आवश्यक सामग्री 1. 1 लीटर गाढ़ा दूध2. चीनी दो से तीन कप3. कटे हुए बदाम एक चम्मच4. कटे हुए काजू दो चम्मच5. 5-6 पिस्ते6. केसर 20-25 धागे7. एक चम्मच इलायची पाउडर बनाने की विधि गैस ऑन करके दूध गरम करने के लिए रखें, जब दूध गरम होकर उस में उबाल आ जाए तो काजू, बादाम, केसर, नेटमैग पाउडर डालकर उन्हें अच्छी तरह से मिक्स करें, अब गैस को धीमी कर लीजिएगा। दूध को अच्छी तरह से पकाने दे, दूध पर जैसे ही मलाई आएगी उसमें दूध को अच्छी तरह से मिक्स कर ले। जब दूध अच्छी तरह से गाढ़ा हो जाए तो दूध में चीनी और इलायची पाउडर मिलाले और उन्हें अच्छी तरह से हिलाते रहे और अब गैस को बंद कर ले। अब आपका basundi बिल्कुल तैयार है, उसे फ्रिज में ठंडा होने तक रखें और आप इस बासुंदी को 2 दिन आराम से खा सकते हैं।
मुज़फ्फरनगर के मोहल्ला रामपुरी में रामलीला मंचन में ताड़का बना युवक कपड़ों में आग लगने से बुरी तरह झुलस गया। उसे जिला अस्पताल से मेरठ रेफर किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्सके मुताबिक रविवार रात मोहल्ला रामपुरी में रामलीला मंचन के दौरान ताड़का वध का मंचन किया जा रहा था। यहां राक्षसी ताड़का के किरदार में गांधीनगर निवासी अंकित मुंह से आग निकालने का करतब दिखा रहा था।
इसी दौरान उसके कपड़ों में अचानक आग लग गई। आग की लपटें देख मंडप में भगदड़ मच गई। दर्शकों और कमेटी पदाधिकारियों ने बमुश्किल युवक के कपड़ों से आग बुझाई।
वहीं हादसे में युवक गंभीर रूप से झुलस गया। कमेटी सदस्यों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया जहां से चिकित्सकों ने उसे मेरठ रेफर कर दिया।
सदी के नायक अमिताभ बच्चन बाॅलीवुड में सबसे ज्यादा टेक्स देने वाले बन गए हैं। उन्होंने ने जितना टैक्स भरा है शायद ही किसी आम बिजनेसमैन का इतना टर्नओवर उसकी कंपनी का होता हो। आपको जान कर यह आश्चर्य और गर्व दोनों होगा कि इतना टैक्स भरने के बाद अमिताभ बच्चन ने हजारों किसानों के लोन को चुकाया है और पुलवामा में शहीद हुए जवानों के परिजनों को भी दस-दस लाख रुपये मदद राशि दी है।
सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने वित्तीय वर्ष 2018-2019 के लिए कर के रूप में 70 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। इतना ही नहीं उन्होंने मुज्जफरपुर के 2084 किसानों के कर्ज का भुगतान खुद कर उनके सिर का भार कम किया है।
उन्होंने 14 फरवरी के पुलवामा आतंकी हमले मे शहीद हुए प्रत्येक जवान के परिवार के सदस्यों को 10 लाख रुपये मदद राशि भी दी है।
अमिताभ इस समय रणबीर कपूर और आलिया भट्ट अभिनीत फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ के लिए तैयार हैं, जो इस साल क्रिसमस पर रिलीज होने वाली है। इसके अलावा, वह सई रा के साथ अपनी तमिल फिल्म की शुरुआत करने के लिए भी तैयार हैं।
चंद्रमा पर चंद्रयान 2 की सॉफ्ट लैंडिंग के जरिए भारत दुनिया के सामने अपनी तकनीकी श्रेष्ठता का प्रदर्शन करेगा। इसरो के वैज्ञानिकों के साथ इस क्षण की प्रतीक्षा इसरो के वैज्ञानिकों के साथ ही दुनिया को भी है। इसके साथ ही भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बना। आज हम आपको एस्ट्रोनॉट के आउटफिट के बारे में बताने जा रहे हैं। आपने अक्सर उन्हें सफेद और नारंगी रंग कवर कपड़े में देखा होगा। जानें क्या होता है उनके कपड़ों में खास और सिर्फ इन दो रंगों का क्यों होता है चुनाव।
