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छत्तीसगढ़ में भी है एक छोटा तिब्बत, अनूठी है मैनपाट की संस्कृति और परंपरा

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ऊंचाई पर स्थित सपाट मैदान और चारों तरफ खुली वादियां। ताजी-जाती हवा के झोंकों के साथ बांहे फैलाकर अहसास करें तो यहां जमीन से आसमान का मिलन होता महसूस होता है। इसी वादी में रंग-बिरंगे तोरण, बोद्ध मंदिर, बौद्ध भिच्छुओं के शांत सौम्य चेहरों के साथ कालीन बुनते तिब्बतियों को देखकर ऐसा महसूस होता है कि हम नाथूला दर्रे को पार कर तिब्बत के किसी गांव में पहुंच गए हैं। उत्तर छत्तीसगढ़ में मैनपाट की पहाड़ी पर बसा है छोटा तिब्बत। यहां आने के बाद सैलानियों को बुद्ध की शरण में आने का भी अहसास होता है। छोटे-छोटे साफ-सुथरे मकान और चारों ओर हरियाली। रंग-बिरंगे छोटे बड़े झंडे से सुसज्जिात परिसर, हाथ में माला और चेहरे पर मुस्कान।

यह पहचान है मैनपाट के तिब्बती और उनके कैंपों की। साल 1962 में तिब्बत पर चीनी कब्जे और वहां के धर्मगुरू दलाई लामा सहित लाखों तिब्बतियों के निर्वासन के बाद भारत सरकार ने उन्हें अपने यहां शरण दी थी। इसी दौरान तिब्बत के वातावण से मिलते-जुलते मैनपाट में एक तिब्बती कैंप बसाया गया था, जहां तीन पीढ़ियों से तिब्बती शरणार्थी रह रहे हैं।

यहां बसने के छह दशक बाद भी शरणार्थी तिब्बती अपनी सभ्यता व संस्कृति से ना सिर्फ जुड़े हुए हैं बल्कि मैनपाट को भी नई पहचान देने में महत्वपूर्ण योगदान देने में लगे हुए हैं। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ के मैनपाट को ‘छोटा तिब्बत’ के नाम से भी जाना जाता है। यहां तिब्बतियों की बड़ी आबादी, उनकी सभ्यता संस्कृति, रहन-सहन और परंपरा विकसित हो चुकी है। इसके साथ ही यहां के स्थानीय बासिंदों पर भी दोनों परंपराओं का खासा असर देखने को मिलता है। बाहर से आने वाले सैलानी इसी अनोखी परंपरा से प्रभावित होते हैं। मैनपाट आने के बाद तिब्बती शरणार्थियों की जीवन शैली हर किसी को आकर्षित करती है।

यहां तिब्बतियों के सात कैंप हैं। इन सातों कैंपों में साठ के दशक में तिब्बतियों द्वारा छोटे-छोटे मकान बनाए गए थे। वे मकान आज भी यथावत व्यवस्थित तरीके से खड़े हैं। इन्ही मकानों में तिब्बती परिवार आज भी निवासरत है। तिब्बतियों का मकान, घरों के सामने लहराते झंडे और मठ-मंदिर अनायास ही तिब्बत की याद दिला देते हैं। तिब्बतियों की शिक्षा के लिए उसी दौर में सेंट्रल स्कूल और सिविल अस्पताल की स्थापना भी यहां की गई थी। शिक्षा, स्वास्थ्य को लेकर तिब्बती समाज के लोगों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो इसे देखते हुए आरंभ की गई सुविधाएं आज भी बरकरार हैं। तिब्बत से आने के बाद भी समाज के लोग अपनी मूल संस्कृति और सभ्यता से दूर नहीं हुए हैं।

