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नहीं कर सकेंगे प्लास्टिक की इन चीज़ों का इस्तेमाल

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दुनिया में प्लास्टिक का जितना उत्पादन (Plastic Production) होता है, उसमें से आधा सिर्फ एक बार इस्तेमाल कर फेंक दी जाने वाली प्लास्टिक का है. वन टाइम यूज़ प्लास्टिक पर कल यानी 2 अक्टूबर से बैन लगने जा रहा है. कई राज्यों जैसे महाराष्ट्र, तमिल नाडु, उड़ीसा और मध्यप्रदेश में इस तरह के प्लास्टिक पर पहले ही लगाम कस चुकी है. क्या हैं वे आइटम जिनका घरों में धड़ल्ले से इस्तेमाल होता रहा है और जिनपर अब बैन लगने जा रहा है. (सभी तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

 अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में हम कई ऐसे प्लास्टिक उत्पादों का उपयोग करते हैं जो एक बार के बाद किसी काम के नहीं रह जाते. इन्हें सिंगल यूज या डिस्पोजेबल प्लास्टिक कहते हैं. प्लास्टिक बैग, बोतलें, स्ट्रॉ, प्लास्टिक कप, प्लेट्स, खाने की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक, चाय-कॉफी के कप और गिफ्ट रैपर शामिल हैं. ई-कॉमर्स कंपनियां सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग में काफी आगे हैं. हालांकि कई बड़ी कंपनियां अब प्रोडक्ट की पैकिंग में इसका इस्तेमाल कम कर रही हैं.

अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में हम कई ऐसे प्लास्टिक उत्पादों का उपयोग करते हैं जो एक बार के बाद किसी काम के नहीं रह जाते. इन्हें सिंगल यूज या डिस्पोजेबल प्लास्टिक कहते हैं. प्लास्टिक बैग, बोतलें, स्ट्रॉ, प्लास्टिक कप, प्लेट्स, खाने की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक, चाय-कॉफी के कप और गिफ्ट रैपर शामिल हैं. ई-कॉमर्स कंपनियां सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग में काफी आगे हैं. हालांकि कई बड़ी कंपनियां अब प्रोडक्ट की पैकिंग में इसका इस्तेमाल कम कर रही हैं.

 सिंगल यूज प्लास्टिक का विरोध दुनियाभर में हो रहा है. पर्यावरण को नुकसान में इसका बड़ा हाथ है क्योंकि केवल 10 से 13 फीसदी तक प्लास्टिक ही री-साइकिल हो पाता है. यही कारण है कि यूरोपियन यूनियन ने साल 2021 तक सिंगल यूज प्लास्टिक को पूरी तरह से बंद करने की मुहिम चला रखी है, जिसमें काफी हद तक सफलता भी मिलने लगी है.

सिंगल यूज प्लास्टिक का विरोध दुनियाभर में हो रहा है. पर्यावरण को नुकसान में इसका बड़ा हाथ है क्योंकि केवल 10 से 13 फीसदी तक प्लास्टिक ही री-साइकिल हो पाता है. यही कारण है कि यूरोपियन यूनियन ने साल 2021 तक सिंगल यूज प्लास्टिक को पूरी तरह से बंद करने की मुहिम चला रखी है, जिसमें काफी हद तक सफलता भी मिलने लगी है.

 इसी तर्ज पर पीएम नरेंद्र मोदी ने भी सिंगल यूज प्लास्टिक बैन की बात कही. माना जा रहा है कि 2 अक्टूबर से 6 तरह के आइटम बैन हो सकते हैं जिससे प्लास्टिक के इस्तेमाल में सालाना लगभग 10% तक कमी आएगी. हालांकि सरकार इन सामानों के बैन पर किसी तरह के फाइन या सजा से पहले 6 महीने का वक्त देगी ताकि लोग विकल्पों की व्यवस्था कर सकें.

इसी तर्ज पर पीएम नरेंद्र मोदी ने भी सिंगल यूज प्लास्टिक बैन की बात कही. माना जा रहा है कि 2 अक्टूबर से 6 तरह के आइटम बैन हो सकते हैं जिससे प्लास्टिक के इस्तेमाल में सालाना लगभग 10% तक कमी आएगी. हालांकि सरकार इन सामानों के बैन पर किसी तरह के फाइन या सजा से पहले 6 महीने का वक्त देगी ताकि लोग विकल्पों की व्यवस्था कर सकें.

