मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल आज 19 सितम्बर को भिलाई में स्कूल शिक्षा विभाग और लैग्वेज लर्निंग फांउडेशन द्वारा आयोजित ‘नींव और भाषा पिटारा’ कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री कार्यक्रम में अटल टिंकरिंग लैब और सोया मिल्क वितरण का शुभारंभ भी करेंगे। इसके साथ ही नींव कार्यक्रम संबंधित सामग्री और भाषा पिटारा का विमोचन करेंगे तथा नींव कार्यक्रम की कक्षा का अवलोकन करेंगे।
मुख्यमंत्री श्री बघेल कार्यक्रम के दौरान प्राथमिक शाला के बच्चों को छत्तीसगढ़ी में भौंरा नामक पाठ पढ़ाएंगे और बच्चों के साथ भोंरा चलाने की गतिविधि और किसका भौंरा ज्यादा देर तक टिक पाता है यह सब करते हुए भाषा और गणित को एक साथ कैसे पढ़ाया जाता है इसका एक आदर्श पाठ बच्चों के साथ रोचक तरीके से प्रस्तुत करेंगे। वे अटल टिंकरिंग लैब का उद्घाटन के साथ ही वहां बच्चों से विज्ञान शिक्षण के बारे में बात करेंगे और उन्हें विभिन्न प्रयोग करते हुए देखेंगे और समझने का प्रयास करेंगे। इस दौरान राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में चयनित बच्चों के साथ चर्चा भी करेंगे। इस मौके पर राज्य में विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कबाड़ से जुगाड़ मॉडल का प्रदर्शन और जिले में गणित लैब के लिए तैयार विभिन्न सामग्री का प्रदर्शन भी किया जाएगा।
भाषा पिटारा:- भाषा एवं साक्षरता संबंधित चुनौतियों के समाधान और गुणवत्तापरक विकास हेतु एल. एल. एफ द्वारा ‘भाषा पिटारा’ तैयार किया गया है। इस संग्रह में प्रारंभिक भाषा शिक्षण से जुड़े कुल 10 मुख्य विषयों (मौखिक भाषा विकास, ध्वनि जागरुकता, उभरती साक्षरता, शब्द भंडार, डिकोडिंग, पठन और उसकी रणनीतियाँ, पढ़ कर समझना, लेखन सीखना और अकादमिक सहयोग) पर 48 हैण्ड आउट और 4 गतिविधि संग्रह (मौखिक भाषा विकास की गतिविधियां, ध्वनि जागरुकता की गतिविधियां, शब्द भंडार के विकास की गतिविधियाँ, डिकोडिंग सिखाने की गतिविधियां) हैं।
‘नींव’ः- अधिगम संवर्धन कार्यक्रमः- यह कार्यक्रम राजीव गाँधी शिक्षा मिशन एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् रायपुर द्वारा लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन के साथ मिलकर दुर्ग जिले के दो ब्लॉक (पाटन और दुर्ग) के 200 स्कूलों में शुरू किया है, जिससे इस वर्ष के अंत तक 4 हजार बच्चे लाभान्वित होंगे। यह कार्यक्रम वर्ष 2021 तक दुर्ग जिले के लगभग सभी स्कूलों में संचालित किया जाना है, जिससे लगभग 20 हजार बच्चों को लाभ मिलेेगा। कार्यक्रम से बच्चों के हिंदी भाषा विकास और साक्षरता कौशलों में विशेष सुधार होगा। कक्षा 2 के अंत तक बच्चे उभरते हुए ऐसे पाठक के तौर पर आएँगे जो अपने स्तर के पाठ प्रवाहपूर्वक पढ़ सकेंगे और अपने अनुभव के आधार पर उससे अर्थ निर्माण कर पाएंगे। साथ ही अपने अनुभव, विचार, कल्पना, और भाव को वाक्यों में लिखने में सक्षम होंगे।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल 19 सितंबर को सुबह 11.30 बजे रायपुर से कार द्वारा प्रस्थान कर दोपहर 12 बजे वैशाली नगर भिलाई पहुंचेंगे और वहां शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में नीव और भाषा पिटारा कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।
वॉशिंगटन में चल रहे भारत और अमेरिका के सेनाओं के बीच चल रहे युद्ध अभ्यास में एक रोमांचित करने वाला क्षण सामने आया है। युद्धाभ्यास के दौरान अमेरिकी सेना के बैंड ने राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ की धुन निकाली। यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रहा है।
