनौर में इस त्योहार में रावण के पुतले को बनाने वाले कोई और नहीं, बल्कि बिजनौर के मुस्लिम कारीगर हैं। ये मुस्लिम कारीगर आज से नहीं, बल्कि अपने पिता और दादा के जमाने से रावण बनाते चले आ रहे हैं। ये त्योहार बिजनौर में हिन्दू और मुस्लिम की एकता और मिसाल का प्रतीक भी है।

रावण का पुतला बनाने वाले मोहम्मद सलीम और सलमान का कहना है कि वे लोग 1 महीने से रावण का पुतला बना रहे हैं। इस पुतले को बनाने में लगभग कई हज़ार का खर्चा आ जाता है। ये कारीगर बांस से रावण के पुतले को तैयार कर रहे हैं। इन रावणों की लंबाई लगभग 20 फ़ीट होंगी। अभी इन्हें तैयार किया जा रहा है। अंतिम रूप से तैयार होने के बाद विजय दशमी के दिन सुबह रामलीला मैदान में पहुंचाया जाएगा। शाम को इस रावण के पुतले को जलाकर समाज में बुराई पर अच्छाई की जीत का आम जनता में संदेश दिया जाएगा।

सरकार ने एक जगह से दूध और​ चिकन बेचने की योजना बंद की

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मध्यप्रदेश की सरकार ने एक ही जगह से गाय का दूध और कड़कनाथ मुर्ग़े के मांस को बेचने की योजना को बंद कर दिया है. इस योजना के तहत गाय का दूध और चिकन को एक ही पार्लर से बेचा जा रहा था.

हालांकि इसमें एक पार्टिशन किया गया था. लेकिन पिछले महीने शुरु हुई इस योजना का विरोध विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जैन समाज के लोग कर रहे थे.

जब इस योजना की शुरुआत की गई थी तो सरकार का दावा था कि उसके पार्लर में मिलने वाले चिकन और गाय के दूध की शुद्धता की पूरी गारंटी रहेंगी. लेकिन भाजपा ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी. भाजपा से जुड़े कई स्थानीय नेताओं का कहना है कि इससे लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी. भाजपा के नेताओं का कहना था कि सरकार को किसी भी विषय पर निर्णय लेने से पहले देखना चाहिये कि उनका क़दम किसी धर्म के ख़िलाफ़ तो नहीं है.

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा, “यह निर्णय बिना सोचे विचारे लिया गया था. गाय और उसके दूध का हिंदू धर्म में क्या स्थान है यह सरकार को नहीं मालूम क्या. सरकार ने उसके बावजूद इसे चिकन के साथ शुरु कर दिया.”

वो कहते हैं, “जो व्यक्ति चिकन बेच रहा है वही दूध कैसे बेच सकता है. आख़िर एक ही व्यक्ति के हाथ से जो चिकन को भी छू रहा हो और जो दूध भी बेच रहा हो, कोई कैसे ख़रीद सकता है.”

वह आरोप लगाते हैं, “यह कोशिश थी हिंदुओं को नज़र अंदाज़ करने की.”

वही जैन समाज से ताअल्लुक़ रखने वाले रविंद्र जैन भी इसके ख़िलाफ़ थे. उन्होंने सोशल मीडिया के ज़रिये मुहिम चलाई थी.

उन्होंने सरकार से सवाल किया, “क्या आपको मप्र की जनता ने इसीलिए चुना था कि आप दूध की दुकानों से कड़कनाथ मुर्ग़े का मांस बेचें? यह सब तब हो रहा है जब आपकी सरकार महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती मनाने का ढोंग कर रही है.”

उन्होंने कहा कि सरकार को इस तरह के निर्णय नहीं लेने चाहिये.

इसका विरोध करने वालों की मांग थी कि चिकन और दूध के पार्लर अलग-अलग खोले जाने चाहिये और बेचने वालों को भी अलग-अलग होना चाहिये.

