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अगर आपका भी है इन बैंकों में खाता तो हो जाएं सावधान, बदलने जा रहे हैं ये छह नियम

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पंजाब नेशनल बैंक ( PNB ), यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया ( UBI ) और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ( OBC ) की विलय की गई इकाइयां एक अप्रैल 2020 से परिचालन में आएंगी। संभावना है की विलय की गई इकाइयों का एक नया नाम होगा। अब सवाल ये है कि आखिर विलय के बाद बैंक ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा।

क्या बदल जाएंगे अकाउंट नंबर?

विलय के बाद बैंक ग्राहकों को नया खाता नंबर और कस्टमर ID मिल सकता है। ऐसे में आपको ईमेल अड्रेस और मोबाइल नंबर बैंक के पास अपडेटेड रखना होगा। यदि खाता नंबर और कस्टमर ID में कोई भी बदलाव होगा, तो बैंक आपको सूचित करेगा।

पुरानी चेकबुक का क्या होगा?

विलय के कुछ समय बाद आपकी चेक बुक भी बदल सकती है। बैंकों के नाम बदलने से पुराने बैंक के नाम वाली चेकबुक निरस्त हो जाएगी और उसकी जगह पर नई चेकबुक जारी की जाएगी। हालांकि ऐसा करने के लिए ग्राहकों को कुछ वक्त दिया जाएगा।

क्या बैंक डिटेल्स अलग-अलग जगह पर अपडेट कराना होगी?विलय से प्रभावित होने वाले बैंक के ग्राहकों को अपने नए अकाउंट नंबर और IFSC की डिटेल्स इनकम टैक्स, इंश्योरंस कंपनी, म्यूचुअल फंड सहित सभी जगह पर अपडेट करना होंगी। एसआईपी और ईएमआई में भी ब्योरा अपडेट करना होगा।

क्या ब्रांच भी बदल जाएंगी?

विलय प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसमें शामिल बैंकों में से किसी एक बैंक की ब्रांच किसी इलाके में एक से ज्यादा पाई जाती हैं तो कुछ ब्रांच बंद हो सकती हैं। वहीं अगर बैंकों की एक शहर में आस-पास ब्रांच हैं तो उन्हें भी मर्ज किया जाएगा।

एफडी और आरडी पर क्या असर पड़ेगा?

बैंकों के एकीकरण का असर उनके द्वारा विभिन्न जमा योजनाओं पर दी जा रही ब्याज दर पर भी पड़ेगा। विलय से पहले के ग्राहकों की एफडी-आरडी ब्याज दरों पर तो फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन नए ग्राहकों के लिए ब्याज दरें एकीकरण के बाद बने बैंक वाली और एक जैसी होंगी।

क्या ऋण दरों में किसी तरह का बदलाव होगा?

ब्याज दरों की तरह ही पहले से चल रहे विभिन्न तरह के लोन जैसे होम लोन, व्हीकल लोन, एजुकेशन लोन, पर्सनल लोन और गोल्ड लोन की पुरानी दरों में कोई बदलाव नहीं होगा।

गर्ल्स कॉलेज में सुनाया अजीब फरमान, ‘सूट पहनने पर मिलेंगे अच्छे रिश्ते’

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गर्ल्स कॉलेज में छात्राओं के ड्रेस कोड को लेकर अजीब फरमान जारी किया है। जिसके तहत छात्राओं को आस्तीन के साथ घुटने से नीचे कुर्तियां पहनने के लिए कहा गया है। साथ ही कॉलेज प्रशासन ने शॉर्ट्स, स्लीवलेस या इसी तरह के अन्य कपड़े पहनने पर प्रतिबंध भी लगाया गया है। ये मामला हैदराबाद के प्रतिष्ठित सेंट फ्रांसिस का है।

