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महिला पुलिस अफसर ने कैंसर रोगियों के लिए दान किए अपने बाल

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केरल के त्रिसूर जिले की एक पुलिस अफसर अपर्णा लवकुमार ने कैंसर मरीजों को विग बनाने के लिए बाल कटवा दिए।

इस काम के लिए लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं। अपर्णा का कहना है कि मैंने बहुत ही छोटा काम किया है। मैं इतनी तारीफ की हकदार नहीं हूं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसारअपर्णा ने कहा कि मैंने जो किया वो कोई बड़ी बात नहीं है, मेरे बाल एक दो साल में वापस आ जाएंगे। मेरे लिए वे लोग वास्तव में हीरो हैं, जो जरूरतमंदों को अपना अंग दान करते हैं। सूरत में क्या रखा है, आपका काम उससे ज्यादा मायने रखता है।

पिस्टल तस्करी के यह तरीके देखकर हैरान रह गई Delhi Police

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बिहार के मुंगेर और मध्य प्रदेश के भिंड से बड़ी संख्या में .32 बोर की पिस्टल दिल्ली लाकर बेची जा रही हैं. आए दिन दिल्ली पुलिस हथियार तस्करों को पकड़ती भी है. लेकिन पिस्टल की तस्करी का सिलसिला लगातार जारी है. वहीं तस्कर पुलिस को गच्चा देने के लिए हर बार एक नया तरीका अपनाते हैं. पुलिस भी हथियार तस्करी के नए-नए तरीके देखकर हैरान है. खास बात यह है कि हथियार तस्करी के इस काम में महिलाओं का भी सहारा लिया जा रहा है.

घटी के डिब्बे में छिपाकर ऐसे लाते हैं पिस्टल

ने बीते दो दिन पहले दो को गिरफ्तार किया है. आरोपी भिंड मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं. उनके पास से 26 पिस्टल और कई मैगजीन बरामद हुई हैं. लेकिन पुलिस को हैरान करने वाली बात यह है कि यह पिस्टल घी के दो बड़े डिब्बों में छिपाकर कार में भिंड से दिल्ली लाई गईं थी. पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि 15 किलो के एक डिब्बे में 12 तो दूसरे में 14 पिस्टल रखी गईं थी. हर पिस्टल को पॉलिथीन में लपेटकर रखा गया था.

सभी पिस्टल को रखने के बाद ऊपर से एक मोटी पॉलिथीन बिछा दी गई थी. उसके बाद गर्म किए गए घी को ऊपर से डाल दिया गया था. डिब्बे में घी जम जाने के बाद यह पता नहीं लगता था कि उसके नीचे भी कोई सामान रखा गया है. लेकिन ऐसा करते हुए यह एतियात बरती जाती थी कि डिब्बे का वजन 15 किलो से ज्यादा न होने पाए.

सीएनजी के सिलेंडर में छिपाकर ला रहे थे हथियार

तीन दिन पहले दिल्ली पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक आई-10 कार को पकड़ा था. पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक कार से दिल्ली में हथियार लाए जा रहे हैं. इसी के आधार पर पुलिस ने कार को चेक करना शुरु कर दिया. पुलिस जब आई-10 कार की तलाशी ले रही थी तो उसे कार चालक पर कुछ शक हुआ. लेकिन कार की तलाशी में कुछ नहीं मिला. लेकिन पलिस ने जब सीएनजी सिलेंडर की बारीकी से जांच की तो उसमे से 40 पिस्टल, एक कारबाइन और 20 मैगजीन निकलीं. पुलिस ने कार और चालक को हिरासत में ले लिया है. वहीं पता चला है कि आरोपी एक साल से इसी तरह हथियारों की तस्करी कर रहा था. 

तस्करी के लिए कार में बना रखा था तहखाना

मुस्तैद रहते हुए दिल्ली पुलिस चेकिंग के दौरान एक बार में 100 से 150 पिस्टल तक बरामद कर रही है. लेकिन इसके बाद भी खासतौर से .32 बोर पिस्टल की तस्करी रुकने का नाम नहीं ले रही है. दिल्ली पुलिस की मानें तो तस्कर सामान्य तौर पर एक खास तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह तरीका है कार में किसी भी जगह एक तहखाना बना लेते हैं. उसी तहखाने में यह पिस्टल, मैगजीन और कारतूस छिपाकर लाते हैं. कभी-कभी तहखाना इतनी सफाई से बनाया गया होता है कि यह आसानी से पकड़ में नहीं आता है.