सभी कैंपों में बौद्ध मंदिर हैं, जहां सुबह से लेकर देर शाम तक समाज के बुजुर्ग पूजा-अर्चना में लगे रहते हैं। हर रोज सुबह- शाम मंदिर का वातावरण घंटे घड़ियाल से गूंजता रहता है। समय-समय पर तिब्बती समाज के लोग अपने पारंपरिक उत्सव को एक साथ मिलकर मनाते हैं। मैनपाट के कमलेश्वरपुर, रोपाखार क्षेत्र में स्थानीय लोगों के साथ मिलकर अपने पर्व मनाने वाले तिब्बतियों की पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्र विशेष अवसरों पर ही नजर आते हैं।

युवा पीढ़ी शिक्षा और रोजगार की तलाश में मैनपाट से बाहर निकल चुकी है, लेकिन विशेष अवसरों पर वे अपनी जन्मभूमि पर जरूर लौटते हैं। मैनपाट में अब तिब्बती युवाओं की संख्या पहले जैसी नहीं रही है। शुरुआती दौर में यहां आने वाले तिब्बती ही शेष रह गए हैं, लेकिन उनके द्वारा मैनपाट को नई पहचान दिलाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी गई है। बुजुर्ग तिब्बती अभी भी मैनपाट को ही अपनी कर्मभूमि मानकर यहीं जमे हुए हैं।

व्यवसाय से भी जोड़ा

मैनपाट के मूल निवासियों को आय उपार्जक गतिविधियों से जोड़ने में भी तिब्बती शरणार्थियों ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। तिब्बती शरणार्थियों के संपर्क में आकर ही यहां के मूल निवासियों ने व्यापार की दिशा में कदम बढ़ाया था। तिब्बती शरणार्थियों द्वारा सबसे पहले गर्म कपड़ों का कारोबार शुरू किया गया। यह परंपरागत व्यवसाय आज भी जिंदा है। इस व्यवसाय से मैनपाट के मूल निवासी भी जुड़े। मैनपाट के मूल निवासियों को सरगुजा से बाहर महानगरों की जीवन शैली से अवगत करा शिक्षा से जीवन सुधार की दिशा में भी प्रेरित करने का काम तिब्बती शरणार्थियों ने किया है। इनकी देखा देखी मैनपाट के युवा भी आज बड़े शहरों में पढ़ाई कर अलग-अलग क्षेत्रों में नाम कमा रहे हैं।

टाउ और पहाड़ी आलू की खेती सिखाई

मैनपाट में विदेशी फसल टाऊ के साथ पहाड़ी आलू की खेती को आजीविका का माध्यम बनाने की सीख तिब्बती शरणार्थियों ने ही दी है। साठ के दशक में तिब्बती शरणार्थी जब यहां पहुंचे तो उन्होंने विदेशी फसल टाऊ की खेती करनी शुरू की। महानगरों में अत्यधिक मांग के कारण हाथों हाथ टाऊ बिकने लगा और तिब्बतियों को मोटी कमाई होने लगी। बाद में उन्होंने पहाड़ी आलू की भी बड़े पैमाने पर खेती शुरू की थी। इससे भी बेहतर आय शुरू हो गया। तिब्बतियों की वजह से मैनपाट के मूलनिवासी प्रेरित हुए और आज वे भी पहाड़ी आलू और टाऊ की खेती कर हर वर्ष अच्छी कमाई कर हैं।

दलाई लामा भी आ चुके हैं मैनपाट

तिब्बतियों की आस्था अपने धर्म गुरु के प्रति अटूट है। मैनपाट में दलाई लामा का भी आगमन हो चुका है। मैनपाट में तिब्बती शरणार्थियों के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाओं को लेकर हमेशा से ही धर्मगुरु दलाई लामा ने स्थानीय प्रशासन की भी सराहना की है। मैनपाट के तिब्बती शरणार्थी स्थानीय मूल निवासियों से पूरी तरह से घुल-मिल गए हैं। हर एक परिवार के सुख-दुख में शामिल होने की उनकी परंपरा ने ही उन्हें अपना बना लिया है।

