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दुनिया के पांच सबसे डरावने रास्ते, जहां चलना तो दूर देखने मात्र से कांप जाती है लोगों की रूह

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टेढ़े-मेढ़े या ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर तो आप चले होंगे। हालांकि ये उतने खतरनाक नहीं होते, जिसपर चलने से हर कोई डरे। आज हम आपको दुनिया के उन डरावने रास्तों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनपर चलना हर किसी के बस की बात नहीं। खासकर कमजोर दिल वाले तो इन रास्तों पर जा ही नहीं सकते। इन रास्तों पर हर पल मौत मंडराती रहती है। इनसे गुजरने वाला कभी भी मौत के मुंह में समा सकता है। यही वजह है कि इन खतरनाक और डरावने रास्तों पर चलना तो दूर देखने मात्र से ही लोगों की रूह कांप जाती है।

चीन का हुशान क्लिफसाइड पाथ हुशान यलो नदी के बेसिन के पास ऑरडॉस लूप सेक्शन के साउथवेस्ट में शानक्सी प्रांत के क्विनलिंग माउंटेंन्स के पूर्वी छोर पर स्थित है। यहां दो पैदल मार्ग 1614 मीटर की ऊंचाई पर हुशान की उत्तरी चोटी के लिए बने हुए हैं। यह ‘हुआ शान यु’ के नाम से अधिक प्रसिद्ध है। यहां बहुत से पर्यटक आते हैं। सरकार ने यहां सुरक्षा के इंतजाम किए हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां हर साल दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

चीन के हुनान प्रांत के युएयांग में चीन की स्पाइडरमैन की अमेजिंग आर्मी ने अपनी जिंदगी को दांव पर लगाकर 300 मीटर की ऊंचाई पर ये रास्ता बनाया है। इस खतरनाक रास्ते को देखकर ही लोगों की सांसें अटक जाती हैं।

स्पेन के दक्षिणी क्षेत्र में 110 साल पुराने ‘एल केमिनिटो डेल रे’ मार्ग को दुनिया के सबसे खतरनाक रास्तों में से एक माना जाता है। इसे ‘किंग्स पाथ-वे’ के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण वर्ष 1905 में किया गया था। इस खतरनाक रास्ते को हाइड्रोइलेक्ट्रिक पॉवर प्लांट में काम करने वाले मजदूरों के लिए बनाया गया था। हालांकि इस रास्ते को साल 2000 में बंद कर दिया गया, क्योंकि यहां ऊपर से दो लोगों की गिरकर मौत हो गई थी।

फ्रांस के अल्पस के सेंट पियरे डि इंट्रीमॉन्ट में स्थित रोच वेयरांड जाना हर किसी के बस की बात नहीं है। यहां अच्छे से अच्छे मजबूत कलेजे वाले लोगों की भी रूह कांप जाती है।

पश्चिमी चीन के गुलुकान गांव के बच्चे एक स्कूल में पढऩे के लिए इस खतरनाक रास्ते से होकर जाते हैं। यह 5000 फीट लंबा रास्ता चट्टान पर बना है, जिसे ‘क्लिफ पाथ’ के नाम से जाना जाता है।

यहां शरीर में आग लगाकर किया जाता है बीमारियों का इलाज

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अब तक तो आपने दवाइयों या जड़ी-बूटियों से ही बीमारियों का इलाज करते डॉक्टरों को देखा होगा, लेकिन क्या कभी आपने शरीर में आग लगाकर बीमारियों का इलाज करते किसी को देखा है? जी हां, चीन में कुछ ऐसा ही होता है। ये एक ऐसी विधा है, जो पिछले 100 से भी ज्यादा सालों से चीन में इस्तेमाल हो रही है। इस ‘फायर थेरेपी’ कहा जाता है। चीन में कई बीमारियों के इलाज के लिए फायर थेरेपी अपनाई जाती है। इस विधि से लोगों का इलाज करने वाले ‘झांग फेंगाओ’ अपने काम के लिए काफी लोकप्रिय हैं। चीन में कुछ लोग फायर थेरेपी को खास तरह का इलाज मानते हैं, जिससे तनाव, अवसाद, बदहजमी और बांझपन से लेकर कैंसर तक का इलाज संभव माना जाता है।

