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इज़राइल की खूबसूरत लड़कियों और वहां की सेना का ये सच शायद ही आपको पता होगा…

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आइये आज इज़राइल के बारे में जानते हैं। यहां की लड़कियां बला की खुबसूरत होती हैं इस बात को सभी जानते हैं। लेकिन ये वो देश भी है जहां पुरुषों और महिलाओं दोनों का ही सेना में सेवा करना जरुरी है। इज़रायल अपनी खुफिया एजेंसीय और सैन्य शक्ति के कारण ही दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। मोसाद के बारे में तो आप जानते हैं। आइये बात करते हैं इजरायल के अन्य पहलुओं के बारे में..

● इजरायल के बनने से पहले ही ये सुनिश्चित कर लिया गया था कि इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) में महिलाओं का प्रतिनिधित्व जरुरी है। देश के नियमों के मुताबिक 18 साल की उम्र तक सभी यहूदी इजरायली नागरिकों को राष्ट्रीय सेवा पूरा करना जरुरी है। चाहे वो कोई भी हो, स्त्री या पुरुष। सेना में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी लड़ाई के मैदान में होना जरुरी है। यहां तक की नाज़ियों के खिलाफ 1948 में हुई स्वतंत्रता की लड़ाई में महिलाओं ने युद्ध के मैदान में अहम् भूमिका निभाई थी।

● सेना में महिलाओं के उचित प्रतिनिधित्व के अलावा शीर्ष पदों पर भी महिलाओं की नियक्ति आम बात है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, उनकी सेना की नौकरियों में 92% से ज्यादा नौकरियां महिलाओं के लिए खुली हैं। इसमें फाइटर पायलट, पैदल सेना के अधिकारी, नौसेना के कैप्टेन इत्यादि का पद महिलाओं के लिए खुला है।

● सेना में भले महिलाओं को सम्मान मिलता है लेकिन नागरिक नौकरियों में उनसे भेदभाव किया जाता है। इजराइल में महिला और पुरुषों की मजदूरी का अंतर दुनिया में सबसे ज्यादा है। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के मुताबिक महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले औसतन 66% कम पैसे मिलते हैं। यह आंकड़ा चौंका देने वाला है क्योंकि पिछले तीस सालों में इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। एबीसी के अनुसार, भले ही 65% राज्य कामगार महिलाएं ही हैं लेकिन सीनियर मैनेंजमेंट के लेवल पर उनकी उपस्थिति न के बराबर है। असल में 106 सरकारी अधिकारियों में से सिर्फ चार में ही महिला डायरेक्टर हैं। पुरुष प्रबंधकों की तुलना में महिलाओं को औसत मासिक वेतन 73% ही मिलता है।

● महिला के गर्भपात के लिए यहां की सरकार भुगतान करती है। हरेत्ज़ के मुताबिक 2014 में, इजरायली कैबिनेट ने फैसला सुनाया कि चाहे कोई परिस्थिति हो सरकार देश की 20 से 33 वर्ष आयु की महिलाओं के लिए कानूनी गर्भपात का भुगतान करेगी। हालांकि देश में गर्भपात समितियां हैं जो गर्भपात का कराना है या नहीं इसका निर्णय करती हैं। लेकिन वे लगभग सभी अर्जियों को मंजूरी दे देते हैं और अभी ये खत्म नहीं हुआ है। देश में गर्भपात कानून के मुताबिक एक महिला अपनी गर्भावस्था के 40 सप्ताह के अंदर इस प्रक्रिया को पूरी कर सकती है। अगर ये कोई नाबालिग लड़की है तो उसे गर्भपात कराने के लिए अपने माता-पिता की सहमति की जरुरत नहीं है।

● इज़राइल के यही कुछ प्रमुख कारण हैं जो उसे अन्य देशों से अलग करते हैं। हिटलर ने अपने समय मे यहूदियों का नामोनिशान समाप्त कर दिया था। द्वितीय विश्वयुद्ध खत्म होते होते इज़राइल एकमात्र ऐसा देश था जो यहूदी था, अतः इसको भी समाप्त करने की साजिशें चल रही थी। इन्ही साजिशों से बचने के लिए आज इज़राइल ने अपनी आंतरिक सुरक्षा इतनी मजबूत कर ली है कि कोई परिन्दा भी उनकी सीमा में पर नही मार सकता।

