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पेट्रोल पंप पर क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर अब नहीं मिलेगा डिस्‍काउंट, 1 अक्‍टूबर से बंद होगी 0.75% की छूट

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क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने वालों के लिए बुरी खबर है।पेट्रोल पंपों पर ईंधन खरीदने के लिए क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर अब कोई छूट नहीं मिलेगी। अभी तक सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां क्रेडिट कार्ड से ईंधन के लिए भुगतान पर 0.75 प्रतिशत की छूट दे रही थीं। लेकिन 1 अक्‍टूबर, 2019 से अब यह छूट नहीं मिलेगी।

करीब ढाई साल पहले डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई थी। देश के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने क्रेडिट कार्ड ग्राहकों को भेजे एसएमएस में कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों की सलाह पर एक अक्टूबर से पेट्रोल पंपों से ईंधन की खरीद पर क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर मिलने वाली 0.75 प्रतिशत की छूट को बंद किया जा रहा है।

वर्ष 2016 के आखिर में नोटबंदी के बाद सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) को ईंधन की खरीद के लिए कार्ड से भुगतान पर 0.75 प्रतिशत की छूट देने का निर्देश दिया था।

क्रेडिट-डेबिट कार्ड और ई-वॉलेट के जरिये 0.75 प्रतिशत की छूट को दिसंबर, 2016 में शुरू किया गया था। यह व्यवस्था ढाई साल से अधिक समय तक चली। अब इसे बंद करने का फैसला किया गया है। नकद छूट के अलावा सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को कार्ड भुगतान शुल्क मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) का बोझ भी वहन करने को कहा था। आमतौर पर एमडीआर की लागत रिटेलर द्वारा वहन की जाती है।

मोदी सरकार रेलवे को निजी हाथों में सौंपने जा रही है ! इन बड़े रेल मार्गों पर प्राइवेट कंपनियां चलाएंगी ट्रेनें…

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भारतीय रेलवे कई महत्वपूर्ण मार्गों पर ट्रेनों का संचालन निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने पर विचार कर रही है। निजी कंपनियों को प्रमुख मार्गों पर ट्रेनों का संचालन सौंपने के लिए राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर के 100-दिवसीय एजेंडे के तहत फैसला लिया जाएगा।

इससे पहले भारतीय रेलवे ने लखनऊ-नई दिल्ली और मुंबई-अहमदाबाद के बीच भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) को अपनी दो लग्जरी तेजस एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन को मंजूरी देने की घोषणा की थी।

रेल मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने ट्रेनों के निजी संचालन से संबंधित परिचालन मुद्दों को तय करने के लिए 27 सितंबर को ट्रैफिक रेलवे बोर्ड के सदस्य की अध्यक्षता में वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों की एक बैठक बुलाई है।

रेलवे बोर्ड कोचिंग के प्रधान कार्यकारी निदेशक ए. मधुसूदन रेड्डी ने 23 सितंबर को केंद्रीय, उत्तरी, उत्तर मध्य, दक्षिण पूर्वी, दक्षिण मध्य और दक्षिणी रेलवे के सभी प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधकों को एक पत्र लिखा। पत्र में रेड्डी ने कहा, “100-दिवसीय कार्य योजना के तहत मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि विश्व स्तरीय सेवाएं प्रदान करने के लिए यात्री ट्रेनों के निजी संचालन की शुरुआत की जाए।”

उन्होंने कहा, “रेलवे के प्रस्ताव के तहत, निजी शहरों को जोड़ने के लिए निजी ऑपरेटरों को यात्री ट्रेनों के लिए एक बोली प्रक्रिया के माध्यम से शामिल किया जाएगा।”

