बॉलीवुड की नामी एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा ने बड़े-बड़े एक्टर्स संग कई हिट फिल्मों में काम किया है। हाल ही में अक्षय कुमार के साथ उनकी फिल्म मिशन मंगल भी आई थी। सोनाक्षी फिल्मों में अपने काम को लेकर फैंस की तारीफ बटोरती रहती हैं लेकिन शुक्रवार को कुछ ऐसा हुआ कि सोनाक्षी को सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया जाने लगा। दरअसल, सोनाक्षी ने अमिताभ बच्चन के शो ‘कौन बनेगा करोड़पति-11’ में शिरकत की। लेकिन यहां एक बेहद आसान सवाल के जवाब में सोनाक्षी फंस गईं।सोनाक्षी सिन्हा केबीसी में बेहद आसान सवाल में फंसीं सोनाक्षी
शुक्रवार को केबीसी के स्पेशल शो करमवीर में कंटेस्टेंट थीं राजस्थान की रुमा देवी, रुमा 22 हजार महिलाओं को स्किल ट्रेनिंग दे चुकी हैं। रुमा देवी को साल 2018 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नारी शक्ति अवार्ड से सम्मानित किया था। बाकी लोगों की तरह सोनाक्षी भी रुमा के काम से बहुत प्रभावित हुईं और उन्होंने रुमा देवी के प्रोडक्ट की ब्रैंड अंबेसडर बनने का फैसला किया। इतना ही नहीं वे केबीसी में रुमा की मदद के लिए उनसे साथ भी आईं।
हनुमान ‘हनुमान किसके लिए संजीवनी बूटी लाए थे?’
लेकिन यहां पर एक सवाल का जवाब ना देने पर सोनाक्षी को ट्रोल किया जाने लगा। दरअसल, अमिताभ बच्चन ने सवाल पूछा था कि रामायण के अनुसार, हनुमान किसके लिए संजीवनी बूटी लाए थे? इस सवाल का जवाब देने के लिए चार विकल्प भी दिए गए। A. सुग्रीव B. लक्ष्मण C. सीता D. राम
एक्सपर्ट की मदद लेनी पड़ी एक्सपर्ट की मदद
इस सवाल का जवाब देने की बारी आई तो सोनाक्षी का रिएक्शन देखकर लोग हैरान रह गए। सोनाक्षी को इस सवाल का जवाब नहीं पता था। सोनाक्षी के इस रिएक्शन से अमिताभ बच्चन भी हैरान नजर आए। सोनाक्षी को आखिरकार एक्सपर्ट वाली लाइफलाइन का सहारा लेना पड़ा, जहां एक्सपर्ट श्वेता ने बताया कि सही जवाब सीता या राम नहीं बल्कि लक्ष्मण है। सोनाक्षी इस आसान सवाल का जवाब नहीं दे पाने के कारण सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हुईं।
अमिताभ बच्चन अमिताभ बच्चन भी थे नाराज
यहां तक कि अमिताभ बच्चन भी सोनाक्षी से नाराज नजर आए। सोनाक्षी के पिता का नाम शत्रुघ्न है, जबकि उनके चाचा के नाम राम, लक्ष्मण और भरत हैं। उनके घर का नाम भी रामायण है। यहां तक कि उनके भाइयों के नाम लव और कुश है। इसके बाद भी रामायण से जुड़े इस आसान से सवाल का जवाब ना देने पाने पर अमिताभ हैरान थे।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बाढ़ से लोगों का बुरा हाल। जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। गंगा और जमुना का जलस्तर बढ़ने से लोगों के घरों में कई फीट तक पानी भर गया है। परेशान लोग प्रशासन की मदद मांग रहे हैं। बड़े स्तर पर प्रयागराज में बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है। एनडीआरएफ की कई टीम लोंगों की मदद करने में जुटी हुई हैं।
प्रयागराज में बाढ़ के बीच एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। जब एक घर में कई फीट तक बाढ़ पानी भर गया तो घर में मौजूद दंपति इससे परेशान होने की बजाय मस्ती करते दिखा। पत्नी घर में घुसे बाढ़ के पानी में तैरने लगी। पत्नी की तैरने की तस्वीरें सामने आई हैं। यही नहीं पति भी बाढ़ के पानी में डुबकी लगाते दिख रहा है। कमरे में भरे बाढ़ के पानी में डुबकी लगाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
