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छत्तीसगढ़ : नहाने गई किशोरी नदी में डूबने लगी, युवक ने बचाई जान

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खारुन नदी में रोज की तरह नहाने गई किशोरी का पैर फिसल गया। वह नदी के तेज बहाव में बहती चली गई। उसकी चीख सुनकर पास ही खेत में काम कर रहा युवक उसके लिए देवदूत बनकर आ गया। उसने नदी के तेज बहाव की परवाह नहीं की और किशोरी को बचाने नदी में कूद पड़ा। आखिरकर किशोरी की जान बचा ली गई।

घटना पाटन के पास स्थित निपानी गांव की है। गांव के ज्यादातर लोग नदी में नहाते हैं। रोज की तरह सोमवार सुबह कुमारी दुर्गेश पिता गोविंद सिन्हा भी नदी में नहाने गई थी। दो दिन की लगातार बारिश के चलते खारुन का जल स्तर काफी बढ़ गया। दुर्गेश को इस पानी का अंदाजा नहीं था। वह थोड़ा गहरे तक चली गई, और उसका पैर फिसल गया। दुर्गेश पानी के तेज बहाव में बहने लगी। उसने मदद के लिए आवाज लगाई।

आवाज सुनकर पास ही खेत में काम कर रहे हैं तरुण सोनकर ने बाढ़ की प्रवाह किए बगैर नदी में छलांग लगा दी। उसने किशोरी को बहाव से बचाकर पकड़े रखा। किशोरी को बचाने विजय साहू, डोमेन्द्र यादव, कान्हा यादव, चेतन साहू भी नदी में कूद पड़े। सभी मिलकर दुर्गेश को नदी से बाहर निकलने में सफल रहे। तरुण सोनकर सहित सभी युवकों की गांव में जमकर सराहना की जा रही है। कुमारी दुर्गेश शिक्षक एवं संवाद सहयोगी खोमन सिन्हा की चचेरी बहन है।

बास्केटबॉल में गर्ल्स कॉलेज की टीम आठवीं बार चैम्पियन

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शासकीय डॉ. वावा पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग की टीम ने सेक्टर स्तरीय महिला बास्केटबॉल प्रतियोगिता में लगातार आठवीं बार चैम्पियन का खिताब जीता है।

रूंगटा साइंस एंड टेक्नालॉजी महाविद्यालय कोहका द्वारा सेक्टर स्तरीय महिला बास्केटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता लीग आधार पर खेली गई, जिसमें कन्या महाविद्यालय दुर्ग ने महिला महाविद्यालय सेक्टर-9 को 35-04 से परास्त किया। रूंगटा महाविद्यालय को 4-44 से, सेंट थॉमस महाविद्यालय को 02-35 से परास्त कर लीग के सभी मैचों पर अपना कब्जा जमाया। कन्या महाविद्यालय की क्रीड़ाधिकारी डॉ. ऋतु दुबे ने बताया कि कन्या महाविद्यालय की टीम ने बेहतर खेल का प्रदर्शन करते हुए प्रतिद्वंद्वी टीम पर शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा। किसी भी दूसरी टीम को संभलने का मौका ही नहीं दिया। इस तरह चैम्पियन का खिताब अपने पास ही रखा। विजेता टीम में कप्तान काजल सिंह, ज्योति, श्वेता सिंह, वेनिला बेन्सन, पी. करूणा, अंकु आम्बिलकर, टी. दिव्या, के. राजलक्ष्मी शामिल रहीं। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुशील चंद्र तिवारी ने खिलाड़ियों को शाबाशी दी।

पिकअप पलटा, बाल्टी-झोले में भर कर लोग ले गए टमाटर

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राजधानी में संतोषी नगर ब्रिज के पास टमाटर से भरा एक पिकअप वाहन पलट गया। हादसे के बाद रोड पर बिखरे टमाटरों को बटोरने के लिए लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। इसके बाद रोड पर लंबा जाम लग गया। घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर टिकरापारा पुलिस पहुंची, जिसने भीड़ को हटाकर जाम क्लियर किया।

