इसरो ने तीन सप्ताह से अधिक समय पहले चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के प्रयास के दौरान संपर्क से बाहर हुए ‘चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम’ से संपर्क कायम करने की कोशिशें अभी छोड़ी नहीं हैं. गत सात सितंबर को चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ से कुछ मिनट पहले ‘विक्रम’ का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया था.
इसके बाद से ही बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी लैंडर से संपर्क स्थापित करने के लिए ‘हरसंभव’ कोशिशें कर रही है, लेकिन चंद्रमा पर रात शुरू होने के कारण 10 दिन पहले इन कोशिशों को स्थगित कर दिया गया था. इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने मंगलवार को भाषा से कहा, अभी यह संभव नहीं है, वहां रात हो रही है. शायद इसके बाद हम इसे शुरू करेंगे. हमारे लैंडिंग स्थल पर भी रात का समय हो रहा है.
चंद्रमा पर रात होने का मतलब है कि लैंडर अब अंधेरे में जा चुका है. उन्होंने कहा कि चंद्रमा पर दिन होने के बाद हम प्रयास करेंगे.’चंद्रयान-2′ काफी जटिल मिशन था जिसमें चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के अनछुए हिस्से की खोज करने के लिए ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर को एक साथ भेजा गया था.
इसरो ने प्रक्षेपण से पहले कहा था कि लैंडर और रोवर का जीवनकाल एक चंद्र दिवस यानी कि धरती के 14 दिनों के बराबर होगा. कुछ अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि लैंडर से संपर्क स्थापित करना अब काफी मुश्किल लगता है.
इसरो के एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा कि मुझे लगता है कि कई दिन गुजर जाने के बाद संपर्क करना काफी मुश्किल होगा लेकिन कोशिश करने में कोई हर्ज नहीं है. यह पूछे जाने पर कि क्या चंद्रमा पर रात के समय अत्यधिक ठंड में लैंडर दुरुस्त स्थिति में रह सकता है.
अधिकारी ने कहा, सिर्फ ठंड ही नहीं, बल्कि झटके से हुआ असर भी चिंता की बात है क्योंकि लैंडर तेज गति से चंद्रमा की सतह पर गिरा होगा. इस झटके के कारण लैंडर के भीतर कई चीजों को नुकसान पहुंच सकता है. इस बीच, सिवन ने कहा कि ऑर्बिटर ठीक है.
बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान की लाडली बहन अर्पिता खान शर्मा दूसरी बार मां बनने वाली है। आपको बता दें कि उनका बेटा आहिल तीन साल को गया है। अब वो अपना दूसरा बेबी प्लान कर रही है। जैसे ही इस बात की खबर अर्पिता खान शर्मा के घरवालों को मिली वैसे ही उनका उत्साह चरम पर आ गया है। एक इंटरव्यू के दौरान अर्पिता ने बताया कि, ये गुडन्यूज सुनकर सलमान खान का कैसा रिएक्शन था।
स्पॉटबॉय से बातचीत में अर्पिता खान से जब पूछा गया कि, सलमान खान ने गुडन्यूज सुनकर क्या कहा था? जवाब में अर्पिता ने कहा कि, पूरा खानदान ये खबर सुनकर काफी खुश और एक्साइटेड है। अर्पिता ने बताया कि, उनकी सेकंड प्रेग्नेंसी प्लान्ड नहीं थी लेकन जब उन्हें प्रेग्नेंसी के बारे में पता चला तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था, जनवरी में अर्पिता की डिलीवरी होगी।
हालांकि जब अर्पिता से पूछा गया कि उन्होंने बच्चे का नाम क्या सोचा है तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि, अभी तक नहीं सोचा है। लड़का होगा या लड़की, ये देखने के बाद ही वे नाम पर फैसला लेंगे।