रेल मंत्रालय की योजना के अनुसार, लखनऊ-नई दिल्ली और मुंबई-अहमदाबाद को संचालन के लिए आईआरसीटीसी को दिया जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर इंटर सिटी सेवाओं के लिए 14 मार्गों पर निजी ऑपरेटरों को ट्रेन संचालन सौंपेगा। इसमें 10 मार्गो पर रातभर चलने वाली लंबी दूरी की सेवाएं और चार उपनगरीय सेवाएं शामिल हैं।

रेलवे ने दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-लखनऊ, दिल्ली-जम्मू/कटरा, दिल्ली-हावड़ा, सिकंदराबाद-हैदराबाद, सिकंदराबाद-दिल्ली, दिल्ली-चेन्नई, मुंबई-चेन्नई, हावड़ा-चेन्नई और हावड़ा-मुंबई मार्गों पर निजी ऑपरेटरों को लंबी दूरी या रात भर की यात्रा ट्रेनों को संचालित करने का प्रस्ताव दिया है।

इसके अलावा मुंबई-अहमदाबाद, मुंबई-पुणे, मुंबई-औरंगाबाद, मुंबई-मडगांव, दिल्ली-चंडीगढ़/अमृतसर, दिल्ली-जयपुर/अजमेर, हावड़ा-पुरी, हावड़ा-टाटा मार्गो पर इंटरसिटी एक्सप्रेस के लिए निजी कंपनियों को आमंत्रित करने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही हावड़ा-पटना, सिकंदराबाद-विजयवाड़ा, चेन्नई-बेंगलुरु, चेन्नई-कोयम्बटूर, चेन्नई-मदुरै और एर्नाकुलम-त्रिवेंद्रम मार्ग पर भी प्रस्ताव पेश किया गया है।

इसी के साथ रेलवे ने मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और सिकंदराबाद में उपनगरीय ट्रेन संचालन के लिए भी निजी कंपनियों को प्रस्ताव दिया है।

रेलवे ने पहले स्पष्ट रूप से कहा है कि ट्रेनों को निजी ऑपरेटरों को संचालन के लिए सौंपने से पहले वह राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ट्रेड यूनियनों और अन्य स्टेकहोल्डर्स से परामर्श करेंगे।

चलते वाहन से सोने की चेन खींची, हिम्मत दिखाकर महिला ने लात मारी तो लुटेरे दुम-दबाकर भाग खड़े हुए

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 गुजरात में वडोदरा स्थित खोडियार नगर सत्यम पार्टी प्लाट के पास एक महिला को तीन लुटेरों ने घेर लिया। वह महिला उस वक्त एक्टिवा पर थी, तभी बाइक सवार लुटेरे उसके पीछे पड़ गए। एक जने ने महिला के गले में पड़ी हुई चेन खींची। मगर, महिला ने तत्काल चलते एक्टिवा से ही उसे लात मार दी। ​जिसके चलते वे सभी हड़बड़ा गए। वे लुटेरे चेन बिना ही वहां से नौ-दो-ग्यारह हो गए। महिला ने घर पहुंचकर आपबीती बताई और थाने में एफआईआर भी लिखवाई।

एफआईआर के अनुसार, गायत्री पवार नामक रोजाना वज्रधाम सोसायटी नाके के पास मौजूद गार्डन में घूमने जाती थी। हर बार की तरह बीते रोज जब वह घर से एक्टिवा लेकर निकली तो वज्रधाम सोसायटी नाके के पास तीन बाइक सवार उसके पीछे लग गए। गायत्री ने समझ लिया कि कुछ गड़बड़ है। कुछ ही पलों में उसे अहसास हुआ कि किसी ने पीछे से गले में पड़ी चेन खींची है। महिला ने फौरन अपनी चेन पकड़ी और फिर पीछे से आ रही बाइक को लात मार दी।