बता दें कि भारतीय और अमेरिकी सेना के बीच यह युद्धाभ्यास 5 सितंबर को शुरू हआ था। ये युद्धाभ्यास भारत और अमरिका के बीच संयुक्त रूप से चलने वाले सबसे बड़े सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा निगम के प्रयासों में से एक है। दोनों देशों के बीच वैकल्पिक रूप से आयोजित संयुक्त अभ्यास का यह 15 वां संस्करण है।
ये युद्धाभ्यास के जरिए ब्रिगेड स्तर पर संयुक्त योजना के साथ दोनों देशों के सशस्त्र बलों को बटालियन स्तर पर एकीकृत तरीके से प्रशिक्षित करने का अवसर देता है। इस युद्धाभ्यास के एक खास मकसद दोनों देशों की सेनाओं को एक दूसरे के तौर-तरीकों, संगठनात्मक संरचना और युद्धे के दौरान की प्रक्रिया से रूबरू करवाना है, ताकि दोनों देशों की सेनाएं दुनिया के किसी भी हिस्से में बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकें।
फेस्टिव सीजन को देखते हुए Xiaomi ने भारतीय मार्केट में 65-inch Mi TV 4X को लॉन्च कर दिया है। भारत में यह अभी तक का साइज के मामले में शाओमी का सबसे बड़ा टीवी है। कंपनी ने इस टीवी को बेंगलुरु में आयोजित Smarter Living 2020 इवेंट में लॉन्च किया है।
फीचर्स Mi TV 65 इंच टीवी को 4K HDR पैनल के साथ लॉन्च किया गया है। इनमें 10 बिट डिस्प्ले है। शाओमी इस टीवी में MEMC (Motion Estimation/Motion Compensation) टेक्नोलॉजी दे रही है, जिसे रियल्टी फ्लो भी कहा जाता है। TV का साउंड आउटपुट 20W है और Dolby+DTS-HD audio output सपोर्ट करता है।Mi TV 4X सीरीज में आपको विविज पिक्चर इंजन, इन हाउस इमेज प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी मिलती है। दूसरे Mi TVs की तरह ही यह भी एंड्रॉइड पर ऑपरेट होते है जो PatchWall UI के साथ आते हैं। इस बार आपको टीवी में अमेजन प्राइम वीडियो और नेटफ्लिक्स का नेटिव सपोर्ट भी मिल रहा है। टीवी में quad-core प्रोसेसर के साथ 2 जीबी की रैम और 16जीबी की इंटरनल स्टोरेज है। टीवी में तीन HDMI, one AV port, two USB ports, one Ethernet और S/PDIF port का ऑप्शन भी मौजूद है।
कीमत शाओमी के 65-inch 4K UHD Smart TV को 54,999 रुपये की कीमत में ख़रीदा जा सकता है
अमेरिका (America) में 22 सितंबर को होने वाले Howdy Modi इवेंट पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं. अमेरिका में ये प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) का अब तक का सबसे बड़ा प्रोग्राम है. पूरी दुनिया में मोदी के इस प्रोग्राम के पहले ही हलचल बढ़ गई है. देश से लेकर विदेशों तक में Howdy Modi प्रोग्राम को लेकर चर्चा है.
Howdy Modi प्रोग्राम की बौखलाहट में पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री मोदी के विमान के लिए अपना एयरस्पेस देने के मना कर दिया है. शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी को इस प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका रवाना होना है. इसके लिए उन्हें पाकिस्तान के एयरस्पेस से होकर गुजरना था लेकिन पाकिस्तान ने उनके विमान के लिए अपना एयरस्पेस देने से मना कर दिया.
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के Howdy Modi प्रोग्राम पर तंज कसा है. ट्विटर पर प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रोग्राम का मजाक बनाते हुए राहुल गांधी ने लिखा है- Howdy economy doin, Mr. MOdi? यानी देश की अर्थव्यवस्था की हालत क्या है, मिस्टर मोदी?
