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सोशल मीडिया पर आई थी खबर, 33 साल में रिटायरमेंट की खबर को केन्द्र सरकार ने बताया बेबुनियाद

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सोशलमीडिया में सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति उम्र में बदलाव संबंधी आई खबर को केन्द्र सरकार ने बेबुनियाद और निराधार करार दिया है। सरकार के सूत्रों ने मंगलवार को कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। यह खबर पूरी तरह से गलत है।

बता दें कि मंगलवार को एक खबर सामने आई। खबर के मुताबिक केंद्र सरकार सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के लिए सर्विस 33 साल और उम्र के हिसाब से 60 साल करने वाली है।

खबर के अनुसार 33 साल सर्विस य़ा 60 साल उम्र इन दोनों में से जो पहले होगा, उसी के मुताबिक कर्मचारी को सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी। अगर पहले सर्विस 33 साल की हो जाती है, तो उस कर्मचारी को रिटायरमेंट दे दिया जाएगा। भले ही उसकी उम्र 60 साल न हुई हो।

दूसरा उम्र के हिसाब से 60 साल की उम्र पूरी करने पर कर्मचारी को रिटारयमेंट दे दिया जाएगा। अब सरकार के सूत्रों ने इन खबरों को बेबुनियाद और निराधार बताया है।

छत्तीसगढ़ : मंजूरी मिलने के बाद नई तीसरी लाइन पर दौड़ेगी ट्रेनें

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चांपा-रायगढ़ रेलखंड के खरसिया-भूपदेवपर स्टेशन के बीच लगभग 18 किमी व भूपदेवपुर-राबर्टसन के बीच लगभग नौ किमी नवनिर्मित तीसरी लाइन को मुख्य लाइन से जोड़ने एवं इस अंचल की औद्योगिक साइडिंग की कनेक्टिविटी सहित सभी विभाग के रेल आधुनिकीकरण कार्य करने इंटरलॉकिंग का कार्य चल रहा है।

27 सितंबर को यह पूरा हो जाएगा। 29 सितंबर इसकी जांच करने के लिए कोलकाता से रेलवे संरक्षा कमिश्नर आएंगे। निरीक्षण के दौरान लाइन की स्थिति परिचालन योग्य रही तो मंजूरी दे देंगे।

उनकी स्वीकृति के बाद इस लाइन में ट्रेनें दौड़ने लगेंगी। वर्तमान में चल रहे वर्क के दौरान परिचालन, विद्युत, सिग्नल एवं दूरसंचार, इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी व तकनीकी कर्मचारी बड़ी संख्या में दिन रात कार्य को पूरा करने में जुटे हैं। अत्याधुनिक मशीनों का उपयोग भी किया जा रहा है।

सेवानिवृत्ति उम्र कम करने की कोई योजना नहीं : डीओपीटी

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कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने कहा है कि केंद्रीय कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र कम किए जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। विभाग का कहना है कि सोमवार को सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाई गई कि केंद्रीय कर्मियों की सेवानिवृत्ति उम्र कम करने के प्रस्ताव को डीओपीटी ने मंजूरी दे दी है और यह एक अप्रैल 2020 से लागू हो जाएगा। विभाग का कहना है कि न तो ऐसा कोई प्रस्ताव मिला है और न ही उसे मंजूरी दी गई है। गौरतलब है कि सोमवार को कथित तौर पर डीओपीटी की एक विज्ञप्ति के हवाले से कहा गया था कि जिन केंद्रीय कर्मियों का सेवाकाल 33 साल हो जाएगा, उन्हें रिटायरमेंट की उम्र 60 साल से पहले ही सेवानिवृत्ति मिल सकती है। बता दें कि, बैकलॉग की समस्या, नई भर्ती और पदोन्नति में देरी, जैसी शिकायतें दूर करने के लिए केंद्र सरकार रिटायरमेंट के नए नियम तय करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक मौजूदा प्रपोजल में सेवानिवृत्ति आयु दो तरीके से तय होगी। पहली, कर्मी ने अगर 33 साल की सेवा पूरी कर ली हो और दूसरा, अगर उसकी खुद की आयु 60 साल हो गई हो। इस संबंध में वित्त मंत्रालय को प्रपोजल भेजा गया है।

वहां से मंजूरी मिलने के बाद अगले वित्तीय वर्ष से सेवानिवृत्ति के नए नियम लागू कर दिए जाएंगे। वहीं सरकार ने सभी विभागों में पदों की समीक्षा भी शुरू कर दी है।