लात पड़ते ही लुटेरों का संतुलन बिगड़ गया। उस समय रास्ते पर एक तरफ गाएं थीं, तो दूसरी तरफ कचरे का ढेर। जिससे हड़बड़ी में बदमाशों ने चेन छोड़ दी। उसके बाद वहां से भाग गए। गायत्री ने बताया कि तीन लुटेरों में से 2 खुले मुंह थे जबकि तीसरे ने मंकी केप पहनी हुई थी। गायत्री की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने उनकी खोजबीन शुरू कर दी। साथ ही गायत्री की हिम्मत की प्रशंसा की।

रास्ते में मिले ग्रेनेड को गेंद समझ के स्कूल लेकर पहुंच गया छात्र, फिर…

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जम्मू-कश्मीर के रियासी में एक छात्र को स्कूल जाने के दौरान अचानक ही एक हैंड ग्रेनेड मिला। उस बच्चे को ये पता नहीं चला कि ये एक बम है। उसे लगा कि ये एक गेंद है और फिर उसने इस ग्रेनेड को उठा लिया। यही नहीं इसके बाद वो इसे लेकर अपने स्कूल पहुंच गया। लेकिन जैसे ही स्कूल में शिक्षकों ने बच्चे के हाथ में इस ग्रेनेड को देखा तो वहां हड़कंप मच गया। स्कूल प्रशासन ने तुरंत मामले की सूचना पुलिस को दी।जम्मू-कश्मीर के रियासी में सामने आया मामला

पूरा मामला जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में सामने आया। हुआ यूं कि मंगलवार को एक रोज की तरह से बच्चे स्कूल जा रहे थे। इसी दौरान एक बच्चा भी स्कूल के लिए निकला, लेकिन जिस रास्ते से वो स्कूल जा रहा था बीच में उसे एक हैंड ग्रेनेड नजर आया। देखने में ये बिल्कुल गेंद की शक्ल में था इसलिए बच्चा इसे पहचान नहीं पाया और उठा लिया। वो इसे ग्रेनेड को लेकर स्कूल पहुंच गया।

छात्र को मिला 50 साल पुराना ग्रेनेड

हालांकि, स्कूल में जैसे ही शिक्षकों को इस बात की जानकारी मिली हंगामा ही मच गया। बच्चे के हाथ में हैंड ग्रेनेड देखकर शिक्षकों ने तुरंत ही मामले की सूचना पुलिस को दी। इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस की टीम ने मामले की जांच की। जांच के बाद उन्होंने बताया कि यह हैंड ग्रेनेड करीब 50 साल पुराना है। यही नहीं ये ग्रेनेड देश में ही बनाया गया है।

पुलिस ने ग्रेनेड को कब्जे में लिया

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अनुमान है कि किसी सैन्य कार्रवाई के दौरान ही ये गिर गया होगा और फिर मिट्टी के नीचे दब गया होगा। यही ग्रेनेड अब बच्चे का हाथ लगा है। फिलहाल पुलिस ने इस हैंड ग्रेनेड को अपने कब्जे में ले लिया है। वहीं गनीमत यही रही कि इस ग्रेनेड से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ।

ये है छत्तीसगढ़ के 5 प्रसिद्ध व्यंजन, नंबर 1 है सभी भारतीयों की पसंद

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छत्तीसगढ़ भारत का एक ऐसा राज्य है जहां पर प्रचुर मात्रा में खाद्य पदार्थों का उत्पादन होता है। छत्तीसगढ़ में बहुत सारे ऐसे पकवान मिलते हैं जो खाने में स्वादिष्ट होते हैं छत्तीसगढ़ में मिलने वाले पकवानों को पूरा भारत देश पसंद करता है आज हम आप लोगों को छत्तीसगढ़ के पांच प्रसिद्ध पकवानों के बारे में बताने जा रहे हैं।

