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इस जगह पर शव को दफनाने के लिए देना पड़ता है किराया

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आमतौर पर कब्रिस्तान में दफ़नाने की जगह होती है। यह ज्ञात नहीं है कि भारत में किसी कब्रिस्तान में शवों को दफनाने के लिए पैसे लिए गए थे या नहीं। लेकिन दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां मृतकों को दफनाने के लिए बहुत सी जमीन खरीदनी पड़ती है।

इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि जमीन के एक छोटे से टुकड़े पर भी अरबों रुपये खर्च होने हैं। वर्तमान में हांगकांग में जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं। यहां, लोगों को शवों को दफनाने के लिए एक जगह खरीदना पड़ता है और उन्हें इस जमीन के टुकड़े के लिए लगभग 1 करोड़ 3 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ता है।

चूंकि अंतरिक्ष की लागत महंगी है, इसलिए लोगों ने शवों को दफनाने के बजाय उन्हें मास्क देना शुरू कर दिया है। लेकिन एक समस्या है। और यही है, लोग मृत शरीर को आग देते हैं, लेकिन वे हड्डियों को दफनाना चाहते हैं।

जमीन की बढ़ती कीमतों के कारण, लोग यहां के व्यक्ति को सरकारी लॉकर में रख रहे हैं। अभी स्थिति यह है कि हांगकांग में लगभग चार मिलियन लोग दफन होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शवों की राख को लॉकरों में रखा गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लोगों को सरकारी लॉकर में हड्डियों को रखने के लिए प्रति वर्ष 5,000 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। समस्या यह भी है कि लोगों को लॉकर्स में हड्डी लगाने के लिए चार-चार साल तक इंतजार करना पड़ता है। ये लॉकर शू बॉक्स के आकार के होते हैं। जिसमें बहुत कम जगह है।

एक लाख साल पहले इंसान कैसा होता था जानिए

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विकास के डार्विनियन सिद्धांत का तर्क है। हालाँकि, इस बारे में शोध कि मानव एक लाख साल पहले कैसा दिखता है, अभी जारी किया गया है। एक लाख साल पहले, मानवों को डेनिसोवन्स कहा जाता था। इस मानव की हड्डियां गुलाबी रंग की थीं।

उनकी नाक केवल तीन दांतों और एक निचले जबड़े से चपटी थी। शोधकर्ताओं के अनुसार शोधकर्ताओं ने अध्ययन के आंकड़ों को दोहराया है। मानव प्रजाति, जो समय के दौरान नष्ट हो गई थी, साइबेरिया से पूर्वी एशिया तक फैल गई। आनुवांशिकी और अध्ययन के आंकड़ों के आधार पर, शोधकर्ता इन मनुष्यों को दोहराने में सक्षम रहे हैं।

मानव शोधकर्ता डेनिसोवन्स के अनुसार, हमने इस मानव को दोहराया है, जो कि इजरायल के यरुशलम में हिब्रू विश्वविद्यालय के शोधकर्ता, लीरान कार्मेल कहते हैं। कुछ मामलों में यह मानव निएंडरथल प्रजाति से मिलता जुलता है। उनमें से कुछ बताते हैं कि हम उनके साथ तालमेल बिठा रहे हैं।

लेकिन कुछ मामलों में यह स्पष्ट है कि अध्ययन काफी अलग है,

उन्होंने कहा। इस प्रतिकृति को बनाने के लिए, शोधकर्ताओं ने 56 शारीरिक विशेषताओं का अध्ययन किया है। यह प्रजाति डेनिसोवन्स, आधुनिक मनुष्यों और निएंडरथल प्रजातियों से अलग है। उनकी खोपड़ी को इन प्रजातियों से अलग दिखाया गया है। इस बारे में जानकारी ‘सेल’ जर्नल में प्रकाशित हुई है।

