Home Blog Page 2581

खाना खाने के बाद इसे खा लो, कमजोर नजर, खून की कमी और खराब पाचन से मिल जायेगा छुटकारा

0

हम बात करने वाले हैं मिश्री के बारे के औषधीय फायदों के बारे में, मिश्री को अंग्रेजी में रॉक शुगर भी कहते हैं, इसका प्रयोग खाने वाली चीजों को मीठा करने और अन्य औषधीय रूपों में किया जाता है। मिश्री गन्ने के रस और ताड़ के पेड़ के रस से तैयार की जाती है, ये कई पोषक तत्वों से भरपूर होती है, मिश्री विटामिन, खनिजों और एमिनो एसिड से भरपूर होती है, विटामिन बी 12 भी इसमें काफी अच्छी मात्रा में होता है, तो चलिए जान लेते हैं इसके फायदे –

1. शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने से खून की कमी होने लगती है, जिससे कमजोरी महसूस होती है। ऐसे में आप नियमित रूप से मिश्री का सेवन करें इससे आपके शरीर में खून की कमी पूरी होती है। ब्लड सर्कुलेशन भी सही रहेगा।

2. मिश्री का सेवन सौंफ के साथ करने से आपका डाइजेस्टिव सिस्टम सही से काम करता है। इसमें पाचक गुण पाए जाते हैं, जो खाने को सही से पचाते हैं। इससे आपको पेट संबंधित किसी तरह की समस्या नहीं होती है।

3. मिश्री के गुण भले ही शक्कर जैसी मिठास देते है पर यह हमारे रक्तचाप को स्थिर कर मधुमेह जैसी बीमारी को नियंत्रित करने में मदद करता है।

4. इसका उपयोग आप विशेष रूप से गले की समस्या का निदान करने में कर सकते है। गले को साफ कर गले की खराश को भी दूर करता है। सर्दियों के समय मिश्री की मिठास एक अमृत के समान है।

5. भोजन के बाद मिश्री का सेवन एनर्जी के लेवल को बढ़ाता है। भोजन करने के बाद, आप सुस्त महसूस करने लगते हैं; लेकिन मिश्री का सेवन आपके ऊर्जा के स्तर को बढ़ाएगा। इसके अलावा आप अपने मूड को सुस्त होने से को रोकने के लिए सौंफ़ के साथ मिश्री का सेवन करना लाभकारी होता है

अब शादियों में कैसे करेंगे नागिन डांस, हाईकोर्ट ने 100 मीटर से ज्यादा बारात निकालने पर लगाई रोक

0

 शादियों में डांस के शौकीनों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से बुरी खबर आई है. ध्वनि प्रदूषण और यातायात संबंधी समस्या को देखते हुए हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया है कि अब सौ मीटर से ज़्यादा दूरी तक सड़कों पर बारात नहीं घूमेगी. इस आदेश के बाद अब शादी घर से अधिकतम सौ मीटर की दूरी पर ही बारात निकल सकेगी. ज़्यादा दूरी से बारात निकालने और ध्वनि प्रदूषण होने व ट्रैफिक जाम होने पर पर शादी घरों के संचालकों से जुर्माना वसूला जाएगा.

इतना ही नहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादियों में डीजे पर पाबंदी के नियम को भी और सख्त बनाया है. अदालत ने पहली बार डीजे बजाने पर एक लाख, दूसरी बार बजाने पर पांच लाख और तीसरी बार बजाने पर दस लाख रूपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है. वहीं तीन बार से ज़्यादा पकड़े जाने पर शादी घर और डीजे संचालक का लाइसेंस निरस्त (रद्द) होगा. डीजे पर पूरी तरह पाबंदी अब भी बरकरार है. कोर्ट ने कहा है कि लाउडस्पीकर इतनी धीमी आवाज में बजाय जाए जिससे किसी को कोई दिक्कत न हो.

कोर्ट ने आदेश दिया है कि ध्वनि प्रदूषण और बारात की वजह से ट्रैफिक जाम होने की शिकायत पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर की जा सकेगी. शिव वाटिका बारात घर और अन्य की याचिकाओं पर जस्टिस पीकेएस बघेल और जस्टिस पंकज भाटिया की डिवीजन बेंच ने ये आदेश पारित किया. 6 नवंबर को फिर से इस मामले की सुनवाई होगी. कोर्ट ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण से इस मामले में रिपोर्ट सौंपने के भी आदेश दिए हैं.