मोहम्मद अजहरुद्दीन के बेटे की दुल्हन बनेंगी सानिया मिर्जा की बहन, दिसंबर में होगी शादी…

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टेनिस स्टार (Tennis Star) सानिया मिर्जा (Sania Mirza) की बहन अनम मिर्जा (Anam Mirza) जल्द ही टीम इंडिया (Team India) के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन (Mohammad Azharudin) के बेटे मोहम्मद असद (Mohammad Asad) की दुल्हन बनेंगी. लंबे समय से चली आ रहीं दोनों की शादी की अफवाहों को अब खुद सानिया मिर्जा ने स्वीकार किया है. उन्होंने इस बात की पुष्टि कर दी है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सानिया मिर्जा ने कहा है, ‘अनम दिसंबर में शादी कर रहीं हैं. हम हाल ही में पेरिस में बैचलर पार्टी मनाकर लौटे हैं और हम बेहद उत्साहित हैं.’ सानिया मिर्जा की बहन अनम मिर्जा पेशे से फैशन स्टाइलिस्ट हैं.

दरअसल, अनम मिर्जा (Anam Mirza) ने सोशल मीडिया पर मोहम्मद असद (Mohammad Asad) के साथ एक फोटो साझा की थी, जिसके कैप्‍शन में उन्होंने लिखा था, ‘फैमिली’. इसके बाद से ही दोनों की शादी की अफवाहों ने जोर पकड़ लिया था. अब इसका खुलासा करते हुए सानिया मिर्जा (Sania Mirza) ने कहा है कि अनम एक अच्छे लड़के के साथ शादी कर रही हैं. उनका नाम असद है और वह मोहम्मद अजहरुद्दीन के बेटे हैं. हम सभी इस शादी को लेकर बेहद उत्साहित हैं. सानिया मिर्जा ने दोनों की शादी की तारीख का तो जिक्र नहीं किया, लेकिन इतना जरूर कहा है कि शादी इसी साल दिसंबर में होगी.

फराह खान ने पहले ही कर दिया था इशारा टेनिस स्टार सानिया मिर्जा (Sania Mirza) की करीबी दोस्त और फिल्ममेकर फराह खान ने भी कुछ दिन पहले अनम की ओर इशारा करते हुए ब्राइड टू बी वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की थी. सानिया और अनम मिर्जा (Anam Mirza) के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए फराह खान ने लिखा था कि पिलो टॉक, जब मिर्जा बहनें साथ हों तो उनके साथ समय बिताना जरूरी हो जाता है. अनम और सानिया मिर्जा ने पेरिस में ली गई अपनी और भी तस्वीरें शेयर की थीं.

यह है दुनिया का सबसे ताकतवर जूस, मर्दों को रोजाना पीना चाहिए…

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शरीर में खून बिल्कुल साफ रहता है। और शरीर में जमे हानिकारक और विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।

नीम के जूस का नियमित रूप से सेवन करने से शरीर को अनेक जबरदस्त फायदे होते हैं। सुबह खाली पेट नीम का जूस पीना शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है। सुबह खाली पेट नीम का जूस पीने से पाचन तंत्र दुरुस्त होता है। और पेट से जुड़ी बीमारियां जैसे गैस, कब्ज, एसिडिटी आदि खत्म हो जाती हैं।

शराब के नशे में तोड़ी दुर्गा की मूर्ति, पुलिस ने तीन बदमाशों को पकड़ा

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पंडाल में लगी दुर्गा की मूर्ति से तोड़-फोड़ करने की घटना सामने आई है। इस घटना के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह घटना अरूणाचल प्रदेश के दोईमुख की है।

खबर है कि शराब के नशे में धुत्त युवकों ने अरूणाचल प्रदेश के नंबर 2 दोईमुख पूजा मंडप में लगी दुर्गा की मूर्ति में तोड़-फोड़ की है। हालांकि आरोपी घटना को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए। बताया गया है शरारती युवक टाटा टियागो कार से आए जिसके नंबरों के आधार पर पुलिस ने जांच की और तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने आरोपियों से बयान दर्ज कर लिए हैं। आरोपियों की पहचान नबाम अछुमा, नबाम सोनम और ताना चांगरिआंग के रूप में की गई है। ये सभी आरोपी पापुम पेरे जिले के रहने वाले बताए गए हैं।

