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छत्तीसगढ़ : देश विदेश के पर्यटकों के लिए जशपुर में बन रहा ट्रायबल विलेज

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छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले को पर्यटन के क्षेत्र में विकसित करने के लिए यहां बालाछापर गांव में लकड़ी के आवास बना कर ट्रायबल टूरिस्ट विलेज का निर्माण कराया जा रहा है। इस केंद्र में जिले में निवासरत पहाड़ी कोरवा, बिरहोर जनजातियों के रहन-सहन, उनकी संस्कृति व कला से पर्यटकों को रुबरु कराया जाएगा।

कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने आज ‘यूनीवार्ता ‘ को बताया कि बालाछापर गांव में देश विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए लगभग चार एकड़ भूमि में ठहरने के लिए पूर्णत: लकड़ी से निर्मित हट्स का निर्माण कराया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि यह कार्य अब पूर्णता की ओर है। इस ट्रायबल टूरिस्ट विलेज में स्थानीय कलाकारों द्वारा निर्मित विविध प्रकार की कलाकृतियों के प्रदर्शन एवं विक्रय की भी व्यवस्था रहेगी।
उन्होंने बताया कि यहां जशपुर जिले में निवासरत पहाड़ी कोरवा, बिरहोर जैसी जनजाजातियों के जीवन शैली पर आधारित चीजें जुटाईं गई हैं। ताकि बाहर से आने वाले पर्यटकों को यहां रहकर लगे कि वे खुद भी जनजाति परिवार के साथ हैं।

यहां लैण्डस्केप तथा ओपन एमपी थिएटर सहित ईको लग्जरी हट्स का भी निर्माण कराया जा रहा है। इसके पूरा होते ही इस ट्रायबल टूरिस्ट विलेज में स्थानीय प्रजातियों के पेड़ पौधे लगाए जाएगें। इसके अलावा जिले के पुरातात्विक स्थल पर विद्यमान मूर्तियों को ध्यान में रखते हुए उसी शैली में पत्थर की मूर्तियां बनाई जा रही है।

वर्तमान में यहां ट्रायबल रहन सहन आर्टिशियन सेंटर और लग्जरी हट्स, को काफी आकर्षक ढंग से तैयार किया गया है। यहां पड़ोसी झारखंड, बिहार और ओडिशा राज्य से पर्यटकों कोएयरपोर्ट से जशपुर पहुंचने के लिए अच्छी सड़क सुविधा भी उपलब्ध होगी।

बालाछापर के सबसे नजदीक रानीदाह जलप्रपात तक पहुंचने के लिए वन विभाग की कच्ची सड़क को भी विकसित किया जा रहा है। समीप ही सोगड़ा और सारूडीह का चाय बागान तक पहुंचने के लिए भी पक्की सड़क का निर्माण हुआ है। सन्ना व पंडरापाठ जैसी उंची पहाड़ियों तक पहुंचने के लिए भी पक्की सड़कें बन चुकी है। पर्यटन विभाग ने ट्रायबल टूरिस्ट विलेज के पास चाय बागान विकसित करने की भी प्लानिंग पर काम शुरू कर दिया है।

वन मंडल अधिकारी जाधव श्रीकृष्ण ने बताया कि टूरिस्ट विलेज के पास की लगभग 100 एकड़ जमीन पर चाय बागान बनाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। आसपास के किसानों को चाय की खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित किऐ जाने के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। कलेक्टर श्री क्षीरसागर ने बताया कि ट्रायबल विलेज में जनजाति पकवानों को भी महत्व दिया जा रहा है।

यहां जनजातियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कंद मूल, कोदो, कुटकी, रामतिल आदि से बने व्यंजन बनाए जाएंगे। यही नहीं व्यंजनों को परोसने के लिए देसी जनजाति पद्धति दोना पत्तल आदि का उपयोग किया जाएगा। पर्यटकों को यहां पहुंचकर बिल्कुल नया अनुभव होगा जो यहां की खासियत होगी।

छत्तीसगढ़ : राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने विजयादशमी पर दी शुभकामनाएं

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छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके एवं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विजयादशमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।

उईके ने आज यहां जारी बधाई संदेश में प्रदेश के सुख और समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि यह पर्व बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है।भगवान श्रीराम के जीवन का प्रत्येक क्षण हमें एक आदर्श जीवन जीने की सीख देता है।यह उत्सव हमें याद दिलाता है कि जो लोग सत्य, सदाचार और अच्छाई के रास्ते पर चलते हैं, उनकी सदैव जीत होती है।

