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अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन : भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ किसानों की 120 से अधिक याचिकाएं ख़ारिज…

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गुजरात उच्च न्यायालय ने अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली किसानों की 120 से अधिक याचिकाओं को खारिज कर दिया.

हालांकि जस्टिस एएस दवे और जस्टिस बीरेन वैष्णव की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को आंशिक राहत देते हुए कहा कि अधिक मुआवजे का विषय अब भी खुला हुआ है और किसान अपनी जमीन के एवज में और अधिक धन की मांग के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं.

मामले की सुनवाई करते हुए बीते गुरुवार को अदालत ने कहा कि अधिक धन की मांग करते हुए किसान पिछले उदाहरणों का जिक्र कर सकते हैं जहां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण या अन्य किसी संस्थान ने जमीन अधिग्रहण के लिए अधिक मुआवजे की पेशकश की थी.

पीठ ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम की वैधता को कायम रखा जिसे गुजरात सरकार ने 2016 में संशोधित किया था और इसके बाद राष्ट्रपति ने मुहर लगाई थी.

अदालत ने किसानों के इस दावे को खारिज कर दिया कि गुजरात सरकार के पास भूमि अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी करने का अधिकार नहीं है क्योंकि परियोजना दो राज्यों- गुजरात और महाराष्ट्र के बीच बंटी हुई है.

अदालत ने कहा कि सामाजिक प्रभाव का आकलन किए बिना भूमि अधिग्रहण शुरू करने की घोषणा के लिए अधिसूचना जारी करना भी वैध है.

पीठ ने यह भी कहा कि मुआवजे का हिसाब लगाने की पूरी प्रक्रिया भी उचित है.

याचिकाकर्ताओं के वकील आनंद याग्निक ने कहा कि अधिकतर किसान दक्षिण गुजरात से हैं और वे आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में जाएंगे.

इन किसानों ने अपनी याचिकाओं के माध्यम से दावा किया कि भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के तहत किसानों की भूमि की कीमत में संशोधन से पहले भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती.

उन्होंने दावा किया कि उन्हें बाजार दरों पर मुआवजे की पेशकश की जा रही है जो 2011 में तय हुई थीं.

भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 26 का हवाला देते हुए उन्होंने मांग की कि मुआवजे का आकलन करने से पहले राज्य सरकार को पहले जमीन की बाजार दरें संशोधित करनी चाहिए और उन दरों पर मुआवजा देना चाहिए, न कि 2011 की दरों पर.

याचिकाकर्ताओं ने गुजरात संशोधन अधिनियम, 2016 को भी चुनौती दी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने सितंबर 2017 में बुलेट ट्रेन परियोजना की शुरुआत की थी.

अहमदाबाद से मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन कॉरिडोर 508 किलोमीटर लंबा होगा जिसमें 12 स्टेशन होंगे. इस पर बुलेट ट्रेन 320 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी.

फर्जी नाम व आधार कार्ड से होटल में बुक कराये थे कमरे

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 मध्यप्रदेश में उजागर हुए हाईप्रोफाइल हनीट्रैप मामले में अब एक नया खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह को फंसाने के लिए एक महिला ने फर्जी नाम और आधार कार्ड का इस्तेमाल किया था।

पलासिया थाना पुलिस शनिवार को देर रात रिमांड पर ली गई दो महिलाओं आरती दयाल और मोनिका यादव उर्फ सीमा को लेकर शहर के विजयनगर चौराहे स्थित ‘श्री’ होटल पहुंची थी, जहां उनसे रूम नंबर 104 की शिनाख्त करवाई। पुलिस ने उन्हें पहली मंजिल पर रूम नंबर 104 के सामने खड़ा करवाया और पूछा कि क्या वे इसी रूम में इंजीनियर हरभजन के साथ रुकी थीं? दोनों युवतियों ने इशारे से कहा कि हां, हम इसी कमरे में रुके थे। होटल के रजिस्टर में आरती भोपाल के नाम से रूम दर्ज था। अगस्त माह में यह रूम हरभजन ने बुक कराया था। इसके बाद पुलिस ने होटल का रिकॉर्ड जब्त किया गया। फिर पुलिस दोनों को लेकर होटल इनफिनिटी पहुंची, जहां पहले रिसेप्शन के रिकॉर्ड खंगाले। इस होटल में 30 अगस्त को आरती के नाम से रूम नंबर 414 बुक किया गया था। पुलिस ने सबूत के तौर पर बुकिंग के दौरान दिए गए आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के जब्त किए हैं।