एक अन्य तस्वीर में कमरे में भरे बाढ़ के पानी में पति-पत्नी दोनों ही डुबकी लगाते दिख रहे हैं। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि बाढ़ आने से लोग परेशान हो जाते हैं। लेकिन इन तस्वीर को देखकर आप कह सकत हैं कि कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो मुसीबत में भी परेशान नहीं होते और उस पल को भी एन्जॉय करते हैं।
प्रयागराज में गंगा और यमुना नदी का पानी लगातार कहर बरपा रहा है। बाढ़ आने से हजारों लोग बेघर हो गए हैं। घरों में बाढ़ का पानी घुसने से लोगों का सामान बर्बाद हो रहा है। उधर, बढ़ से बेघर हुए हजारों लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से प्रभावित एक महिला संगठन राष्ट्र सेविका समिति (The Rashtra Sevika Samiti) ने एक सर्वे में दावा किया है कि देश में 64 प्रतिशत महिलाएं खुश रहती हैं. इस सर्वे को राजधानी दिल्ली में 24 सितंबर को जारी किया जाएगा. महिलाओं की स्थिति पर किया गया अब तक का सबसे बड़ा सर्वे बताया जा रहा है.
ये सर्वे इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि कुछ दिनों पहले ही थॉमसन रॉयटर्स ने भारत को महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देशों में माना था. इसमें 2007 से लेकर 2016 तक के आंकड़ों का हवाला दिया गया था. इसके अनुसार, महिलाओं के प्रति होने वाला अपराध इन सालों में 83 प्रतिशत तक बढ़ा है.
राष्ट्र सेविका समिति ने दो साल पहले देश के 574 जिलों में महिलाओं की स्थिति जानने के लिए सर्वे शुरू किया. राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख कार्यवाहिका (जनरल सेक्रेटरी) सीता आनंदनम ने कहा, ”हमने देश के कई जिलों में अलग अलग पैमानों पर ये सर्वे किया है. इसमें मुख्य रूप से भावनात्मक और उनकी खुशी से जुड़े सवाल थे.” उन्होंने कहा, हमारा सर्वे 574 जिलों में किया गया. इसमें सामने आया है कि 64 प्रतिशत महिलाएं खुश हैं. हमने इसमें वीएचपी, विद्या भारती, एबीवीपी और दूसरे संगठनों की मदद ली है.
वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम ने 2018 में कहा था, भारत को सभी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई कदम उठाने होंगे. ये बयान वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम की उस रिपोर्ट के बाद आया था, जिसमें भारत को जेंडर गैप रिपोर्ट में 108वां स्थान मिला था.
सीता आनंदनम ने कहा, हम अपने सर्वे के लिए किसी पश्चिमी देश या संगठन की रिपोर्ट पर निर्भर नहीं थे. हमारा ये सर्वे वालेंटियर के द्वारा किया गया है. हम उन क्षेत्रों में गए. जहां महिलाएं गरीब हैं और कम पढ़ी लिखी हैं. इसके बावजूद वह खुशी में जी रही हैं. …
‘हाउडी मोदी’ भारत ही नहीं पूरी दुनिया में वर्तमान समय में चर्चा का विषय बना हुआ हैं। ह्ययूस्टन में रविवार को आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम भारत के लिए गर्व का विषय हैं। विदेशी धरती पर पीएम मोदी के लिए आयोजित हुए कार्यक्रमों में अब तक का सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा। यह इसलिए भी खास हैं क्योंकि दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र अमेरिका और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के राष्ट्रध्यक्ष ट्रंप और मोदी एक मंच साक्षा करेंगे।