बघेल ने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए अपने संदेश में कहा कि विजयादशमी का पर्व असत्य पर सत्य, अन्याय पर न्याय की और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।श्री बघेल ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद माँगा है।

छत्तीसगढ़ : बच्चा चोर होने के शक पर युवक की पिटाई, पुलिस को भी बनाया बंधक

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छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में बच्चा चोर के शक में एक युवक की जमकर पिटाई कर दी गई है. विवाद बढ़ता देख पुलिस को घटना की सूचना दी गई. जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाइश दी गई. फिर भी कार्रवाई की मांग करते हुए ग्रामीणों को पुलिस ने बंधक बना लिया. सुरक्षा के मद्देनजर आस-पास के थानों से अतिरिक्त पुलिस फोर्स को बुलाया गया है. फिलहाल, आरोपी पुलिस हिरासत में है. पूछताछ करने की कोशिश की जा रही है. गांव में तनाव का माहौल है. पुलिस के जवान ग्रामीणों को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं. पंडरिया थाने के पाढ़ी गांव का ये पूरा मामला है.

ग्रामीणों ने लगाया बच्चा चोरी का आरोप

बताया जा रहा है कि सोमवार सुबह एक संदिग्ध आदमी को ग्रामीणों ने देखा. ग्रामीणों के मुताबिक आरोपी ने एक बच्चे को कुछ खिलाने की कोशिश की. इसे देखकर गांव वाले आक्रोशित गए और बच्चा चोर का आरोप लगाते हुए युवक को पकड़ कर उसकी धुनाई कर दी. फिर 112 बुलाकर उसे पुलिस के हवाले कर दिया.

पुलिस के साथ किया विवाद

ग्रामीणों से सूचना मिलते ही पुलिस के जवान मौके पर पहुंच गए. ग्रामीणों की मानें तो पुलिस आरोपी को कुछ दूर अपने साथ ले गई, फिर बिना कार्रवाई किए उसे छोड़ दिया. एक ग्रामीणों ने ये पूरा वाक्या देखा और गांव में आकर इसकी खबर दी. फिर दोबारा कुछ ग्रामीण आरोपी को पकड़कर लाए और उसके साथ मारपीट की. खबर मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची. बताया जा रहा है कि नाराज ग्रामीण और पुलिस के बीच भी झड़प हुई है.

आरोपी से पूछताछ की कोशिश में पुलिस संदिग्ध युवक के पकड़े जाने के बाद गांव में तनाव का माहौल है. एएसपी अनिल सोनी का कहना है कि आरोपी युवक से पूछताछ की कोशिश की जा रही है. आरोपी पुलिस के कब्जे में है. गांव वालों को भी समझाने की कोशिश की जा रही है.

नुसरत जहां की दुर्गा पूजा पर देवबंद का मुंह फूला, उलेमा बोले- ये इस्लाम में हराम

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तृणमूल कांग्रेस (TMC) की युवा सांसद और बंगाली अभिनेत्री नुसरत जहां एक बार फिर विवादों में हैं. दुर्गा पूजा के अवसर पर कोलकाता के पंडाल में अपने पति निखिल जैन के साथ सिंदूर लगाकर पहुंचीं नुसरत जहां से देवबंदी उलेमा एक बार फिर नाराज हो गए हैं. दुर्गाभवन में पूजा करने के मामले में देवबंदी उलेमा का कहना है कि अगर नुसरत जहां को गैर मजहबी काम करने हैं, तो वह अपना नाम बदल सकती हैं.

रविवार को दुर्गाष्टमी के अवसर पर नुसरत जहां माथे पर बिंदी, मांग में सिंदूर लगाकर अपने पति निखिल जैन के साथ कोलकाता के पंडाल में पहुंचीं थीं. इस दौरान ढोल पर जमकर थिरकीं थीं. इस पर देवबंदी उलेमा का बयान सामने आया है और उन्होंने नाराजगी जाहिर की है.

नुसरत जहां पर क्या बोले उलेमा?