पलासिया पुलिस के अनुसार होटल इनफिनिटी में मोनिका यादव ने रुकने के लिए फर्जी नाम का उपयोग किया था। वह सीमा सोनी के नाम से होटल में रुकी थी। इस नाम का फर्जी आधार कार्ड भी होटल को दिखाया गया था। होटल से जब्त रिकॉर्ड की जांच में फर्जी आधार कार्ड का खुलासा हुआ है। इस होटल में एक और महिला छतरपुर की रूपा अहिरवार नामक महिला का रुकना भी पाया गया। इस महिला का नाम पहली बार सामने आया है। अभी तक यह महिला पुलिस रिकॉर्ड में नहीं आई थी। पुलिस इस महिला की जानकारी जुटा रही है।

महालक्ष्मी पूजन की तैयारियां कर रहा था परिवार एक धमाका और हो गया बड़ा हादसा, एक की मौत तीन गंभीर…

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पाटन थाना अंतर्गत कटरा मोहल्ला में शनिवार की दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक घर में धमाके के साथ गैस गैस सिलेंडर फट गया। जिसकी चपेट में आने से एक महिला की जहां मौत हो गई वहीं तीन लोग जख्मी हो गए। यह हादसा उस वक्त हुआ जब परिवार के सभी सदस्य माता महालक्ष्मी पूजन की तैयारियां में जुटे हुए थे और किचिन में खाना बनाने की तैयार हो रही थी। मिली जानकारी के मुताबिक महालक्ष्मी व्रत पर आज महिलाओं ने सुख.समृद्धि की कामना करते हुए उपवास रखा।

पवित्र स्नान के साथ व्रत का संकल्प लेकर सुबह से घर.घर में माता महालक्ष्मी पूजन की तैयारियां की गई। इसी तरह पाटन स्थित कटरा मोहल्ला में रहने वाला एक परिवार भी महालक्ष्मी पूजा की तैयारियां कर रहा था। घर में अच्छे.अच्छे पकवान बनाएं जा रहे थे। इसी बीच गैस सिलेंडर लीक होने की वजह से उसमें आग गई और सिलेंडर फट गया। हादसे की चपेट में आने से एक महिला की मौत हो गई जबकि तीन महिलाएं घायल हो गई।

मची चीख-पुकार

धमाके की आवाज सुनकर परिजनों सहित आसपास के लोगों में चीख पुकार मच गईए सभी लोग पहुंचे तो देखा कि एक महिला क्षतविक्षत हालत में मृत पड़ी है, वहीं गृहस्थी का सामान भी खराब हो गया है। घटना की खबर आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गई और मौके पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई थी।

अनिता बाई की हुई मौत, शिया बाई गंभीर

हादसे में अनिता बाई 45 वर्षीय की हादसे में मौत हो गई है। जबकि उसकी सास शिया बाई 65 वर्षीय, देवरानी प्रभा बाई 35 वर्षीय, भतीजी बबीता बुरी तरह जख्मी हो गई। घायलों को तत्काल उपचार के लिए पाटन अस्पताल ले जाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद शिया बाई की हालत नाजुक देख उसे मेडिकल रिफर कर दिया गया जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

पुलिस ने तफ्तीश की शुरू

सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पीएम के लिए भिजवाते हुये मर्ग कामय कर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है। वहीं चर्चाओं में यह बात भी सामने आई है कि कडेरा परिवार द्वारा पटाखा का कारोबार किया जाता है, इनके पास पटाखा बेचने का लाइसेंस भी है, घर में पटाखा बनाए जा रहे थे। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएगें, उस आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएंगी।