ये है छत्तीसगढ़ के पांच प्रसिद्ध पकवान-

5. मुठिया

छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पकौड़ा में से एक मुखिया भी माना जाता है। मुठिया को छत्तीसगढ़ में बड़े चाव से खाया जाता है। मुठिया को पके हुए चावल के साथ मिर्ची व तरह- तरह के मसालों को मिलाकर बनाया जाता है। इस पकवान को तेल में तलकर नही बल्कि उबालकर बनाया जाता है जिससे इसका स्वाद पूर्णत: बरकरार रहता है। मुठिया राज्य का एक प्रसिद्ध पकवान है जिसे हरी चटनी के साथ नाश्ते के रूप में खाया जाता है।

4. आमत

आमत छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर जिले में बड़े चाव से खाया जाता है। यह छत्तीसगढ़ का चौथा सबसे स्वादिष्ट पकवान माना जाता है। इसे प्राय: बस्तर के हर घर में बनाया जाता हैं। इसमें मिक्स सब्जियों के साथ अदरक व लहसून का पेस्ट डालकर बनाया जाता है जिससे इसका स्वाद और भी मजेदार हो जाता हैं। इस पकवान को बांस से बने बर्तनों में रखा जाता है जो इसके स्वाद को बरकरार रखता है। पर अब शहरी क्षेत्रों में इसे आधुनिक उपकरणों के साथ तैयार किया जाता है।

3. चीला

दोस्तों छत्तीसगढ़ का तीसरा सबसे स्वादिष्ट व्यंजन चीला माना जाता है। चीला चपाती की ही तरह एक पकवान है जिसे उड़द दाल और चावल के आटे के घोल के साथ बनाया जाता है। इसे तैयार करना बहुत ही आसान है और यह खाने में बहुत ही स्वादिस्ट होता है। छत्तीसगढ़ में लोग अक्सर नींबु के अचार व हरे धनिये की चटनी के साथ इसे नाश्ते के वक्त आनंद लेते हैं।

2. भजिया

भजिया छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे स्वादिष्ट व्यंजन माना जाता है। भजिया छत्तीसगढ़ का एक बहुत ही फेमस स्ट्रीट फूड है जो स्थानीय लोगों में बहुत ही लोकप्रिय है। भजिया आमतौर पर दक्षिण भारत का स्थानीय पकवान है। छत्तीसगढ़ में भजिये को विभिन्न प्रकार के अवयवों के साथ तैयार किया जाता है जो इसके स्वाद को और भी स्वादिष्ट बना देता है। भजिये को कई प्रकार से बनाया जाता है, जैसे – प्याज भजिया, आलू भजिया, मिर्च भजिया आदि। बारिश के मौसम में गरम- गरम चाय के साथ भजिये खाना हर किसी की पहली पसंद होता हैं।

1. सावुदाने की खिचड़ी

साबुदाने की खिचड़ी छत्तीसगढ़ की सबसे स्वस्थ और स्वादिस्ट व्यंजनों में से एक है, जिसे न केवल छत्तीसगढ़ में खाया जाता है बल्कि यह देशभर में प्रसिद्ध है। विभिन्न प्रकार के मसाले व सब्जियां साबुदाने के स्वाद को और भी बढ़ाती हैं। साबुदाने की खिचड़ी छत्तीसगढ़ के लोगों की दिनचर्या का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग माना जाता हैं।

इतिहास के इन 2 खूबसूरत औरतों को पाने के जानिए राजाओं ने क्या हदे की थी पार

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आज भी भारतीय इतिहास में २ ऐसी खूबसूरत रानी थी जिनका जीकर आज भी अमर है , उनकी खूबसूरती को आज भी याद किया जाता है इनकी खूबसूरती इतनी अधिक थी कि इनके खातिर कई युद्ध कई लड़ाई भी हुए आज हम आपको इतिहास की ऐसी 2 खूबसूरत स्त्रियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें पाने के लिए युद्ध किए गए।

