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छत्तीसगढ़ : सरकारी स्कूल में दस साल से नहीं बंटा स्पोर्ट किट

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सरकारी स्कूल के बच्चे पढ़ाई में तो पिछड़ ही रहे हैं, खेल में भी फिसड्डी होते जा रहे हैं। वजह सिस्टम की नाकामी को कह सकते हैं। दरअसल बीते करीब दस साल से भिलाई निगम द्वारा संचालित सरकारी स्कूलों में स्पोर्टस किट ही नहीं दिया गया है। संसाधनों के अभाव में खेल प्रतिभाओं पर असर पड़ रहा। नेशनल व राज्य स्तरीय खेल में डंका बजाने वालों का आंकड़ा अपेक्षित कम हुआ है।

ऐसा नहीं है कि भिलाई नगर निगम के पैसा स्पोर्टस किट देने के लिए पैसा न हो। बता दें कि भिलाई नगर निगम हर संपत्तिकर दाता से शिक्षा उपकर के नाम पर भी टैक्स लेता है। दावा किया जाता है कि इस टैक्स के पैसे का इस्तेमाल स्कूल के विकास के लिए किया जाता है। जब सरकारी स्कूलों का कितना विकास हो रहा है यह साफ तौर पर देखा जा सकता है। इन स्कूलों का भवन तक संधारण नहीं किया जा रहा है। जेपी नगर स्कूल के संधारण के लिए पालकों को आंदोलन तक करना पड़ गया था।

दस साल से नहीं मिला किट

भिलाई नगर निगम द्वारा संचालित सरकारी स्कूलों में 2009 के बाद किट नहीं दिया गया। जबकि भिलाई नगर निगम क्षेत्र में 140 सरकारी स्कूल संचालित है। इन स्कूलों से कोई भी बच्चा न तो पढ़ाई में टॉप कर पा रहा है। न खेल में नाम कमा पा रहा है।

इनके कार्यकाल में बंटा था किट

भिलाई नगर निगम निर्माण के बाद तत्कालीन महापौर नीता लोधी, तथा उसके बाद महापौर बने विद्यारतन भसीन के कार्यकाल में हर साल सभी स्कूलों में स्पोर्टस किट बंटता रहा। 2009 के बाद से यह बंद हो गया।

नहीं निकल रहे प्रतिभाशाली बच्चे

दस साल से स्पोर्टस किट नहीं दिए जाने का मतलब आप समझ सकते हैं। भिलाई निगम स्पोर्टस पर ध्यान नहीं दे रहा है। यही वजह है कि इन स्कूलों से अब प्रतिभाशाली बच्चे नहीं निकल रहे हैं।

2009 के बाद से नहीं दिया ध्यान

2009 में भिलाई निगम में चुनावी तैयारी शुरू हो गई थी। 2010 में कांग्रेस की निर्मला यादव व 2015 में कांग्रेस के देवेंद्र यादव ने चुनाव जीता। 2010 के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पोर्टस पर ध्यान ही नहीं दिया। यहां तक स्कूलों में होने वाले शाला स्तरीय प्रतियोगिता तक बंद हो गए। इसके लिए भिलाई निगम शिक्षा व खेल विभाग के अधिकारी ही जिम्मेदार है। पार्षदों ने भी कभी इसे लेकर आवाज नहीं उठाई।

दस साल में डेढ़ सौ बच्चों ने दिखाया दम

सन 2000 से 2009 तक भिलाई निगम के 140 स्कूलों में खेल को लेकर जागरुकता थी। फुटबॉल, दौड़, कबड्डी, खो-खो, बॉक्सिंग आदि खेलों में भिलाई निगम क्षेत्र के डेढ़ सौ से ज्यादा बच्चों ने नेशनल खेला। हालांकि नेशनल व स्टेट बच्चे अब भी खेल रहे हैं, पर संख्या लगातार अपेक्षित कम होती जा रही है।

