Home Blog Page 2557

हनी ट्रैप मध्य प्रदेश : श्वेता जैन चलाती थी ‘गृह मंत्रालय’, यूं करवाती नेताओं-अफसरों की जासूसी

0

मध्य प्रदेश की सियासत और अफसरशाही में भूचाल ला देने वाले हनी ट्रैप केस अब जो नया खुलासा हुआ है, वो यह है कि गिरोह की मास्टर माइंड श्वेता विजय जैन ने तो अपना एक ‘गृह मंत्रालय’ बना रखा था। जहां से नेताओं की जासूसी होती थी। उसी ‘गृह मंत्रालय’ से नेताओं और अफसरों के फोन टैप होते थे। इसके लिए श्वेता विजय जैन ने बेंगलुरु की एक कंपनी का हायर कर रखा था। यहीं नहीं वहां उनकी चैटिंग का भी रिकॉर्ड रखती थी।

मध्य प्रदेश हनी ट्रैप केस की जांच में सामने आया कि श्वेता व उसका गिरोह जिन नेताओं को जाल में फंसाता, उनकी हर गतिविधि पर नजर रखता था। उनके फोन, चैटिंग, एसएमएस सब का रिकॉर्ड रखा जा रहा था। बताया जा रहा है श्वेता विजय जैन के इस सीक्रेट काम में पांच लोग लगे थे। इनमें से दो साइबर फॉरेंसिक के एक्सपर्ट थे। खबर यह भी है कि मध्यप्रदेश पुलिस के साइबर सेल के मुख्यालय में भी श्वेता विजय जैन अक्सर देखी जाती थी। मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि श्वेता जासूसी के काम के लिए साइबर सेल के दफ्तर का प्रयोग करती थी। क्योंकि जिस कंपनी के साथ श्वेता के गठजोड़ सामने आ रहे हैं, वो पूर्व में कई केंद्रीय एजेंसियों के लिए भी काम की है।

खास सॉफ्टवेयर की ले रही थी मदद

दरअसल, इस काम से जुड़े लोग साइबर क्षेत्र के एक्सपर्ट थे। नेताओं और अफसरों की जासूसी के लिए कंपनी पिगासस सॉफ्टवेयर का यूज करती थी। इसके बग को जिन लोगों की जासूसी करनी होती थी, उनके फोन में किसी तरीके से भेजा जाता था। इसके लिए यह एसएमएस या वॉट्सऐप का प्रयोग कर उनके फोन गैलरी में भेज देते थे। यह बग ही फिर जासूसी का काम शुरू कर देता था। दावा है कि इस सॉफ्टवेयर से आईफोन भी सुरक्षित नहीं था।

जानिए होम्योपैथी दवाइयों के भी होते हैं इतने भयंकर परिणाम जानकर उड़ जाएंगे होश !

0

अक्सर आपने सुना होगा कि होम्योपैथिक दवाइयां कभी भी इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाती बल्कि यह फायदा ही पहुंचाती है लेकिन आज इस आर्टिकल में हम आपको बताने वाले की होम्योपैथिक दवाइयां भी किस प्रकार से इंसान को नुकसान पहुंचाती है।

जब भी आप होम्योपैथिक दवाइयां लेते हैं तब आपको डॉक्टर से लगता है कि किन-किन चीजों से आपको परहेज करना है यदि आप उन चीजों का प्रयास नहीं करेंगे और वह दवाइयां मिल लेते रहेंगे तो यह तो भैया आप को नुकसान पहुंचाएंगे।

इसके अलावा इन दवाइयों को समय सीमा से ज्यादा लेने पर यह आपके पेट में जलन और कब्ज की समस्या पैदा करते और किन का ओवरडोज भी बहुत ही खतरनाक है।

इसके अलावा होम्योपैथिक दवाइयां आपातकालीन स्थिति में आपकी कोई मदद नहीं कर सकती क्योंकि होम्योपैथिक दवाइयां बहुत ही धीरे धीरे असर करती हैं और यदि इनको रेगुलर नहीं लिया जाए तो यह किसी काम की नहीं है।

