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जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए दंडवत होकर ब्रिटिश आर्कबिशप जस्टिन वेल्बी ने मांगी माफी, इंटरनेट पर छाई तस्वीरें

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ब्रिटिश आर्कबिशप जस्टिन वेल्बी ने पंजाब के अमृतसर में जलियांवाला बाग स्मारक पर दंडवत (लेटकर) होकर माफी मांगी है। जस्टिन वेल्बी इन दिनों भारत दौरे पर हैं। जस्टिन वेल्बी अपने भारत दौरे के दौरान मंगलवार ( 10 सितंबर ) को पंजाब के अमृतसर पहुंचे थे। जिस दौरान उन्होंने जलियांवाला बाग स्मारक जाकर नरसंहार के लिए दंडवत होकर माफी मांगी। जस्टिन वेल्बी की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। जस्टिन वेल्बी ने अपने अधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर भी शेयर की है। जस्टिन वेल्बी कैंटरबरी के आर्कबिशप है।

अमृतसर के जलियांवाला बाग में बैसाखी के दौरान 13 अप्रैल 1919 को यह नरसंहार हुआ था जब ब्रिटिश भारतीय फौज के सैनिकों ने कर्नल रेगीनाल्ड डायर की कमान में वहां स्वतंत्रता की मांग के लिए जुटे लोगों पर गोलियां चलवा दी थी। इस जनसंहार में कई लोग मारे गए थे जबकि कई घायल हो गए थे।

ट्विटर पर ट्वीट करते हुए जस्टिन वेल्बी ने लिखा, जलियांवाला बाग नरसंहार के 100 साल पूरे होने के बाद भी वो इस घटना के लिए शर्मिंदा महसूस करते हैं। जस्टिन वेल्बी ने लिखा वो इस इस जनसंहार से ‘बेहद दुखी और शर्मिंदा’ हैं।

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जस्टिन वेल्बी ने लिखा, जलियांवाला बाग नरसंहार ना जाने कितने निर्दोषों की जान गई, इसके लिए वो अपराध बोध महसूस करते हैं और शर्मासार है।

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जस्टिन वेल्बी ने लिखा, एक धार्मिक नेता के तौर पर मैं इस त्रासदी पर शोक व्यक्त करता हूं।

जलियांवाला बाग नरसंहार को लेकर लंदन में आधिकारिक रूप से माफी मांगने की मांग भी उठी थी

14 अप्रैल 2019 को जलियांवाला बाग नरसंहार के शताब्दी वर्ष पर लंदन के ‘हाऊस ऑफ लार्ड्स’ परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में ब्रिटिश सरकार से इस घटना के लिए आधिकारिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई थी। ब्रिटिश भारतीय पत्रकार सतनाम संघीरा ने एक डॉक्यूमेंटरी के जरिए भी इस नरसंहार को लेकर माफी मांगने की मांग की है।

ब्रिटिश संसद के सदस्य एवं भारतीय मूल के लार्ड राज लूंबा और जाने माने अर्थशास्त्री लार्ड मेघनाद देसाई ने जलियांवाला बाग सेनटेनरी कोमेमोरेशन कमेटी (जेबीसीसीसी) के साथ उनके साथी सदस्य ब्रिटेन में आयोजित कई प्रदर्शनियों में शामिल हुए थे। जिनका आयोजन इस नरसंहार के शताब्दी वर्ष पर किया गया था।

लार्ड देसाई ने कहा, ”13 अप्रैल 1919 का जलियांवाला नरसंहार आधुनिक इतिहास में एक बहुत दुखद घटना है। तब से सौ साल में भारत ने लंबा सफर तय किया है और इस तरह हमने कई बार अफसोस जताया जाना सुना है। ” लार्ड लूंबा ने कहा, ”मैं नहीं जानता कि ब्रिटिश सरकार इस बाबत माफी मांगने के लिए सहमत क्यों नहीं हुई। उन्होंने इस बारे में जांच कराए जाने की मांग की कि क्या डायर ने खुद ही यह कदम उठाया था, या उसे ब्रिटिश शासन के उच्च स्तर से आदेश मिले थे।”