गुजरात में टैंपो वाले का कटा 18 हजार चालान, आहत होकर उसने पी लिया फिनाइल

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गुजरात में एक टैंपो (ऑटोरिक्शा) चालक नए ट्रैफिक जुर्माने से इतना आहत हुआ कि उसने मरने के लिए फिनाइल पी लिया। अहमदाबाद के राजेश सोलंकी (48) नामक चालक का पुलिस ने टैंपो जब्त कर लिया था, आरटीओ में जाने पर सोलंकी को पता चला कि उसे 18 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। जिसके बाद उसने घर में रखा फिनाइल पी लिया। इससे वह बुरी तरह छटपटाने लगा। लिक्विड से उसकी आंतें बुरी प्रभावित हुईं। जैसे-तैसे उसे एलजी हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती किया गया।

आईसीयू में उसके पेट से जहर रूपी लिक्विड को बाहर निकाला गया। फिर, हालत सामान्य होने पर उन्हें जनरल वार्ड में भर्ती कराया गया। हॉस्पिटल के असिस्टेंट आरएमओ डॉक्टर तेजल शाह ने बताया कि अभी उसे 24 घंटे ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा। फिनाइल पीने की पीछे की वजह उसने बढ़ा हुआ जुर्माना ही बताया। उसने कहा कि ट्रैफिक पुलिस ने मेरा ऑटो डेढ़ महीने पहले जब्त कर लिया था।

राजेश सोलंकी (48) बेटे उज्जवल के अनुसार, पिता ही मेरे परिवार में इकलौते कमाऊ सदस्य हैं। मैं बीएससी में पढ़ रहा हूं और छोटा भाई सातवीं क्लास में पढ़ रहा है। उनके ऑटो को दादा साहेब ना पागला के पास पुलिस ने जब्त कर लिया था। जो जुर्माना लगाया गया, वो नए ट्रैफिक रूल्स के अनुसार है। हम इतना जुर्माना भरने में अक्षम हैं। पिता जी ने प्राधिकरण से जुर्माने की राशि घटाने या फिर माफ कर देने की अपील की। मगर, उनकी नहीं सुनी गई। जिससे आहत होकर उन्होंने ऐसा कदम उठाया।

मोबाइल नेटवर्क बन रहा युवकों की शादी में अड़चन, अब चुनावों के बहिष्कार की तैयारी

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  • महाराष्ट्र के एक गांव का अनोखा विरोध
  • करेंगे विधानसभा चुनाव का बहिष्कार
  • विभागीय आयुक्त को दिया पत्र
  • नेताओं के भी गांव में घुसने पर प्रतिबंध

देश में अब तक सड़क, पानी और बिजली जैसी मूलभूत से समस्याओं को लेकर चुनाव के बहिष्कार की खबरें सुनाई देती रही हैं, लेकिन महाराष्ट्र में एक ऐसा गांव है जहां के ग्रामीणों ने मोबाईल इंटरनेट कनेक्शन न होने पर विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का मन बनाया है। इतना ही नही, ग्रामीणों ने गांव में नेताओं के आने पर भी प्रतिबंध लगाया है। इस सम्बंध में ग्रामीणों ने विभागीय आयुक्त को पत्र भी दिया है।

नहीं है मोबाइल टावरयह अनोखा गांव है कडंकी, जो महाराष्ट्र में औरंगाबाद जिले की कन्नड़ तहसील में है। गांव के लोगों ने इस तरह की अजीबोगरीब मांग करते हुए मतदान के बहिष्कार का फैसला किया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस गांव में एक बीएसएनएल और एक निजी कंपनी का मोबाईल टावर है, लेकिन डेढ़ साल से वह चालू नहीं हो पाया है। हालांकि 10 से 12 किमी की दूरी पर दूसरे टावर हैं, लेकिन उसका रेंज गांव तक नहीं पहुंच पाता है। इससे गांव में मोबाइल नेटवर्क की दिक्कत होती है। कडंकी गांव पहाड़ी पर बसा है और खेती ही लोगों की आजीविका का एकमात्र साधन है। लेकिन, गांव से शहर तक जाने की आधुनिक सुविधा का अभाव है। इसलिए किसानों को उपज का उचित भाव भी नहीं मिल पाता। 2,500 की आबादी वाले इस गांव में आठ ग्राम पंचायत सदस्य है, गांव में करीब 1100 मोबाइल हैंडसेट हैं, लेकिन नेटवर्क ही नहीं है।