होम्‍योपैथि‍क दवाईयां पोषण संबंधी समस्या या पोषण की कमी होने की स्थि‍ति में बिल्कुल भी प्रभावकारी नहीं होती। उदाहरण के तौर पर एनिमिया या आयरन की कमी और अन्य तत्वों की कमी होने पर होम्‍योपैथि‍क बेअसर साबि‍त होता है। इन कमियों को सिर्फ डाइट या सप्लीमेंट के माध्यम से ही पूरा किया जा सकता है।

गोडसे ने क्यों की थी बापू की हत्या, नहीं जानते 90% लोग, देश मना रहा है गांधी जी की 150वीं जयन्ती…

0

 हिंदुस्तान में हमेशा से लोग ये सोचते हैं कि नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी (बापू) की हत्या इसलिए की थी क्योंकि महात्मा गांधी (बापू) पाकिस्ता़न को 55 करोड़ रूपए देने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले के विरोध में आमरण अनशन पर बैठ गए थे।

यह बात पूरी तरह सत्य नहीं है। नाथुराम गोडसे द्वारा की गई गांधी (बापू) की हत्या के पीछे असल कारण कुछ ओर था। बात जनवरी 1948 की है। गोडसे दिल्ली आए थे। वर्ष 1947 में हिंदुस्तान का बंटवारा हो गया था। पाकिस्ता़न से बड़ी तादाद में पलायन करके हिंदू हिंदुस्तान आ रहे थे। पाकिस्ता़न से आने वाली ट्रेनों में न केवल हिंदुओं की लाशे आ रही थी बल्कि वहां से महिलाओं का शील भंग कर हिंदुस्तान भेजा जा रहा था।

22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्ता़न ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया तो दूसरी ओर पाकिस्ता़न से लाशे और हिंदू शरणार्थी आने का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा था। इसी बीच माउंटबैटन ने हिंदुस्तान सरकार से पाकिस्ता़न सरकार को 55 करोड़ रुपए की राशि देने का परामर्श दिया था। आक्रमण और पलायन को देखते हुए केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल ने उसे टालने का निर्णय लिया।

लेकिन बापू उसी समय ये राशि तुरन्त पाकिस्ता़न को दिलवाने के लिए आमरण अनशन पर बैठ गए। गोडसे जैसे तैसे इस बात को सहन कर गए। बावजूद इसके गांधी (बापू) जी से नाराज गोडसे के मन में अभी तक उनकी हत्या कोई ख्याल नहीं आया था।

अभी तक बंटवारे, हिंदूओं का कत्लेआम और महिलाओं के साथ दुष्कर्म को लेकर गोडसे का गुस्सा जिन्ना और मुस्लिमों के प्रति ज्यादा था नहीं कि गांधी (बापू) के प्रति। दिल्ली में गोडसे पाकिस्ता़न से आने वाले हिंदू शरणार्थियों के कैंपों घूम घूम लोगों की सहायता के कार्य में लगा था।

इसी बीच गो़डसे की नजर पुरानी दिल्ली की एक मस्जिद पर गई जहां से पुलिस जबरदस्ती हिंदू शरणार्थी को बाहर निकाल रही थी। गौरतलब है कि शरणार्थी मंदिर और गुरूद्वारों में शरण लिए थे। जब कोई जगह नहीं मिली तो बारिश और सर्दी से बचने के लिए पाकिस्ता़न से आए शरणा़र्थियों ने एक खाली पड़ी मस्जि़द में शरण ले ली। जैसे ही यह बात गांधी (बापू) को पता चली तो वे उस मस्जि़द के सामने धरने पर बैठ गए और शरणार्थियों से मस्जि़द खाली करवाने के लिए सरकार पर दवाब बनाने लगे। जिस समय पुलिस लोगों को मस्जिद से बाहर निकाल रही थी। उस वक्त गोडसे भी वहां मौजूद थे।

बारिश से भीगे और सर्दी ठिठुरते बच्चों को रोते और कांपते देखकर गो़डसे का मन रोने लगा। गोडसे ने उस समय निर्णय लिया कि बस बहुत हुआ। अब इस महात्मा को दुनिया से जाना होगा। ये शब्द गोडसे के हैं और बतौर गोडसे उन्होंने उसी वक्त प्रण किया कि वो अब गांधी (बापू) का वध कर देगा।