प्रदेश के पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव ने विपक्ष की मांग को ख़ारिज कर दिया था. उन्होंने कहा था, “चिकन पार्लर और दूध पार्लर के बीच में पार्टीशन रखा गया है. लेकिन विपक्ष बेवजह का मुद्दा बना रहा है.”

लेकिन अब सरकार ने आदेश निकाल कर अपने निर्णय को बदल दिया है. अब चिकन और दूध दोनों ही अलग पार्लर से बेचे जायेंगे और दोनों अलग-अलग स्थान पर होगें.

भोपाल में शनिवार को आरएसएस से जुड़ी संस्था सहकार भारती ने भी इस पार्लर के विरोध में प्रदर्शन किया और सरकार से मांग की कि इसे बंद किया जाये.

शहर में पहला पार्लर पिछले महीने मध्य प्रदेश राज्य पशुधन और कुक्कुट विकास निगम प्रबंध संचालक टी एस तोमर ने एक आदेश निकाल कर चिकन बेचने की योजना को फ़िलहाल बंद कर दिया है. नये आदेश के मुताबिक़ जब तक दूध का नया पार्लर नहीं बन जाता तब तक चिकन पार्लर को बंद रखा जाएगा.

अब सरकार चिकन पार्लर और दूध पार्लर को दूरी पर खोलेंगी ताकि किसी को भी कोई दिक़्क़त न आये.

इस योजना के तहत चिकन बेचने के पीछे सरकार की मंशा थी कि आदिवासियों को रोज़गार मिले और उन्हें अपने उत्पाद का सही दाम मिले. इसमें प्रदेश के झाबुआ, धार और अलीराजपुर में मिलने वाले कड़कनाथ मुर्गे का मांस और अंडे उपलब्ध कराए जा रहे थे. यह पार्लर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत खोले जा रहे थे.

कड़कनाथ मध्यप्रदेश के आदिवासी झाबुआ झाबुआ, धार और अलीराजपुर इलाक़े में मिलता है. हालांकि अब यह छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों में भी मांग की वजह से पहुंच चुका है. प्रदेश का यह वह इलाक़ा है जहां पर बहुत ज्यादा ग़रीबी है. कड़कनाथ की मांग होने के बावजूद इसका फ़ायदा वहां के आदिवासियों को नहीं हो पाता है इसलिये सरकार का तर्क था कि भोपाल जैसे शहर में जब इसका चिकन बेचा जाएगा तो इन लोगों को उसकी उचित क़ीमत मिलेगी. इससे फ़ायदा उन्हीं आदिवासियों को होगा जो इसको पालने का काम करते है.

कड़कनाथ की ख़ासियत यह है कि इसका मांस और पूरा मुर्गा काला होता है. इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. यह मुर्ग़ा कई बीमारियों से भी बचाता है. आमतौर पर मांग अधिक होने की वजह से इस मुर्ग़े का मांस दूसरे चिकन की अपेक्षा काफ़ी महंगा बिकता है.

मोदी सरकार पर भड़कीं पूजा बेदी, यूजर्स बोले- एक्टिंग और शादी में फेल फिर भी ज्ञान दे रही हो

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बॉलीवुड एक्ट्रेस पूजा बेदी ने हाल ही में केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है, जिसके बाद वह सुर्खियों में आ गई हैं। हाल ही में पूजा बेदी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए अपने ट्विटर हैंडल से लिखा, ‘यह समय है, जब भारतीय सरकार को कॉर्पोरेट की तरह काम करना चाहिए। हमारे मंत्रियों को जो पॉजिशन मिली है, उसके वह काबिल नहीं हैं। यह कर दाताओं के पैसे की बर्बादी है और साथ ही जनहित के खिलाफ भी है।’ पूजा बेदी ने आगे कहा, ‘एक कॉर्पोरेट जॉब के लिए सही व्यक्ति को चुनते हैं। ना कि किसी भी सीनियर व्यक्ति को सिर्फ जगह भरने के लिए रखते हैं।’ पूजा बेदी के इस ट्वीट पर लोग खूब रिएक्ट कर रहे हैं। अपने इस ट्वीट में पूजा बेदी ने भारतीय जनता पार्टी के ट्विटर हैंडल पर भी टैग किया है।क्‍या लिखा पूजा बेदी ने