देवबंदी उलेमा का कहना है कि नुसरत जहां क्यों गैर-मजहबी वाले काम कर रही हैं? उन्होंने कहा कि इस्लाम में अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करना हराम है. अगर नुसरत जहां को गैर-मजहबी काम करने हैं तो क्यों ना नुसरत जहां अपना नाम बदल लें, इस तरह के अमल करने से इस्लाम व मुसलमानों की क्यों तौहीन कर रही हैं.

देवबंदी उलेमा ने कहा कि नुसरत जहां का यह अमल पहली बार सामने नहीं आया है, वह इससे पहले भी पूजा करती चली आ रही हैं. इसी अमल को दोहराते हुए उन्होंने इस बार भी नवदुर्गा की पूजा की है तो मैं समझता हूं कि इस तरह का अमल इस्लाम के अंदर बिल्कुल जायज नहीं है.

. हालांकि, हर बार की तरह इस बार भी नुसरत जहां का कहना है कि वह विवादों पर ध्यान नहीं देती हैं और जो करना होता है, वही करती हैं. नुसरत ने कहा कि ये उनका अंदाज है.

गौरतलब है कि इससे पहले भी नुसरत जहां पूजा-पंडाल में जाने, संसद में साड़ी-सिंदूर और मॉर्डन कपड़ों को लेकर ट्रोल हो चुकी हैं.

इस गांव में 6 महीने पहले ही नाक काट कर किया जाता है रावण का अंत…

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नवरात्र (Navratri) की समाप्ति के बाद रावण (Ravana) का पुतला जलाकर मनाए जाने वाले दशहरे का उल्लास चरम पर है. रावण का दहन इस बार मंगलवार को होगा, लेकिन मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रतलाम जिले (Ratlam district) का एक गांव ऐसा है जहां 10 सिरों वाले इस पौराणिक पात्र की मूर्ति की नाक काट कर छह महीने पहले ही उसका प्रतीकात्मक अंत कर दिया जाता है. दरअसल, इस गांव में शारदीय नवरात्र के बजाए गर्मियों में पड़ने वाली चैत्र नवरात्र में रावण के अंत की परंपरा है. यह अनूठी रिवायत सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल भी है, क्योंकि इसे निभाने में मुस्लिम समुदाय के लोग भी बढ़-चढ़कर मदद करते हैं.

यहां होता है ये काम

इंदौर से करीब 190 किलोमीटर दूर चिकलाना गांव में इस परंपरा के पालन से जुड़े परिवार के राजेश बैरागी ने रविवार को ने कहा, ‘चैत्र नवरात्र की यह परंपरा मेरे पुरखों के जमाने से निभाई जा रही है. इसके तहत गांव के एक प्रतिष्ठित परिवार का व्यक्ति भाले से रावण की मूर्ति की नाक पर वार कर इसे सांकेतिक रूप से काट देता है.’

उन्होंने कहा, ‘हिन्दी की प्रसिद्ध कहावत नाक कटना का मतलब है-बदनामी होना. लिहाजा रावण की नाक काटे जाने की परंपरा में यह अहम संदेश छिपा है कि बुराई के प्रतीक की सार्वजनिक रूप से निंदा के जरिए उसके अहंकार को नष्ट करने में हमें कभी पीछे नहीं हटना चाहिए.’

ऐसे मनाते हैं जश्‍न

बैरागी ने बताया कि परंपरा के तहत ढोल-नगाड़ों की थाप पर गांव के हनुमान मंदिर से चल समारोह निकाला जाता है. इसके साथ ही राम और रावण की सेनाओं के बीच वाकयुद्ध का रोचक स्वांग होता है. इस दौरान हनुमान की वेश-भूषा वाला व्यक्ति रावण की मूर्ति की नाभि पर गदा से तीन बार वार करते हुए सांकेतिक लंका दहन भी करता है.

उन्होंने बताया कि परंपरा के मुताबिक इस बार अप्रैल में चैत्र नवरात्र खत्म होने के अगले दिन रावण की मूर्ति की नाक काटकर उसका प्रतीकात्मक अंत कर दिया गया था. बैरागी ने बताया, ‘शारदीय नवरात्र के बाद पड़ने वाले दशहरे पर हमारे गांव में रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता है.’ हिन्‍दू-मुस्लिम लेते हैं भाग

करीब 3,500 की आबादी वाला चिकलाना गांव हिंदू बहुल है, लेकिन यह बात इसे अन्य स्थानों से अलग करती है कि चैत्र नवरात्र के अगले दिन रावण की नाक काटने की परंपरा में गांव का मुस्लिम समुदाय भी पूरे उत्साह के साथ मददगार बनता है. चिकलाना के उप सरपंच हसन खान पठान बताते हैं, ‘इस परंपरा में सभी धर्मों के लोग शामिल होते हैं. इस दौरान मुस्लिम समुदाय भी आयोजकों की हर मुमकिन मदद करता है और पूरे गांव में त्योहार का माहौल होता है.’

