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VIDEO : स्‍कूटी वाली मैडम की गांधीगीरी, बीच सड़क पर डटीं तो बस ड्राइवर को बदलना पड़ा रास्‍ता

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देश में जब से नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू हुआ है तब से ही ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों को भारी-भरकम जुर्माना चुकाना पड़ रहा है. जो लोग ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते हैं, उनमें सबसे बड़ी समस्या वे लोग हैं जो कि रॉन्ग साइड ड्राइव करते हैं.

हालांकि अब रॉन्ग साइड चलने वालों से भी भारी-भरकम चलान वसूला जा रहा है, लेकिन अभी भी कुछ लोग ऐसे हैं जो कि इन नियमों का पालन अभी भी ठीक तरह से नहीं कर रहे हैं.

ऐसे ही रॉन्ग साइड चलने वाले एक शख्स को स्कूटी सवार लड़की ने ऐसा सबक सिखाया, जिसके बाद वह ड्राइवर रॉन्ग साइड चलने से हजार बार सोचेगा.

केरल का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें आप देख सकते हैं कि स्कूटी वाली लड़की अपने लेन में चल रही होती है कि तभी सामने से रॉन्ग साइड से एक बस उसके सामने आ जाती है. बस को देखकर लड़की अपना रास्ता नहीं बदलती और स्कूटी रोककर वहीं सड़क के बीच खड़ी हो जाती है. जब लड़की ने काफी देर तक अपनी स्कूटी नहीं हटाई तो बस ड्राइवर को मजबूरन अपना रास्ता बदलना पड़ा.

यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और लोग स्कूटी सवार लड़की की जमकर तारीफ कर रहे हैं.

जहां एक तरफ लोग इस लड़की की तारीफ कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो कि इस घटना का मजाक उड़ा रहे हैं. नॉर्थ इंडिया की बात करते हुए लोग कह रहे हैं कि अगर उत्तर भारत में ऐसा होता तो गाड़ी उड़ाकर चली जाती.

छेड़छाड़ का विरोध करने पर छात्रा को पीटा, बोला- प्यार कर, नहीं तो पिट

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छेड़छाड़ का विरोध करना एक छात्रा को महंगा पड़ गया। दो युवकों ने उसे ट्यूशन पढ़ने के बाद बुरी तरह से मारी पीटा। छात्रा के पिता ने आरोपी युवकों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दे दी है।

ब्लाक क्षेत्र के एक गांव की एक छात्रा मोहल्ला भूपसिंह में ट्यूशन पढ़ने आती है। मंगलवार को भी वह रोजाना की तरह की ट्यूशन पढ़ने आई थी। बताते है कि पंडो वाले कुआं के पास स्कूटी सवार तीन युवकों ने उससे छेड़छाड़ की। छात्रा के विरोध करने पर युवक तबतो चले गए। छात्रा टयूशन को आ गई।

टयूशन छूटने के बाद आये तीन युवकों में से दो युवकों ने छात्रा की बुरी तरह से पिटाई लगा दी। तथा फरार हो गए। छात्रा ने इस घटना के बारे में अपने परिजनों को बताया। गुरूवार को छात्रा के पिता अपनी पुत्री एवं टयूटर को साथ लेकर कोतवाली पहुंचे। तथा पुलिस से युवकों की करतूत बताई।

छात्रा ने पुलिस को बताया कि युवक आये दिन उससे छेड़छाड़ करते है। विरोध किया तो उन्होंने मारापीटा। पुलिस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है।

मनचलों ने युवतियों को फंसाने का नया ट्रेंड निकाला है। वह अक्सर युवतियों को फंसाने के लिए उनका पीछा करते है। विरोध करने पर उनसे मारपीट करते है। या फिर युवती के परिजनों से उसकी झूठी शिकायत लगाकर परेशान करते है। अधिकांश युवती मनचलों की इन हरकतों के आगे कुछ नहीे बोल पाती है।

रिसॉर्ट के कमरे में पति-पत्नी और जुड़वां बच्चों के शव मिलने से हड़कंप

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मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के एक रिसॉर्ट में 45 वर्षीय आईटी पेशेवर ने अपनी पत्नी और दो जुड़वां बच्चों समेत कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के सामने आते ही इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरु कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसारखुड़ैल पुलिस थाने के प्रभारी रूपेश दुबे ने गुरुवार को बताया कि जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर क्रिसेंट रिसॉर्ट में अभिषेक सक्सेना (45), उनकी पत्नी प्रीति सक्सेना (42) और इस दम्पति के 14 -14 वर्षीय जुड़वां बच्चों अनन्या और अद्विक के शव पाए गए हैं।