118 साल से लगातार जल रहा है ये बल्ब, देखने वालों की लग जाती है भीड़

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आमतौर पर कोई भी बिजली वाला बल्ब खरीदने पर कंपनियां उस पर एक साल या मुश्किल से दो-तीन साल की गारंटी देती हैं। ऐसा बहुत कम ही होता है कि कोई बल्ब लगातार दो-तीन साल तक जलता रहे, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में एक ऐसा बल्ब भी है, जो 118 साल से लगातार जल रहा है। ये बल्ब आज तक फ्यूज नहीं हुआ।

इस अजूबे बल्ब को सेंटेनियल नाम से जाना जाता है। कैलिफोर्निया के लिवरमोर शहर के दमकल केंद्र में लगे इस बल्ब को शेल्बी इल्क्ट्रॉनिक कंपनी ने बनाया था, जिसे वर्ष 1901 में पहली बार जलाया गया था। तब से लेकर आज तक यह बल्ब जल ही रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1937 में बिजली का तार बदलने के लिए इस बल्ब को पहली बार बंद किया गया था और तार बदलने के बाद उसे फिर से जला दिया गया था। इस बल्ब का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। इस बल्ब की निगरानी सीसीटीवी कैमरे से की जाती है।

साल 2013 में यह बल्ब अपने आप बंद हो गया था, तब लोगों को लगा था कि शायद बल्ब फ्यूज हो गया, लेकिन जब जांच की गई तो तार में खराबी निकली। इसके बाद तार को फिर से बदल दिया गया और बल्ब फिर जलने लगा।

चार वॉट बिजली से चल रहा ये बल्ब 24 घंटे जलता रहता है। साल 2001 में इस बल्ब का 100वां जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया था, जिसमें संगीत पार्टी का भी आयोजन किया गया था।

इस अनोखे बल्ब को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। दमकल केंद्र में कभी-कभी इतनी भीड़ हो जाती है कि लगता है कि वो कोई म्यूजियम हो।

महिला की आंखों से आंसू की जगह निकलता है कुछ ऐसा, देखकर डॉक्टर भी हैं हैरान

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इंसान हों या कोई जानवर, जब भी रोते हैं तो उनकी आंखों से पानी वाले आंसू निकलते हैं, लेकिन एक महिला ऐसी है, जिसकी आंखों से ‘क्रिस्टल के आंसू’ निकलते हैं। ऐसा मामला देखकर डॉक्टर भी हैरान हैं और यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर महिला की आंखों से आंसू की जगह क्रिस्टल क्यों निकल रहे हैं?

यह महिला अर्मेनिया के एक गांव स्पेंडरियन की रहने वाली है, जिसका नाम सैटेनिक काजेरियन है। काजेरियन का कहना है कि उनका परिवार खेती करके अपना गुजारा करता है, ऐसे में उनके पास इतना पैसा नहीं है कि वो अपनी अजीबोगरीब बीमारी का इलाज करा सकें।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 वर्षीय काजेरियन की आंखों से हर रोज आंसू की जगह 50 क्रिस्टल निकलते हैं। उनकी बीमारी डॉक्टरों को भी समझ नहीं आती हैं। ऐसे में वो इसका इलाज नहीं कर पाते हैं और ना ही ऑपरेशन कर पा रहे हैं।

काजेरियन ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेकर आंखों में डालने वाली दवाई का इस्तेमाल किया, जिससे थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन अब उन्हें क्रिस्टल आंसुओं की वजह से बहुत तकलीफों का सामना करना पड़ता है।

रूस के एक नेत्र विशेषज्ञ ने बताया कि महिला की बीमारी बिल्कुल असाधारण है। इसे समझ पाना काफी मुश्किल है। हालांकि उन्होंने अंदेशा जताया है कि आंसुओं में प्रोटीन की अधिकता से ऐसी बीमारी होने की संभावना है। इसके अलावा अगर आंसू में नमक की मात्रा बढ़ती है, तो भी यह क्रिस्टल में परिवर्तित हो जाते हैं।