वीडियो ! ये कैसा खेल ज्यादा से ज्यादा थप्पड़ बर्दाश्त करो और बन जाओ विजेता

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ज्यादा से ज्यादा थप्पड़ बर्दाश्त करो और बन जाओ विजेता। रूस के क्रास्नोयासर्क में कुछ दिनों पहले बड़ी ही अजीबोगरीब पुरुष थप्पड़ चैम्पियनशिप का आयोजन किया गया। संभवत: यह विश्व की पहली ऐसी प्रतियोगिता थी जिसमें एक इंसान दूसरे इंसान को जोरदार थप्पड़ मार रहा था। दरअसल यह चैम्पियनशिप यहां आयोजित साइबेरियन पावर शो का एक हिस्सा था।

इस अजीबोगरीब खेल के नियमों के अनुसार दो खिलाडिय़ों को एक टेबल के विपरीत छोर पर खड़ा किया जाता है। जिसके बाद दोनों खिलाड़ी बारी-बारी से एक दूसरे को लगातार थप्पड़ मारते हैं। उन्हें ये खेल जीतने के लिए विरोधी को तब तक थप्पड़ मारना होता है, जब तक कि दूसरा खिलाड़ी हार ना मान जाए। इस प्रतियोगिता का दिलचस्प नियम ये है कि इस खेल में खिलाडिय़ों को थप्पड़ का बचाव करने की अनुमति नहीं है। प्रतिभागियों को एक दूसरे का सामना करके ही जीत हासिल मिल सकती है। इस चैलेंज का विजेता वो खिलाड़ी बनता है जो लंबे समय तक थप्पड़ों का सामना कर पाता है।

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ज्यादा से ज्यादा थप्पड़ बर्दाश्त करो और बन जाओ विजेता। रूस के क्रास्नोयासर्क में कुछ दिनों पहले बड़ी ही अजीबोगरीब पुरुष थप्पड़ चैम्पियनशिप का आयोजन किया गया। संभवत: यह विश्व की पहली ऐसी प्रतियोगिता थी जिसमें एक इंसान दूसरे इंसान को जोरदार थप्पड़ मार रहा था। दरअसल यह चैम्पियनशिप यहां आयोजित साइबेरियन पावर शो का एक हिस्सा था।

इस अजीबोगरीब खेल के नियमों के अनुसार दो खिलाडिय़ों को एक टेबल के विपरीत छोर पर खड़ा किया जाता है। जिसके बाद दोनों खिलाड़ी बारी-बारी से एक दूसरे को लगातार थप्पड़ मारते हैं। उन्हें ये खेल जीतने के लिए विरोधी को तब तक थप्पड़ मारना होता है, जब तक कि दूसरा खिलाड़ी हार ना मान जाए। इस प्रतियोगिता का दिलचस्प नियम ये है कि इस खेल में खिलाडिय़ों को थप्पड़ का बचाव करने की अनुमति नहीं है। प्रतिभागियों को एक दूसरे का सामना करके ही जीत हासिल मिल सकती है। इस चैलेंज का विजेता वो खिलाड़ी बनता है जो लंबे समय तक थप्पड़ों का सामना कर पाता है।

ये डेथ वैली की रहस्यमयी कहानी, अपने आप खिसकते है पत्थर

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इस ज़माने में भी कुछ चीज़ें ऐसी हैं जिनके जवाब आपको नहीं मिलते पाते है। आज हम ऐसी ही एक जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको चौंका देगा। यह कैलिफोर्निया में स्थित एक रेगिस्तान, डेथ वैली (मौत की घाटी) से जुड़ा हुआ हैं। कैलिफोर्निया के डेथ वैली की संरचना और तापमान भू-वैज्ञानिकों को हमेशा से चौंकाता रहा है।

अपने आप खिसकते है पत्थर:

यहां के रेस ट्रैक क्षेत्र में मौजूद 320 किलोग्राम तक के पत्थर भी अपने आप खिसक कर एक जगह से दूसरी जगह चले जाते हैं। डेथ वैली में पत्थरों का खुद-ब-खुद खिसकना वैज्ञानिकों के लिए भी एक पहेली बनी हुई है। रेस ट्रैक प्लाया 2.5 मील उत्तर से दक्षिण और 1.25 मील पूरब से पश्चिम तक बिल्कुल सपाट है, लेकिन यहां बिखरे पत्थर अपने आप खिसकते रहते हैं। इतना ही नहीं इसके निशान भी आप देख सकते हैं।

डेथ वैली की रहस्यमयी कहानी:

वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1972 में इस रहस्य को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई गई थी। टीम ने पत्थरों के एक ग्रुप का नामकरण कर उस पर सात साल अध्ययन किया। केरीन नाम का लगभग 317 किलोग्राम का पत्थर अध्ययन के दौरान जरा भी नहीं हिला, लेकिन जब वैज्ञानिक कुछ साल बाद वहां वापस लौटे, तो उन्होंने उस पत्थर को एक किलोमीटर दूर पाया।

एक अनोखा रेलवे स्टेशन जिसे चलाने की जिम्मेदारी बच्चों पर, इनके काम जानकर रह जाएंगे हैरान

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देश-विदेश में यातायात का सबसे बड़ा जरिया ट्रेन हैं जिसकी मदद से लाखों लोग अपने गंतव्य स्थान पर पहुँचते हैं। ऐसे में ट्रेन की सभी व्यवस्थाओं को संभालने और सही संचालन करने की जिम्मेदारी बहुत बड़ी होती हैं जो कि अनुभवी लोगों को दी जाती है। लेकिन आज हम आपको एक अनोखे रेलवे स्टेशन की जानकारी देने जा रहे हैं जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से स्कूली बच्चों के हाथ में हैं। हम बात कर रहे हैं यूरोप के देश हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट के ऊपरी हरी पहाड़ियों के जंगलों में स्थित एक रेलवे स्टेशन की। तो आइये जानते हैं इसके बारे में।

इस रेलवे स्टेशन पर सिग्नल गार्ड, रेलवे टिकट कार्यालय, डीजल इंजन, और समय सारिणी है, जो कि पूरी तरह से बच्चे ही संभालते हैं। हाल ही में इस रेलवे स्टेशन की 70वीं वर्षगांठ पर यंगस्टर ऑफ गिएर्मेक्वास कार्यक्रम के दौरान बच्चे रंग-बिरंगे कपड़ों में एक रेलवे स्टेशन के कर्मचारी के तौर पर नजर आए। कोई टिकट बेचता हुआ तो कोई उसे चेक करता हुआ नजर आया। बच्चों को यह सबकुछ करने में बहुत मजा आता है। ये ट्राम लाइन दुनिया की सबसे तेज़ और पुरानी ट्राम लाइन है। ये लाइन पूरी तरह से बच्चों के कंट्रोल में है जो इसे ख़ास बनती हैं। ये स्कूली बच्चे ही इसे चलाते हैं।

आपको बता दें कि ये ट्रेन साम्यवाद के दिनों की याद दिलाती है। जब हंगरी, सोवियत संघ का एक उपग्रह राज्य हुआ करता था। उस दौरान बच्चों को एक साथ काम करने और जिम्मेदारी सिखाने के लिए पायनियर रेलवे की शुरुआत की गई थी। उस वक्त नाबालिगों ने व्यस्कों की अंतर्गत रेलवे में काम करना शुरू कर दिया था।

यही कारण है कि रेलवे स्टेशन को आज भी उसी तरह से संचालित किया जाता है। हालांकि इसमें थोड़ा बहुत अंतर भी है। क्योंकि कम्युनिस्ट सिद्धांत के बिना ये रेलवे खुद को गाइर्मेक्वास या चिल्ड्रन्स रेलवे के रूप में आगे बढ़ा रहा है। यहां के स्थानीय बच्चों को लगभग 15 दिनों में एक दिन रेलवे में काम करना पड़ता है।