पूजा बेदी ने आगे कहा, ‘एक कॉर्पोरेट जॉब के लिए सही व्यक्ति को चुनते हैं। ना कि किसी भी सीनियर व्यक्ति को सिर्फ जगह भरने के लिए रखते हैं।’ पूजा बेदी के इस ट्वीट पर लोग खूब रिएक्ट कर रहे हैं। अपने इस ट्वीट में पूजा बेदी ने भाजपा को भी टैग किया है। पूजा के इस ट्वीट पर लोग अपनी प्रतिक्रिया जाहिर कर रहे हैं।

यूजर ने लिखा- एक्टिंग में फेल शादी में फेल और अब बीजेपी को ज्ञान दे रही हैं

एक यूजर के कमेंट पर प्रतिक्रिया देते हुए पूजा ने लिखा- यह केवल शैक्षिक डिग्री के बारे में नहीं है। इसके लिए जरूरत है कि वे आप जो कुछ भी करते हैं उसमें आपकी रुचि और जुनून हो। पूजा के इस कमेंट का जवाब देते हुए यूजर ने लिखा- एक्टिंग में फेल शादी में फेल और अब बीजेपी को ज्ञान दे रही हैं। इस कमेंट का भी पूजा ने जवाब दिया। उन्होंने लिखा- किस चीज की विफलता? मुझे फिल्मफेयर पुरस्कारों के लिए नामित किया जा चुका है। और 27 साल बाद JJWS और पहला नशा के लिए मुझे याद किया जाता है। मैंने एक्टिंग को जल्दी छोड़ना इसलिए चुना क्योंकि उन दिनों शादी और फिल्मी करियर के बीच सीधा संघर्ष था। और एक बुरी शादी को छोड़ना सफलता है, असफलता नहीं।

उमर अब्‍दुल्‍ला को लेकर भी पूज बेदी ने कहा था कुछ ऐसा

जम्मू और कश्मीर में लगभग महीने भर से नजरबंद नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के समर्थन में पूर्व एक्ट्रेस पूजा बेदी उतरी हैं। अब्दुल्ला की दोस्त बेदी ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार जल्द ही पूर्व सीएम की रिहाई के संबंध में कोई कदम उठाएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), गृह मंत्री अमित शाह और कुछ पत्रकारों को टैग करते हुए सोमवार (दो सितबंर) को ट्वीट किया। लिखा, “उमर अब्दुल्ला को हिरासत में लिए हुए एक महीने के से अधिक का वक्त हो चुका है। वह मेरे बैचमेट रहे हैं और परिवार के मित्र (तीन पीढ़ियों से) भी हैं।

सैफ इस फिल्म में होंगे एक नागा साधु, जानिए सारी जानकरी.

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इस फिल्म में वह एक नागा साधु का किरदार निभाएंगे। फिल्म में सैफ का कॉन्सेप्ट और लुक इंट्रेस्टिंग लग रहा है, मेकर्स फैंस के साथ कई शानदार टीजर और पोस्टर्स शेयर कर चुके हैं। फिल्म से जुड़ीं कई तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल हुई हैं। इंटरनेट पर मौजूद एक तस्वीर में हम सैफ को भारी दाढ़ी में देख सकते हैं।