यहीं नहीं इसमें पीएम मोदी को सुनने के लिए अमेरिका के 48 राज्यों से प्रवासी भारतीय लोग एकत्र होंगे। मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। सबसे रोचक बात यह हैं कि इस कार्यक्रम में अमेरिका के अलग-अलग कोने में रहने वाले भारतीय समुदाय के संगठनों ने हाउडी मोदी कम्युनिटी बनाई और यही पूरा आयोजन अपने खर्च पर कर रही है। इसमें न तो भारत सरकार का कोई पैसा लगा है और न ही भाजपा ने पैसा दिया है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अमेरिका में मोदी कितने लोकप्रिय हैं। भारतीय समुदाय के अलावा अन्य अमेरिकियों के बीच भी मोदी खासे लोकप्रिय हैं।मोदी के लिए एकजुट हुए 600 भारतीय समुदाय
विदेशी धरती पर बसे प्रवासी भारतीयों का मोदी के प्रति प्यार ही हैं जो में यह वृहद कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा हैं। कुछ समय पहले ह्यूस्टन के लोगों को जब पता चला कि पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने न्यूयॉर्क आ रहे हैं तभी भारतीय अमेरिकी समुदाय ने पीएम मोदी को ह्यूसटन में रह रहे भारतीयों से मिलने के लिए आमंत्रित किया था।
वैसे तो भारतीय समुदाय अलग-अलग धर्म, जाति और भाषा के आधार पर बटा हुआ हैं लेकिन इस कार्यक्रम को सभी मिलकर आयोजित कर रहे हैं। ह्यूस्टन में भी 600 से ज्यादा संगठन इस कार्यक्रम के लिए साथ आए। ऐसे में भारतीय समुदाय में एकजुटता बढ़ी है। लोगों का आत्मविश्वास बढ़ा है कि उनके देश के प्रधानमंत्री उनके साथ खड़े हैं। अमेरिका हो यूरोप हो या मिडिल ईस्ट हो पीएम मोदी के भारतीय समुदायों को संबोधित करना और उन देशों के राष्ट्राध्यक्षों का इन कार्यक्रमों में शामिल होना ग्लोबल जियो पॉलिटिक्स में बड़ा असर दिखाता है। मोदी को भारत के रिफॉर्मर और ट्रांसफार्मर के रूप में देखा जाता है, जिनकी नीतियां भारत के साथ-साथ ह्यूस्टन के आर्थिक विकास के लिए भी अच्छी हैं। ऐसे में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए ह्यूस्टन शहर बेहद उत्साहित है।
अमेरिका के 48 राज्यों से प्रवासी भारतीय ह्यूस्टन पहुंचेंगे 48 राज्यों से प्रवासी भारतीय ह्यूस्टन पहुंचेंगे
टेक्सास इंडिया फोरम के प्रवक्ता गीतेश देसाई ने मीडिया को दी गयी जानकारी के अनुसार टेक्सास फोरम इंडिया के नेतृत्व में अमेरिका के 33 राज्यों के 600 से ज्यादा भारतीय समुदाय के संगठन संयुक्त रुप से यह कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। कार्यक्रम की घोषणा के चंद दिनों के भीतर ही अमेरिका भारतीय समुदाय के 50 हजार लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाए। जिसमें अमेरिका के 48 राज्यों से प्रवासी भारतीय ह्यूस्टन पहुंचेंगे ।
अयोजकों के अनुसार इस एतिहासिक कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए 1100 वॉलेंटियर्स पूरे जोश और उत्साह के साथ दिन रात तैयारियों को अंतिम रुप देने में जुटे हुए हैं। पिछले दोनों कार्यक्रमों के मुकाबले यह बहुत बड़ा आयोजन है। 2014 में मोदी ने न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वेयर गार्डन और 2016 में सेन जोस सिलिकॉन वैली में हुए प्रोग्राम में करीब 18 हजार लोगों को संबोधित किया था। ह्यूस्टन में इनसे तीन गुना ज्यादा भीड़ होगी। पिछले कार्यक्रम इनडोर स्टेडियम में हुए थे। इस बार प्रोग्राम के लिए आउटडोर फुटबॉल स्टेडियम चुना गया है। फिर इस बार खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प इसमें आ रहे हैं, इसलिए यह अपने आप में नायाब कार्यक्रम होगा।
इसलिए ह्यूस्टन में किया जा रहा आयोजन
अमेरिका के अन्य प्रांतों की तुलना में टेक्सास प्रांत में प्रवासी भारतीयों की तादाद अच्छी है। टेक्सास में भारतीय समुदाय के 5 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। इसमें अकेले ह्यूस्टन में 1.5 लाख से ज्यादा प्रवासी भारतीय हैं। ह्यूस्टन को ऊर्जा की अंतरराष्ट्रीय राजधानी कहा जाता है। यहां दुनिया का सबसे बड़ा मेडिकल सेंटर है। यहां नासा का हेडक्वार्टर भी यहीं है। ये कुछ बातें हैं जो तेज विकास और आर्थिक तरक्की के लिए भारत के हित में हो सकती हैं। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी ने ह्यूस्टन आने का आमंत्रण स्वीकार किया।