नारंगी स्पेस सूट को एडवांस क्रू एस्केप सूट (ACES) भी कहते हैं। सफेद स्पेस सूट का नाम एक्स्ट्रा विहाइकुलर एक्टिविटी सूट (EVAS) हैं। ऑरेंज सूट को एंट्री सूट के नाम से भी जानते हैं। स्पेस में ऑरेंज सूट आसानी से दिखता है। सूर्य के तेज प्रकाश को रिफलेक्ट करने के लिए व्हाइट कलर का सूट पहना जाता है।
अंतरिक्ष के काले वातावरण में व्हाइट कलर आसानी से दिखता है। बता दें कि ऑरेंज सूट स्पेस शटल की टेक-ऑफ या लैंडिंग के समय दुर्घटनाओं से एस्ट्रोनॉट्स को बचाते हैं। सफेद सूट को मुख्य रूप से स्पेस वॉकिंग के लिए डिजाइन किया जाता है। सफेद सूट में वॉटर कूलिंग सिस्टम भी है। ये दूसरे स्पेस में सरवाईवल में हेल्प करते हैं।
खास बाते ये है कि EVA सूट शरीर के पसीने को रीसाइकल करता है जिससे एस्ट्रोनॉट्स विषम परिस्थितियों में भी कूल रहते हैं। सफेद सूट के अंदर एक ड्रिंक बैग भी होता है जो पानी से भरा होता है। ये 6 घंटे के स्पेसवॉक तक चिल करता है।
देशभर के लोग इन दिनों नवरात्री पर्व मना रहे हैं और इसी के साथ डांडिया के जश्न में डूबे हैं। हर साल की तरह इस साल भी नवरात्रों में गुजरात में गरबा और डांडिया नृत्य की धूम होती है। महिलाओं में इस परंपरा को लेकर काफी क्रेज होता है। लेकिन इस बार गुजरात के सूरत शहर में नवरात्र की शुरुआत कुछ खास अंदाज में हुई। यहां रविवार को एक गरबा परफ़ॉर्मेंस के दौरान डांस ग्रुप के लोग हेलमेट पहने नजर आए। लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के मकसद से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
गरबा में शामिल ग्रुप मेंबर्स का कहना है कि ऐसा करके वे हेल्मेट पहनने वाले लोगों का उत्साहवर्धन भी कर रहे हैं। यह नजारा सूरत के वीआर मॉल में देखने को मिला। यहां गरबा नृत्य कर रहे लोग सिर में हेलमेट लगाकर जुगलबंदी करते नजर आए। युवाओं की जोड़ी सिर में हेलमेट लगाकर गरबा की धुन पर झूमती दिखी। गरबा ग्रुप के एक सदस्य ने बताया, ‘हेलमेट पहना और सीट बेल्ट का इस्तेमाल करना हर किसी की सुरक्षा के लिए जरूरी है और सभी को इसका पालन करना चाहिए। इसे सरकार द्वारा जबरन लागू नहीं कराया जाना चाहिए क्योंकि इससे कोई फायदा नहीं होगा। लोगों को इसे एक आदत के रूप में अपनाना चाहिए, जिससे वे अपने जीवन में त्योहारों का लंबे वक्त तक आनंद उठा सकें।’
गणेश पंडाल में हेलमेट पहन कर पहुंचे भक्त
ऐसा ही कुछ नजारा गुजरात में पहले भी देखा जा चुका है। गणेश चतुर्थी के दौरन भगवान गणेश के पंडाल में लोग हेलमेट पहनकर आरती करते नजर आए। सूरत के वेसु इलाके में स्थित नंदनी-1 में अन्य गणेश पंडालों की तरह ही भगवान गणेश की विदाई के लिए आरती का आयोजन किया गया था लेकिन आरती में शामिल होने वाले ज़्यादातर भक्त हेलमेट पहनकर पहुंचे। बप्पा की आरती करने पहुंची कुसुम कोठारी नाम की महिला ने कहा कि हेलमेट पहनकर भगवान गणेश की आरती के जरिए वो ये संदेश देना चाहती हैं कि हर किसी को हेलमेट पहनना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने जो बदलाव किए हैं वो सुरक्षा के लिए ही हैं।