इस बात की जानकारी बीते दिन आईफा अवॉर्ड में आयुष शर्मा ने पत्नी की प्रेग्नेंसी को कंफर्म करते हुए कहा था कि, ‘जल्द ही गुडन्यूज मिलेगी। हां अर्पिता और मैं दूसरे बेबी को एक्सेप्ट कर रहे हैं। ये एक शानदार जर्नी है, ये फिर से शुरू हुआ है। हम बेबी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।’
आपको बता दें कि आयुष और अर्पिता की शादी चार साल पहले हुई थी। शादी के बाद अर्पिता ने एक बेटे को जन्म दिया जिसका नाम आहिल रखा है जिसे पूरा खान परिवार बेहद प्यार करता है। सलमान खान भी बहन अर्पिता के बेटे आहिल को बेहद प्यार करते हैं। कई बार मामा-भांजे की बॉन्डिंग देखने को मिली है।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्ट्रेशन (NRC) के उत्तर प्रदेश में आज लागू होने की मीडिया में चल रही खबरों का यूपी डीजीपी ने खंडन कर दिया है। दरअसल, मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, एनआरसी को यूपी में मंगलवार (आज) से लागू करने की बात कही गई थी। साथ ही कहा गया था कि डीजीपी ऑफिस ने इसके लिए तैयारी पूरी कर ली है और मसौदा सभी जिलों के पुलिस कप्तानों, आईजी, डीआईजी (रेंज) और सभी एडीजी (जोन) को भेज दिया गया है।
मीडिया रिपोर्टों का खंडन करते हुए डीजीपी ने कहा कि इसका एनआरसी से कोई लेना-देना नहीं है। बांग्लादेशी और विदेशी जो अवैध रूप से यहां रह रहे हैं उनकी पहचान की जाएगी और उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। यदि उनके दस्तावेज गलत पाए जाते हैं तो उन्हें निर्वासित कर दिया जाएगा। साथ ही सभी जिलों के बाहरी छोर पर स्थित रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, रोड के किनारे व उसके आसपास नई बस्तियों की पहचान की जाएगी, जहां बांग्लादेशी व अन्य विदेशी नागरिक अवैध रूप से शरण लेते हैं। सतर्कता के साथ सत्यापन के इस कार्य की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी। जांच में अगर संबंधित व्यक्ति अपना पता अन्य राज्यों, जिलों में बताता है तो समयबद्घ तरीके से उसका सत्यापन कराया जाएगा।
फर्जी दस्तावेज मुहैया कराने वाले नपेंगे
सूत्रों की मानें तो अगर कोई अपने निवास या प्रवास का फर्जी दस्तावेज मुहैया कराता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं उनके दस्तावेज का निरस्तीकरण भी होगा। साथ ही उन्हें ये डाक्यूमेंट्स मुहैया कराने वाले बिचौलिए, कर्मचारी और अधिकारी भी नपेंगे। सत्यापन में चिह्नित अवैध विदेशी नागरिकों को देश से बाहर निकालने के लिए इसका प्रारूप गृह विभाग को भेजा जाएगा। उन्हें देश से बाहर करने के लिए बीएसएफ की भी मदद ली जाएगी।
एकत्र किए जाएंगे फिंगर प्रिंट डाटा
सूत्रों के मुताबिक, अवैध आवासित विदेशी नागरिकों के फिंगर प्रिंट लेकर राज्य फिंगर प्रिंट ब्यूरो भेजा जाएगा। वहां ऐसे लोगों का कंप्यूटराइज्ड डाटा जिलावार रखा जाएगा। साथ ही विभिन्न व्यवसायों जैसे कंस्ट्रक्शन कंपनियों को अपने यहां काम कर रहे विदेशी मजदूरों के आईडी प्रूफ का पुलिस सत्यापन कराकर रखना होगा।
लखनऊ से दिल्ली के बीच शुरू होने वाली तेज एक्सप्रेस को लेकर IRCTC ने बड़ा फैसला लिया है. रेल यात्रियों को आकर्षित करने के लिए बीमा के साथ साथ ट्रेन देर होने पर मुआवजा देने का प्रावधान किया गया.अगर 1 घंटे की देरी होती है तो यात्री को 100 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. वहीं 2 घंटे से ज्यादा की देरी होती है तो प्रत्येक यात्री को 250 रुपये दिए जाएंगे.
