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खून में तेजी से प्लेटलेट्स काउंट बढ़ाने के लिए खायें ये 7 चीजें, खून की कमी भी होगी दूर

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धीरे-धीरे गर्मियां खत्म हो रही हैं और जल्द ही ठंड का मौसम भी दस्तक देने वाला है। इस बीच के मौसम में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरों से होने वाली बीमारियों का अधिक खतरा होता है। साथ ही इस मौसम में इम्युनिटी सिस्टम भी कमजोर होने लगता है जिस वजह से आप जल्दी से बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।

डेंगू होने पर मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स की मात्रा कम होने लगती है। प्लेटलेट्स की कमी होने का नुकसान आपके शरीर एवं स्वास्थ्य को भुगतना पड़ता है। कई मामलों में इसका कम होना मौत का कारण बन सकत है। खानपान के माध्यम से आप आसानी से प्लेटलेट्स की संख्या में इजाफा कर सकते हैं। ऐसे मामले में आपको रोजाना इन चीजों का सेवन करना चाहिए।

विटामिन के वाली चीजें
प्लेटलेट्स काउंट बढ़ाने के लिए आपको विटामिन के से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए। इसमें मुख्यतः अजमोद, केल, तुलसी, सरसों का साग, पालक, ब्रोकोली, अजवाइन, शतावरी, भिंडी और गोभी जैसी चीजें शामिल हैं।

गाजर
गाजर में सभी आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए जरूरी हैं। कई अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि गाजर में डेंगू के मरीजों में प्लेटलेट्स काउंट बढ़ाने की क्षमता है।

किशमिश
किशमिश आयरन का सबसे बेहतर स्रोत है और प्लेटलेट काउंट को सामान्य करते हुए शरीर को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। किशमिश को आप नाश्ते में खा सकते हैं या दलिया में मिलाकर खा सकते हैं।

अनार
अनार आयरन का बेहतर स्रोत है और खून बनाने में मदद करता है। नार्मल ब्लड प्लेटलेट काउंट को बनाए रखने में मदद करने के अलावा, अनार में पाए जाने वाले पोषक तत्व और खनिज ऊर्जा को बढ़ावा देने के रूप में भी काम करते हैं।

बीन्स
बीन्स में विटामिन बी 9 या फोलेट होता है जो रक्त प्लेटलेट काउंट को बढ़ावा देने में बहुत मदद करता है। बी 9 से भरपूर कुछ अन्य खाद्य पदार्थ हैं पालक, शतावरी और संतरे।

लहसुन
लहसुन न केवल एक उत्कृष्ट रक्त शोधक है, यह स्वाभाविक रूप से रक्त प्लेटलेट की गिनती बढ़ाने में भी मदद करता है।

पपीते की पत्तियां
प्लेटलेट काउंट को जल्दी बढ़ाने के लिए एक और घरेलू उपाय पपीते के पत्तों को पानी में उबालकर पीना है और परिणामस्वरूप घोल पीना है। यह विधि विशेष रूप से प्रभावी है जब प्लेटलेट काउंट में तेज गिरावट होती है, जैसे कि डेंगू बुखार और मलेरिया के मामलों में।

चावल के साथ रोजाना ये जहर खा रहे हैं आप, अगर नहीं संभले तो कैंसर से हो सकती है मौत

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आम तौर पर लोग चावल खाना ज्यादा पसंद करते हैं. ज्यादातर लोग बिना चावल खाए एक दिन भी नहीं रह सकते. आप भी अगर ऐसे लोगों में शामिल हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाइए. रिसर्च में दावा किया गया है कि रोजाना चावल खाने वाले लोगों के शरीर के लिए यह जहरीला हो सकता है. ज्यादा चावल खाने वाले व्यक्ति अपने शरीर में ‘आर्सेनिक’ (Arsenic) नाम के जहरीले पदार्थ को भेज रहे हैं.

चिंता का विषय ये है कि चावल में आर्सेनिक जहर की मात्रा इतनी ज्यादा होती है कि इसे आप अनदेखा नहीं कर सकते. रिसर्च में पता चला है कि आर्सेनिक के शरीर में पहुंचने के बाद ये जहरीला रसायन कैंसर, दिल संबंधी बीमारी, डायबिटीज और कई गंभीर बीमारियों को दावत देता है.

