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छत्तीसगढ़ : शादी के 15 वर्ष बाद तलाक की नौबत, बच्चों का बंटवारा हो गया, फिर ऐसे हो गए एक

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केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड नई दिल्ली महिला बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से संचालित एमएसवीपी परिवार परामर्श केंद्र ने शादी के 15 साल बाद 5 माह से अलग-अलग रह रहे अनूपपुर मध्यप्रदेश निवासी दंपति के चेहरे की मुस्कान लौटाई। दोनों खुशनुमा माहौल में परिवार परामर्श केंद्र से विदा हुए।

एक समय ऐसा था कि महेंद्र और अर्चना एक दूसरे का चेहरा देखना पसंद नहीं करते थे। दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर ऐसी लड़ाई होती थी कि कब सिर फुटौव्वल की स्थिति बन जाए कहना मुश्किल था।

इनका घरेलू विवाद घर की चहारदीवारी से बाहर आ चुका था। उन्होंने अपनी समस्या के निवारण के लिए मध्यप्रदेश प्रदेश पुलिस थाना, महिला आयोग सहित सभी जगह केस लगाया लेकिन न्याय से वंचित रहे। स्थिति ऐसी हो गई थी कि बच्चों का भी बंटवारा हो गया था।

मानव संसाधन संस्कृति विकास परिषद्, परिवार परामर्श केंद्र में काउंसलिंग के दौरान दोनों ने एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान किया और बीती बातों को भूलकर एक साथ जीवन बसर करने के लिए राजी हुए।

परिवार परामर्श केंद्र के माध्यम से अर्चना महेंद्र की विशेष काउंसलिंग में डॉक्टर मीरा शुक्ला, सी. गिरिजा व माधुरी की अहम भूमिका रही। एमएसवीपी की डायरेक्टर डॉ मीरा शुक्ला के मार्गदर्शन में दोनों पक्षों को अलग-अलग बुलाकर उनकी गलतियों से भी अवगत कराया गया।

दोनों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने की सीख दी गई। इसके बाद दोनों एक साथ एक छत के नीचे रहने के लिए तैयार हुए। खुशी के मौके पर चॉकलेट खिलाकर साथ में मूवी देखने के लिए इन्हें भेजा गया। इसके बाद इन्हें अपने घर अनूपपुर जाने के लिए विदा किया गया।

ऐसे पहुंचे फैमिली काउंसलिंग के लिए

पारिवारिक उलझनों के बीच मानसिक तनाव झेल रहे महेंद्र को एक दिन न्यायालय में एमएसवीपी परिवार परामर्श केंद्र के डायरेक्टर मीरा शुक्ला के बारे में जानकारी मिली। कई परिवारों की काउंसलिंग के बाद घर बसने की जानकारी मिलने पर उन्हें फैमिली काउंसलिंग सेंटर में संपर्क करने के लिए कहा गया।

यहां उन्होंने अपना केस पंजीकृत करवाया। लगातार पांच से सात बार की काउंसलिंग आमने सामने होने के बाद दोनों की अलग-अलग फोन पर भी काउंसलिंग हुई। इसके बाद सफलता रंग लाई और इन्होंने सहर्ष जीवनसाथी के रूप में रहना स्वीकार किया।

छत्तीसगढ़ : जल शक्ति अभियान में बालोद 8वें, रायपुर 25वें स्थान पर

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केंद्र सरकार के जल शक्ति अभियान में शामिल छत्तीसगढ़ के दोनों जिलों बालोद और रायपुर का पहले महीने में प्रदर्शन बेहतर रहा है। इस अभियान में जल संकट से जूझ रहे देश के 254 जिलों को शामिल किया गया है। एक जुलाई से शुरू हुए इस अभियान में राज्य के बालोद जिले ने 59.26 फीसद अंक हासिल कर 8वां स्थान प्राप्त किया है। वहीं, 32.74 फीसद अंक के साथ रायपुर 25वें स्थान पर है। अफसरों ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण के लाभों के बारे में जागरुकता पैदा करना और जल संसाधनों की कमी व भारत में हर घर में नल का पानी उपलब्ध कराना है।