संगठित कॉडर और गैर-संगठित कॉडर में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने सेवानिवृत्ति के नए नियम तय करने और कॉडर रिव्यू के लिए केंद्रीय कर्मियों का सर्विस प्रोफाइल मांगा है। सभी मंत्रालयों को अपने सर्विस एवं कॉडर स्टाफ का सर्विस प्रोफाइल हर हाल में 30 सितंबर तक जमा कराना होगा। इस मामले में किसी तरह की कोई देरी न हो, इसके लिए डीओपीटी ने सभी मंत्रालयों को ऑफिस ‘मेमोरेंडम’ भेजा है।

छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी’ दिल्ली के राजपथ पर बनेगी आकर्षण का केंद्र, गांधी जयंती के अवसर पर प्रस्तुति देने जाएंगे प्रदेश के कलाकार

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ड्रीम प्रोजेक्ट नरवा गरुवा घुरुवा बारी अब दिल्ली के राजपथ पर आकर्षण का केंद्र बनेगी। प्रदेश के कलाकारों की टोली दो अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन इस थीम पर आकर्षक प्रस्तुति देने दिल्ली जाएगी। यह टीम पांच दिनों तक दिल्ली में रहकर प्रदेश की ग्राम्य संस्कृति को अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति के जरिए देश दुनिया तक पहुंचाने का काम करेगी।

दरअसल छत्तीसगढ़के चार चिन्हारी ,नरवा, गरुवा घुरुवा बारी की महता को देश की राजधानी तक पहुंचाने संस्कतिविभाग की 20 सदस्यीयलोक कलाकारों कीटोलीदिल्लीभेज रहा है। इन कलाकारों को 2 अक्टूबर से लेकर 5 दिनों तक दिल्ली में इस थीम पर प्रस्तुति देने का अवसर दिया गया है। इन कलाकारों के ठहरने से लेकर आने जाने तक का खर्च विभाग वहन करेगा। संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राजपथ पर प्रदेश के लोक कलाकार अपनी प्रस्तुति के माध्यम से जलसंरक्षण, जैविक खैती,पशुपालन को बढ़ावा देने का संदेश देंगे।

अपने फोन में ये सेटिंग करोगे तो 5G की स्पीड से चलेगा इंटरनेट..

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आज कल हर किसी के फोन में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है, जिसकी वजह से ही हम आज हम एक दूसरे के साथ कनेक्ट हो पाए हैं लेकिन इंटरनेट की इस तेज़ दुनिया में भी कुछ लोग ऐसे हैं जिनका इंटरनेट सही स्पीड से नही चल रहा है। इसीलिए आज हम आपको ऐसी ट्रिक बताएंगे जिसकी मदद से आप इंटरनेट 5जी की स्पीड से चलेगा।
आपको बस अपने फोन में कुछ सामान्य सेटिंग करनी है जिससे आपका इन्टरनेट सामान्य से 10 गुना ज्यादा तेज़ चलेगा।
1. यूसी ब्राउज़र का प्रयोग करें
अगर आप भी इंटरनेट की स्पीड का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं तो आपको यूसी ब्राउज़र का इस्तेमाल करना चाहिए इससे आपकी स्पीड दुगनी ही जाएगी।
2. वोल्टी चालू करके
आप ये भी सुनिश्चित कर लीजिए की आपका फोन वोल्टी इनेबल्ड है या नही इसके लिए आपको सेटिंग में जाकर सिम कार्ड सेटिंग में वोल्टी का ऑप्शन इनेबल करना है। 3. वीपीएन का इस्तेमाल
वीपीएन का प्रयोग करने से आपका इंटरनेट 2x रफ्तार से चलता है इसके लिए बस आपको प्ले स्टोर से फ्री वीपीएन नामक ऐप्प डाउनलोड करना है।
अब अगर आपने ये सेटिंग कर ली है तो आप अपनी नेट की स्पीड में अंतर देख पा रहे होंगे तो यदि आपकी स्पीड बढ़ी है

महाराष्‍ट्र बैंक घोटाला : शरद पवार बोले- अब तक नहीं लिया जेल का एक्सपीरियंस, जाना पड़े तो दिक्कत नहीं

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पवार परिवार को बड़ा झटका दिया है. ईडी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार, उनके भतीजे अजित पवार और 75 अन्य के खिलाफ महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (एमएसीब) घोटाले में मामला दर्ज किया. जांच एजेंसी ने यह जानकारी दी.