पठान ने बताया, ‘हमारे गांव में पहले इस परंपरा के लिये हर साल रावण का मिट्टी का पुतला बनाया जाता था, लेकिन तीन वर्ष पहले हमने करीब 15 फुट ऊंची स्थायी मूर्ति बनवा दी है, जिसमें 10 सिरों वाला रावण सिंहासन पर बैठा नजर आता है.’

हालांकि गांव में जिस जगह रावण की यह मूर्ति स्थित है, उसे दशहरा मैदान घोषित कर दिया गया है

एक से ज्यादा बैंक अकाउंट वाले रहें सावधान, रखें इन बातों का ध्यान

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आज के समय में ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो अपने नाम से 2 या 2 से भी ज्यादा बैंक अकाउंट रखते हैं। ये बात भी सच है कि बार-बार नौकरी बदलने, एक शहर से दूसरे शहर में नौकरी बदलने पर जाने और कई बार बिजनेस की जरूरतों के कारण 2 से ज्यादा बैंक अकाउंट खोल लेते हैं। हां वहीं कई बार लोग एक से ज्यादा बैंक अकाउंट में पैसा रखना बेहतर मानते हैं ताकि एटीएम ट्रांजेक्शन करने के लिए ज्यादा ऑप्शन मिल जाते हैं। लेकिन इसे मेनटेन नहीं कर पाते हैं। इसके फायदे या नुकसान के बारे में नहीं सोचते हैं। अगल-अलग अकाउंट में जमा पैसों पर आपको बड़ा नुकसान भी उठाना पड़ सकता।

मल्टीपल बैंक अकाउंट के फायदे

बैंक के दिवालिया होने पर केवल 1 लाख रुपये का डिपॉजिट ही सिक्योर होना भी एक वजह है। यानी कोई भी बैंक आपके केवल 1 लाख रुपये तक के डिपॉजिट की ही गारंटी लेता है। ऐसे में लोग कई सेविंग्स अकाउंट में छोटी-छोटी जमा रखना बेहतर समझते हैं।ध्यान दें इन बातों का, ये होंगे नुकसान

मिनिमम बैलेंस रखना
मल्टीपल अकाउंट्स का सबसे पहला नुकसान यह है कि कस्टमर को हर अकाउंट में न्यूनतम मासिक औसत बैलेंस रखना होता है। ऐस नहीं करने पर बैंक चार्ज वसूलता है। ये नियम सभी सेविंग अकाउंट पर लागू होता है। ऐसे में आप जो अकाउंट इस्तेमाल नहीं होता उसमें न्यूनतम बैलेंस रखना मुश्किल हो जाता है।

इनकम टैक्सं रिटर्न फाइलिंग

दूसरी तरफ आपको अपने सभी बैंक अकाउंट की डिटेल्स इनकम टैक्स रिटर्न में देनी होती है। ऐसा नहीं करने पर आयकर विभाग ये मानता है कि आप टैक्स चोरी कर रहे हैं। फिर आपको आयकर विभाग के नोटिस का सामना करना पड़ सकता है।

नेट बैंकिंग

वहीं दूसरी ओर कई बैंकों में अकाउंट होना सुरक्षा के लिहाज से भी सही नहीं होता है। हर कोई अकाउंट का संचालन नेट बैंकिंग के जरिए करता है। ऐसे में सभी का पासवर्ड याद रखना बहुत ही मुश्किल काम होता है। निष्क्रिय अकाउंट का इस्‍तेमाल नहीं करने से इसके साथ फ्रॉड या धोखाधड़ी होने का चांस बहुत अधिक होता है, क्‍योंकि आप लंबे समय तक इसका पासवर्ड नहीं बदलते हैं। इससे बचने के लिए अकांउट को बंद कराएं और उसके नेट बैंकिंग को डिलीट जरूर कर दें।