काउंसलेट जनरल ऑफ इंडिया ह्यूस्टन के मुताबिक, टेक्सास की जीडीपी 1.6 ट्रिलियन यूएस डॉलर है। अमेरिका का यह राज्य अगर एक देश होता तो यह दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होती। अमेरिका की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में से 92 कंपनियां इसी राज्य में हैं। वहीं, विश्व की फॉर्च्यून 500 कंपनियों में से 12 यहीं की हैं। हेल्थकेयर, रिन्यूएबल एनर्जी, हाई टेक्नोलॉजी, डिफेंस/एयरोस्पेस और फाइनेंशियल सर्विस के क्षेत्र में अमेरिका का यह राज्य बेहद आगे है। भारत-यूएस के कुल व्यापार का 10% अकेले इसी राज्य से होता है। टेक्सास प्रतिदिन 30 लाख बैरल से ज्यादा ऑइल का उत्पादन करता है, जो कि कुल यूएस के तेल उत्पादन का 50% और विश्व के कुल तेल उत्पादन का 5% है। अगर टेक्सास एक देश होता तो यह 9वां सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश होता।
राज्य में 25 हजार से ज्यादा भारतीय छात्र हैं। राज्य का ह्यूस्टन शहर का चौथा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर भारत है। 2018 में भारत का ह्यूस्टन से व्यापार करीब 4.3 बिलियन डॉलर रहा। भारत की तीन सबसे बड़ी तेल और गैस उत्पादक कंपनियां ऑइल इंडिया लिमिटेड, गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) और ओएनजीसी लिमिटेड के हेडक्वार्टर ह्यूस्टन में हैं। टेक्सास राज्य में सबसे ज्यादा भारतीय छात्र यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन में ही पढ़ते हैं।
ट्रंप के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हैं यह आयोजन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए इस कार्यक्रम का आमंत्रण स्वीकार करने के लिए कई कारण हैं। सबसे पहले आपको बता दें कि 2020 में अमेरिका में राष्ट्रपति के चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में कोई भी बड़ा नेता ऐसा मौका कैसे गंवा सकता हैं। ट्रंप के लिए टेक्सास बहुत महत्वपूर्ण हैं। 1980 से लेकर अब तक टेक्सास रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ रहा लेकिन 2016 में जब डोनाल्ड ट्रंप जब चुनाव लड़ रहे थे तब उस समय रिपब्लिकन प्राइमरीज में अपने विरोधी के मुकाबले कम वोट मिले थे। वह इस मौके पर कोशिश करेंगे कि मोदी के लिए जुटे अमेकिन भारतीयों के बीच रिपब्लिकन पार्टी के गढ़ में अपना वोट प्रतिशत सुधारे।
यहां प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक नेता के तौर पर छवि और दूसरा यहां का भारतीय समुदाय, जो आज बड़ी संख्या में अर्थव्यवस्था से लेकर हर क्षेत्र में योगदान दे रहा है। यहां भारतीय समुदाय के लोग डॉक्टर, इंजीनियर और साइंटिस्ट तो हैं ही, साथ ही गूगल, माइक्रोसॉफ्ट समेत कई ऐसी छोटी-बड़ी कंपनियां हैं, जिनके सीईओ भी भारतवंशी हैं। राजनीति और प्रशासनिक सेवाओं में भी भारतीयों की अच्छी तादाद है। ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन में कई भारतीय थे। ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन में भी कई भारतीय हैं।