नया मोटर व्हीकल एक्ट 2019 लागू होने के बाद आज से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का नियम और गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी बदल गया है. इसी के चलते डीएल और आरसी दोनों के फॉर्मेट में बदलाव किया गया है. इस बदलाव के बाद देशभर में सभी के डीएल और आरसी दोनों के फॉर्मेट में बदलाव किया गया है।
इस बदलाव के बाद देशभर में सभी के डीएल और गाड़ी की आरसी का फॉर्मेट एक जैसा होगा. डीएल और आरसी का रंग, लुक, डिजाइन और सिक्योरिटी फीचर्स एक समान होंगे।
नए नियम के तहत डीएल और आरसी में माइक्रोचिप और क्यूआर कोड लगा होगा.जोकि कई मामलों में फायदेंमंद साबित होगा। इसका एक फायदा तो यह होगा कि डीएल और आरसी में एक जगह पर जानकारी होगी, इसी के साथ इस चिप में पिछला सारा रिकॉर्ड होगा. इस क्यूआर कोड की हेल्प से केंद्रीय डाटा बेस से ड्राइवर या वाहन के बारे में पूरा रिकॉर्ड निकाला जा सकेगा।
। सवाई मानसिंह अस्पताल में कॉर्डियक सर्जन डॉ. रामगोपाल यादव ने 86 वर्षीय बुजुर्ग की हार्ट सर्जरी कर नया जीवनदान दिया है। भरतपुर चांदपुरा निवासी हरीसिंह पिछले दो साल से सीने में दर्द से परेशान था। उसने कई अस्पतालों के डॉक्टर्स को इसके इलाज के लिए संपर्क किया, लेकिन उसकी उम्र अधिक होने तथा तंबाकू का अधिक उपयोग करने के कारण उसके लंग्स और गुर्दे भी कमजोर होने के कारण अधिकांश डॉक्टरों ने उसके इलाज के लिए मना कर दिया था। इसके बाद हरीसिंह के परिजनों ने उसे एसएमएस अस्पताल के कॉर्डियक सर्जन डॉ. रामगोपाल यादव से संपर्क किया। डॉ. रामगोपाल शर्मा बताते है कि अधिक उम्र होने के बावजूद जब हमने मरीज की एंजियोग्राफी सहित अन्य जांचे कराई तो पता चला कि उसके लग्स और गुर्दे भी सुचारु रूप से काम नहीं कर रहे है। ऐसे में उसकी जान को खतरा हो सकता है। लेकिन उसके बावजूद भी हमें अपनी की मदद से हरीसिंह का सफल ऑपरेशन करने में कामयाबी हासिल की।
भामाशाह योजना के तहत हुआ निशुल्क इलाज अनस्टेबल एंजाइना के बारे में बारे में बताते हुए डॉ. यादव ने कहा कि इस बीमारी में मरीज के दिल में लगातार दर्द होता है। वह अपनी दिनचर्या के काम भी करने में दूसरों पर निर्भर हो जाता है। वह 15 सिंतबर को एसएमएस अस्पताल में भर्ती हुआ था और उसका 25 सिंतबर को सफल ऑपरेशन किया गया। वह अब इस बीमारी से पूरी तरह स्वस्थ्य हो चुका है और एक-दो दिन में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
डॉ. यादव ने बताया कि हरीसिंह भामाशाह योजना के तहत आता है। जिसके कारण उसका एसएमएस अस्पताल में पूर्णरूप से निशुल्क ऑपरेशन किया गया जबकि इसी ऑपरेशन को बिना भामाशाह वाले के लिए करीब 70 हजार और निजी अस्पताल में कम से कम डेढ़ से दो लाख का खर्च आता।
छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने पुलिस भर्ती में शामिल बेरोजगारों को बड़ा झटका देने के बाद थोड़ी राहत देने की कोशिश की है. पुलिस आरक्षकों के 2259 पदों पर ली गई भर्ती को निरस्त करने के बाद अब सरकार करीब 3 हजार पदों पर जल्द ही भर्ती के आश्वासन दिए हैं. इतना ही नहीं पुलिस आरक्षक की पिछली भर्ती में आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को आवेदन शुल्क नहीं लेने का निर्णय सरकार ने लिया है. इसके अलावा उन्हें उम्र की सीमा में भी छूट देने का ऐलान किया गया है.