इस घटना को दुर्गा पूजा कमेटी का कहना है कि यह सांप्रदायिक घटना नहीं हैं। इससे पहले भी हम सभी समुदायों तथा जनजातियों के साथ मिलकर इस तरह के मेलों तथा त्योंहारो का आयोजन कर चुके हैं। लेकिन इस तरह की घटना कभी नहीं हुई। सभी लोगों की आस्था देवी दुर्गा में है। हमने पूजा के एक और छोटी मूर्ति की व्यवस्था कर ली है।

मुंबई में पेड़ों की कटाई पर तो रोक लगी, लेकिन बुलेट ट्रेन रूट पर कट रहे हजारों पेड़ों पर क्यों है चुप्पी?

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मुंबई की आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। साथ ही कहा कि पेड़ों की कटाई का विरोध करने वाले सभी प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा किया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई अब 21 अक्टूबर को होगी, तब तक यथास्थिति बनाए रखे जाने का आदेश दिया गया है। किंतु, आरे में करीब 2,700 पेड़ों की कटाई से पहले मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के रूट के लिए भी हजारों पेड़ काटे गए थे, तब रोक नहीं लग पाई थी। अभी भी महाराष्ट्र-गुजरात दोनों राज्यों में हजारों पेड़ों की बलि चढ़ेगी। नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) का कहना है कि वे करीब 25 हजार पेड़ों को ट्रांसप्लांट करेंगे। जबकि, बुलेट ट्रेन के रूट पर आने वाले कम से कम 60 हजार पेड़ों को हटाया जाना है। इन पेड़ों की कटाई का पुरजोर विरोध नहीं हो सका है।

पढ़ें: बुलेट ट्रेन के रूट पर आने वाले हजारों पेड़ कटेंगे, NHSRCL बोला- हम 1 के बदले 10 पौधे लगवा देंगे

एमएमआरसी-एमसीजीएम से ज्यादा एनएचएसआरसीएल कटवा रहा पेड़
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए मैंग्रोव वन की भी बलि चढ़ सकती है, क्योंकि हाईकोर्ट ने नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) को नहीं रोका है। एनएचएसआरसीएल ने कहा है कि एक पेड़ के बजाए वे 10 पेड़ लगवाएंगे। जबकि, देखा जाए तो नियमों का ठीक से पालन नहीं हो रहा है। अहमदाबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिए भी ह​जारों पेडों को काट दिया गया था। दोनों परियोजनाओं के लिए पुन: वृक्षारोपण परवान नहीं चढ़ा है। उल्टे बुलेट ट्रेन के लिए हजारों पेड़ों को काटने की अनुमति भी दी गई।

अवैध कालोनियां ऐसे प्रोजेक्ट की भेंट नहीं चढ़तीं?
बुलेट ट्रेन के लिए मुंबई एवं महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में 20,000 से अधिक मैंग्रोव वृक्षों वाले वन का भी नाश होने की आशंका है। कई पर्यावरणविदों का कहना है कि शहरों में बसीं अवैध कालोनियां ऐसे प्रोजेक्ट की भेंट नहीं चढ़तीं, मगर पेड़ों की कटाई से प्रकृति को नुकसान बड़ी तेजी से ​कर दिया जाता है।

अहमदाबाद मेट्रो रेल के लिए 2200 पर्णपाती पेड़ कटे
बुलेट ट्रेन और मुंबई मेट्रो की परियोजनाओं में पर्यावरणविदों के विरोध को दबाने की कोशिश हो रही हैं। बुलेट ट्रेन के अलावा अहमदाबाद मेट्रो रेल के लिए भी लगभग 2200 पर्णपाती पेड़ काटे जा चुके हैं। मेट्रो रेल के दूसरे चरण में, गांधीनगर में 3000 से अधिक पेड़ हैं, जिन्हें काटने की अब अनुमति दी जाएगी।