रेंज न होने से युवकों की नहीं हो रही शादी

गांव के एक युवक थोरात का कहना है कि गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण बैंक से एसएमएस नहीं आता। खेती उपज का बाजार भाव नहीं पता चलता। मोबाइल संपर्क नहीं होने के कारण कोई अपनी लड़की इस गांव में नहीं ब्याहना चाहता, जिससे युवकों की शादी नहीं हो पा रही है। वहीं, गांव के एक युवक अर्जुन का कहना है कि हम लोगों ने चंदा एकत्र कर गांव के स्कूल में कंप्यूटर और प्रोजेक्टर ले आये, लेकिन नेटवर्क नहीं होने के कारण वह भी बंद है।

साल 1998 में भी किया था चुनाव का बहिष्कार

कडंकी गांव वालों ने इससे पहले साल 1998 में लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया था। इसके चलते मतदानकर्मी खाली पेटी लेकर वापस आ गए थे। लेकिन चुनाव के बाद गांव तक पक्की सड़क बन गई और गांव वालों की मांग पूरी हो गई थी।

ये फायदे जानकर आप भी बहुत जल्द शुरू कर देंगे मूली खाना

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बदलते मौसम के साथ ही बाजार में मूली भी बिकने लग जाती है। मूली खाने में तो स्वादिष्ट लगती है, साथ ही इसके सेहत के लिए कई सारे फायदे भी होते हैं। मूली पेट, पीलिया, श्वास संबंधी कई रोगों को दूर करने का काम करती है।

आज हम आपको मूली के वो फायदे बता रहे हैं, जिनके बारे में जानकर आप भी मूली खाना बहुत जल्द शुरू कर देंगे।

सांस संबंधी दिक्कतों के लिए फायदेमंद- अगर आपको सांस संबंधी कोई परेशानी है या खांसी हो रही है तो आप मूली पर लगने वाली फली के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर छाया में सुखाएं, फिर उसे जला दें। उसके बाद राख को 8-10 गुना पानी में भिगो दें और 5-7 घंटे बाद ऊपरी राख को बाहर निकाल दें और जो नीचे बच जाए उस गाढ़े भाग को रख लें और नियमित रुप से इसका सेवन अवश्य करें।

यह श्वांस, खांसी बलगम में अत्यंत लाभकारी है। वहीं आधा किलो मूली के छार में 100 ग्राम पिप्पली को पीसकर शहद के साथ चाटें। यदि छोटा बच्चा है तो 100 से 200 मिली ग्राम और बड़ा है तो आधा ग्राम में ही दे दें। इससे श्वास व खांसी जैसी परेशानियां भी बहुत दूर हो जाएंगी।

पीलिया के रोगियों के लिए लाभदायक- पीलिया के रोगियों के लिए मूली बहुत ही लाभकारी है। जिन लोगों को पीलिया की शिकायत भी है, वो एक कप मूली का रस खाली पेट सुबह-सुबह नियमित रुप से अवश्य पीएं। इससे पीलिया के रोग में लाभ मिलेगा। जिनको शारीरिक कमजोरी है, उनके लिए भी मूली रामबाण है। इसके लिए मूली के बीज को भूनकर पाउडर बनाकर मिश्री मिला लें और सुबह-शाम 1-1 चम्मच दूध के साथ सेवन करें। इससे शारीरिक कमजोर दूर होगी और तंदरुस्ती भी बहुत बढ़ेगी।

बवासीर रोगियों के लिए फायदेमंद- जिन लोगों को बवासीर की शिकायत है, या अफारा है वो मूली की पत्तियों को छाया में सुखाकर पाउडर बना लें और 2-2 चम्मच प्रतिदिन खाली पेट पानी के साथ सेवन करें। इससे बवासीर में लाभ मिलेगा।