अदालत ने कहा है कि सभी शादी घरों से इस बारे में हलफनामा लिया जाए कि 100 मीटर के नियम का सख्ती से पालन होगा. कोर्ट ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण के प्रतावित बाइलॉज लागू होने वाले नियम से विपरीत होने की वजह से उसे अनुमोदित करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार बाइलॉज बनाया जाये.

देश के 7 करोड़ कारोबारियों ने कर दिया बड़ा ऐलान, 2 अक्टूबर से बिना थैले के नही बेचेंगे आपको सामान

0

एकल उपयोग प्लास्टिक के उपयोग को रोकने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के आह्वान के प्रबल समर्थन में देश के 7 करोड़ व्यापारी अपनी दुकानों पर सिंगल यूज प्लास्टिक के थैलों का उपयोग नहीं करेंगे । यह घोषणा व्यापारियों के शीर्ष संगठन कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) ने की । कैट ने देश भर के उपभोक्ताओं से अपील की है की वो अब शोपिंग के लिए अपना थैला साथ लेकर हीं जाएँ । व्यापारियों की दुकानों से अब उन्हें थैला नहीं मिलेगा ।कैट ने 1 सितम्बर से देश भर में व्यापारियों और लोगों को पर्यावरण पर प्लास्टिक के उपयोग के प्रभाव के बारे में जागरूक करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया था और व्यापारियों को अपनी दुकानों में प्लास्टिक के विकल्प का उपयोग करने और ख़रीदारी के लिए अपने ग्राहकों को कपड़े या जूट बैग का उपयोग करने के लिए सलाह देने को कहा गया था जिसके फलस्वरूप अब देश भर के व्यापारी प्रधानमंत्री के आवाहॉन को पूरी तरह से अमली जामा पहनाने को तैयार है । कैट ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को आज एक पत्र भेजकर आग्रह किया है की वो 2 अक्टूबर को इस अभियान की शुरुआत दिल्ली की किसी मार्केट से करें जहाँ व्यापारी स्वेच्छा से उन्हें प्लास्टिक थैली देंगे और सिंगल यूज प्लास्टिक उपयोग न करने की शपथ लेंगे ।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की व्यापारी आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा हैं जो निर्माताओं से सामान प्राप्त करते हैं और उपभोक्ताओं को वितरित करते हैं। व्यावसायिक समुदाय निर्माता या आपूर्ति श्रृंखला से जिस भी पैकेजिंग में सामान प्राप्त करता है उसी पैकिजिंग में उपभोक्ताओं को देता है ।यह उल्लेखनीय है कि उपभोक्ताओं द्वारा उपयोग किए जा रहे अधिकांश उत्पादों को एकल उपयोग प्लास्टिक में पैक किया जाता है। इसलिए निर्माता के स्तर पर एकल उपयोग प्लास्टिक के उपयोग को प्रतिबंधित करना व्यापारियों के नियंत्रण से परे है।उन्होंने आगे कहा कि इस संदर्भ में उद्योगों के संगठन होने के वो अपने सदस्य उद्योगों को सलाह देते हुए कह सकते है कि वे अपने उत्पादन लाइन में या तैयार माल की पैकिंग में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करें एवं इसके बजाय अन्य विकल्प का उपयोग करे । इस सम्बंध में उधयोग संगठनों फ़िक्की, सीआइआइ, असोचम एवं पीएचदी चेम्बर को भी पहल करनी चाहिए ।
खंडेलवाल ने कहा कि यह एक तथ्य है कि यदि वस्तु उत्पादन में अथवा तैयार माल में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया जाता है और वैकल्पिक वस्तुओं को पैकेजिंग में उपयोग किया जाता है तो सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग निम्न स्तर तक हो सकता क्योंकि इससे जिस व्वैकल्पिक पैकेजिंग में व्यापारियों को निर्माताओं से सामान मिलेगा उसी पैकिंग में उपभोक्ताओं को सामान दिया जा सकता है ।
व्यापारी नेताओं ने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक को उपयोग न करने के प्रधान मंत्री के आह्वान को व्यापार और उद्योग दोनों मिलकर प्रदूषण के खिलाफ लड़ने के लिए इसे एक जन आंदोलन बना सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के खजाने को चमका रहा है ये काला हीरा