जबकि एक और तस्वीर में उनकी आंख और चेहरे पर चोट के निशान दिख रहे हैं। हालांकि, ये मेकअप से किया गया है, लेकिन इस तस्वीर में सैफ काफी डरावने लग रहे हैं और तस्वीर काफी दर्दनाक भी है। सैफ के दाढ़ी वाले लुक की तुलना हॉलीवुड एक्टर जॉनी डेप से लेकर उनकी हिट फ्रैंचाइज़ी, पाइरेट्स ऑफ द कैरेबियन तक की गई है। हालांकि, हेयर स्टाइलिस्ट ने इन सभी रिपोर्ट्स को नकार दिया था और कहा था कि यह सिर्फ एक संयोग है।

फिल्म में दीपक डोबरियाल, सोनाक्षी सिन्हा, जोया हुसैन और मानव विज भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म 18 वीं सदी की है। जिसमें सैफ नागा साधु के रूप में बदला लेते हुए देखेंगे। ‘लाल कप्तान’ 18 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है।

पत्नी की आंखों के सामने कटी पति​ की गर्दन, धड़ से 12 फीट दूर जा गिरा सिर

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राजस्थान के कोटा जिले के सुल्तानपुर में सोमवार दोपहर को एक ट्रक ने बाइक को टक्कर मार दी, जिससे पति की मौत हो गई और पत्नी घायल हो गई। हादसे का यह मंजर देखने वालों रूह कांप उठी थी, क्योंकि पति की गर्दन कट गई और उसका सिर धड़ से करीब 12 फीट दूर जा गिरा। गंभीर रूप से घायल पत्नी अस्पताल में उपचाराधीन है।

जानकारी के अनुसार कोटा जिले के सीसवाली गांव निवासी सत्यप्रकाश नागर पत्नी संजू बाई के साथ बाइक से बड़ौद की ओर से सुल्तानपुर की ओर आ रहे थे। इसी दौरान सुल्तानपुर की ओर जा रहा खाद से भरा ट्रक आ रहा था। उसने बाइक को सामने से टक्कर मार दी। सत्यप्रकाश उछलकर ट्रक के टायर के नीचे आ गया। इससे उसकी गर्दन धड़ से अलग होकर 12 फीट दूर सड़क किनारे जा गिरी। जबकि पत्नी संजू गंभीर घायल हो गई। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना देकर घायल महिला को सुल्तानपुर अस्पताल पहुंचाया।

सिर में गंभीर चोट होने के कारण चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार कर कोटा रैफर कर दिया। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया था, जिसे बड़ौद चौकी के पास से पुलिस ने गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू की। घटना से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त हो गया। लोगों ने प्रदर्शन कर सड़क पर स्पीड ब्रेकर व स्पीड पर लगाम लगाने की मांग की।

छात्र लाइव थ्री-डी लैब में देख सकेंगे शरीर में कैसे दौड़ता है खून, अंग्रेजी का उच्चारण भी होगा सही

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अभी तक हम किताबों से पढ़कर यह समझते आए हैं कि इंसान के शरीर में खून किस प्रकार अस्थि मज्जा या बोन मैरो में बनता है और किस तरह से हृदय के माध्यम से शरीर के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचता है। लेकिन अब नए जमाने की पीढ़ी को यह सब याद करने की जरुरत नहीं रह जाएगी। बच्चे अब यह प्रक्रिया थ्री-डी लैब में अपनी आंखों से देख सकेंगे। साथ ही, यह भी देख सकेंगे कि हार्ट अटैक के बाद हृदय की भूमिका में किस प्रकार बदलाव आता है और डॉक्टर उन्हें कैसे बचाते हैं। इसी प्रकार खगोलीय घटनाएं हो या महासागरीय परिवर्तन, बच्चे थ्री-डी तकनीकी से इन बदलावों को इस प्रकार महसूस कर पाएंगे, जैसे ये घटनाएं खुद उनके आसपास घट रही हों। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीकी अब पूरी दुनिया के साथ देश में एजुकेशन सिस्टम को बदल देगी।