वहीं, अर्मेनिया के उप-स्वास्थ्य मंत्री ओगेंस अरूटुयन का कहना है कि महिला की इस अजीबोगरीब बीमारी का अध्ययन किया जा रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर महिला के साथ क्या हो रहा है।

पादरी के डांस के पीछे क्यों पागल हो रहे है लोग, आपभी देखे क्या है इस वीडियो में ऐसा

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इन दिनों सोशल मीडिया पर पर एक पादरी का डांस विडियो खूब देखा जा रहा है। यह विडियो दिल्ली के एक पादरी का बताया जा रहा है, जिनका नाम फादर मैथ्यू किझेकैचीरा है। इस वीडियाे काे मलायम फिल्माें के अभिनेता ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर शेयर कर दिया है। इसके बाद से यह वीडियाे इतना वायरल हुआ कि पूरे देश में जमकर पसंद किया गया है।अब कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मस पर विडियो को शेयर किया जा रहा है।

इस विडियो में आप फादर मैथ्यू को बेहतरीन डांस मूव्स करते देख सकते हैं। उनके साथ दो नौजवान भी नाच रहे हैं। वे जिस गीत पर डांस कर रहे हैं, वो निविन पॉली की फिल्म ‘लव एक्शन ड्रामा’ का है। बता दें, खबर लिखे जाने तक इस विडियो को 2 लाख से ज्यादा व्यूज और 93 हजार से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं।


इन दिनों सोशल मीडिया पर पर एक पादरी का डांस विडियो खूब देखा जा रहा है। यह विडियो दिल्ली के एक पादरी का बताया जा रहा है, जिनका नाम फादर मैथ्यू किझेकैचीरा है। इस वीडियाे काे मलायम फिल्माें के अभिनेता ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर शेयर कर दिया है। इसके बाद से यह वीडियाे इतना वायरल हुआ कि पूरे देश में जमकर पसंद किया गया है।अब कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मस पर विडियो को शेयर किया जा रहा है।

इस विडियो में आप फादर मैथ्यू को बेहतरीन डांस मूव्स करते देख सकते हैं। उनके साथ दो नौजवान भी नाच रहे हैं। वे जिस गीत पर डांस कर रहे हैं, वो निविन पॉली की फिल्म ‘लव एक्शन ड्रामा’ का है। बता दें, खबर लिखे जाने तक इस विडियो को 2 लाख से ज्यादा व्यूज और 93 हजार से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं।

पजामा-कुर्ता और चप्पल बनी चालान की वजह, भरना पड़ा भारी जुर्माना

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1 सितम्बर के बाद से पूरे देश में नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू किया गया है लेकिन कुछ राज्यों सरकारों ने अभी तक इसको अपने राज्य में लागू नहीं किया है। उनमे से एक है राजस्थान। लेकिन यहां पुराने मोटर व्हीकल एक्ट की सख्ती से ही लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। अब मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ड्रेस कोड पर सख्ती शुरू हो गई है। जयपुर के संजय सर्किल थाने के एक इंस्पेक्टर ने एक टैक्सी चालक का इसलिए चालान काट दिया क्योकि टैक्सी चलाते वक़्त उसने पजामा और चप्पल पहन रखे थे और कमीज के ऊपर के बटन भी खुले हुए थे। टैक्सी चालक का 1600 रुपए का चालान कटा है। 6 सितंबर को काटा गया चालान कोर्ट को भिजवा दिया गया है।

इंस्पेक्टर ने कहा कि पुराने मोटर व्हीकल एक्ट के तहत हमने टैक्सी चालक के प्रॉपर ड्रेस नहीं पहने पर चालान काटा है। पुराने मोटर व्हीकल एक्ट में भी टैक्सी चालकों के लिए ब्लू शर्ट और पेंट का ड्रेस कोड का प्रावधान है। यह शहर में घूमने आने वाले लोगों के अलावा शहर के लोगों के सुरक्षा के लिए जरूरी है। हमने चालान को कोर्ट में भिजवा दिया है वहां पर कोर्ट में फैसला हो सकता है कि चालान की राशि और बढ़ भी जाए।