जल शक्ति अभियान पेयजल और स्वच्छता विभाग के सहयोग से विभिन्न् मंत्रालयों और राज्य सरकारों का एक सहयोगात्मक प्रयास है। इस अभियान के तहत देश के 254 जिलों के 1539 ब्लॉक में केंद्र की ओर से रेन हार्वेस्टिंग, वाटर कन्वर्सेशन और वाटर मैनेजमेंट जैसी चीजों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार की ओर से बारिश के पानी को किस तरह बचाने और उसका इस्तेमाल कैसे किया जाए इसकी जानकारी लोगों को दी जा रही है। पौधा रोपण समेत अन्य उपाय भी किए जा रहे हैं।

अभी दूसरा चरण बाकी : यह अभियान दो चरणों में चलाया जा रहा है। एक जुलाई 2019 से पहला चरण शुरू हुआ है। वहीं दूसरा चरण एक अक्टूबर से 30 नवंबर 2019 तक चलाया जाएगा।

डेढ़ माह की मेहनत ने बदल दी बालोद की छवि

करीब दो माह पहले आई एक रिपोर्ट में बालोद जिले को सबसे डाउन वाटर लेवल वाला जिला चिन्हांकित किया गया था। प्रशासन ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया। कलेक्टर रानू साहू ने इसे लेकर सबसे चिंतनीय स्थान गुरूर ब्लॉक समेत पूरे जिले में अभियान छेड़ दिया। वाटर हार्वेस्टिंग, पौधारोपण , शोकपिट का निर्माण, तालाबों और कुओं की सफाई, गहरीकरण आदि पर जमकर काम किया गया। गांव-गांव में चौपाल लगाई गई। प्रोजेक्टर के माध्यम से भूजल स्तर नीचे जाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताते हुए जागरूक किया गया। जल संरक्षण की दिशा में काम करने वालों को पुरस्कृत किया गया। इस मेहनत का ही परिणाम रहा कि जल शक्ति अभियान के तहत जारी सूची में बालोद जिले को देश में आठवां स्थान मिला है।

छत्तीसगढ़ : मरीजों की जांच रिपोर्ट एसएमएस से देगा रायपुर एम्स

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने मरीजों की सुविधाओं में इजाफा किया है। ओपीडी और भर्ती मरीजों की जांच रिपोर्ट की जानकारी अब मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से दी जाएगी। दरअसल नईदुनिया के आयोजन हैलो नईदुनिया में एम्स हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. करन पीपरे के समक्ष फोन पर कई मरीजों ने समय पर रिपोर्ट न मिलने की शिकायत की थी।

अधीक्षक ने मरीजों और उनके परिवार वालों को आश्वासन दिया था कि जल्द से जल्द दिक्कत दूर की जाएगी। मरीजों को जांच के बाद उसकी जानकारी मोबाइल पर दे दी जाएगी। मैसेज में यह भी बता दिया जाएगा कि रिपोर्ट कब ले लें। ये होती थी दिक्कत अब तक ऑनलाइन ओपीडी बुकिंग पर ही मोबाइल पर एसएमएस की सुविधा दी जाती है। पेशाब, खून और अन्य जांच की रिपोर्ट मिलने का समय मरीजों को पता नहीं होता था। कई दफे मरीज रिपोर्ट लेने के लिए चक्कर काटते थे।

इन्हीं असुविधाओं को दूर करने के लिए जांच रिपोर्ट की जानकारी एसएमएस के माध्यम से दी जाती है। यह सुविधा अब तक प्राइवेट हॉस्पिटल में ही दी जाती थी। मरीजों को समय पर जांच रिपोर्ट नहीं मिलती है। कई मरीज रोजाना ट्रामा बिल्डिंग और ओपीडी केंद्र में जांच रिपोर्ट के लिए चक्कर काटते हैं। एसएमएस सुविधा से मरीजों को पता चल जाएगा कि जांच पूरी हुई है या नहीं।

– ओपीडी मरीज रोजाना 1800-2000

– आईपीडी मरीज रोजाना 150 से 200

छत्तीसगढ़ : बारिश से खूंटाघाट बांध लबालब, खोलने पडेंगे गेट

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जिले के सबसे बड़े बांध खूंटाघाट में तेजी से जलभराव हो रहा है। सोमवार शाम को जलस्तर बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पानी की आवक ज्यादा होने से उम्मीद की जा रही है कि बांध एक से दो दिन में छलक जाएगा। इसे खेती और पर्यटन के लिहाज से शुभ संकेत माना जा रहा है।