गोडसे का कहना है कि एक बार देश यहां तक भी गांधी (बापू) के निर्णयों को स्वीकार कर लेता लेकिन वे जिस प्रकार अपनी जिद को मानवता और देश से बड़ी साबित करने के लिए अनश्न की आड़ में ब्लैकमेल कर रहे थे। उसको देखकर उसने तय किया की हिंदू और हिंदुस्तान को बचाने के लिए उसे अपने जीवन में गांधी (बापू) की हत्या जैसे कर्म भी करना पड़ेगा।

गौरतलब है कि गोडसे ने स्वतंत्रता के आंदोलन में गांधी (बापू) जी के द्वारा उठाए कए कष्टों और उनके योगदान की सराहना भी की है। लेकिन गांधी (बापू) द्वारा मुस्लिमों को प्रश्न करने के लिए जिस प्रकार एक पक्षीय निर्णय लिए जा रहे थे। उससे गोडसे खुश नहीं था।

यही कारण है कि महात्मा गांधी (बापू) की हत्या को हत्या न बताकर गोडसे ने उसे वध की संज्ञा दी और अपने इस कार्य के लिए निर्णय इतिहास पर छोड़ दिया कि अगर भविष्य में तटस्थ इतिहास लिखा जाएगा तो वह जरूर इस पर न्याय करेगा।

जिन्ना ने इस वजह से मोहम्मद अली गांधी जी को ‘महात्मा’ कहने से कर दिया था इनकार…

0

 2 अक्टूबर 2019 (2 October 2019) को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती (Mahatma Gandhi 150 Jayanti) देशभर में धूमधाम के साथ मनाई जाएगी। गांधी जयंती (Gandhi Jayanti) के मौके पर कई तरह के कार्यक्रमों के आयोजन किया जाएगा। जिसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Father Of Nation Mahatma Gandhi) को याद किया जाता है उनके द्वारा देश (India) की आजादी (Independence) के लिए किए गए संघर्ष के बारे में भी बताया जाता है। गांधी जयंती भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के अन्य देशों में धूम धाम का साथ मनाई जाती है और इस मौके पर कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। गांधी जयंती के खास मौके पर हम आपको बताने जा रहे कि जब मोहम्मद अली जिन्ना ने गांधी जी को ‘महात्मा’ कहने से इनकार कर दिया था तब गांधी जी ने इस पर किया प्रतिक्रिया दी थी।

जिन्ना ने गांधी जी को ‘महात्मा’ कहने से किया इनकार

गांधी जी को 1920 तक ‘महात्मा गांधी’ कहने का चलन बढ़ गया था। लोग उन्हें ‘महात्मा गांधी’ कहकर बुलाते थे। दिसंबर 1920 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक के दौरान खिलाफत आंदोलन के नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने गांधी जी को मिस्टर गांधी कहकर संबोधित किया था। जिसके बाद जिन्ना से अनुरोध किया गया कि वह गांधी जो को ‘महात्मा गांधी’ कहकर संबोधित करें।

इस दौरान वहां पर कई प्रतिनिधि ने तेज आवाज से बोलते हुए जिन्ना से कहा था कि वह गांधी जी को महात्मा गांधी कहकर संबोधित करें। मोहम्मद अली जिन्ना ने गांधी जी को ‘महात्मा गांधी’ कहने से साफ इनकार कर दिया और वो अपनी इसी जिद पर अड़े रहे। इसी बीच कई लोगों ने उनसे बैठने जाने का कहा। बात को बढ़ती हुई गांधी जी खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि ‘मैं एक महात्मा नहीं हूं, एक साधारण आदमी हूं’।

गांधी जी ने कहा था कि आप मोहम्मद अली जिन्ना साहेब को कोई खास शब्द बोलने के लिए कह रहे हैं तो यह कहकर आप मेरा सम्मान नहीं कर रहे हैं। गांधी जी ने सादगी भरे अंदाज में कहा कि हम दूसरों पर अपना विचार थोपकर असली आजादी हासिल नहीं कर सकते हैं। गांधी जी ने कहा था कि कोई भी शख्स हो उसी भाषा में यदि कुछ आपत्तिजनक या अपमानजनक नहीं हो तो उनको अपनी मर्जी से सोचने और बोलने की आजादी है। इसके बाद मोहम्मद अली जिन्ना पर भड़कने वाले सभी लोग शांत हो गए।