तुरंत इन मोबाइल ऐप्स को कर दें डिलीट,वरना आपको पंहुचा सकते है नुकसान…

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गूगल प्ले स्टोर पर फर्जी ऐप्स को लेकर कई मामले सामने आए हैं। अब इस प्लैटफॉर्म से दो ऐप्स को हटाने की खबर आई है।गूगल ने अपने स्टोर से दो फोटो ऐप्स को हटा दिया है। मोबाइल सिक्योरिटी फर्म वांडेरा रिसर्चर्स ने Sun Pro Beauty और Funny Sweet Beauty Selfie Camera नाम की ऐप्स में ऐडवेयर स्पॉट किया है।जानकारी के मुताबिक ये दोनों ही ऐप्स गूगल प्ले स्टोर पर काफी पॉपुलर हैं और इन ऐप्स को 15 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। गूगल का कहना है कि ये दोनों ही ऐप्स पॉप-अप ऐड के जरिए लोगों से पैसे कमा रही थीं।बताया गया कि ऐड बैकग्राउंड में चलते रहते थे और यूज़र को परेशानी होती थी, साथ ही इससे फोन की बैटरी भी जल्दी खत्म होती थी।गूगल ने सभी यूज़र्स से इन ऐप्स को अपने फोन से डिलीट करने के लिए कहा है। वांडेरा का दावा है कि दोनों ही ऐप्स में अनवांटेड ऐड के अलावा काफी मैलिसियस कोड भी शामिल हैं। इतना ही नहीं दोनों ऐप्स ऑडियो रिकॉर्डिंग की परमिशन के साथ कई और परमिशन भी मांगती थीं।पॉपुलर ऐप Camscanner में हाल ही में खतरनाक मैलवेयर (malware) पाया गया था, जिसके बाद इसे प्ले स्टोर से हटा लिया गया था। लेकिन अब वापसी के बाद एंड्रॉयड यूज़र्स इसे मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं। CamScanner के डेवलपर्स (developers) ने ट्विटर कर इस ऐप की वापसी की जानकारी दी है।डेवलपर्स ने एक स्टेटमेंट में कहा कि ऐप के लेटेस्ट वर्जन से एडवर्टाइजिंग एसडीके को हटा दिया गया है। CamScanner का वर्जन 5.12.5 डाउनलोड के लिए उपलब्ध है, जिसे यूज़र्स अपने ऐप को इससे अपग्रेड कर सकते हैं।

पीएम मोदी के लिए तैयार की गई विशेष थाली, जानिए क्या है इसमें ख़ास…

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पीएम नरेंद्र मोदी एक सप्ताह के अमेरिका दौरे पर हैं. फिलहाल पीएम मोदी अमेरिका के ह्यूस्टन शहर पहुंच गए हैं. पीएम मोदी ह्यूस्टन में आयोजित किए गए सामुदायिक समारोह ‘हाउडी मोदी’ को संबोधित करने वाले हैं. ‘हाउडी मोदी’ की तैयारियां तक़रीबन पूरी हो चुकी हैं. पीएम मोदी के इस दौरे पर उनके लिए विशेष व्यंजन तैयार किए गए हैं. जिसमें सबसे खास है ‘नमो थाली’. इस ख़ास थाली में श्रीखंड, खीर, गुलाब जामनु सहित कई सारे पकवान परोसे जाएंगे.

भारतीय मूल की शेफ किरण वर्मा ने मीडिया से विशेष बातचीत की. उन्होंने बताया है कि पीएम मोदी को खास ‘नमो थाली’ परोसी जाएगी. यह थाली आम लोगों के लिए भी उपलब्ध होगी. इस थाली में कई स्वादिष्ट भारतीय पकवान परोसे जाएंगे. जन्मदिन पर माँ के साथ पीएम मोदी ने जिस थाली में खाना खाया था उसकी तस्वीर को आधार बनाकर ये ख़ास थाली मंगाई गई है. पीएम मोदी के लिए समोसा, पूरी , खिचड़ी सहित कई तरह के गुजराती पकवान बनाए गए हैं. खाना परोसने के लिए विशेष तांबे की थाली और ग्लास मंगाए गए हैं.