 प्लास्टिक कैरी बैग- कुछ सालों पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्लास्टिक बैग का इतनी तेजी से इस्तेमाल आने वाली पीढ़ियों के लिए परमाणु बम जैसे खतरे का काम कर रहा है. पर्यावरण सुरक्षा के मद्देनजर ये बात कही गई थी. ये बैग नॉन बायोडिग्रेडेबल हैं यानी नेचुरल तरीके से गलते नहीं हैं. ऐसे में एक प्लास्टिक बैग को पूरी तरह से खत्म होने में लगभग 1000 साल लग जाते हैं. कुदरत, इंसानी सेहत और पशुओं के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे प्लास्टिक बैग्स पर बैन लगने जा रहा है.

प्लास्टिक कैरी बैग- कुछ सालों पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्लास्टिक बैग का इतनी तेजी से इस्तेमाल आने वाली पीढ़ियों के लिए परमाणु बम जैसे खतरे का काम कर रहा है. पर्यावरण सुरक्षा के मद्देनजर ये बात कही गई थी. ये बैग नॉन बायोडिग्रेडेबल हैं यानी नेचुरल तरीके से गलते नहीं हैं. ऐसे में एक प्लास्टिक बैग को पूरी तरह से खत्म होने में लगभग 1000 साल लग जाते हैं. कुदरत, इंसानी सेहत और पशुओं के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे प्लास्टिक बैग्स पर बैन लगने जा रहा है.

 प्लास्टिक कप- ये भी इसी श्रेणी में हैं. जूस से लेकर चाय-कॉफी पीने के लिए रेस्त्रां या स्ट्रीट वेंडर इसी कप का इस्तेमाल करते हैं. यहां तक कि घरों में किसी बड़े आयोजन के दौरान भी प्लास्टिक कपों का इस्तेमाल आम है. ये इंसानी सेहत के लिए ठीक नहीं. असल में इन कपों पर एक तरह की वैक्स होती है, जो इन्हें गर्मी या बेहद ठंड से बचाती है. चाय-कॉफी डालने पर इस वैक्स में पाया जाने वाला पॉलीस्‍ट्रीम नामक रसायन पेय में चला जाता है और फिर हमारे शरीर में. ये सेहत के लिए काफी नुकसानदेह है. साथ ही पर्यावरण के लिए भी ये ठीक नहीं.

प्लास्टिक कप- ये भी इसी श्रेणी में हैं. जूस से लेकर चाय-कॉफी पीने के लिए रेस्त्रां या स्ट्रीट वेंडर इसी कप का इस्तेमाल करते हैं. यहां तक कि घरों में किसी बड़े आयोजन के दौरान भी प्लास्टिक कपों का इस्तेमाल आम है. ये इंसानी सेहत के लिए ठीक नहीं. असल में इन कपों पर एक तरह की वैक्स होती है, जो इन्हें गर्मी या बेहद ठंड से बचाती है. चाय-कॉफी डालने पर इस वैक्स में पाया जाने वाला पॉलीस्‍ट्रीम नामक रसायन पेय में चला जाता है और फिर हमारे शरीर में. ये सेहत के लिए काफी नुकसानदेह है. साथ ही पर्यावरण के लिए भी ये ठीक नहीं.

 प्लास्टिक प्लेट्स, सिंगल यूज प्लास्टिक बोतलें स्ट्रॉ और रेस्त्रां में खाने के साथ मिलने वाले सॉस, काली मिर्च इत्यादि के प्लास्टिक सैशे भी बैन के दायरे में हैं. ये तमाम चीजें सिंगल यूज प्लास्टिक कहलाती हैं. हालांकि किसी भी तरह से प्लास्टिक इंड्रस्टी के जुड़े लोग सिंगल यूज को अलग तरह से समझाते हैं. 50 माइक्रोन से मोटी और 20 प्रतिशत तक रीसाइकिल हो सकने वाली चीजें को वे सिंगल यूज नहीं मानते.

प्लास्टिक प्लेट्स, सिंगल यूज प्लास्टिक बोतलें स्ट्रॉ और रेस्त्रां में खाने के साथ मिलने वाले सॉस, काली मिर्च इत्यादि के प्लास्टिक सैशे भी बैन के दायरे में हैं. ये तमाम चीजें सिंगल यूज प्लास्टिक कहलाती हैं. हालांकि किसी भी तरह से प्लास्टिक इंड्रस्टी के जुड़े लोग सिंगल यूज को अलग तरह से समझाते हैं. 50 माइक्रोन से मोटी और 20 प्रतिशत तक रीसाइकिल हो सकने वाली चीजें को वे सिंगल यूज नहीं मानते.

 प्लास्टिक बैन का कई इंडस्ट्रीज पर असर पड़ने जा रहा है. इसमें FMCG कंपनियां यानी Fast Moving Consumer Goods, एयर कंडीशनर, फ्रिज, कंज्यूमर अप्लायंसेज, ई-कॉमर्स, रेस्त्रां, होटलों पर बड़ी मार पड़ सकती है क्योंकि इन जगहों पर भारी मात्रा में प्लास्टिक यूज होता है. इसके अलावा छोटी रिटेल दुकानों और राशन दुकानों पर भी इसका असर पड़ सकता है.