स्मार्ट फ़ोन कर रहा है आपके बच्चों का भविष्य खराब, इस्तेमाल से हो रही हैं बीमारियां…

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दुनिया में तकनीक की लत इस हद तक बढ़ती जा रही है कि अब 13 साल तक के बच्चों को इससे मुक्ति दिलाने के लिए बकायदा उसका इलाज भी करना पड़ रहा है। यहां एक उपचार केंद्र में स्मार्टफोन और वीडियो गेम का अत्यधिक इस्तेमाल करने के शिकार बच्चों का इलाज भी चल रहा है। एक रिपोर्ट में शुक्रवार को बताया गया कि सिएटल के नजदीक रिस्टार्ट लाइफ सेंटर पश्चिमी दुनिया में इस तरह के इलाज के लिए इकलौता केंद्र है जो किशोरों को डिजिटल तकनीक की लत से मुक्ति भी दिलाता है।

इस उपचार केंद्र में 13 से 18 साल तक के किशोरों का बहुत प्रभावी इलाज किया जाता है जिसका नाम सेरेनिटी माउंटेन है। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘अंतहीन आभासी प्रभाव से भरी इस दुनिया में हमारे निजी और पारिवारिक संबंध बहुत बिगड़ रहे हैं।’ केंद्र के संस्थापक के हवाले से उन्होंने बताया, ‘जब हम ऐसे डिवाइस बच्चों को देते हैं, तो वे डिवाइस से निकलने वाली आवाज और रोशनी के प्रति प्राकृतिक आवाज और रोशनी की तुलना में कहीं ज्यादा आकर्षित भी होते हैं। इसके कारण बच्चों की प्रकृति और समाज से जुड़ने की स्वाभाविकता पूरी तरह खत्म हो जाती है।’ यह इलाज विभिन्न चरणों में किया जाता है। इनमें आमतौर से 8 से 12 हफ्तों का समय अवश्य लगता है। वहीं, जिन्हें ज्यादा समय तक इलाज की जरूरत होती है उनका साल भर तक इलाज किया जाता है।

गौरतलब है इससे पहले भी एक शोध में स्मार्टफोन के बार-बार जांचने की आदत को हानिकारक बताया गया था। अमेरिका की टेंपल यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक ने इस अध्ययन के माध्यम से स्मार्टफोन और मोबाइल प्रौद्योगिकी के ज्यादा से ज्यादा उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति बेहतर समझ विकसित करने की कोशिश भी की थी। इस अध्ययन के लिए शोधार्थियों ने 91 कॉलेज छात्रों का प्रश्नावली और संज्ञानात्मक परीक्षणों द्वारा आकलन किया था। शोधार्थियों ने निष्कर्षो में पाया गया कि आसानी से प्रयोग में लाए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का अधिकाधिक प्रयोग आवेग नियंत्रण पर दुष्प्रभाव डालता है और शीघ्र प्रतिफल पाने की प्रवृत्ति को भी बहुत बढ़ाता है।

9वीं के छात्र विनायक ने बनाया स्मार्ट डस्टबिन, जो आसपास कूड़ा डालने पर खुद बोलेगा ‘यूज़ मी’

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जालंधर में जिला ऊना के गांव थाना कलां के कुटलैहड़ पब्लिक स्कूल बल में 9वीं कक्षा के विनायक राणा ने लोगों को कूड़ा इधर-उधर फेंकने से रोकने के लिए एक अनोखा अविष्कार किया है।

विनायक राणा ने एक स्मार्ट डस्टबिन बनाया है जो लोगों को कूड़ा डस्टबिन में फेंकने के लिए प्रेरित करेगा। डस्टबिन के आसपास कूड़ा डालने पर बोलता है यूज मी और अंदर कूड़ा डालने पर थैक्यू भी कहता है।

विनायक राणा इस स्मार्ट डस्टबिन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वच्छ भारत मुहिम को समर्पित करेगा।