बता दे, देशभर में 1 सितंबर से नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू हुआ है। जिसके बाद ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालें लोगों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। बगैर हेल्मेट और सीट बेल्ट का चालान 300 से 1 हजार रुपये का हो गया है। वहीं शराब पीकर वाहन चलाने और ओवर स्पीड चलने पर चालान 10 हजार रुपये का चालान है। रेड लाइट जंप करना एक अपराध की श्रेणी में आ गया है जिसमें जुर्माने के साथ 6 से 12 महीने तक की जेल भी हो सकती है। इसी तरह अन्य तरीकों से ट्रैफिक नियम तोड़ना आपकी सुरक्षा के साथ जेब पर भी भारी पड़ सकता है।
जराइल और फिलीस्तीन के बीच में मौजूद है यह मृत सागर! इसको ‘डेड सी’ और ‘अरबी झील’ के नाम से भी जाना जाता हैं. इसके साथ ही मृत सागर समुद्र के तल से लगभग 400 मीटर नीचे दुनिया का सबसे निचला बिंदु है. इसकी लम्बाई करीब 65 किलोमीटर और चौड़ाई 8 किलोमीटर है. मृत सागर का पानी दुनिया के दूसरे जलस्रोतो से अधिक खारा है. इसमें मौजूद नमक औसतन एक घन फुट के लिए एक किलोग्राम होता है, लेकिन इसका पानी दूसरे समुद्रों से लगभग 6-7 गुना ज्यादा खारा होता है. इसकी दूसरी बड़ी खासियत यह है कि इस सागर का पानी अपने खारेपन की वजह से ज्यादा भारी होता है. इस कारण इसका पानी ऊपर से नीचे की ओर बढ़ता है. परिणाम स्वरूप यह सागर अपने उच्च घनत्व के लिए जाना जाता है. यही वजह है कि इस सागर में किसी भी इंसान का डूबना असंभव है. अपनी इन्हीं अद्भुत खूबियों के कारण हमेशा से ही सैलानियों के लिए यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. सैलानी इसके अद्भुत नज़ारों को देखने और इसकी खासियत से रूबरू होने जाते हैं. गजब की बात तो यह है कि इंसान तैरना भी नहीं जानता, वो भी इस सागर में आसानी से लेट कर पिकनिक मना सकता है. बताते चलें कि 2007 में इसका नाम विश्व के सात (7 न्यू वंडर्स इन द वर्ल्ड) अजूबों की लिस्ट के लिए चयनित किया गया था. वह तो इसके पक्ष में ज्यादा वोटिंग नहीं हुई. इस कारण वह दुनिया के सात अजूबों में शामिल नहीं हो सका.
जैसा कि इसके पानी में खनिज लवण जैसे ब्रोमाइड, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सल्फर आदि अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. इस कारण इसका पानी न तो पीने के लायक होता है और न ही इसमें पाया जाने वाला नमक प्रयोग के लायक होता है. इसका पानी इतना खारा होता है कि इसमें कोई भी मछली या अन्य जलीय जीव जिंदा नहीं रह सकता. जलीय पौधों का इसमें पनप पाना भी बहुत मुश्किल होता है. ऐसा माना जाता है कि इसमें कुछ प्रकार के बैक्टीरिया और शैवाल ही पाए जाते हैं, लेकिन जहां एक तरफ यह सागर किसी जलीय जीव या पेड़ पौधों के अनुकूल नहीं हैं. यही कारण है कि इसके आस-पास भी पेड़ पौधे नहीं दिखाई पड़ते और इसे ‘मृत सागर’ की संज्ञा दी जाती है. गौरतलब है कि प्राचीन ग्रीक लेखक ने इस सागर को ‘मृत सागर’ का नाम दिया था.