20वीं सदी की तकनीक से पढ़ाई

थ्री-डी तकनीकी से इस विशेष लैब को तैयार करने वाली कंपनी ग्लोबस के एक अधिकारी अभिषेक सिंह ने अमर उजाला को बताया कि बच्चों की समस्या यह है कि वे स्वयं तो 21वीं सदी में पढ़ रहे हैं, लेकिन जिन चीजों के माध्यम से उन्हें शिक्षा दी जा रही है वे बीसवीं सदी में बनी थीं। उन्हें जिन चीजों के बारे में पढ़ाया जा रहा है, वे स्वयं उससे भी पहले की हैं। इस नई तकनीकी के जरिए बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा में परिवर्तन आने की संभावना है, क्योंकि इस तकनीकी से बच्चे चीजों को ज्यादा बेहतर ढंग से सीख पाएंगे। उन्हें पाठ्यक्रम को याद करने की आवश्यकता बहुत कम रह जाएगी। विशेष तकनीकी से बने थ्री-डी लैब के बीच बैठे बच्चे इन घटनाओं को एक प्रत्यक्षदर्शी की भांति महसूस कर पाएंगे, जिससे उन पर इसका बहुत अच्छा असर होगा।

अंग्रेजी सिखाएगी यह तकनीक

भारत जैसे देश में पहली कक्षा से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक अंग्रेजी सीखने की कोशिश जारी रहती है। लेकिन इसके बाद भी इस पर पूर्णता नहीं आती। सबसे ज्यादा समस्या अंग्रेजी शब्दों के सही उच्चारण को लेकर बनी रहती है क्योंकि अनेक शिक्षक स्वयं शब्दों के असली उच्चारण नहीं जान पाते। नई तकनीक बच्चों को एबीसीडी सिखाने से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक अंग्रेजी सिखाने में मदद करेगी। तकनीकी के माध्यम से बच्चे बिल्कुल शुद्ध उच्चारण करना सीख सकेंगे। तकनीकी के माध्यम से आप स्वयं का टेस्ट लेकर जान पाएंगे कि आपकी अंग्रेजी का क्या स्तर है। यह तकनीक शब्दों के उच्चारण के मूल्यांकन करने में भी सक्षम है।

स्मार्टफोन पर चलेगी क्लास

इस खास तकनीक के माध्यम से बनी विशेष कक्षाओं में टीचर किसी भी जगह पर क्लास ले सकेंगे, जबकि बच्चे कहीं भी बैठकर सीख सकेंगे। एक सामान्य स्मार्टफोन पर ही वे न सिर्फ टीचर की बताई बातें सुन सकेंगे, बल्कि वे सीधे लाइव जुड़कर टीचर से सवाल-जवाब भी कर सकेंगे। लैब की सुविधा के लिए किसी संस्था में जाकर उसका अनुभव लेना होगा क्योंकि इसके लिए विशेष लैब की आवश्यकता होती है।

स्मार्ट बोर्ड में बदल जाएगी वीडियो स्क्रीन

अभिषेक सिंह के मुताबिक यह भय बिल्कुल गलत है कि इस तकनीकी के आ जाने से अध्यापकों की भूमिका समाप्त हो जाएगी। बल्कि ये तकनीक बच्चों का प्रदर्शन सुधारने में मददगार होगी। अध्यापक इसके माध्यम से अपनी बात ज्यादा बेहतर ढंग से समझा पाएंगे। अगर अध्यापक विशेष तकनीक से बच्चों को पढ़ाने में असमर्थ रहेंगे, तो स्मार्ट क्लास की वीडियो स्क्रीन एक स्मार्ट बोर्ड में बदली जा सकेगी और वे उस पर सामान्य तरीके से लिखकर भी बच्चों को पढ़ा सकेंगे।

छत्तीसगढ़ : नाबालिग से रेप के बाद उसे मरा समझकर फेंक​ दिया था, आरोपी गिरफ्तार

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छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार के ग्राम नवापारा में नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म करने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. बलौदाबाजार के गिधौरी थाना क्षेत्र में वारदात को अंजाम दिया गया था. यहां पांचवी क्लास की छात्रा से करीब एक सप्ताह पहले आरोपियों ने दुष्कर्म किया था. इसी मामले में पुलिस ने गिरफ्तारी की है. आरोपियों ने नाबालिग का अपहरण कर उसके साथ रेप किया. इसके बाद उसे जांजगीर चांपा जिले के मुडपार में उसे फेंक दिया.