मिट्टी में पाया जाता है आर्सेनिक

आर्सेनिक मिट्टी में पाया जाने वाला रसायन है. इसका थोड़ा असर मिट्टी से उगने वाली खाने की चीजों में आ जाता है, हालांकि इसका स्तर बहुत कम होता है, इससे सेहत को नुकसान नहीं पहुंचता. लेकिन चावल की फसल में पानी का अधिक इस्तेमाल होता है.

पानी में ज्यादातर समय डूबे होने के कारण चावल की फसल मिट्टी में घुले आर्सेनिक रसायन को सोख लेता है. इसलिए अन्य फसलों की तुलना में चावल में 10 से 20 फीसदी ज्यादा आर्सेनिक रसायान पाया जाता है.

ज्यादा चावल खाने से हो जाएगा कैंसर

आर्सेनिक के जहरीले रसायन से आपको कितना खतरा होगा ये बात इस पर निर्भर करता है कि आप एक दिन में कितना चावल खाते हैं. यदि आप हफ्ते में एक या दो बार चावल खाते हैं, तो इससे आपको ज्यादा नुकसान नहीं होगा, हालांकि छोटे बच्चों को चावल से हमेशा दूर रखना चाहिए.

वहीं चावल खाना बहुत ही ज्यादा पसंद करते हैं, तो भी आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है. आप चाहें तो चावल से आर्सेनिक रसायन को कम कर सकते हैं. चावल को ज्यादा पानी में डालकर पकाते हैं, तो इससे आर्सेनिक रसायन कम हो जाता है.

मध्यप्रदेश हनीट्रैप मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री के बेटे का नाम आया सामने

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रैकेट के गैंग मेंबर्स के कंप्यूटर और मोबाइल फोन्स से 1,000 से ऊपर वीडियो सेक्स चैट के क्लिप्स, वीडियो और ऑडियो बरामद हुए हैं. लगभग एक दर्जन आईएएस अधिकारी, मध्यप्रदेश के आठ पूर्व मंत्री, कई अभिनेत्रियां और पत्रकार उन लोगों में शामिल हैं जो सिंडिकेट में संभावित रूप से शामिल हो सकते हैं.
सूत्रों का कहना है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अपने बेटे को मुसीबत से निकालने के लिए गिरोह को बड़ी रकम का भुगतान किया. यह स्पष्ट नहीं है कि राजनेता किस पार्टी का है. विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा मामले की जांच करने के बाद यह मामला सामने आया, जिसमें फोन और कंप्यूटर से बरामद लगभग हजार मल्टीमीडिया फाइलों में से उनके बेटे का एक वीडियो मिला.

गिरोह ने भोपाल के कई प्रमुख व्यापारियों को भी कथित रूप से फंसाया है क्योंकि अधिकारियों ने गिरफ्तार गिरोह के सदस्यों के कॉल रिकॉर्ड में शहर के न्यू मार्केट के कम से कम दस व्यापारियों के सेलफोन नंबर देखे हैं. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ हाई-प्रोफाइल मामले में जांच के प्रगति की व्यक्तिगत निगरानी कर रहे हैं. एसआईटी प्रमुख संजीव शमी गुरुवार रात सीएम हाउस पहुंचे और उन्हें मौजूदा हालात के बारे में जानकारी दी. कथित तौर पर नाथ को अपने मंत्रियों से भी प्रतिक्रिया मिल रही है.

हनी ट्रैप केस : सुंदरियों की डायरी ने उगले राज, डायरी के दो पन्ने राजधानी में हो रहे वायरल, ये हैं छत्तीसगढ़ के पंछी

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मध्यप्रदेश के चर्चित हनी ट्रैप कांड की आंच अबछत्तीसगढ़ में भी पहुंच गई है। हाईप्रोफाइल हनी ट्रैप मामले में छत्तीसगढ़ के 3 पूर्व मंत्री, 4 आईएएस व 1 आईपीएस अफसर और एक मीडिया हाउस से जुड़े वरिष्ठ व्यक्ति का नाम सामने आया है। मध्यप्रदेश में इस मामले में पकड़ी गई युवती श्वेता के पास से एसआईटी ने एक डायरी बरामद की है। इस डायरी के पन्ने में सबसे ऊपर लिखा है छत्तीसगढ़ के पंछी। हनी ट्रैप हसीनाओं की डायरी के पन्ने जैसे जैसे पलटते जा रहे हैं साहबों के एक से बढ़कर एक कारनामें सामने आते जा रहे है। हालांकि अभी इनकी वास्तविकता प्रमाणित नहीं हुई है लेकिन वाट्सएप ग्रुप में जमकर वायरल हो रहे हैं ।