गुजरात-महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 80437 वृक्ष निशाने पर
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आंदोलन कार्यकर्ताओं द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुलेट ट्रेन के लिये गुजरात और महाराष्ट्र दोनों राज्यों में कुल 80,437 फल एवं अन्य तरह के पेड़ों को एक साथ साफ किया जा रहा है। सबसे ज्यादा पेडों को काटने की अनुमति गुजरात में मिली। इससे पहले बीएमसी ने मुंबई मेट्रो कारशेड के निर्माण के लिए 2700 से अधिक पेड़ों को हटाने के लिए कहा था। काफी पेड़ काट दिए गए, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट का ने तात्कालिक रोक लगाई।

बुलेट ट्रेन के रूट के लिए किस इलाके में कितने पेड़ काटे जाएंगे
बुलेट ट्रेन के लिये दक्षिण गुजरात के वलसाड में 12,248 पेड़ को मिटा दिया जाएगा। महाराष्ट्र के पालघर में लगभग 17,748 मैंग्रोव वृक्षों का उन्मूलन किया जाना है। जबकि, अहमदाबाद से मुंबई के 505 किलोमीटर के रूट पर लगभग 26,980 फलों के पेड़ों का भी उन्मूलन होना है। बुलेट ट्रेन के ट्रैक के लिए कुल 1691.20 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है।

अहमदाबाद में कटे पेड़ों की जगह कितने पेड़ लगे, नहीं बताया
मुंबई मेट्रो से पहले अहमदाबाद मेट्रो के लिये काटे गए पेडों की जगह कितने नए पेड़ लगाए गए, अथॉरिटी की ओर से इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। इसी तरह, मुंबई मेट्रो के लिए कितने पेड़ लगाए जाएंगे, इसकी भी कोई जानकारी नहीं है। कड़वा सच यही है कि सरकारी अधिकारी पेड़ों को हटाने के बारे में कुछ भी कहने के लिए तैयार नहीं हैं।

पंचामृत भवन का भारी विरोध हुआ तो सरकार को पीछे हटना पड़ा
गांधीनगर में नरेंद्र मोदी ने पंचामृत भवन बनाने का फैसला किया था। हालांकि, इस भवन बनने से पहले वह मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बन गए। बाद में आनंदीबेन पटेल की सरकार ने पंचामृत भवन का काम जारी रखा, लेकिन गांधीनगर के पर्यावरणविदों के विरोध का सामना करना पड़ा। उस जगह पर 20,000 से अधिक पेड़ थे, जहां पंचामृत भवन बनाया जाना था। विरोध के चलते ही गुजरात में मौजूदा रुपाणी सरकार भवन-निर्माण पर कोई फैसला नहीं ले पाई है। सचिवालय से जुड़े सूत्रों ने कहा कि सरकार अब पंचामृत भवन बनाने के लिये जगह को बदल सकती है। फिर ऐसी जगह चुनी जाएगी, जहां कम से कम पेड़ कटें। यदि, इसी तरह पुरजोर विरोध हो तो बड़े पैमाने पर होने वाली वृक्षों की कटाई रोकी जा सकती है।

थाने में भूत के विवाद पर मचा हंगामा, मामले को सुलझाने खुद एसपी को पहुंचना पड़ा

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बिहार में एक ऐसा अजीबो-गरीब मामला सामने आया है जिसे सुनकर आप चकित हो जाएंगे। यहां थाने के भीतर भूत होने की अफवाह का मामला सामने आया है। आलम यह है कि खुद एसपी को इस मामले को संभालने के लिए थाने आना पड़ा। दरअसल बिहार के कैमूर के मोहनियां थाने में भूत होने की संभावना की वजह से काफी देर तक हंगामा होता रहा। मामला इतना बढ़ गया कि जिले के एसपी को थाने पर इस मामले को शांत करने के लिए पहुंचना पड़ा।

भाइयों के बीच बढ़ा विवाद

जानकारी के अनुसार यहां रहनने वाले दो चचेरे भाइयों ने एक दूसरे पर भूत भेजने का आरोप लगा दिया। अहम बात यह है कि दोनों ही काफी पढ़े-लिखे हैं बावजूद इसके दोनों ने अंधविश्वास की वजह से एक दूसरे से काफी समय से लड़ रहे थे। मामला इतना आगे बढ़ गया कि दोनों ही भाई अपनी शिकायत को लेकर थाने पहुंचे। छोटे भाई ने बड़े भाई से कहा कि वह उसके उपर से भूत को हटा ले, वरना सही नहीं होगा और वह थाने जाएगा। जिसके बाद दोनों भाई थाने पहुंच गए।