बलौदाबाजार पुलिस ने मामले में सोमवार को खुलासा किया. पुलिस ने बताया कि नाबालिग को अचेत अवस्था में गिधौरी पुलिस ने बरामद किया था. इसके बाद उसे इलाज के लिए रायपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसी दुष्कर्म मामले में आज पुलिस टीम ने खुलासा किया. पुलिस के मुताबिक लगातार सीसी फुटेज की जांच व ट्रक चालकों से पूछताछ के बाद दो लोगों को हिरासत में लिया गया. इसके बाद नाबालिग पीड़िता से शिनाख्त (पहचान) कराई गई.

जेल भेजे गए आरोपी
बलौदाबाजार की एएसपी निवेदिता पाल ने बताया कि मुख्य आरोपी परसेन भार्गव को ग्राम कोटडबरी जिला जांजगीर से गिरफ्तार किया गया है. एक सह आरोपी उमेश कुमार कर्ष ग्राम ठठारी जिला जांजगीर चांपा को भी गिरफ्तार किया गया है. आरोपी की पहचान खुद नाबालिग ने की है. पुलिस ने पूछताछ के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल दाखिल करा दिया गया है.

बस्तर के इन गावों में दशहरे की अनोखी परंपरा, यहां रावण दहन की बजाय मचती है ‘लूट’

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विजयादशमी का नाम आते ही रामलीला व रावण का पुतला दहन की छवि मानस पटल पर होती है, जिसमें दशहरा के अंत मे रावण के पुतले दहन किया जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के कोंडागांव जिले के कुछ गांवों में चार दशक से भी अधिक समय से एक परंपरा चल रही है, जहां रावण दहन की बजाय वध किया जाता है और रावण की नाभि से निकले अमृत का तिलक किया जाता है. इसके पीछे ग्रामीणों की अपनी ही एक मान्यता है.

बस्तर संभाग के कोण्डागांव जिले के ग्राम भुमका और हिर्री में चार दशक पहले से अनोखे तरीके से दशहरा मनाया जाता है. इन गांव में मिट्टी का रावण का पुतला बनाया जाता है. भुमका गांव के कलाकर मोहन सिंह कुंवर ने बताया कि वे पिछले 25 साल से रावण का पुतला बना रहे हैं. शुरुआती दौर में मटके से रावण का सिर बनाया जाता था. गांव में दशहरा बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. विजय दशमी के दिन रामलीला का मंचन होता है . जिसे देखने आसपास के हजारो ग्रामीण रामलीला मैदान में पहुंचते है.

इसलिए नहीं करते हैं दहन ग्रामीण भरतद्वाज वैद्य व देवलाल निषाद बताते हैं कि रामलीला के अंत में राम रावण का वध करता है. इन दोनों गांव में रावन दहन नहीं किया जाता है. क्योंकि रामायण ग्रन्थ में उल्लेख है कि राम ने रावण का वध किया था उसी के अनुसार गांव में रावण दहन नहीं बल्कि उसका वध किया जाता है. रामलीला मंचन के बाद आखिरी में राम रावण का वध करते है. राम का तीर रावण को लगते ही राम की सेना रावण की मूर्ति पर हमला कर उस पर प्रहार करती है. वहीं राम के तीर लगाने से रावण की नाभि से अमृत के रूप में लाल गुलाल का घोल बहने लगता है, जिसका टिका लगाने के लिए ग्रामीणों के बीच होड़ मची रहती है.