झांग फेंगाओ बीजिंग के एक छोटे से अपार्टमेंट में इस अनोखे तरीके से लोगों का इलाज करते हैं। एक वेबसाइट के मुताबिक, पहले मरीज की पीठ पर जड़ी बूटियों से बना एक लेप लगाया जाता है और फिर उसे एक तौलिये से ढक दिया जाता है। फिर उस पर पानी और अल्कोहल का छिड़काव किया जाता है और मरीज के शरीर में आग लगा दिया जाता है। फेंगाओ बीमारियों का इलाज ऐसे ही करते हैं। इलाज का यह तरीका चीन की प्राचीन मान्यताओं पर आधारित है, जिसके अनुसार शरीर में गर्मी और ठंडक के बीच सामंजस्य बिठाने पर जोर दिया गया है। झांग फेंगाओ के मुताबिक, शरीर की ऊपरी सतह को गर्म करके अंदर की ठंडक दूर की जाती है।

फायर थेरेपी को लेकर कई सवाल भी खड़े हो चुके हैं। इनमें अहम है कि इलाज करने वाले के पास सर्टिफिकेट है या नहीं। इलाज के दौरान किसी दुर्घटना से बचने के लिए किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था है? इस मामले में झांग फेंगाओ का कहना है कि कई बार लोगों को चोट भी आई है, कई बार मरीज के चेहरे और शरीर के दूसरे हिस्से थोड़े जल भी गए, लेकिन यह सही तरीकों की कमी की वजह से हुआ। मैंने हजारों लोगों को फायर थेरेपी सिखायी है, लेकिन कभी कोई हादसा नहीं हुआ।

झांग फेंगाओ का कहना है कि फायर थेरेपी मानव इतिहास में चौथी बड़ी क्रांति है। इसने चीनी और पश्चिम दोनों ही तरह की इलाज पद्धतियों को पीछे छोड़ा है। चूंकि भयंकर बीमारियों के इलाज में भारी-भरकम राशि खर्च करना हर किसी के बस की बात नहीं है, ऐसे में फायर थेरेपी उनके लिए कारगर और एक सस्ता इलाज है।

अपने आपको डॉगी समझता है ये बछड़ा, बचपन से ही करता है कुत्तों की तरह भौकनें की कोशिश, हरकतें भी हैं वैसी ही

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आज तक आपने कई बार सुना होगा कि जानवर पागल होकर मारकाट मचा देते हैं, अन्यथा वो कुछ ऐसी हरकतें करते हैं जिनके बाद वो सुर्खियों में आ जाते हैं. आज हम आपको एक ऐसा ही मामला बताने जा रहे हैं, जिसमे एक बछड़ा अपने आपको कुत्ता समझता है. अमेरिका के टैक्सास में रहने वाला यह बछड़ा अपनी हर हरकत कुतो जैसी करता है. इस बछड़े का जन्म टैक्सास में आए हरिकेन तूफान के दौरान हुआ था. जब गाय इसे जन्म दे रही थी तो चारों तरफ तूफान का मंजर था. ऐसे में एक फैमिली ने इसे असहाय समझ कर अपना लिया और इसे घर ले आए.

इस को घर लाने वाली कैन्टन फैमिली के पास पहले से ही 8 कुत्ते थे. ऐसे में इस बछड़े को रखना उनके लिए बड़ा मुश्किल हो रहा था .पर जैसे तैसे करके इस परिवार ने कुत्तों के साथ इस बछड़ों को भी रखना शुरू कर दिया. शुरुआत में जब इस बछड़े को कुतो के साथ रखा गया तो कुत्ते काफी हैरान थे. लेकिन बाद में धीरे-धीरे सभी कुत्ते इसके दोस्त बन गए और अपनी प्रजाति का ही समझने लगे.

टैमी केन्टन और उनके पति का कहना है कि उन्होंने जब इसे अपनाया था तो यह बहुत छोटा और कमजोर था. हम इसे आसानी से गोद में उठा सकते थे. 8 हफ्ते देखभाल करने पर ये बछड़ा मोटा तगड़ा हो गया. पर इस बछड़े की परवरिश कुतो के साथ हुई थी. ऐसे में यह बछड़ा खुद को कुत्ता समझ के कुतो जैसी हरकते करने लगा.