जानकारी के मुताबिक घटना सोमवार सुबह टिकरापारा थाना संतोषी नगर की है। पिकअप वाहन नंबर सीजी 04 एम-3 1137 अनियंत्रित होकर संतोषी नगर ओवर ब्रिज पर पलट गया। हादसे में वाहन में रखे सारे टमाटर रोड़ पर बिखर गए। जिसे देखकर वहां से आने-जाने वाले लोगों ने बिखरे टमाटरों को लूटना शुरू किया। किसे ने बोरी से तो किसे ने झोले भर-भरकर अपने साथ टमाटर ले गए। देखते ही देखते रोड़ पर टमाटर लूटने वालों की वजह से लंबा जाम लग गया। पुलिस के पहुंचने से पहले मौके से लोगों की भीड़ ने बिखरे सारे टमाटरों को पार कर लिया था। हादसे में वाहन चालक को चोट नहीं आई।

छत्तीसगढ़ : आत्महत्या रोकने के लिए स्कूली बच्चों को किया जागरूक

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आत्महत्या रोकने के लिए जेआर दानी सरकारी गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल कालीबाड़ी के बच्चों के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्पर्श क्लिनिक विभाग जिला चिकित्सालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में डॉक्टरों ने स्कूली बच्चों को जागरूक किया। इस दौरान डॉ.डीएस परिहार व मनोचिकित्सक डॉ. संजीव मेश्राम ने सैकड़ों विद्यार्थियों को परामर्श दिया।

इस दौरान उन्होंने बताया कि नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार छत्तीसगढ़ में आत्महत्या की दर 27.7 प्रति 100,000 है, जो राष्ट्रीय औसत 10.6 प्रति 100,000 से बहुत ज्यादा है। इसी को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में आत्महत्याओं को कम करने के लिए 2016 से कई कार्यक्रम चला रहे हैं। मानसिक विकारों की पहचान और उपचार करवाना, स्कूलों और कॉलेजों में युवाओं के लिए तनाव प्रबंधन के कार्यक्रम आदि शामिल हैं। आत्महत्या रोकने के लिए अब तक हजारों लोगों को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है।

काउंसिलिंग के लिए 44 सेंटर स्थापित

जिलों में मानसिक रोग से ग्रसित लोगों के लिए काउंसिलिंग सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में 44 सेंटर संचालित हो रहे हैं। इनमें दुर्ग में 12, मुंगेली में 5, जांजगीर-चांपा में 2, कोरबा में 4, धमतरी में 3, रायगढ़ में 4, बस्तर मे 2 और जशपुर में 12 सेंटर शामिल हैं।

हेल्पलाइन 104 से भी दे रहे मदद

रोगियों के लिए प्रदेश में 104 हेल्पलाइन नंबर भी संचालित है। हाल ही में विभाग ने एम्बुलेंस सर्विसेज भी शुरू करने का फैसला लिया है इमरजेंसी में मानसिक रोगियों को भी एंबुलेंस की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएगी।

छत्तीसगढ़ : बेटी के बजाए मृत मां के नाम पर बना दिया राशन कार्ड

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नवीनीकृत राशनकार्ड में कई खामियां सामने आ रही है। मां की मौत होने के बाद बेटी ने नवीनीकृत राशनकार्ड में मां का नाम काटकर स्वयं के नाम पर कार्ड बनाने आवेदन किया था। लेकिन कर्मियों ने बेटी का नाम काटकर पुनः उसकी मां के नाम पर राशनकार्ड बनाकर जारी कर दिया। इसके अलावा नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाले कई हितग्राहियों का राशनकार्ड ही बनकर नहीं आया है।