भेजा है प्रस्ताव

प्रस्ताव भेजा गया है, पर बार-बार आयुक्त बदलने की वजह से थोड़ी दिक्कत हुई है। स्पोर्टस किट बच्चों को देना हमने प्राथमिकता में रखा है। जल्द दिया जाएगा।

-केशव बंछोर, प्रभारी शिक्षा विभाग

एमआईसी, नगर निगम भिलाई

भिलाई की सृष्टि यू ट्यूब से सीखकर बनीं मिस एवं मिसेज इंडिया, मां को भी दिलाया पुरस्कार

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भिलाई की सृष्टि साहू ने यू ट्यूब से जानकारी लेकर खुद को सौंदर्य स्पर्धा के लिए तैयार किया। इतना ही नहीं मुंबई में हुए मिस एवं मिसेज इंडिया प्रतियोगिता में खिताब भी हासिल किया। अपने साथ में अपनी मां को भी जीत का ताज पहनवाने में सफल रहीं।

भिलाई निवासी सृष्टि साहू एमजीएम में 12वीं की छात्रा है। सृष्टि ने बताया कि वह यू ट्यूब से मंच पर अपना परिचय देने का तरीका, चलना, अपने आपको तैयार करना, मेकअप करना आदि के टिप्स लिए और कड़ा अभ्यास किया।

सृष्टि ने प्रत्रवार्ता में बताया कि वह कक्षा आठवीं से ही मिस इंडिया बनने का कोशिश करती रही। इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया यू ट्यूब पर जानकारी लेना शुरू किया। सृष्टि ने 2019 में कलर्स मिस छत्त्तीसगढ़ मिस जूनियर सेंट्रल इंडिया भी जीता। वे अब आगे चल कर देश के गरीब बच्चे, महिलाएं एवं कुपोषित बच्चों के लिए काम करेगी। बीते सात सितंबर को मुंबई में आयोजित स्पर्धा में विभिन्न राज्यों से 60 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सभी ने बढ़चढ़ कर एक प्रतिभा दिखाई। सृष्टि ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी, वहीं बीएसपी मेडिकल में कार्यरत कौशिल्या देवी ने प्रेरणास्पद व्याख्यान प्रस्तुत किया। इसके अलावा

युएसए के परमार्थ फाउंडेशन द्वारा मिस एवं मिसेज इंडिया 2019 ग्रेड फिनाले का आयोजन 10 सितंबर को मुंबई में हुआ। इसमें कई राउंड हुए। अंत में सृष्टि और उसकी मां कौशिल्या देवी को जीत के ताज से नवाजा। कौशिल्या देवी ने कहा कि सृष्टि ने प्रतिदिन प्रशिक्षण देकर इस मुकाम तक पहुंचाया है।

पॉलीथिन का इस्तेमाल करने वालों को निगमायुक्त की चेतावनी, सुधर जाएं, वरना होगी कड़ी कार्रवाई

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प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग को रोकने की जिम्मेदारी जितनी दुकानदारों की है, उतनी ही उपभोक्ताओं की भी। रविवार को निगमायुक्त शिव अनंत तायल ने निगम, स्मार्ट सिटी की पूरी टीम शास्त्री बाजार में अचानक पहुंची। यहां निगम आयुक्त ने सीधे दुकानदारों से बातचीत की। इसके पहले कुछ समय रुककर देखा कि कौन-कौन पॉलीथिन का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ के पास से पॉलीथिन मिली, जब्त की गई और फिर इन्हें समझाइश दी गई। दुकानदारों को कड़े शब्दों में यह कहा गया कि सुधर जाएं, वरना कड़ी कार्रवाई होगी।