प्लास्टिक बैन का कई इंडस्ट्रीज पर असर पड़ने जा रहा है. इसमें FMCG कंपनियां यानी Fast Moving Consumer Goods, एयर कंडीशनर, फ्रिज, कंज्यूमर अप्लायंसेज, ई-कॉमर्स, रेस्त्रां, होटलों पर बड़ी मार पड़ सकती है क्योंकि इन जगहों पर भारी मात्रा में प्लास्टिक यूज होता है. इसके अलावा छोटी रिटेल दुकानों और राशन दुकानों पर भी इसका असर पड़ सकता है.

Airtel के इस सस्ते प्लान में अब मिलेगा दोगुना इंटरनेट डेटा, मिलेगी 4G स्पीड

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टेलिकॉम कंपनी एयरटेल अपने प्रीपेड ग्राहकों के लिए अच्छी खबर लाई है. कंपनी ने अपने 65 रुपये वाले प्रीपेड प्लान में डबल डेटा बेनिफिट देने का ऐलान किया है. एयरटेल ने अपने इस प्लान को स्मार्ट रिचार्ज के तौर पर लॉन्च किया था. पहले जहां 65 रुपये के रिचार्ज प्लान में यूज़र्स को 65 रुपये का ही टॉक टाइम मिलता था, वहीं अब इसमें यूज़र्स को डबल टॉक टाइम ऑफर किया जा रहा है.

यानी कि रिवाइज़ के बाद अब 65 रुपये के रिचार्ज में ग्राहकों को 130 रुपये का टॉक टाइम दिया जा रहा. इस प्लान की वैलिडिटी 28 दिनों की है. साथ ही इस प्लान में इंटरनेट डेटा भी ऑफर किया जा रहा है. इस प्लान में यूज़र्स को 200MB 4G/3G/2G डेटा दिया जा रहा है.

खबर के मुताबिक फिलहाल एयरटेल ने रिवाइज किए गए इस प्लान को देश की कुछ ही सर्कल्स में उपलब्ध कराया है. इनमें झारखंड, गुजरात, असम, बिहार,  हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, नॉर्थ ईस्ट, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, पूर्वी-पश्चिमी यूपी, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं.

599 रुपये के प्लान में मिलेगा Life Insurance
इससे पहले एयरटेल ने प्रीपेड पैक 599 रुपये प्लान के साथ 4 लाख तक का लाइफ इंश्योरेंस कवर देने का ऐलान किया था. एयरटेल ने Bharti AXA Life Insurance के साथ पार्टनरशिप की है. कंपनी अपने प्रीपेड बंडल के साथ 4 लाख तक का बिल्ट-इन इंश्योरेंस देने का ऐलान किया है. यह लाइफ कवर टर्म इंश्योरेंस जैसा होगा, जिसमें डेथ के बाद नॉमिनी को पैसे मिलेंगे.

टर्म इंश्योरेंस प्लान में मैच्योरिटी वैल्यू नहीं होती है. यह लाइफ कवरेज प्रीपेड प्लान का कॉम्पलीमेंट्री फीचर होगा और इसके लिए अलग से प्रीमियम नहीं भरना पड़ेगा.

SC/ST एक्ट: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की बात मानी, अब फिर से पहले की तरह तुरंत होगी गिरफ्तारी

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सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट मामले में केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका को स्वीकार कर लिया है. अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को पलट दिया है. यानी इस एक्ट के तहत अब पहले की तरह ही शिकायत के बाद तुरंत गिरफ्तारी हो सकेगी. बता दें कि 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में बदलाव करते हुए तुरंत गिरफ्तारी पर रोक हटा दी थी. उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहले जांच होगी और फिर गिरप्तारी होगी.

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने केन्द्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर ये फैसला सुनाया. पीठ ने कहा कि समानता के लिये अनुसूचित जाति और जनजातियों का संघर्ष देश में अभी खत्म नहीं हुआ है. पीठ ने कहा कि समाज में अभी भी ये वर्ग के लोग छुआछूत और अभद्रता का सामना सामना कर रहे हैं और वे बहिष्कृत जीवन गुजारते हैं.

शीर्ष अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 15 के तहत अनुसूचित जाति और जनजातियों के लोगों को संरक्षण प्राप्त है, लेकिन इसके बावजूद उनके साथ भेदभाव हो रहा है. इस कानून के प्रावधानों के दुरूपयोग और झूठे मामले दायर करने के मुद्दे पर न्यायालय ने कहा कि ये जाति व्यवस्था की वजह से नहीं, बल्कि मानवीय विफलता का नतीजा है.