उन्होंने बताया कि सक्सेना, इंदौर की एक आईटी कम्पनी में काम करते थे। उनका परिवार शहर की एक टाउनशिप में रहता था। आईटी पेशेवर अपने परिवार के साथ बुधवार को ही रिसॉर्ट पहुंचे थे।

दुबे ने बताया, ‘रिसॉर्ट के कर्मचारियों के मुताबिक सक्सेना ने बुधवार रात दो बोतल पानी मंगाकर कमरा अंदर से लॉक कर लिया था। इसके बाद उन्होंने रिसॉर्ट स्टाफ से कोई संपर्क नहीं किया।’

थाना प्रभारी ने बताया कि सक्सेना के कमरे का दरवाजा जब बृहस्पतिवार को देर तक नहीं खुला, तो रिसॉर्ट स्टाफ ने दूसरी चाबी से कमरे का ताला खोला। कमरे के भीतर सक्सेना परिवार के चारों सदस्यों की लाशें मिलीं। उन्होंने बताया कि पुलिस को मौके से सोडियम नाइट्रेट पाउडर के डिब्बे के साथ गिलास मिले हैं।

बीते 21 साल में हमारी दुनिया बदल चुका गूगल अगले 21 साल में हमें क्या-क्या दिखाने वाला है?

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1998 में जब गूगल ने जन्म लिया था तो शायद ही किसी ने सोचा हो कि एक दशक में ही वह उस मुकाम पर पहुंच जाएगा जहां दुनिया के बड़े-बड़े कारोबारी घराने कई पीढ़ियों में भी नहीं पहुंचे. गूगल के शुरुआती दिनों में इंटरनेट का पर्याय याहूडॉटकॉम था. याहू या अमेरिका ऑनलाइन (एओएल) जैसी चर्चित वेबसाइटें कांटेंट यानी खबरों और जानकारियों पर केंद्रित थीं. गूगल ने दूसरी राह अपनाई. यह खोज यानी सर्च की राह थी. गूगल खुद को जानकारियों तक जाने का जरिया बना रहा था.

उसी राह पर चलते हुए गूगल करीब दो दशक बाद आज वहां जा पहुंचा है जहां उससे जुड़े आंकड़े हैरान करते हैं. उसकी पेरेंट कंपनी एल्फाबेट आज करीब 860 अरब डॉलर से भी ज्यादा बाजार पूंजीकरण वाली कंपनी है. इस लिहाज से वह दुनिया में चौथे स्थान पर है. पिछले साल लगभग 137 अरब डॉलर का कारोबार करने और 31 अरब डॉलर का मुनाफा कूटने वाली एल्फाबेट से जुड़े इन हैरतअंगेज आंकड़ों में सबसे ज्यादा योगदान गूगल का ही है.

लेकिन हैरान करने के बावजूद ये आंकड़े गूगल की विराट ताकत को पूरी तरह से नहीं दिखाते. इस ताकत का असल अंदाजा गूगल की उस सर्वव्यापकता से होता है जिसके बिना हम आज अपनी जिंदगी की कल्पना नहीं कर सकते. हमारे फोन से लेकर डेस्कटॉप, लैपटॉप, फोन, फ्रिज और वाशिंग मशीन तक गूगल हर जगह है. एंड्रायड ओएस, गूगल मैप्स, जीमेल, क्रोम और यूट्यूब सिर्फ नाम नहीं हैं. ये आज के समाज को चलाने वाली ताकतें हैं. खोज यानी सर्च का तो गूगल दूसरा नाम बन चुका है. गूगल पर हर दिन 3.5 अरब यानी हर सेकेंड करीब 40 हजार सर्च होती हैं. गूगल करना हमारी शब्दावली का हिस्सा हो गया है.