नए नियम लागू होने के बाद जो छात्राएं आदेश का पालन नहीं कर रही हैं, उन्हें क्लास में आने की इजाजत नहीं दी गई। कॉलेज प्रशासन ने नया ड्रेस कोड 1 अगस्त से लागू कर दिया है। छात्राओं ने इसका विरोध किया और वीडियो बनाया। नए नियम को लेकर छात्राओं का कहना है कि ऐसे वक्त में जब हम महिला सशक्तीकरण के बारे में बात की जा रही है तो इस तरह का फरमान जारी करना अभियान के खिलाफ है।

सेंट फ्रांसिस कॉलेज के एक पूर्व छात्रा ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि कॉलेज ने सत्र के बीच में नए ड्रेस कोड का ऐलान किया गया है। छात्रा ने कहा कि छात्र प्रतिनिधियों को बताया गया था कि लंबी कुर्ती पहनने से शादी के अच्छे प्रस्ताव मिलेंगे। पूर्व छात्रा ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि कॉलेज के अधिकारियों ने छात्र प्रतिनिधियों से कहा कि इस आदेश के खिलाफ आवाज उठाना ठीक नहीं है।

छात्रा ने अपनी पोस्ट में कहा कि घुटने से थोड़ी सी भी ऊंची कुर्ती पहनने पर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। पूर्व छात्रा ने कहा कि जो भी छात्राएं नए नियम का पालन नहीं कर रही हैं उन्हें कॉलेज के बाहर खड़ा कर दिया जाता है। जिसकी वजह से वह क्लास नहीं कर पा रही हैं।

छात्राओं की कुर्ती की लंबाई नापने के लिए कॉलेज में महिला सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था की गई है। वह छात्राओं के आईडी कार्ड की जांच करती हैं और उनकी कुर्तियां भी खींचती हैं। छात्राएं नए ड्रेस कोड नियम के खिलाफ सोमवार से प्रदर्शन करेंगी।

CIA कबूतरों से यूं करवाती थी जासूसी

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अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने शीत युद्ध के दौरान इस्तेमाल की गई ख़ुफ़िया तकनीक से पर्दा उठाया है.

सीआईए ने बताया है कि किस तरह वह कबूतरों को ट्रेनिंग देकर उन्हें जासूसी के लिए तैयार करता था.

कबूतरों को सिखाया जाता था कि वो सोवियत संघ के संवेदनशील इलाक़ों में पहुंचकर वहां गुप्त तरीक़े से तस्वीरें खींच सकें.

सीआईए ने यह भी बताया है कि कबूतरों को खिड़कियों के पास उपकरण रखने की ट्रेनिंग भी दी जाती थी. कबूतरों के अलावा डॉल्फिन का इस्तेमाल भी किया जाता था.

सीआईए का मानना है कि ये जानवर एजेंसी के खुफ़िया मिशन को सफ़ल करने में काफ़ी फायदेमंद साबित होते हैं.

वर्जिनिया में सीआईए का मुख्यालय है, उसके भीतर एक म्यूज़ियम भी है, जिसे अब आम जनता के लिए बंद कर दिया गया है.

मैंने एक बार उस म्यूज़ियम के तत्कालीन निदेशक का इंटरव्यू किया था और वहां बहुत सी हैरान करने वाली चीज़ें देखी थीं.

मैंने देखा था कि वहां एक कबूतर का मॉडल रखा था जिस पर एक कैमरा बांधा गया था.

मैं उन दिनों द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ी एक किताब लिख रहा था जिसके लिए मैं ब्रिटेन की ओर से कबूतरों के इस्तेमाल की जानकारी जुटा रहा था.

सीआईए के म्यूज़ियम में कबूतर के मॉडल पर बंधे कैमरे को देख मेरी दिलचस्पी बढ़ गई. उस समय उन्होंने इस बारे में मुझे ज़्यादा जानकारी नहीं दी थी.

1970 में हुए ऑपरेशन का कोड नाम ‘टकाना’ रखा गया था. इस अभियान में कबूतरों का इस्तेमाल तस्वीरें खींचने के लिए किया गया.