विनायक के इस अविष्कार को देश की बड़ी संस्थाओं में सराहा जा चुका है। इसके अलावा विनायक राणा को 2020 में जापान के अनुसंधान में भारत सरकार द्वारा भेजा जा रहा है।

शाहजहांपुर में कांग्रेस की पदयात्रा से डरी योगी सरकार? जितिन प्रसाद समेत कई नेताओं को किया नजरबंद…

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चिन्मयानंद केस में लॉ की पीड़ित छात्रा को इंसाफ दिलाने और उत्तर प्रदेश में बिगड़ी कानून व्यवस्था के खिलाफ कांग्रेस द्वारा मार्च निकालने से पहले शाहजहांपुर में प्रशासन ने धारा 144 लगा दी है। इसके साथ ही प्रशासन ने कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद और कांग्रेस विधायक अजय कुमार लल्लू समेत कई नेताओं को नजरबंद कर दिया है। इसके साथ ही शाहजहांपुर जिला कांग्रेस कार्यालय पर लगे टेंट को भी उखाड़कर फेंक दिया गया है। कर्रवाई के बावजूद कांग्रेस के नेता पदयात्रा के लिए डटे हुए हैं।

इससे पहले प्रशासन ने कांग्रेस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को पदयात्रा की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। प्रशासन की कार्रवाई पर जितिन प्रसाद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना हर भारतीय का समवैधानिक अधिकार है और इसे कोई रोक नहीं सकता। आम जनता और कांग्रेस कार्यकर्ता की मंशा और संकल्प को अंग्रेज भी नहीं दबा पाए थे।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, “कांग्रेस की शांतिपूर्ण पदयात्रा को अनुमति ना देकर योगी सरकार न्याय की आवाज कुचल रही है। अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना हर भारतीय का अधिकार है और इसे कोई रोक नहीं सकता।”

कांग्रेस की शांतिपूर्ण पदयात्रा को अनुमति ना देकर योगी सरकार न्याय की आवाज़ कुचल रही है । अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना हर भारतीय का अधिकार है और इसे कोई रोक नहीं सकता ।

वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “उत्तर प्रदेश में अपराधियों को सरकार का सरंक्षण है कि वो बलात्कार से पीड़ित लड़की को डरा-धमका सकें। लेकिन, उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार शाहजहांपुर की बेटी के लिए न्याय मांगने की आवाज को दबाना चाहती है। पदयात्रा रोकी जा रही है। हमारे कार्यकर्ताओं, नेताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है। डर किस बात का है?”

उप्र में अपराधियों को सरकार का सरंक्षण है कि वो बलात्कार से पीड़ित लड़की को डरा-धमका सकें।

लेकिन, उप्र भाजपा सरकार शाहजहांपुर की बेटी के लिए न्याय माँगने की आवाज को दबाना चाहती है। पदयात्रा रोकी जा रही है। हमारे कार्यकर्ताओं नेताओं को गिरफ़्तार किया जा रहा है। डर किस बात का है?

सोमवार यानी आज से जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय शाहजहांपुर से न्याय यात्रा की शुरूआत होनी थी। 1 अक्टूबर को उचैलिया से चलकर बेबे का कॉलेज लखीमपुर में रात को पड़ाव था। 2 अक्टूबर को इस पदयात्रा को लखीमपुर से महोली सीतापुर पहुंचना था। 3 अक्टूबर को महोली से चलकर सीतापुर में ही रात्रि विश्रम करना था। 4 अक्टूबर को सीतापुर में भ्रमण के बाद कमलापुर में रुकना था। 5 अक्टूबर को कमलापुर से चलकर सीतापुर के अटरिया में पदयात्रा का अगला पड़ाव था। वहीं 6 अक्टूबर को अटरिया से लखनऊ के मड़ियांव में अंतिम पड़ाव था। इसके बाद 7 अक्टूबर को लखनऊ में यात्रा का समापन होना था।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण, ज्यादा घातक बनाने की तैयारी में डीआरडीओ…

