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कांग्रेस 5 करोड़ सदस्य बनाने का अभियान शुरू करेगी

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कांग्रेस अगले महीने से एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने की तैयारी में है, जिसके तहत पार्टी के साथ पांच करोड़ सदस्यों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान में फर्जी सदस्यता से बचने के लिए डिजिटल प्रणाली का भी सहारा लिया जाएगा। कांग्रेस के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी एक सर्कुलर में पार्टी नेताओं को महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड को छोड़कर सभी राज्यों में सदस्यता के लिए डोर-टू-डोर अभियान शुरू करने के लिए कहा गया है। इन तीन राज्यों को फिलहाल इसलिए छोड़ा गया है, क्योंकि यहां अगले कुछ महीनों में ही चुनाव होने वाले हैं।

देश की पुरानी व लंबे समय तक सबसे बड़ी पार्टी रही कांग्रेस अब फिर से उठ खड़ा होने की तैयारी में है। इसी दिशा में एक महीने पहले ही एक बार फिर से सोनिया गांधी को पार्टी की बागडोर सौंपी गई है। राहुल गांधी ने पिछले लोकसभा चुनाव में पराजय के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया था।

कांग्रेस की प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चुनावी सफलताओं और संगठनात्मक गतिविधियों के मामले में लगातार आगे बढ़ रही है। इसलिए अब कांग्रेस ने भी पांच करोड़ सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है। यह हालांकि अभी भी भाजपा के 18 करोड़ के आंकड़े से बहुत कम है।

आईएएनएस को मिले एक पत्र में कहा गया है, “यह निर्णय लिया गया है कि सदस्यता अभियान डिजिटल और पारंपरिक पेपर दोनों के माध्यम से होगा। सभी संगठन और विभाग अपने-अपने बूथ क्षेत्रों में इस अभियान में भाग लेंगे।”

पार्टी ने अपने पदाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि नए सदस्यों का बायोडेटा फोटो और वोटर आईडी कार्ड के साथ डिजिटल प्रारूप में अपलोड किया जाए।

ऑनलाइन सदस्यता फॉर्म कांग्रेस पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। फॉर्म में यह उल्लेख किया गया है कि नए सदस्य को पहचान प्रमाण के रूप में अपना ईपीआईसी (इलेक्शन आई-कार्ड) अपलोड करना होगा। कुछ जानकारी देने के बाद उन्हें पार्टी से मेल या मैसेज के माध्यम से सूचना मिल जाएगी।

उत्तर प्रदेश की प्रभारी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी द्वारा बुलाई गई हालिया बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री राम लाल राही ने फर्जी सदस्यता का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि सदस्यता अभियान वास्तविक होना चाहिए, न कि केवल कागजों पर।

रेलवे कर्मचारियों को मिला दिवाली का तोहफा, 78 दिनों का मिलेगा बोनस, जानिए सरकार कितना करेगी खर्च

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सरकार ने रेलवे कर्मचारियों को दिवाली का तोहफा दिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 11 लाख रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन के वेतन के बराबर बोनस देने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी दी। बता दें कि पिछले साल भी इन्हें दशहरे से पहले 78 दिन का ही बोनस दिए जाने का ऐलान किया गया था।

उन्होंने आगे कहा कि 11 लाख रेलवे कर्मचारियों के लिए मोदी सरकार ने लगातार 6वें साल रिकॉर्ड बोनस देने की घोषणा की है। इस साल रेल कर्मचारियों को बोनस देने पर सरकार 2024 करोड़ रुपए खर्च करेगी। उन्‍होंने कहा कि यह रेलवे कर्मचारियों की उत्‍पादकता का पुरस्‍कार है।

सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले कर्मचारियों को बोनस देने का यह अहम फैसला किया है। इससे बाजार में डिमांड बढ़ने की संभावना है। हालांकि, इसका लाभ सिर्फ नॉन गैजेटेड कर्मचारियों को मिलेगा। पिछले वर्ष प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस के रूप में अधिकतम 17,951 रुपया की राशि मिली थी।

बड़ी खबर : दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 10वीं, 12वीं के छात्रों को लेकर केजरीवाल सरकार का बड़ा फैसला

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दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 10वीं और 12वीं में पढ़ने वाले हर वर्ग के 3.14 लाख बच्चों की सीबीएसई परीक्षा की फीस अब सरकार देगी।

VIDEO: लद्दाख में युद्धाभ्यास, जब बर्फीली नदी को चीरते हुए निकला भारतीय टैंक

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भारतीय सेना (Indian Army) ने लद्दाख में हजारों फीट की उंचाई पर अपना ऐसा शौर्य दिखाया है जो कि पाकिस्तान (Pakistan) और चीन (China) दोनों की नींद उड़ा सकता है.