0

छत्तीसगढ़ सरकार को उसके कुल राजस्व का 48 फीसद हिस्सा यहां की खदानों से निकलने वाले काले हीरे यानी कोयले से मिलता है। यहां 60 से अधिक खदानों से कोयला उत्पादन हो रहा है। इनमें से 54 खदानों की खुदाई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम कर रहे हैं। इन खदानों से राज्य को हर वर्ष करीब 20 अरब स्र्पये का राजस्व प्राप्त होता है। केंद्र सरकार राज्य की 10 और कोयला खदानों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू की है। वहीं, 14 खदानों से अगले दो महीने में उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य है।

देश का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य

कोयला भंडार के मामले में छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के बाद तीसरे नंबर पर है। यहां देश का कुल 18 फीसद से अधिक कोयला भंडार है, लेकिन उत्पादन के मामले में यह दूसरे नंबर पर है।

एसईसीएल सबसे आगे

कोल इंडिया की कंपनी एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोल्ड फील्ड लिमिटेड) मुनाफा कमाने वाले उपक्रमों में शामिल है। एसईसीएल कार्य क्षेत्र पूरे छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश के कुछ हिस्से में है।

14 खदानों से नवंबर अंत तक होगा उत्पादन शुरू

पिछले सप्ताह छत्तीसगढ़ पहुंचे केंद्रीय कोयला सचिव सुमंत चौधरी और प्रदेश के मुख्य सचिव सुनील कुमार कुजूर राज्य में कोयला उत्पादन की समीक्षा की थी। इस दौरान राज्य की 14 कोयला खदानों से इसी साल नवंबर के अंत तक उत्पादन शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य में 222 कोल ब्लॉकों की पहचान

छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार के सर्वे के बाद 222 कोल ब्लॉक की पहचान की गई है। यह कोल ब्लॉक हसदेव अरण्य, मांड रायगढ़, सोनहत, लखनपुर और सोहागपुर में हैं।

44 ब्लॉक किए गए थे निरस्त

यूपीए सरकार में हुए कोल स्कैम के बाद यहां की 44 खदानों का आवंटन निरस्त किया गया था।

चल रही है 10 खदानों के नीलामी की प्रक्रिया

केंद्रीय कोयला मंत्रालय छत्तीसगढ़ की पांच कोयला खदानों की नीलामी कर रहा है। साथ ही पांच कोयला खदानों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू की है। जिन पांच कोयला खदानों के लिए बोली लगेगी उसमें सरगुजा जिले की सोनडीहा और भास्करपारा के साथ रायगढ़ जिले की गारे पालमा 4/1, शंकरपुर भटगांव- 2 विस्तार और एमपी से लगी उर्तन नार्थ शामिल हैं। इसके साथ ही दुर्गापुर-2/ तरईमार, दुर्गापुर- 2/ सरिया, स्यांग, पांचबहानी और मोरगा-3 खदानों का आवंटन किया जाएगा।

कोयला से राज्य को प्राप्त राजस्व

वर्ष प्राप्त राजस्व (लाख रुपये में)

2010-11 115775.20

2011-12 128216.97

2012-13 176464.10

2013-14 188622.59

2014-15 180819.59

2015-16 186709.23

2016-17 195654.85

2017-18 205054.15

जिला ब्लॉक क्षेत्रफल हेक्टेयर में

कोरबा 14 28347.253

सरगुजा 04 4807.374

कोरिया 13 20115.359

सूरजपुर 17 10289.096

बलरामपुर 01 297.286

रायगढ़ 09 5804.274

उत्तर छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना, आज टूट सकता है 2012 का रिकॉर्ड

0

 प्रदेश में भारी बारिश का दौर जारी है। एक द्रोणिका जो पूर्व से पश्चिम की तरफ बढ़ते हुए मध्यप्रदेश पहुंच चुकी है, उसी ने पूरे प्रदेश को तरबतर कर दिया है। 24 सितंबर की शाम से बारिश ने गति पकड़ी, वह जारी रहेगी। मंगलवार, बुधवार को रायपुर और मध्य छत्तीसगढ़ में भारी बारिश हुई, तो गुरूवार को बिलासपुर और सरगुजा संभाग में जमकर बदरा बरसे।