बेटी हुई बीमार

दरअसल दोनों भाईयों में से एक भाई की बेटी की कुछ दिन पहले बीमारी की वजह से मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद दूसरे भाई की भी बेटी बीमार रहने लगी। जब दूसरा भाई बीमार बेटी का इलाज कराने के लिए तांत्रिक के पास पहुंचा तो उसने बताया कि उसके ही भाई ने उसकी बेटी पर भूत बैठा दिया है, जिसकी वजह से उसकी तबीयत खराब है। जिसकी वजह से दोनों भाइयों के बीच विवाद बढ़ गया और दूसरा भाई अपने भाई से भूत को हटाने के लिए दबाव बनाने लगा।

तांत्रिक के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

दोनों भाई जब थाने पहुंचे तो थाना प्रभारी, मुखिया और सरपंच ने इस मामले को सुलझाने का प्रयास किया। लेकिन दोनों ही भाईयों के बीच विवाद बढ़ता गया। जिसके बाद खुद एसपी को यहां आना पड़ा। एसपी ने दोनों ही पक्ष को समझाने की कोशिश की और ओझा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया, साथ ही लोगों को बताया कि भूत-प्रेत जैसा इस दुनिया में कुछ नहीं होता है। उन्होंने गांव वालों को यह समझाने की कोशिश की अगर बच्ची की तबीयत खराब है तो उसका इलाज कराइए नाकि भूत-प्रेत के चक्कर में पड़िए।

बच्‍चे को बचाने के चक्‍कर में ‘नरक के झरने’ में बहा हाथियों का झुंड, 6 मरे, दो को बचाया गया

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इंसान हो या जानवर, अपने बच्‍चे सभी को जान से ज्‍यादा प्‍यारे होते हैं। कुछ ऐसा ही मामला थाइलैंड के खाओ याई नेशनल पार्क में सामने आया। यहां ऊंचाई से गिरे हाथी के एक बच्चे को बचाने की कोशिश में 6 अन्य हाथियों की मौत हो गई। सबसे पहले हाथियों के झुंड का एक बच्चा ऊंचाई से गिरा और फिर उसे बचाने की कोशिश में पांच अन्य हाथी भी गिर गए, इससे उन सभी की मौत हो गई। दो अन्य हाथी भी यहां पास की चट्टानों में फंस गए थे जिन्हें बाद में प्रशासन ने रस्सियों की मदद से सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया और उनकी जान बचाई। आपको बता दें कि जिस स्‍थान पर यह हादसा हुआ उसे ‘नरक का झरना’ भी कहते हैं।दोपहर करीब 3 बजे की है घटना

थाईलैंड के राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीवन और वन संरक्षण विभाग ने बताया कि शनिवार को स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजे इस बाबत उन्‍हें सूचना मिली थी। विभाग को तब बताया गया कि हाथियों का एक झुंड झरने के पास से गुजरने वाली सड़क पर खड़ा है। इसके कुछ समय बाद ही तीन साल के एक हाथी का शव झरने के किनारे नजर आया। उसके आसपास पांच अन्य हाथियों के शव भी पड़े हुए थे।

जख्‍मी हाथियों की हालत नाजुक

वाइल्डलाइफ़ फ़्रेंड्स फ़ाउंडेशन थाइलैंड के संस्थापक एडविन वीक का कहना है कि इन दोनों हाथियों की हालत थोड़ी गंभीर बताई जा रही है। इस घटना में बचे हुए हाथियों की स्थिति बहुत ही भावनात्मक है। वैसे भी हाथी ऐसा जानवर है जो दुख में काफी गंभीर हो जाता है। एडविन वीक ने बताया कि बचे हुए हाथियों के सामने ठीक वैसी स्थिति है जैसे उन्होंने अपने परिवार को खो दिया हो। थाइलैंड में लगभग 7000 एशियाई हाथी हैं, जिनमें आधे से कम ही वनों में खुलकर रहते हैं।

पहले भी इस झरने से गिरकर मर चुके हैं 8 हाथी

गौरतलब है कि 1992 में भी इसी झरने में गिरकर आठ हाथियों की मौत हो गई थी। अब ताजा घटना को लेकर लोग वन्यजीव एवं वन संरक्षण विभाग पर लापरवाही बरतने का आरोप लगा रहे हैं। गौरतलब है कि इस पार्क में 300 जंगली हाथियों का निवास है और यह क्षेत्र यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल फायायेन खाओ याई वन क्षेत्र का हिस्सा है।