नई दिल्ली: भारतीय सेना (Indian Army) ने लद्दाख में हजारों फीट की उंचाई पर अपना ऐसा शौर्य दिखाया है जो कि पाकिस्तान (Pakistan) और चीन (China) दोनों की नींद उड़ा सकता है. आपको बता दें कि लद्दाख (Ladakh) में चीन से लगती हुई सीमा पर भारतीय सेना ने एक बड़ा सैन्य अभ्यास किया है. इस सैन्य अभ्यास (war exercise) में थल सेना के साथ वायुसेना (Air Force) भी शामिल रही. इस सैन्य अभ्यास से हमारी सेना ने पूरी दुनिया तक यह पैगाम पहुंचा दिया है कि भारतीय सेना जमीन से लेकर आसमान तक दुश्मन का जवाब देने के पूरी तरह तैयार है.

पहली बार इस इलाके में हुआ है सैन्य अभ्यास
गौरतलब है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब भारतीय सेना (Indian Army) के जवानों ने इस हिस्से में किसी तरह के सैन्य अभ्यास (war exercise) को अंजाम दिया है. युद्धाभ्यास के दौरान भारतीय सेना के जांबाजों ने जमीन से आसमान तक अपना दमखम दिखाया. युद्ध के लिए सेना की क्या तैयारियां हैं. इसका जायजा युद्धाभ्यास के जरिए लिया गया.

https://twitter.com/NorthernComd_IA/status/1174258290299232259

लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने की भीष्म टैंक की सवारी
वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह वायुसेना (Air Force) के जवान आसमान से छलांग लगा रहे हैं तो वहीं थल सेना के जवान टैंक (tank) के साथ अभ्यास कर रहे हैं. आपको बता दें कि नॉर्दन कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह (Lt. General Ranbeer Singh) ने सेना के तीनों अंगों के युद्धाभ्यास (war exercise) का जायजा लिया. यही नहीं युद्धाभ्यास के दौरान खुद रणबीर सिंह ने आधुनिक टी-90 भीष्म टैंक (T-90 Bhishma Tank) पर सवारी कर इसकी मारक क्षमता को परखा. यहां आपको यह भी बता दें कि भीष्म टैंक रात के वक्त भी दुश्मन पर सटीक गोलाबारी की क्षमता रखता है.

भीष्म टैंक अपने आप में है खास, खुद करता है जवानों की सुरक्षा
इस टैंक में 125 मिमी स्मूथबोर गन लगी हुई है जो इसे काफी ताकतवर बनाती है. भीष्म टैंक एंटी टैंक मिसाइल (Anti tank missile) भी छोड़ने में सक्षम है. ये टैंक (tank) 100 मीटर से लेकर 4 किलोमीटर की दूरी तक विरोधी टैंक को निशाना बना सकता है. इस टैंक पर खास तरह के विस्फोटक प्लेट लगाए गए हैं. जो भी बम या मिसाइल इस टैंक की प्लेट से टकराता है तो उस बम या मिसाइल की ताकत खत्म हो जाती है, जिससे अंदर बैठे जवान सुरक्षित रहते हैं.

इस एक्सरसाइज का रणनीतिक रूप से है काफी महत्व
आपको बता दें कि सेना ने टैंक और पैरा कमांडो के साथ इन्फेंट्री ने सुपर हाई एल्टीट्यूड पर खुद को लड़ाई के लिए परखा. सेना (Indian Army) ने यहां दिन और रात में लड़ने की अपनी रणनीति का अभ्यास किया. इस अभ्यास में वायुसेना (Air Force) और थल सेना की कई टुकड़ियों के जवान शामिल रहे. चीन के साथ सटे लद्दाख के इस हिस्से के साथ भारतीय सेना के जवानों की इस एक्सरसाइज का रणनीतिक रूप से काफी महत्व है. चीनी सेना लगातार इस हिस्से में घुसपैठ करने की कोशिश करती रही है. कई बार यहां दोनों सेना के जवान आमने-सामने भी हुए हैं. ऐसे में इस बीच भारतीय सेना के जवानों का यह सैन्य अभ्यास चीन (China) को भी सख्त संदेश देता है कि वह सरदह पर हद में रहना सीख ले.