खुद को समझता है डॉग

इस बछड़े का नाम हार्वी रखा गया है. हार्वी पूरे दिन कुत्तों के साथ रहता है. ऐसे में यह खुद को कुत्ता ही समझने लगा है. यह कुत्तों के साथ खेलता है, खाना खाता है, यहां तक कि वो उनके साथ सो भी जाता है. हार्वी कुत्ते जो हरकत करते हैं उन्हें की कॉपी करता है . केंटन फैमिली ने ट्विटर पर हार्वी की फोटो शेयर की है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है.

ये है वो जगहें, जहां मिलते हैं रामायण से जुड़े साक्ष्य, जो देते हैं सीता- राम व रावण के प्रमाण

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 हमारे धार्मिक ग्रंथों में राम और रामायण के चरित्र का हमारे जीवन में गहरा प्रभाव है।रामायण का संबंध केवल भारत से नहीं श्रीलंका से भी है। जब हम इस ग्रंथ का जिक्र करते है तो श्रीलंका के नजरअंदाज नहीं कर सकते, क्योंकि बिना रावण के रामायण नहीं हैं। सबको पता है कि रावण, सीता का हरण करके लंका ही ले गया था। श्रीलंका में आज भी वो जगह है जिनका संबंध रामायण काल से है।

यहां हुआ रावण वध
यहां का सिन्हाला शहर में वेरागनटोटा नाम की एक जगह है, जिसका मतलब ‘विमान उतरने की जगह’ होता है। कहते हैं कि यही वो जगह है, जहां रावण का पुष्पक विमान उतरता था। श्रीलंका रामायण रिसर्च कमेटी के द्वारा के अनुसार, भगवान हनुमान का श्रीलंका में उत्तर दिशा में आने के नागदीप से शुरु होने के निशान मिले हैं। उस स्थान की भी तलाश पुरी कर ली गई है, जिस जगह पर राम व रावण के बीच युद्ध हुआ था। श्रीलंका में आज भी उस युद्घ-स्थान को युद्घागनावा नाम से जानते है, जहां पर रावण का भगवान राम ने वध किया था।


यहां हनुमानजी के पैरों के निशान
अशोक वाटिका वो जगह है जहां रावण ने माता सीता को रखा था। इस जगह को अब सेता एलीया के नाम से जाना जाता है, जो की नूवरा एलिया नामक जगह के पास स्थित है। यहां सीता का मंदिर है और पास ही एक झरना भी है। कहते हैं देवी सीता यहां स्नान किया करती थीं। इस झरने के आसपास की चट्टानों पर हनुमान जी के पैरों के निशान भी हैं। यहां वो पर्वत भी है जहां हनुमान जी ने पहली बार कदम रखा था, इसे पवाला मलाई कहते हैं। ये पर्वत लंकापुरा और अशोक वाटिका के बीच में है।

इस तालाब में गिरे मां सीता के आं सू

कैंडी से लगभग 50 किलोमीटर दूर नम्बारा एलिया मार्ग पर एक तालाब है, जिसे सीता टियर तालाब कहते हैं। इसके बारे कहते है बेहद गर्मी के दिनों में जब आसपास के कई तालाब सूख जाते हैं तो भी यह नहीं सूखता। आसपास का पानी तो मीठा है लेकिन इस का पानी आंसुओं जैसा खारा है। कहते हैं कि रावण जब सीता माता को हरण करके ले जा रहा था तो इसमें सीता जी के आंसू गिरे थे।

रावनागोड़ा
यहां रावनागोड़ा नाम की जगह है। इस जगह पर कई गुफाएं और सुरंगें हैं। ये सुरंगें रावण के शहर को अंदर ही अंदर जोड़ती थी। यहां के लोगों का मानना हैं कि कई सुरंगें तो साउथ अफ्रीका तक गई हैं, जिनमें रावण ने अपना सोना और खजाना छुपाया था। ये सुरंगें नेचुरल नहीं हैं, बनाई गई हैं।