1. रानी पद्मनी: यह चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी इतिहास की सबसे खूबसूरत रानियों में से एक मानी जाती थी उनकी खूबसूरती को एक बार जो देख लेता वह देखते ही रह जाता था मुगल बादशाह अलाउद्दीन खिलजी भी उन्हें पाने के लिए 8 महीने तक चित्तौड़ की सीमा पर युद्ध कर रहे थे लेकिन फिर भी वह रानी को प्राप्त नहीं कर सके और जब खिलजी उत्तर पहुंचने वाला था तो रानी पद्मिनी ने आत्मसमर्पण कर दिया।

2. जोधा बाई:जोधा एक हिंदू राजा की बेटी थी और बहुत खूबसूरत और सुंदर थी उसकी खूबसूरती की चर्चा हर राज्य हर शहरों में होती थी और बहुत से राजा उन्हें पाना चाहते थे और उन पर मर मिटना चाहते थे उस समय भारत पर मुगल सल्तनत के सुल्तान अकबर का राज था अकबर ने उन्हें देखा और जोधा की खूबसूरती को देखकर उन पर फिदा हो गए जोधा को पाने के लिए उन्होंने आमेर पर आक्रमण कर दिया राज्य को बचाने के लिए जोधा के पिता को जोधा की शादी अकबर से करनी पड़ी हालांकि बाद में अकबर ने हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को बहुत ज्यादा बढ़ाव दिया।

चक्रवात से ज्यादा सांपों के डंसने से मर रहे हैं ओडिशा में लोग, जानें क्यों

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ओडिशा के कंधमाल जिले में हाल हीमें छह लोगों की सांप के डंसने की वजह से मौत हुई है। इसमें आंगनवाड़ी कर्मचारी और उसका आठ वर्षीय बच्चा भी शामिल है। राज्य में सर्पदंशसे मरने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। यहां तक कि चक्रवात से ज्यादा लोग सांप के डंसने की वजह से जान गंवा रहे हैं।

ओडिशा सरकार के 2016 से 2019 तक के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान 6228 लोगों की जानें विभिन्न आपदाओं में जा चुकी हैं। इसमें केवल सांप के डंसने से मरने वालों की संख्या 2217 है। यह संख्या चक्रवात, बाढ़, आगजनी की घटनाओं आदि से ज्यादा हैं। वर्तमान साल 2019-20 में अब तक 325 लोगों की जान सांप के डंसने की वजह से हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे मुख्य तौर पर कुछ वजहें सामने आ रही हैं। इस मामले के जानकार ओडिशा सरकार के अधिकारियों का कहना है कि 2015 से पहले, जब ओडिशा ने सर्पदंश से होने वाली मौतों को राज्य के विशेष आपदाओं के रूप में घोषित किया था और इसमें परिजनों के लिए 4 लाख रुपये के मुआवजे का प्रावधान किया गया था तब सर्पदंश से होने वाली मौतों के बहुत कम रिकॉर्ड थे।

संयुक्त राहत आयुक्त प्रभात महापात्रा ने कहा कि 2015 से पहले लोगों की जान सर्पदंश से हुई होगी लेकिन चूंकि तब लोग सरकारी अस्पताल में शव को नहीं ले जाते थे। लेकिन जब से मुआवजा दिया जाने लगा तो लोग शव को अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए ले जाने लगे हैं। इस वजह से यह भी एक कारण हो सकता है संख्या में इजाफा होने का।

एक अन्य कारण पीड़ितों की यह समझने में असमर्थता है कि उन्हें ओडिशा में पाए जाने वाले जहरीले सांपों की तीन सबसे आम किस्में क्रैट्स, रसेल वाइपर और कोबरा जैसे जहरीले सांपों ने काटा है। सुशील दत्ता ने कहा कि कुछ सांपों के इंसान को डंसने से बहुत दर्द नहीं होता है और जब तक पीड़ित को पता चलता है कि उसे सांप ने डंसा है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। दत्ता ने कहा, ‘ज्यादातर मौतें तब होती हैं जब पीड़ित या तो सो रहे होते हैं या नहीं देख पाते हैं कि उन्हें किसने काटा है।’