सरकार से अनुदान पाने वाले एनजीओ आरटीआई क़ानून के दायरे में आते हैं: सुप्रीम कोर्ट

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उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि सरकार से उल्लेखनीय फंड पाने वाले गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत लोगों को सूचना मुहैया करने के लिए बाध्य हैं.

मंगलवार को शीर्ष न्यायालय ने कहा कि सरकार से प्रत्यक्ष या रियायती दर पर जमीन के रूप में या उल्लेखनीय वित्तीय मदद पाने वाले स्कूल, कॉलेज और अस्पताल जैसे संस्थान भी आरटीआई कानून के तहत नागरिकों को सूचना उपलब्ध कराने के लिए बाध्य हैं.

जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरूद्ध बोस की पीठ ने कहा, ‘यदि एनजीओ या अन्य संस्थाओं को सरकार से उल्लेखनीय वित्तीय मदद प्राप्त होती है, तो हम इसके लिए कोई कारण नहीं पाते हैं कि क्यों कोई नागरिक यह जानने के लिए सूचना नहीं मांग सकता कि किसी एनजीओ या अन्य संस्था/संस्थान को दिया गया उसके पैसे का आवश्यक उद्देश्य में उपयोग हुआ या नहीं.’

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, पीठ ने कहा कि ऐसे एनजीओ जो सरकार से उल्लेखनीय अनुदान पाते हैं या सरकार पर अनिवार्य रूप से निर्भर होते हैं, वे ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ के दायरे में आते हैं. इसे आईटीआई अधिनियम 2005 की धारा 2 (एच) में परिभाषित किया गया है.

पीठ ने कहा कि एक एनजीओ (इसमें समितियां/सोसाइटी भी शामिल हो सकती हैं) भले ही सरकार स्वामित्व या नियंत्रण में न हों, लेकिन अगर उसे उल्लेखनीय सरकारी फंड प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर मिल रहा है तो वह आरटीआई के दायरे में आता है.

जस्टिस गुप्ता ने अपने फैसले में कहा, ‘यह जरूरी नहीं कि अनुदान एक बड़ा हिस्सा हो या 50 प्रतिशत से ज़्यादा हो. इस संबंध में कोई नियम तय नहीं किया जा सकता.’

फैसले में कहा गया है कि किसी अस्पताल, शैक्षणिक संस्था या ऐसे किसी संस्थान को सरकार कहीं नि:शुल्क जमीन या भारी छूट देती है तो इसे भी उल्लेखनीय वित्तीय मदद माना जा सकता है.

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि आरटीआई कानून सार्वजनिक (सरकारी) लेन-देन में पारदर्शिता लाने और सार्वजनिक जीवन में शुचिता लाने के लिए लाया गया था.

दरअसल, न्यायालय के समक्ष यह मुद्दा आया था कि क्या सरकार से उल्लेखनीय रकम प्राप्त करने वाले एनजीओ सूचना का अधिकार कानून, 2005 के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण के दायरे में आते हैं.

गौरतलब है कि इन शैक्षणिक संस्थानों को संचालित करने वाले कई स्कूल एवं कॉलेजों और एसोसिएशनों ने शीर्ष न्यायालय का रुख कर दावा किया था कि एनजीओ आरटीआई एक्ट के दायरे में नहीं आते हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट कुछ एनजीओ और नई दिल्ली की डीएवी कॉलेज ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसाइटी की ओर से दायर याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था. हाईकोर्ट ने इन संस्थाओं को सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित किया था, जिसके बाद इन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.

पीठ ने कहा कि यह सोसाइटी विभिन्न स्कूलों/कॉलेजों को संचालित करती है, जिन्हें सरकार से करोड़ों रुपये प्राप्त होते हैं इसलिए ये आरटीआई कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण है.

सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को फटकार, कोई देश अपने लोगों को मरने के लिए गैस चैंबर में नहीं भेजता

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 देश में मैनुअल स्कैवेंजर्स (मैला ढोने के काम में लगे लोग) की मौतों और उन्हें सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार की खिंचाई की. शीर्ष अदालत ने कहा कि देश की स्वतंत्रता को 70 साल से अधिक बीत चुके हैं लेकिन आज भी जातिगत भेदभाव बरकरार है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अदालत ने कहा, ‘दुनिया के किसी देश में लोगों को मरने के लिए गैस चैंबर्स में नहीं भेजा जाता है. हर महीने मैला ढोने के काम में लगे चार से पांच लोग की मौत हो रही है.’

जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ केंद्र सरकार की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस याचिका में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से उसके पिछले साल के फैसले की समीक्षा की मांग की थी जिसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों को लगभग खत्म कर दिया गया था.

मैला ढोने के काम में लगे लोगों को समान सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने पर अदालत ने सरकार को फटकार लगाई. अदालत ने कहा, ‘सभी इंसान समान हैं लेकिन प्रशासन द्वारा सभी को समान सुविधाएं नहीं प्रदान की जाती हैं.’

जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने केंद्र सरकार के तरफ से उपस्थित अटॉर्नी जनरल केके वेनुगोपाल से पूछा कि मैला ढोने के काम में लगे और सीवेज एवं मेनहोल की सफाई में लगे लोगों को सुरक्षा के लिए समुचित उपकरण जैसे मास्क और ऑक्सीजन सिलेंडर क्यों नहीं दिए जाते हैं.

जस्टिस मिश्रा ने कहा, ‘मैं आप लोगों से पूछना चाहता हूं कि संविधान द्वारा देश में छूआछूत को खत्म किए जाने के बाद भी क्या आप लोग उनसे हाथ मिलाते हैं? जवाब है नहीं. हम इसी तरीके से आगे बढ़ रहे हैं. हालात में निश्चित तौर पर सुधार होना चाहिए. आजादी को 70 साल बीत गए हैं लेकिन ये चीजें आज भी जारी हैं.’

पीठ ने आगे कहा, ‘यह सबसे अमानवीय है कि इंसानों के साथ इस तरह से व्यवहार किया जा रहा है.’

वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि नागरिकों के साथ गलत किए जाने और उसके दायित्व से संबंधित यातना का कोई भी कानून देश में विकसित नहीं हुआ और मजिस्ट्रेटों को ऐसी घटनाओं के बारे में स्वयं संज्ञान लेने का अधिकार नहीं है.

उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सड़क पर झाड़ू लगा रहा है या मैनहोल की सफाई कर रहा है उसके खिलाफ मुकदमा दायर नहीं किया जा सकता है, लेकिन पर्यवेक्षक अधिकारी या ऐसे अधिकारी जिनके निर्देश पर काम किया जाता है उन्हें इसके लिए उत्तरदायी माना जाना चाहिए.

छत्तीसगढ़ : जान जोखिम में डाल ग्रामीणों का इलाज करने नदी पार करती है ये महिला

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 छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बलरामपुर (Balrampur) जिले के राजपुर ब्लॉक के अलखडीहा उपस्वास्थ्य केन्द्र की महिला स्वास्थ्यकर्मी (Female health worker) मुश्किलों का सामना कर ड्यूटी करती हैं. इसका ताजा नमूना हाल ही में देखने को मिला. महिला सहित अन्य स्वास्थकर्मी नदी पार कर कैसे लोगों तक स्वास्थ सुविधा पहुंचा रहे है. बलरामपुर (Balrampur) जिले में अभी भी कई ऐसे गांव हैं, जहां पर जाने आने के लिये नदी पार कर जाना पड़ता है. वहीं राजपुर ब्लाक के अलखडीहा उपस्वास्थ केन्द्र के अंतर्गत मंहगई, माकड, महुडांड तीन ऐसे गांव पड़ते हैं, जिनकी अबादी करीब डेढ़ हाजर है, जहां पर जाने के लिये महाननदी पार कर आना-जाना पड़ता है.

इन गावों में जाने के लिए महानदी (Mahanadi) पर पुल नहीं बना है. इसके बाद भी इन गांवों में सेवा देने के लिए महिला स्वास्थ्यकर्मी पुष्पलता व पुरुष स्वास्थकर्मी शमशेर अन्सारी पैदल नदी पार कर ड्यूटी करने जाते हैं और लोगों तक स्वास्थ सुविधा पहुचाते हैं. स्वास्थ्यकर्मी पुष्पलता का कहना है कि जब भी नदी का स्तर बढ़ता है तो परेशानी होती है, लेकिन कोशिश रहती है कि सप्ताह में कम से कम एक बार तो वहां पहुंच जाएं और लोगों की परेशानी के आधार पर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जा सके.

ग्रामीण कल्पना का कहना है कि नदी पर पुल नहीं होने से पैदल ही नदी पार कर स्वास्थयकर्मी ग्रामीणों को स्वास्थ सुविधा मुहैया कराने पहुंचते हैं, जिससे की गांव की जनता खुश. महिला सहित अन्य कर्मीचारियों के कार्यों को देखकर एसडीएम आरएस लाल का कहना है कि ऐसे कर्मचारियों के जज्बे को सालाम करना चाहिए, जो तमाम परेशानियों के बाद भी अपनी सेवा देने व लोगों को मदद पहुंचाने से नहीं चुकते हैं.