छत्तीसगढ़ : कांग्रेस शासित राज्यों को केंद्र नहीं कर रही मदद

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कांग्रेस शासित राज्यों को केंद्र सरकार आर्थिक मदद नहीं कर रही है। राज्यों को उनके हिस्से की राशि भी नहीं दी जा रही है। वहीं जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी किसी भी भाजपा शासित राज्य से सौतेला व्यवहार नहीं किया। बदलापुर की राजनीति कांग्रेस नहीं भाजपाई ही करते हैं। 15 साल बाद सत्ता चले जाने से भाजपाई बौखला गए हैं और कांग्रेस पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। यहीं नहीं भाजपा के कई विधायक कांग्रेस के संपर्क में हैं।

उक्त आशय की बातें मध्य प्रदेश के राजस्व एवं मंत्री परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कही है। दुर्ग प्रवास के दौरान प्रदेश कांग्रेस के सचिव दीपक दुबे के पद्मनाभपुर स्थित निवास में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने पत्रकारों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार ने अपने चुनावी वायदों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। चाहे किसानों की ऋणमाफी का मामला हो या बेटियों की शादी की। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में प्रत्येक ब्लॉक में 25 गोशाला का निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आपदा बाढ़ से मध्य प्रदेश में लाखों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई है। प्राकृतिक आपदा से निपटने केंद्र सरकार से 12 हजार करोड़ रुपये की मदद मांगी गई है।

कई भाजपाई कांग्रेस में हो सकते हैं शामिल

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार की स्थिरता को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने कहा कि भाजपाई सरकार की स्थिरता को लेकर दुष्प्रचार कर रहे हैं। जबकि वास्तविकता यह है भाजपा के दो विधायक कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं और अभी कई विधायक संपर्क हैं। उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार पूरे पांच साल चलेगी और कांग्रेस ने अगले पांच वर्ष भी सरकार चलाने के लिए योजना बनानी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है। बस्तर विधानसभा उप चुनाव का परिणाम इसे प्रमाणित कर रहा है। चित्रकुट चुनाव में भी कांग्रेस को जीत मिलेगी। जिसका फायदा मध्य प्रदेश में झाबुआ विस उपचुनाव में कांग्रेस को मिलेगा।

नए मोटर व्हीकल एक्ट का कर रहे परीक्षण

परिवहन मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के नए मोटर व्हीकल एक्ट का परीक्षण किया जा रहा है। छोटी-छोटी धाराओं में भारी जुर्माना का प्रावधान रखा गया है। हमारी मंशा भी लोगों की सुरक्षा है, लेकिन हम यह भी चाहते हैं कि जुर्माना का बोझ जनता पर ना पड़े। कांग्रेस की मंशा कांग्रेस शासित राज्यों में उक्त एक्ट को एक साथ संशोधन कर लागू करने की है। उन्होंने हनी ट्रेप मामले में कहा कि सरकार ने एसआईटी जांच के निर्देश दिए हैं। मामले में जिन जनप्रतिनिधियों व अफसरों का नाम आ रहा है उसका खुलासा मीडिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।

दुर्ग में कार्यकर्ताओं से की मुलाकात

दुर्ग पहुंचने के बाद परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर उनका स्वागत किया। मंत्री ने बताया कि वे डोंगरगढ़ से मां बम्बलेश्वरी का दर्शन कर लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस सचिव दीपक दुबे पहले कांग्रेस में जिला अध्यक्ष भी रह चुके हैं। दीपक में टैलेंट की कमी नहीं है। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल युवा मुख्यमंत्री है। उनके नेतृत्व में दीपक दुबे के टैंलेंट का पूरा-पूरा उपयोग होगा। पत्रकारों के चर्चा के दौरान दीपक दुबे, संघर्ष हिरवरकर, खुर्शीद अमहद, संजय बत्रा, प्रीतम देशमुख, अलताफ अहमद, अजय मिश्रा, राजकुमार पाली, लीलाधर पाल, अनुज दुबे एवं अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।

छत्तीसगढ़ : 5 जिलों के SP, दो IG सहित एक दर्जन IPS की तबादला लिस्ट तैयार

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छत्तीसगढ़ में आइपीएस की तबादले की सूची तैयार हो गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ओके करने के बाद इसे जारी कर दिया जाएगा। पीएचक्यू के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो पांच जिलों के एसपी, दो आइजी सहित एक दर्जन आइपीएस का तबादला होगा। नगरीय निकाय चुनाव से पहले सरकार बड़ा फेरबदल करने जा रही है।