22 सितंबर को अमेरिका के ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री मोदी का सबसे बड़ा कार्यक्रम रखा गया है. इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उनके साथ होंगे. इस प्रोग्राम में अमेरिका में रहने वाले करीब 50 हजार भारतीय हिस्सा ले रहे हैं. हाउडी मोदी अमेरिका में पोप के बाद किसी विदेशी नेता का सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा.
इस प्रोग्राम को लेकर लोगों में इतनी उत्सुकता है कि 50 हजार की दर्शकसंख्या पहले से ही बुक हो चुकी है. बताया जा रहा है कि 10 हजार की वेटिंग लिस्ट चल रही है. साल 2019 का ये सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा. अमेरिकी भारतीयों के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन टेक्सास इंडिया फोरम कर रहा है. व्हाइट हाउस ने इस प्रोग्राम में डोनाल्ड ट्रंप के भी शामिल होने की जानकारी दी है. ये अमेरिका और भारत की दोस्ती के लिहाज से ऐतिहासिक मौका होने वाला है.
ये पहला मौका होगा जब पीएम मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में किसी एक जगह पर मौजूद इतनी बड़ी संख्या में भारतीयों को संबोधित करेंगे. ट्रंप के अलावा इस प्रोग्राम में यूएस कांग्रेस के सदस्य, गवर्नर्स का एक डेलिगेशन और कई मेयर्स भी हिस्सा लेंगे.
22 सितंबर को अमेरिका के टेक्सास राज्य में ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में हाउडी मोदी प्रोग्राम होगा. अमेरिका के स्थानीय टाइम के मुताबिक सुबह 10 बजे कार्यक्रम की शुरुआत होगी, जो दोपहर 1 बजे तक चलेगा. व्हाइट हाउस ने बताया है कि मोदी और ट्रंप का जॉइंट स्टेटमेंट दोनों देशों के रिश्ते मजूबत करेगा. ये वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच उर्जा और व्यापार के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम साबित होने वाला है. अमेरिका में भारतीय राजदूत हर्ष वर्धन ने कहा है कि ट्रंप के शामिल होने की वजह से ये प्रोग्राम ऐतिहासिक होगा.
Howdy Modi का मतलब क्या है?
Howdy शब्द How do you do यानी आप कैसे हैं, का छोटा रूप है. अमेरिका के दक्षिणी राज्यों में इस शब्द को आम बोलचाल की भाषा में इस्तेमाल करते हैं. इस तरह Howdy Modi का मतलब है How do yo do Modi यानी आप कैसे हैं मोदीजी? आयोजनकर्ताओं का कहना है कि हाउडी मोदी में करीब 1 हजार वोलंटियर और टेक्सास के करीब 650 वेलकम पार्टनर प्रोग्राम को कामयाब बनाने के लिए काम करेंगे.
इतना महत्वपूर्ण क्यों है Howdy Modi प्रोग्राम
हाउडी मोदी प्रोग्राम अमेरिका और भारत के रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है. खासकर व्यापार और उर्जा के क्षेत्र में. यहां तेल और गैस कंपनियों की भरमार है. बताया जा रहा है कि भारत में तेल खनन की संभावना को लेकर पीएम मोदी की कुछ बड़ी कंपनियों के साथ बैठक कर सकते हैं.
इस प्रोग्राम में सैकड़ों नामचीन चेहरे और उद्योग जगत की कुछ मशहूर हस्तियां हिस्सा ले रही हैं. अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को संबोधित करने वाला पीएम मोदी का ये तीसरा सबसे बड़ा प्रोग्राम है. इसके पहले उन्होंने 2014 में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्कॉयर और 2016 में सिलिकॉन वैली में ऐसे ही दो बड़े प्रोग्राम कर चुके हैं.
डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन (DCC) आज भारत में 5G को रोलआउट करने के रोडमैप पर चर्चा करेगा, साथ ही इस साल एयरवेव्स की नीलामी पर भी फैसला करेगा. पैनल सार्वजनिक वाईफाई हॉटस्पॉट को लागू करने की सरकार की योजना की भी समीक्षा करेगा. इस पैनल में दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, राजस्व और थिंक टैंक NITI आयोग के विभागों के अधिकारी शामिल हैं.