अपने बयान पर फंसते नजर आ रहे हैं दिग्विजय, मानहानि का मामला दर्ज

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 कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) भारतीय जनता पार्टी (BJP) और बजरंग दल को लेकर दिए अपने विवादित बयान को लेकर फंसते नजर आ रहे हैं. दिग्विजय सिंह के खिलाफ मानहानि (Defamation) का मामला दर्ज करवाया गया है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 9 अक्टूबर का दिन तय किया है.

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दिग्विजय सिंह ने पिछले दिनों बीजेपी और बजरंग दल पर पाकिस्तानी (Pakistan) खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) से रुपये लेने का आरोप लगाया था. उनके इस बयान को लेकर काफी विवाद हुआ था. (खबर पर विस्तृत जानकारी का इंतजार है)

लालू यादव को किडनी दान करने के लिए आगे आया बिहार का दंपति, कहा- ‘हम जान भी दे देंगे’

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चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव जो रिम्स मे इलाजरत हैं और उनकी किडनी में इन्फेक्शन की खबर सुनकर दोनों ने किडनी देने का फैसला लिया है.

सहरसा: बिहार के सहरसा के एक दम्पति पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को किडनी देने का फैसला किया है. चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव रिम्स मे इलाजरत हैं और उनकी किडनी में इन्फेक्शन की खबर सुनकर दोनों ने किडनी देने का फैसला लिया है.

दरअसल सहरसा जिले के पूर्व जिला पार्षद और एलजेडी के प्रदेश महासचिव प्रवीण आनंद और उनकी पत्नी और जिला पार्षद प्रियंका आनंद ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को अपना किडनी दान में देना चाहते हैं.

दोनों दम्पति का कहना है कि आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव जी गरीबों का मशीहा हैं शोषित, पिछड़ा, अतिपिछड़ा, दलित, महादलित, गरीबों के मसीहा हैं. उन्होनें मुंह में अवाज दिया और अपने हक के लिये लड़ना सिखाया और सड़क पर अधिकार के लिए उतरना सिखाया सदन मे पहुंचाने का काम किया.

वैसे नेता को हमलोगों के बीच में रहना जरुरी है. मजबूत विपक्ष के लिए लालू प्रसाद यादव जी जैसे नेता के लिए किडनी क्या हम अपनी जान दे देंगें. इसलिए हम दोनों पति-पत्नी ने आपस में विचार किया कि लालू यादव जी को किडनी दान मे देंगे.

साथ ही उन्होंने कहा कि जब भी हमें रिम्स की ओर से रांची बुलाया जाएगा और हमारी किडनी उनके साथ मैच करेगी तो अपनी किडनी जरूर दान में देंगे.

आपको बता दें कि रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव की तबीयत नासाज चल रही है. स्वास्थ्य की जांच कर रहे डॉ डीके झा ने बताया था कि लालू यादव को इंफेक्शन की वजह से कमर के पास एक घाव हो गया था जिसे हटा दिया गया है और नियंत्रण के लिए उन्हें एंटीबायोटिक दिया गया था. वहीं, लगातार एंटीबायोटिक देने की वजह से किडनी फंक्शन भी 50 फीसदी से 37 फीसदी पर पहुंच गया था. हालांकि अब उनकी हालत पहले से बेहतर है.

जरूरतमंदों की आर्थिक मदद के लिए मुख्यमंत्री श्री बघेल ने स्वीकृत की राशि

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने शासकीय निवास में आयोजित जन-चौपाल भेंट-मुलाकात में जरूरतमंदों की आर्थिक मदद के लिए स्वेच्छानुदान मद से राशि स्वीकृत की। उन्होंने मुलाकात करने आए लोगों के आवेदन पर संवेदनशीलता से विचार करते हुए तत्काल आर्थिक सहायता की मंजूरी दी। मुख्यमंत्री ने रायपुर के चंगोरा भाठा की प्रिया दमाहे, तेलीबांधा की अंकिता जंघेला और मधुरिमा जंघेला, कबीरधाम जिले के ग्राम कुम्ही के रामचंद साहू, नकुल साहू एवं उमा बाई साहू तथा ग्राम डोंगरियाकला के रामकुमार चंद्रवंशी के लिए पांच-पांच हजार रूपए की सहायता राशि स्वीकृत की।