कबूतरों का ख़ुफ़िया मिशन में इस्तेमाल

कबूतरों की एक ख़ासियत ये है कि उनकी याददाश्त बहुत अच्छी होती है. इसके साथ ही कबूतर बहुत ही आज्ञाकारी जीव भी है.

उन्हें किसी भी इलाक़े से उड़ाया जाए, वो मीलों की दूरी तय कर दोबारा घर लौट आने की कला जानते हैं. यही वजह थी कि सीआईए कबूतरों को गुप्त मिशन में इस्तेमाल करता था.

हालांकि, कबूतरों को पोस्टमैन के तौर पर इस्तेमाल करने की बात हज़ारों साल पहले से सुनने में आती है. लेकिन, उन्हें जासूसी के कामों में इस्तेमाल करने का पहला प्रयोग प्रथम विश्व युद्ध में देखने को मिला.

द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटिश खुफ़िया विभाग की एक कम जानी मानी ब्रांच एमआई 14 (डी) ने खुफ़िया कबूतर सर्विस शुरू की थी.

इस सर्विस के दौरान कबूतरों को किसी डिब्बे में रखकर पैराशूट से बांधकर यूरोप के आसमान में छोड़ दिया जाता था. इन कबूतरों के साथ कुछ सवालों का पुलिंदा भी रखा होता था.

जानकारी के मुताबिक़, तकरीबन एक हज़ार से ज़्यादा कबूतर खुफ़िया जानकारी जुटाकर वापस लौट आए थे, इसमें वी1 रॉकेट को लॉन्च करने वाली जगह और जर्मन रेडार स्टेशन की जानकारी तक शामिल थी.

युद्ध के बाद ब्रिटेन के ख़ुफ़िया विभागों की संयुक्त कमिटी में ‘कबूतरों की सब कमिटी’ बनाई गई थी. इस कमिटी में शीत युद्ध के दौरान कबूतरों का और बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने पर विचार किया गया था.

सीआईए ने किया भरपूर प्रयोग

हालांकि, बाद में ब्रिटेन के अधिकतर अभियान बंद कर दिए गए थे लेकिन सीआईए ने कबूतरों की ताक़त को पहचानते हुए उसका बेहतर इस्तेमाल करने पर विचार किया.

ऑपरेशन टकाना के दौरान कई दूसरे जानवरों के इस्तेमाल के बारे में भी पता चलता है. फाइलों में बताया गया है कि सीआईए ने एक कौए को इस तरह ट्रेनिंग दी थी कि वह 40 ग्राम भार वाली वस्तु को किसी इमारत की खिड़की पर रख सकता था.

एक लाल लेज़र लाइट के ज़रिए टारगेट को मार्क किया जाता था और एक खास लैंप के ज़रिए पक्षी वापस आ जाता था. एक बार यूरोप में, सीआईए ने पक्षी के ज़रिए एक इमारत की खिड़की पर जासूसी उपकरण रखवाया था.

इसके साथ ही सीआईए यह भी देखता रहता था कि क्या विस्थापित होने वाले पक्षियों की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि सोवियत संघ केमिकल हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है या नहीं.

इसी तरह की ट्रेनिंग कुत्तों को भी दी जाती थी. हालांकि, इस संबंध में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. एक पुरानी रिपोर्ट में बताया गया है कि ‘अकाउस्टिक किट्टी’ नामक ऑपरेशन में एक बिल्ली में ऐसा उपकरण लगाया गया था जो आवाज़ें सुन और रिकॉर्ड कर सकता था.

वहीं, 1960 की फ़ाइलें बताती हैं कि सीआईए ने दूसरे देशों के बंदरगाहों पर जासूसी के लिए डॉल्फिन का इस्तेमाल भी किया है. पश्चिमी फ़्लोरिडा में दुश्मन के जहाज़ पर हमले के लिए डॉल्फिन को तैयार किया गया था.

इसके साथ ही डॉल्फिन को यह भी सिखाया गया कि वह समुद्र में न्यूक्लियर पनडुब्बी का पता लगा सके या फिर रेडियोएक्टिव हथियारों की पहचान कर सके.