आगामी नीलामी आयोजित करने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के लंबित सुझावों की समीक्षा करेगा. सरकार ने 2017-18 और 2018-19 में किसी भी स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं की. 2016-17 में सरकार ने स्पेक्ट्रम बिक्री के माध्यम से 65,789 करोड़ जुटाए थे. जिन ऑपरेटरों को ट्राई द्वारा निर्धारित उच्च आरक्षित कीमतों की शिकायत रही है, वे उम्मीद कर रहे हैं कि पैनल 5 जी स्पेक्ट्रम की कीमतों को कम करने का निर्णय ले सकता है.
इस साल जुलाई में दूरसंचार नियामक ने कहा कि वह अगले स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए मूल्य निर्धारण पर अपने पहले के रुख पर कायम रहेगा, क्योंकि वह मानता है कि नीलामी एक खुली प्रक्रिया है और इसमें मौजूदा लाइसेंसधारियों के अलावा अन्य खिलाड़ी भी भाग ले सकते हैं.
नवीनतम 5G फोन mi 9 प्रो और Mi Mix 4 पेस करेगी| दोनों उपकरणों के साथ कंपनी एमआईयूआई 11 को भी जनता के सामने पेश करेगी| Mi 9 प्रो में 6.39 इंच के सुपर अमोलेड डिस्पले और समग्र डिजाइन के साथ ताजा Mi 9 होने की उम्मीद है| इस फोन का स्नैप ड्रैगन 855 प्लस चिपसेट और 4000 एमएएच की बड़ी बैटरी दी गई है|
Mi mix 4 के लिए स्नैपड्रेगन 855 प्लस चिपसेट और एक घुमावदार क्यूएचडी डिस्पले के साथ आने की अफवाह है| पीछे की ओर डिवाइस टेलीफोटो और बायोडाटा लेंस के साथ 108 एमपी सैमसंग आईएसओसीएल ब्राइट एच एम एक्स मुख्य सेंसर की शुरुआत करेगा|
Xiaomi Mi 9 प्रो और नए mi mix फोन के बारे में अगले सप्ताह की घटना के बारे में और अधिक जानकारी बताएगा|
हमारे पास प्रस्तावित राम मंदिर की कुछ खास तस्वीरें हैं। अयोध्या के कारसेवकपुरम में राम जन्मभूमि न्यास द्वारा संचालित कार्यशाला में एक शीशे के बॉक्स के अंदर ‘प्रस्तावित राम मंदिर’ का लकड़ी का मॉडल रखा हुआ है।
हमें राम मंदिर के जिस मॉडल की तस्वीरें मिली हैं, वह लकड़ी से तैयार एक मॉडल है और इस मॉडल के अनुसार, प्रत्येक खंबे पर 16 तस्वीरें उकेरी जाएंगी। यहां मंदिर के निचले तल पर खंबो की ऊंचाई 16.6 फीट होगी और इन खंबो के ऊपर 3 फीट मोटी पत्थर की बीम होगी। इन बीम पर करीब 1 फुट मोटी छत होगी। पहली मंजिल के खंबे 14.5 फीट ऊंचे होंगे। मंदिर की दीवारें 6 फीट मोटे पत्थर से बनाई जाएंगी और राम मंदिर निर्माण से जुड़ी पूरी निर्माण सामिग्री अयोध्या में उपलब्ध है। मंदिर के लिए ईंटें पूरे देश से लाई गई हैं। यहां पत्थरों को तराशने का काम जारी है और 50 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। मंदिर के पहले तल के लिए निर्माण तैयारी पूरी कर ली गई है और यहां सभी ईंटों पर भगवान राम का नाम उभरा हुआ है।
कार्यशाला में 1990 से मंदिर निर्माण के लिए कार्य चल रहा है। लेकिन, अब यहां चल रहे काम की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है। इसका कारण कार्यशाला के कोष में आई कमी और कारीगरों/शिल्पकारों की संख्या घटना है।
राम जन्मभूमि न्यास द्वारा कारसेवकमपुरम में संचालित इस कार्यशाला में देश के कई हिस्सों से श्रद्धालु आते हैं और यहां चल रहे काम को देखते हैं. यहां कार्यशाला के प्रभारी अन्नू भाई सोमपुरा ने बताया कि योजना के मुताबिक, प्रस्तावित राम मंदिर 268 फीट लंबा, 140 फीट चौड़ा और 128 फीट ऊंचा होगा.