गूगल हमारी जिंदगी में इतना गहरे घुस चुका है कि वह न सिर्फ हमें अच्छी तरह जानने-पहचानने लगा है बल्कि हमारी जिंदगी को चलाने भी लगा है. सर्च पर जानकारियों का पहाड़ खंगालने के बाद हम कोई चीज खरीदने से लेकर मेल करने तक कई लिहाज से हम गूगल की उंगली पकड़कर ही चल रहे हैं. इसलिए कहने वाले यह भी कह देते हैं कि गूगल आपके बारे में आपकी मां या पत्नी से भी ज्यादा जानता है.

2017 तक एल्फाबेट के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन रहे एरिक श्मिट ने एक साक्षात्कार में कहा था, ‘हम जानते हैं कि आप कौन हैं, क्या करते हैं, आपके शौक क्या हैं, आप इस समय कहां हैं, हम यह भी अंदाजा लगा सकते हैं कि आप इस समय क्या सोच रहे हैं. हमारे पास आपके हर सवाल का जवाब है.’ उनके मुताबिक गूगल का लक्ष्य है कि कुछ साल बाद वह आपको यह बताने की स्थिति में हो कि आपको छुट्टी के दिन क्या करना चाहिए या कौन सी नौकरी आपके लिए सबसे मुफीद रहेगी.

यानी अभी तो सिर्फ शुरुआत है. एक साक्षात्कार में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई कहते हैं कि भविष्य में तकनीक के साथ हमारा संवाद उतना ही सहज होगा जितनी हमारी आपसी बातचीत. यह हो भी रहा है. सर्च बॉक्स में की वर्ड टाइप करना पुरानी बात हो गई. अब नया चलन है वॉइस सर्च. भविष्य में घरों की छत या दीवारों में माइक्रोफोन और स्पीकर लगे होंगे. हम सवाल पूछेंगे और मशीन हमें जवाब देगी. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो हमारे और दुनिया के बारे में सारी जानकारियों से लैस मशीनों का एक नेटवर्क – जो गूगल की ही एंड्रॉयड या किसी और तकनीक की मदद से आपस में जुड़ा होगा- हमारे शरीर और दिमाग की कवायद काफी कम कर देगा.

गूगल इसकी तैयारी भी कर रहा है. आंकड़े बताते हैं कि पिछले 21 साल में उसने और अब कहा जाए तो एल्फाबेट ने 227 से भी ज्यादा कंपनियों का अधिग्रहण किया है. औसत निकालें तो पता चलता है कि गूगल हर महीने एक कंपनी खरीद रहा है. इनमें ई कॉमर्स, स्वास्थ्य, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस या रोबोटिक्स जैसे बिल्कुल अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही कंपनियां शामिल हैं. इन कवायदों पर एल्फाबेट ने 30 अरब डॉलर से भी ज्यादा रकम खर्च की है.

लेकिन एल्फाबेट अपने परंपरागत कारोबार यानी इंटरनेट की बजाय स्वास्थ्य विज्ञान, रोबोटिक्स या अपने आप चलने वाली कार जैसी परियोजनाओं पर क्यों दांव लगा रही है? इसके कई कारण हैं. पहला तो यही कि वह अपनी सेवाओं को सर्च के इतर भी फैलाना चाहती है. गौरतलब है कि अभी एल्फाबेट के कारोबार में 90 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सा गूगल सर्च से आता है. कारोबार की दुनिया में एक प्रोडक्ट पर इतनी ज्यादा निर्भरता ठीक नहीं मानी जाती. इसलिए एल्फाबेट कमाई के नये रास्ते खोजना चाहती है.

भविष्य में निवेश के लिए उसके पास पैसे की कमी नहीं है. बताया जाता है कि एल्फाबेट के पास इस समय करीब 64 अरब डॉलर (चार लाख 25 हजार करोड़ रुपये) का रिजर्व कैश है. यही वजह है कि जिस भी कंपनी में उसको भविष्य की कोई संभावना दिखती है उसे वह किसी भी कीमत पर खरीद लेती है. अरबन इंजन्स का ही उदाहरण लें. लोकेशन बेस्ड एनैलिटिक्स के क्षेत्र में सक्रिय इस कंपनी का काम शहरी नियोजन के लिहाज से अहम माना जाता है. दुनिया का भविष्य शहर ही हैं इसलिए गूगल ने कुछ समय पहले अरबन इंजन्स को खरीदने में ज्यादा देर नहीं लगाई. अभी जून में ही उसने लुकर को खरीदा है. यह कंपनी उस बिग डेटा के क्षेत्र में काम कर रही थी जिसे भविष्य कहा जाता है.