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रक्षा विकास एवं अनुसंधान संगठन ने ओडिशा के चांदीपुर रेंज में आज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के जमीनी संस्करण का सफल परीक्षण किया। यह ऐसी क्रूज मिसाइल है जिसे थल, जल और हवा से दागा जा सकता है। इसकी मारक क्षमता अचूक है।

वर्तमान में चीन और पाकिस्तान के पास अभी तक ऐसी मिसाइल नहीं है जिसे जमीन, समुद्र और आसमान तीनों जगहों से दागा जा सके। वर्तमान में भारत और रूस इस मिसाइल की मारक दूरी बढ़ाने के साथ इसे हाइपरसोनिक गति पर उड़ाने पर भी काम कर रहे हैं।

आने वाले दिनों में भारत और रूस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की रेंज को 290 किलोमीटर से बढ़ाकर 600 किलोमीटर करने की दिशा में काम करेंगे। इससे न केवल पूरा पाकिस्तान इस मिसाइल की जद में होगा बल्कि कोई भी टारगेट पलभर में इस मिसाइल से तबाह किया जा सकेगा।

ब्रह्मोस कम दूरी की रैमजेट इंजन युक्त, सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, लड़ाकू विमान से या जमीन से दागा जा सकता है। ब्रह्मोस मिसाइल को दिन अथवा रात तथा हर मौसम में दागा जा सकता है। इस मिसाइल की मारक क्षमता अचूक होती है।

रैमजेट इंजन की मदद से मिसाइल की क्षमता तीन गुना तक बढ़ाई जा सकती है। अगर किसी मिसाइल की क्षमता 100 किमी दूरी तक है तो उसे रैमजेट इंजन की मदद से 320 किमी तक किया जा सकता है। रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया और भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है। यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है।

ब्रह्मोस मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है। इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की गति ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना अधिक है। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ध्वनि के वेग से करीब तीन गुना अधिक 2.8 मैक गति से लक्ष्य पर प्रहार करती है। इसके दागे जाने के बाद दुश्मन को संभलने का मौका भी नहीं मिलता है।

हवा से सतह पर मार करने में सक्षम 2.5 टन वजनी ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता 300 किलोमीटर है। इसके एयर लॉन्च वर्जन का परीक्षण लगातार चल रहा है। वायुसेना के सुखोई लड़ाकू विमान से इसके कई सफल फायर ट्रायल को आयोजित किया जा चुका है।

अक्टूबर में 11 दिन बंद रहेंगे बैंक

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अक्तूबर में बैंकों में कुल 11 दिनों का अवकाश रहेगा। अक्तूबर महीने में दशहरा और दीपावली पड़ने से इन दोनों त्योहारों पर बैंक कुल सात दिन बंद रहेंगे। दो अक्तूबर को गांधी जयंती, छह अक्तूबर को रविवार, सात को महानवमी और आठ को दशहरा की छुट्टी रहेगी।

12 और 13 अक्तूबर को दूसरा शनिवार और रविवार का अवकाश रहेगा। 20 अक्तूबर को रविवार है। 26 अक्तूबर को चौथा शनिवार, 27 अक्तूबर रविवार को दीपावली, सोमवार 28 को गोवर्धन पूजा और मंगलवार 29 अक्तूबर को भाईदूज का अवकाश रहेगा।

नवंबर में भी बैंकों में एक बार लगातार तीन दिन तक बैंकों में अवकाश रहेगा। 9 नवंबर को दूसरा शनिवार, 10 नवंबर को रविवार और 11 नवंबर सोमवार को गुरुनानक जयंती का अवकाश रहेगा। हालांकि गुरुनानक जयंती के अवकाश को लेकर संशय है।

शिवसेना के साथ सीट बंटवारे की घोषणा में अभी देरी, भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में नहीं बनी बात…

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भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार तय करने को लेकर रविवार रात बैठक की. सूत्रों ने संकेत दिया कि महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ सीट बंटवारे को लेकर समझौते की घोषणा एक दो दिन में कर दी जाएगी.

दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष एवं गृहमंत्री अमित शाह, कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने के लिए दोनों राज्यों से आने वाले केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्यों और नेताओं के साथ कई घंटे तक विचार-विमर्श किया गया.

सूत्रों ने बताया कि मोदी को अमेरिका की उनकी ”सफल” यात्रा के लिए सम्मानित किया गया. प्रधानमंत्री शनिवार रात अमेरिका की अपनी यात्रा से दिल्ली लौट आए थे. मोदी ने अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र महासभा और ”हाउडी मोदी” सहित कई कार्यक्रमों को संबोधित किया.

महाराष्ट्र में शिवसेना और कुछ अन्य छोटे सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे की घोषणा में देरी के बारे में पूछे जाने पर पार्टी के एक नेता ने कहा कि घोषणा मंगलवार को की जा सकती है. उन्होंने कहा कि शिवसेना 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में लगभग 120-125 सीटों पर उम्मीदवार खड़े कर सकती है. महाराष्ट्र और हरियाणा दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव 21 अक्टूबर को होने जा रहे हैं.

नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि चार अक्टूबर है. मनोहर लाल खट्टर और देवेंद्र फडनवीस जो क्रमश: हरियाणा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं, वे चुनावों में भाजपा का चेहरा बने हुए हैं. जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा समाप्त करने के केंद्र के निर्णय को ”जनता का समर्थन” और मोदी की लोकप्रियता के बल पर पार्टी को सत्ता बरकरार रखने की उम्मीद है.

सूत्रों ने कहा कि हरियाणा में भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह, ओलंपिक कांस्य पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त और हाल में भाजपा में शामिल होने वाली महिला पहलवान बबीता फोगट के चुनाव में पार्टी द्वारा मैदान में उतारे जाने की संभावना है. खट्टर के करनाल से चुनाव लड़ने की उम्मीद है, जहां से उन्होंने 2014 में जीत दर्ज की थी.

KBC-11: इस सवाल पर फंस गए IIT से M.tech कर चुके कंटेस्टेंट, फिर भी जीत ली इतनी बड़ी रकम…

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 अमिताभ बच्चन द्वारा होस्ट किए जाने वाला शो कौन बनेगा करोड़पति 11 इन दिनों छाया हुआ है। इस शो में पूछे जाने वाले सवालों को लेकर लोगों में उत्सुकता देखने को मिल रही है। इस शो के स्पेशल एपिसोड में कई नामी-गिरामी हस्तियां भी शिरकत करती हैं, साधारण परिवार से आने वाले कंटेस्टेंट्स ने भी लोगों को प्रभावित किया है। केबीसी के ऐसे ही एक एपिसोड में पहुंचे थे 66 साल के अनिल जोशी। अनिल जोशी ने गेम में शानदार शुरुआत की लेकिन एक सवाल पर जाकर वह फंस गए।अनिल जोशी
6.40 लाख तक सभी सवालों के सही जवाब दिए

अनिल जोशी ने 6.40 लाख तक सभी सवालों के सही जवाब दिए लेकिन 12.50 लाख रु वाले सवाल का जवाब देने में वे फंस गए और उन्हें शो छोड़कर जाना पड़ा। जोशी ने अपने खुशमिजाज अंदाज और शानदार तरीके से दिए जवाबों से बिग बी का दिल जीत लिया। अनिल जोशी से 12.50 लाख रु का सवाल पूछा गया, ‘सिकंदर के भारतीय अभियान में उसके सैनिकों ने किस नदी को पार करने से इनकार कर दिया था, जिसके कारण यूनानियों को पीछे हटना पड़ा था?’