दुर्ग निगम के 12 वार्डों में सोमवार से नवीनीकृत बीपीएल राशनकार्डों के वितरण का काम शुरू किया गया। कार्ड वितरण के साथ ही कई तरह की खामियां सामने आई। गिरधारी नगर वार्ड क्रमांक-9 के पार्षद ज्ञानेश्वर ताम्रकार ने बताया कि शिक्षक नगर दुर्ग निवासी रामकली शर्मा के नाम पर पुराना बीपीएल राशनकार्ड बना हुआ है। उन्होंने बताया कि रामकली शर्मा का निधन हो गया है। नवीनीकृत राशनकार्ड के लिए मृतका की बेटी विजयलक्ष्‌मी ने आवेदन किया। जिसमें उसने अपनी मां का नाम काटने तथा परिवार के मुुखिया के नाम पर स्वयं का नाम लिखने कहा था। सोमवार को कार्ड वितरण के बाद पता चला कि कार्ड बनाने वाले कर्मचारियों ने विजयलक्ष्‌मी का नाम ही काट दिया और नया बीपीएल राशनकार्ड उसकी मृत मां के नाम पर ही जारी कर दिया। आवेदक विजयलक्ष्‌मी ने इसकी जानकारी पार्षद ज्ञानेश्वर ताम्रकार को दी। इसके बाद पार्षद मौके पर पहुंचे और शिविर में मौजूद कर्मचारियों से विजयलक्ष्‌मी के नाम पर राशनकार्ड जारी करने आवेदन लेने कहा। लेकिन कर्मचारी आवेदन लेने से मना करने लगे। इसके बाद पार्षद ने निगम और खाद्य विभाग के अधिकारियों को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी। तब जाकर शिविर में मौजूद कर्मचारियों ने आवेदिका का आवेदन जमा लिया। पार्षद राजेश शर्मा ने बताया कि आवेदन करने के बावजूद कई हितग्राहियों का राशनकार्ड अब तक बनकर नहीं आया है। ऐसे हितग्राहियों को पुनः आवेदन जमा करने कहा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि नवीनीकृत राशनकार्ड को लेकर पहले भी खामियां उजागर हुई थी। जिसमें कई हितग्राहियों का पता और दुकान बदल गया था। इस पर खाद्य विभाग ने सुधार करने की बात कही थी।

कांग्रेस पार्षदों ने किया निरीक्षण

दुर्ग निगम क्षेत्र में राशनकार्ड वितरण का काम 12 वार्डों में शुरू किया गया है। सोमवार को दुर्ग निगम के कांग्रेसी पार्षद आरएन वर्मा,कांग्रेस पार्षद दल के नेता लिखन साहू सहित अन्य लोगों ने शिविर स्थलों का अवलोकन किया। पार्षदों ने नयापारा वार्ड के चंद्रशेखर हाईस्कूल,राजीव नगर वार्ड के श्रीराम विद्या मंदिर शिविर स्थल का जायजा लिया। पार्षद लिखन साहू ने बताया कि राशनकार्ड वितरण केंद्रों में लोगों के बैठने और पीने के पानी की व्यवस्था नहीं की गई है। लिखन साहू ने यह भी बताया कि आवेदन करने वाले हितग्राहियों में से करीब 10 फीसदी लोगों का राशनकार्ड बनकर नहीं आया है।

छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति को संजोने में यादवों की महत्वपूर्ण भूमिकाः ताम्रध्वज

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ग्राम करगाडीह में यादव समाज कोड़िया सर्किल द्वारा जिला स्तरीय तीजा महोत्सव का आयोजन किया गया। महिलाओं के लिए विविधि स्पर्धा आयोजित की गई। इसमें सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजन में 32 गांव के यादव समाज की महिलाओं ने शिरकत की।