साल 1967 से सीआईए अपने तीन कार्यक्रमों पर 6 लाख डॉलर से ज़्यादा पैसा खर्च कर रही है. इसमें डॉल्फिंस, पक्षी, कुत्ते और बिल्लियों का इस्तेमाल शामिल है.

एक फ़ाइल में बताई गई जानकारी के मुताबिक, कनाडाई बाज़ों का इस्तेमाल भी खुफ़िया जानकारी जुटाने के लिए किया जाता था. इससे पहले कोकाटू (तोते की एक प्रजाति) का इस्तेमाल होता था.

लेखक इस बारे में बताते हैं, ”पूरी तरह से अंधेरे में होने वाले अभियानों में ये जीव कारगर साबित होते थे.”हाल के वक़्त में अमरीकी नोसैना ने अपने अभियानों में डॉलफिन का इस्तेमाल किया है.

कबूतर सबसे प्रभावशाली

सीआईए ने अपने अभियानों के लिए बहुत से जानवरों का इस्तेमाल किया. उसने पाया कि इन सभी में कबूतर सबसे ज़्यादा प्रभावी जीव है.

इसी वजह से 1970 के मध्य में सीआईए ने कबूतरों से जुड़ी एक सिरीज़ शुरू कर दी. कबूतरों को दूसरे अभियानों मे भी इस्तेमाल किया जाने लगा. जैसे, एक कबूतर को जेल के ऊपर तैनात कर दिया तो दूसरे को वॉशिंगटन डीसी में नौसेना के बाड़े में.

इन अभियानों में इस्तेमाल होने वाले कैमरों की कीमत दो हज़ार डॉलर तक आती थी जिसका वज़न सिर्फ़ 35 ग्राम होता था, वहीं कबूतर से बांधने के लिए जिस चीज़ का प्रयोग होता था उसका वज़न तो 5 ग्राम से भी कम था.

टेस्ट में पता चला है कि कबूतरों ने नौसेना के बाड़े से 140 तस्वीरें प्राप्त की, जिसमें से आधी तस्वीरें अच्छी क्वालिटी की थीं. इन तस्वीरों में गाड़ियां और इंसान बहुत साफ देखे जा सकते थे.

विशेषज्ञों ने यह भी पाया कि उसी दौरान जो तस्वीरें खुफ़िया सैटेलाइट ने मुहैया करवाई थीं उनकी क्वालिटी इनके सामने बहुत अच्छी नहीं थी.

हालांकि, कबूतरों के इस्तेमाल में एक डर यह था कि अगर किसी शख्स को उस पर शक़ हो जाए और वह उसे मार दे तो पूरे अभियान में गड़बड़ी आ सकती थी.

कबूतरों को सोवियत संघ में छोड़ने के लिए बहुत गुप्त तरीके अपनाए जाते थे. उन्हें जहाज़ के रास्ते छिपाकर मॉस्को लाया जाता. उसके बाद उन कबूतरों को किसी कोट के नीचे दबाकर, या किसी कार की छत में छेद कर बाहर छोड़ा जाता था.

इसके अलावा चलती हुई गाड़ी की खिड़की से भी कबूतरों को छोड़ने की कोशिश की जाती. कबूतर इसके बाद अपने टारगेट के करीब जाता और वहां काम पूरा होने के बाद ट्रेनिंग के अनुसार अपने घर की ओर लौट आता.

सितंबर 1976 के एक मेमो के अनुसार लेनिनग्राद में एक समुद्री जहाज़ के बेड़े को निशाना बनाया गया था, यहां सबसे आधुनिक सोवियत पनडुब्बियां तैयार होती थीं.

इन जासूस कबूतरों ने सीआईए को कितनी खुफ़िया जानकारियां दीं और इससे सीआईए को क्या-क्या फायदा हुआ, यह अब भी रहस्य ही बना हुआ है.