इसमें उन एसपी की छुट्टी करने की तैयारी है, जिनका परफार्मेंस कमजोर पाया गया है। कई जिलों के एसपी की कांग्रेस विधायकों ने भी शिकायत की है, जिसके बाद उनको बदलने की चर्चा है।

पुलिस मुख्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो तबादला सूची इस सप्ताह जारी हो गई होती, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे जारी नहीं किया गया। सरकार ने सभी जिलों के एसपी के कामकाज की सूची तैयार कराई है। इसमें कुछ एसपी के काम कमजोर पाए गए हैं।

वहीं कुछ की लगातार शिकायत भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पास पहुंच रही है। बताया जा रहा है कि कुछ एसएसपी को जिलों में भेजा जा सकता है। हाल ही में पांच आइपीएस का तबादला किया गया था। निरीक्षकों के तबादले के बाद डीएसपी के भी तबादले पेंडिंग हैं।

एक दिन पहले ही छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस अकादमी चंदखुरी में प्रशिक्षणरत 23 उप पुलिस अधीक्षक पास हुए हैं। इनको भी जिलों में पोस्टिंग दी जाएगी। इसके लिए पीएचक्यू ने लिस्ट तैयार कर ली है।

छत्तीसगढ़ : QR कोड वाला लाइसेंस लटका, कंपनी मांग रही ज्यादा पैसा

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देश के साथ-साथ प्रदेश में भी एक अक्टूबर 2019 क्यूआर कोड युक्त ड्राइविंग लाइसेंस बनाना था, लेकिन क्यूआर कोड वाले लाइसेंस के लिए प्रदेश वासियों को अभी इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि प्रदेश में काम कर रही ठेका कंपनी और शासन के बीच अनुबंध नहीं हो पाया है। इसकी वजह है कि क्यूआर कोड युक्त लाइसेंस दोनों तरफ प्रिंट होगा। इस कारण ठेका कंपनी द्वारा अधिक पैसे की डिमांड की गई है। परिवहन विभाग ने कंपनी के डिमांड को शासन के पास भेजा है लेकिन शासन से अभी तक हरी झंडी नहीं मिली है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद ही प्रदेश में क्यूआर कोड युक्त लाइसेंस बनने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। परिवहन विभाग के अधिकारी का कहना है कि शासन को भेजा गया है।

छत्तीसगढ़ में इस वक्त 60 लाख ड्राइविंग लाइसेंस और 55 लाख आरसी बुक हैं। वर्मतान के लाइसेंस में चिप लगा हुआ है। चिप से परिवहन विभाग को बहुत सी जानकारियां मिल जाता हैं। लेकिन देशभर के लाइसेंस को अब क्यूआर कोड युक्त करना है। क्यूआर कोड से लाइसेंस और गाड़ी के दस्तावेज को लैस हो जाएगा।

एक अक्टूबर से प्रदेशभर में लागू होना था लेकिन कंपनी और शासन के बीच अभी तक अनुबंध नहीं हो पाया है। प्रदेश में लाइसेंस छापने का काम कर रही कंपनी का 2022 तक का अनुबंध है। लेकिन क्यूआर कोड होने से लाइसेंस को अब दोनों तरफ प्रिंट करना पड़ेगा, जिससे खर्च अधिक आएगा। ठेका कंपनी द्वारा परिवहन विभाग से अधिक पैसे की मांग की है।

लाइसेंस में मिलेंगी 50 से अधिक जानकारियां

क्यूआर कोड युक्त लाइसेंस में वाहन मालिक के नाम के साथ माता-पिता का नाम, पता, जन्म तिथि, शैक्षणिक योग्यता, पहचान चिन्ह, मोबाइल नंबर, वाहन का प्रकार, जारी करने की तिथि, इसकी वैधता के साथ ही निर्माणकर्ता अधिकारी का नाम, अंगदान के विकल्प सहित 50 से अधिक जानकारियां शामिल की गई हैं। प्लास्टिक का यह कार्ड आधुनिक एनएफसी सिस्टम से लैस होगा।

घर के पते पर भेजा जाएगा लाइसेंस

परिवहन विभाग के अधिकारी ने बताया कि क्यूआर कोड युक्त लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया शुरू होने पर किसी को परिवहन दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पडेंगे। विभाग लाइसेंस धारियों द्वारा दिए गए पते पर लाइसेंस भेजेगा। उन्होंने बताया कि यदि किसी के घर का पता बदल गया है या फिर वह दूसरी जगह पर रहने लगा है तो उसे परिवहन कार्यालय पहुंचकर नया एड्रेस अपलोड करना पड़ेगा।

– क्यूआर कोड युक्त लाइसेंस बनाने की परमिशन के लिए शासन के पास भेजा गया है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा। – डी. रविशंकर, संयुक्त परिवहन आयुक्त, छत्तीसगढ़