करगाडीह स्थित सामुदायिक भवन में तीजा महोत्सव का आयोजन रखा गया। समाज की महिलाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रस्तुति दी। महिलाओं के लिए रस्साकसी, बिंदी लगाओ, कुर्सी दौड़, मटका फोड़, तीज क्वीन, छत्तीसगढ़ी व्यंजन ठेठरी, खुरमी आदि प्रतियोगिताएं रखी गई। तीज क्वींन का खिताब करगाडीह की शीतल यादव को मिला। सभी विजेताओं को सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि के रूप में गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू मौजूद रहे। अध्यक्षता यादव समाज संभाग दुर्ग अध्यक्ष बोधन यादव ने की। विशेष अतिथि यादव समाज जिला दुर्ग उपाध्यक्ष पंचुराम यादव, यादव समाज कोड़िया सर्किल सचिव बरातू राम यादव, महिला यादव समाज जिला दुर्ग उपाध्यक्ष चंचल यादव, जिला यादव युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष हरीश यादव, महाकाखुर्द सरपंच अर्चना यादव व खम्हरिया सरपंच कमलेश्वरी यादव, हर्ष साहू, अनुसूचित जाति प्रदेश सचिव तरुण बंजारे, जनपद प्रतिनिधि डॉ. पीलेश्वर मौजूद रहे। इस अवसर पर दमयंती यादव, सचिव लोकेश्वरी यादव, कोषाध्यक्ष ओम बाई यादव, महामंत्री अग्नि यादव, सारिका यादव, टीकम यादव, चुम्मन यादव, विष्णु यादव, त्रिलोकी यादव, अशोक यादव, कुबेर यादव, ओम प्रकाश यादव, राजेंद्र यादव, मंत राम यादव, पुनीत यादव, भोजराम यादव, रामेश्वर यादव आदि मौजूद रहे।

समाज निर्माण में यादव समाज की महिलाओं का विशेष योगदान

गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि पूरे जगत के तारणहार श्रीकृष्ण भगवान के वंशज यादवों का छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति को समृद्घ बनाने में विशेष योगदान है। सुआ, बासगीत, राउत नाचा व अखाड़ा जैसे कला यादव समाज की ही देन है। उन्होंने सामाजिक पदाधिकारियों को समाज में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने व बालिका शिक्षा पर विशेष बल देने कहा। उन्होंने आगे कहा कि समाज निर्माण में महिलाओं का विशेष योगदान है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महिलाओं के सम्मान की खातिर तीजा पर्व पर छुट्टी की घोषणा की। ताकि हमारी माता व बहने इस पर्व का भरपूर आनंद ले सके। अन्य अअितिथियों ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

छत्तीसगढ़ : समय पर स्कूल नहीं पहुंच रहे शिक्षक, 33 का कटेगा वेतन

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पाटन ब्लॉक के स्कूलों में अनाधिकृत रूप से शिक्षकों को गैर हाजिर पाए जाने के बाद डीईओ ने अन्य स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति की जानकारी लेने 10 टीम बनाई है। डीईओ की इस टीम ने सोमवार को दुर्ग-भिलाई के शहरी क्षेत्र में स्थित विभिन्ना स्कूलों का निरीक्षण किया। इस दौरान करीब 33 शिक्षकों को समय पर स्कूल में नहीं पहुंचे थे। इन सभी शिक्षकों का एक दिन का वेतन काटने आदेश जारी किया गया है।

शनिवार को डीईओ प्रवास बघेल ने सुबह पॉली में लगने वाले पाटन ब्लॉक के विभिन्ना स्कूलों का निरीक्षण किया। इस दौरान डीईओ ने कई स्कूलों में प्रधान पाठक सहित पूरे स्टॉफ को अनुपस्थित होना पाया था। इसके बाद डीईओ ने अन्य स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति जांचने दस टीम का गठन किया। सोमवार को डीईओ की टीम ने विभिन्ना स्कूूलों का निरीक्षण किया। इस दौरान करीब 33 शिक्षकों को समय पर स्कूल नहीं पहुंचना पाया गया। मामले में डीईओ ने ऐसे शिक्षकों का एक दिन का वेतन काटने का आदेश जारी किया है।

स्कूल का नाम और देर से पहुंचने वाले शिक्षक

डॉ.रजनी नेलसन ने प्राथमिक शाला कोहका व राम नगर भिलाई का निरीक्षण किया। इस दौरान कोहका के सहायक शिक्षक ओमप्रकाश चतुर्वेदी, सिवेन्द्र कुमार साहू, राजेश कुमार एवं दिलीप गुप्ता स्कूल समय से 40 मिनट विलंब तक भी स्कूल नहीं पहुंचे थे।