एक लेख में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया के प्रोफेसर और अधिग्रहण जैसी कारोबारी कवायदों के विशेषज्ञ जॉर्ज गाइस कहते हैं, ‘एल्फाबेट कंपनियां सिर्फ इसलिए नहीं खरीद रही कि उसका पोर्टफोलियो बढ़ जाए. वह चाहती है कि उसके पास डेवलपरों, डिजाइनरों और वैज्ञानिकों के रूप में प्रतिभाओं का विशाल भंडार हो.’

इसे नेस्ट लैब्स के उदाहरण से समझते हैं. इस कंपनी को गूगल ने जनवरी 2014 में खरीदा था. नेस्ट स्मार्टफोन से चलने वाले थर्मोस्टेट और स्मोक अलार्म डिटेक्टर बनाती है. इसके अधिग्रहण के साथ उसकी झोली में इन दोनों उत्पादों के अलावा टोनी फेडल भी आए. नेस्ट के सहसंस्थापक फेडल को एप्पल के मशहूर आइपॉड और आइफोन के पीछे का दिमाग माना जाता है.

विचित्र सी लगने वालीं इन अधिग्रहण कवायदों पर इस तरह से गौर करें तो कड़ियां अपने-आप जुड़ती लगती हैं. कल्पना करें कि आप ड्राइंगरूम में बैठे हैं और आपको लगता है कि एसी की ठंडक ज्यादा हो गई है. इसे कम करने के लिए आपको रिमोट उठाने तक की जरूरत नहीं होगी. बोलकर ही काम हो जाएगा. आप कहेंगे कि मैं डांस इंडिया डांस का पहला एपीसोड देखना चाहता हूं और टीवी आपका आदेश पूरा कर देगा. आप कहेंगे कि सबसे अच्छी बिरयानी कहां मिलती है वहां चलते हैं, और जब तक आप तैयार होकर गूगलकार में बैठेंगे आपका जीपीएस उस रेस्टोरेंट का रास्ता पता लगाकर कार को उस पर चलाने के लिए तैयार हो चुका होगा. आप सुबह जागेंगे और एक रोबोट, जिसे गूगलबोट भी कह सकते हैं, आपकी सेवा में चाय लेकर हाजिर होगा. कुल मिलाकर यह होम ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस नाम के उन क्षेत्रों का मेल होगा जिनमें एल्फाबेट बहुत सक्रिय है.

यह सब किसी सुदूर भविष्य की बात नहीं है. जानकारों के मुताबिक तकनीक की लगातार घटती लागत के चलते जल्द ही माइक्रोचिप और सेंसर आम बात हो जाएंगे. इनकी मदद से आपकी आवाज को पहचानने वाली मशीनों का एक पूरा नेटवर्क आपके पर्सनल असिस्टेंट की तरह काम करेगा. यानी कल अगर आपकी कोई मीटिंग है और आप भूल जाएं तो भी कोई बात नहीं. किसी पर्सनल असिस्टेंट की तरह आपके फोन से लेकर दीवारों तक में लगा सिस्टम आपको इसका ध्यान दिलाता रहेगा. गूगल पूरे जोर-शोर से इस पेचीदा काम में लगा है कि ये मशीनें हमारी रोजमर्रा की भाषा को समझने के काबिल हो जाएं.

आज कई मजाक में कह देते हैं कि गूगल ईश्वर है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि ईश्वर और गूगल के गुणधर्म काफी कुछ मिलते दिखते हैं. समय और जरूरतों के साथ ईश्वर के स्वरूप भले ही बदलते रहे हों, लेकिन उसकी परिभाषा कमोबेश एक ही रही है. उसे सबमें रहने, सबको देखने और सबको चलाने वाली ताकत के रूप में ही देखा गया है. गूगल भी आज कई लिहाज से ऐसी ही ताकत बन चुका है. उसकी भविष्य की योजनाओं को देखें तो कह सकते हैं कि वह ईश्वर से परमेश्वर बनने की कोशिशों में जुटा है.