मोहम्मद अली जिन्ना थे प्रमुख राजनीतिज्ञ

जानकारी के लिए आपको बता दें कि मोहम्मद अली जिन्ना 20वीं सदी के एक प्रमुख राजनीतिज्ञ थे। मोहम्मद अली जिन्ना को पाकिस्तान के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। मोहम्मद अली जिन्ना मुस्लिम लीग के नेता थे और वह आगे चलकर पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल भी बने। मोहम्मद अली जिन्ना को पाकिस्तान में बाबा-ए-क़ौम यानी राष्ट्र पिता के नाम से नवाजा जाता है।

भारत के हर रेल यात्रियों को मालूम होना चाहिए टर्मिनस, जंक्शन और सेंट्रल के बीच का ये फर्क…

0

भारतीय रेल दुनिया के कुछ सबसे बड़े रेल नेटवर्क्स में शुमार होता है। एशिया में तो भारतीय रेल ही सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। हर दिन लाखों लोग भारतीय रेल में सफर करते हैं। कुछ लोग तो लगभग रोज़ ही भारतीय रेल में सफर करते हैं। लेकिन गारंटी है कि इन लोगों को भी नहीं मालूम होगा कि भारतीय रेल के किसी टर्मिनस, सेंट्रल या जंक्शन में क्या फर्क होता है। अगर आपको भी ये फर्क मालूम नहीं है तो चलिए आज आप सही जगह आ गए हैं। आज हम आपको बताएंगे इन तीनों का डिफरेंस।

1- टर्मिनस

वैसे आपने अधिकतर टर्मिनल शब्द ज़्यादा सुना होगा। कभी-कभार ही आपने टर्मिनस शब्द सुना होगा। आपको बता दें कि टर्मिनस और टर्मिनल एक ही चीज़ हैं। भारत में पूरे 27 टर्मिनस बने हैं। लोकमान्य तिलक और छत्रपति शिवाजी भारत के दो सबसे बड़े टर्मिनस हैं।

2- सेंट्रल

ऐसे स्टेशन्स जहां रेलगाड़ियों का आना-जाना लगा ही रहता है, उन्हें सेंट्रल कहते हैं। भारत में कुल 5 सेंट्रल स्टेशन्स हैं। इन स्टेशन्स पर हमेशा यात्रियों की भीड़ जमा रहती है। ये 5 सेंट्रल स्टेशन्स हैं कानपुर सेंट्रल, चेन्नई सेंट्रल, मुंबई सेंट्रल, मैंगलौर सेंट्रल और त्रिवेंद्रम सेंट्रल।

3- जंक्शन

ऐसे रेलवे स्टेशन्स जहां ट्रेन्स की आवाजाही के लिए कम से कम तीन रूट बने हों, उन्हें जंक्शन कहा जाता है। किसी जंक्शन पर एक साथ तीन दिशाओं से रेलगाड़ियां आ सकती हैं और जा सकती हैं। मौजूदा समय में भारत में 300 जंक्शन्स मौजूद हैं। मथुरा जंक्शन भारत का सबसे बड़ा जंक्शन है, क्योंकि इसमें पूरे 7 रूट हैं।

4- स्टेशन

भारत में मौजूदा समय में 8 हज़ार से भी ज़्यादा स्टेशन्स मौजूद हैं। स्टेशन उस जगह को कहा जाता है जहां रेल यात्रियों को रेलगाड़ी में सामान चढ़ाने या उतारने की छूट होती है।

जानिए Honey Trap में फंसे मध्य प्रदेश के पूर्व सांसद की बनायीं 30 अश्‍लील सीडी!

0

मध्य प्रदेश (madhya pradesh) के हाईप्रोफाइल हनीट्रैप (Honey Trap) केस में फंसे पूर्व सांसद की अश्लील सीडी को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि इस पूर्व सांसद की एक नहीं, दो नहीं, बल्कि पूरी तीस सीडी (CD)बनाई गई थीं. इन सीडी के जरिए ही आरोपी महिला बार-बार उन्हें ब्लैकमेल कर रही थी. लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) से पहले टिकट कटने के डर से पूर्व सांसद ने आरोपी महिला को दुबई टूर पर भेज दिया था.