भिखारी की झोपड़ी से मिले इतने पैसे, गिनते-गिनते हो गई रात, दूसरे दिन भी पुलिस नहीं लगा पाई हिसाब

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मुंबई में एक भिखारी की एक्सीडेंट में मौत के बाद उसके घर पुलिस पहुंची तो भिखारी के घर में पैसे देखकर पुलिस के होश उड़ गए. दो दिन तक पुलिस भिखारी के घर से मिले पैसे का हिसाब-किताब लगाती रही. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई के वासी राजकीय रेलवे पुलिस को एक भिखारी का शव मिला, जिसकी एक दुर्घटना में मौत हो गई.

एक झोपड़ी में रहने वाले भिखारी बिरादीचंद पन्नारामजी आजाद की शुक्रवार को मानखुर्द और गोवंडी स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान ट्रेन से कटकर मौत हो गई. इसके बाद जीआरपी ने भिखारी का शव बरामद कर उनके बेटे से संपर्क करने की कोशिश की. जब संपर्क नहीं हुआ तो जीआरपी भिखारी के झोपड़ी पर पहुंची.

भिखारी के झोपड़ी में पहुंच कर पुलिस के होश उड़ गए. भिखारी के पास से 8.77 लाख रुपये का फिक्स डिपॉजिट, उसके बैंक में 96,000 रुपये जमा और 1.75 लाख के सिक्के मिले. 82 साल के इस भिखारी का परिवार राजस्थान में रहता है. भिखारी का शव मिलने के बाद जीआरपी ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया. स्थानीय लोगों ने उसकी पहचान की. वह हार्बर लाइन पर भीख मांगा करता था.

भिखारी की झोपड़ी में छानबीन करने वाले जीआरपी के सब इंस्पेक्टर ने बताया, “वहां पर हमें चार बड़े डिब्बे और एक गैलन मिला. इनके अंदर एक, दो, पांच और 10 रुपये के सिक्कों को प्लास्टिक की थैलियों में रखा हुआ था. हमने शनिवार शाम से रविवार तक सिक्कों को गिना और यह 1.75 लाख रुपये निकले.”

छत्तीसगढ़ – साढ़े सात लाख के नकली नोट पकड़ने वाली टीम को मिला इंद्रधनुष सम्मान…

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हसौद थाना क्षेत्र में नकली नोट चलाने वाले गिरोह काे पकड़ने वाली टीम को डीजीपी ने इंद्रधनुष दिया, वहीं अंडरब्रिज में फंसी बस की यात्रियों की जान बचाने वाले डॉयल 112 के दो आरक्षक व पॉयलट को भी सम्मानित किया गया है।

बेहतर काम करने वाले टीआई, एसआई से लेकर आरक्षक तक को सम्मानित करने के लिए डीजीपी इंद्रधनुष पुरस्कार देते हैं।रायपुर में प्रदेश भर में अच्छा काम करने वाले 58 लोगों को सम्मानित किया गया। इसमें जिले से हसौद थाना क्षेत्र में नकली नोट चलाने वाले गिरोह को पकड़ने वाले टीआई देवेश सिंह राठौर, पामगढ़ थाना प्रभारी आरके लहरे व साइबर सेल के मनोज तिग्गा शामिल हैं। एसआई आरके लहरे लगातार दूसरी बार इंद्रधनुष योजना में डीजीपी द्वारा सम्मानित किए गए हैं। जांजगीर की ओर से जा रही बस के ड्राइवर ने अंडर ब्रिज में पानी भरा होने के बाद भी बस घुसा दी थी। बस पानी के बीच में ही बंद हो गई, अंडरब्रिज का पानी बस में भरने लगा था। तब डायल 112 के जीएल चंद्राकर ने डायल 112 के आरक्षक राकेश यादव, आरक्षक महेश मधुकर व पायलट संजीव यादव को तत्काल मौके पर भेज कर यात्रियों काे बस से सकुशल बाहर निकाला था।

छत्तीसगढ़ : यहां नवरात्र पर मां दुर्गा की नहीं, बल्कि असुर राज महिषासुर की होती है पूजा…