वहीँ दूसरी तरफ इसका पानी अपनी विशेष खूबियों की वजह से कईं बीमारियों को दूर करने और दवा बनाने के लिए उपयोगी है. इसमें पाए जाने वाले खनिज लवण इसके वातावरण के साथ घुलकर कई प्रकार के बीमारियों को ख़त्म करने में लाभदायक होता है. चौथी सदी से यह अपने कुछ खास लक्षणों की वजह से जाना जाता रहा है. ऐसी मान्यता है कि इसकी सतह से शिलाजीत निकालकर मिस्र देशों में बेचा जाता था. वैज्ञानिकों की माने तो इस सागर में ब्रोमिन के अधिक मात्रा में पाए जाने के कारण हमारी धमनियों के लिए लाभदायक होता है. इसी के साथ ही इसमें मैग्नीशियम की प्रचुर मात्रा में पाए जाने के कारण त्वचा और साँस सम्बंधित बीमारियों का इलाज संभव है. मृत सागर साँस और त्वचा जैसी कई अन्य बीमारियों के इलाज के रूप में बहुत मशहूर है. इसके चिकित्सीय गुणों की वजह से यहां सैलानियों के लिए बेहतर सुविधा का प्रबंध किया जाता है, जहां कई होटल शॉपिंग सेंटर आदि भी बनाए गए हैं. इसके पश्चिमी तट के किनारे पर्यटकों के लिए स्वस्थ केंद्र भी खोले गए हैं. इसके किनारे की काली मिट्टी चेहरे को निखारने के लिए बहुत उपयोगी होती है. इसे लोग अपने चेहरे पर लगाते हैं. यह कितनी खास होती है, इसको इसी से समझा जा सकता है कि कुछ सौन्दर्य कंपनियां भी यहाँ की मिट्टी का प्रयोग अपने सौन्दर्य प्रोडक्ट को बनाने में करती हैं.
दुनिया भर में मशहूर यह सागर पानी की कमी की वजह से सिकुड़ रहा है. इसमें मुख्यत: जार्डन नदी और अन्य छोटी नदी का पानी आकर गिरता है. गौरतलब हो कि जार्डन नदी सीरिया और लेबनान के रास्ते से गुजरती है. दूसरा इसके आपसी मतभेद का भी इस सागर पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है. ऐसा भी बताया जाता है कि अब इजराइल ने जार्डन नदी का पानी अपनी दक्षिण इलाकों की आबादी के लिए इस्तेमाल करने लगा है. इस कारण इस मीठे और खारे पानी का मिलन पर गहरा प्रभाव पड़ता है. लिहाज़ा मृत सागर धीरे-धीरे अपनी मौत की कगार पर पहुँच रहा है. हालांकि, इसके ऊपर मंडराने वाले खतरे को भांपते हुए दुनिया भर के पर्यावरण संरक्षक एक साथ आ रहे हैं. वही दूसरी तरफ इसके चाहने वालों के लिए भी गम का माहौल बना हुआ है, जिसको बचाने के लिए सैलानी कई तरह से प्रदर्शन भी कर चुके हैं. 2016 में दुनिया के लगभग 25 तैराकों ने जार्डन से 17 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए , इजराइल पहुंच कर एक मृत सागर को बचाने का एक संदेश दिया. वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 100 सैलानियों ने मिलकर नग्न अवस्था में ही इस सागर में उतरे. इसमें पुरुष और महिला दोनों ने शामिल होकर अपना फोटो शूट कराया था.
खुदरा बाजार में प्याज के दाम 70-80 रुपये प्रति किलो होने की वजह से आमलोग परेशान हैं. वहीं, कई लोग इस मुद्दे पर फनी वीडियो बना रहे हैं. सोशल मीडिया ऐप टिकटॉक पर काफी संख्या में लोगों ने प्याज पर हंसाने वाले वीडियो बनाए हैं. एक वीडियो में दिखाई देता है कि दो लड़के किसी के घर में घुसते हैं और पैसे-गहने छोड़ देते हैं. सिर्फ प्याज की बोरी उठाकर भाग जाते हैं.
वहीं, कुछ फनी वीडियो में टिकटॉक यूजर्स ने दिखाया है कि प्याज इतना कीमती हो गया है कि इसे छिपाकर, ताला लगाकर रखना पड़ रहा है.