डेबिट कार्ड चार्ज

  • कई अकाउंट होने से सभी डेबिट कार्ड का पिन नंबर और नेट बैंकिंग का पासवर्ड याद रखना मुश्किल होता है। कई बार दोबारा पिन जनरेट करने पर बैंक चार्जेस लेते हैं।
  • इसके अलाबा एक से अधिक निष्क्रिय खाते होने से आपके क्रेडिट स्कोर पर भी इसका खराब असर पड़ता है। आपके खाते में न्यूनतम बैलेंस मेनटेन नहीं होने से क्रेडिट स्कोर खराब होता है। इसलिए कभी भी निष्क्रिय खाते को हल्के में नहीं लें और नौकरी छोड़ने के साथ ही उस खाते को बंद करा दें।

अकाउंट डारेमेंट हो जानें का डर
अगर आपने बैंक अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस बनाया हुआ है लेकिन आपने लंबे समय तक अकाउंट में कोई भी ट्रांजेक्शन नहीं की है तो अकाउंट डोरमेंट हो जाता है। दोबारा उस अकाउंट को एक्टिव करने के लिए पूरे प्रोसेस को फॉलो करना होता है।

TikTok को ‘टक्कर’ देने के लिए Google लॉन्च कर रहा है ‘यह’ ऐप

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TikTok का क्रेज दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है. TikTok पर वीडियो बनाकर आज कई लोग लोकप्रिय हों रहे हैं. इसे देख दिन-ब-दिन TikTok यूजर्स की संख्या भी बढ़ती जा रही है. इस देख अब Google भी TikTok को टक्कर देने के लिए मैदान में उतर रहा है. खबर है कि Google भी जल्द ही एक ऐसा ही वीडियो ऐप लॉन्च करने जा रहा है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार Google संयुक्त राज्य अमेरिका में लोकप्रिय सोशल वीडियो शेयरिंग ऐप ‘फायरवर्क्स’ खरीद की तैयारी में है. Google के साथ-साथ चीन की माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट भी ‘फायरवर्क्स’ खरीदने की योजना बना रहा है. हालांकि, ‘फायरवर्क्स’ खरीदने की इस दौड़ में Google अन्य कंपनियों से आगे है. फायरवर्क ने कम ही समय में भारत में अपने यूजर्स का अच्छा-खासा नेटवर्क निर्मित कर लिया है. इस साल की शुरुआत में फायरवर्क को 100 मिलियन डॉलर का मुनाफा हुआ है, वहीं TikTok की सहयोगी कंपनी बाइटडान्सनं को 75 मिलियन डॉलर का.

क्या है TikTok को टक्कर देने वाले फायरवर्क की विशेषता

फायरवर्क के उपयोग से यूजर्स 30 सेकंड का वीडियो बना सकते हैं, जबकि TikTok में केवल 15 सेकंड तक का वीडियो बनाया जा सकता है. इसमें यूजर्स वर्टिकल वीडियो के साथ-साथ हॉरिजॉन्टल वीडियो भी शूट कर सकते हैं.

फायरवर्क ऐप एंड्रॉइड और IoS यूजर्स के लिए उपलब्ध है. इस ऐप का उपयोग करने वाले उपयोगकर्ताओं की संख्या 10 लाख से भी अधिक है.

फेसबुक का वीडियो शेयरिंग ऐप

पिछले साल नवंबर में फेसबुक ने lasso नामक एक ऐप लॉन्च किया था. फेसबुक का यह लेटेस्ट ऐप वर्तमान में केवल संयुक्त राज्य अमेरिका में ही उपलब्ध है. इस ऐप में टिककॉक जैसी ही विशेषताएं हैं.

TikTok का होता है गैर इस्तेमाल

भारत में, TikTok का क्रेज इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि लोग फोल्लोवेर्स की संख्या बढ़ाने के लिए किसी भी हद तक जा रहे हैं. कई बार अपनी जन जोखिम में डालने से भी नहीं डरते. इतना ही नहीं इस ऐप के जरिए कई यूजर्स अश्लीलता भी फैला रहे हैं. इसलिए लगातार TikTok को BAN करने संबंधी मांगें उठती रहती है. कुछ समय पहले इस पर प्रतिबंध लगाया गया था, उस समय टिक टॉक के लगभग 12 करोड़ यूजर्स थे. उस समय इस ऐप से लगभग 60 लाख वीडियो हटा दिए गए थे. बाद में, अदालत ने ऐप पर प्रतिबंध के फैसले को पलट दिया. कई लोगों ने TikTok को अपनी आय का एक बड़ा स्रोत बना लिया है.