आपको बता दें कि भारतीय समय के अनुसार ह्यूस्टन के NRG स्टेडियम के गेट शाम 4.30 बजे खोल दिए जाएंगे. स्टेडियम में रात 9 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम जारी रहेगा. ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में अमेरिक के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी यहां पर उपस्थित रहेंगे.

इस राजा के वंशज चला रहे परचून की दुकान, आलीशान महल पर किरायेदारों ने कर लिया कब्जा

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मुगल बादशाह जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर के नवरत्नों में शुमार और आर्थिक मामलों के गहरे जानकार राजा टोडरमल का महल अब जीर्ण अवस्था में है. महल का एक हिस्सा अंग्रेजों के हमलों में ढह गया और कुछ पर अब किराएदारों का कब्जा है. टोडरमल के वंशज आर्थिक तंगी के चलते इस ऐतिहासिक धरोहर की मरम्मत में असमर्थ हैं, लेकिन इसका अस्तित्व बचाए रखने के लिए फिक्रमंद हैं.

भूमि बंदोबस्त और मालगुजारी व्यवस्था लागू करने वाले टोडरमल की 16वीं पीढ़ी के वंशज अरुण कुमार अग्रवाल ने बताया, ‘हमारी दादी ने महल के कुछ कमरे किराए पर उठाए थे. किले के कमरों में अभी कुल 12 किराएदार हैं, इनमें कुछ किराएदार 70 साल पुराने हैं और 50-100 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से नाममात्र का किराया देते हैं. हम देश में अंग्रेजों के जमाने के किराएदारी कानून से बंधे हैं.’

किले के ही एक हिस्से में रहने वाले अग्रवाल ने बताया कि गंगा नदी के तट पर दारागंज में सन् 1585 में टोडरमल ने महल की नींव डाली और पांच बरस में यह बनकर तैयार हुआ. 40 हजार वर्ग फुट इलाके में बने किले में आज भी नक्काशीदार पायों वाला आलीशान दरबार हाल, दीवान-ए-खास, दीवान-ए-आम और अस्तबल का वजूद बाकी है, लेकिन वक्त की मार ने इसकी रंगत बिगाड़ दी है. दूसरे तल पर बना दीवानखाना और राजा टोडरमल का कक्ष इस महल की शानो शौकत की भूली बिसरी यादों का गवाह है.

यह ऐतिहासिक तथ्य है कि एक जमाने में महल में टोडरमल का सचिवालय चलता था. प्रथम खंड पर शस्त्रागार और मंत्री, सिपहसालार रहते थे. 12 जून 1857 को ब्रिटिश हुकूमत के अंतिम गवर्नर जनरल कर्नल नील ने इस किले पर हमला किया था. तब तोप के गोले दागकर पूरी गारद तो मारी ही गई, छह में से पांच फाटक तोड़ डाले गए थे. तब से इस किले में दोबारा फाटक नहीं लगे. ब्रिटिश सेना ने महल में काफी लूटपाट भी की थी.

अग्रवाल ने कहा, ‘हमारे पूर्वज टोडरमल की यह आखिरी निशानी है, जिससे हमारी स्मृतियां जुड़ी हैं. इसलिए हम इसे सरकार या किसी अन्य को नहीं देना चाहते.’ अग्रवाल एक समय सिविल लाइंस के एक होटल में महाप्रबंधक के तौर पर काम करते थे, लेकिन बीमारी के चलते उनकी नौकरी जाती रही और अब वह वैद्यकी से अपना जीवनयापन करते हैं. उनके दो पुत्रों में से एक पुत्र किले के बाहरी हिस्से में परचून की दुकान चलाता है, जबकि दूसरा बेटा बेरोजगार है.

अग्रवाल ने बताया कि आर्थिक तंगी की वजह से वह किले की टूटी दीवारों की मरम्मत कराने की स्थिति में नहीं हैं. पूर्व में कई होटल व्यवसायियों ने किले का पुनरुद्धार कराने की पेशकश की, लेकिन वो अंततः इसकी मिल्कियत हासिल करना चाहते थे, इसलिए हमने मना कर दिया.