पथरी निकालने के लिए लाभदायक- जिनको पथरी की शिकायत है या पथरी बनने की संभावना है। वो यदि आधा ग्राम मूली के क्षार में मूली के रस को मिलाकर प्रतिदिन खाली पेट पीते हैं तो गुर्दे की पथरी निकल जाएगी और पथरी बनने की संभावना भी खत्म हो जाएगी।

लीवर संबंधी दिक्कतें होती है दूर- अगर आपको लीवर संबंधी दिक्कत या लीवर बढ़ने की परेशानी है तो मूली के चार टुकड़े कर लें और बीच से चीर कर उसमें 3-4 ग्राम नौसादर छिड़क कर रात को उसे खुले आसमान के नीचे साफ जगह पर रख दें। उसके बाद सुबह उससे निकले पानी को खाली पेट पिएं और मूली को खा जाएं। इससे पेट का अफारा ठीक होगा और लीवर में फायदा होगा।

पेट के रोग भी होते हैं ठीक- जिनको पेट के रोग हैं वो मूली के बीज को भूनकर उसका पाउडर बना लें और उसमें थोड़ी काली मिर्च व काला नमक मिलाकर नियमित रुप से उसका सेवन करें। इससे पाचन तंत्र ठीक होगा और पेट संबंधी सभी विकार भी दूर हो जाएंगे।

शुक्रवार को सोने की कीमतों ने दिया बड़ा झटका, हो चुका है इतना महंगा

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त्योहारी मौसम में आभूषण निर्माताओं की ओर से मांग आने से दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना शुक्रवार को 700 रुपये चमककर दो सप्ताह से अधिक के उच्चतम स्तर 38,970 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। वैश्विक बाजार में दोनों कीमती धातुओं में रही गिरावट के दबाव में चांदी 870 रुपये लुढक़कर एक महीने से ज्यादा के निचले स्तर 46,250 रुपये प्रति किलोग्राम पर लुढक़ गयी।

लंदन एवं न्यूयॉर्क से मिली जानकारी के अनुसार, सोना हाजिर आज 8.05 डॉलर लुढक़कर 1,497.15 डॉलर प्रति औंस रह गया। गुरुवार को भी इसमें दो प्रतिशत की गिरावट रही। दिसंबर का अमेरिकी सोना वायदा 10.10 डॉलर टूटकर 1,505.10 डॉलर प्रति औंस बोली गयी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चाँदी हाजिर 0.29 डॉलर फिसलकर 17.52 डॉलर प्रति औंस पर रही। त्योहारी मौसम को देखते हुये स्थानीय बाजार में आभूषण निर्माताओं ने पीली धातु की खरीद बढ़ा दी है।

इससे सोना स्टैंडर्ड 700 रुपये की छलांग लगाकर 11 सितंबर के बाद के उच्चतम स्तर 38,970 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। सोना बिटुर भी इतनी ही तेजी के साथ 38,800 रुपये प्रति दस ग्राम बिका। आठ ग्राम वाली गिन्नी 200 रुपये चढक़र 30,300 रुपये के भाव पर रही। वैश्विक दबाव में चांदी में गिरावट देखी गयी। चांदी हाजिर 870 रुपये लुढक़कर 46,250 रुपये प्रति किलोग्राम रह गयी। यह 23 अगस्त के बाद का इसका निचला स्तर है। चांदी वायदा 872 रुपये की गिरावट में 45,870 रुपये प्रति किलोग्राम बोली गयी। सिक्का लिवाली और बिकवाली गत दिवस के क्रमश: 940 रुपये और 950 रुपये प्रति इकाई पर स्थिर रहे। आज दोनों कीमती धातुओं के भाव इस प्रकार रहे :- सोना स्टैंडर्ड प्रति 10 ग्राम: 38,970 रुपये सोना बिटुर प्रति 10 ग्राम: 38,800 रुपये चांदी हाजिर प्रति किलोग्राम: 46,250 रुपये चांदी वायदा प्रति किलोग्राम : 45,870 रुपये सिक्का लिवाली प्रति इकाई: 940 रुपये सिक्का बिकवाली प्रति इकाई: 950 रुपये गिन्नी प्रति आठ ग्राम: 30,300 रुपये।