-श्रीमती पुष्पा पुरुषोत्तमन ने प्राथमिक शाला तकिया पारा, पूर्व.माध्यमिक शाला तकियापारा, प्रा.शाला महात्मा गांधी दुर्ग, पूर्व माध्य.शाला बहुउद्देशीय स्कूल दुर्ग, सरदार वल्लभ भाई पटेल, लाल बहादुर प्राथमिक शाला, शा.अंग्रेजी माध्य.शाला दुर्ग का निरीक्षण किया। प्रा.शाला नेहरू तकियापारा में प्रभारी प्रधान पाठक एसके शर्मा, फरहान जबीन, महिमा पीटर, निजामुद्दीन, प्रा.शाला तकिया पारा के सुश्री ईश्वरी साव, दीनानाथ सार्वा, सुश्री अन्नाु यादव, मोतीराम पटेल, सरदार पटेल स्कूल के पंकज श्रीवास्तव, अंग्रेजी माध्यम शाला के मधुलिका शुक्ला एवं ममता मेहरा समय पर स्कूल नहीं पहुंचे थे।

-एनव्ही सत्यनारायण ने तीन स्कूलों का निरीक्षण किया। इस दौरान पूर्व माध्यमिक शाला तितुरडीह क्रमांक-एक में शिक्षिका विमला वर्मा, सुभाष प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक धनेश्वरी चंद्राकर भी समय पर उपस्थित नहीं थी।

-सुरेद्र पांडेय ने छह स्कूलों का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रा.शा.हाउसिंग बोर्ड भिलाई के लेखू राम कवर, बिजेन्द्र कुमार यादव, पूर्व मा.शा.हाउसिंग बोर्ड भिलाई के सुभ्रा चक्रवर्ती, वीणा सोनी,श्रीमती स्वाती शुक्ला, प्रदीप श्रीवास्तव, प्रा.शाला शारदा पारा भिलाई के विनोद कुमार नाग को निर्धारित समय से विलंब से स्कूल पहुंचना पाया गया।

-राजेश्वरी चंद्राकर ने भी दुर्ग शहर के तीन स्कूलों का निरीक्षण किया। इस दौरान पूर्व मा.शाला तिलक दुर्ग में आरती श्रीवास्तव, राजकुमारी दिल्लीवार, कांति यादव को समय पर उपस्थित नहीं होना पाया।

-संध्या ढीढी ने भी दुर्ग शहर के चार स्कूलों का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रा.शाला तितुरडीह क्रमांक-एक के शिक्षिका जयश्री, प्रधान पाठक शिव कुमार बंजारे, फरीदा हसन, प्रा.शाला तितुरडीह क्रमांक-दो के धनंजय मिश्रा, प्रा.शाला शक्ति नगर की कल्पना अग्रवाल एवं शचि ठाकुर को भी समय पर स्कूल नहीं पहुंचना पाया गया।

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इन स्कूलों में समय पर पहुंचे शिक्षक

सहायक संचालक अमित घोष ने प्रा.शाला शास्त्री नगर भिलाई,पूर्व माध्य.शाला केम्प-1 भिलाई, प्रा.शाला केम्प-2 भिलाई, प्रा.शाला वृन्दानगर भिलाई का निरीक्षण किया। इन विद्यालयो में सभी शिक्षकों को समय पर पहुंचना पाया गया। इसी तरह ओपी राजपूत ने प्रा.शाला बघेरा,पूर्व माध्य.शाला बघेरा, प्रा.शाला पुलगांव का निरीक्षण किया। उक्त शालाओं में विलंब से आने वाले शिक्षक नहीं पाए गए। सुश्री नीलम राजपूत ने पूर्व माध्य.शाला बोरसी, प्रा.शाला बोरसी, पूर्व माध्य.शाला बोरसी भाठा और प्रा.शाला झुग्गीपारा का निरीक्षण किया। इन स्कूलों शिक्षक समय पर मिले। इसी तरह सुश्री प्रतिष्ठा शुक्ला ने प्रा.शाला मंहुवारी मरोदा, प्रा.शाला मरोदा टैंक, प्रा.शाला मरोदा टैंक क्रमांक-1 एवं 2 तथा प्रा.शाला सेक्टर-06 भिलाई का निरीक्षण किया। इन स्कूलों में भी सभी शिक्षक समय पर उपस्थित होना पाए गए।