छत्तीसगढ़ सरकार में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने पुलिस आरक्षक की भर्ती निरस्त किए जाने को लेकर सोमवार को मीडिया से चर्चा की. गृहमंत्री ताम्रध्वज ने कहा कि अभ्यर्थी पिछली भर्ती में आवेदन किए थे और उन्होंने तय उम्र सीमा अब पार कर ली है, उन्हें भी इस बार आवेदन की अनुमति दी जाएगी. इतना ही नहीं पिछली बार आवेदन करने वालों से इस बार सरकार कोई शुल्क नहीं लेगी. सरकार पुलिस आरक्षक के करीब 3 हजार पदों पर भर्ती के लिए जल्द ही विज्ञापन जारी करेगी.
इस भर्ती को किया निरस्त बता दें कि 29 दिसंबर 2017 को तत्कालीन राज्य सरकार ने पुलिस आरक्षक के 2259 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था. इसके लिए मई-जून 2018 में जिलावार शारीरिक दक्षता परीक्षा ली गई. इसमें 1 लाख से ज्यादा आवेदक शामिल हुए. इस टेस्ट को पास कर 61 अभ्यर्थियों ने सितंबर 2018 में आरक्षक पद के लिए लिखित परीक्षा दी थी. लिखित परीक्षा के कुछ दिन बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लग गई. इसके बाद से परीक्षा परिणाम का इंतजार अभ्यर्थी कर रहे थे. इसी बीच 29 सितंबर 2019 को इस भर्ती को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया गया. इसके पीछे विधि विभाग के अभिमत का हवाला दिया गया. सरकार के इस निर्णय के बाद अभ्यर्थियों में आक्रोश है.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में हुए एक किन्नर की हत्या का मामला पुलिस ने सुलझा लिया है. शहर के राजीव इलाके में रविवार को किन्नर की लाश मिली थी. हत्या की आरोपी उसकी शागिर्द किन्नर ही निकली. पैसों के लेनदेन को लेकर दोनों के बीच पुराना विवाद चल रहा था. हत्या के दिन भी इसी बात को लेकर दोनों में बहस हुई. झगड़े में काजल उर्फ शंकर बुद्धे ने छाया किन्नर की धारदार हथियार से हत्या कर दी. फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है.
पैसों को लेकर था विवाद
मिली जानकारी के मुताबिक, दुर्ग के राजीव नगर इलाके में हुए किन्नर की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हासिल हुई है. घटना के 24 घंटे के भीतर ही पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी मृतक किन्नर सोनू की शार्गिद काजल किन्नर निकली है. बताया जा रहा है कि काफी लंबे समय से दोनों किन्नरों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था.
पहले पिलाई शराब, फिर किया खून
बताया जा रहा है कि रविवार रात काजल किन्नर ने छाया को अपने घर फोन करके खाने पर बुलाया. फिर दोनों ने मिलकर जमकर शराब भी पी. शराब के नशे में दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया. पैसे को लेकर शुरू हुए विवाद में काजल ने मौका देखकर छाया के गले और पेट पर धारदार हथियार से वार कर दिया. इस हमले में छाया किन्नर की मौके पर मौत हो गई. इसके बाद काजल किन्नर ने लाश को बोरी में बंद कर राजीव नगर के एक खाली प्लॉट में फेंक दिया और फरार हो गई.
आसपास के लोगों से पूछताछ करने पर पुलिस को जानकारी मिली कि उस रात आखिरी बार काजल के साथ छाया को देखा गया था. पुलिस को आस-पास के लोगों ने बताया कि काजल किन्नर की घर से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आ रही थी. इससे पुलिस का शक काजल पर गहरा गया. सख्ती से पूछताछ के बाद काजल ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया. फिलहाल पुलिस ने काजल किन्नर को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है.
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर से लगे खमतराई में वनदेवी का एक अनोखा मंदिर है, जहां माता को नारियल, फूल, पूजा सामग्री का चढ़ावा नहीं चढ़ाया जाता. बल्कि यहां प्रसाद के रूप में कंकड़ व पत्थर का चढ़ावा चढ़ाया जाता है. इस अनोखी परंपरा का पालन सदियों से किया जा रहा है. खमतराई बगदाई मंदिर में वनदेवी की पूजा की जाती है. मान्यता है कि वनदेवी के दरबार में मन्नत पूरी होने के लिए चढ़ावे के रूप में पांच पत्थर चढ़ाया जाता है.