40 कॉल ग‌र्ल्स और बॉलीवुड की एक्ट्रेस भी हनी ट्रैप में थीं शामिल

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मध्य प्रदेश के बहुचर्चित हनी ट्रैप मामले में नित नई चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। अब यह बात सामने आई है कि इस बड़े ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट में 40 से अधिक कॉल ग‌र्ल्स और बॉलीवुड की बी-ग्रेड अभिनेत्रियां भी कथित रूप से शामिल रही हैं, जिन्होंने राज्य के एक पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व राज्यपाल समेत कई अफसरों व नेताओं को अपने जाल में फंसाया है।

एसआइटी के सूत्रों के हवाले से जागरण ने लिखाकि अभी तक अफसरों व नेताओं की आपत्तिजनक अवस्थाओं की 92 वीडियो क्लिप मामले में गिरफ्तार पांच महिलाओं के कई मोबाइल फोनों और दो लैपटॉप से बरामद हुई हैं।

सेक्स रैकेट की सरगना श्वेता स्वप्निल जैन ने राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विभागों को संभालने वाले अफसरों व नेताओं के हनी ट्रैप के लिए बड़ी कॉल ग‌र्ल्स को अपने साथ जोड़ा था। श्वेता इन कॉल ग‌र्ल्स को सुविधानुसार किसी गेस्ट हाउस या पांच सितारा होटल में किसी अफसर या नेता के पास भेजती थी। वहां किसी गुप्त मोबाइल या कैमरे से उस अफसर या नेता की कॉल गर्ल के साथ आपत्तिजनक अवस्था का वीडियो बना लिया जाता था।

जब कोई अफसर या मंत्री किसी सरकारी काम से मुंबई या दिल्ली जाते थे तो वहां उन्हें उनकी मांग के अनुसार मॉडल व बॉलीवुड अभिनेत्रियां भी उपलब्ध कराई जाती थीं। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि अभी एसआइटी को इस तरह की वीडियो क्लिप नहीं मिली है, जिसमें कोई अभिनेत्री दिखाई दे रही हो।

इस महिला की आंखों से निकलते हैं ‘क्रिस्टल के आंसू’, डॉक्टर भी हैं हैरान

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इंसान हों या कोई जानवर, जब भी रोते हैं तो उनकी आंखों से पानी वाले आंसू निकलते हैं, लेकिन एक महिला ऐसी है, जिसकी आंखों से ‘क्रिस्टल के आंसू’ निकलते हैं। ऐसा मामला देखकर डॉक्टर भी हैरान हैं और यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर महिला की आंखों से आंसू की जगह क्रिस्टल क्यों निकल रहे हैं?

यह महिला अर्मेनिया के एक गांव स्पेंडरियन की रहने वाली है, जिसका नाम सैटेनिक काजेरियन है। काजेरियन का कहना है कि उनका परिवार खेती करके अपना गुजारा करता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 वर्षीय काजेरियन की आंखों से हर रोज आंसू की जगह 50 क्रिस्टल निकलते हैं। उनकी बीमारी डॉक्टरों को भी समझ नहीं आती हैं।

केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह ने प्रदेश सरकार पर साधा निशाना, कहा – बदले की भावना से काम कर रही है सरकार

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केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। बीजेपी के नेताओं पर झूठे मुकदमें दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के साथ हमारे छोटे कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। यह बिल्कुल उचित नहीं है। रेणुका सिंह ने कहा कि अगर छत्तीसगढ़ का विकास करना है तो केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर काम करना होगा।

दंतेवाड़ा और चित्रकोट उपचुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि हमेंविश्वास है कि दंतेवाड़ा में विधायक भीमा मंडावी ने जिस तरह काम किया था उसका लाभ भाजपा प्रत्याशी ओजस्वी मंडावी को मिलेगा। वहां भारतीय जनता पार्टी की जीत होगी। जहां तक चित्रकोट की बात है तो कोर ग्रुप की बैठक होगी। इसमें प्रत्याशी चयन समेत सभी विषयों पर चर्चा होगी।

भाजपा नेताओं की सुरक्षा को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा किसभी जानते हैं छत्तीसगढ़ नक्सल प्रभावित राज्य है, ऐसे में सभी की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। सभी वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा घटा दी गई है। यह चिंता का विषय है। मैं इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से बात करूंगी।

छत्तीसगढ़ : अभी 15 दिन और रुलाएगी प्याज, फसल आने से पहले राहत की उम्मीद नहीं, लहसुन का तड़का लगाना भी एक महीने पड़ेगा भारी