केबीसी
नहीं मालूम था इस सवाल का जवाब

इस सवाल के विकल्प दिए गए थे, – A. सतलुज, B. चेनाब, C. ब्यास और D. झेलम। अनिल जोशी को इसका जवाब नहीं पता था। इसका सही जवाब था ब्यास। इसके बाद अनिल जोशी ने शो क्विट करने का फैसला किया। उनके पास कोशिश करने के लिए अब लाइफलाइन भी नहीं बची थी। इस तरह वे 6.40 जीतकर शो से बाहर हुए।

अनिल जोशी
जीते 6 लाख 40 हजार

अनिल जोशी ने शो के दौरान अमिताभ बच्चन से काफी बातचीत की। उन्होंने अपने बारे में कई चीजें बताईं। जोशी ने बताया कि वे आईआईटी से एमटेक हैं। उन्होंने अपने कॉलेज के बारे में भी बताया। इसके बाद अमिताभ बच्चन ने भी अपने कॉलेज के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि बीए में फेल हो गए और कंपार्टमेंट के जरिए जैसे-तैसे फिर बीए पास किया। अनिल जोशी के सवालों के जवाब देने के अंदाज से अमिताभ बच्चन काफी प्रभावित हुए। केबीसी के कर्मवीर स्पेशल एपिसोड में शुक्रवार को मशहूर कार्यकर्ता अमला रुइया के साथ अभिनेता रणदीप हुड्डा भी पहुंचे थे।

दिग्गज अभिनेता वीजू खोटे का निधन, फिल्म शोले में ‘कालिया’ के किरदार से बटोरीं थी सुर्खियां…

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अपने समय की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ में कालिया का किरदार निभाने वाले दिग्गज अभिनेता वीजू खोटे का मुंबई में निधन हो गया है। वीजू खोटे 77 वर्ष के थे। फिल्म शोले में उनके किरदार ने काफी सुर्खियां बटोरीं थी। फिल्म में उनका डायलॉग ‘सरदार, मैंने आपका नाम खाया है’ आज भी लोगों के जहन में है। इसके अलावा फिल्म ‘अंदाज अपना अपना’ में उन्होंने रॉबर्ट का किरदार निभाकर दर्शकों को काफी हंसाया था।अपने घर पर ली अंतिम सांस

अभिनेता वीजू खोटे पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने मुंबई स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली। परिवार के सदस्यों ने बताया कि पिछले दिनों उनकी तबीयत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था। अस्पताल में उनकी हालत में सुधार हुआ और उन्हें घर ले आया गया। इसके बाद फिर से उनकी तबीयत बिगड़ गई।

शोले के कालिया किरदार से मिली पहचान

वीजू खोटे का अंतिम संस्कार दक्षिण मुंबई के चंदनवाड़ी श्मशान गृह में आज सुबह 11:30 बजे किया जाएगा। वीजू खोटे ने शोले, अंदाज अपना अपना, के अलावा चाइनागेट, मेला, नगीना, अतिथि तुम कब जाओगे और गोलमाल 3 सहित कई हिंदी फिल्मों में काम किया। हालांकि उन्हें पहचान मिली फिल्म शोले के कालिया किरदार से।

मराठी फिल्मों में भी किया काम

वीजू खोटे के निधन पर बॉलीवुड की बड़ी हस्तियों के अलावा उनके प्रशंसकों ने भी सोशल मीडिया पर दुख जताया है। वीजू खोटे ने हिंदी फिल्मों के साथ-साथ मराठी और दूसरी भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया था। कुछ फिल्मों में उन्होंने नकारात्मक भूमिकाएं निभाई और साबित किया कि वो किसी भी तरह का रोल बखूबी कर सकते हैं।

अगर ईरान को न रोका तो तेल के दाम बढ़ेंगे- सऊदी क्राउन प्रिंस…

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सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा है कि अगर दुनिया के दूसरे देश ईरान के ख़तरे से निपटने के लिए एक साथ नहीं आए तो इसका असर विश्व बाज़ार में कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़ेगा और तेल की कीमतें अप्रत्याशित तरीके से बढ़ सकती हैं.