खुदाई के दौरान मजदूरों के हाथ लगा खजाना, आपस में बांटे सिक्के, फिर जो हुआ…

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उत्तर प्रदेश के हरदोई में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। दरअसल, पिहानी कोतवाली क्षेत्र में मंगलवार शाम मिट्टी खुदाई के दौरान मजदूरों के हाथ खजाना लग गया जिसके बाद वहां मौजूद सभी मजदूरों ने पीली धातु के सिक्कों को आपस में बांट लिया। सिक्कों की जानकारी मिलने पर पुलिस ने एक मजदूर को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।

पिहानी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सहादतनगर निवासी जोगेंद्र सिंह का भवन निर्माण हो रहा है। मकान बनवाने के लिए उन्हें मिट्टी की जरूरत थी। पिहानी कोतवाली क्षेत्र के ही ग्राम अंदा ईब्राहिमपुर स्थित खेड़ा से मंगलवार देर शाम मिट्टी की खुदाई जेसीबी से की जा रही थी।

इसी खुदाई के दौरान एक हांडी निकली, जिसमें पीली धातु के पुराने सिक्के थे। इन सिक्कों को मजदूरों ने बांट लिया। सहादतनगर निवासी सर्वेश पुत्र मेवाराम ने अपने हिस्से में आए कुछ सिक्के पिहानी में ही स्थित एक सराफ को बिक्री के लिए दिए, लेकिन सराफ ने सिक्कों की परख के बाद ही कीमत बता पाने की बात कही।

सराफ ने सिक्के रख लिए और सर्वेश से सुबह आने के लिए कहा। इस दौरान पुलिस को घटना की जानकारी मिल गई। पिहानी के कोतवाल एसपी शुक्ला सहादतनगर पहुंचे और उन्होंने सर्वेश को हिरासत में ले लिया। कोतवाल एसपी शुक्ला ने बताया कि सर्वेश को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। पूछताछ में उसने सिक्के मिलने की बात कही है। आगे की जांच की जा रही है।

VOLTAS और TATA पावर के बीच करार, एसी खरीदने पर मिलेगी 50% की छूट

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टाटा पावर (TATA Power) और वोल्टास (Volts) ने आपस में एक करार किया है. इस करार के तहत Voltas एसी खरीदने पर ग्राहकों को 50 फीसदी तक छूट मिलेगी. ग्राहक 1, 1.5 और 2 टन का एसी खरीदने पर डिस्काउंट का फायदा उठा सकते हैं. इस ऑफर के तहत हर रेसिडेंशियल ग्राहक 1 एसी खरीद सकता है और कमर्शियल ग्राहक 2 एसी खरीद सकता है. फिलहाल, इसे मुंबई में शुरू किया गया है. बहुत जल्द देश के अन्य हिस्सों में भी इस ऑफर का लाभ ग्राहक उठा पाएंगे.

जानकारी के मुताबिक, मुंबई में टाटा पावर के 7 लाख से ज्यादा ग्राहक हैं. वोल्टास को उम्मीद है कि इस ऑफर की वजह उसकी बिक्री में 8 फीसदी तक इजाफा होगा. साथ ही इस स्कीम के जरिए एनर्जी भी बचेगी और लोग 5 स्टार रेटिंग प्रोडक्ट्स से भी जुड़ेंगे. यह ऑफर 31 दिसंबर 2019 तक है.

5 स्टार एसीकीमतTATA पावर ग्राहकों के लिए
1 टन55,99030,000
1.5 टन68,99035,500
2 टन68,99044,600

यदि खाना खाते समय करी ये गलती तो आप नहीं हो नहीं सकते मोटे.

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बहुत ही कम लड़कों को पता है की खाना खाते समय या रोटी का सेवन करते समय पानी पीना शरीर के लिए कितना नुकसानदायक होता है. इसीलिए आज हम आप लोगों को रोटी खाने से जुड़ी कुछ जरूरी बातें बताने जा रहे है. अगर आपको हमारी खबरे अच्छी लगती है तो ऊपर दिए गए पीले बटन को जरूर दबाये.

अगर कोई लड़का रोटी खाने के साथ कोई और चीजे भी खाता है, जैसे की दूध, शरबत या कोल्ड ड्रिंक तो ये उस लड़के के पाचन तंत्र के लिए काफी ज़्यादा नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि रोटी खाने के साथ साथ इन चीजों का सेवन करने से खाना सही तरीके से हमारे के पेट में पच नहीं पाता है. जिसकी वजह से खाया हुआ खाना लड़को के शरीर में भी नहीं लगता है.