मदरसे में जंजीर से बांधकर रखे गए दो बच्चों को पुलिस ने छुड़ाया

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एक प्राइवेट मदरसे में दो नाबालिग बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने मामले में मैनेजर सहित दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस ने बताया है कि आरोपियों ने दो बच्चों को मदरसे में जंजीर से बांध रखा था। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बच्चों को आरोपियों के चंगुल से छुड़ाया।

असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (एएसपी) संजय साहू ने बताया है कि, उन्हें सूचना मिली थी कि मदरसा प्रबंधन दो बच्चों के साथ बुरा व्यव्हार कर रहा है। चाइल्डलाइन सर्विस ने इसको लेकर अशोका गार्डेन पुलिस से संपर्क किया था। इसे फॉलो करते हुए पुलिस ने प्रकरण में जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट के सेक्शन 75 और 85 के तहत मामला दर्ज किया। साहू ने बताया कि छात्रों के साथ बुरा व्यव्हार करने पर मदरसा प्रबंधन के दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

एएसपी ने बताया है कि गिरफ्तार किए गए मोहम्मद साद और सलमान को अदालत में पेश किया जाएगा। एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया है कि नाबालिग बच्चों ने मदरसे से भागने का प्रयास किया था। इसकी सजा के तौर पर प्रबंधन ने उन्हें जंजीर से बांध रखा था। मदरसा के प्रबंधन ने बताया कि दोनों छात्र पूर्व में भी मदरसा से भागने का प्रयास कर चुके थे, इसलिए उन्हें बांधकर रखा गया था।

गरीबों को फ्री में इडली-सांभर खिलाती हैं फुटपाथ पर दुकान चलाने वाली यह महिला

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तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक रुपए में इडली बेचने वाली अम्‍मा कमलाथल ने बीते दिनों खूब चर्चा बटोरी. इसके बाद अब अग्नि तीर्थम में रहने वाली एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला की अदम्य भावना सामने आई है. रामेश्वरम के नजदीक फुटपाथ पर दुकान चलाने वाली यह महिला गरीबों को मुफ्त में इडली खिलाती हैं।

रानी ने बताया कि वह इडली की एक थाली के लिए 30 रुपये लेती हैं, लेकिन ग्राहकों पर पैसे के लिए जोर नहीं डालतीं. जिनके पास पैसा नहीं है, उन लोगों को फ्री में इडली खिलाती हैं. वह अभी भी खाना पकाने के लिए ईंधन के रूप में लकड़ी के चूल्हे का ही इस्तेमाल करती हैं।

इस बॉलीवुड एक्ट्रेस को हुई ये गंभीर बीमारी, ट्विटर पर लिखा- सुबह पैरों में घाव मिलते हैं…

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बॉलीवुड एक्ट्रेस इलियाना डिक्रूज का अपने ब्वॉयफ्रेंड एंड्रयू नीबोन के साथ ब्रेकअप हो गया है और ब्रेकअप के बाद से ही वो खबरों में बनी हुई हैं। ब्रेकअप के बाद इलियायान ने सोशल मीडिया पर भी एंड्रयू नीबोन को अनफॉलो कर दिया है। इन सबके बीच इलियाना डिक्रूज को एक गंभीर बीमारी हो गई है और इस बीमारी का खुलासा उन्होंने खुद ट्विटर पर किया है। दरअसल इलियाना ने ट्वीट कर बताया है कि उन्हें नींद में चलने की बीमारी हो गई है और इसकी वजह से उनके पैरों में घाव हो जाते हैं। इलियाना की इस बीमारी की खबर सुनकर उनके फैंस भी काफी हैरान हैं।’सुबह मेरे पैरों में सूजन या घाव दिखते हैं’