आज भारतीय कंपनियां यहां हजारों की संख्या में रोजगार पैदा कर रही हैं। यहां करीब 2 लाख भारतीय छात्र हैं। भारतीयों की प्रति व्यक्ति आय भी आम अमेरिकियों के मुकाबले दोगुना है। ऐसे में भारतीयों को यहां बड़े सम्मान की नजर से देखा जाता है। यही कुछ कारण रहे हैं जिनके चलते ट्रम्प भी इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं।
हाल ही में फिल्मी अभिनेत्री कैटरीना कैफ की हमशक्ल अलीना राय की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बटोरी थीं, Tik-Tok स्टार अलीना की तस्वीरों को देखकर हर कोई हैरान था कि आखिर उनमें और कैटरीना में इतनी समानता कैसे है, फिलहाल इस सवाल का जवाब लोगों को मिलता, इससे पहले ही एक और स्टार की हमशक्ल ने सबको हैरान कर दिया है और वो स्टार है करीना कपूर।बॉलीवुड करीना कपूर की हमशक्ल
बॉलीवुड की बेबो की हमशक्ल भी एक टिकटॉक स्टार हैं, जिनका नाम शनाया सचदेवा है और जिनकी उम्र मात्र 20 साल है, वो दिल्ली की रहने वाली हैं, शनाया करीना के गानों और उनकी फिल्मों के डायलॉग्स पर ही एक्टिंग करती दिखती हैं और उनका ड्रेसिंग और हेयर स्टाइल काफी हद तक करीना जैसा ही है।
करीना कपूर सोशल मीडिया पर वायरल हुईं शनाया की तस्वीरें और वीडियो
शनाया ने करीना की फिल्में जब वी मेट, कभी खुशी कभी गम, मैं प्रेम की दीवानी हूं जैसी फिल्मों के डायलॉग्स पर एक्ट किया है। शनाया की ये तस्वीरें इस वक्त सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, लोगों ने उनकी जमकर तारीफ की है और उन्हें बॉलीवुड में किस्मत आजमाने की सलाह भी दी है तो वहीं कुछ लोग उनके वजन पर टिप्पणी कर रहे हैं।
विराट कोहली के भी हमशक्ल हैं गौरव अरोड़ा अनुष्का शर्मा की भी हमशक्ल मिली थी…
ऐसा पहली बार नही है जब किसी बॉलीवुड एक्ट्रेस की हमशक्ल की फोटोज़ सोशल मीडिया पर छाई हों, अभी हाल ही में एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा की भी मिलती-जुलती शक्ल की लड़की पॉपुलर हुई थी. उसका नाम था जुलिया रॉबर्ट्स था , जो कि खुद अमेरिकन सिंगर हैं।
विराट कोहली के भी हमशक्ल हैं गौरव अरोड़ा
यही नहीं अनुष्का शर्मा के पति और टीम इंडिया के कैप्टन विराट कोहली के हमशक्ल गौरव अरोड़ा भी आज चर्चित हस्ती बन चुके हैं, उन्हें कोहली के हमशक्ल होने का फायदा भी मिल गया है, वो फिल्म जोया फैक्टर में कप्तान कोहली का ही रोल प्ले कर रहे हैं।
देश में आर्थिक मंदी को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है. पार्टी बिहार में इस मुद्दे पर आंदोलन करने की तैयारी में है. 10 से 25 अक्टूबर के बीच बिहार में राजधानी पटना सहित अन्य स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर जनता को मंदी का दुष्परिणाम बताने की तैयारी है. कांग्रेस आर्थिक मुद्दों पर बीजेपी को घेरने के लिए खास रणनीति बनाने में जुटी है.
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने बिहार में दो चरणों में आर्थिक मंदी को लेकर जनता के बीच मुहिम चलाने की तैयारी की है. 10 से 15 अक्टूबर के बीच पहले जनता के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. इसके बाद 25 अक्टूबर तक जिला, तहसील और निचले स्तर पर धरना-प्रदर्शन कर आंदोलन खड़ा करने की कोशिश होगी. यह आंदोलन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश पर होगा. पार्टी ने इसे लेकर निर्देश भी कार्यकर्ताओं को जारी कर दिया है.
असरदार हो सकता है मुद्दा
कांग्रेस सूत्रों का मानना है कि प्रचंड बहुमत से दोबारा सत्ता में आई नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने के अब तक सारे मुद्दे विफल साबित हुए हैं. मगर अर्थव्यवस्था ऐसा विषय है, जिससे देश की जनता प्रभावित होती है, क्योंकि इससे लगातार नौकरियां जा रहीं हैं.