शुरुआत में कम बारिश होने से जिले के सभी बांधों में बहुत कम पानी था। इससे सिंचाई के लिए किसानों को पानी मिलने पर ही संदेह जताया जा रहा था। पिछले 15 दिनों में स्थिति अब बदल गई है। लगातार हो रही बारिश के कारण खूंटाघाट बांध अब पूरी तरह भरने के कगार पर है। बांध का वेस्ट वियर से गिरने वाला पानी झरने की तरह दिखता है। इसके कारण पर्यटकों को भी बांध के छलकने का इंतजार है।

जिस तरह से पानी की आवक है उससे उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही लोगों की इच्छा पूरी हो जाएगी। इधर खेती के लिए भी यह शुभ संकेत है। बांध भरा होने पर फसल पकने के समय विभाग किसानों को उनकी मांग के अनुसार पर्याप्त पानी दे सकता है। आमतौर पर नहर के अंतिम छोर टेल एरिया जहां पानी नहीं जाता था वहां के किसानों को भी पानी मिल जाएगा।

खूंटाघाट बांध के अलावा कोटा के घोंघा जलाशय में भी जलस्तर 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है। घोंघा छोटा बांध है। यहां अच्छी बारिश हुई तो एक दिन में यह पूरी तरह से भर जाएगा। खूंटाघाट बांध के पूरा भरने से किसान भी खुश हैं। इस बार खेतों को फसल लगने तुरंत बाद भी बांध से पानी दिया गया था। इसके बाद भी यह 100 प्रतिशत भरने के करीब है। पिछले साल भी इसी समय बांध पूरा भरा था।

खूंटाघाट बांध में पिछले एक सप्ताह से पानी की आवक बढ़ी है। इसके कारण जलस्तर बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह स्थिति तब है जब हम किसानों को एक बार सिंचाई के लिए पानी दे चुके हैं। उम्मीद है कि जल्द ही बांध का ओवरफ्लो शुरू हो जाएगा। फिलहाल किसानों से भी पानी छोड़ने की मांग नहीं है। ऐसे में पूरा पानी भविष्य के लिए बचाकर रखा जाएगा।

 आरपी शुक्ला कार्यपालन अभियंता, खारंग डिवीजन

छत्तीसगढ़ : जगदलपुर से रायपुर जा रही बस धमतरी में पलटी, कई यात्री घायल

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 गागरा पुल के पास मंगलवार अल सुबह 5:45 बजे एक तेज रफ्तार बस अचानक पलट गई। हादसे में उसमें सवार 8 से 10 यात्री घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। बताया जा रहा है कि मनीष ट्रेवल्स की यह बस जगदलपुर से रायपुर जा रही थी।

पलटने के बाद बस से सड़क किनारे लगे पेड़ से जा टकराई, जिससे उसे अलगा हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद बस में सवार यात्री घबराकर चिल्लाने लगे थे। किसी तरह उन्हें बाहर निकाला गया। रास्ते से निकल रहे लोगों ने घटना की सूचना पुलिस और एंबुलेंस को दी और यात्रियों को बस से बाहर निकालने में मदद की।

रायपुर के उरला में इस्पात मशीन में फसने से एक मजदूर की मौत

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उरला क्षेत्र में स्थित अविनाश इस्पात में मशीन में फसने से मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई। मजदूर का नाम शिवम कुशवाह(25) है, यह साकिन सीधी मध्यप्रदेश का रहने वाला था। अभी वह उरला के न्यू राजेंद्रनगर में रहता था। घटना के बाद फैक्ट्री में साथी मजदूर और परिजन हंगामा कर रहे हैं। सूचना मिलने के बाद उरला थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई है। मजदूर के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। उरला में फैक्ट्री में इस तरह मजदूर की मौत का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी यहां फैक्ट्र‍ियों में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। मजदूरों का आरोप है कि उनकी सुरक्षा के लिए यहां कोई व्यवस्थाएं नहीं होती। ऐसे में वे जान दाव पर लगाकर यहां काम करने को मजबूर रहते हैं।