टोडरमल के राजा टोडरमल बनने की कहानी बयां करते हुए उन्होंने बताया, ‘अपने समय के दिग्गज बैंकर रहे टोडरमल, मुगल शासन में पहले हिंदू मंत्री बने जिन्हें शेरशाह सूरी ने अपना राजस्व मंत्री बनाया था. पेशावर से कलकत्ता तक 2500 किलोमीटर सड़क तैयार कराने में टोडरमल की अहम भूमिका रही. इससे खुश होकर शेरशाह सूरी ने टोडरमल को झूंसी स्थित प्रतिष्ठानपुरी का राजा बना दिया.’ प्रतिष्ठानपुरी का वह किला किसी समय भूकंप से उलट गया और अब यह उल्टा किला के नाम से मशहूर है. उन्होंने बताया कि शेरशाह सूरी ने इस सड़क का नाम सहर-राह-ए-आजम रखा और 300 साल तक यही नाम चला और 1840 के आसपास अंग्रेजों ने इसका नाम जीटी रोड रख दिया. बाद में इसका नाम शेरशाह सूरी मार्ग रख दिया गया.

अचानक सड़क पर बिखरने वाला प्याज़ इतना महंगा क्यों हुआ?

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प्याज़ की कीमतें एक बार फिर आसमान छूने लगी हैं. दिल्ली के बाज़ार में कुछ दिन पहले जो प्याज़ 35 से 40 रुपए किलो बिक रहा था. अब वह 60 से 70 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है.

प्याज़ के दाम आम आदमी के आंसू निकाल रहे हैं. राजधानी दिल्ली की आज़ादपुर मंडी में प्याज़ का थोक भाव 50 रुपए बताया जा रहा है.

प्याज़ से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में यह उछाल दरअसल प्याज़ की कम पैदावार का नतीजा है.

आज़ादपुर मंडी में प्याज़ व्यापारी संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र बुद्धिराजा कहते हैं कि पिछले सीज़न में प्याज़ की कीमत 4-5 रुपए प्रति किलो पहुंच गई थी, जिस वजह से किसानों ने इस बार प्याज़ की खेती कम कर दी.

सुरेंद्र कहते हैं कि यही वजह है अब प्याज़ का स्टॉक कम पड़ रहा है और कीमतें ऊपर जा रही हैं.

वो कहते हैं, ”इस बार किसान ने प्याज़ बहुत कम लगाया, लगभग 25 से 30 प्रतिशत कम प्याज़ लगाया गया. इसके साथ ही बरसात की वजह से भी काफी प्याज़ ख़राब हो गया. इसी से डरकर किसान ने प्याज़ जल्दी निकाल दिया था. हमारा माल महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान से आता है. आमतौर पर अप्रैल में जो प्याज़ निकाला जाता है वह दिवाली तक चलता है लेकिन इस बार वो प्याज़ अभी ख़त्म हो चुका है.”

एशिया की सबसे बड़ी मंडी में प्याज़ के भाव

सुरेंद्र यह भी बताते हैं कि दिल्ली की मंडियों में अधिकतर प्याज़ महाराष्ट्र से मंगवाया जाता है और महाराष्ट्र से ही कम प्याज़ दिल्ली भेजा जा रहा है.

दरअसल महाराष्ट्र के लासलगांव में एशिया की सबसे बड़ी प्याज़ मंडी है. देश भर में प्याज़ की कीमतें इसी मंडी से तय होती हैं.

लासलगांव मंडी में भी प्याज का भाव 45-50 रुपए प्रति किलो पहुंच चुका है.

लासलगांव एग्रीकल्चर प्रॉड्यूस मार्केट कमिटी के अध्यक्ष जयदत्ता होलकर बताते हैं कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में प्याज़ किसानों को मौसम की मार झेलनी पड़ी है. वो कहते हैं कि पहले तो यहां सूखा पड़ा और उसके बाद भारी बारिश की वजह से प्याज़ की फ़सल को काफी नुकसान उठाना पड़ा.