इलियाना डिक्रूज ने ट्वीट करते हुए बताया, ‘मैं ये बात अब पूरी तरह मान चुकी हूं और आश्वस्त हूं कि मैं नींद में चलती हूं। करीब-करीब… शायद… शायद ऐसा ही है… सुबह उठने पर जब रहस्यमय ढंग से मेरे पैरों में सूजन या घाव दिखते हैं तो ये बात समझने का और कोई तरीका मेरे पास नहीं बचता।’ इलियाना डिक्रूज का ये ट्वीट देखकर उनके कुछ फैंस काफी परेशान हो गए और उन्हें तुरंत किसी डॉक्टर से मिलने की सलाह दी। वहीं उनके कुछ फैंस ने उन्हें कमरे में डोर अलार्म और इनडोर कैमरा लगाने की भी सलाह दी।

यूजर ने लिखा, भूत का असर हो सकता है

इलियाना डिक्रूज के ट्वीट पर एक यूजर ने लिखा, ‘जब आप सोकर उठती हैं तो खुद को किसी और जगह पाती हैं या उसी जगह, जहां आप सोई थी। अगर आप खुद को किसी और जगह पाती हैं तो यह नींद में चलने की बीमारी है, लेकिन अगर आप उसी जगह होती हैं, तो फिर आप भूत-बाधा की शिकार हैं।’ एक अन्य यूजर ने उनके ट्वीट पर कमेंट किया, ‘आप सोने से पहले अपने तकिए और बिस्तर के कोनों को ठीक से चेक किया कीजिए।’ इसी तरह से कुछ और यूजर्स ने भी उनके ट्वीट पर कमेंट किए हैं।

जल्द आने वाली है इलियाना की ये फिल्म

आपको बता दें कि इलियाना डिक्रूज इन दिनों अनीस बज्मी की फिल्म ‘पागलपंती’ की शूटिंग में बिजी हैं। इस फिल्म में उनके साथ जॉन अब्राह्म, अनिल कपूर, कृति खरबंदा और उर्वशी रौतेला भी काम कर रहे हैं। इससे पहले वो हाल ही में तेलुगु फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ और उससे पहले बॉलीवुड फिल्म रेड में नजर आईं थी।

यूजर ने पूछा वर्जिनिटी को लेकर सवाल

इससे पहले हाल ही में इलियाना डिक्रूज उस वक्त सुर्खियों में आईं थी जब सोशल मीडिया पर एक यूजर ने उनसे वर्जिनिटी को लेकर सवाल पूछ लिया। सवाल के जवाब में इलियाना ने उस यूजर की बोलती बंद कर दी थी। दरअसल इलियाना ने अपने फैंस के लिए ‘कुछ भी पूछो (Ask Me Anything)’ सेशन रखा था। इस दौरान इलियाना से एक सवाल ऐसा पूछा गया जिससे वो नाराज हो गईं और यूजर को करारा जवाब दिया। यूजर ने इलियाना से पूछा, ‘आपने वर्जिनिटी कब खोई थी? सवाल पर इलियाना ने जवाब दिया, ‘तुम्हारी मां क्या कहेंगी।’

युवक की मौत पर गांव में मचा हड़कंप..परिजनों ने हत्या की आशंका जताई

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मुज़फ्फरनगर। सोमवार को दिन निकलते ही युवक की मौत पर गांव में हड़कंप मच गया। युवक के परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। मौके पर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे हैं।जानकारी के अनुसार मुज़फ्फरनगर के थाना शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव कल्लरपुर गांव में दिन निकलते ही एक युवक की उसी के घर में हुई मौत पर ग्रामीणों में हड़कंप मच गया।

सूचना पुलिस को भी दी गई जिस पर थाना प्रभारी नगर कोतवाली सहित पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी मौके पर जा पहुंचे। जहां मृतक के परिजनों ने गांव के ही युवकों पर युवक की हत्या करने की आशंका जताई है। तो वहीं पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और आगे की कार्यवाही शुरू कर दी है।।

धारा 370: सुप्रीम कोर्ट ने दी गुलाम नबी आजाद को कश्मीर जाने की इजाजत, केंद्र को नोटिस