हनी ट्रैप कांड में गिरफ्तार आरती दयाल, मोनिका यादव के नामों का जिक्र भी डायरी में है। इनसे बड़ी रकम का लेन देन होना बताया गया है। बताया जाता है कि यह राशि हवाला के जरिए अलग-अलग किस्तों में पहुंचाई गई है। सूत्रों का कहना है कि हनी ट्रैप का कनेक्शन छत्तीसगढ़ से जुडऩे के बाद एसआईटी की टीम कभी भी संदेह के दायरे में आने वाले इन पंछियों से पूछताछ के लिए आ सकती है। डायरी में मिली जानकारी की विभागीय अधिकारी तस्दीक करने में जुटे हुए हैं।

हुस्नपरियों की डायरी के दो पन्ने मिले हैं, जिसे देख कर किसी की भी आंखें फटी की फटी रह जायेगी। जिस मैडम की डायरी के ये पन्ने हैं उसे मोनिका यादव के नाम से जाना जाता है। डायरी में नाम भरे हुए हैं, कुछ नाम पूरे भी लिखे हैं, लेकिन ज्यादा परेशानी कोर्ड वर्ड और शार्टकट में लिखे नामों को सुलझाने में हो रही है। हनी ट्रैप की जांच एजेंसी उन नामों से हैरान भी है और परेशान भी। मिली जानकारी के अनुसार इस मैडम ने ना सिर्फ अपने जलवे छत्तीसगढ़ के कई गेस्ट हाउस में अफसरों को दिखाये हैं, बल्कि मुंबई, पुणे और कोलकाता में भी रंगीन सेज बिछाये। डायरी के पन्नों पर गौर करें तो उनमें मैडम ने अपने शिकार के नामों के साथ प्रेम की ऐसी. ऐसी शहद भरी शब्दाबली उड़ेली है, कि देखकर लैला-मजनूं का इश्क भी शरमा जायेगा।

खास खबर! प्रदूषण से बचाव के लिए खोजा अच्छा विकल्प, गन्ने की खोई से बनाई डिस्पोजल क्राकरी

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शामली में प्लास्टिक पर प्रतिबंध के बाद डिस्पोजल क्राकरी का कारोबार बंदी के कगार पर है। ऐसे में शहर के एक उद्यमी ने इसका बेहतर विकल्प तलाशा है। उद्यमी ने गन्ने की खोई से डिस्पोजल क्राकरी बनाने का प्लांट लगाया है। ये क्राकरी प्रदूषण से मुक्ति दिलाएगी। शहर के उद्यमी संदीप गर्ग ने बताया कि उनकी इंडस्ट्रीयल एरिया में 26 साल से लकड़ी की चम्मच बनाने की फैक्टरी थी। प्लास्टिक पर प्रतिबंध के बाद डिस्पोजल क्राकरी की फैक्टरियां बंद होने लगी थीं। इसका असर उनके काम पर आने लगा था। उन्होंने इंटरनेट पर सर्च कर किसी नए विकल्प की तलाश शुरू की। इसी से उन्हें पता चला कि गन्ने की खोई की लुगदी से डिस्पोजल क्राकरी संभव है। इसे बनाने की मशीनरी भी मार्केट में उपलब्ध हैं। उत्तराखंड के लाल कुंआ में इस लुगदी का मार्केट भी हैं। ये लुगदी पेपर मिलों में काम आती है। इसके बाद उन्होंने इसका प्लांट लगाने का मन बनाया। दिल्ली से इसकी मशीनें खरीदी, उत्तराखंड के लाल कुंआ से खोई की लुगदी की सीटें मंगाई और पिछले महीने ही ये प्लांट शुरू कर दिया। एक महीने में करीब 10 से 12 लाख प्लेटें बनाने की इसकी क्षमता है। प्लास्टिक की क्राकरी प्रतिबंधित होने के बाद अब लोगों का रुझान इसकी तरफ बढे़गा। संदीप का दावा है कि देश में इस तरह के मुश्किल से 10-15 प्लांट होंगे।