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पूरे देश में नवरात्र की धूम है। उत्साह पूर्वक लोग देवी मां के विविध रूपों की पूजा कर रहे हैं। वहीं एक ऐसा भी तबका है, जो गुस्से में है और शोक में डूबा है। ये लोग महिषासुर वध से नाराज रहते हैं और इसे छल बताते हैं। खुद को असुर राज का वंशज बताने वाले यह लोग नवरात्र पर महिषासुर मर्दिनी की नहीं, बल्कि महिषासुर की पूजा करते हैं। छत्तीसगढ़ में जशपुर जिले के मनौरा विकासखंड में पौराणिक पन्नों से निकलकर असुर आज भी निवासरत हैं। ग्रामीण कहते हैं कि हम अपने पूर्वज की मृत्यु पर खुशी कैसे मना सकते हैं।

नवरात्र पर नहीं करते रीति-रिवाजों का पालन

  1. खुद को राक्षसराज महिषासुर का वंशज बताने वाली यह जनजाति जशपुर के मनोरा विकासखंड के जरहापाठ, बुर्जुपाठ, हाडिकोन, दौनापठा स्थानों पर निवास करती है। इसके अलावा बस्तर के कुछ हिस्सों मेें भी आदिवासी समुदाय महिषासुर को अपना पूर्वज मानते हैं। असुर समुदाय में भैंसासुर की पूजा दीपावली के दिन होती है। स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि समाज के लोग दुर्गा पूजा में शामिल नहीं होते हैं। पूर्वजों के अनुसार उन्हें डर रहता है कि देवी प्रकोप से उनकी मृत्यु हो सकती है। असुर जनजाति के लोग नवरात्रों के दौरान किसी भी तरह के रीति रिवाज या परंपरा का पालन नहीं करते हैं। 
  2. दुर्गा प्रतिमा के साथ महिषासुर की प्रतिमा न लगाने के लिए सौंपा ज्ञापननवरात्र के पहले ही दिन कांकेर में संपूर्ण मूल आदिवासी समाज की ओर से विरोध किया गया। उन्होंने दुर्गा प्रतिमा के साथ महिषासुर की प्रतिमा न लगाने और रावण दहन पर रोक लगाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा। सर्व आदिवासी समाज, गोंडवाना समाज, युवा सर्व आदिवासी समाज ने कहा कि हजारों साल से हम भैंसासुर, महिषासुर की पूजा अपनी परंपरा के तहत करते आ रहे हैं। अपने खेतों, खलिहानों, सिवानों में हमारे पूर्वज महिषासुर को अपना अराध्य देव मानकर उसके प्रति अपनी धार्मिक आस्था रखते हैं। 
  3. असुर समाज ने सरकार से मदद और संरक्षण देने की लगाई है गुहारपहाड़ी इलाके में रहने वाली इस जनजाति को अब अपने खत्म होने का डर सता रहा है। बदहाली का जीवन गुजार रही इस असुर जनजाति ने अब सरकार ने अपनी मदद और संरक्षण के लिए गुहार लगा रही है। असुर समाज के मनीराम कहते हैं कि असुरों की जनसंख्या पूरे देश मे करीब साढ़े सात हजार है। जबकि छत्तीसगढ़ में महज ढाई सौ की संख्या में ही ये बचे हैं। छत्तीसगढ़ में असुर समाज के कई युवा पढ़े-लिखे हैं, लेकिन नौकरी से वंचित है। खेती और शिकार आज भी इनका मुख्य व्यवसाय है। 
  4. प्रदेश में इनके समाज का एकमात्र युवक सरकारी नौकरी में है। स्थानीय लोगों ने असुर समाज को विशेष संरक्षित जनजाति का दर्जा देने की मांग की है। असुर समाज के गणेश राम कहते हैं विलुप्ती की कगार पर पहुंच चुकी जनजाति के लोगों को अभी तक विशेष संरक्षित जनजाति का दर्जा न मिलना सरकारी खामियों को उजागर करता है। जनजाति की शिक्षित युवती सीता बेग कहती है कि जिस तरह पहाड़ी कोरवाओं को नौकरियों में विशेष छूट मिलती है, उसी तरह उन्हें भी मिलनी चाहिए। जिससे इनका आर्थिक विकास हो सके।