नेहरू ने आरे कॉलोनी में रोपा पहला पौधा, फिर ‘कश्मीर’ जैसी हो गई रंगत

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देश की आर्थिक राजधानी मुंबईस्थित आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर मचे बवाल के बाद सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. अब इस मामले में सुनवाई चलेगी, लेकिन आपको जानना चाहिए कि मुंबई का फेफड़ा कहे जाने वाले आरे जंगल पर संकट को लेकर इतना बवाल क्यों हुआ कि लोग सड़कों पर उतर आए और पेड़ों से लिपटकर रोए. असल में, पर्यावरण के नज़रिए के साथ ही इस जंगल और कॉलोनी का रोचक ऐतिहासिक महत्व भी रहा है.

नेहरू ने पौधा लगाकर किया था उद्घाटन
आज़ादी के सिर्फ चार साल बाद ही पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुंबई की इस आरे कॉलोनी का उद्घाटन एक पौधा रोपकर किया था. 1951 में मुंबई में डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पंडित नेहरू ने आरे मिल्क कॉलोनी की नींव रखी थी. नेहरू के पौधारोपण के बाद यहां इतने लोगों ने पौधे रोपे कि कुछ ही वर्षों में ये इलाका जंगल में तब्दील हो गया. ये पूरा वन्य इलाका 3166 एकड़ में फैला है.

दारा खुरोड़ी का था आइडिया साल 1949 में मुंबई में डेयरी उत्पादन को बढ़ावा दिए जाने को लेकर आरे मिल्क कॉलोनी की स्थापना के विचार की शुरुआत हुई थी. यह विचार मूलत: दारा खुरोड़ी का था जिन्हें मुंबई में डेयरी सेक्टर का प्रणेता माना जाता है. देश में दुग्ध क्रांति के लिए चर्चित रहे डॉक्टर वर्गीज़ कुरियन के साथ दारा को संयुक्त रूप से 1963 में रैमन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

इसी जंगल में बनी फिल्मसिटी
आरे मिल्क कॉलोनी का विस्तार काफी है, जिसमें 12 गांव या इलाके शामिल हैं : साई, गुंडगांव, फिल्मसिटी, रॉयल पाम्स, डिंडोशी, आरे, पहाड़ी गोरेगांव, व्यारावाल, कोंडिविटा, मरोशी या मरोल, परजापुर और पासपोली. इन तमाम इलाकों को मिलाकर आरे मिल्क कॉलोनी की अवधारणा रखी गई थी और 1977 में इसी इलाके में फिल्मों की शूटिंग की लोकेशन के लिहाज़ से 200 हेक्टेयर के क्षेत्र में फिल्मसिटी की शुरुआत हुई थी, जो आज मुंबई का काफी प्रसिद्ध इलाका है.

नैनीताल जैसा था आरे का जंगल?
नेहरू के पौधारोपण के बाद पौधे लगाने के जन अभियान से जंगल बनी आरे कॉलोनी कुछ ही सालों में एक खूबसूरत और हरे भरे जंगल में तब्दील होकर मुंबई की धड़कन बन गई थी. इसका प्राकृतिक सौंदर्य आकर्षक था और 1958 में मशहूर फिल्मकार बिमल रॉय ने अपनी क्लासिक फिल्म मधुमती के लिए यहां शूटिंग की थी. असल में, बिमल दा इस फिल्म के लिए नैनीताल में शूट कर चुके थे और उन्हें उस सीन की मैचिंग के लिए जब शूट करना पड़ा, तो आरे के जंगल में उन्होंने नैनीताल की झलक देखी थी.

छोटा कश्मीर, चिड़ियाघर और नेशनल पार्क
आरे मिल्क कॉलोनी पर्यावरण के लिहाज़ से मुंबई के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है. यहां बगीचे, पशुपालन, नर्सरियां और झीलें हैं. यहां पिकनिक स्पॉट के तौर पर छोटा कश्मीर नाम से एक जगह है जो भरपूर हरियाली और झील से घिरी हुई है और पर्यटकों के लिए खासा आकर्षण है. इसके साथ ही, एक चिड़ियाघर और संजय गांधी नेशनल पार्क भी आरे से सटा हुआ है.