बॉम्बे HC के फैसले के बाद ED ने उठाया कदम
ED ने एनसीपी के बड़े नेताओं के खिलाफ यह कदम बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा पिछले महीने दिए गए फैसले के बाद उठाया है, जिसमें मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को कथित घोटाले में शरद पवार, अजित पवार और 75 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को कहा गया था.

ईडी ने मुंबई पुलिस के एफआईआर के आधार पर मामला दर्ज किया है, जिसने पिछले महीने घोटाले के संदर्भ में मामला दर्ज किया था.

याचिकाकर्ता सुरेंद्र अरोड़ा ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एनसीपी नेताओं के नियंत्रण वाले महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक की जांच के लिए मामला दायर किया था, जिस पर अदालत ने यह फैसला सुनाया था.

‘जेल जाने में कोई दिक्कत नहीं’
मामले पर शरद पवार ने कहा, “मामला दर्ज हो चुका है. अगर मैं जेल जाता हूं तो मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है. मैं इससे खुश होऊंगा क्योंकि मैंने कभी जेल का अनुभव नहीं लिया है. अगर कोई मुझे जेल भेजने का प्लान बना रहा है तो मैं इसका स्वागत करता हूं.”

आरोप है कि नेताओं और कोऑपरेटिव बैंकों के पदाधिकारियों के बीच मिलीभगत थी. इस मिलीभगत से चीनी कारखानों और सूत मिलो के संचालकों और पदाधिकारियों को नियमों को ताक पर रखकर 25 हजार करोड़ रुपए कर्ज बांटे गए.

‘घाटे के बावजूद बैंकों ने दिए कर्ज?’
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में सामने आया कि कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए चीनी मिलों की आर्थिक स्थित ठीक न होने और घाटे के बावजूद बैंकों ने कर्ज दिए. कई मामलों में बिना कुछ गिरवी रखे कर्ज दिया गया और कई बार गिरवी रखी गई संपत्ति के मुकाबले काफी ज्यादा कर्ज दिया गया.

गलत प्रबंधन, बढ़ते खर्च और क्षमता का पूरा इस्तेमाल न होने के चलते शक्कर कारखाने आर्थिक तंगी का शिकार हो गईं और उन्हें बेहद कम कीमत पर बेच दिया गया. साथ ही निर्धारित (रिजर्व) कीमत से कम में बेचकर खरीदारों को भी फायदा पहुंचाया गया.

छत्तीसगढ़ सरकार ने लिया एक हजार करोड़ का कर्ज, ब्याज के साथ आठ वर्ष में चुकाने का वादा

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छत्तीसगढ़ सरकार ने हजार करोड़ स्र्पये का नया कर्ज लिया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के माध्यम से लिए इस कर्ज को सरकार 7.28 फीसद ब्याज के साथ आठ वर्ष में लौटाएगी। महीनेभर के भीतर सरकार ने दूसरी बार कर्ज लिया है। इससे पहले सरकार ने 23 अगस्त एक हजार करोड़ स्र्पये का कर्ज लिया था जिसे सरकार ने 7.03 फीसद ब्याज के साथ सात वर्ष में लौटाने का वादा किया था ।

मार्च 2019 में खत्म हुए वित्तीय वर्ष के दौरान सरकार ने लगभग हर सप्ताह कर्ज लिया था, लेकिन नए वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में सरकार ने एक भी बार प्रतिभूति के बदले कर्ज नहीं लिया। दूसरी तिमाही में फिर कर्ज लेने का सिलसिला शुरू हो गया है।

वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार सरकार अभी और कर्ज ले सकती है। अफसरों के अनुसार अभी जो कर्ज लिया जा रहा है यह सब पुराने हिसाब में जा रहा है। यानी पहले जो कर्ज माफी और धान बोनस दी गई है उसके लिए। सरकार इस वर्ष कर्ज माफी तो नहीं करेगी, लेकिन धान बोनस देगी। ऐसे में नवंबर के बाद इसके लिए भी कर्ज लिया जाएगा।

15 राज्यों ने लिया कुल 20350 करोड़ का कर्ज

छत्तीसगढ़ समेत कुल 15 राज्यों ने 20350 करोड़ का कर्ज लिया है। इसमें पश्चिम बंगाल व राजस्थान ने सबसे ज्यादा तीन-तीन हजार करोड़, उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र ने दो-दो हजार, तेलंगाना व पंजाब-15-15 सौ, गुजरात 16 सौ करोड़ और छत्तीसगढ़ आंध्रप्रदेश, बिहार, हरियाणा व तमिलनाडु ने हजार- हजार करोड़ लिया है। असाम ने पांच सौ, नगालैंड ने 150 करोड़ और मेघालय ने सौ करोड़ कर्ज लिया है।