गर्म रोटी खाने के तुरंत बाद कभी भी किसी लड़के को ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए, क्योंकि रोटी खाने के बाद पानी पीने की वजह से लड़कों का पाचन एंजाइम काफी कमजोर हो जाते हैं।

रोटी खाने के तुरंत बाद पानी पीने से लड़कों की पाचन सकती कमजोर हो जाती है और खाया हुआ खाना लड़को के पेट में पच नहीं पाता है, जिसकी वजह से खाना खाने क बाद भी भी लड़कों का शरीर दुबला पतला और कमजोर ही रहता है.

अगर आप इस खबर के बारे में या अपनी किसी समस्या के बारे में कोई सवाल पूछना चाहते है तो नीचे दिए गए पीले बटन पर क्लिक करके आप हमसे कोई भी सवाल या अपनी किसी भी बीमारी के बारे में पूछ सकते है. हम आपकी मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे और हमे यकीन है की हमारी बताई हुई बातों से आपको जरूर फ़ायदा होगा.

दिल्‍ली में कटा देश का सबसे बड़ा ट्रैफिक चालान, ‘भगवान राम’ ने भरा जुर्माना, जानें पूरा मामला

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 नए मोटर व्‍हीकल एक्‍ट (Motor Vehicle Act) लागू होने के बाद यातायात नियमों का उल्‍लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी है. इसके क्रम में दिल्‍ली (Delhi) में एक ट्रक का एक लाख रुपये से अधिक का चालान काट दिया गया. संभवत: यह देश का अभी तक का सबसे बड़ा ट्रैफिक चालान (Traffic Challan) बताया जा रहा है.

दरअसल, राजस्थान (Rajasthan) निवासी एक ट्रक मालिक के ट्रक को बीते पांच सितंबर को ओवरलोडिंग के चलते पकड़ा गया था, जिसके बाद ओवरलोडिंग के लिए उसका 1,41,700 रुपये का चालान काटा गया.

इसके बाद ट्रक के मालिक ने बीते 9 सितंबर को रोहिणी जिला अदालत में मेट्रोपॉलिटन मजिस्‍ट्रेट- 04 (नॉर्थ-वेस्‍ट) के समक्ष जाकर जुर्माने की राशि का भुगतान किया. ट्रक के मालिक भगवान राम की तरफ से जुर्माने की राशि अदालत में जमा कराई.

उल्‍लेखनीय है कि मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2019 जुलाई माह में संसद में पारित किया गया था, जिसके बाद बढ़े हुए जुर्माने 1 सितंबर से लागू हो गए थे. इसके बाद से ही पुलिस द्वारा यातायात नियमों के उल्लंघन वालों के भारी चालान किए जा रहे हैं, जो सुर्खियों में हैं.

क्रिकेट में नाकाम रहा भारत का सबसे हैंडसम बल्लेबाज़, अब है टीवी सीरियल का सुपरस्टार

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क्रिकेट के कुछ सितारे ऐसे हैं जो अपनी जगह क्रिकेट जगत बनाने में कामयाब नहीं हो पाए। लेकिन, ऐसे क्रिकेटर भी हैं अच्छा भला क्रिकेट छोडक़र फिल्मी दुनिया में चले गए। हालांकि, वह यहां भी कामयाबी हासिल करने में कामयाब तो नहीं रहे लेकिन, छोटे पर्दे पर अपना एक अलग मुकाम हासिल सफल रहे। जी हां हम बात कर रहे हैं, हैंडसम सलिल अंकोला की।

सलिल अशोक अंकोला का जन्म 1 मार्च 1968 को महाराष्ट्र के सोलापुर में एक कन्नड़ कोकण परिवार में हुआ था। अंकोला महाराष्ट्र की तरफ से खेलते थे। जिन्होंने भारत के लिए 1989 से 1997 तक एक टेस्ट मैच और इक्कीस दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (वनडे) खेले। एक दाहिने हाथ के तेज गेंदबाज भी थे। उन्होंने महाराष्ट्र, मुुबई के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला, वह नियमित रूप से ओपनिंग गेंदबाजी भी करते थे।