HC ने निर्देश – दूसरे कॉलेज में शिफ्ट किए जाएंगे चंदूलाल मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट…

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दुर्ग जिले में संचालित चंदूलाल चंद्राकर निजी मेडिकल कॉलेज (Medical College) के उन विद्यार्थियों को हाई कोर्ट से राहत मिली है, जो कॉलेज की मान्यता समाप्त होने के बाद से परेशान थे. एमबीबीएस (MBBS) के इन परेशान विद्यार्थियों ने बिलासपुर हाई कोर्ट (High Court) में याचिकाएं लगाई थीं, जिसमें हाई कोर्ट के सिंगल बैंच ने राज्य शासन को छात्रों को दूसरे कॉलेज में मर्ज किए जाने के हिसाब से एक समिति बनाने का निर्देश दिया है. समिति प्रपोजल तैयार कर एमसीआई को दी. साथ ही ये भी बताना होगा कि कितने छात्रों को किस कॉलेज में भेजा जायेगा. अब इस मामले में 16 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी.

बता दें कि चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज (Chandulal Chandrakar Medical College) को पिछले दो सालों से एमसीआई (MCI) ने जीरो ईयर घोषित कर कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी है. चंदूलाल चन्द्राकर मेडिकल कॉलेज में 150 स्टूडेंट्स के एमबीबीएस करने की मान्यता दी गई थी, लेकिन 150 स्टूडेंट्स के आधार पर कॉलेज में एमसीआई के नॉर्म्स के अनुसार संसाधन की कमी थी. कॉलेज में 130 फैकल्टी डॉक्टर, 6 फंडामेंटल लैब्स, लाइब्रेरी जरूरी इक्यूपमेंट्स और 750 बिस्तरों का अस्पताल विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित होने चाहिए. इसके बाद भी इस मेडिकल कॉलेज में 18 फैकल्टी ही हैं न कोई फंडामेंटल लैब है और न ही लाइब्रेरी.

वीरान पड़ा है अस्पताल
दायर याचिका में दी गई जानकारी के मुताबिक कॉलेज का अस्पताल भी वीरान पड़ा है. डॉक्टरों को चार माह का वेतन नहीं मिलने से सभी ने रिजाइन कर दिया है. इस हाल में स्टूडेंट्स एमबीबीएस की पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे. इतना ही नहीं जिनका एमबीबीएस कोर्स पूरा हो गया है, वे इटर्नशिप नहीं कर पा रहे थे. मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई और इंटर्न कर रहे विद्यार्थियों ने राज्य सरकार से गुहार लगाई थी कि उनको दूसरे कॉलेज में मर्ज कर दिया जाए. इस मामले को लेकर स्टूडेंट्स ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से भी मुलाकात की थी. स्टूडेंट्स ने कॉलेज की मान्यता खत्म होने और एमसीआई की रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की थी. इस मामले में हाई कोर्ट ने शासन को निर्देशित किया है.

बिना अंडे के ऑमलेट के बारे में आपका क्या ख्याल है ?

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क्या आपने कभी सोचा है कि बिना अंडे का बना ऑमलेट खाने में कैसा होगा? इससे पहले कि इस बारे में आपके दिमाग में अजीबोगरीब ख्याल आने लगे हम आपको बता दें कि एगलेस ऑमलेट, बिना अंडे के बने पैनकेक या वैफेल्स जैसे ही खाने की एक श्रेणी है जिसे बहुराष्ट्रीय अमेरिकी पैनकेक हाउस आईहोप द्वारा आपके लिए प्रस्तुत किया गया है। इसकी महक, इस फूला हुआ नरम टेक्सचर निश्चित तौर पर आपके जीभ को भाएगी। इसे आप ब्रेक फास्ट में खा सकते हैं क्योंकि टेस्टी होने के चलते इससे आपका मूड भी फ्रेश होगा और सुबह-सुबह एनर्जी भी मिल जाएगी।

त्योहारों का मौसम है, नवरात्र चल रहा है ऐसे में इस शाकाहारी ऑमलेट का मकसद बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर आकर्षित करना है और उन ग्राहकों के बीच में अपनी जगह बनाना है जो इस फेस्टिव सीजन के दौरान मांस, मछली या अंडे का सेवन नहीं करते हैं तो ऐसे में आप आईहोप के लजीज ब्रेकफास्ट मेन्यू के साथ इस फेस्टिव सीजन का आनंद ले सकते हैं।