इस दौरान स्वयंसेवी संस्थाएं भी साथ थीं। निगमायुक्त ने सभी को कहा कि पहले हम बाजार को पॉलीथिन मुक्त करें, लोगों को समझाइश दें। इन्हें क़पडे से बने थैलों की सुविधा मुहैया करवाएं। इस दौरान थैले भी बांटें गए। अपर आयुक्त पुलक भट्टाचार्य, स्मार्ट सिटी के जीएम (तकनीकी) एसके सुंदरानी, जोन स्वास्थ्य अधिकारी और इंजीनियर्स भी साथ थे। कुछ दुकानदारों ने दुकान के लिए निर्धारित जगह के बाहर जाकर सड़क पर कब्जे किए, उन्हें भी हिदायत दी गई। कब्जों की वजह से सड़क सकरी हो गई थी, आवागमन में दिक्कत हो रही थी। खासकर फल दुकानदारों की वजह से।

निगम ने कहा कि अपने पुराने कपड़े हमें दें, थैले बनाएंगे- इस अभियान के तहत थैले बनाने के लिए निगम ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अपने पुराने जींस, साड़ी व चादर आदि निगम से जुड़ी संस्थाओं को मुहैया करवाएं, ताकि इनके थैले बनाकर बाजार में उपलब्ध करवाए जा सकें।

ये संस्थाएं दे रही हैं पॉलीथिन मुक्त शहर बनाने में योगदान- राग फाउंडेशन, कुछ फर्ज हमारा भी, जयश्री स्व सहायता समूह जैसी कुछ संस्थाएं नगर निगम के साथ मिलकर पॉलीथिन मुक्त शहर बनाने काम कर रही हैं। इन्हें तेलीबांधा परिसर, शास्त्री बाजार क्षेत्र को नो पॉलीथिन जोन बनाने का जिम्मा दिया गया है। इन्होंने काम शुरू भी कर दिया है। इसलिए इनके अभियान में अपनी भागीदारी अदा करें, पॉलीथिन बैग लेकर ही जाएं। अगर कोई इन बैग में सामान दे तो मना करें।

रायपुर : ट्रैफिक जाम फ्री यातायात है वार्ड की पहचान, मगर खतरनाक है टाटीबंध चौक

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महोबाबाजार बाजार अंडरब्रिज, हीरापुर अंडरब्रिज, महोबाबाजार ओवरब्रिज… इनके निर्माण इस पूरे क्षेत्र का यातायात बहुत सुगम हो गया है। ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक कम हुई है, वरना लोगों को रेलवे क्रासिंग पर ट्रेन के गुजरने तक लंबा इंतजार करना पड़ता था। कहा तो यह भी जाता है कि यह पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री के विधानसभा क्षेत्र का प्रमुख हिस्सा था इसलिए अच्छा विकास हुआ। खैर जो भी हो सुविधा तो जनता को मिल रही है। वार्ड के परिसीमन के बाद स्थिति वार्ड छोटा जरूर हुआ है, लेकिन बहुत ज्यादा नहीं।

मगर इस वार्ड की एक बहुत बड़ी चिंता है, जो पूरे शहर की चिंता बनी हुई है। वह है टाटीबंध चौक। इस चौक पर बीते डेढ़ साल में 31 जान जा चुकी हैं। जान गंवाने वाले में दोपहिया चालक अधिक हैं। इस चौक को व्यवस्थित करना सबसे बड़ी चुनौती है। हालांकि इस दिशा में पुलिस, नेशनल हाइवे अथॉरिटी (एनएच) काम कर रहे हैं। वार्ड की वर्तमान पार्षद गायत्री चंद्राकर हैं। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि आरक्षण में किसकी किस्मत का सितारा चमकता है।

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परिसीमन के बाद यह है वार्ड की स्थिति

उत्तर- टाटीबंध चौक से रिंग रोड नं. 02 से होते हुए हीरापुर चौक तक।

पूर्व- रिंग रोड नं. 2 से होते हुए हीरापुर चौक से महोबा बाजार जाने वाले रोड अंडरब्रिज बायपास रेलवे क्रासिंग तक।

दक्षिण- महोबाबाजार अंडरब्रिज बायपास रेलवे क्रासिंग से शिवाजी नगर रेलवे लाइन से महोबाबाजार ओवरब्रिज तक।