इस तरह होता है निर्माण
गन्ने की खाई की लुगदी की सीट लाकर उन्हें पानी में घोलकर घोल बना लिया जाता है। इसके बाद मोल्डिंग मशीनों में डालते हैं। जिस साइज की प्लेट या क्राकरी चाहिए उसी साइज के खांचे मशीन में फिट कर दिए जाते हैं। इस तरह प्लांट में ये क्राकरी तैयार हो जाती है। फिलहाल वह प्लेट और कटोरी ही बना रहे हैं।

थोड़ी महंगी मगर प्रदूषण से बचाएगी
उद्यमी संदीप का दावा है कि अभी देश में इस तरह के केवल 10 या 15 ही प्लांट हैं। दरअसल प्लास्टिक क्राकरी की तुलना में ये थोड़ी महंगी पड़ती है। एक ही साइज की जो प्लास्टिक की प्लेट ढाई से तीन रुपये में आती है इसकी प्लेट साढ़े चार रुपये के आसपास होगी, प्लास्टिक की प्लेट को खुले में फेंकने पर ये महीनों तक नष्ट नहीं होगी, जलाने पर प्रदूषण फैलाएगी जबकि गन्ने की खोई की लुगदी से बनी ये क्राकरी 10 से 15 दिन में खुद ही नष्ट हो जाएगी। जाहिर है कि इससे प्रदूषण नहीं होगा।

बिलासपुर का मदकू द्वीप-जहां दिखाई देता है केदार तीर्थ सा नजारा

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अविभाजित बिलासपुर संभाग प्राकृतिक सौंदर्य से भरा पड़ा है। प्रकृति ने यहां अपनी पूरी छटा बिखेरी है। घने जंगलों,नदियों और पहाड़ों की लंबी श्रृंखला है। अविभाजित संभाग के नक्शे पर नजर डालें तो एक दर्जन से अधिक बेहतरीन पर्यटन केंद्र हैं। पूरी तरह प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इन केंद्रों ने मानों प्रकृति ने खुद ही खूबसूरती देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

बारिश के दिनों में इन पर्यटन केंद्रों की आभा देखते ही बनती है। प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही साथ तालागांव में जहां सातवीं शताब्दी की अद्भूत रुद्र शिव की प्रतिमा विराजित है। वहीं मदकू द्वीप में साक्षात केदार तीर्थ का दर्शन होता है। यहां ऐतिहासिक काल के शिवलिंग,नंदी,प्रथम पूज्य गणेश की विभिन्न मुद्राओं में प्रतिमा के अलावा अन्य प्रतिमाओं से मदकू द्वीप की प्राचीनता का आभास होता है।

पौराणिक काल के महत्व के अनुसार यह हरिहर क्षेत्र केदार द्वीप के नाम से प्रसिद्घ है। नदी के मध्य द्वीप की मान्यता केदार तीर्थ के रूप में होती है। हमारा पूरा संभाग पौराणिक और ऐतिहासिकल काल के साथ ही प्रकृति की गोद में समाया हुआ है। राज्य सरकार की नजरें पड़े तो इसे पर्यटन उद्योग के रूप में विकसित किया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो देश के नक्शे में संभाग देखते ही देखते छा जाएगा ।

शैव तांत्रिकों की अनुष्ठान स्थली ताला में स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना

छठवीं से दसवीं शताब्दी तक अत्यंत समृद्घ स्थल के रूप में पहचान बनाने वाला ताला तब शैव तांत्रिकों की अनुष्ठान स्थली रहा है। शैव उपासकों की धार्मिक स्थली रही ताला में अब रुद्र शिव के साथ ही देवरानी जेठानी मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। पुरातत्व विभाग के उत्खनन के बाद ताला में स्थापत्य व मूर्तिकला का रूप सामने आया है।

दुनिया की इकलौती प्रतिमा है रुद्र-शिव

वर्ष 1987-88 में भारतीय पुरातत्व विभाग की देखरेख में देवरानी मंदिर के परिसर में उत्खनन किया गया है। इस दौरान एक विलक्षण प्रतिमा प्राप्त हुई । यह प्रतिमा भारतीय कला में अपने ढंग की एकमात्र ज्ञात प्रतिमा है। शैव संप्रदाय से संबंधित इस प्रतिमा का शिल्प अद्भूत है।