शिशु के भोजन में कभी न मिलाएं ये चीज़े

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प्यूरी शुरुआत में आपके शिशु के लिए सबसे आसान भोजन हो सकता है। फिर भी, शिशु दांत न होने के बावजूद भी मुलायम, ढेलेदार भोजन को भी बहुत जल्दी चबाना सीख सकते हैं। आप यह सुनिश्चित करें कि भोजन अच्छी तरह मसला हुआ है और आप धीरे-धीरे थोड़ा गाढ़ा भोजन बनाने का प्रयास करे।

मीठे या अनाज आधारित सीरियल की प्यूरी को दिन में एक बार ही दें। सब्जी की एक प्यूरी आहार में अवश्य शामिल करें। शिशु के भोजन में नमक, चीनी, शहद या अन्य कोई मिठास प्रदान करने वाली चीज कभी भी नही मिलाएं।

एक बार जब शिशु चम्मच से स्वेच्छा और खुशी से खाना खाने लगता है, तो आप उसके भोजन में कई नई चीजें भी शामिल कर सकती हैं, जैसे कम वसा वाले मांस (लीन मीट) या मुर्गी की प्यूरी दालों, दलहनों या मटर की प्यूरी आलू या चावल के साथ मिश्रित सब्जियों की प्यूरी हरी सब्जियों जैसे मटर, पत्तागोभी, पालक और हरी गोभी की प्यूरी मलाई वाला दूध (फुल क्रीम), दही, फ्रोमेज फ्रे (एक प्रकार की मुलायम चीज़), मलाई युक्त चीज़, पनीर या कस्टर्ड।

आप यह ध्यान रखें कि शिशु को एक साल का होने तक गाय का दूध (या बकरी या भेड़ का दूध) मुख्य पेय के रूप में कभी नहीं देना चाहिए।

जिन खाद्य पदार्थों के प्रति प्रतिक्रिया होने की सबसे ज्यादा संभावना होती है, उन्हें एक-एक करके अलग समय पर अकेले देना ही बेहतर होगा। ऐसे खाद्य पदार्थों की बहुत छोटी मात्रा में शुरुआत करें और शिशु को छह माह का होने से पहले ये कभी न दें। नीचे ऐसे खाद्य पदार्थों की सूची दी गई है|

जो एक समय पर अकेले ही दिए जाने चाहिए, जैसे गाय का दूध या दूध से बने उत्पाद जैसे चीज़, दही, फ्रोमेज फ्रे, मलाईदार चीज़, पनीर मछली और सीपदार मछली
सोयाबीन, खट्टे फल (संतरे का रस समेत), गेहूं, राय और जौ से बने खाद्य पदार्थ जैसे ब्रैड, आटा, पास्ता, नाश्ते के कुछ सीरीयल और रस्क। इन खाद्य पदार्थों में ग्लूटेन (आटे का लस) हो सकता है, जिससे सिलिएक रोग होने की संभावना रहती है।

केंद्र ने लगाया प्रतिबंध, फिर भी बिहार के बाजार में बिक रहे 12 खतरनाक कीटनाशक

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 केंद्र सरकार ने जिन खतरनाक कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगा रखा है, वे बिहार के बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे हैं. पटना सहित राज्य के कई बड़े शहरों में लोग इसे बेहिचक खरीद और बेच रहे हैं. एक पहले लगाये गये प्रतिबंध के बावजूद बाजार में बेनोमाइल, कार्बाराइल, डायजिनोन, फेंथिओन, फेनारिमोल, लिनुरोन, मैनेक्सी, मैथोर्क्सीथाइल मरकरी क्लोराइड, मिथाइल पैराथियोन, सोडियम साइनाइड, थियोमेट व ट्राइडेमोर्फ कीटनाशक विभिन्न कंपनियों के ब्रांड में उपलब्ध हैं. खास बात है कि इनका उपयोग एक बार किये जाने के बाद कम-से-कम 50 वर्ष तक जमीन व भू-जल पर इनका दुष्प्रभाव रहता है.