गौरतलब है कि राजस्थान में अभी नया मोटर व्हीकल एक्ट अभी लागू नहीं हुआ है। खबर है कि राजस्थान सरकार ने फैसला लिया है कि पहले ये एक्ट पूरे बीजेपी शासित राज्यों में लागू हो जाए तो उसके बाद उससे भी कम जुर्माना राशि का प्रावधान का राजस्थान में नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू करेंगे।

मुकेश अंबानी से शादी करने के लिए नीता ने रखी थी ये शर्त

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देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी को भला कौन नहीं जानता होगा। दुनिया में अपने दम पर खुद की विशेष पहचान बनाने वाली नीता अंबानी के जीवन से जुड़ी एक बात जानकार तो आप हैरान रह जाएंगे।

क्या आपको पता है कि नीता ने मुकेश अंबानी से शादी करने के लिए एक शर्त रखी थी। इस शर्त को मानने के बाद ही नीता ने मुकेश अंबानी से शादी की थी। नीता ने विवाद करने के लिए मुकेश अंबानी के सामने शर्त रखी थी कि शादी के बाद भी उन्हें काम करने से नहीं रोक जाएगा।

भरतनाट्यम नृत्य को अपना पहला प्यार मानने वाली नीता को धीरूभाई अंबानी और कोकिला बेन ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान अपने बड़े बेटे मुकेश के लिए पंसद कर लिया था।

100 साल की उम्र में की इस जोड़े ने शादी,जानिए क्यों

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 प्यार की कोई परिभाषा नहीं है, न ही प्यार करने की कोई उम्र है। इस उदाहरण को एक अमेरिकी दंपति ने सुधारा है। दोनों पिछले एक साल से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। आखिरकार दोनों की शादी हो गई। बता दें कि हम जिस कपल की बात कर रहे हैं, वे 20 या 25 साल के नहीं, बल्कि 100 साल के बच्चे हैं।

यह दंपति अमेरिका के ओहियो में रहता है। जॉन 100 साल का है। और उनकी पत्नी, Phyllis, 102 साल की है। पिछले साल एक कार्यक्रम में उनका साक्षात्कार लिया गया था। उस समय दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे थे।

डेटिंग दोस्ती हो गई है और दोस्ती प्यार में बदल गई है। फिर दो पुराने जोड़ों की शादी हुई।

वास्तव में, जॉन सेना में थे और उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में लड़ाई लड़ी थी। उनकी पत्नी का निधन लगभग 10 साल पहले हो गया था। दूसरी ओर, फीलिस के पति की भी 15 साल पहले मौत हो गई थी।

दोनों वृद्धावस्था में अपना जीवन बिता रहे थे। जब 102 वर्षीय फीलिस जॉन से मिले थे, तब वह वर्जीनिया में रह रहे थे।

इस साल 8 अगस्त को द फिल्म्स 103 साल की हो जाएगी। भगवान सिंह जागरुकता की कमी के कारण गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं करवा पाए। वहीं इस संबंध में भगवान सिंह के बेटे नत्था सिंह का कहना है कि उनके पिता अपनी लंबी उम्र का राज जीवन भर नशे से दूर रहना और सादे भोजन बताते थे।

इसके अलावा मेहनत करने को भी स्वस्थ्य व लंबी जिंदगी के लिए जरूरी मानते थे। भगवान सिंह गांव के युवकों को भी इस बात की सीख देते थे। वह जीवन में कभी मायूस नहीं होते थे और साकारात्मक रवैया अपनाते थे।

अंगेजी का एक ऐसा शब्द जो लिया गया है इस मंदिर से

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अंग्रेजी भाषा में एक शब्द है जो भगवान जगन्नाथ से लिया गया है। शब्द जुग्गोरनोट है, जिसका अर्थ है एक शानदार रथ जिसे कोई रोक नहीं सकता है। अंग्रेजी भाषा में प्रयुक्त अमेरिकी शब्द का उपयोग किसी शब्द को परिभाषित करने के लिए किया जाता है।