माननीय का इसलिए कटा था टिकट
सूत्रों की मानें, तो जांच के दौरान एक ऐसी बात सामने आई है, जिससे जांच एजेंसी भी सकते में है. पता चला है कि एक पूर्व सांसद की सीडी एक बार नहीं, बल्कि कई बार बनाई गई है. इन्हीं सीडी के ज़रिए पूर्व सांसद से सबसे पहले दो करोड़ की रकम मांगी गई. यह सिलसिला यहीं नहीं थमा. टोटल तीस अश्लील सीडी बनने की वजह से माननीय को बार-बार ब्लैकमेल किया गया. एक बार इन्होंने खुदकुशी तक की कोशिश की थी. एक वरिष्ठ नेता के हस्ताक्षेप के बाद माननीय सदमे से उबर तो गए, लेकिन भोपाल की महिला आरोपी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा. आरोपी महिला ने उन्हें बार-बार ब्लैकमेल भी किया और एनजीओ के लिए कई सरकारी काम भी कराए. भोपाल से गिरफ्तार इस महिला आरोपी से एसआईटी पूछताछ कर रही है.

हनीट्रैप के जाल में कैसे फंसे? बताया जा रहा है कि राजनीतिक पार्टी के संगठन के बड़े नेता के ज़रिए भोपाल की महिला आरोपी से पूर्व सांसद की पहचान हुई थी. उसके बाद आरोपी महिला अपने एनजीओ के काम से पूर्व सांसद से कई बार मिली. उसी दौरान पूर्व सांसद महिला के जाल में बुरी तरह फंस गए और उनकी एक के बाद एक कर पूरी तीस अश्लील सीडी बना दी गईं. ब्लैकमेल हुए पूर्व सांसद ने पहली बार पीछा छुड़ाने के लिए आरोपी महिला को पूरे दो करोड़ रुपए दिए.

ख़ुदक़ुशी की कोशिश
जब आरोपी महिला ने तीस सीडी बनाए जाने की बात पूर्व सांसद को बताई, तो उन्होंने बदनामी के डर से खुदकुशी करने की कोशिश की थी. खुदकुशी की कोशिश की इस घटना के बाद आरोपी महिला कुछ महीनों तक शांत रही और इसके बाद उसने फिर पूर्व सांसद को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया. सांसद रहते हुए नेताजी ने आरोपी महिला के एनजीओ को फंडिंग दिलाई और कई सरकारी कामकाज भी किए.

 दुबई भी भेजा
हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के डर से पूर्व सांसद ने आरोपी महिला को कुछ महीनों के लिए अपने खर्च पर दुबई टूर पर भेज दिया. हालांकि, उसके बाद भी उन्हें टिकट नहीं मिला. हनीट्रैप में फंसे होने की वजह से पार्टी ने पूर्व सांसद का टिकट काट दिया. अब माननीय के पास कोई बड़ा पद नहीं है. सीडी सार्वजनिक न हो जाए, उन्‍हें इसकी आशंका जरूर है.

पानी पीते ही खुद नष्ट हो जाएंगी प्लास्टिक की बोतलें

0

प्लास्टिक की पानी की बोतल जल्द ही पर्यावरण के लिए खतरा नहीं रहेगी। केंद्र सरकार बोतलबंद पानी के लिए बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। इससे बनी पानी की बोतल तय समय में खुद नष्ट हो जाएगी।

इसके उपयोग से देश में एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक पर रोक लगाई जा सकेगी। अभी यूरोप और कई दूसरे देश इस तरह की बायोडिग्रेबल प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहे हैं।भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के एक अधिकारी ने बताया कि बोतलबंद पानी के लिए बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक इस्तेमाल करने को लेकर प्रयोग अंतिम चरण में है।यह प्लास्टिक 99 फीसदी तक बायोडिग्रेबल है। उन्होंने कहा, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनिरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) इसकी जांच कर रहा है कि यह कितने समय में नष्ट होकर मिट्टी में मिल जाती है। प्लास्टिक मुक्ति के लिए दो किलोमीटर दौड़ें :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्लास्टिक मुक्ति के लिए गांधी जयंती पर दो किलोमीटर दौड़ में हिस्सा लेने का आह्वान किया है।रविवार को मन की बात कार्यक्रम में उन्होंने देशवासियों से यह अपील की। ब्योरा