सोमपुरा ने कहा कि कार्यशाला में पत्थरों की नक्काशी का काम 50 फीसदी पूरा हो गया है, जिससे मंदिर की पहली मंजिल पूरी बनाई जा सकती है और उन्होंने कहा कि ‘हमें उम्मीद है कि अयोध्या भूमि मालिकाना हक मामले में सुप्रीम कोर्ट से उनके हक में फैसला आएगा और एक बार हरी झंडी मिलते ही आधारशिला रखने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि ‘मंदिर के सभी फ्लोर्स पर 106 खंभे होंगे और हर खंभे पर 16 मूर्तियां लगी होंगी।’ यहां उन्होंने बताया कि ‘कारीगरों ने इसके लिए नक्काशी का काम पूरा कर लिया है। मंदिर के लिए चलाया जा रहा ये पूरा काम श्रद्धालुओं के ‘व्यक्तिगत दान’ से चल रहा है.’ हालांकि, उन्होंने कहा कि ‘पहले जितना धन आता था, अब उतना नहीं आ रहा है।’
यूपीएससी की सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा 20 सितंबर को निर्मला कॉलेज में आयोजित होगी. 20 से 22 सितंबर और 28 से 29 सितंबर तक आयोजित होनेवाली इस परीक्षा के लिए कॉलेज में ही दो केंद्र बनाये गये हैं.
परीक्षा को कदाचार मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है. इसके तहत परीक्षा केंद्रों में चार जोनल मजिस्ट्रेट और एक स्ट्रैटिक मजिस्ट्रेट मौजूद रहेंगे. वहीं पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की भी तैनाती की जाएगी. किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी ना हो इसके लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की गयी है.
परीक्षा दो पालियों में होगी. पहली पाली सुबह 9.00 बजे से 12.00 बजे और दूसरी पाली 2.00 बजे से 5.00 बजे तक होगी. इसके तहत एसडीओ सदर को विधि व्यवस्था का संपूर्ण प्रभार दिया गया है. वे परीक्षा केंद्र में औचक निरीक्षण भी करेंगे. शेड्यूल के अनुसार प्रत्येक दिन दो पेपर की परीक्षा होगी.
धैर्य बनाए रखें परीक्षार्थी: चाणक्य आइएएस एकेडमी के वाइस प्रेसिडेंड विनय मिश्रा ने अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले धैर्य बनाये रखने की बात कही है. उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को रचनात्मक गुण से प्रश्नों काे समझने की जरूरत है. ऐसे में सिलेबस का गहन अध्ययन काम आयेगा. सिलेबस के साथ-साथ पूर्व में पूछे गये प्रश्नों की जानकारी होनी जरूरी है. इसके अलावा समय प्रबंधन पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है, ताकि कम समय में विद्यार्थी ज्यादा से ज्यादा और सटीक प्रश्नों को हल कर सकें.
वैकल्पिक विषय का महत्व समझें: विनय मिश्रा ने विद्यार्थियों से परीक्षा के दौरान भी नियमित न्यूज पेपर पढ़ने और समसामायिक घटनाओं पर नजर रखने की बात कही है. जिससे अभ्यर्थी उलझाने वाले प्रश्नों को भी आसानी से हल कर सकेंगे.
विनय मिश्रा ने यूपीएससी परीक्षा में शामिल हो रहे अभ्यर्थियों को वैकल्पिक विषय को गंभीरता से लेने की बात कही. ऐसे में चयनित विषय की तैयारी के लिए एनसीइआरटी किताबों की मदद लेने की जरूरत है. इससे बेसिक नाॅलेज मजबूत होने के साथ-साथ अतिरिक्त अध्ययन के लिए जरूरत टॉपिक की भी जानकारी मिलेगी.
खुद के नोट्स पर रखें भरोसा: यूपीएससी की तैयारी के लिए अभ्यर्थी खुद के बनाये नोट्स पर भरोसा रखें. विषयवार नोट्स तैयार रखने से परीक्षा में शॉर्ट नोट्स स्टडी में मदद मिलती है. इससे रिवीजन भी करना आसान होता है. परीक्षा के दौरान भाषा पर नियंत्रण रखना जरूरी है. साथ ही प्रश्न के उत्तर में उदाहरण और व्यावहारिक पक्ष रखना जरूरी है. फैक्ट और फिगर की सटीकता जरूरी है.