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उच्चतम न्यायालय ने आज अुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के बाद दाखिल हुई कई याचिकाओं पर सुनवाई की। जिसमें एमडीएमके के अध्यक्ष वाइको ने नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की रिहाई को लेकर याचिका दाखिल की थी। जिसपर अदालत ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर को नोटिस जारी किया। इसके अलावा कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक ने घाटी में समाचार पत्र निकालने को लेकर हो रही परेशानी पर याचिका दायर की थी। वहीं एक याचिका में दावा किया गया था कि घाटी के लोगों को चिकित्सा सेवाएं नहीं मिल रही हैं। सभी याचिकाओं पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा।

वाइको की याचिका पर केंद्र और जम्मू-कश्मीर को जारी हुआ नोटिस

उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला को न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से सोमवार को जवाब मांगा। अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा रद्द किए जाने के बाद से कथित रूप से हिरासत में हैं। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे एवं न्यायमूर्ति एस ए नजीर की पीठ ने केंद्र और राज्य को नोटिस जारी किया और राज्यसभा सांसद एवं एमडीएमके नेता वाइको की याचिका पर सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की। वाइको ने कहा कि वह पिछले चार दशकों से अब्दुल्ला के निकट मित्र हैं। वाइको ने दावा किया कि नेशनल कांफ्रेंस के नेता को ‘बिना किसी कानूनी अधिकार के अवैध हिरासत’ में लेकर, उन्हें संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों से वंचित रखा गया। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए चयनात्मक आधार पर प्रतिबंध हटाए जाएंगे।

समाचार पत्र निकालने में मुश्किल

शीर्ष अदालत में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने को लेकर दायर याचिका में एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालत को बताया कि मीडियाकर्मियों को उनके काम के लिए लैंडलाइन और कई अन्य संचार सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। कश्मीर स्थित सभी समाचार पत्र चल रहे हैं और सरकार हरसंभव मदद मुहैया करा रही है। प्रतिबंधित इलाकों में पहुंच के लिए मीडिया को ‘पास’ दिए गए हैं और पत्रकारों को फोन और इंटरनेट की सुविधा भी मुहैया कराई गई है। दूरदर्शन जैसे टीवी चैनल और अन्य निजी चैनल, एफएम नेटवर्क काम कर रहे हैं। याचिका में कहा गया था कि कश्मीर से समाचार पत्र निकालने में मुश्किल हो रही है। जिसका सरकार की तरफ से एटॉर्नी जनरल ने जवाब दिया।

लोगों को नहीं मिल रही चिकित्सा सुविधा

उच्चतम न्यायालय में कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन ने दायर याचिका में दावा किया कि लोगों को चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है। जिसके जवाब में एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि पूरे जम्मू और कश्मीर के 5.5 से ज्यादा लोग इलाज के लिए ओपीडी जा चुके हैं। उन्होंने भसीन के दावे को सिरे से खारिज किया।

तारिगामी की हिरासत का नहीं दिया कोई आदेश

उच्चतम न्यायालय ने माकपा नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी को अपने गृह राज्य जम्मू-कश्मीर वापस जाने की सोमवार को अनुमति दे दी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबडे एवं एसए नजीर की पीठ ने कहा कि यदि एम्स के चिकित्सक उन्हें अनुमति दें तो पूर्व विधायक को घर जाने के लिए किसी की अनुमति आवश्यक नहीं है। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि उनका वाहन उनसे ले लिया गया है और वह अपने घर तक सीमित रहेंगे। बीमार नेता को न्यायालय के आदेश के बाद नौ सितंबर को एम्स में भर्ती कराया गया था।

राजनांदगांव : पैरावट में छिपाकर रखा था अवैध शराब, आरोपित गिरफ्तार

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डोंगरगांव के लतमर्रा में अवैध शराब बेचने वाले दानीलाल निर्मलकर को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी दानी लाल प्लास्टिक बोरी में अवैध शराब को पैरावट में छुपाकर रखा था। मुखबीर की सूचना पर पुलिस ने आरोपित के घर में दबिश देकर अवैध शराब को जब्त कर लिया। आरोपी के पास से 65 पौवा अंग्रेजी शराब जब्त किया गया है।