अघोरी साधुओं के ऐसे डार्क सीक्रेट्स, जो कानूनी तौर पर जुर्म हैं

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श्मशान में सेक्स : अघोरी (aghori miracle) लड़कियों और औरतों के साथ, उनकी मर्ज़ी से शारीरिक संबंध बनाते हैं. अपनी मान्यताओं के हिसाब से अघोरी साधु श्मशानों में लाशों के ऊपर ये क्रिया करते हैं और उनका कहना होता है कि यह किसी किस्म के आनंद या मज़े के लिए नहीं बल्कि भाव समाधि के उद्देश्य से किया जाता है. अघोरियों का यह कार्यकलाप अक्सर चर्चा और कई तरह की बहसों में रहा है.

कैनिबलिज़्म यानी नरभक्षण : अघोरियों के विश्वास के अनुसार उनका भोजन केवल लाश होता है. वो जीवित का भोजन नहीं करते इसलिए श्मशानों में मरे हुए मनुष्यों को वो अपना भोजन बनाते हैं. एक और मान्यता के हिसाब से अघोरी अपने भोजन को पका नहीं सकते हैं इसलिए वो ये मांस या तो कच्चा खाते हैं या सिर्फ आग यानी चिता में जला हुआ.

गांजा और चिलम : अघोरियों का शौक नहीं बल्कि पहचान है गांजे का सेवन करना. चिलम के ज़रिये अघोरी साधु गांजा पीते हैं. अघोरी पंथ का कहना है कि गांजा पीना उनके लिए नशा करना नहीं होता है बल्कि यह भाव समाधि में पहुंचने का रास्ता होता है जिसके ज़रिये वो अलौकिक दुनिया में पहुंचते हैं और ध्यान की अवस्था को हासिल करते हैं. कुंभ के मेलों में इन साधुओं को सार्वजनिक तौर पर गांजे का सेवन करते हुए देखा जाता है.

कानूनी पेंच 1 – खुले में यानी सार्वजनिक स्थानों पर सेक्स करना भारत के कानून के हिसाब से अपराध है. आईपीसी की धारा 294 ए के मुताबिक : सार्वजनिक स्थान पर कोई भी अगर अश्लीलता करता है तो उसे तीन महीने तक की कैद या जुर्माना या दोनों सज़ाएं दी जा सकती हैं. वैसे भी भारत के ज़्यादातर इलाकों में आप खुले में होंठों पर किस तक नहीं कर सकते क्योंकि इसे कानूनी तौर पर अश्लीलता और सामाजिक तौर पर अपराध माना जाता है.

कानूनी पेंच 2 – कैनिबलिज़्म या नरभक्षण भारत के कानून के हिसाब से वैध नहीं है. हालांकि इसके लिए कोई स्पष्ट कानून नहीं है लेकिन कई पहलुओं के चलते इस वैध नहीं माना गया है. देश के ज़्यादातर इलाकों में यह प्रैक्टिस अवैध है. इसे दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के सिलसिले में समझा जाता है. बनारस में यह वैध न होने के बावजूद अघोरियों को बनारस के घाटों पर यह प्रैक्टिस करते हुए देखा जा सकता है.

कानूनी पेंच 3 – गांजा भारत में नशीला पदार्थ माना जाता है और इसकी सार्वजनिक खरीद फरोख्त पर प्रतिबंध है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के मुताबिक एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत गांजे की खरीद फरोख्त को अवैध करार दिया गया है और अलग अलग मात्रा के हिसाब से सज़ा का प्रावधान है. कमर्शियल क्वांटिटि यानी 20 किलो से ज़्यादा की खरीदी बिक्री के मामले में 20 साल कैद तक की सज़ा हो सकती है. हालांकि अघोरी आम तौर से गांजे का इस्तेमाल कम मात्रा में करते हैं लेकिन कानूनन वैध नहीं है. (सभी तस्वीरें प्रतीकात्मक हैं.)

यहां गिरी थी सती की जीभ , नवरात्र में आते है हर रोज 50 से 60 हजार भक्त

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हिमाचल प्रदेश की कालीधार पहाड़ी पर ज्वाला देवी मंदिर में देवी को ज्योता वाली मां भी बोला जाता है, क्योंकि मां के नौ रूप यहां अग्नि के रूप में हैं. बिना ऑयल व बाती के यह ज्योत सालों से जल रही है. इस बार प्रबंधन ने स्वच्छता के लिए यहां प्लास्टिक की थैली, थाली व ग्लास पर प्रतिबंध लगा दिया है. नवरात्र के आरंभिक दिनों में 50 से 60 हजार भक्त रोज आएंगे तो अंतिम दिनों में संख्या एक लाख के पार कर जाएगी.