896 पदों के लिए होगी परीक्षा
मेंस की परीक्षा 1750 अंकों की होती है, जिसमें विषय आधारित प्रश्न पूछे जायेंगे. मेंस में पास होनेवालों को ही इंटरव्यू के लिए बुलाया जायेगा. 896 पद के लिए 11,845 विद्यार्थी परीक्षा देंगे. आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार यूपीएससी ने इस बार 896 पदों पर नियुक्ति निकाली है.
प्रधामंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को ई सिगरेट को बैन करने का बड़ा फैसला सुनाया हैं। मोदी सरकार ने यह प्रतिबंध इससे होने वाले नुकसान को ध्यान में रखते हुए लगाया हैं। सरकार ने इसको प्रतिबंधित करने का फैसला लेते हुए कड़ी सजा का प्रवाधान भी किया हैं।
ई सिगरेट के खिलाफ पूरी दुनिया में एक धारणा बनती जा रही हैं। इसका प्रमुख कारण हैं कि इसके लोगों की जान पर खतरा बढ़ रहा है और दुनिया में मौत के आंकड़े बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि भारत से पहले भी कुछ देशों में ई सिगरेट पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है तो कुछ ऐसे भी हैं जहां इस पर आंशिक प्रतिबंध है। कुछ ऐसे भी देश हैं जहां पर इसकी बिक्री को कानूनी दर्जा मिला हुआ है। आइए जातने हैं कि कि भारत के पहले कौन से देश पहले से इस पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। आइए जानते हैं कि इस पर प्रतिबंध लगाना क्यों जरुरी था और इससे क्या नुकसान हैं।
ई सिगरेट से होती ये बीमारियां
ई-सिगरेट को आमतौर पर धूम्रपान के विकल्प के रूप में लिया जाता रहा है। हाल ही में कुछ ऐसी रिसर्च सामने आई हैं जिनके मुताबिक इसका सेवन अस्थमा समेत कई दूसरी बीमारियों की वजह बन सकता है। इसमें प्रयोग होने वाले केमिकल जानलेवा हैं, इसके दुष्प्रभावों से पॉपकॉन लंग्स एवं लंग्स कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ई-सिगरेट एक तरह का इलेक्ट्रॉनिक इन्हेलर है, जिसमें निकोटिन और अन्य केमिकल युक्त लिक्विड भरा जाता है। ये इन्हेलर बैट्री की ऊर्जा से इस लिक्विड को भाप में बदल देता है जिससे पीने वाले को सिगरेट पीने जैसा एहसास होता है। लेकिन ई-सिगरेट में जिस लिक्विड को भरा जाता है वो कई बार निकोटिन होता है और कई बार उससे भी ज्यादा खतरनाक केमिकल होते हैं। इसलिए ई-सिगरेट को सेहत के लिहाज से बिल्कुल सुरक्षित नहीं माना जा सकता है।
बिक्री पर अब तक नहीं थी रोक
इस फैसले से पहले तकनीकी तौर पर इसकी बिक्री पर कोई रोक नहीं थी और न ही इस बिक्री के लिए सेंट्रल ड्रग्स स्टेंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन से कोई इजाजत ही लेनी होती थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2019 तक देश में करीब 460 ई-सिगरेट के ब्रांड मौजूद थे। इसके अलावा इसके करीब सात हजार से ज्यादा फ्लेवर भी थे। अगस्त 2018 में स्वस्थ्य और परिवार मंत्रालय ने इसके विज्ञापन पर रोक लगाई थी। फरवरी 2019 में इसको लेकर CDSCO ने एक एडवाइजरी जारी कर सभी राज्यों को इसकी बिक्री की इजाजत न देने को कहा था। इसके साथ ही सभी राज्यों के ड्रग कंट्रोलर्स को कहा गया था वह इसको सुनिश्चित करें कि इसकी बिक्री न होने पाए।
2016 से पहले लीगल थी
अमेरिका में स्कूली छात्रों में ई-सिगरेट का चलन काफी बढ़ा