अब तक छत्तीसगढ़ में 1120 मिमी बारिश, औसत से 23 कम

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आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में इस साल अच्छी बारिश हुई है। अब तक 1,120 मिमी बारिश रिकॉर्ड हो चुकी है, जो बीते 8-10 सालों की औसत बारिश के आंकड़े 1,143 मिमी से सिर्फ 23 मिमी कम है। एक-दो सिस्टम बन गए तो समझिए ये आंकड़ा बड़ी आसानी से पार हो जाएगा, लेकिन चिंता उन पांच जिलों की है, जहां कम बारिश हुई है। अगर 12 अक्टूबर मौसम की वापसी के दिन तक बरसात नहीं होती है इन सभी 12 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा सकता है।

बहरहाल मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अभी हफ्ते भर बारिश नहीं होगी, लेकिन एक सिस्टम 23-24 तक सक्रिय होकर छत्तीसगढ़ को प्रभावित करेगा। अभी तो रात का पारा 24.6 डिग्री है, लेकिन दिन का 32 डिग्री। जो अधिक है, गर्मी का अहसास करा रहा है।

रायपुर में तो रविवार को धूप भी खिली रही। बांधों में पर्याप्त पानी पं. रविशंकर शुक्ल जलाशय यानी धमतरी स्थित गंगरेल बांध 64.89 फीसद भर चुका है। इसी प्रकार प्रदेश के अन्य 11 बांधों भी अच्छा पानी भर गया है, जो प्रदेश को गर्मी में भी प्यासा नहीं रहने देगा। यह पानी खेती में भी इस्तेमाल होगा, तब भी जलापूर्ति पर्याप्त होती रहेगी। बस हमें पानी का दुरुपयोग कम करना होगा।

15 अक्टूबर से ठंड की दस्तक बीते तीन दिनों में प्रदेश के कुछ ही क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी हुई है। यही वजह है कि पारा भी चढ़ना शुरू हो गया है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, जगदलपुर का तापमान 30 से 32 डिग्री तक जा पहुंचा है। जैसे-जैसे बरसात की विदाई होगी, पारा चढ़ेगा। 15 अक्टूबर से ठंड की दस्तक भी शुरू हो जाएगी।

चार जिले जहां औसत से कम बारिश

जशपुर (-20), जांजगीर (-20), कोरबा (-23), मुंगेली (-22) और सरगुजा (-41)। अब इन जिलों की किस्मत पूरी तरह से मौसम की मेहरबानी पर निर्भर करेगी। अगर सिस्टम बन जाएंगे, इन क्षेत्रों पर बरस जाएंगे तो ठीक वरना ये सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित होंगे। बरसात न होने की वजह से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र सरगुजा संभाग है।

– अभी अगले चार-पांच दिन तो कोई सिस्टम नहीं है, लेकिन एक सिस्टम बंगाल की खाड़ी में बन रहा है। जो 23-24 तक सक्रिय हो सकता है। मध्य छत्तीसगढ़ को प्रभावित कर सकता है, लेकिन अभी तो वक्त है। – एचपी चंद्रा, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानी लालपुर मौसम विज्ञान केंद्र

छत्तीसगढ़ सरकार जमा करती है मुख्यमंत्री और मंत्रियों का आयकर

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छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री समेत पूरे मंत्रिमंडल का आयकर राज्य सरकार जमा करती है। विधायकों को अपनी व्यवस्था खुद करनी पड़ती है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के नियमों में इसका प्रावधान है। नियमानुसार जीएडी पूरे मंत्रिमंडल के सदस्यों की आयकर की फाइल मेंटेन करती है। सीधे मंत्रिमंडल का मामला होने की वजह से उनके आयकर के रूप में जमा की जाने वाली राशि को लेकर अफसर कुछ भी बताने से बचते हैं।