2022 तक इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक का लक्ष्य-
प्रधानमंत्री ने 2022 तक देश को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। कई मंत्रालयों ने बोतलबंद पानी के प्रयोग पर रोक लगाई है। उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान ने विकल्प तलाशने को बैठक भी की थी।

ये है भारत की वह नोकरीया जिनमे मिलती है सबसे ज्यादा सैलरी !

0

इन नोकरियो में लोग मेहनत करके ये ही जॉब पाना चाहते है ताकि वो अपनी ज़िन्दी ऐशो-आराम से गुजार सके।

सबसे पहले बात करते है वकील की जो भी व्यक्ति अच्छे कॉलेज और अच्छे नंबरों के साथ वकालत करता है उन्हें कम से कम 7 लाख रूपये वेतन मिलता है।

भारत में कमर्शियल पायलट को भी सबसे ज्यादा वेतन मिलता है इस नौकरी में व्यक्ति को 1.5 से 2 लाख रुपये प्रति माह वेतन दिया जाता है।

मैनेजमेंट प्रोफेशन में सबसे ज्यादा पैसा होता है इसमें नौकरी करबे वालों के वारे-न्यारे हो जाते है इस नौकरी में कम से कम 19 लाख रुपए प्रति वर्ष दिए जाते है।

डॉक्टर बनने के लिए इंसान को बहुत मेहनत करनी पड़ती है भारत में डॉक्टर को सालाना 16 लाख रूपये वेतन दिया जाता है।

चार्टर्ड अकाउंटेंट की जरुरत सिर्फ भारत में ही नहीं विदेशो में भी पड़ती है इन्हे सालाना 11 से 14 लाख रुपये का वेतन मिलता है।

2 कंपनियों के नाम हनीट्रैप कांड में , ऐसे रची गई पूरी साजिश…

0

मध्य प्रदेश में हनीट्रैप कांड के खुलासे के बाद स‍ियासी पारा चढ़ा हुआ है. कमलनाथ सरकार को इस कांड ने ह‍िलाकर रख द‍िया है. बीजेपी भी इससे अछूती नहीं रही है. हम बता रहे हैं ऐसे तीन अलग-अलग मामले, ज‍िनके तार आपस में जुड़े तो सामने आया देश का सबसे बड़ा सेक्स स्कैंडल, जिसमें नेता, अफसर, पत्रकार और एनजीओ लगभग हर वर्ग के लोग संलिप्त पाए गए.

द‍िखावे के ल‍िए बनी आईटी कंपनी

व‍िश्वस्त सूत्रों के अनुसार, इस स्कैंडल की शुरुआत तब हुई जब एमपी की साइबर सेल और एसटीएफ का एक सीन‍ियर आईपीएस हनीट्रैप में पकड़ी गई आरती दयाल के साथ संपर्क में आया. ये करीब एक साल पहले की बात है. उस समय प्रदेश में चुनाव चल रहे थे. 26 जुलाई 2019 को आरती ने श्वेता व‍िजय जैन के साथ म‍िलकर 10 लाख रुपये की पूंजी से एक टेक्नोलॉजी कंपनी शुरू की.

इस नई कंपनी की एक पुरानी कंपनी के साथ पार्टनरशिप कराई गई. पुरानी कंपनी बेंगलुरु बेस्ड थीं और साइबर तकनीक के क्षेत्र में काम करती थी. इस कंपनी का मालिक भी अब मामले की जांच कर रही एजेंसियों की रडार पर है.

आरती और श्वेता विजय जैन की कंपनी का काम तो था साइबर सिक्योरिटी, साइबर फॉरेंस‍िक और मोबाइल सिक्योरिटी लेकिन हकीकत में यहां कुछ और ही होना था. पुरानी कंपनी से पार्टनरशिप का नतीजा ये हुआ कि इन नई कंपनी का दखल भोपाल में भदभदा रोड पर स्थित साइबर मुख्यालय तक हो गया. इस कंपनी के जरिए नेताओं और अफसरों के फोन व चैटिंग पर नजर रखी जाने लगी. चैटिंग, एसएमएस के साथ कॉल रिकॉर्ड किए गए.