महाराष्ट्र के लिए लगातार अच्छे प्रदर्शन के चलते उन्हें 1993 के दौरान भारतीय एकदिवसीय टीम के लिए चुना गया, अंकोला को एक बड़ा मौका और मिला जब उन्हें 1996 क्रिकेट विश्व कप टीम में चुना गया। फिर अंकोला की बायीं पिंडली की हड्डी (ऑस्टियोइड ओस्टियोमा) में ट्यूमर होने के कारण कारण उन्हें ना चाहते हुए भी क्रिकेट से दूर होना पड़ा। इस कारण वह दो साल तक दिखाई नहीं दिए। उसके बाद वह डेली सोप सीरियल में नजर आने लगे। अंकोला ने कई फिल्मों में भी काम किया लेकिन, उन्हें कामयाबी मिली छोटे पर्दे के सीरियलों से, 2006 में अंकोला बिग बॉस के पहले सीजन में भी नजर आए।

थकान के साथ इन खतरनाक बीमारियों से भी बचाती है कॉफी, फायदे जान आज से ही कर देंगे शुरु

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अक्सर लोग चाय और कॉफी का सेवन नींद या सुस्ती हटाने के लिए करते हैं. लेकिन आप नहीं जानते कि कॉफी आपके लिए नींद हटाने का जरिया ही नहीं बल्कि ये आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है. हाल में हुए एक शोध में इस बात का पता चला है कि कॉफी का सेवन आपको कई बीमारियों से निजात दिलाता है. शोध के मुताबिक कॉफी न सिर्फ आपकी सुस्ती दूर करती हैं बल्कि इसका सेवन करने से पित्ताशय में पथरी होने का खतरा भी बहुत कम हो जाता है.

नए शोध के मुताबिक, दिन में 6 या उससे ज्यादा कप कॉफी पीने से पित्ताशय में पथरी होने का खतरा कम हो जाता है. शोध में इस बात का दावा किया गया है कि कॉफी का ज्यादा सेवन करने वाले लोगों में पित्ताशय में पथरी होने का खतरा कॉफी नहीं पीने वालों की तुलना में 23 फीसदी तक कम हो जाता है.

शोधकर्ताओं ने इस शोध के दौरान 104,500 व्यस्कों के स्वास्थ्य और जीवनशैली के डाटा का विश्लेषण किया है. शोध में शामिल प्रतिभागियों पर 13 साल तक नजर रखी गई. उन्होंने सेवन की गई कॉफी की मात्रा और पित्ताशय में होने वाली पथरी के बीच संबंध खोजने की कोशिश की. इस शोध को डेनमार्क के कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं की एक टीम ने किया है.

जानिए क्या हैं कॉफी के फायदे

शोधकर्ताओं ने पाया कि दिन में एक कप कॉफी पीने से पित्ताशय में पथरी होने का खतरा तीन फीसदी तक कम होता है, लेकिन कई कप कॉफी पीने से यह खतरा और कम हो जाता है. यूरोपीय गाइडलाइंस के मुताबिक, एक दिन में 400 मिलीग्राम से ज्यादा कैफीन का सेवन नहीं करना चाहिए. एक कप कॉफी में 70 से 140 मिलीग्राम तक कैफीन पाया जाता है.

बता दें कि पथरी एक ठोस पदार्थ होती है. जो पित्ताशय के अंदर बनती है. एक अन्य शोध के मुताबिक ब्रिटेन नें दस में से हर एक व्यक्ति पथरी से पीड़ित है. यह पथरी रेत के दाने से लेकर छोटे पत्थरों के आकार की हो सकती हैं. बता दें कि यह बाइल जूस में मौजूद रसायनों से बनती है. इनमें कोलेस्ट्रोल, कैल्शियम और लाल रक्त कोशिकाओं का रंग भी शामिल होता है. यह पथरी उच्च कोलेस्ट्रोल वाला खाना खाने की वजह से होती है. इसका सबसे आम लक्षण पेट में दर्द होता है.