गुरूवार को रायपुर में दिनभर धूप खिली रही, लेकिन शाम होते ही बादलों ने फिर डेरा जमा लिया और अच्छी बारिश हुई। प्रदेश में बीते 36 घंटे में 56 मिमी बारिश हो चुकी है। अब कुल बारिश का आंकड़ा 1198 मिमी जा पहुंचा है, जो 1200 मिमी से महज कुछ दूर है।

शुक्रवार को यह आंकड़ा टूटना तय है। गुजरते मानसून की इस बारिश ने सरकार और किसानों के चेहरे पर रौनक लौटा दी है। अच्छी खबर इस लिहाज से भी है कि कम बारिश वाले पांच जिले जशपुर, जांजगीर, मुंगेली, सरगुजा, कोरबा के आंकड़े भी सुधार रहे हैं।

पूर्वानुमान

प्रदेश मौसम विज्ञान केंद्र लालपुर के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानी एचपी चंद्रा के मुताबिक आने वाले 24 घंटे में प्रदेश के सरगुजा व बिलासपुर संभाग के कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ मध्य छत्तीसगढ़ के भी कुछ हिस्सों में बारिश का पूर्वानुमान है। रायपुर में भी हल्की बारिश का पूर्वानुमान है। बतां दें कि इस सिस्टम के इतने मजबूत होने का पूर्वानुमान मौसम विभाग को नहीं था।

बिलासपुर में लौटता मानसून कर रहा तेज बारिश

मानसून लौटने को है। इससे पहले ही तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है। बुधवार को भी सुबह से घने बादल छाए रहे। फिर बारिश शुरू हो गई। रुक-रुककर तेज बारिश शाम तक होती रही। इसके चलते शहर की निचली बस्तियां जलमग्न हो गईं। इधर मौसम विज्ञान केंद्र ने अलर्ट जारी कर गुरुवार को भी जिले में कहीं-कहीं मध्यम से लेकर भारी बारिश होने की चेतावनी दी है।

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, इन दिनों कर्नाटक के अंदरुनी हिस्से में और आसपास लगा हुआ रायलसीमा व तेलंगाना में एक चक्रवाती घेरा बना हुआ है। यह माध्य समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक विस्तारित है। साथ ही ऊंचाई के साथ दक्षिण पश्चिम की ओर झुका हुआ है।

माध्य समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक एक द्रोणिका चक्रवाती घेरे के माध्य से होते हुए झारखंड तक बना हुआ है। यह तेलंगाना, दक्षिण छत्तीसगढ़ और ओडिशा के अंदरुनी हिस्से से होकर गुजर रही है। इस तरह एक मजबूत सिस्टम तैयार हुआ है। इसी के चलते मंगलवार की रात में भी अच्छी बारिश हुई थी।

इसका नतीजा यह रहा कि बुधवार को सुबह 8.30 बजे मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक 9.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। वहीं सुबह भी घने बादल छाए रहे। सुबह 11 बजे तक बूंदाबांदी होती रही। इसके बाद झमाझम बारिश का सिलसिला शुरू हुआ। एक घंटे तक लगातार बरसने के बाद कुछ देर के लिए बारिश थमी, लेकिन इसके बाद फिर तेज बारिश होने लगी। इस तरह रुक-रुककर पानी बरसता रहा।

शाम 5.30 बजे की रिपोर्ट के मुताबिक 19.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। रात में भी इसी तरह के हालात बने रहे। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से कहा गया है कि अगले 24 घंटे में बिलासपुर समेत अन्य जिलों में एक से दो स्थानों पर मध्यम से लेकर भारी बारिश हो सकती है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।

इधर, तेज बारिश के चलते शहर की कई निचली बस्तियों में सड़कों व गलियों में पानी भर गया। लोग इससे फिर दहशत में आ गए। मालूम हो कि बीते माह हुई इसी तरह की बारिश से इन इलाकों के कई घरों में पानी घुस गया था। ऐसे में कुछ देर और बारिश होने पर वही स्थिति बन सकती थी। हालांकि अभी भी तेज बारिश की संभावना जताने पर यह आशंका बनी रहेगी।