सीता ने दी थी अग्नि परीक्षा
यहां की वेलीमड़ा जगह में डिवाउरूम्पाला मंदिर है। यह वहीं जगह है, जहां माता सीता ने अग्नि परीक्षा दी थी। स्थानीय लोग इस जगह पर सुनवाई करके, न्याय करने के का काम करते हैं। यहां मान्यता है कि जिस तरह इस जगह पर देवी सीता ने सच्चाई साबित की थी, उसी तरह यहां लिया गया हर फैसला सही साबित होता है।

इस शख्स ने पहनी है इतनी महंगी घड़ी, जितने में आ जाएं दिल्ली में दो आलीशान फ्लैट

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आपने अब तक की सबसे महंगी घड़ी कितने की पहनी है, 10 हजार, 20 हजार या 50 हजार? लेकिन अमेरिका का रहने वाला एक शख्स जो अभी हाल ही में भारत आया था, उसने इतनी महंगी घड़ी पहनी है, जितने में आप दिल्ली जैसे शहर में दो आलीशान फ्लैट आराम से खरीद सकते हैं।

इस शख्स का नाम है डेन बिल्जेरियन, जो एक पोकर प्लेयर (खिलाड़ी) है। डेन कुल 150 मिलियन डॉलर यानी करीब 10 अरब 69 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं। उन्हें दुनिया का सबसे अमीर ‘जुआरी’ भी कहा जाता है।

डेन अपने किसी प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के सिलसिले में हाल ही में मुंबई आए थे। इस दौरान उन्होंने भारत के सबसे बड़े पोकर इवेंट ‘इंडिया पोकर चैंपियनशिप’ में भी शिरकत की थी।

डेन अपने लग्जरी लाइफस्टाइल के जाने जाते हैं। उनकी महंगी घड़ी ने अब सोशल मीडिया पर तहलका मचाया है। उन्होंने जो घड़ी पहनी थी, उसका नाम रिचर्ड मिले RM11-03 है और इसकी कीमत 1,91,500 डॉलर यानी करीब 1.36 करोड़ रुपये है।

डेन की इस घड़ी की खासियत ये है कि इसे फॉर्मूला वन रेसिंग कार बनाने वाली कंपनी मैकलैरेन रेसिंग लिमिटेड के इंजीनियर्स और डिजाइनर्स ने बनाया है। इस घड़ी में टाइटेनियम पुशर्स लगे हैं, जो फॉर्मूला वन कार मैकलैरेन 720S की हेडलाइट जैसे दिखते हैं। इसके अलावा इसमें पांच टाइटेनियम क्राउन भी लगे हैं, जो मैकलैरेन कार के पहिए में लगे होते हैं। पिछले साल जेनेवा अंतरराष्ट्रीय मोटर शो में इस घड़ी को लॉन्च किया गया था।

इस देश के अमीर लोगों को भी साल के 65 दिन गुजारने पड़ते है अँधेरे में, वजह बेहद दिलचस्प

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आज के समय में हर इंसान चाहता हैं कि उसके पास खूब पैसा हो और वह सभी सुख-सुविधाओं का आनंद ले सकें। लेकिन किस्मत के आगे किसी का जोर नहीं चलता हैं। कई बार ऐसे हालात आ जाते है कि आपके पास पैसा होने पर भी आपको एक आम जिंदगी ही गुजर-बसर करने को मिलती हैं। ऐसा ही कुछ होता हैं यूटीकैगविक शहर के अमीरों के साथ। यूटीकैगविक शहर को बादलों का शहर कहा जाता हैं और यहां की विशेषता के चलते सभी एक-समान रहते हैं। तो आइये जानते है इसके बारे में।

आर्कटिक सर्कल में गर्मियों के महीनों में सूरज आधी रात तक निकला होता है। उस समय सूर्य दिन के 24 घंटों के लिए रहता है। इस समय के दौरान, कई आर्कटिक शहर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और समारोहों की मेजबानी करते हैं जो रात में इस जादुई क्षण को देखने का अनुभव करना चाहते हैं।