छत्तीसगढ़ : मजदूर मांगते हैं सुरक्षा उपकरण, प्रबंधन धकेल देता ठेकेदारों पर

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बीएसपी हादसे ने एक बार फिर प्रबंधन की बखिया उधेड़ दी है। जिम्मेदार विभागों की लापरवाही से पूरा प्रबंधन कटघरे में खड़ा हो गया है। एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने की लत और आदत से आये दिन हादसे हो रह हैं। सिंटरिंग प्लांट-2 में दो कर्मचारी चपेट में आए और एक ने जान तक गंवा दी।

दूसरा जिंदगी-मौत से जूझ रहा है। सिंटरिंग प्लांट के कर्मचारियों ने जिम्मेदार अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि हादसे का वे इंतजार करते हैं। व्यवस्था सुधारने की बात की जाती है तो वे ठेकेदार की जिम्मेदारी का वे एहसास कराते हैं। हादसा होने के बाद ठेकेदार पर फाइन काटकर अपना पीछा छुड़ा लेते हैं।

हिंदुस्तान स्टील इम्प्लाइज यूनियन-सीटू की टीम ने मौका-मुआयना किया। घटनास्थल का जायजा लेने के बाद मौके पर मौजूद रहे कर्मचारियों से फीडबैक लिया। यूयिन के महासचिव डीवीएस रेड्डी बताते हैं कि कर्मचारियों में काफी रोष है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा उपकरणों को लेकर बातचीत के दौरान प्रबंधन हमेशा से यह कहती है कि इसका इंतजाम ठेकेदार को ही करके देना है।

किंतु अधिकांश समय में ठेकेदारों द्वारा सुरक्षा के पूरे उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं। इन दोनों के बीच में ठेका मजदूर पिसता जा रहा है। सुरक्षा के साथ-साथ ठेका देने की पद्घति का भी विपरीत असर ठेका मजदूरों पर ही पड़ रहा है। प्रबंधन नियमों का हवाला देकर अक्सर रिवर्स ऑक्शन से ठेका देती है। कम दर पर रिवर्स ऑक्शन लेने के बाद ठेकेदार भी माथा पीटते हैं। पूरे कार्य को सभी नियमों के साथ संपन्ना करा पाना मुश्किल होता है।

इस बात को प्रबंधन भी भली-भांति जानती है। लेकिन प्रबंधन गाइडलाइन एवं विजिलेंस का हवाला देकर इस नियम को बरकरार रखे हुए हैं। इसके चलते अक्सर ठेका मजदूर को उसके वास्तविक वेतन से कम वेतन मिलता है। जबकि ठेका मजदूरों को पूरा वेतन, समय पर मिले, इसे सुनिश्चित करना प्रबंधन की ओर से नियुक्त ऑपरेटिंग अथॉरिटी की जिम्मेदारी होती है।

जब कुछ होगा तो देखा जाएगा…

लोड टेस्ट में देरी की बात भी सामने आ रही है। कर्मचारियों का कहना है कि जिस क्रेन का पुली टूट कर गिरा है। उसके लोड टेस्ट की अवधि समाप्त हो गई थी। अर्थात एक माह पूर्व इस क्रेन का लोड टेस्ट किया जाना था, जो कि नहीं किया गया। कमोवेश यह स्थिति संयंत्र के कई अन्य जगहों में भी हैं। अधिकारियों की मानसिकता है कि ‘कोई घटना नहीं घट रही है तो चलने दो’ ‘जब कुछ होगा तो देखा जाएगा’। ऐसी ही मानसिकता से काम चल रहा है, जिसका नतीजा शनिवार को हुए दुर्घटना के रूप में सामने आया है।