लंबे समय से मिल रही थी शिकायत

डोंगरगढ़ के लतमर्रा में लंबे समय से अवैध शराब बिकने की शिकायत मिल रही थी। शिकायत के बाद रविवार को पुलिस ने आरोपी के घर में दबिश देकर पैरावट में रखे 65 पौवा शराब को जब्त किया। शराब की कीमत 5200 रुपये है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 34 के तहत मामला पंजीबश्र कर जेल भेज दिया है। पुलिस की रेड कार्रवाई के बाद क्षेत्र के कोचियों में हड़कंप मचा हुआ है।

बारिश के बाद भी रैन वाटर हार्वेस्टिंग का टारगेट पूरा नहीं कर पाया भिलाई निगम

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गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने वाला भिलाई निगम सितंबर में हुई भरपूर पानी को बचा नहीं पाया। यही नही रैन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर जो टारगेट तय किया था उसे भी पूरा नहीं किया जा सका।

बता दें कि भिलाई नगर निगम ने गर्मी के दिनों में ही रैन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए टारगेट फिक्स किया था। सभी जोन आयुक्तों को टारगेट पूरा करने के लिए कहा गया था। स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी जागरुकता अभियान चलाकर लोगों को समझाइश दी थी, पर इसका भिलाई निगम में कहीं कोई असर नहीं दिखा।

जब्त की गई थी राशि

भिलाई निगम ने रैन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं लगाने वाले लोगों की राशि राजसात की थी। भिलाई निगम के पास तकरीबन 65 करोड़ रुपये इकट्ठा हुआ था। जब्त राशि के माध्यम से रैन वाटर हार्वेस्टिंग बनाने का प्रयास किया गया था, पर इसमें भी पूरी तरह सफलता नही मिली।

चार सौ फीट नीचे जा चुका है पानी

पर्यावरण वैज्ञानिक शम्स परवेज के मुताबिक भिलाई में पानी की स्थिति बेहद खराब है। हालात गंभीर है। पानी चार सौ फीट से ज्यादा नीचे चला गया है। तीन सौ फीट से नीचे का पानी एक तरह से धीमा जहर का काम करता है। बीते दस सालों क्लाइमेट चेंज होने की वजह से ये स्थिति बनी है।

लगातार तबादले से पिछड़े

पूर्व आयुक्त एसके सुंदरानी ने सभी जोन आयुक्तों को पांच-पांच हजार रैन वाटर हार्वेस्टिंग बनाने का टारगेट दिया था। साथ ही उन्होंने कार व बाइक वसिंग सेंटर वालों को नोटिस जारी कर वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य किया था। दरअसल गर्मी के दिनों में लगातार दो महीने तक वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर अभियान चलाया जा रहा था। आयुक्त सुंदरानी के तबादले के बाद लगातार जोन आयुक्त के तबादले होते रहे। लगातार तबादले की वजह से भिलाई निगम रैन वाटर हार्वेस्टिंग टारगेट को पूरा नहीं कर पाया।

पांच साल के लिए सहेजा जा सकता था पानी

सितंबर के पहले पखवाड़े में जमकर बारिश हुई। जमीन में रिसने वाली झड़ी भी लगी। जिसके चलते वाटर लेबल बढ़ गया, पर जो लाखों गैलन पानी बे फिजूल बह गया, उसे बचाया जा सकता था। भिलाई निगम ने इसी पर फोकस किया था। पर आखिरी में लापरवाही कर दी गई। यदि इस पानी को ही बचा लिया जाता तो आगामी पांच साल तक भूजल को लेकर परेशानी नहीं होती।

रैन वाटर हार्वेस्टिंग पर लगातार काम चल रहा है। जो जोन पिछड़ गए हैं, उन्हें आयुक्त ने काम में तेजी लाने तथा टारगेट पूरा करने के लिए कहा है।

-पीसी सार्वा, पीआरओ

नगर निगम भिलाई