शिव के रुद्र अथवा अघोर रूप में सामंजस्य होने के कारण सुविधा की दृष्टि से इसका नामकरण रुद्र शिव किया गया है। विश्व में अपने आप में अनोखी प्रतिमा 2.54 मीटर ऊंची और एक मीटर चौड़ी है। विभिन्न जीव जंतुओं की मुखाकृति से इसके अंग-प्रत्यंग को बनाया गया है। प्रतिमा समपद स्थानक मुद्रा में है। प्रतिमा में गिरगिट,मछली,केकड़ा,मयूर,कच्छप,सिंह आदि जीव जंतुओं का अंग बनाया गया है।

मदकू द्वीप में स्नान करने से केदार तीर्थ का मिलता है पुण्य

मदकू द्वीप ऐतिहासिक धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है। यह द्वीप पौराणिक महत्व को अपने आप में संजोये हुए है। प्रागैतिहासिक काल में शिवनाथ नदी के तटवर्ती क्षेत्र में आदिमानवों के आवास के प्रमाण मिले हैं। मदकूद्वीप भी इसमें से एक है। वर्षों पहले यहां आदि मानवों की स्थली रही है। यही कारण है कि पुरातात्विक उत्खनन के दौरान पाषाण युगीन औजार भी मिले है।

इससे यह पुष्टि होती है कि यहां आदिमानवों का रहवास रहा है। यह प्रमुख रूप से उनकी गतिविधियों का केंद्र रहा है। इंडियन इपिग्रॉफी वर्ष 1959-60 के प्रतिवेदन में भी इसका साफतौर पर उल्लेख किया गया है। उत्खनन के दौरान मदकू द्वीप से दो शिलालेख भी मिला है। इसमें से एक तकरीबन तीसरी सदी ईस्वी का ब्राम्ही शिलालेख है। दूसरा शिलालेख शंख लिपि में है। यह इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है।

छत्तीसगढ़ : फिल्म को मिलेगा उद्योग का दर्जा, फिल्म सिटी का काम हुआ शुरू

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छत्तीसगढ़ में फिल्म को उद्योग का दर्जा दिया जाएगा। संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और पर्यटन को देश-विदेश में पहचान मिलेगी। फिल्म को उद्योग का दर्जा मिलेगा। इससे छत्तीसगढ़ के कलाकारों को काम मिलेगा।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में फिल्म सिटी बनाने का काम शुरू हो गया है। यहां फिल्म सिटी बन जाने से छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य प्रदेशों की भी फिल्म बनेगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ऐतिहासिक, धार्मिक, पुरातात्विक और प्राकृतिक महत्व के दर्शनीय स्थलों के लिए बेहतर आवागमन और ठहरने की सुविधा बढ़ाने की बात कही।

पर्यटन स्थलों में शैलानियों को आकर्षित करने के लिए शासकीय प्रयासों के साथ ही पर्यटन क्षेत्र से जुड़े निजी क्षेत्र के उद्यमियों द्वारा भी प्रयास किया जाना चाहिए। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिलेगा और छत्तीसगढ़ देश के पर्यटन नक्शे पर उभरेगा।

इससे पहले भगत ने कांग्रेस भवन में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुना और उसको निपटाने के लिए अधिकारियों को निर्देश भी जारी किया। दंतेवाड़ा उपचुनाव में जीत पर भगत ने कहा कि जनता सरकार के काम से संतुष्ट है। इसका परिणाम उपचुनाव में देखने को मिला।

MP Honey Trap Case : छूट गई पढ़ाई तो मंगेतर के साथ ब्लैकमेलिंग के धंधे में उतरी युवती

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मध्यप्रदेश में हनी ट्रैप के खुलासे के बाद से गिरोह का छत्तीसगढ़ से संबंध होने की खबरें लगातार आ रही हैं। हालांकि गिरोह के एक सदस्य का एनजीओ यहां भी कई तरह के कामों में सक्रिय है, लेकिन उनका कोई भी शिकार यहां सामने नहीं आया है। वहीं, मामले की जांच कर रही एमपी एसआइटी की टीम के आला अफसर भी गिरोह का छत्तीसगढ़ में किसी शिकार की जानकारी मिलने से इन्कार कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार गिरोह की सरगना के पति के नाम पर एक शिक्षण संस्था और एनजीओ संचालित है। इस एनजीओ के छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों के साथ दुर्ग समेत कुछ और शहरों में भी कई तरह काम करने की जानकारी मिल रही है। बताया जा रहा है कि यह एनजीओ आदिवासी महिलाओं को अगरबत्ती, दोना पत्तल आदि बनाने की ट्रेनिंग देती है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि इस एनजीओ को कुछ महीने पहले ही उन लोगों ने बेच दिया है।