जीएडी के अफसर कहते हैं कि यह नियम राज्य को विरासत में मिला है। हम उसका अब तक पालन कर रहे हैं। राज्य में विधायकों का वेतन 20 हजार है। कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री को क्रमश: 30 और 28 हजार रुपए मिलता है।

वहीं, मुख्यमंत्री को सबसे ज्यादा 35 हजार स्र्पये हर महीने वेतन मिलता है। अब इसमें निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, दैनिक भत्ता, मेडिकल, टेलीफोन आदि शामिल कर दिया जाए तो आंकड़ा लाख स्र्पये के पार पहुंच जाता है। राज्य में विधायकों को कुल एक लाख 10 हजार, कैबिनेट मंत्री को एक लाख 60 हजार, राज्य मंत्री को एक लाख 58 हजार और मुख्यमंत्री को एक लाख 65 हजार स्र्पये हर महीने मिलता है।

फिलहाल राज्य मंत्री और संसदीय सचिव नहीं

राज्य सरकार में फिलहाल राज्य मंत्री और संसदीय सचिव नहीं है। नियमानुसार इन पदों के लिए वेतन तय कर रखा गया है। संसदीय सचिव को एक लाख 51 हजार स्र्पये मासिक देने का प्रावधान है। पूववर्ती सरकार में करीब एक दर्जन विधायकों को संसदीय सचिव बनाया गया था।

वेतन- भत्ता के साथ कई सुविधाएं

मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट के बाकी सहयोगियों को तो सरकार बंगला गाड़ी समेत कई सुविधा देती हैं। विधायकों को भी कुछ कम सुविधाएं नहीं मिलती। सभी विधायकों को राजधानी में आवास की सुविधा दी जाती है। बसों मंे मुफ्त के साथ हर वर्ष चार लाख स्र्पये तक ही हवाई और रेल यात्रा की सुविधा भी दी जाती है।

दो करोड़ हुई विधायक निधि

छत्तीसगढ़ में इसी वर्ष विधायक निधि की राशि को एक करोड़ से बढ़ाकर दो करोड़ स्र्पये किया गया है। इस निधि का उपयोग केवल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किया जा सकता है, व्यक्तिगत नहीं। प्राय: इस राशि का उपयोग उन सार्वजनिक हित के कार्यों में किया जाता है तो सरकार की किसी योजना में नहीं आ पाती हैं।

एक बार बने माननीय तो बाकी जिंदगी कटती है आराम से

एक बार विधायक चुनकर माननीय बन गए तो बाकी पूरी जिंदगी आराम से कटती है। विधायकी खत्म होने के बाद पहले पहले पांच वर्ष के लिए 20 हजार मासिक पेंशन है।

इसके बाद छह से 10 वर्ष के लिए प्रत्येक वर्ष का तीन सौ, 11 से 15 साल के लिए प्रत्येक वर्ष का चार सौ और 16 या उससे अधिक प्रत्येक वर्ष के लिए पांच सौ मासिक अतिरिक्त पेंशन दी जाएगी। चिकित्सा सुविधा के साथ बसों में मुफ्त सफर, दो लाख स्र्पये तक हवाई और रेल यात्रा हर वर्ष करने की छूट रहती है। इसके अतिरिक्त अन्य कई सुविधाएं भी मिलती हैं।

सीएम व मंत्रियों का वेतन

विवरण मुख्यमंत्री मंत्री राज्यमंत्री संसदीय सचिव

वेतन 35 हजार 30 हजार 28 हजार 21 हजार

निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 40 हजार 40 हजार 40 हजार 40 हजार

दैनिक भत्ता दो हजार दो हजार दो हजार दो हजार

विधायकों का वेतन

वेतन 20 हजार

निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 30 हजार

दूरभाष भत्ता पांच हजार

अर्दली भत्ता 15 हजार

चिकित्सा भत्ता 10 हजार

दैनिक भत्ता एक हजार

विधायकों को मिलने वाली अन्य सुविधाएं

– विधान सभा के सत्र व समितियों की बैठक में शामिल होने के लिए एक हजार स्र्पए अतिरिक्त दैनिक भत्ता दिया जाता है। यह भत्ता बैठक के एक दिन पहले और बाद के लिए भी दिया जाता है।