हालांकि, मध्यरात्रि सूर्य ही एकमात्र घटना नहीं है, जो यूटीकैगविक को दुनिया की भीड़ से अलग खड़ा करता है। अन्य अलास्कन शहरों के विपरीत, यूटीकैगविक में सर्दियों के महीनों के दौरान असामान्य रूप से लंबी ध्रुवीय रात होती है। एक ऐसी रात जो 65 दिनों तक चलती है! मतलब साल के 65 दिन यहां सूर्य नहीं निकलता और सिर्फ अंधेरा छाया रहता है। 2018 में, 18 नवंबर को आखिरी बार सूर्यास्त हुआ था। इसके बाद, शहर में 65 दिनों की लंबी रात हो गयी और 23 जनवरी को जाकर सूर्योदय हुआ।

रजनीकांत बोले- एक भाषा देश के लिए अच्छी, पर भारत में संभव नहीं

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साउथ फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार और राजनीति में एंट्री कर चुके रजनीकांत (Rajinikanth) ने सरकार के (Common Language) के प्रस्ताव का विरोध किया है. रजनीकांत का कहना है कि देश के लिए अच्छी बात हो सकती है, मगर भारत जैसे विविधता वाले देश में इसे लागू करना संभव नहीं है. अगर ऐसा हुआ, तो दक्षिण राज्यों के साथ-साथ काफी हद तक उत्तरी राज्य भी इसका पुरजोर विरोध करेंगे.

रजनीकांत का बयान गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने हिंदी को देश की कॉमन भाषा बनाने की बात कही थी. 14 सितंबर को हिंदी दिवस (Hindi Divas) पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में शाह ने कहा था, ‘पूरे देश की एक भाषा होना बेहद जरूरी है, जिससे दुनिया में भारत की पहचान बने. ये काम सिर्फ सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी भाषा कर सकती है.’

अमित शाह ने कहा, ‘भारत की भाषा सबसे समृद्ध है. अंग्रेजी में पति-पत्नी का प्यार भी लव होता है, भाई-बहन के प्यार को भी लव कहते हैं. हमारे यहां हर रिश्ते के लिए अलग शब्द है. ऐसे में एक राष्ट्र एक भाषा के विचार को आगे बढ़ाया जाना चाहिए.

अमित शाह के बयान का जिक्र करते हुए ‘थलाइवा’ नाम से मशहूर रजनीकांत ने कहा, ‘दक्षिण राज्यों की अपनी मातृभाषा है. उत्तरी राज्यों में भी कोई न कोई क्षेत्रीय भाषा बोली जाती है. ऐसे में हिंदी को सभी राज्यों पर थोपना उचित नहीं है. अगर ऐसा हुआ, तो ये देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा.

रजनीकांत ने कहा, ‘कॉमन भाषा न सिर्फ भारत, बल्कि किसी भी देश की एकता और उन्नति के लिए अच्छी है. लेकिन हमारा देश विविधता वाला देश है. ऐसे में आप तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक में हिंदी नहीं थोप सकते.’

बता दें कि रजनीकांत से पहले शरद पवार, ममता बनर्जी और एमके स्टालिन भी ‘एक राष्ट्र-एक भाषा’ का विरोध कर चुके हैं. ममता बनर्जी ने कहा था कि हमें अपनी मातृभाषा को नहीं भुलाना चाहिए. ममता बनर्जी ने ट्वीट करके कहा, ‘सभी को हिंदी दिवस की बधाई. हमें सभी भाषा और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए. हम कई नई भाषाएं सीख सकते हैं, लेकिन हमें अपनी मातृभाषा को नहीं भूलना चाहिए.’

वहीं, डीएमके के एमके स्टालिन ने भी कहा था कि गृहमंत्री अमित शाह को अपना बयान वापस लेना चाहिए. स्टालिन ने कहा कि हम हमेशा से हिंदी को थोपे जाने का विरोध करते रहे हैं. ये देश की एकता को प्रभावित करेगा. उधर, एनसीपी नेता शरद पवार भी एक राष्ट्र एक भाषा के खिलाफ हैं.

पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र बाढ़ की चपेट में, सैकड़ों गांव पानी में डूबे, लेकिन सरकार जश्न मनाने में मस्त!

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सितंबर का महीना जल्द ही खत्म होने वाला है साथ ही मॉनसून खत्म होने के कगार पर है लेकिन यूपी के कई शहरों में बाढ़ जैसे हालात अब भी बने हुए हैं। यही हाल वाराणसी शहर का भी है। जहां गंगा का पानी निचले इलाकों में घुस गया है। हालात यह है कि गंगा ने नई कालोनियों को अपनी चपेट में ले लिया है। लोग सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच रहे हैं या फिर अपनी जगह पर बैठकर गंगा के शांत होने का इंतजार कर रहे हैं।

अस्सी घाट की सीढ़ियां मारकर यहां भी गंगा के पानी ने गली का रास्ता अपना लिया है। अक्सर सूखी सूखी सी रहने वाली कृशकाय वरुणा नदी का स्वास्थ्य इन दिनों देखने लायक है। अपने निर्धारित तटबंधों की ऐसी तैसी कर वरिता ने अपने निकटवर्ती मोहल्लों को ग्रास बनाना शुरु कर दिया है। खुरी पंचक्रोशी सहित सैकड़ों मोहल्लों में वरिता का पानी लहरा रहा है। बाढ प्रभावित इन इलाकों के लोग सांसत में हैं। इन मोहल्लों की गलियां सडकें गुम हो गई हैं। इन स्थानों पर नावें और प्लास्टिक की डोंगियां चलाई जा रही हैं। कुछ लोग या फिर कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता बाढ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य में जुटे हुए हैं। मजेदार बात यह कि जिस समय गंगा और दूसरी नदियां खतरे के निशान के आसपास पहुंचकर बनारस अथवा पूरब के लोगों पर कहर बरपा रही थीं। उनका सब कुछ डूबो देने पर अमांदा थी शासन करने वाली पार्टी के लोग साल गिरह मनाने के जश्न में डूबे हुए थे।

फोटो: हिमांशु उपाध्याय

पूरब के कई इलाके इन दिनों कुदरत की मार झेल रहे हैं। वाराणसी में गंगा गुस्से में हैं। गंगा ही क्यों इस शहर को अपना नाम दे उसे धन्य करने वाली वरुणा नदी की त्योरी भी चढ़ी हुई है। डरे हुए लोग छतों पर घर बना के बैठे हैं या फिर कहीं और शरण लेने को विवश हैं। गंगा घाट से सटे निचले मुहल्लों की गलियों में गंगा की धार लहराने लगी है। परेशानी का सबब बनी ये लहरें बच्चों की छपकछइयां के काम रहीं हैं जबकि घाटों के डूब जाने के कारण नियमित स्नान ध्यान करने वाले नेमी गली में ही गंगा का पुण्य लाभ अर्जित करने का सुख भोगने में लगे हैं। और तो और काशी के मुक्ति धाम मणिकर्णिका घाट की चिताओं ने भी गली के चबूतरों पर डेरा जमा लिया है। अमूमन बाढ़ के दिनों में यह नजारा यहां के वासिंदों के लिए आम है किन्तु सैलानियों को कम हैरत में नहीं डालता।

वरुणा, अस्सी ,मंदाकिनी जैसी सहायक नदियों सहित अनेक सरोवरों, कुंडों वाली काशी का नाम कभी आनंदवन था। आनंदवन नाम काशी का स्थायी भाव है। नाम जो भी रहे आनंद इसका स्वभाव है। इसलिए आपद विपद में भी वाराणसी आनंद की प्रवृत्ति से विमुख नहीं होता। बाढ भी यहां के मूल निवासियों के लिए बस पानी का बढना और घटना है। गंगा घाट, राजघाटपुल, वरुणा पुल या फिर जहां-जहां से भी बाढ का नजारा देखा जा सकता है, हजारों की संख्या में देखने वालों की भीड़ जमा मिलती है।