आइए देखते हैं प्याज पर बने टॉप-5 फनी वीडियोज…
बता दें कि महंगे प्याज से राहत दिलाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने कुछ फैसले लिए हैं. दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने 23.90 रुपये प्रति किलो प्याज बेचने का निर्णय लिया है. इसके लिए दिल्ली के सभी विधानसभा में प्याज से भरे मिनी ट्रक भेजने की योजना बनाई गई है. वहीं केंद्र सरकार ने प्याज के निर्यात पर रोक लगा दी है. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने रविवार को कहा कि तत्काल प्रभाव से निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 23.90 रुपये किलो प्याज बेचने के सरकार के फैसले पर कहा कि एक व्यक्ति 5 किलो तक प्याज खरीद सकता है. केजरीवाल ने यह भी कहा कि जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
दुनिया में कई ऐसी जगह है जिनके बारे में कई तरह की डरावनी कहानियां प्रचलित है। ऐसी जगह के रहस्यों को आजतक विज्ञान नही सुलझा पाया है। ठीक ऐसी ही पहली ह अमेरीका की रुट नंबर 666 की, जिसे समझना किसी की बस की नहीं। लोग इस सड़क को डेविल्स रोड़ या द डेविल्स हाई-वे कहकर बुलाते
आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां हादसों का प्रतिशत बहुत ज्यादा रहा है। 190 मील लंबी इस सड़क को यह नंबर वर्ष 1926 में दिया गया था। उस समय इसका शैतान के नंबर 666 या फिर ईसा विरोधियों से कोई वास्ता नहीं था। लोगों के अनुभवों ने इसकी साख बिगाड़ी थी।
चश्मदीद गवाहों के अनुसार 1930 में एक पूर्णिमा के दिन इस सड़क से गुजर रही काले रंग की पीएर्से-एरो रोडस्टर कार अचानक गायब हो गई थी। इसके बाद ये शैतानी कार दिखने पर दर्जनों कार, ट्रक व मोटर-साइकिल एक्सीडेंट हुए हैं। फीनिक्स के डॉक्टर एवेरी टीचेर पिछले दस सालों से इन दुर्घटनाओं पर रिपोर्ट जुटाकर पीएर्से ऐरो कार को शैतानी कार साबित करने में लगे हैं। टीचेर बताते हैं कि यहां वाहन रोकने वालों को कई बार शैतानी शक्तियों ने डराया है।
कहा ये भी जाता है कि एक बार दो मोटरसाइकिल सवारों के दोनों हाथ कुत्तों ने खा लिए थे और उनके तीसरे साथी का 90 प्रतिशत चेहरा चबा लिया था। कुछ लोगों का दावा है कि इस सड़क पर एक महिला घूमती नजर आती है। कोई उसे कार में लिफ्ट दे देता है तो वह रास्ते में अचानक गायब हो जाती है।
रास्ते में वाहन अचानक गायब होकर भी मीलों बाद वापस उभर आते थे और वाहन में बैठे लोगों को पता नहीं चलता था कि इस दौरान क्या हुआ। बाद में न्यू मैक्सिको के गवर्नर बिल रिचर्डसन ने लोगों की मांग पर इसका नाम बदल दिया था। लोग तब से लेकर अबतक समझ नहीं सके ऐसा क्यों और कब से होता आ रहा है।
दोस्तों हमारी दुनिया रहस्यमयी चीजों से भरी हुई है। हमारी प्रकृति में कई ऐसे अनजाने रहस्य मौजूद हैं जिनके बारें में हम सोच भी नहीं सकते। रोजाना हमे कुछ न कुछ रहस्यमयी खबरेपढ़ने और सुनने को मिलती हैं। दोस्तों कहते हैं न प्रकृति अपने अंदर कई रहस्य छुपाये बैठी है। आज मैं आपको एक ऐसे ही रहस्यमयी गद्दे के बारे में बताने वाला हूँ जिसकी गहराई आज तक कोई नहीं नाप पाया। आज तक जितने भी लोग इसकी गहराई का पता लगाने गए लेकिन कोई भी उसकी सतह तक नहीं पहुंच पाया। साथ ही इस गड्ढे के बारे में और भी कई ऐसी बातें सुनने को मिली हैं जिसके बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाओगे।