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राजधानी में भी प्याज की कीमत सातवें आसमान पर पहुंच गई है। जहां प्याज का भाव लोगों की आंसू निकाल रहा है। वहीं लहसून की कीमत की वजह से किचन में दाल में तड़का लगाने से रोक रहा। वर्तमान में प्याज की कीमत यहां 55 से 60 रुपए खुदरा बाजार में है। वहीं लहसून की कीमत थोक में दो सौ रुपए के करीब पहुंच गई है। सब्जी के महत्वपूर्ण तत्व लहसुन, प्याज की कीमतों ने सब्जियों का स्वाद बिगाड़ कर रख दिया है।

थोक सब्जी कारोबारी टी श्रीनिवास का कहना है कि रायपुर में प्याज की कीमत अभी स्थिर है, आने वाले दिनों में प्याज की आवक कम होने से स्थिति बिगड़ सकती है। इसके अलावा थोक कारोबारी प्याज को कोल्ड स्टोरेज में जाम करते हैं, उस स्थिति में प्याज की कीमतें बढ़ सकती हैं। कारोबारी के मुताबिक भनपुरी स्थित थोक आलू, प्याज, लहसुन का मंडी में पर्याप्त स्टाक है। भनपुरी में 10 से 12 आलू.प्याज के थोक कारोबारी हैं। मंडी में औसतन प्रतिदिन 25 से 30 ट्रक प्याज की वर्तमान में आवक है। इस लिहाज से रायपुर में प्रतिदिन 400 से 450 टन प्याज की आवक है। इस वजह से प्याज के दाम यहां साठ रुपए के करीब आकर टिके हुए हैं।

मॉनिटरिंग के लिए कोई निर्देश जारी नहीं

खाद्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक शासन स्तर पर प्याज का स्टॉक चेक करने तथा कीमतों की मॉनिटरिंग करने किसी तरह से अब तक कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। बावजूद इसके विभाग अपने स्तर पर प्याज और लहसुन के स्टाक तथा कीमतों पर नजर रख रहा है और शासन को इसकी नियमित रिपोर्ट दी जा रही है।

नई फसल आने के बाद मिलेगी राहत

आलू, प्याज के थोक कारोबारियों के मुताबिक प्याज की नई फसल आने में 15 से 20 दिन का समय लगेगा। नई फसल आने के बाद प्याज की कीमतें कुछ कम हो सकती है। प्याज की कीमत 15 से 20 रुपए होने में एक से डेढ़ महीने का समय लग सकता है। इसके पहले राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।

लहसुन में राहत मिलने की उम्मीद नहीं

कारोबारियों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में लहसुन राजस्थान और मध्यप्रदेश, इंदौर से आवक होती है। इस वर्ष भारी बारिश के चलते लहसुन की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। इस वजह से सीजन में लहसुन की कीमतों में राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती। नई फसल आने से पहले लहसुन की कीमत और बढ़ने की संभावना है।

छत्तीसगढ़ : नवरात्र में माँ बम्लेश्वरी के दरबार में रुकेंगी ये एक्सप्रेस ट्रेन

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29 सितंबर से शुरू हो रही शारदीय नवरात्रि के लिए छत्तीसगढ़ के मशहूर तीर्थ स्थल और शक्तिपीठ डोंगरगढ़ में एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों को अस्थाई स्टॉपेज दिया गया है। इतना ही नहीं रेलवे ने माँ बम्लेश्वरी के भक्तों को वहां आने जाने के लिए डोंगरगढ़ रेल्वे स्टेशन में ख़ासा इंतज़ाम भी किया है। स्टेशन के बाहर और अंदर श्रद्धालुओं के ठहरने, आने-जाने और अन्य सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।

मुंबई हावड़ा रूट की आधा दर्जन गाड़ियों को डोंगरगढ़ रेलवे स्टेशन में फिलहाल अस्थाई ठहराव दिया गया है। इसमें अप और डाउन दोनों दिशा की ट्रेनों कके स्टॉपेज शामिल है। गौरतलब है कि मां बम्लेश्वरी के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु क्वांर और चैत्र नवरात्र पर्व पहुंचते हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि 29 सितंबर से 7 अक्टूबर तक है, लिहाज़ा इन नौ दिनों तक ट्रेनों का अस्थाई रूप से स्टापेज रहेगा। इसके साथ ही दुर्ग तक जाने वाली लोकल ट्रेनों को डोंगरगढ़ तक जाने एक्स्टेंड कर दी गई है।