  • बिना तेल, बिना बाती बरसों से प्रज्ज्वलित हैं ज्वाला जी

मंदिर के पुजारी संदीप शर्मा बताते हैं कि दर्शन के लिए भक्तों का पहुंचना प्रारम्भ हो गया है. यह 51 शक्तिपीठों में से एक है. इस बार नवरात्र में 8 से 10 लाख लोगों के आने का अनुमान है. नौ ज्वालाओं में प्रमुख ज्वाला जी चांदी के दीये के बीच स्थित हैं. उन्हें महाकाली बोला जाता है. अन्य आठ ज्वालाओं में मां अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका व अंजी देवी हैं. मान्यता है कि इसी स्थान पर मां सती की जिह्वा गिरी थी.

  • दिन में 5 बार होती है आरती

आरती के समय सुंदर नजारा होता है. दिन में 5 बार आरती होती है. प्रातः काल पांच बजे पहली आरती में मालपुआ, खोआ, मिस्री का प्रसाद चढ़ाया जाता है. एक घंटे बाद दूसरी आरती में पीले चावल व दही का भोग लगता है. तीसरी आरती दोपहर में होती है. इसमें चावल, छह दालों और मिठाई का भोग होता है. शाम को चौथी आरती में पूरी-चना व हल्वे का भोग. रात नौ बजे शयन आरती, सौंदर्यलहरी का गान व सोलह शृंगार होता है. इसके बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं.

  • 180 वर्ष पहले फिर से बनवाया थामंदिर को

नवरात्र पर यहांविशेष मेला लगताहै, जो 8 अक्टूबर तक चलेगा. वर्तमान मंदिर का पूरा निर्माण महाराजा रणजीत सिंह व राजा संसारचंद ने 1835 में करवाया था. मुख्य मंदिर के पास गोरखनाथ का मंदिर भी है. पास ही गोरख डिब्बी है, जो एक कुंड है. कुुंड का पानी खौलता हुआ दिखता है, लेकिन छूने पर ठंडा होता है.

क्या आप जानते हैं क्यों होता है गुरुद्वारे के लंगर का खाना इतना स्वादिष्ट, जानिए

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पंजाबी और अच्छा खाना मानो पर्यायवाची हैं। पंजाबी अपनी ज़िंदादिली और भांगड़ा के साथ-साथ अपने स्वादिष्ट खाने के लिए भी जाने जाते हैं। किसी भी पंजाबी के घर से आप भर-पेट खाना खाए बिना नहीं निकल सकते। जैसा कि सभी जानते हैं, पंजाब देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक है और पंजाब का खाना इस बात का सबूत है। यहां पर ज़्यादातर भोजन शुद्ध और देसी घी में पकाया जाता है, जिसे खाए बिना कोई नहीं रह सकता है।

दुनिया के किसी भी गुरुद्वारे के लंगर का खाना खाकर अक्सर लोग अपनी उंगलियां चाटते रह जाते हैं। गुरुद्वारे में कोई छप्पन भोग नहीं परोसा जाता है, बल्कि दाल, चावल, रोटी, सब्ज़ी और सलाद खिलाया जाता है। लेकिन यह आम भोजन का स्वाद किसी 5 स्टार होटल के विदेशी खाने से कम नहीं लगता है। हम तो यह कहेंगे कि जो संतुष्टि गुरुद्वारे के इस खाने को खाकर मिलती है, वह संतुष्टि किसी 5 स्टार होटल के पकवान खाकर कभी नहीं मिलती है। लंगर का खाना हमेशा स्वादिष्ट होता है। यह सबसे अच्छे और संतोषजनक भोजनों में से एक होता है। दिल्ली में ऐसा अक्सर देखा गया है, जब कॉलेज के वो छात्र जो अपने परिवार से अलग रहते हैं, वे कई बार गुरुद्वारे का प्रसाद खाने आते हैं। बच्चे गुरु ग्रन्थ साहेब के आगे माथा टेक्कर सीधा लंगर में खाने के लिए लाइन लगाते हैं। इसके अलावा जब लोगों के पास पैसों की कमी होती है, तो उन्हें गुरुद्वारे आकर पेट भर खाने का मौक़ा मिलता है। इस लंगर के भोजन को खाकर एक अजीब सा सुकून मिलता है। यह तो सोचने वाली बात है कि ऐसा क्या है जो लंगर के खाने को इतना ख़ास और लज़ीज़ बनाता है? हमारे अनुसार इन कारणों से लंगर का खाना इतना ख़ास और मज़ेदार होता है।