राज्य में दुष्प्रभाव का अध्ययन नहीं

चिकित्सीय जांच या केंद्र स्तर पर जांच के बाद यह सामने आयी है कि खतरनाक कीटनाशकों के उपयोग से कैंसर से लेकर कई तरह की बीमारियां हो रही हैं. लेकिन, राज्य में इसको लेकर कोई सर्वे या अध्ययन नहीं हो रहा है. कृषि विभाग से लेकर अन्य किसी सरकारी एजेंसियों ने इस पर काम नहीं किया है.

पौधा संरक्षण के संयुक्त निदेशक दिनेश प्रसाद बताते हैं कि केंद्र सरकार के पुराने सर्वे को ही मानक बनाकर खतरनाक कीटनाशकों के दुष्प्रभाव का आकलन किया जाता रहा है. उर्वरक जांच के लिए मृदा योजना चलायी जा रही है. लेकिन, किस कीटनाशक से राज्य में जमीन पर क्या असर पड़ा है, इसकी सटीक जानकारी नहीं है.

अगले साल दिसंबर तक इन पर भी लगाना है बैन

उपरोक्त 12 खतरनाक कीटनाशक के अलावा अलाक्योर, डाइक्लोरोवास, फोरेट, फोस्फामिडोन, ट्रायाजोफोस, ट्राइक्लोरोफोर्न की भी बिक्री पर दिसंबर, 2020 तक रोक लगा देनी है. इस वर्ष एक जनवरी से इसके उत्पादन नहीं करने का निर्देश है.

एक वर्ष पहले 12 खतरनाक कीटनाशकों पर लगाया गया था प्रतिबंध

1 बेनोमाइल

2.कार्बाराइल

3.डायजिनोन

4.फेंथिओन

5.फेनारिमोल

6.लिनुरोन

7.मैनेक्सी

8.मैथोर्क्सीथाइल मरकरी क्लोराइड

9.मिथाइल पैराथियोन

10.सोडियम साइनाइड

11.थियोमेट

12. ट्राइडेमोर्फ

इन बीमारियों के कारण हैं ये कीटनाशक

कीटनाशक के प्रयोग से कैंसर, लिवर सिरोसिस, किडनी का फेल होना जैसी अन्य गंभीर बीमारियों में इजाफा हो रहा है. मरीज बढ़ने में इनका पांच से 10% तक योगदान है.

100 साल तक रहता है असर

पटना के गार्डिनर रोड अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ मनोज कुमार बताते हैं कि देश स्तर पर कई बार सेमिनार या अन्य माध्यमों से खतरनाक कीटनाशकों के दुष्प्रभाव की जानकारी मिलती रही है. इनका असर ऐसा है कि अगर एक बार खेतों में इनका उपयोग हो जाये, तो इसके दुष्प्रभाव जमीन से लेकर भू-जल में 50 से 100 वर्ष तक देखे जाते हैं.