ऑटो सेक्टर में जोरदार मंदी देखी जा रही है. मारुति जैसी कई बड़ी कंपनियों ने मांग कम होने पर सप्ताह में कई दिन उत्पादन बंद रखा. ऐसे में वित्त मंत्री भी कंपनियों को राहत देने के लिए आगे आईं लेकिन इसका कोई खास असर नहीं देखा गया. ऐसे में कांग्रेस का मानना है कि जनता के बीच जाकर आर्थिक मंदी के दुष्परिणाम बताने से सरकार की घेराबंदी की जा सकती है.
गुजरात में ट्रैफिक नियम का उलंघन करने वाले चालक जुर्माना बढ़ जाने के बाद भी बाज नहीं आ रहे। यहां सूरत शहर के चौक बाजार इलाके में पुलिस ने जब एक ऑटो चालक को रोका, तो उसके अंदर का दृश्य देखकर चौंक गई। उस ऑटो में तीन सीटों पर 20 मासूम बैठा रखे थे। सिपाही ने बिना देर किए बाकायदा एक वीडियो बनाया और एक-एक कर बच्चों को गिना। उसके बाद इस घटना की शहर भर में चर्चा होने लगी। सोशल साइट्स पर वीडियो देखकर यूजर्स ने कहा, ये तो खिलवाड़ हो रहा है। ऑटो वाले स्कूली बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंसकर ले जा रहे हैं। कोई हादसा हो जाए तो क्या होगा?
एक टैंपो में भरे थे 20 बच्चे, सिर्फ 500 रुपए का जुर्माना लगा
वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक ऑटो के अंदर बच्चे किस कदर भरे हुए हैं। पुलिस ने उन्हें गिन-गिन कर बाहर निकाला है। यह घटना गुरुवार दोपहर की है, जब ट्रैफिक पुलिस की जांच के दौरान यह ऑटो मेमन नामक स्कूल के छात्रों को बैठाकर ले जा रहा था। जिसके बाद मौके पर मौजूद एएसआई अलाउद्दीन ने उसे रोका और जांच की। जिसमें बैठे बच्चों को देखकर वो चौंक गए। अलाउद्दीन ने ऑटो चालक के खिलाफ मामूली दंड लगाया। महज 500 रुपए का जुर्माना लेकर उस ऑटो चालक को चले जाने दिया।
सरकार ने जुर्माने से छूट दी
उधर, देश में लागू हो चुके संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट के जुर्माने को गुजरात में अभी पूरी तरह अमल में नहीं लाया गया है। इस कानून के दो प्रावधानों में राज्य सरकार ने बुधवार को ढील दे दी है। नए मोटर वाहन कानून के तहत पहली बार बिना हेलमेट पकड़े जाने पर 500 तथा दूसरी बार 1000 रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। पुराने कानून के तहत इसके लिए सिर्फ 100 रुपये जुर्माना देना पड़ता था।
15 अक्टूबर तक कोई कार्रवाई नहीं
सरकार ने हेलमेट व पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट को लेकर वाहन चालकों को हो रही परेशानी के मद्देनजर 15 अक्टूबर तक छूट देने का फैसला किया है। यानी, इस अवधि में हेलमेट न पहनने या पीयूसी सर्टिफिकेट नहीं होने पर कोई जुर्माना नहीं वसूला जाएगा। लोगों की सुविधा के लिए राज्य में 900 पीयूसी केंद्र भी खोले जा रहे हैं।
राज्य में तीन करोड़ वाहन पंजीकृत
परिवहन मंत्री आरसी फलदू ने पिछले दिनों बताया कि राज्य में करीब तीन करोड़ वाहन पंजीकृत हैं। पीयूसी सेंटर की संख्या काफी कम है। इसी प्रकार बाजार में आईएसआई मार्का वाले हेलमेट भी उपलब्ध नहीं हैं। इन परेशानियों देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है।
आईएसआई मार्का वाला एक हेलमेट देने को कहा
उन्होंने यह भी कहा कि सभी डीलरों को आदेश जारी किया जाएगा कि वे दोपहिया वाहनों के साथ अनिवार्य रूप से मुफ्त में आईएसआई मार्का वाला एक हेलमेट जरूर दें।
नींबू प्रजाति के फल चकोतरा में किडनी स्टोन से बचाव का राज छुपा हुआ है। इसके अर्क से न केवल स्टोन की वृृद्धि रोकी जा सकेगी बल्कि उसे गलाया भी जा सकता है। इस पर किए गए शोध में यह बात सामने आई है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, हाइड्रो ऑक्सीसिटरेट (एचसीए) किडनी स्टोन के मुख्य घटक कैल्सियम ऑक्सलेट क्रिस्टल को गला सकता है। शोध में एचसीए से किडनी स्टोन के रोकथाम की पूरी संभावना दिखी है। इसके नतीजे से 30 साल में पहली बार कैल्सियम ऑक्सलेट क्रिस्टल के इलाज की नई राह खुल सकती है।