– सत्र व समिति की बैठकों में आने जाने के लिए 10 स्र्पये प्रति किलोमीटर की दर से वाहन भत्ता दिया जाता है, लेकिन इसका भुगतान तभी किया जाता है, जबकि गाड़ी विधायक के नाम पर हो।

– विधायकों का 10 लाख का दुर्घटना बीमा कराया गया है।

– एक वित्तीय वर्ष में एक सहयोगी के साथ रेल व हवाई यात्रा के लिए चार लाख का कूपन दिया जाता है।

– विधायकों को राज्य के अंदर एक सहयोगी के साथ निजी बसों में निशुल्क बस यात्रा की पात्रता है।

– विधायक विश्राम गृह में न्यूनतम तीन स्र्पए प्रतिदिन किराया पर आवास की सुविधा।

वाहन व आवास लोन

– विधायक वाहन के लिए 10 लाख स्र्पये तक लोन ले सकते हैं। इस पर लगने वाला ब्याज का तीन फीसद विधायक व बाकी सरकार वहन करती है।

– इसी तरह 15 लाख तक के आवास लोन पर दो फीसद विधायक व बाकी सरकार देती है।

– विधायकों को उनके एक कार्यकाल अवधि (5 वर्ष) के लिए क्राकरी खरीदने के लिए छह हजार स्र्पये दिया जाता है।

– विधायक व उनके आश्रित परिवार सदस्यों को सरकारी अस्पतालों में नि== भि(38) ==शुल्क इलाज की सुविधा दी जाती है। राज्य के बाहर भी यदि चिकित्सक की राय में आवश्यक हो तो निर्धारित औपचारिकता पूरी करने के बाद बाहर भी इलाज करा सकते हैं।

किसे कितना मिलता है वेतन और भत्ता

– 1 लाख 65 हजार मुख्यमंत्री

– 1 लाख 60 हजार कैबिनेट मंत्री

– 1 लाख 58 हजार राज्य मंत्री

– 1 लाख 51 हजार संसदीय सचिव

– 1 लाख 10 हजार विधायक

छत्तीसगढ़ : बिलासपुर केंद्रीय जेल में कैदी की बिगड़ी तबीयत, मौत

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केंद्रीय जेल में रविवार की सुबह अधेड़ कैदी की तबीयत बिगड़ गई। उसे गंभीर हालत में अपोलो अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। सिविल लाइन पुलिस के अनुसार मूलत: जांजगीर-चांपा जिले के जैजेपुर क्षेत्र के बुटराबोड़ निवासी भगतराम सिदार पिता स्व.मलेशराम सिदार (49) केंद्रीय जेल में 10 साल की सजा काट रहा था।

दरअसल, वह गांव छोड़कर रायगढ़ के प्रेमनगर में रहता था। इस दौरान वर्ष 2017 में उसने नाबालिग लड़की के साथ अश्लील हरकत की थी। लिहाजा, उसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया था। कोर्ट ने पाक्सो एक्ट के मामले में उसे 10 साल की कैद व एक हजार स्र्पये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

24 सितंबर 2017 को उसे रायगढ़ जेल से केंद्रीय जेल स्थानांतरित किया गया। बीते जुलाई माह में उसकी तबीयत बिगड़ गई थी। इस पर अपोलो अस्पताल में इलाज चल रहा था। बीच-बीच में जेल से वह अपोलो अस्पताल जाता था।

रविवार की सुबह उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसकी गंभीर हालत को देखकर उसे अपोलो अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन, अस्पताल पहुंचते ही उसकी मौत हो गई। इस घटना की सूचना पर सिविल लाइन पुलिस मर्ग कायम कर मामले की जांच कर रही है।

छत्तीसगढ़ : पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का बनेगा राशन कार्ड, मंत्री सिंहदेव देने जाएंगे घर