कुछ ही दिन पहले अमेरिका के न्यूयॉर्क में इसको प्रतिबंधित किया गया है। इससे पहले भी अमेरिका के कुछ राज्य इसकी बिक्री को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर चुके हैं। फिलहाल न्यूयॉर्क में तंबाकू और मैन्थॉल की बिक्री पर रोक नहीं लगाई गई है। न्यूयॉर्क की ही बात करें तो हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि स्कूली छात्रों में ई-सिगरेट का चलन काफी बढ़ गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक न्यूयॉर्क के हाई स्कूल के छात्रों में ई-सिगरेट के प्रयोग के मामले 2014-2018 के दौरान 160 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
वहीं 12वीं के छात्रों में यह भी इसका प्रचलन बढ़ा है। इसको रोकने के मकसद और हाल ही में हुई कुछ मौतों की वजह से यह कदम उठाया गया है। अमेरिका के कुछ कॉलोनियों ने भी इसको निजी तौर पर अपने यहां पर प्रतिबंधित किया है। अब तक इस तरह की छह सौ से ज्यादा कालोनियां सामने आ चुकी हैं। कुछ ऐसे भी राज्य हैं जिन्होंने नाबालिग को ई-सिगरेट की बिक्री करना प्रतिबंधित कर दिया था। आपको बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह ही ई-सिगरेट उत्पादों को प्रतिबंधित करने की बात कही थी।
जापान में भी ई सिगरेट का प्रयोग गैरकानूनी
ई-सिगरेट को लेकर चले शोध और इससे होती बीमारियों पर अधिकतर देशों का एक समान रुख है। हालांकि यदि इस पर प्रतिबंध की बात करें तो यहां पर इस समान विचारधारा का अभाव साफतौर पर दिखाई देता है। इसकी वजह कहीं न कहीं ई-सिगरेट के उत्पादन से जुड़ी कंपनियां भी हैं। यही वजह है कि इसको लेकर कई देशों में अब भी डिबेट चल रही है। अमेरिका की ही बात करें तो 2016 में यूएस डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसपोर्ट ने कमर्शियल फ्लाइट में ई-सिगरेट के इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया था। अमेरिका के कुछ राज्यों में इसकी रोकथाम के लिए इस पर कर बढ़ा दिए तो कुछ ने इसको सार्वजनिक स्थलों पर प्रतिबंधित कर दिया। जापान में ई-सिगरेट को गैरकानूनी घोषित किया गया है। इसके अलावा ब्राजील, सिंगापुर, शिशेल्स, ऊराग्वे में भी ई-सिगरेट पर प्रतिबंध है।
बिट्रेन में है आशिंक प्रतिबंध
ब्रिटेन की बात करें तो 2016 से पहले यह लीगल थी लेकिन बाद में ईयू के नियमों को लागू करने की बदौलत इस पर आशिंक प्रतिबंध लगाया गया। इसके तहत इसके विज्ञापन, निकोटिन की मात्रा और इसके फ्लेवर को कम किया गया। इसके अलावा सार्वजनिक स्थलों पर इसके सेवन पर प्रतिबंध लगाया गया। साथ ही 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को इसकी बिक्री करने पर प्रतिबंधित किया गया।
इन देशों की ये है स्थिति
फरवरी 2014 में यूरोपीयन पार्लियामेंट ने इसकी रोकथाम को लेकर कदम उठाने की शुरुआत की थी। इसके तहत अप्रैल 2014 में फूड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने कुछ नियम प्रस्तावित किए थे। 2014 में कनाडा ने इसको तकनीकी तौर पर गैरकानूनी घोषित किया था। हालांकि इसके बाद भी यह चोरी-छिपे बिक रही है। अर्मेनिया, बोसनिया हर्जिगोवेनिया में इसकी बिक्री नियमित नहीं है। बुल्गारिया में इसकी बिक्री को कानूनी मान्यता प्राप्त है। क्रोएशिया में इसके विज्ञापन और सार्वजनिक जगहों पर इस्तेमाल से रोक है। यहां नाबालिगों को इसकी बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित है। चेक रिपब्लिक में 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी इंसान को इसकी बिक्री करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। हालांकि यहां पर इसके विज्ञापन पर कोई प्रतिबंध नहीं है।