गाजियाबाद में ल‍िया गया गेस्ट हाउस

अभी हाल ही में द‍िल्ली-एनसीआर के गाज‍ियाबाद में साइबर सेल ने एक गेस्ट हाउस क‍िराए पर ल‍िया था. इस गेस्ट हाउस का किराया सरकारी पैसे से दिया जा रहा था. न‍ियमानुसार, साइबर सेल के मुख‍िया को इसकी जानकारी सरकार और पुल‍िस व‍िभाग के मुख‍िया को देनी थी लेक‍िन ऐसा नहीं क‍िया गया. इस बात पर व‍िवाद उठने पर गेस्ट हाउस भी खाली करा ल‍िया गया.

एसीएस आईएएस अध‍िकारी का वीड‍ियो हुआ था वायरल

26 जुलाई को आईटी कंपनी रज‍िस्टर होने के बाद एक घटना ने मध्य प्रदेश की स‍ियासत में हलचल मचाने वाली एक घटना घट गई. 26 जुलाई के बाद राज्य के एक अपर मुख्य सचिव (एसीएस) स्तर के आईएएस अधिकारी का वीडियो वायरल हो गया था. इसमें यह अधिकारी एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहे थे. वीडियो वायरल होने के बाद शासन ने पूरे मामले की जानकारी ली और 29 जुलाई को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जांच के आदेश दे दिए द‍िए थे.

जैसे ही एसीएस का वीडियो वायरल हुआ तो सीएम कमलनाथ की जानकारी में इसकी जांच हुई. तब सरकार को पुल‍िस के आला अध‍िकार‍ियों और ब्लैकमेलिंग गैंग के गठजोड़ के बारे में पता चला. फिर इस गठजोड़ पर निगाह रखी जाने लगी. इस गठजोड़ को पूरी तरह ध्वस्त करने की योजना बनने लगी.

उसके बाद इंदौर नगर निगम में सुपरिडेंट इंजीनियर हरभजन सिंह का मामला सामने आ गया. पहले से ही इस मामले पर न‍िगाह जमाए हुए सरकार ने इस पूरे हनीट्रैप गैंग का खुलासा कर द‍िया.

इसके बाद हनीट्रैप गैंग की मेंबर्स से पूछताछ हुई तो उसमें जो खुलासे हुए, उससे सरकार भी हैरान रह गई. इसमें बीजेपी के नेताओं के साथ कांग्रेस के नेताओ के भी नाम न‍िकल कर आए. देखने में तो यह तीनों मामले अलग लगते हैं लेक‍िन कहीं न कहीं इनके तार आपस में जुड़े हुए हैं. ज‍िसमें एक सीन‍ियर आईपीएस हनीट्रैप की कड़ी में गहरे तक जुड़ा हुआ नजर आ रहा है.

इस मामले को पूरा जानने के ल‍िए देखें : MP हनी ट्रैप केस: BJP ने की CBI जांच की मांग, कांग्रेस ने साधा निशाना

कैसे हुआ था हनीट्रैप का खुलासा?

दरअसल 18 स‍ितंबर को इंदौर पुलिस ने दो महिलाओं और उनके वाहन चालक को गिरफ्तार किया था. ये महिलाएं नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह का वीडियो बनाने के बाद उसे ब्लैकमेल कर उससे तीन करोड़ रुपये मांग कर रही थीं. मांगी गई रकम की पहली किश्त के तौर पर 50 लाख रुपये वे लेने आईं तो पकड़ी गईं.

उसके बाद कई नेताओं के तार इस कांड से जुड़ते चले गए. बाद में इस कांड से जुड़ी जो तस्वीर सामने आ रही है, वह चौंकाने वाली है. साथ ही इस बात का अहसास करा रही है कि राज्य में बीते कई वर्षो में करोड़ों के ठेके उन लोगों के हाथ लग गए, जिन्होंने महिलाओं का भरपूर इस्तेमाल किया.