दिसंबर 2018 से अब तक का कर्ज

आरबीआइ- 12400

राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक- 557.01

एशियन डेवलपमेंट बैंक- 217.31

कुल- 13174.32

65 हजार करोड़ के करीब पहुंचा कर्ज

राज्य सरकार पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। अब तक सरकार करीब 65 हजार करोड़ स्र्पये का कर्ज ले चुकी है। इसमें से 13 हजार के आसपास मौजूदा सरकार ने लिया है, जबकि बाकी कर्ज पूर्ववर्ती सरकार ने लिया था।

ग्वालियर में मिग-21 प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त, दोनों पायलट सुरक्षित, कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश

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भारतीय वायु सेना (आईएएफ) का मिग 21 प्रशिक्षण विमान बुधवार को ग्वालियर एयरबेस के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दोनों पायलट उससे सुरक्षति निकलने में कामयाब रहे.

सूत्रों ने बताया कि विमान नियमित मिशन पर था और सुबह करीब 10 बजे दुर्घटनाग्रस्त हो गया. उन्होंने बताया कि आईएएफ ने दुर्घटना के कारण का पता लगाने के लिए ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ के आदेश दिये हैं.

पुलिस ने बताया कि प्रशिक्षण विमान मध्य प्रदेश के भिंड जिले के चौधरी-का-पुरा में दुर्घटनाग्रस्त हुआ. भिंड के पुलिस अधीक्षक रुडोल्फ अल्वारेस ने कहा कि गांव प्रमुख द्वारा हमें दी गयी जानकारी के अनुसार दोनों पायलट सुरक्षित बाहर निकल गये थे. एसपी ने कहा कि ग्वालियर में हमने आईएएफ के अधिकारियों को घटना की जानकारी दे दी है.

NCP-कांग्रेस का आरोप, शिवाजी स्मारक में 1300 करोड़ का घोटाला

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विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने मुंबई के तट पर छत्रपति शिवाजी स्मारक के निर्माण में बड़े घोटाले का आरोप लगाया है. दोनों पार्टियों ने स्मारक के निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया की न्यायिक जांच की मांग की है. ऐसे में आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान इस मुद्दे पर राजनीति तेज हो सकती है.

शिवाजी स्मारक पर महाराष्ट्र में एक दशक से राजनीति होती रही है. आगामी विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा जोरशोर से उठ सकता है. यह मुद्दा 2009 के विधानसभा चुनावों में भी उठा था. अब एक बार फिर यह मुद्दा गरमा गया है. कांग्रेस और एनसीपी ने इस स्मारक निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया में कुल 1300 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है.

एनसीपी ने छत्रपति शिवाजी महाराज प्रोजेक्ट डिवीजन के दो अधिकारियों के पत्र का हवाला देते हुए यह आरोप लगाया है. एनसीपी का आरोप है कि सीनियर अकॉउंट्स ऑफिसर संजीव कुमार सिंह ने एक आफिस नोट में 2018 में आरोप लगाया था कि कॉन्ट्रैक्ट देने में अनियमितता बरती गई है और सीवीसी के गाइडलाइनस का उल्लंघन हुआ है. सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि मूल टेंडर की शर्तों में बदलाव किया गया जो कि सीवीसी गाइडलाइंस का उल्लंघन था.

इसमें कहा गया है कि अगर न्यूनतम बोली लगाने वाले की दर व्यवहारिक नहीं थी तो अधिक प्रतिस्पर्धी दरों के लिए निविदा मंगाए जा सकते थे. आरोप में कहा गया है कि फरवरी 2019 में दूसरे डिविजनल अकाउंट्स अफसर विकास कुमार ने प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल को पत्र लिखकर प्रोजेक्ट के निविदा का ऑडिट कर जांच की मांग की थी. इसमें कुमार ने उच्च अधिकारियों द्वारा दबाव की ओर भी इशारा किया था.

एनसीपी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा, ”ये शिवाजी महाराज के नाम पर वोट मांगकर सत्ता में आए हैं और शिवाजी स्मारक के प्रोजेक्ट में ही भ्रष्टाचार कर रहे हैं. हम इस पूरे मामले में न्यायिक जांच की मांग करते हैं.”