एक बड़ी मशीन या एक टीम या एक करिश्माई नेता द्वारा एकत्र या बाद में लोगों के एक समूह से उभरने वाले राजनीतिक आंदोलनों के लिए उपयोग किया जाता है। इसका अर्थ शारीरिक क्षति को कुचलने या उत्पन्न करने के लिए भी है। विकी विकिपीडिया के अनुसार, गुड़ शब्द संस्कृत के शब्द जगन्नाथ से लिया गया है।

जगन्नाथ का अर्थ है उन्हें विश्व का स्वामी कहा जाता है। 14 वीं शताब्दी में, एक प्रसिद्ध पुस्तक, द टावेल ऑफ सर जॉन मंडेविले ने उदासीनता से, कुछ हिंदुओं को एक धार्मिक बलिदान के रूप में दर्शाया है जो एक विशाल रथ के पहियों के नीचे खुद को बलिदान करता है। इस दावे के आधार पर, अंग्रेजों ने बाजीगरी शब्द का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

एक जानकारी के अनुसार, ब्रिटिश राज में लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता दी गई थी, लेकिन कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस तैनात की गई थी। पुरी में भगवान जगन्नाथ की तीर्थयात्रा पर सैकड़ों लोगों को रथ खींचते हुए देखकर, जिस बल पर बिजली गिर रही थी,

ब्रिटिश अधिकारियों और सैनिकों ने इसे जगरनॉट कहा। अंग्रेजी में Juggernaut शब्द का इस्तेमाल विभिन्न संदर्भों में भी किया जाता है लेकिन इसकी उत्पत्ति भगवान जगन्नाथ की यात्रा से जुड़ी है।

इस शख्स ने चार साल में 2800 अजनबियों से की दोस्ती, बताई इसके पीछे की ‘दिल छू लेने वाली’ वजह

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आमतौर पर जहां लोग अजनबियों से बात तक करना पसंद नहीं करते हैं, वहीं अमेरिका के फिलाडेल्फिया का रहने वाला एक शख्स हर रोज किसी न किसी अजनबी से बात करता है। ऐसा करके उसने महज चार साल में 2800 अजनबी लोगों से दोस्ती कर ली है। उसने इसके पीछे की ‘दिल छू लेने वाली’ वजह भी बताई है।

28 वर्षीय रॉब लॉसेस ने अजनबियों से मिलने और उनसे दोस्ती करने का सिलसिला साल 2015 में शुरू किया था। तब उन्होंने 10 हजार नए लोगों से दोस्ती करने का लक्ष्य रखा था।

लॉसेस पहले एक बड़ी कंपनी में नौकरी करते थे। उनकी हमेशा से आदत रही थी कि वह नए-नए लोगों से जान-पहचान बनाते रहते थे, लेकिन कंपनी ज्वाइन करने के बाद से उनकी ये आदत लगभग छूट गई थी। इससे ऊब कर उन्होंने 2016 में नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह से अजनबियों से जान-पहचान बनाने में जुट गए।

लॉसेस की दिन की शुरुआत कुछ ऐसे होती है कि सुबह वो जिम जाते हैं और उसके बाद कम से कम चार अजनबी लोगों से मिलते हैं। हर एक अजनबी के साथ वो कम से कम एक घंटा बिताते हैं और उसे अपने बारे में बताते हैं, फिर उसके बारे में भी जानने की कोशिश करते हैं।

दरअसल, अजनबियों से दोस्ती करने के पीछे की वजह बताते हुए लॉसेस कहते हैं कि अलग-अलग लोगों से संपर्क करना समय बिताने का सबसे कीमती तरीका होता है। हम जैसे-जैसे तकनीक और सोशल मीडिया के आदी होते जा रहे हैं, हमारे मानवीय संपर्क कम होते जा रहे हैं। यही वजह है कि लॉसेस ने इसकी शुरुआत की थी।