इस मामले की जांच अब एसआईटी (विशेष जांच टीम) को सौंप दी गई है. इसके साथ ही सत्ताधारी दल कांग्रेस और विपक्षी दल बीजेपी के नेताओं के नाम इस हनीट्रैप सेक्स कांड से जुड़ने लगे हैं. अभी तक किसी भी नेता पर पुलिस ने तो उंगली नहीं उठाई है, मगर गलियारों में चर्चा यही है कि हनीट्रैप सेक्स कांड की महिलाओं से नेताओं के रिश्ते रहे हैं.

क्या इससे कई नेता-अफसरों का करियर हो सकता है बर्बाद?

पुलिस के हाथ जो सुराग हाथ लगे हैं, वे इस बात का खुलासा करते हैं कि हनीट्रैप सेक्स कांड में सिर्फ पांच महिलाएं नहीं हैं, बल्कि उनके गिरोह के सदस्य छोटे जिलों तक फैले हुए हैं, जिनका समय-समय पर अपने तरह से उपयोग किया जाता था.

पहले संबंधित नेता अथवा अफसर को खुश करके ठेका या दूसरे काम मंजूर कराए जाते थे और जिससे यह काम नहीं हो पाता था उसे ब्लेकमैल करने की धमकी देकर रकम वसूली जाती थी. इतना ही नहीं बड़े अफसरों की पोस्टिंग में भी ये महिलाएं बड़ी भूमिका निभाती थीं.

सूत्रों का दावा है कि अगर जांच सही हुई और राजनीतिक दखल नहीं रहा, तो कई ऐसे नेताओं और अफसरों के चेहरे बेनकाब होंगे, जिनका अपने-अपने क्षेत्र में करियर अभी बहुत लंबा है और वे वर्तमान में भी प्रमुख पद पर हैं. जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों से जुड़े नेता बड़ी संख्या में हैं, पुलिस के हाथ 100 से ज्यादा वीडियो और 200 से ज्यादा ऐसे फोन नंबर लग गए हैं, जो सियासी तूफान खड़ा कर सकते हैं.

मप्र के हनी ट्रैप में 10 आईएएस और 6 आईपीएस के चेहरे साफ, अब छत्तीसगढ़ की बारी…

0

 हनी ट्रैप केस की जांच ने तेजी पकड़ ली है। एसआईटी प्रमुख संजीव शमी अब ताबड़तोड़ ऑपरेशन कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात ये कि शमी ने मीडिया में लीक हो रही खबरों पर रोक लगा दी है। ताकि, हनी ट्रैप में सामने आने वाले चेहरे इसका फायदा न उठा सकें। अभी तक मीडिया के ये पता नहीं चला है कि पांचों महिलाओं से एसआईटी कहां-किस स्थान पर पूछताछ कर रही है? एसआईटी जांच से जो खबरें छनकर आ रही हैं, वे बता रही हैं कि इस केस में अब तक 10 आईएएस और 6 आईपीएस के चेहरे एकदम साफ हो गए हैं। ये सभी मप्र कैडर के हैं। छग कैडर के कुछ संदिग्ध नौकरशाहों के चेहरे साफ होने हैं। आरोपियों से पूछताछ में यह स्पष्ट हो जाएगा कि छग से कितने नेता, अफसर इस खेल में शामिल थे।

दो मोबाइल नंबरों पर हुई बातचीत की होगी जांच

हनी ट्रैप गैंग ने सबसे ज्यादा कृषि विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग के साथ व्यापारी और कंपनियों को करोड़ों का सरकारी काम दिलाया। ग्वालियर का बिल्डर प्रमुख सचिव के है पारिवारिक मित्र। शिकायत में दो मोबाइल नंबरों पर हुई बातचीत की जांच की मांग। मंत्रालय में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच करने की मांग। विभागीय आदेश की कॉपी दिखा कर अधिकारी-कर्मचारियों के साथ कंपनी, व्यापारियों समेत कई लोगों को किया ब्लैकमेल। ग्वालियर के बिल्डर ने एक पुरुष आरोपी की पत्नी से बनवाया था सीनियर आईएएस का अश्लील वीडियो।