इन इलाकों में दहशत

पुराना बसस्टैंडः पुराना बसस्टैंड के सामने श्रीकांत वर्मा मार्ग क्षेत्र व विद्यानगर इलाके की नालियों का पानी आता है। निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से यहां हल्की बारिश में ही पानी भर जाता है। बुधवार को भी यहां सड़क पर पानी भरा रहा। इससे आवाजाही करने वालों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

विद्या नगरः नालियों की सफाई के बाद भी विद्या नगर व विनोबा नगर क्षेत्र में संकरी नालियों के चलते बारिश में दिक्कत होती है। इस बार भी इसी तरह की स्थिति रही। सीएमडी चौक से ठीक पहले इस मार्ग पर पानी भर गया। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई। बाद में बारिश कम होने पर लोगों को राहत मिली।

कुम्हार पाराः तालापारा से लगे कुम्हार पारा में निकासी व्यवस्था नहीं होने और बस्ती के निचले इलाके में होने की वजह से यहां भी बारिश का पानी भरने लगा। लोगों की दिक्कत बढ़ गई। कई घरों से लोगों का निकलना भी मुश्किल हो गया। वहीं घरों में पानी घुसने का खतरा बना रहा।

जोरापाराः जोरा तालाब के किनारे नालियों का पानी यहां के मुख्य मार्ग के बाजू में बने वाली नाली से होकर आती है। यहां के निचले इलाके में भी बारिश का पानी भरने लगा। इससे लोग दहशत में आ गए और निकासी दुरुस्त करने की कोशिश में जुटे रहे। जोरा पारा समेत सरकंडा क्षेत्र के कई अन्य मोहल्लों में बिरकोना क्षेत्र के खेतों का पानी आता है। इसी के चलते यहां ज्यादा दिक्कत हो जाती है। इस बार भी ऐसे ही हालात बने रहे।

OMG: ‘इस’ 65 साल के हाथी के आगे-पीछे चलते हैं हथियारों से लैस बॉडीगार्ड, किसी VVIP से कम नहीं है रुतबा

0

आज तक हम सुनते और देखते आए हैं कि देश के अति विशिष्ट लोगों या VVIP की सुरक्षा में हथियारों से लैस बॉडीगार्ड तैनात रहते हैं. इनका काम VVIP हस्तियों पर आने वाली मुसीबतों से उनकी रक्षा करना है. लेकिन क्या कभी आपने देखा या सुना है कि एक हाथी ठाठ-बाँट से चल रहा हो और उसके आगे-पीछे हथियारों से लैस बॉडीगार्ड उसकी सुरक्षा में लगे हों? नहीं ना? लेकिन ऐसा ही नजारा श्रीलंका में देखा जा सकता है. यहाँ की सरकार ने 65 साल के नंडुनगमुवा राजा नामक हाथी की सुरक्षा के लिए हथियारों से लैस सुरक्षागार्ड तैनात किए हैं. दिलचस्प बात यह है कि हाथी की सेवा चाकरी करने के लिए दो महावत भी नियुक्त किए गए हैं. अब इस नंडुनगमुवा राजा हाथी के साथ-साथ श्रीलंका सरकार भी सुर्ख़ियों छा गई है.

देश का सबसे बड़ा पालतू हाथी; पारंपरिक त्योहारों में है विशेष महत्व
नंडुनगमुवा राजा श्रीलंका का सबसे बड़ा पालतू हाथी है, जिसकी ऊंचाई करीब 10.5 फीट है. अब आप सोच रहे होंगे की इसे इतना VVIP ट्रीटमेंट मिलने का कारण क्या है? तो बता दें कि नंडुनगमुवा राजा हाथी देश के पारंपरिक त्योहारों में विशेष अहमियत रखता है. त्योहारों के दौरान वह कई मुख्य सड़कों से निकलता है. यहीं नहीं नंडुनगमुवा राजा उन महत्वपूर्ण हाथियों में शामिल हैं जो प्रतिवर्ष भगवान गौतम बुद्ध के अवशेष वाले पिटारे को झांकी के दौरन बौद्ध मंदिर तक पहुंचाता है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस झांकी के लिए और पिटारे को बौद्ध मंदिर तक पहुंचाने के लिए हाथी को हर साल अगस्त महीने में कैंडी हिल रिसॉर्ट तक 90 किलोमीटर तक का सफर तय होता है, जिसमें अन्य लगभग 100 हाथी भी उसका साथ देते हैं.