छत्तीसगढ़ से गिरोह के कनेक्शन के मामले इस मामले की जांच कर रही एमपी की एसआइटी टीम के एक आला अफसर ने स्पष्ट कहा कि अभी हमारा पूरा ध्यान मध्यप्रदेश में है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ तो नहीं, लेकिन शुरूआत में इस गिरोह के राजस्थान से कुछ संपर्क के बारे में सूचना मिली थी, लेकिन अब की जांच में उसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

हालांकि अब तक जितने भी रिकार्ड्स की जांच की गई है, उसमें गिरोह का मध्यप्रदेश से बाहर के किसी संपर्क के बारे में जानकारी नहीं मिली है। जांच और पूछताछ अभी जारी है, आगे कुछ निकल आए तो कहा नहीं जा सकता।

इधर, छत्तीसगढ़ के डीजीपी डीएम अवस्थी ने ‘नईदुनिया” को बताया कि इस मामले में न तो मध्यप्रदेश पुलिस की तरफ से कोई जानकारी आई है और न ही उन्होंने संपर्क किया है।

बना डाला कारोबारी का वीडियो

छत्तीसगढ़ में हनीट्रैप में पकडी गई डेंटल छात्रा ब्लैकमेलिंग को अपना धंधा बना चुकी थी। उसका मंगेतर भी साथ देता रहा। पुलिस इस बात की छानबीन भी कर रही है कि मध्य प्रदेश के हनीट्रैप रैकेट से उसका जुड़ाव था या नहीं। शहर के हार्डवेयर कारोबारी के पास करोड़ों की संपत्ति देखकर युवती की नीयत डोल गई।

प्रेम जाल में फंसाकर अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग कर उसने पिछले सात सालों में एक करोड़ 38 लाख 51 हजार रुपये वसूले। यही नहीं, व्यापारी की क्रेटा कार भी हथिया ली। इसके बाद 50 लाख रुपये एक मुश्त मांग करते हुए नहीं देने पर पुलिस में रिपोर्ट करने, घर-परिवार में बदनाम करने के साथ अश्लील वीडियो को वायरल करने की धमकी कारोबारी को दी।

परेशान होकर कारोबारी ने पंडरी थाने में शिकायत की। पुलिस ने युवती को रंगेहाथ पकड़ने के लिए गुरुवार की शाम को कागज के टुकड़ों का नोटों का बंडल बनाकर एक थैले में देकर कारोबारी को कचना रेलवे क्रासिंग के पास भेजा। जैसे ही युवती पैसे लेने पहुंची, वहां पर सादी वर्दी में तैनात महिला पुलिस कर्मियों ने उसे दबोच लिया।

छत्तीसगढ़ : जहां बाघ ही नहीं, 200 तरह के पक्षी भी करते हैं चहलकदमी

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अविभाजित बिलासपुर जिले का मुख्य आकर्षण है अचानकमार टाइगर रिजर्व । ट्रेन से जाना चाहें तो यह अभ्यारण्य बिलासपुर रेलवे स्टेशन से 80 किलोमीटर दूर है। सड़क मार्ग से जाना चाहें तो यह जिला मुख्यालय मुंगेली से 45 किमी दूर उत्तर पश्चिम में विकासखंड मुख्यालय लोरमी में स्थित है। यहां प्रवेश करते ही किसी अन्य दुनिया में होने का अहसास होता है। कुदरत के नैसर्गिक सौंदर्य में सुकून तलाशने भी आप यहां आ सकते हैं।

अचानकमार टाइगर रिजर्व

सतपुड़ा के 553.286 वर्ग किमी के क्षेत्र में बसा है। मैकाल श्रेणी के विशाल पहाड़ियों के बीच बांस, सागौन और अन्य वनस्पतियां यहां मनभावन दृश्य पैदा करती हैं। इस अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1975 में वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 के तहत की गई इसके बाद वर्ष 2007 में इसे बायोस्फीयर घोषित किया गया और वर्ष 2009 में इसे टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित किया गया।