मचती है लूट
गांव में अमृत लुटाने की परम्परा पर ग्रामीण ललित कुंवर का कहना है कि जिस अमृत के कारण रावण अजर अमर था उसका टिका लगाकर हम अपने और परिवार के बेहतर स्वास्थ्य की कामना करते हैं. इसलिए ही तिलक रूपी अमृत के लिए ग्रामीणों में लूट मचती है. बहरहाल आधुनिकता की दौड़ में आज लोग अपनी संस्कृति और धार्मिक ग्रन्थ को भूलते जा रहे हैं. ऐसे समय में आदिवासी बाहुल्य भुमका और हिर्री गांव के ग्रामीण आज भी रामायण में लिखी बातों का अनुसरण कर एक सन्देश देने की कोशिश में लगे हैं.

अमेरिका और इस देश में चलती है राम नाम की करेंसी, नोट पर होती है तस्वीर

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राम नाम वाले करेंसी नोट नीदरलैंड और अमेरिका में इस्तेमाल हो रही हैं. हालांकि इन नोटों को वहां आधिकारिक मुद्रा नहीं माना गया है बल्कि ये एक खास सर्कल के भीतर इस्तेमाल होती है लेकिन ये इन दोनों ही देशों में चलन में है. इन नोटों पर भगवान राम की तस्वीर भी होती है. अमेरिका के एक स्टेट आयोवा की एक सोसाइटी के भीतर राम मुद्रा चलती है. यहां अमेरिकन इंडियन जनजाति आयवे के लोग रहते हैं. अमेरिका की इस सोसायटी के लोग महर्षि महेश योगी को मानते हैं. महर्षि वैदिक सिटी में बसे उनके अनुयायी कामों के बदलों में इस मुद्रा में लेनदेन करते हैं. साल 2002 में “द ग्लोबल कंट्री ऑफ वर्ल्ड पीस” नामक एक संस्था ने इस मुद्रा को जारी किया और समर्थकों में बांटा.

कौन हैं महर्षि योगी
महर्षि महेश योगी छत्तीसगढ़ राज्य में पैदा हुए. उनका असल नाम महेश प्रसाद वर्मा था. उन्होंने फिजिक्स में उच्च शिक्षा लेने के बाद शंकराचार्य ब्रह्मानन्द सरस्वती से दीक्षा ली, इसके बाद उन्होंने विदेशों में अपना प्रचार प्रसार किया. खासकर उनका भावातीत ध्यान यानि “transcendental meditation” विदेश में काफी लोकप्रिय है.

रॉक ग्रुप बीटल्स अनुयायी हो गया
“Let it be” गाने वाले “बीटल्स” के सदस्य करियर के उफान के दौर में काम छोड़कर भारत आए. उन्होंने महेश योगी के साथ वक्त बिताया. इसके बाद योगी की ख्याति और बढ़ गई. महर्षि का आखिरी वक्त एम्सटर्डम के पास एक छोटे से गांव में बीता. तब तक योग, ध्यान और आयुर्वेदिक इलाज का उनका तरीका दुनिया में लोकप्रिय हो चुका था.

 नहीं मिला लीगल टेंडर
24 फरवरी 2002 से राम मुद्रा के लेनदेन की शुरुआत हुई. वैदिक सिटी के आर्थिक और सांस्कृतिक विकास के लिए अमेरिकी सिटी काउंसिल ने इस मुद्रा को स्वीकार तो किया लेकिन कभी इसे लीगल टेंडर नहीं दिया. वैसे 35 अमेरिकी राज्यों में राम पर आधारित बॉन्ड चलते हैं.

राम मुद्रा की कीमत
एक राम मुद्रा का मूल्य 10 अमेरिकी डॉलर तय किया गया. इस तरह के तीन नोटों का मुद्रण हुआ. जिस नोट पर एक राम, उसका मूल्य 10 डॉलर, जिसपर दो, उसकी कीमत 20 डॉलर और जिसपर राम की तीन तस्वीरें छपी हुई हों, उसकी कीमत 20 अमेरिकी डॉलर के बराबर आंकी गई. आश्रम के भीतर सदस्य इनका इस्तेमाल आपस में करते हैं. आश्रम से बाहर जाने पर राम मुद्रा के मूल्य के बराबर डॉलर ले लेते हैं.