हाथी के मालिक द्वारा एक वीडियो दिखाने के बाद सरकार ने लिया निर्णय
बता दें कि नंडनगमुवा हाथी के मालिक ने सरकार को साल 2015 के एक कार्यक्रम का वीडियो दिखाया था, जिसमें हाथी बाइक से टकराते-टकराते बच गया. इसके बाद उसके मालिक की मांग पर सरकार ने हाथी को सुरक्षा प्रदान करने का फैसला लिया है.

सरकार नहीं चाहती कि देश की संस्कृति में अहम भूमिका निभाने वाले इस हाथी को त्योहारों के दौरान कोई नुकसान पहुंचे.

सोने से भी ज्यादा कीमती है ये पत्तियां, ऐसे करेंगे सेवन तो दूर हो जायेंगे 5 बड़े रोग

0

कढ़ी पत्ते का पेड़ अन्य नाम: बर्गेरा कोएनिजी, (Bergera koenigii), चल्कास कोएनिजी (Chalcas koenigii)) उष्णकटिबंधीय तथा उप-उष्णकटिबंधीय प्रदेशों में पाया जाने वाला रुतासी (Rutaceae) परिवार का एक पेड़ है, जो मूलतः भारत का देशज है। अकसर रसेदार व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले इसके पत्तों को “कढ़ी पत्ता” कहते हैं। कुछ लोग इसे “मीठी नीम की पत्तियां” भी कहते हैं। इसके तमिल नाम का अर्थ है, ‘वो पत्तियां जिनका इस्तेमाल रसेदार व्यंजनों में होता है’। कन्नड़ भाषा में इसका शब्दार्थ निकलता है – “काला नीम”, क्योंकि इसकी पत्तियां देखने में कड़वे नीम की पत्तियों से मिलती-जुलती हैं। लेकिन इस कढ़ी पत्ते के पेड़ का नीम के पेड़ से कोई संबंध नहीं है। असल में कढ़ी पत्ता, तेज पत्ता या तुलसी के पत्तों, जो भूमध्यसागर में मिलनेवाली ख़ुशबूदार पत्तियां हैं, से बहुत अलग है।
करी पत्ता खाने का सही तरीका
पहली बात यदि आप भोजन में करी पता इस्तेमाल करते हैं तो इसे निकाले नहीं, इसके अलावा एक चम्मच शहद और एक चम्मच करी पत्ता का रस मिलकर सेवन करें, इसके साथ ही आप नींबू, शहद सुर करी पत्ता पाउडर को मिलाकर शरबत के रूप में भी सेवन कर सकते हैं।
करी पत्ते के सेवन से दूर होते हैं ये रोग
1- करी पत्ते को किसी भी तरह से सेवन करने पर दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
2- करी पत्ता पाचन शक्ति को बढ़ाता है, इसलिए अपच, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में करी पत्ते का सेवन फायदेमंद होता है।
3- करी पत्ते के सेवन से ब्लड शुगर लेवल घटा है, जिससे डायबिटीज कंट्रोल रहता है।
4- करी पत्ता शरीर से बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करता है।
5- करी पत्ते के सेवन से किडनी की सफाई होती है, जिससे किडनी की कार्यक्षमता में बढ़ोत्तरी होती है।

प्याज के तेवर देख अब टमाटर ने भी बदले अपने भाव, कीमतें 70% बढ़ीं

0

बरसात के कारण कीमतों में वृद्धि से पहले प्याज ने देश के आम उपभोक्ता को रुलाया, लेकिन अब टमाटर (Tomato)की बारी है. देश की राजधानी दिल्ली में बीते एक सप्ताह में टमाटर (Tomato)के दाम में 70 फीसदी का इजाफा हो चुका है. टमाटर (Tomato)के लाल होने से इस त्योहारी सीजन में लोग परेशान हैं. महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत दक्षिण भारत के राज्यों में हुई भारी बारिश के कारण प्याज की सप्लाई बाधित होने के कारण इसकी कीमतों में बीते दिनों भारी इजाफा हुआ, लेकिन अब इसका असर टमाटर (Tomato)पर भी दिखने लगा है. दिल्ली-एनसीआर में टमाटर (Tomato)बीते कुछ दिनों से खुदरा में 40-60 रुपये बिकने लगा है और आने वाले दिनों में कीमतों में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है.