बिलासपुर के इस मंदिर के पुजारी अश्वनी तिवारी बताते हैं कि वनदेवी के मंदिर में पांच पत्थर चढ़ाने की अनोखी प्रथा यहां सदियों से चली आ रही है. इस मंदिर में भक्त फूल, माला और पूजन सामग्री लेकर नहीं आते हैं. बल्कि पांच पत्थर लेकर मां को प्रशन्न करते हैं और मां से अपनी मनोकामना कहते हैं. यहां मान्यता है की मां वनदेवी के मंदिर में सच्चे मन से पांच पत्थर चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना जरूर पूरी होती है. मान्यता है कि मन्नत पूरी होने से पहले और बाद में श्रद्धालुओं को पांच-पांच कंकड़ या पत्थर का चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है.
वनदेवी की मंदिर में पूज करने पहुंची महिलाएं.
चढ़ता है ये विशेष पत्थर
मंदिर के पुजारी अश्वनी तिवारी ने बताया कि वनदेवी के मंदिर में कोई भी पत्थर चढ़ावे के रूप में नहीं चढ़ाया जा सकता, बल्कि खेतों में मिलने वाला गोटा पत्थर ही बस चढ़ाने की परंपरा है. अश्वनी तिवारी कहते हैं कि छत्तीसगढ़ी में इस पत्थर को चमरगोटा कहते हैं. बस यही पत्थर चढ़ावे के रूप में चढ़ाया जाता है. मंदिर में पहुंची श्रद्धालु सुनीता साहू और आनंद बाई का कहना है कि मंदिर की इस अनोखी परम्परा के बारे में जानकर दर्शन करने और मनोकामना लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं. यहां उनकी मन्नत पूरी भी होती है.
देशभर में नवरात्रों की धूम है. पूरे देश में दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है. लेकिन देश के कुछ इलाके ऐसे भी हैं, जहां नवरात्रों के दौरान शोक मनाया जाता है. जिस महिषासुर का देवी दुर्गा ने वध किया, उसको कुछ आदिवासी समुदाय अपना पूर्वज मानते हैं. देश के कई हिस्से ऐसे हैं, जहां इस दौरान महिषासुर शहादत दिवस मनाया जाता है.
झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ आदिवासी इलाकों में महिषासुर को पूजा जाता है. आदिवासी उसे अपना पूर्वज मानते हैं. उनका कहना है कि देवी दुर्गा ने छल से उसका वध किया था. महिषासुर उसके पूर्वज थे और देवताओं ने असुरों का नहीं बल्कि उनके पूर्वजों का संहार किया था.
झारखंड के गुमला में आदिवासी समुदाय के कुछ ऐसे ही लोग रहते हैं. गुमला की पहाड़ियों में असुर नाम की जनजाति रहती है. असुर जनजाति महिषासुर को अपना पूर्वज मानती है. झारखंड के सिंहभूम इलाके की कुछ जनजाति भी महिषासुर को अपना पूर्वज मानती है. इन इलाकों में नवरात्रों के दौरान महिषासुर का शहादत दिवस मनाया जाता है. बंगाल के काशीपुर इलाके में आदिवासी समुदाय के लोग महिषासुर के शहादत दिवस को धूमधाम से मनाते हैं.
महिषासुर को वीर योद्धा मानते हैं आदिवासी असुर आदिवासी समुदाय के लोग मानते हैं कि देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच युद्ध दरअसल आर्यों और अनार्यों के बीच की लड़ाई थी. आर्यों ने महिषासुर को इस लड़ाई में मार दिया. कई जगहों पर महिषासुर को राजा भी माना जाता है. असुर जनजाति के लोग नवरात्रों के दौरान दस दिनों तक शोक मनाते हैं. इस दौरान किसी भी तरह के रीति रिवाज या परंपरा का पालन नहीं होता है. आदिवासी समुदाय के लोग बताते हैं कि उस रात विशेष एहतियात बरता जाता है, जिस रात महिषासुर का वध हुआ था.