इन ट्रेनों को मिला स्टॉपेज
रेल्वे प्रबंधन ने बिलासपुर-चेन्नई एक्सप्रेस, हटिया-कुर्ला, कुर्ला-हटिया, पुरी-जोधपुर, जोधपुर-पुरी, हावड़ा-पोरबंदर एक्सप्रेस को अस्थाई रूप से डोंगरगढ़ रेलवे स्टेशन में रोका जाएगा। डोंगरगढ़ तक अस्थाई तौर पर कुछ ट्रेनों का विस्तार भी किया गया है। जिसमें जूनागढ़ रोड-रायपुर पैसेंजर, रायपुर-गेवरा रोड पैसेंजर, दुर्ग-गोंदिया व इतवारी से डोंगरगढ़ तक मेला स्पेशल पैसेंजर का संचालन होगा।

खून में तेजी से प्लेटलेट्स काउंट बढ़ाने के लिए खायें ये 7 चीजें, खून की कमी भी होगी दूर

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धीरे-धीरे गर्मियां खत्म हो रही हैं और जल्द ही ठंड का मौसम भी दस्तक देने वाला है। इस बीच के मौसम में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरों से होने वाली बीमारियों का अधिक खतरा होता है। साथ ही इस मौसम में इम्युनिटी सिस्टम भी कमजोर होने लगता है जिस वजह से आप जल्दी से बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।

डेंगू होने पर मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स की मात्रा कम होने लगती है। प्लेटलेट्स की कमी होने का नुकसान आपके शरीर एवं स्वास्थ्य को भुगतना पड़ता है। कई मामलों में इसका कम होना मौत का कारण बन सकत है। खानपान के माध्यम से आप आसानी से प्लेटलेट्स की संख्या में इजाफा कर सकते हैं। ऐसे मामले में आपको रोजाना इन चीजों का सेवन करना चाहिए।

विटामिन के वाली चीजें
प्लेटलेट्स काउंट बढ़ाने के लिए आपको विटामिन के से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए। इसमें मुख्यतः अजमोद, केल, तुलसी, सरसों का साग, पालक, ब्रोकोली, अजवाइन, शतावरी, भिंडी और गोभी जैसी चीजें शामिल हैं।

गाजर
गाजर में सभी आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए जरूरी हैं। कई अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि गाजर में डेंगू के मरीजों में प्लेटलेट्स काउंट बढ़ाने की क्षमता है।

किशमिश
किशमिश आयरन का सबसे बेहतर स्रोत है और प्लेटलेट काउंट को सामान्य करते हुए शरीर को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। किशमिश को आप नाश्ते में खा सकते हैं या दलिया में मिलाकर खा सकते हैं।

अनार
अनार आयरन का बेहतर स्रोत है और खून बनाने में मदद करता है। नार्मल ब्लड प्लेटलेट काउंट को बनाए रखने में मदद करने के अलावा, अनार में पाए जाने वाले पोषक तत्व और खनिज ऊर्जा को बढ़ावा देने के रूप में भी काम करते हैं।

बीन्स
बीन्स में विटामिन बी 9 या फोलेट होता है जो रक्त प्लेटलेट काउंट को बढ़ावा देने में बहुत मदद करता है। बी 9 से भरपूर कुछ अन्य खाद्य पदार्थ हैं पालक, शतावरी और संतरे।

लहसुन
लहसुन न केवल एक उत्कृष्ट रक्त शोधक है, यह स्वाभाविक रूप से रक्त प्लेटलेट की गिनती बढ़ाने में भी मदद करता है।

पपीते की पत्तियां
प्लेटलेट काउंट को जल्दी बढ़ाने के लिए एक और घरेलू उपाय पपीते के पत्तों को पानी में उबालकर पीना है और परिणामस्वरूप घोल पीना है। यह विधि विशेष रूप से प्रभावी है जब प्लेटलेट काउंट में तेज गिरावट होती है, जैसे कि डेंगू बुखार और मलेरिया के मामलों में।