नोएडा निवासी मंजू सिंह ने बताया कि प्याज और टमाटर (Tomato)के दाम में बेशुमार इजाफा होने से रसोई का बजट बिगड़ गया है. उन्होंने बताया कि पहले 30 रुपये में जहां एक किलो टमाटर (Tomato)मिलता था वहां अब इसके लिए दोगुने पैसे खर्च करने पड़ते हैं. दिल्ली ही नहीं, पूरे देश में टमाटर (Tomato)की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है. केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग की वेबसाइट के अनुसार, चंडीगढ़ में बुधवार को प्याज का भाव 52 रुपये किलो था.

प्याज के तेवर देख अब टमाटर ने भी बदले अपने भाव, कीमतें 70% बढ़ींहरियाणा में टमाटर (Tomato)तैयार होने का सीजन अप्रैल-मई रहता है. उन्होंने बताया कि कर्नाटक और महाराष्ट्र के अलावा, आंध्रप्रदेश में भी इस समय टमाटर (Tomato)की फसल है, लेकिन वहां भी बारिश के कारण फसल खराब हो रही है. कारोबारियों के अनुसार, खेतों से पानी निकलने के बाद ही दिनों में टमाटर (Tomato)की आवक बढ़ सकती है. ऐसे में त्योहारी सीजन के दौरान मांग बढ़ने से आने वाले दिनों में देशभर में टमाटर (Tomato)के दाम में और इजाफा हो सकता है.

इंडियन आर्मी अपने एक सैनिक पर प्रतिदिन भोजन पर कितना खर्च करती है, पढ़ें पूरी जानकारी

0

पूरे भारत को भारतीय सेना पर काफी गर्व है और हो भी क्यों ना देश के सैनिक सीमा पर दिन रात हमारी रक्षा के लिए खड़े रहते हैं। सैनिक बनने के बाद उन्हें एक डाइट फॉलो करनी होती है। जिस से कि वे चुस्त दुरुस्त रहें। आपके मन में भी ये सवाल जरूर आया होगा कि देश के सैनिक आखिर क्या खाते हैं और आर्मी एक दिन में अपने एक सैनिक के भोजन पर कितना खर्च करती है? आइए जानते हैं।

भारतीय सेना के सैनिक हर मौसम में और हर हालात में देश की रक्षा करते हैं। भले ही बारिश हो, धूप, आंधी या तूफान वे हर सूरत में डटे रहते हैं। जल, थल और वायु सेना के जवानों को भोजन भी उसी हिसाब से दिया जाता है।

अलग अलग ऊंचाई के अनुसार उन्हें भोजन भी उसी तरह का ग्रहण करना होता है।

9000 फीट से नीचे के स्थानों पर तैनात सैनिकों के भोजन के लिए प्रतिदिन का राशन खर्च- 100 रुपए 40 पैसे है।
9000 फीट से 11,999 फीट तक की ऊंचाई वाले स्थानों पर तैनात जवान का राशन खर्च- 116 रुपए 56 पैसे है।
12000 फ़ीट से अधिक ऊंचाई के स्थानों पर तैनाती की स्थिति में राशन खर्च- 241 रुपए 17 पैसे है।

एयरफोर्स और नेवी को दिए जाने वाले भोजन के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है। 11 अगस्त, 2016 को जारी भारत सरकार के आदेश के अनुसार अधिकारियों और कर्मचारियो, कार्मिकों और इंटर सर्विस ऑर्गनाइजेशन के सभी कार्मिकों को 97 रुपये 85 पैसे प्रतिदिन रखा गया था लेकिन महंगाई को देखते हुए इसे 100 रुपए कर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ में ‘बाहुबली’ की याद दिलाता है ये हांदावाड़ा जलप्रपात

0

बस्तर संभाग अपनी पौराणिक, नैसर्गिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरी दुनिया में चर्चित है लेकिन इस भू- भाग में कई ऐसे अछूते दर्शनीय स्थल हैं जहां आज भी सैलानी पहुंच नहीं पाए हैं।

बस्तर संभाग में चित्रकोट, तीरथगढ़, फूलपाड़, तामड़ाघूमर आदि ऐसे जलप्रपात हैं जहां सैलानी सहजता से पहुंच जाते हैं परंतु नारायणपुर जिला के ओरछा ब्लाक अंतर्गत हांदावाड़ा जलप्रपात इस भू-भाग का सबसे बड़ा और ऊंचा जलप्रपात है।