अमेरिका की ढ्ढह्यूस्टन यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर जेफरी रिमेर ने कहा कि किडनी में मिनरल जमा होने से स्टोन बनते हैं और ये आकार में छोटे और सख्त होते हैं। इसका खतरा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मोटापे से बढ़ सकता है। इस शोध का प्रकाशन जर्नल नेचर में किया गया है।
शोधकर्ताओं ने मिर्गी की बीमारी को पनपने से रोकने के लिए एक सफलता हासिल की है। उनकी इस कामयाबी के बाद मिर्गी की बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकेगा। शोधकर्ताओं ने न्यूरोप्रोटेक्टिव कंपाउंड को विकसित करने में सफलता हासिल कर ली है। इस कंपाउंड की मदद से मनुष्यों में मिर्गी को पनपने से रोका जा सकता है। बता दे कि इस बीमारी में मनुष्य के नर्व सेल की कार्यप्रणाली काम करना बंद कर देती है। जिसके बाद मनुष्य को बार-बार मिर्गी के दौर पड़ने लगते हैं।
यह शोध अमेरिका के लुसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने की है। यह न्यूरोप्रोटेक्टिव कंपाउंड न्यूरो इन्फ्लेमेटरी सिग्ननिलंग रिसेप्टर को बंद कर देता है, जिसकी वजह से डेंड्रिक स्पाइंस के संरक्षण में मदद मिली। पत्रिका ‘साइंटिफिक’ में प्रकाशित रिपोर्ट में बाजान बताते हैं कि मिर्गी के लक्षणों के आधार पर दौरे रोकने की बहुत सी दवाएं हैं, लेकिन मिर्गी की बीमारी रोकने की नहीं। यह कंपाउंड मिर्गी के विकास की प्रक्रिया को रोकता है, जिससे इसकी उपयोगिता बढ़ जाती है। ऐसे में यह उन मरीजों के इलाज में ज्यादा कारगर होगा जो मिर्गी के खतरे की तरफ बढ़ रहे हैं।
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पिछले साल मंगोलिया दौरे के दौरान कहा था कि भारत और मंगोलिया के बीच अनूठी भागीदारी है, जो सुविधा के आधार पर न होकर विश्वास एवं आध्यात्मिक शक्ति से जुड़ा है। बौद्ध धर्म के जरिए आध्यात्मिक जुड़ाव ने आपसी संबंधों को मजबूती दी।
शुक्रवार को इस आध्यात्मिक जुड़ाव को तब और मजबूती मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंगोलियाई राष्ट्रपति खल्टमागीन बाटुल्गा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नई दिल्ली से 3600 किमी दूर उलानबटोर के गंडान मठ में भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा का अनावरण किया।
मंगोलिया के राष्ट्रपति द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक सहित कई मुद्दों पर चर्चा करने के लिए गुरुवार को भारत की पांच दिवसीय यात्रा पर पहुंचे। शुक्रवार को उन्होंने पीएम मोदी से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भगवान बुद्ध की प्रतिमा का अनावरण किया।
भारत के साथ हमारे सदियों पुराने संबंध: बाटुल्गा
इस दौरे को लेकर राष्ट्रपति खल्टमागीन बाटुल्गा ने कहा, ‘मैं भारत की राजकीय यात्रा पर आकर बहुत खुश हूं। भारत के साथ हमारे सदियों पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। 1992 में मंगोलिया ने पहला लोकतांत्रिक संविधान अपनाया और 1994 में मंगोलिया के पहले निर्वाचित राष्ट्रपति ने भारत की पहली राजकीय यात्रा की। इसके बाद साल 2009 में मंगोलिया के राष्ट्रपति त्सखिआगिन एल्बेगडोर भारत यात्रा पर आए। उसके दस साल बाद मैं भारत की राजकीय यात्रा पर हूं। इससे पहले मई 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक आधिकारिक यात्रा पर आए थे।’