दुनिया में ऐसी कई अजीबोगरीब घटनाएं घटती हैं, जो लोगों को हैरान कर देती हैं। ऐसी ही कुछ रहस्यमयी घटनाएं चेक रिपब्लिक के होउसका कैसल में भी घटती हैं। कहते हैं कि यहां एक रहस्यमयी गड्ढा है, जिसकी गहराई आज तक कोई नाप सका है। यह भी कहा जाता है कि ये गड्ढा इतना गहरा है कि सीधा नर्क तक जाता है।
होउसका कैसल को सन् 1253 से लेकर 1278 के बीच बनाया गया था। दरअसल, इस घर को बनाने के पीछे यहां रहने वाले ग्रामीणों का मकसद था उस रहस्यमयी गड्ढे को ढक देना, जिसकी गहराई अनंत (अथाह) है, जिसे ‘नर्क का द्वार’ कहते हैं। स्थानीय लोगों का मानना था कि सूर्यास्त के बाद इस रहस्यमयी गड्ढे से भयानक जीव निकलते थे। काले पंख वाले वो जीव आधे मानव थे और आधे जानवर, जो पूरे देश में घूमते थे।
इस रहस्यमयी गड्ढे के बारे में कहा जाता है कि 13वीं सदी में एक कैदी के सामने ये शर्त रखी गई कि उसकी सजा माफ कर दी जाएगी, लेकिन उसे ये देखकर आना होगा कि इस गड्ढे की गहराई कितनी है। शर्त मानने के बाद उसे रस्सी द्वारा बांधकर उस अंधेरे गड्ढे के नीचे उतारा गया, लेकिन कुछ ही सेकेंड बाद उसके चीखने की आवाज आई। जब कैदी को बाहर निकाला गया तो वो लगभग बूढ़ा हो चुका था। उसकी उम्र सामान्य से कई साल बढ़ गई थी।
होउसका कैसल के अंदर काम करने वाले लोग अक्सर यह दावा करते हैं कि उन्हें इमारत की निचली मंजिल पर अजीबोगरीब आवाजें सुनाई देती हैं। कई बार यहां घूमने आने वाले लोगों ने भी चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनी हैं। इस घर में घूमने आने वाले टूरिस्ट्स ने भी कई तरह की अजीबोगरीब आवाजें सुनी हैं। ये आवाजें किसी के चिल्लाने की और मदद मांगने जैसी होती हैं।
इस घर के मालिक का भी दावा है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इमारत के भीतर कुछ असाधारण गतिविधियां देखी है। एक बार वो अपने दोस्तों के साथ घर के अंदर ही पार्टी कर रहे थे, तभी उनके डिनर टेबल पर मौजूद ग्लास अचानक हवा में उड़ने लगे। ये देखकर सबके होश उड़ गए और वो तुरंत ही वहां से भाग निकले। घर के मालिक का कहना है कि कई बार उसने घर के सामान इधर-उधर होते देखे हैं। लेकि चूंकि यहां आने वाले टूरिस्ट्स से उनकी कमाई होती है, इस कारण वो मजबूरी में यहां रहते हैं।
जैसा कि आप सभी जानते ही हैं कि, दुनिया में कई प्रकार की अजीब परम्पराएं होती है। इनमें से कुछ तो ऐसी होती हैं जिन्हे सुनकर आप हैरान हो सकते हैं, इस पोस्ट में हम आपको एक ऐसी ही परम्परा के बारे में बताने जा रहे हैं। दरअसल हम बात कर रहे हैं एक ऐसी जगह की जहाँ, बच्चों के मरने के बाद उन्हें पेड़ की टहनियों में दफना दिया जाता है।
जानकारी के अनुसार यह परंपरा इंडोनेशिया के दक्षिण सुलावेसी प्रांत की है, जहां बच्चों की मौत होने पर उन्हें पेड़ के तने में, उनकी टहनियों में या पेड़ के नीचे दफनाया जाता है। कहते हैं कि यहाँ बच्चे के शरीर को दफनाने के लिए लोग पेड़ के तने में गड्ढा करते हैं, उसके बाद उसे कपड़े में लपेटकर ताड़ के पेड़ से बने फाइबर से ढक देते हैं।
ऐसा माना जाता हैं कि जैसे जैसे समय बीतता है वैसे ही, इसके गड्ढे भर जाते हैं और बच्चे वहां दफन हो जाते हैं। यहां के लोगों का मानना है कि ये रिवाज सिर्फ उन बच्चों के लिए है जिनके दांत नहीं निकलते, क्योकि बच्चों की आत्मा को हवा अपने साथ बहा ले जाती है।