जयदत्ता बताते हैं कि महाराष्ट्र से तो उतना ही प्याज़ भेजा जा रहा है जितना बीते वर्षों में था, लेकिन आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्यों से प्याज़ की आवक में फर्क पड़ा है.

विदेश से प्याज़ मंगवाने की ज़रूरत है?

हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में सरकार अफ़ग़ानिस्तान, ईरान और मिस्र से प्याज़ आयात करेगी. जिससे इसकी कमी को पूरा कर लिया जाएगा और कीमतें एक बार फिर स्थिर हो जाएंगी.

सरकारी कंपनी एमएमटीसी (मेटल्स एंड मिनरल्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) लिमिटेड ने पाकिस्तान, मिस्र, चीन, अफ़ग़ानिस्तान और अन्य देशों से प्याज़ के आयात के लिए निविदा मंगाई थी जिस पर महाराष्ट्र के किसानों ने आपत्ति जताई थी.

इस संबंध में जयदत्ता होलकर कहते हैं, ”इससे कुछ भी फायदा नहीं होगा. अगर बाहर से प्याज़ मंगवाएंगे तो वह भी 30-35 रुपए प्रति किलो पड़ेगा, इसके बाद उसके ट्रांसपोर्ट का खर्चा भी आएगा तो दाम उतने ही हो जाएंगे जितने मंडियों में चल रहे हैं.”

जयदत्ता यहां तक कहते हैं कि सरकार की तरफ से प्याज़ की लागत के संबंध में जो आंकड़ें जारी किए जा रहे हैं, वह फ़ेक होते हैं.

सरकार में नीति की कमी

प्याज़ के दामों को काबू में करने के लिए सरकार की तरफ से भी कई कोशिशें हुई लेकिन यह नाकाफी साबित हो रही हैं. सरकार ने पिछले हफ़्ते प्याज़ का न्यूनतम निर्यात मूल्य यानी एमईपी 850 डॉलर प्रति टन तय किया था.

जयदत्ता होलकर कहते हैं, ”सरकारी एजेंसी नैफेड ने प्याज़ को सस्ते दामों पर खरीदकर स्टोर में रखा है. उन्हें उस प्याज़ को बाज़ार में उतारना चाहिए. इससे कीमतों पर कुछ असर ज़रूर पड़ेगा.”

वहीं जयदत्ता होलकर बताते हैं कि सरकार के पास प्याज़ की कीमतों से जुड़ी कभी कोई उचित नीति नहीं रही, जिसका असर प्याज़ किसानों और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ता है.

इसी तरह की बात सुरेंद्र बुद्धिराजा भी कहते हैं. उनका कहना है, ”सरकार ने कभी भी प्याज़ की कीमतों पर ध्यान नहीं दिया. जब कभी इसकी कीमत 3 या 4 रुपए पहुंच जाती है, तो किसान आंदोलन करते हैं. लेकिन सरकार इस ओर ध्यान ही नहीं देती.”

जयदत्ता होलकर कहते हैं, ”किसान कभी नहीं चाहता कि दाम बहुत नीचे या ऊपर हो जाएं. किसान हमेशा चाहता है कि उसकी फ़सल के दाम तय कर दिए जाएं और अगर वह उस तय कीमत से ऊपर नीचे होते हैं तो सरकार उसमें हस्तक्षेप करे.”

लगभग हर तरह की सब्ज़ी में पड़ने वाले प्याज़ ने अपनी कीमतें ऊंची कर खाने का ज़ायका थोड़ा बिगाड़ ज़रूर दिया है.

कुल मिलाकर कुछ ही दिनों में भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है और में प्याज़ के दामों का बढ़ना. एक मध्यमवर्गीय परिवार के घरेलू बजट के लिए चिंता का सबब हो सकता है.