अमरीका के टीवी चैनल सीबीएस के एक कार्यक्रम ’60 मिनट्स’ में उन्होंने कहा कि ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ा तो उसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

उन्होंने एक बार फिर इस बात से इनकार किया कि उनके आदेश पर सऊदी पत्रकार जमाल ख़ॉाशोज्जी की हत्या हुई थी. बीते साल अक्तूबर में इस्तांबुल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या कर दी गई थी.

क्राउन प्रिंस सलमान ने कहा कि वो चाहते हैं कि सऊदी अरब और ईरान के बीच चल रहे तनाव का राजनीतिक हल तलाशा जाए क्योंकि दोनों के बीच युद्ध हुआ तो उसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

उनका कहना था कि पूरी दुनिया की तेल की सप्लाई का 30 फ़ीसदी, विश्व व्यापार का 20 फ़ीसदी और पूरी दुनिया की जीडीपी का 4 फ़ीसदी योगदान मध्य-पूर्व के इलाक़े से ही आता है.

उनका कहना था, “ज़रा सोचिए ये तीनों चीज़ें एक साथ प्रभावित हों तो क्या होगा? इसका अर्थ होगा कि केवल सऊदी अरब या मध्य-पूर्व के देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था ही डगमगा जाएगी.”

उन्होंने एक बार फिर कहा कि सऊदी अरब के दो तेल के ठिकानों पर ड्रोन हमला बचकाना हरकत थी.

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि ये बचकाना हरकत थी. इसका कोई रणनीतिक उद्देश्य नहीं था. कोई बेवकूफ़ ही होगा जो विश्व की तेल आपूर्ति के 5 फीसदी हिस्से पर हमला करेगा. इसका केवल एक ही उद्देश्य हो सकता है कि वो ये साबित करना चाहते थे कि वो बेवकूफ़ हैं और जो उन्होंने किया उससे यही साबित होता है.”

क्राउन प्रिंस सलमान ने कहा कि वो अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो से सहमत हैं कि ईरान ने जो किया वो युद्ध अपराध है.

उन्होंने कहा, “अगर विश्व के दूसरे देश ईरान को रोकने के लिए कड़े कदम नहीं उठाएंगे तो मामला और बढ़ेगा और कई देशों के हित प्रभावित होंगे. विश्व की तेल सप्लाई प्रभावित होगी और तेल के दाम इतने बढ़ेंगे जितना हमने आज तक नहीं देखा होगा.”

हालांकि क्राउन प्रिंस सलमान का कहना था कि वो किसी तरह के सैन्य अभियान के पक्ष में नहीं हैं और मामले का शांतिपूर्ण राजनीतिक हल ही बेहतर विकल्प होगा.

तो क्या सऊदी अरब को ये लगता है कि अमरीकी राष्ट्रपति को ईरान के साथ एक नए परमाणु करार की तरफ़ कदम बढ़ाना चाहिए.

इस सवाल के उत्तर में क्राउन प्रिंस का कहना था कि समस्या अमरीका की तरफ से नहीं है “क्योंकि अमरीकी राष्ट्रपति नए करार की ही बात कर रहे हैं लेकिन ईरान की बातचीत के लिए आगे नहीं आना चाहता.”

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद ज़रीफ ने एक बार फिर दोहराया है कि जब तक ईरानी लोगों पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को अमरीका हटाएगा नहीं तक तक अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मुलाक़त नहीं होगी.

ईरान लगातार कहता रहा है कि अमरीका ने एकतरफा खुद को परमाणु करार से दूर कर लिया था जिसका बुरा असर ईरान की परमाणु नीति पर पड़ा है.