नीदरलैंड में राम मुद्रा को कानूनी मान्यता
नीदरलैंड में राम मुद्रा को कानूनी मान्यता मिली हुई है. यहां राम की एक तस्वीर के बदले 10 यूरो मिलते हैं. बीबीसी की एक रिपोर्ट में बताया गया कि डच सेंट्रल बैंक के अनुसार इस समय नीदरलैंड में लगभग एक लाख राम मुद्राएं चलन में हैं. लोग बैंक में जाकर इस मुद्रा के बदले 10 यूरो ले सकते हैं.

बीबीसी की एक खबर के हवाले से राम मुद्रा पर टिप्पणी करते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के भारतीय मूल के प्रोफेसर पंकज जैन ने लिखा है कि वैदिक सिटी ने वैदिक तरीके के खेती-बाड़ी और स्वास्थ्य सुविधा के बीच ही वैदिक मूल्यों को बढ़ाने के लिए राम मुद्रा का चलन शुरू किया. इसके साथ ही पिछले साल के अंत में सोशल मीडिया पर करेंसी को लेकर भारी बहस होने लगी कि विदेशों में करेंसी पर कई चेहरे हो सकते हैं तो हमारे देश में केवल गांधीजी की तस्वीर क्यों दिखती है. बहुत से लोगों ने भारत में राम मुद्रा की शुरुआत की भी इच्छा जाहिर की.

SBI का बड़ा दिवाली धमाका, खरीदारी पर मिलेगी 1 लाख रुपये की बंपर छूट

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देश का सबसे बड़ा बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानि SBI फेस्टिव सीजन से पहले ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा ऑफर लेकर आया है. SBI क्रेडिट कार्ड वाले अपने ग्राहकों को हर खरीदारी पर कैशबैक और डिस्काउंट दे रहा है.

SBI अपने ग्राहकों को कपड़ों, इलेट्रॉनिक्स, ग्रॉसरी, डाइनिंग, ज्वेलरी की खरीदारी पर यह शानदार ऑफर दे रहा है. SBI का यह ऑफर दीवाली के तीन दिन बाद यानि 30 अक्टूबर 2019 तक वैलिड है. SBI का यह इंडिया का दिवाली ऑफर है.

अगर आप भी ऑफर के दौरान सबसे ज्यादा पैसा खर्च करते हैं तो ढेरों उपहार जीत सकते हैं. SBI ने इंडिया के दिवाली ऑफर में मेगा प्राइज, वीकली प्राइज, डेली प्राइज और आवरली प्राइज रखा है. इसके तहत आवरली प्राइज में हर घंटे 50 लोगों को प्यूमा की तरफ से 1000 रुपये गिफ्ट वाउचर मिलेगा.

वहीं डेली प्राइज में हर रोज 10 लोगों को 6,999 रुपये के न्वाइज का वायरलेस हेडफोन जीतने का मौका है. वीकली प्राइज में हर हफ्ते 20 लोगों को Mi A3 स्मार्टफोन जीतने का मौका मिलेगा, इसकी कीमत 17,499 रुपये है.

इसके अलावा अगर आप ऑफर के दौरान सबसे ज्यादा खर्च करने वाले ग्राहक बनते हैं तो ढेरो उपहार जीत सकते हैं. इसके तहत 12 विजेताओं को मेक माई ट्रिप के 1 लाख रुपये कीमत का हॉलिडे वाउचर के अलावा शाओमी का स्मार्टफोन, स्मार्ट डिवाइसेस समेत अनेकों गिफ्ट मिल सकते हैं. ऑफर EMI ट्रांजैक्शन पर भी वैद्य है. हालांकि किसी के साथ क्लब नहीं किए जा सकेंगे.