जब जेल में कैदी ने देखे करोड़ों रुपए तो कर दिया ऐसा कारनामा, जांच में घिरे अफसर

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जेल में सजा काट रहे एक कैदी की नजर जब फाइलों में अटके करोड़ों रुपए पर पड़ी तो उसने हाथ साफ करने का षडयंत्र रचा। छत्तीसगढ़ की बिलासपुर जेल से सजा पूरी कर बाहर आते ही उसने कुछ जेल अधिकारियों से साठगांठ कर एक एनजीओ बनाई और सबने मिलकर शुरू कर दिया जेलों से करोड़ों रुपए का गबन।

लेकिन पिछले दिनों जब विजयानंद राज्य के जशपुर की जिला जेल के नए जेलर बनकर पहुंचे तब सामान्य जांच में उन्होंने पाया कि, सामान्यत: फाइलों में उलझी रहने वाली कैदियों के पारिश्रमिक की रकम बार बार किस जनार्दन वेलफेयर सोसाइटी के खाते मे जा रही है।

बता दें कि, जेल में कैदी जो काम करते हैं, उसका पारिश्रमिक उनको दिया जाता है किंतु, ब्रिटिश शासनकाल से चले आ रहे नियमों के अनुसार उनको नकद नहीं दी जाती बल्कि, सजा पूरी होने के बाद उनको दी जाती है वह भी लम्बी कानूनी प्रक्रिया के बाद।

अधिकांश कैदी तो जानकारी के अभाव में इस रकम पर ध्यान ही नहीं देते। परिणामस्वरूप वह रकम जेलों मे जमा है। खबरों के अनुसार हर पुरानी जेल के कागजों में ऐसी रकम करोड़ों में है, जिसे कोई लेने वाला ही नहीं। घनश्याम ने जेल अफसरों से मिलकर इसी रकम पर हाथ साफ किया।

मामले में जब यह पता किया गया कि जनार्दन वेलफेयर सोसाइटी ने और कहां – कहां इस तरह के और कारनामे किया है तो पता चला कि, बिलासपुर संभाग के कई जिलों में इस तरह की गड़बड़ हुई है।

खबर है कि, जशपुर, रायगढ़, कोरबा के अलावा जांजगीर के जेलों में भी लाखों की गड़बड़ी हुई है, जिसमें रायगढ़ में 13 लाख की गड़बड़ी पाए जाने के बाद 4 लाख की वापस वसूली भी हो गई।

इस मामले पर जेल के आला अधिकारी फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, उनका कहना है कि कार्यवाही होने वाली है, ये तो जब कार्यवाही होगी तभी हम कुछ कह पाएंगे। हालांकि इसके खुलासा के बाद छत्तीसगढ़ के कई और जेल संदेह के घेरे में आ गया हैं।

पुरुष यहां करते हैं 2 शादियां, पत्नी भी नहीं करती है ऐतराज…

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दुनिया के हर देश मे अलग अलग तरह की परंपराए निभाई जाती है, ऐसे में कुछ परंपराएं ऐसी भी हैं जिनके बारें में सुनकर आप अचंभिर रह सकते है। इस पोस्ट में हम आपको एक ऐसे ही गांव की परम्परा के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां हर आदमी को दो शादियां करनी पड़ती हैं। यह बिल्कुल सच हैं लेकिन यहां उनकी मजबूरी होती है जो बहुत हैरान करने वाली है।

हम बात कर रहे हैं राजस्थान के बाड़मेर जिले की, जहां के एक छोटे से गांव देरासर में एक पुरूष को दो शादियां करनी पड़ती हैं। ऐसा कहा जाता है इस गांव में 70 मुस्लिम परिवार रहते हैं, जहां इस छोटी सी आबादी वाले गांव में एक अजब ही तरह की परंपरा है। यहां कि परंपरा के अनुसार हर लड़के को दो शादी करनी पड़ती है, बताया जाता है इस गांव में पहली शादी से किसी को भी संतान नहीं होती है।

इसी कारण सभी को दो शादी करनी पड़ती है और ये प्रथा कई सालों से चली आ रही है। जानकारी के लिए बता दें कि गाँव के लोग कहते हैं कि, उन्हें दूसरी पत्नी से ही संतान सुख मिलता है। वहीं अपने पति की दूसरी शादी से पहली पत्नी को कोई आपत्ति नहीं होती है, यह तीनो साथ मिलकर रहते हैं।