राशन डिपो पर अब गेहूं, तेल ही नहीं प्याज भी बांटा जाएगा

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बढ़ते प्याज के दामों पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने कड़ा संज्ञान लेकर अपने उपभोक्ताओं को इस महंगे प्याज को सस्ते में देने की योजना बनाई है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग अपने उपभोक्ताओं को गेहूं, तेल वितरित करता है। अब विभाग के उपभोक्ता अपनी सब्जी को बिना तड़का लगाए नहीं खाएंगे। इसका कारण यह है कि अब उपभोक्ताओं को प्याज 80 रुपये प्रति किलो नहीं बल्कि 31 रुपये प्रति किलो महीने में दस दिन के अंतराल में तीन बार मिलेगा। एक बार में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग उपभोक्ता को तीन किलो प्याज देगा। यह तीन किलो प्याज उपभोक्ताओं के परिवार में दस दिन आसानी से तड़का लगवाने का काम करेगा। इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने पत्र लिखकर इस योजना के तहत सभी डिपो पर प्रति माह तीन बार तीन-तीन किलो प्याज बांटने के आदेश जारी किए हैं। इसमें 30 रुपये प्रति किलो प्याज की राशि वितरित करने वाले कांफ्रेड के खाते में जाएंगे और एक रुपये प्रति किलो डिपो होल्डर का कमीशन होगा। इस प्याज की आपूर्ति नैफेड के स्टॉक से होगी। प्याज वितरण की खास बात यह है कि यह शहरी क्षेत्र के नजदीक डिपो होल्डरों पर वितरित होगा। इनसे कोई भी लाभपात्र व्यक्ति प्याज ले सकेगा। प्याज ज्यादा मात्रा में खराब नहीं हो, इसलिए शहरी क्षेत्र के नजदीक के ही डिपो पर इसे वितरित करने के आदेश दिए हैं। इसमें किसी प्रकार की डिपोधारक धांधली नहीं कर सकें। इस बात को ध्यान में रखते हुए उपभोक्ताओं को पीओसी मशीन में अपना अंगूठा लगाकर प्याज मिलेगा। राशन डिपो पर प्याज पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर वितरित होगा। यह फैसला प्याज खराब नहीं हो इसलिए लिया गया है। प्याज की सप्लाई की जिम्मेदारी कांफेड की रहेगी।
सभी जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से मांगी प्याज की एलोकेशन
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने सभी जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को निर्देश दिए हैं कि वह शहरी क्षेत्र के नजदीक के सभी राशन डिपो से उपभोक्ताओं की संख्या के अनुसार प्याज की एलोकेशन भेजें, ताकि महंगे प्याज से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग अपने उपभोक्ताओं को छुटकारा दिला सके।
पात्र उपभोक्ताओं को मिलेगा नियमों पर प्याज : अनिल
विभाग की योजना के अनुसार सभी पात्र उपभोक्ताओं को 31 रुपये प्रति किलो की दर से महीने में तीन बार में तीन-तीन किलो प्याज दिया जाएगा। यह प्याज लंबे समय तक रखने के कारण खराब नहीं हो इसलिए इसका वितरण पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर किया जाएगा।
-जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी अनिल कुमार।

Honey Trap: खूबसूरती की जाल में फंसा कर रायपुर के व्यापारी से वसूले 1.38 करोड़ रुपए

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मध्य प्रदेश में हनी ट्रैपमामले में मचे सियासी बवाल के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह का मामला उजागर हुआ है. राजधानी रायपुर में एक युवती पर अपनी खूबसूरती की जाल में फंसा कर कारोबारी को पैसा कमाने का जरिया बनाने का आरोप लगा है. युवती पर आरोप है कि वो कारोबारी को ब्लैकमेल कर उससे 1 करोड़ 38 लाख 51 हजार रुपये वसूल चुकी है. इसके बाद भी वो उससे और पैसों की मांग कर रही थी. पुलिस ने जाल बिछाकर युवती को कारोबारी से 50 लाख रुपये लेते गिरफ्तार किया है.

रायपुर पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक व्यापारी चेतन शाह ने पंडरी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. इसमें उन्होंने निजी पलों का वीडियो बनाने की धमकी देकर ब्लैकमेल करना बताया. इसके बाद कचना रेलवे क्रॉसिंग के पास सिविल वर्दी में तैनात महिला पुलिस कर्मियों ने आरोपी युवती को 50 लाख रुपए की डिलीवरी लेते हुए रंगे हाथ धर दबोचा. आरोपी युवती कारोबारी से करीब 1 करोड़ 38 लाख 51 हजार रुपए वसूल चुकी थी. पुलिस अब युवती के मंगेतर रिंकू शर्मा समेत उसके 4 गुर्गों की तलाश कर रही है.

पुलिस के पास दर्ज शिकायत के मुताबिक आरोपी युवती कारोबारी को लगातार ब्लैकमेल कर न सिर्फ उससे पैसे वसूल रही थी बल्कि उसकी क्रेटा एसयूवी को भी अपने कब्जे में ले रखा था. आरोपी युवती का मंगेतर गाड़ी को लेकर फरार है. पुलिस उसकी तलाश कर रही है. पुलिस की जांच में युवती के भोपाल और दिल्ली से भी कनेक्शन सामने आए हैं. पुलिस मध्य प्रदेश में पकड़े गए हनी ट्रैप गैंग से इस युवती के संबंध होने की भी जांच कर रही है. पीड़ित कारोबारी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में कहा गया है कि लड़की पहले उससे बातचीत करती थी. फिर वो उसे अपने खूबसूरती की जाल में फंसा कर ब्लैकमेल करने लगी.