तरह-तरह के जीव-जन्तु की देखें हलचल

यहां बाघ के अलावा, तेंदुआ, गौर, जंगली सुअर, बायसन, चिलीदार हिरण, भालू, लकड़बग्घा, सियार, चार सिंग वाले मृग, चिंकारा समेत 50 प्रकार के स्तनधारी जीव व 200 से भी अधिक विभिन्न प्रजातियों के पक्षी देखे जा सकते हैं। यदि आप वाइल्ड लाइफ को देखने के शौकीन हैं तो यह आपके लिए बढ़िया अवसर साबित होगा।

यहां जल्दा पाइंट पर आपको शेरों की हलचल दिख जाएगी। यहां पहुंचकर आप सैर के लिए किराए पर जिप्सी ले सकते हैं। साथ में गाइड भी उपलब्ध हो जाते हैं। रात ठहरने के लिए जंगल से लगे शिवतराई में बने कॉटेज को एटीआर की वेबसाइट से ऑनलाइन बुक करा सकते हैं।

छत्तीसगढ़ : पुलिस विभाग में हुए तबादले, 63 निरीक्षकों की बदली पोस्टिंग

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पुलिस विभाग में फिर से बड़ा फेरबदल हुआ है। 63 निरीक्षकों को स्थानांतरित कर नवीन पदस्थापना दी गई है। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय से आदेश जारी कर दिया गया है। तबादला आदेश में दर्जनभर जिलों के निरीक्षकों के नाम शामिल है।

इसमें राजेश सिंह रायपुर, दिलीप सिंह सिसोदिया दुर्ग, कमल कांत शुक्ला ईओडब्ल्यू, किशोर केवट सूरजपुर, पूर्णिमा लंबा डायल 112 रायपुर, अमर सिंह भारद्वाज बेमेतरा, रामकुमार सिंह राणा कोरबा, विनोद कुमार कतलाम धमतरी, देहरा राम टंडन जांजगीर-चांपा और अरुण कुमार नेताम को बालोद पदस्थ किया गया है।

शिवाकांत तिवारी दुर्ग, सईद अख्तर मुंगेली, कौशल किशोर वासनिक कोरिया, नरेंद्र पुजारी कोंडागांव, मनीष सिंह परिहार कोरिया, विजय प्रसाद पैकरा रायगढ़, ए टोप्पो रायपुर, केशव नारायण आदित्य सूरजपुर, लक्ष्मण प्रसाद पटेल कोरिया, मनीष शर्मा नारायणपुर, राजेश कुमार जांगड़े कोरबा और दिनेश कुमार कुर्रे को धमतरी भेजा गया है।

रामकुमार साहू को गरियाबंद, अविनाश सिंह कोरबा, मनीष तंबोली जांजगीर चांपा, शिवदयाल बघेल महासमुंद, नंद कुमार स्वर्णकार महासमुंद, युवराज कुमार तिवारी बलौदा, भारद्वाज सिंह ठाकुर बालोद, तुलसी सिंह पट्टाबी बालोद, धनवंत शाय कांकेर, रामचरण लहरी राजनादगांव, भारद्वाज सिंह सरगुजा, सुरेंद्र पामभोई दंतेवाड़ा, राजेश मिश्रा बेमेतरा, कमल किशोर महतो जांजगीर चांपा ,प्रणाली कुमार वैद्य धमतरी, विवेक शर्मा कोरबा, अभय सिंह बैंस कोरबा, विजय कुमार चेलक रायगढ़, सुनील कुमार सिंह बिलासपुर, प्रमोद कुमार सिंह रायपुर, सी तिर्की दुर्ग, पारस राम पटेल पुलिस मुख्यालय, सत्यकला रामटेके धमतरी और अश्वनी कुमार को कोरिया भेजा गया है।

राजेंद्र यादव बालोद, रविंद्र कुमार अनंत जांजगीर-चांपा, संग्राम सिंह दुर्ग, राम सिंह मंडावी राजनांदगांव, सलीम तिग्गा सरगुजा, बृजेश तिवारी रायपुर, शीतल सिदार बिलासपुर, सत्य प्रकाश तिवारी कोरिया, रोशनी कुजूर पुलिस मुख्यालय, युगल किशोर नाग धमतरी, योगिता रायपुर, विशाल सोम रायपुर, दुर्ग किरण पटेल बिलासपुर, धीरज कुमार मरकाम रायपुर, धनीराम मांझी बलोदाबाजार, विनोद कुमार अवस्थी बिलासपुर और नसीम अख्तर को रायपुर पदस्थ किया गया है।