राष्ट्रपति खल्टमागीन बाटुल्गा का इससे पहले राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया। उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। इसके अलावा उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से भी मिले और राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे राष्ट्रपति खल्टमागीन बाटुल्गा
अपने इस दौरे पर राष्ट्रपति खल्टमागीन बाटुल्गा ऊर्जा, आपदा प्रबंधन, रक्षा, सुरक्षा, संस्कृति और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में चल रहे सहयोग की भी समीक्षा करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रपति बातुल्गा नई दिल्ली में भारत-मंगोलिया व्यापार मंच में भी भाग लेंगे। यात्रा के दौरान मंगोलियाई राष्ट्रपति आगरा का दौरा करेंगे, जहां वे एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। वह कर्नाटक जाने से पहले बोधगया भी जाएंगे, जहां राज्यपाल वजुभाई वाला से बातचीत करेंगे और आखिरी दिन यानी 23 सितंबर को एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।
2015 में मंगोलिया जा चुके हैं पीएम मोदी
पीएम मोदी सत्ता में आने के एक साल बाद 2015 में मंगोलिया यात्रा पर गए थे। इस यात्रा से दोनों देशों के संबंधों में नया जोश देखने को मिला था। इस दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने के साथ भारत ने ढांचागत क्षेत्र के विकास के लिए मंगोलिया को एक बिलियन डॉलर का क्रेडिट लाइन भी दिया। उसके बाद जून 2017 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में विश्व आर्थिक मंच के सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री मोदी और मंगोलिया के प्रधानमंत्री की मुलाकात हुई थी।
रूस के व्लादिवोस्तोक में भी हुई मुलाकात
इसी सितंबर महीने की शुरुआत में रूस के व्लादिवोस्तोक में प्रधानमंत्री मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति खल्टमागीन बाटुल्गा की मुलाकात हुई थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं लोगों के आपसी संबंधों को मजबूत करने समेत द्विपक्षीय हित के विभिन्न मामलों पर बातचीत की। खासतौर पर मंगोलिया में एक बड़ी तेल रिफाइनरी के निर्माण के लिए भारत द्वारा मुहैया कराई जा रही सहायता पर विशेष चर्चा हुई। दोनों नेताओं की मुलाकात रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में आयोजित पूर्वी आर्थिक मंच (ईईएफ) की पांचवीं बैठक के इतर हुई थी।
मंगोलिया से ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संबध
भारत और मंगोलिया के सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबध रहे हैं। 1955 में भारत तत्कालीन समाजवादी ब्लाक से अलग पहला देश था, जिसने मंगोलिया के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए। भारत ने संयुक्त राष्ट्र और नैम की सदस्यता हासिल करने में मंगोलिया को समर्थन दिया था।
2015 में भारत और मंगोलिया के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मनाई गई। रक्षा सहयोग के लिए भारत-मंगोलिया का संयुक्त कार्यदल स्थापित है, जो प्रत्येक वर्ष बैठक आयोजित करता है। भारत सरकार उच्च शिक्षा में हर साल मंगोलियाई नागरिकों को 40 छात्रवृत्तियां प्रदान करता है। भारत-मंगोलिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘नोमडीक ऐलीफेंट’ हर साल आयोजित किया जाता है, जिसकी शुरुआत 2004 में हुई थी। दिलचस्प बात यह है कि मंगोलिया में हिंदी फिल्में काफी लोकप्रिय हैं। वहां प्रसिद्ध धारावाहिक ‘महाभारत’ का मंगोलिया भाषा में डब किया गया और उलानबटोर टीवी पर प्रसारित किया गया।