बहरहाल, बिगड़े मौसम, बरसात और गंगा मे आई बाढ के कारण इधर के कई जिले गहरी विपत्ति में घिर गए हैं। आसपास की बात करें तो गाजीपुर, मऊ और बलिया में उफनाई गंगा ने गदर मचा रखा है। इन जिलों में गंगा की कटान झेलते कई गांव जीवन मरण की जंग लड़ रहे हैं। हजारों लोगों ने अपनी हिफाजत में सडकों के किनारे अपना आशियाना तान दिया है। कई संपर्क मार्ग तो बाढ में अपना वजूद ही गंवा बैठे हैं। अपनी तो अपनी मवेशियों की जान के फिकरमंद उन्हें न बचा पाने की स्थिति में खून के आंसू रो रहे हैं। बहुत से लोग बांध पर शरण लेने को मजबूर हैं। खतरे के निशान से लुकाछिपी करती गंगा ने प्रभावित इलाकों में दहशत भर दी है। यही हाल चंदौली, मिर्जापुर और जौनपुर का हैं जहां गंगा और दूसरी सहायक नदियां विध्वंस करने में मशगूल हैं। नतीजा यह है सैकड़ों गांव बाढ के कहर से तिलमिलाना उठे हैं।

200 और 2000 रुपए के नोट को लेकर सरकार ने जारी किये नए नियम, जानें क्या है नया नियम

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मोदी सरकार ने साल 2016 में पुराने 500 और 1000 रुपए के नोट पर पाबंदी की घोषणा की थी। सरकार ने यह कदम काले धन को रोकने के लिए उठाया था। जिसके बाद भारतीय बाजार में 2000 रुपए के नोट जारी किये गए थे। इसके अलावा मोदी सरकार ने 200 रुपए के भी नोट 2017 में भारतीय बाजार में जारी किये थे। अब 200 और 2000 रुपए के नोट को लेकर एक जरूरी सूचना आई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 200 और 2000 रुपये के नोट को लेकर ये जरूरी सूचना बैंकों में कटे-फटे नोट बदलने को लेकर आई है। दरअसल अब कटे-फटे पुराने या गले हुए नोटों को बदलवाने के लिए सरकार ने व्यवस्था की है। जिसके मुताबिक आप कटे-फटे नोटों को बैंक या आरबीआई के चेस्ट बैंक से बदलवा सकते हैं।बता दें कि साल 2016 नोटबंदी के बाद से मोदी सरकार ने अब तक कई नए नोट जारी कर चुके है। जिसमें 2000 और 200 रुपए के नोट पहली बार जारी किये गये है। जबकि 100, 500, 50, 10 के नए नोट जारी किये गए है।

नोट बदलने के नए नियम –
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों के मुताबिक, तीन तरह के नोटों को बदला जा सकता है। पहला वह जिसका धुलाई या कई लोगों के बीच घूमने की वजह से रंग उड़ गया हो। दूसरे में ऐसे नोट जिनके सभी टुकड़े मौजूद हैं। तीसरे मिसमैच वाले नोट।

डरावने सपनों से हैं परेशान तो अपनाएं ये उपाय

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कभी-कभार आने वाले डरावने सपने सामान्य बात हैं, मगर यदि यह नियमित सिलसिला बन जाए, तो इसे विकार माना जाता है, जिसका उपचार जरूरी है।

सपने सब देखते हैं, भले ही कुछ लोगों को जागने पर ये याद न रहते हों। नींद की अवस्था में हमारा मस्तिष्क जो वैकल्पिक यथार्थ या काल्पनिक फिल्म रचकर प्रदर्शित कर देता है, उसी को हम सपना कहते हैं। मसाला फिल्मों की ही तरह हमारे सपनों म एक्शन, इमोशन, रोमांस, कॉमेडी आदि सारे तत्व मौजूद रहते हैं- कुछ कम, तो कुछ ज्यादा। कभी-कभी ये सपने हॉरर फिल्म के रूप में भी सामने आते हैं। इन्हें हम डरावना सपना, बुरा सपना, नाइटमेयर या दु:स्वप्न कहते हैं। बच्चों को डरावने सपने आना आम बात है, जिसके कारण वे रोते हुए जाग जाते हैं। मगर ऐसा नहीं है कि वयस्कों को डरावने या बुरे सपने नहीं आते।