कुछ आदिवासी मानते हैं कि महिषासुर का असली नाम हुडुर दुर्गा था. वो एक वीर योद्धा थे. महिषासुर महिलाओं पर हथियार नहीं उठाते थे. इसलिए देवी दुर्गा को आगे कर उनकी छल से हत्या कर दी गई. आदिवासी आज भी महिषासुर के किस्सों को अपने बच्चों को बताते हैं और इस तरह महिषासुर को अपना पूर्वज मानने की परंपरा आज तक चली आ रही है.
देवी दुर्गा की प्रतिमा
झारखंड के आदिवासियों में असुरों को लेकर अलग है मान्यता
आदिवासी समुदाय के बीच हिंदू धर्म में असुरों की व्याख्या को लेकर अलग नजरिया रहा है. ये किस हद तक प्रचलित है इसे आप यूं समझ सकते हैं कि झारखंड में 2008 में वहां के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने दशहरा के मौके पर रावण दहण कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया था. रांची के मोराबादी मैदान में रावण दहन कार्यक्रम में वो ये कहकर शामिल नहीं हुए कि रावण आदिवासियों का पूर्वज है. वे उनका दहन नहीं कर सकते.
पश्चिम बंगाल के एक इलाके में भी नवरात्रों के दौरान शोक मनाया जाता है. पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के अलीपुरदुआर के पास एक चाय बगान है. वहां कुछ जनजाति महिषासुर को अपना पूर्वज मानते हुए नवरात्रों को दौरान शोक मनाते हैं. जबकि पूरे पश्चिम बंगाल में नवरात्र बहुत ही बड़े पैमाने पर मनाया जाता है. असुर जनजाति के इन लोगों के बीच भी यही कहानी प्रचलित है कि महिषासुर उनका पूर्वज था, जिसे देवताओं ने छल से मारा. इस जनजाति के बच्चे मिट्टी के बने शेर के खिलौने से खेलते हैं और वो शेर की गर्दन मरोड़ देते हैं. वो ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि देवी दुर्गा की सवारी शेर है. असुर जनजाति के लोग शेरों से नफरत करते हैं.
महिषासुर की वजह से पड़ा मैसूर शहर का नाम
एक किवदंती के मुताबिक कर्नाटक के मैसूर शहर का नाम महिषासुर की वजह से ही पड़ा है. कई इतिहासकार भी इसका समर्थन करते हैं. स्थानीय किस्से कहानियों के मुताबिक असुर महिषासुर के नाम पर इस जगह का नाम मैसूरू पड़ा. मैसूरू का मतलब महिषासुर की धरती होता है. ये बाद में बदलकर मैसूर हो गया. यहां की लोककथाओं के मुताबिक महिषासुर को मां चामुंडेश्वरी ने मारा था. मैसूर की एक पहाड़ी का नाम ही चामुंडेश्वरी देवी के नाम पर है. इस पहाड़ी पर महिषासुर की मूर्ति लगी है.
महिषासुर को अपना पूर्वज मानते हैं आदिवासी
महिषासुर का शहादत दिवस मनाए जाने को लेकर विवाद
महिषासुर का शहादत दिवस और उसे पूजे जाने को लेकर कई बार विवाद भी हुए हैं. राजनीति में भी कई बार महिषासुर को घसीटा गया है. दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कई बार महिषासुर शहादत दिवस का आयोजन हुआ है. 2011 में जेएनयू में इस तरह का आयोजन हुआ था. इस आयोजन को दलित-आदिवासी और ओबीसी छात्रों का समर्थन प्राप्त था.
महिषासुर शहादत दिवस का आयोजन ऑल इंडिय बैकवर्ड स्टूडेंट्स फोरम से जुडे छात्रों ने किया था. इन छात्रों का कहना था कि महिषासुर कोई मिथकीय नहीं बल्कि ऐतिहासिक पात्र है. आदिवासी समुदाय इसे अपना पूर्वज मानते हैं. आदिवासी समुदाय अपनी अस्मिता को महिषासुर से जोड़कर देखते हैं.