तीसरा कारण, पीडि़त को अस्पताल में ले जाने के लिए होने वाली देर है। वहीं, इसके लिए दवा की कमी भी एक कारण है। डॉ लंबोदर पांडा कहते हैं कि सर्पदंश पीड़ितों के इलाज में जो सबसे महत्वपूर्ण है, वह समय है। यहां तक कि किसी भी जहरीले सांप के ज़हर को एंटी-वेनम द्वारा बेअसर किया जा सकता है बर्शते समय का ध्यान रखा गया हो। कई ग्रामीण क्षेत्रों में, पीड़ितों के परिवार उपचार के लिए अस्पतालों में शिफ्ट करने से पहले उन्हें ओझाओं के पास ले जाने में बहुत समय बर्बाद करते हैं।

सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार, एंटी वेनिम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध होना चाहिए, जो त्रि-स्तरीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का पहला पायदान है। लेकिन, सैकड़ों पीएचसी में एंटीवेनिम नहीं है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि तेजी से शहरीकरण के कारण सांप शहरी इलाकों में आ रहे हैं। दत्ता ने कहा कि तेजी से हो रहे शहरीकरण के साथ, अधिकांश सांप अपनी रहने वाली जगहों को खोते जा रहे हैं और अब मानव बस्तियों के करीब रह रहे हैं। भारत में हर साल 28 लाख लोग सर्पदंश का शिकार होते हैं जिससे 46,900 लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं।

माता दुर्गा की मूर्ति के लिए वेश्यालय से क्यों लाई जाती है मिट्टी?

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नवरात्रि में शक्ति की देवी माता दुर्गा की पूजा के महत्व को लगभग सभी जानते हैं। मान्यता है कि माता दुर्गा इन 9 से 10 दिनों तक चलने वाले त्योहार के दौरान धरती पर मौजूद होती हैं। नवरात्र में नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि की पूजा की जाती है। दुर्गा पूजा दरअसल पश्चिम बंगाल का मुख्य त्योहार है लेकिन इसे पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। खासकर उत्तर भारत में इस दौरान शहरों-कस्बों में चौक-चौराहों पर पंडाल बनाये जाते हैं और माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है।

माता दुर्गा की मूर्ति बनाने को लेकर भी कुछ खास परंपरा हैं जिनका पालन किया जाता है। इसी में से एक ये है कि जिस मिट्टी से माता दुर्गा की मूर्ति बनाई जाती है उसमें वेश्यालय से लाई गई मिट्टी को जरूर मिलाया जाता है। इसके बिना मूर्ति अधूरी मानी जाती है। वेश्यालय से मिट्टी क्यों लाई जाती है माता दुर्गा की मूर्ति के लिए और क्या है इस परंपरा के पीछे की कहानी, जानिए…

मां दुर्गा की मूर्ति के लिए वेश्यालय की मिट्टी

यह परंपरा हैरान करने वाला है। ऐसा इसलिए कि जिस समाज में जिस्म का सौदा करने वाली महिलाओं को अशुद्ध और निकृष्ट माना जाता है। उसी समाज के सबसे बड़े त्योहारों में से एक के दौरान उनके घर की मिट्टी का इस्तेमाल क्यों किया है? आखिर इस परंपरा का पालन करने के पीछे क्या वजह है? दरअसल, इसे लेकर कई तरह की कहानियां और मान्यताएं मौजूद हैं।

माता दुर्गा की मूर्ति के लिए 4 चीजें हैं सबसे जरूरी (फोटो-एएफपी)

हिंदू मान्यताओं के अनुसार माता दुर्गा की मूर्ति के लिए 4 चीजें सबसे जरूरी हैं। इसमें गंगा तट की मिट्टी, गोमूत्र, गोबर और वेश्यालय या कोई ऐसी जगह जहां जाना निषेध होता है, वहां से लाई गई मिट्टी शामिल है। इसके बाद ही मूर्ति को पूर्ण माना जाता है। यह परंपरा कई दशकों से चली आ रही है।