भाजपा ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि ये आरोप बेबुनियाद हैं. ये नहीं चाहते कि यह प्रोजेक्ट कभी पूरा हो. महाराष्ट्र के पीडब्ल्यूडी मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा, ” कांग्रेस और एनसीपी को इन पर बोलने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है. दोनों पार्टियां सत्ता में रहते हुए इसे पूरा नहीं कर सके और जब यह पूरा हो रहा है तो ये इस पर राजनीति कर रहे हैं. ”

गौरतलब है कि मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज का स्मारक अरब सागर में मुंबई तट पर बन रहा है. इसके लिए वर्ष 2017 में टेंडर निकाला गया था. एल ऐंड टी ने इसके लिए 3,226 करोड़ की बोली लगाई थी. स्मारक की उंचाई 121.2 मीटर होगी, जिसमें 83.2 मीटर मूर्ति की और 37 मीटर तलवार की उंचाई होगी. एस ऐंड टी कंपनी के साथ वार्ता के बाद सरकार ने निविदा की रकम 2,500 करोड़ कर दी थी. इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

खेती के लिए किसानों को नहीं खरीदने पड़ेंगे महंगे उपकरण, ओला-उबर की तरह ले सकेंगे किराये पर

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वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए केंद्र सरकार ने उन्हें किराये पर महंगी मशीनरी और उपकरण उपलब्ध कराने का इंतजाम किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार को सीएचसी फार्म मशीनरी मोबाइल एप लांच किया। इससे पहले ट्रैक्टर की बुकिंग से लिए भी एप जारी किया जा चुका है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एप इस मौके पर कहा कि इसके जरिये किसान अपने खेत के 50 किलोमीटर दायरे में उपलब्ध खेती के उपकरण को मंगा सकेंगे। भारत की भाषाई विविधता को देखते हुए एप को बहुभाषी बनाया गया है। यह एप हिंदी और अंग्रेजी समेत 12 भाषाओं में उपलब्ध है। तोमर ने कहा कि मंत्रालय ने सभी कृषि मशीनरी कस्टम सेवा प्रदाताओं और किसानों को एक मंच पर लाने के लिए एंड्रायड प्लेटफॉर्म पर मोबाइल फोन एप विकसित किया है।

अब तक 40 हजार केंद्र पंजीकृतकृषि मंत्री ने कहा कि इस मोबाइल एप्लीकेशन पर अभी तक 40 हजार से भी अधिक कस्टम हायरिंग सेंटर पंजीकृत हो चुके हैं। इनके पास 1.20 लाख से भी अधिक उपकरण उपलब्ध हैं। कृषि मंत्री ने उम्मीद जताई कि इससे आम किसानों, कम जोत वाले सीमांत किसानों को अधिक लाभ होगा, क्योंकि वे ज्यादा महंगे उपकरण खरीद नहीं सकते। इन उपकरणों के उपयोग से किसानों की लागत कम होगी, उपज बढ़ेगी और उनकी आमदनी में भी इजाफा होगा।

किसान ऐसे करें आवेदनअगर किसी किसान को कृषि यंत्रों पर छूट के लिए आवेदन करना है, तो वह सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) पर जाकर आवेदन कर सकता है। यहां किसान अपनी पसंद का यंत्र सीएससी संचालक को बता सकता है, जिसके बाद सीएससी सेंटर संचालक एक आवेदन नंबर किसान को देगा। इसके साथ ही किसान साइबर कैफे आदि से भी आवेदन कर सकते हैं, जिसके लिए किसान को एग्री मशीनरी.इन पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इस एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। डाउनलोड के बाद आपको भाषा चुननी होगी फिर अगले स्टेप में सेवा प्रदाता और किसान या उपयोगकर्ता का विवरण दिख जाएगा।

कृषि यंत्रों पर सब्सिडी की सुविधासरकार जरूरतमंद किसानों को कृषि उपकरण मुहैया कराने के लिए सब्सिडी सुविधा भी दे रही है। अगर किसान द्वारा कृषि यंत्र का पूरा भुगतान कर दिया गया है, तो वह सब्सिडी का पैसा अपने खाते में ले सकता है। इसके अलावा अगर वह दुकानदार को देना चाहता है, तो एक लिखित प्रार्थना पत्र देना होगा और सब्सिडी का पैसा दुकानदार के खाते में चला जाएगा। इसके अलावा किसान और दुकानदार की सहमति पर सब्सिडी का पैसा कृषि यंत्र निर्माता कंपनी के खाते में भी भेजा जा सकता है। किसानों के लिए ऑनलाइन आवेदन को पोर्टल खोल दिया गया है। हालांकि, किस यंत्र पर कितनी छूट दी जाएगी, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।