मीडिया से रहो दूर, मिल-बैठकर कर लेंगे समाधान

सिंटर प्लांट की दुर्घटना एवं उस दुर्घटना में एक ठेका श्रमिक की मौत से बीएसपी की किरकिरी हो रही है। एक ठेका श्रमिक गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती है। इधर, प्रबंधन अपना पुराना रटा रटाया जवाब एवं तकिया कलाम शुरू कर चुका है। इस तरह की घटनाओं से संयंत्र बदनाम हो रहा है। इसीलिए इसका मिल बैठकर समाधान निकालना चाहिए। न कि अखबारों एवं अन्य सोशल मीडिया में चलाया जाना चाहिए। सीटू का मानना है कि अखबार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। वह अपना कार्य करता रहेगा। हमें गंभीरता से दुर्घटनाओं को होने से रोकने के लिए उपाय करते रहना है। हादसों को रोकने पर काम किया जाए, इससे बदनामी से बचा जा सकता है।

कहां जाती है फाइन वसूली की रकम

संयंत्र में स्थाई एवं निरंतर कार्यों को स्थाई श्रमिकों के द्वारा कराए जाने संबंधी कानून मौजूद है।

बावजूद इसके मैनपावर कम करने, ओपन मार्केट में निजी उद्योग क साथ कंपटीशन करने की केंद्र के दबाव से स्थाई कर्मियों को स्थाई कार्यों से हटाकर उस स्थान पर ठेका श्रमिकों को लगाना प्रारंभ कर दिया है। यह नियम विरुद्घ है।

सिंटर प्लांट-2 में जिस एग्जास्टर क्रेन में यह हादसा हुआ है। उस क्रेन को एक ठेका श्रमिक चला रहा था, जबकि नियमता संयंत्र के सभी क्रेनों को स्थाई कर्मियों के द्वारा चलाया जाना है।

मैनपॉवर कमी का हवाला देकर क्रेन को पीआरडब्ल्यू वर्कर्स से चलाने का कार्य पूरे संयंत्र में जोरों पर है।

सीटू नेताओं ने कहा कि जब भी किसी ठेका श्रमिक के कार्य के दौरान दुर्घटना होती है तो प्रबंधन ठेकेदार पर सुरक्षा को लेकर फाइन लगाता है।

जबकि उस फंड में से उस ठेका श्रमिक के परिवार को कुछ भी सहायता नहीं करता है।

काम कराने के लिए बीएसपी के अधिकारी, ठेकेदार के सुपरवाइजर की उपस्थिति सुनिश्चित कराना प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है।

ठेका मजदूर किस-किस विभाग में किस-किस काम को करेगा। उसे भी सही तरीके से निर्धारण करना प्रबंधन की ही जिम्मेदारी होती है। अर्थात ठेका श्रमिक के कार्य के दौरान दुर्घटना होने या ठेका श्रमिक की दुर्घटना मौत होने पर प्रबंधन एवं वहां काम करवा रहे स्थाई कर्मचारी के ऊपर पुलिस केस होता है।

किंतु ठेकेदार के ऊपर पुलिस केस के साथ प्रबंधन फाइन भी वसूल करती है। प्रबंधन स्पष्ट करें कि ऐसे फाइन वसूल करने का क्या कारण है एवं वसूल किए गए फंड का क्या उपयोग करता है।

फाइलों में नियम-कानून, यूनियन करेगी जागरूक

संयंत्र के अंदर किस काम को ठेका श्रमिक एवं पीआरडब्ल्यू से कराना है। किस कार्य को स्थाई कर्मियों के द्वारा किया जाना है। इसके बारे में स्पष्ट रूप से नियम है। लगातार घटते मैनपावर एवं उत्पादन के बढ़ते दबाव से प्रबंधन ने पीआरडब्ल्यू ठेका श्रमिकों से उन सारे कार्यों को करवाना प्रारंभ कर दिया है, जिसे केवल और केवल स्थाई कर्मियों के द्वारा किया जाना है। जब कोई दुर्घटना या ब्रेकडाउन आता है तो सारे नियम सामने आ जाते हैं। नियम के तहत काम कराने के लिए मजदूरों के बीच यूनियन जागरुकता अभियान चलाएगी।