मां दुर्गा की मूर्ति के लिए क्यों चाहिए वेश्यालय की मिट्टी

इस पंरपरा के बीच एक कथा तो ये बताई जाती है कि प्राचीन काल में एक वेश्या मां दुर्गा की बड़ी भक्त थी। उसे तिरस्कार से बचाने के लिए मां ने स्वंय उसके आंगन की मिट्टी से अपनी मूर्ति स्थापित करवाने की परंपरा शुरू करवाई।

एक और मान्यता के अनुसार जब कोई व्यक्ति वेश्यालय में जाता है तो वह अपनी सारी पवित्रता, अपना रुतबा, मान-सम्मान, पुण्य और बाहरी दुनिया के लिए ओढा़ हुआ नकाब उतार फेंकता है। अंदर जाने पर वह सिर्फ एक पुरुष रह जाता है। इसलिए वेश्यालय के आंगन की मिट्टी सबसे पवित्र हुई क्योंकि वह दुनिया भर के उजले पुरुषों की पवित्रता सोख लेती है। वेश्यालय की मूर्ति लाने को लेकर यह भी एक कारण बताया जाता है।

दुर्गा पूजा के लिए लाई जाती है वेश्यालय से मिट्टी

एक मान्यता ये भी है कि दुर्गा असल में महिषासुर का वध करने वाली देवी हैं। कहते हैं महिषासुर ने देवी दुर्गा के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया था, उनका उपहास उड़ाया था उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई थी। इस अभद्र व्यवहार के बाद माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। इसी कारण से वेश्यावृत्ति में लिप्त स्त्रियों के घर से मिट्टी लाने की परंपरा शुरू हुई जिन्हें समाज में सबसे निचला दर्जा दिया गया है।

कई जानकार यह भी बताते हैं कि पश्चिम बंगाल में सामाजिक सुधार को लेकर पूर्व में कई आंदोलन चले हैं। इसी दौरान ये बात प्रचलित हुई कि नारी शक्ति का स्वरूप है फिर वह चाहे वेश्या ही क्यों न हो। वेश्यालय से मिट्टी लाने की परंपरा को कई लोग इस दृष्टि से भी देखते हैं।

समय के साथ बदली परंपरा

पूर्व में वेश्यालय से मिट्टी लाने की परंपरा के अनुसार मंदिर का पुजारी ही वेश्यालय के बाहर जाकर वेश्याओं से मिट्टी मांगता था। पुजारी को जब तक मिट्टी नहीं मिल जाती, वह वहां से वापस नहीं लौट सकता। वेश्या अगर मिट्टी देने से मना कर देती है या फिर मजाक उड़ाती है तो भी पुजारी को वहां खड़े रहकर मिट्टी का इंतजार करते रहना पड़ता था। हालांकि, अब मूर्ति बनाने वाले स्वयं जाकर वेश्यालय से मिट्टी ले आते हैं। वहीं, कई जगहों पर अब वेश्यालय की मिट्टी बोरों में भर-भरकर बेची भी जाने लगी है।

छत्तीसगढ़ : चक्रवाती घेरे का असर, कई इलाकों में झमाझम बारिश

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दक्षिण-पश्चिम मध्यप्रदेश से विदर्भ तक फैले चक्रवाती घेरे का असर मंगलवार को राजधानी में देखने को मिला। दोपहर के बाद धूप के दौरान ही तेज बारिश हुई। महज 15 मिनट के भीतर मौसम विभाग ने राजधानी में 7.2 मिमी मीटर बारिश रिकार्ड किया। इस दौरान रायपुर के अधिकतम तापमान में भी गिरावट रिकार्ड हुई।