भारत में इन 5 नौकरियों में मिलता है सबसे ज्यादा वेतन, नंबर 1 है सभी भारतीयों की पसंद

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5. अध्यापक

दोस्तों अध्यापक की नौकरी पांचवी ऐसी नौकरी है जिसमें सबसे ज्यादा वेतन मिलता है। दोस्तों अध्यापक की नौकरी एक प्रोफेशन, सम्मानजनक तथा जिम्मेदारी वाली नौकरी मानी जाती है। दोस्तों भारत में प्राइमरी स्कूल से लेकर प्रोफेसर तक भारत सरकार द्वारा बहुत ही अच्छा तनख्वाह देने के साथ-साथ कई ऐसी सुविधाएं उपलब्ध करवाती है जो अन्य नौकरियों में नहीं मिलती है। दोस्तों बताते हैं भारत में किसी भी लेक्चरर पद पर काम करने वाले अध्यापक की महीने की कमाई लगभग 40 से ₹50000 होती है।

4. सरकारी बैंक कर्मचारी

दोस्तों भारत में सरकारी बैंक में काम करने वाले कर्मचारियों को अच्छा खासा वेतन दिया जाता है। सरकारी बैंक की नौकरी को भारत की चौथी सबसे ज्यादा तनख्वाह वाली नौकरी मानी जाती है। दोस्तों जो लोग सरकारी बैंक में कर्मचारी के तौर पर कार्य करते हैं उनकी सालाना कमाई लगभग 5 से ₹1000000 के बीच होती है इसके अलावा उन्हें सरकार की तरफ से भत्ते और कहीं घूमने जाने की सुविधा भी दी जाती है।

3. डिफेंस

दोस्तों भारत जैसे देश में डिफेंस सेक्टर में काम करना एक सम्मानजनक कार्य होता है। दोस्तों डिफेंस सेक्टर में काम करके आप देश की सेवा कर सकते हैं। जिसमें आपको देश की सेवा करने के साथ-साथ आपको काफी अच्छा खासा तनख्वाह भी दिया जाता है। दोस्तों डिफेंस सेक्टर में काम करने वाले व्यक्तियों की महीने की कमाई लगभग 50 से ₹60000 होती है।

2. पब्लिक सेक्टर यूनिट

दोस्तों भारत में पब्लिक सेक्टर यूनिट में काम करने वाले लोगों को काफी अच्छा खासा तनख्वाह दिया जाता है पब्लिक सेक्टर यूनिट की नौकरी को भारत की दूसरी सबसे ज्यादा तनख्वाह वाली नौकरी मानी जाती है। पब्लिक सेक्टर यूनिट से जुड़ी नौकरियों में अच्छी तनखा देने के साथ-साथ अच्छा इनकम सुविधा पैकेज भी होता है। बता दें इस सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों की सालाना कमाई लगभग 8 से ₹1000000 के बीच होती है। इसके अलावा उन्हें सरकार द्वारा कई प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

1. इंडियन एडमिस्ट्रेशन सर्विसिस

दोस्तों यह भारत की सबसे ज्यादा तनख्वाह वाली नौकरी मानी जाती है। इस नौकरी के बारे में आप सभी लोग तो जानते ही होंगे। दोस्तों लगभग सभी भारतीय यही चाहते हैं कि उन्हें लगभग यही नौकरी मिल जाए। दोस्तों इस नौकरी को पाना लगभग हर भारतीय का सपना होता है। भारत में सरकारी सेक्टर से जुड़ी नौकरियों में इससे बड़ी नौकरी और कोई भी नहीं है दोस्तों यह नौकरी आपको जितना बड़ा पद देती है उतना ही ज्यादा सम्मान भी देती है क्योंकि इस पद का भारत में काफी ज्यादा महत्व है। दोस्तों इस पद तक पहुंचने के लिए व्यक्ति दिन-रात कड़ी मेहनत करता है तब जाकर वह इस मुकाम तक पहुंचता है। इस नौकरी में आपको सबसे ज्यादा तनख्वाह के साथ साथ सरकारी सुविधा भी दी जाती है।