अबूझमाड़ के मैदानों से बहकर आया एक नाला धाराडोंगरी में खूबसूरत नामक जलप्रपात बनाता है। इसे ही हांदावाड़ा जलप्रपात कहा जाता है। इस जलप्रपात की ऊंचाई करीब 300 फीट है। प्रपात के ठीक ऊपर कुश फूलों के मध्य एक और जलप्रपात है।

इस दोनों जलप्रपातों को देखकर लोगों में जेहन में बाहुबली फिल्म का विहंगम जलप्रपात वाला द्श्य उतर आता है। आकर्षक जलप्रपात की तस्वीरों को देखकर को कोई यह मानने को तैयार नहीं होता कि यह नजारा बस्तर का है।

छत्तीसगढ़ को सुरंगी नदी का उपहार है देवदरहा जलप्रपात

महासमुंद जिले के सरायपाली के पास देवदरहा जलप्रपात प्रकृति का अनुपम उपहार है। सुरंगी नदी जब छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर छोटी पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य बहती है, तो यहां एक 30 फुट का जलप्रपात बनाती है। कलकल करती बहती नदी, पहाड़ पर फैली हरियाली, ऊंचे-ऊंचे पत्थर और जलप्रपात के नीचे बने प्राकृतिक झील पर्यटकों को बरबस ही आकर्षित करती है। यही कारण है कि लोग इसे मिनी भेड़ाघाट कहते हैं। पहाड़ियों के नीचे जल प्रवाह को देखते ही रहने का मन करता है।

नदी किनारे पहाड़ पर शिवजी का मंदिर

यहां झील के आगे नदी किनारे पहाड़ पर भव्य मंदिर है, जहां पार्वती के साथ पंचमुखी महादेव स्थापित है। मंदिर को ओडिशा के पदमपुर के जमींदार नटवरसिंह बरिहा ने 1922 में बनवाया था। इसके बरामदे में संगमरमर का नंदी बैल स्थापित है, जिसका मुख मंदिर द्वार की ओर है।

मंदिर के दाहिनी ओर पगडंडी से होकर पहाड़ी के गहरी खाई के सम्मुख पहुंचा जा सकता है। जहां से नीचे देखने पर दिल दहल जाता है। पहाड़ी एक के ऊपर एक रखी हुई सी नजर आती है। बीच में जहां जलप्रपात का पानी गिरने से बड़ी झील बन गई है, जिसे देवदरहा कहा जाता है।

गहराई को क्षेत्रीय भाषा में दरहा (झील) कहते हैं। किवदंती है कि एक लकड़हारा दरहा के किनारे पहाड़ी पर लकड़ी काट रहा था। उसकी कुल्हाड़ी हाथ से छूटकर झील में गिर गई। वह दुखी होकर देवताओं को कोसने लगा। तब दरहा से देव प्रकट हुए।

उन्होंने लकड़हारा को पहले सोना फिर चांदी की कुल्हाड़ी देनी चाही। लेकिन वह लोभ न करते हुए अपनी ही कुल्हाड़ी लेने पर अड़ा रहा। तब देवता ने प्रसन्न होकर उसे उसकी कुल्हाड़ी के साथ सोने- चांदी की कुल्हाड़ी भी दे दी। तब से इसे देवदरहा के नाम से जाना-पहचाना जा रहा है। दरहा के आसपास पहाड़ियों में छोटी-छोटी गुफाएं हैं।

ऐसे पहुंचे
रायपुर से एनएच 53 पर बस से सरायपाली तक पहुंचा जा सकता है, जो 156 किलोमीटर है। वहां से देवदरहा तक निजी वाहन या टैक्सी से पदमपुर रोड पर ओडिशा के गुंचाडीह गांव जाना होगा। यहीं से बायीं दिशा में करीब तीन किमी दूर देवदरहा है।

सरायपाली से इसकी दूरी 21 किमी है। पर्यटकों के लिए सरायपाली में रात विश्राम की सुविधा है। घूमने के लिए लिए जून से लेकर मार्च तक समय उपयुक्त है। गर्मी में नदी में पानी नहीं बहता, हालांकि झील में पानी बारह माह रहता है।