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शंकरगढ़ के कमारी में पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव ने बीपीएल परिवारों को नवीनीकृत राशन कार्ड वितरण का शुभारंभ किया। मौके पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार वादे के अनुरूप अब सिर्फ बीपीएल परिवार को ही नहीं, बल्कि सामान्य परिवारों को भी रियायती दर पर चावल उपलब्ध कराएगी।

इस महत्वकांक्षी योजना के तहत एपीएल परिवारों का भी राशन कार्ड बनेगा। मंत्री सिंहदेव ने कहा कि राज्य सरकार की यूनिवर्सल पीडीएस सिस्टम के तहत हर आम व खास का राशन कार्ड बनेगा।

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का कार्ड लेकर वे खुद देने जाएंगे। कार्यक्रम में बलरामपुर कलेक्टर संजीव झा, जिला पंचायत सीईओ एस हरीश, विधायक डॉ. प्रीतम राम, चिंतामणी महाराज, पूर्व विधायक महेश्वर पैकरा सहित अन्य पदाधिकारी, कार्यकर्ता मौजूद थे।

नरवा, गरवा, घुरवा व बाड़ी योजना में अफसरों की रुचि नहीं

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अफसरों की रुचिहीनता के चलते मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की महत्वकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी पाटन विकासखंड के गांवों में फेल होती दिख रही है। ग्राम असोगा में योजना की जमीन पर ही अतिक्रमण हो चुका है और उसे हटाने में अफसर कोई रुचि नहीं ले रहे हैं।

बता दें कि बीते 26 जनवरी को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व कलेक्टर सहित जिला प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में विशेष ग्राम सभा में ग्राम असोगा की जमीन को योजना के लिए प्रस्तावित किया गया था। विशेष ग्राम सभा के नौ माह बाद भी जिला प्रशासन के अधिकारियों ने योजना के लिए प्रस्तावित जमीन से अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया है। इसके चलते शासन की महती योजना नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी असोगा में मूर्त रूप नहीं ले पा रही है।

वर्जन

गोलमोल जवाब दे रहे अधिकारी

तहसीलदार और राजस्व अधिकारी से इस बारे में बात करने पर वे गोलमोल जवाब दे रहे हैं। इस योजना में अधिकारी ही रुचि नहीं ले रहे हैं।

– सीताराम ठाकुर, सरपंच ग्राम पंचायत

करवाता हूं कार्रवाई

प्रस्ताव आने के बाद इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। विभाग से जानकारी लेकर रविवार को उपतहसीलदार को कार्रवाई के लिए भेजता हूं।

– अनुभव प्रसाद, तहसीलदार पाटन

मामले को दिखवाता हूं

इस मामले में काम कहां रुका है, इसे दिखवाता हूं। स्थानीय ग्रामीण भी इस योजना को मूर्त रूप लेता देखना चाहते हैं। जल्द ही कार्रवाई होगी।

– विनय पोयम, एसडीएम पाटन

राजनांदगांव : घर घुसकर महिला से दुष्कर्म

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मोहला के गिधाली में महिला से अनाचार का मामला सामने आया है। घटना शुक्रवार की शाम साढ़े साल बजे की है। प्रार्थी अपने घर में अकेली थी। तभी गांव के 45 वर्षीय केसर लाल पिता मंगलूराम ने घर घुसकर महिला से जबरदस्ती करते हुए दुष्कर्म किया। महिला के शोर-शराबा के बाद आरोपी मौके से भाग निकला। पुलिस ने बताया कि महिला विधवा है और घर में अकेली रहती है। अकेलेपन का फायदा उठाते हुए आरोपी केसर लाल महिला के घर में घुस गया और जबरदस्ती की। पुलिस ने प्रार्थिया की शिकायत पर आरोपी केसर लाल के खिलाफ धारा 376 के तहत मामला पंजीबद्ध कर लिया है। युवक की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी हुई है।