मंतूराम ने जो किया, उसके बाद पार्टी में रहने का सवाल ही खत्म : डॉ. रमन

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 अंतागढ़ कांड में कोर्ट में बयान के बाद भाजपा संगठन ने मंतूराम के खिलाफ कार्रवाई का फैसला कर लिया है। भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में मंतूराम को लेकर करीब आधे घंटे तक चर्चा हुई। आला नेताओं ने तय किया कि मंतूराम को पार्टी से निष्कासित किया जाएगा।

बैठक के बाद मीडिया से चर्चा में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जिस प्रकार का कृत्य मंतूराम ने किया है, उससे उसका भाजपा में रहने का सवाल ही खत्म हो जाता है। प्रदेश अध्यक्ष इस पर जल्द निर्णय लेंगे। डॉ. रमन ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह विपक्ष को परेशान करने की साजिश है, विपक्ष को परेशान किया जा सकता है, लेकिन खत्म नहीं किया जा सकता।

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि यह मामला कोर्ट में है। कोर्ट में सारे विषय आएंगे। लगातार पांच साल तक थाने में बयान देने की बात हो, न्यायालय में बयान देनेे या शपथ पत्र देने की बात हो, सभी जगह मंतूराम ने बार-बार दोहराया था कि मैंने स्वेच्छा से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है।

अचानक पांच साल बाद उनको दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई और रातों रात अपना बयान बदल दिया। कांग्रेस की ओर से ईडी में की शिकायत पर कहा कि जब मंतूराम खुद कह रहे हैं कि उन्हें एक रुपया भी नहीं मिला, तो शिकायत कैसी ? केस जो बनाया है, उसकी भूमिका को ही समाप्त करने का काम कर रहे हैं। इस पूरे मामले में कांग्रेस सरकार की मंशा साफ नजर आ रही है। दंतेवाड़ा चुनाव में कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है। उन्हें लगता है कि डॉ. रमन को निशाना बनाया जाए, जिससे आने वाले दिनों में कोई दिक्कत ही न हो।

छत्तीसगढ़ सरकार इस बार भी कर्ज लेकर खरीदेगी धान

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छत्तीसगढ़ सरकार ने आगामी खरीफ वर्ष में 85 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है। 2500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से इतना धान खरीदने के लिए सरकार को 21,250 करोड़ रुपयों की जरूरत पड़ेगी। इसमें से केंद्र सरकार से करीब 15,045 करोड़ रुपए मिलेगा बाकी 6205 करोड़ रुपयों की व्यवस्था राज्य को अपने संसाधनों से करनी पड़ेगी। वित्तीय जानकारों के अनुसार इस बड़ी राशि की व्यवस्था के लिए सरकार को कर्ज लेना ही पड़ेगा। पिछले खरीफ सीजन में 75 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा था, लेकिन सत्ता में आते ही कांग्रेस ने इसे बढ़ाकर 88 लाख मीट्रिक टन कर दिया था।

प्रति क्विंटल के लिए राज्य को करनी पड़ेगी 730 रुपए की व्यवस्था

केंद्र सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 1770 रुपए तय कर रखा है, जबकि राज्य की कांग्रेस सरकार अपनी घोषणा के अनुसार 2500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदेगी। ऐसे में राज्य सरकार को प्रति क्विंटल 730 रुपए की व्यवस्था खुद करनी पड़ेगी। पिछले खरीफ सीजन में करीब 80 लाख टन धान सरकारी मंडी में पहुंचा था। इसके लिए सरकार को करीब छह हजार करोड़ स्र्पये का कर्ज लेना पड़ा था।

धान खरीद का लक्ष्य बढ़ाया गया है, तो उसके लिए बजट में अतिरिक्त राशि का प्रावधान भी करना होगा। विभाग अतिरिक्त राशि का प्रस्ताव बनाकर वित्त विभाग को भेजेगा, ताकि वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट में धान उत्पादन के लिए प्रोत्साहित राशि बढ़ाकर ली जाए। – अमरजीत भगत, खाद्य मंत्री, छत्तीसगढ़