लंगर का भोजन गुरुद्वारा के भक्तों और सेवकों द्वारा बनाया जाता है। वे सब एक साथ मिलकर इस भोजन को तैयार करते हैं। भोजन बनाते समय वे ‘वाहे गुरु’ का नाम लेते हैं। गुरुद्वारे में जाति, पंथ, हैसियत आदि चीज़ों को पीछे छोड़, हर क्षेत्र से भक्त आते हैं और एक साथ ज़मीन पर बैठकर भोजन का आनंद लेते हैं। यह भोजन सभी सेवकों द्वारा बहुत सम्मान और प्यार के साथ हर किसी को परोसा जाता है। गुरुद्वारा में हर उम्र में लोग अपनी सेवा देते हैं।

सेवकों द्वारा सभी व्यंजनों को हाइजीनिक तरीके से बनाया जाता है. साथ ही, भोजन बनाने के लिए सिर्फ ताज़ी और शुद्ध सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। लंगर में भारी मात्रा में भोजन बनाया जाता है ताकि गुरुद्वारा में आनेवाले सभी लोग इस भोजन का लाभ उठा सके और साथ ही, इस भोजन को दान भी किया जा सके। गुरुद्वारा में कीर्तन की ध्वनि सुनते हुए भोजन खाने से ज़्यादा सुकून और शान्ति और किसी चीज़ में नहीं मिल सकती है। ऐसे पवित्र वातावरण में भोजन खाने का मज़ा ही कुछ और होता है।

यह गुरुद्वारा में सेवा प्रदान करते सैंकड़ों सेवकों और भक्तों की उदारता और निस्वार्थता है जो इस भोजन को और भी ज़्यादा ख़ास बनाती है। यदि आपने अब तक लंगर के खाने का स्वाद ना चखा हो, तो जल्द से जल्द से चख लें। ऐसा आनंद और किसी भोजन को खाकर नहीं आता है।

वैष्णो देवी पहुंचे सिद्धू से धक्का-मुक्की, शिवसेना ने की नारेबाजी

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वैष्णो देवी पहुंचे कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू के साथ धक्का-मुक्की की खबर है. शिवसेना ने सिद्धू के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाए कि वैष्णो देवी में नवजोत सिंह सिद्धू को वीआईपी ट्रीटमेंट क्यों दिया जा रहा है. प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि सिद्धू पाकिस्तान के समर्थन में बयानबाजी कर चुके हैं.

बता दें, खालिस्तानी उग्रवादी और हाफिज सईद के करीबी गोपाल सिंह चावला ने सिद्धू के साथ खुद की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी. इसके बाद सिद्धू की पाकिस्तान यात्रा विवादों में आ गई. देश की राजनीति में इस पर भूचाल मच गया और विपक्षी दलों ने कांग्रेस से सिद्धू की मुलाकात पर स्टैंड साफ करने को कहा.

इस मामले में विवाद बढ़ने पर नवजोत सिद्धू ने कहा था कि उन्हें राहुल गांधी ने ही पाकिस्तान भेजा था. उन्होंने कहा, ‘मेरे कप्तान राहुल गांधी हैं, उन्होंने ही भेजा है हर जगह.’ सिद्धू ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुझे पाकिस्तान जाने से मना किया था लेकिन करीब 20 कांग्रेसी नेताओं और केंद्रीय नेतृत्व के कहने पर मैं पाकिस्तान गया था. पंजाब के सीएम मेरे पिता के समान हैं. मैं उनसे पहले ही बता चुका था कि मैं पाकिस्तान जाऊंगा. मेरे कप्तान राहुल गांधी हैं और सीएम साहब के कप्तान भी राहुल गांधी हैं.

काफी बढ़ा पाकिस्तान का विवाद

बाद में यह विवाद इतना बढ़ा कि उनकी पार्टी के कई नेताओं ने पंजाब लोकसभा चुनाव में पार्टी के अच्छे प्रदर्शन न होने का ठीकरा सिद्धू के माथे पर फोड़ा. यहां तक कि मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से उनकी अनबन कुछ ज्यादा ही बढ़ गई और उन्हें पंजाब कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा.

छह जून को मंत्रिमंडल के पुनर्गठन में नवजोत सिंह सिद्धू से स्थानीय सरकार, पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों का विभाग लेकर उन्हें बिजली और नए और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत मंत्रालय दे दिया गया था.

नवजोत सिंह सिद्धू ने हालांकि अपने नए मंत्रालय प्रभार को संभालने से इनकार कर दिया था. दस जून को नई दिल्ली में कांग्रेस नेताओं-राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अहमद पटेल से मुलाकात कर उन्होंने बताया था कि लोकसभा में पार्टी की हार के लिए उन पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया गया. उसके बाद से वे एकांतवास में चले गए थे.