रायपुर का अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ जो सामान्य से एक डिग्री कम रिकार्ड हुआ। न्यूनतम तापमान 25.1 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ जो सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। माना एयरपोर्ट में भी बारिश हुई। देर शाम होते ही रायपुर झमाझम बारिश हुई।

मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक फिलहाल एक चक्रवाती घेरा दक्षिण आंधप्रदेश और उसके आसपास समुद्र तल से 3.6 किमी ऊपर तक फैला हुआ है। ऊंचाई के साथ दक्षिण की ओर झुका भी है। एक द्रोणिका औसत समुद्र तल से 0.9 किमी तक फैली हुई है, चक्रवाती घेरा दक्षिण पश्चिम मध्यप्रदेश से विदर्भ तक बना हुआ है।

आज ऐसा रहेगा मौसम

मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक बुधवार को प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। बाकी जगहों पर बादल छाये रहेंगे।

यहां हुई इतनी बारिश

पिछले चौबीस घंटे के भीतर वर्षा के प्रमुख आंकड़ों को देखें तो छिंदगढ़ में 6, बड़ेराजपुर, राजपुर में 4 सेमी, बरमकेला, बीजापुर , पेंड्रारोड व पेंड में 3 सेमी, सुकमा, कुरूद, बैंकुंठपुर, मगरलोड, मरवाही, रामानुजगंज में 2 सेमी बारिश हुई है।

रीनाॅल्ट क्विड देगी 271 किमी का माइलेज

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रीनाॅल्ट क्विड की ओर से नई फेसलिफ्ट क्विड का इलेक्ट्रिक वर्जन चाइना में लॉन्च किया। कंपनी इसे भारत में भी लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। क्विड का इलेक्ट्रिक वर्जन पेट्रोल क्विड की तुलना में काफी अलग होगा और इसके डिजाइन में भी काफी बदलाव देखने को मिलेंगे। रीनाॅल्ट ने क्विड को भारत में सिटी के-जेडई नाम से लॉन्च करेगी।

इलेक्ट्रिक क्विड का कॉन्सेप्ट सबसे पहले 2018 में शो-केस किया गया था। देश में सरकार इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर पूरा फोकस करने में लगी हुई है। कंपनी का दावा है कि रीनाॅल्ट क्विड सिटी के-जेडई फुल चार्ज पर 271 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इसमें 26.8 केडब्ल्यूएच लिथियम-आयन बैटरी पैक दिया गया है जो 43.3बीएचपी और 125एनएम टॉर्क देता है। कार को उसी सीएमएफ-ए प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है जो भारत में बेचे जाने वाले रीनाॅल्ट क्विड में भी मिलता है। इस कार खासियत इसकी बैटरी और नए इलेक्ट्रिक पॉवरट्रेन हैं। रीनाॅल्ट क्विड सिटी के-जेडई माइलेज के लिहाज से तो बेहतर है, साथ ही इस कार में फास्ट चार्जिंग की भी सुविधा मिलती है।

कार की बैटरी एसी और डीसी फास्ट चार्जिंग दोनों को सपॉर्ट करती है। एक डीसी चार्जर सिर्फ 30 मिनट में बैटरी को 30 परसेंट से 80 फीसदी तक बढ़ा सकता है। बात फीचर्स की करें तो कार में 8-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है जिसे आप अपने स्मार्टफोन से कनेक्ट कर सकते हैं। कीमत की बात करें तो रीनाॅल्ट क्विड सिटी के-जेडई के बेस वेरिएंट को चीन में 61,800 युआन रखी गई है जोकि भारत के हिसाब से करीब 6.22 लाख रुपये है। लेकिन जानकारों की माने तो कंपनी इसे भारत में 10 लाख रुपये के आस-पास की कीमत में उतार सकती है। फिलहाल अभी तक इसके लॉन्च की तारीख का खुलासा नहीं हुआ है। लेकिन धीरे-धीरे उसकी भी तस्वीर साफ हो जाएगी।