छत्तीसगढ़ : अप और डाउन की 72 ट्रेनें रद, ट्रैकों की मरम्मत बनी आफत

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ट्रैकों की मरम्मत का कार्य यात्रियों के लिए आफत साबित होने लगा है, क्योंकि अप और डाउन की 72 ट्रेनें रद हैं। इनमें से कुछ को समय-समय पर अलग-अलग रूट पर रद कर दिया गया है। वहीं करीब 32 ट्रेनों के रूट बदल दिए गए हैं। इसमें सबसे अधिक दिल्ली रूट की ट्रेनों का है। ऐसे हालात में सीमित ट्रेनों के चलते कंफर्म टिकट के लिए मारामारी मची हुई है। मानसून की वजह से भी ट्रैकों की स्थिति पर फर्क पड़ा है, जिसे सुरक्षा के लिहाज से मरम्मत करने के लिए नॉन इंटरलाकिंग में ट्रेनों को विभिन्न दिवसों पर रद किया गया है।

इसके चलते एक ही दिन अन्य दिनों की भी लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। एक साथ इतनी संख्या में ट्रेनें रद कर दी गई हैं। ऐसे में बिलासपुर-रीवा एक्सप्रेस दुर्ग-बिलासपुर, दुर्ग-अंबिकापुर, बिलासपुर बीपीएल एक्सप्रेस, गोंदिया-इंटरसिटी ट्रेनों में अतिरिक्त कोच 30 दिसंबर तक के लिए बढ़ाए गए थे, लेकिन इसमें सिर्फ एक दिन की और बढ़ोतरी हो गई है।

ऐसे में जाहिर है कि इस रूट पर जाने वाले यात्रियों को भारी सुविधाएं मिलेगी। बता दें कि अभी तक सालभर में करीब 1702 अतिरिक्त कोच लगाए गए हैं। फिर भी स्थिति आउट ऑफ कंट्रोल है। टिकट के लिए मारामारी मची है।

बिलासपुर-रायपुर एवं दुर्ग-गोंदिया-कलमना रेल खंडों पर 31 सितंबर तक ये ट्रेनें रहेंगी रद

1- 20 सितंबर को डोगरगढ़-गोंदिया मेमू

2- 20 सितंबर को बिलासपुर से छूटने वाली बिलासपुर-रायपुर मेमू

3- 20 सितंबर को रायपुर से छूटने वाली रायपुर-डोगरगढ़ मेमू

4- 21 सितंबर को डोंगरगढ़ से छूटने वाली डोगरगढ़-रायपुर मेमू

5- 20 सितंबर को रायपुर से छूटने वाली रायपुर-दुर्ग मेमू

इसी खंड पर बीच में रद होने वाली ट्रेनें

1- 20 सितंबर रायपुर से छूटने वाली रायपुर-डोंगरगढ़ मेमू दुर्ग में

2- 21 सितंबर को गोंदिया से छूटने वाली गोंदिया-रायपुर मेमू दुर्ग में

सितंबर माह में इन दिन इतने घंटे नियंत्रित होने वाली ट्रेनें

1- 20 सितंबर को गेवरारोड से छूटने वाली गेवरारोड-बिलासपुर एक्सप्रेस को एक घंटा 45 मिनट घंटे नियंत्रित

2- 20 सितंबर को टाटानगर से छूटने वाली टाटानगर-इतवारी एक्सप्रेस को दो घंटा 25 मिनट घंटे नियंत्रित

इस माह बिलासपुर-नागपुर, बिलासपुर-कटनी एवं अनूपपुर-अंबिकापुर सेक्शन प्रभावित ट्रेनें

1. प्रत्येक सोमवार इतवारी से चलने वाली इतवारी-टाटानगर पैसेंजर इतवारी एवं बिलासपुर के बीच रद

2- प्रत्येक सोमवार को रायपुर से चलने वाली रायपुर-डोगरगढ़ मेमू

3- प्रत्येक मंगलवार को डोंगरगढ़ से चलने वाली डोगरगढ़-रायपुर मेमू

4- प्रत्येक मंगलवार को रायपुर से चलने वाली रायपुर-इतवारी पैसेंजर एवं प्रत्येक बुधवार को इतवारी से चलने वाली इतवारी-रायपुर पैसेंजर

5- प्रत्येक मंगलवार को रायपुर से चलने वाली रायपुर-डोंगरगढ़ मेमू और प्रत्येक बुधवार को डोगरगढ़ से चलने वाली डोंगरगढ़-रायपुर मेमू

6- प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को टाटानगर एवं बिलासपुर से चलने वाली टाटानगर-बिलासपुर-टाटानगर पैसेंजर

7- प्रत्येक बुधवार, शनिवार, गुरुवार एवं रविवार को बिलासपुर एवं गेवरारोड से चलने वाली बिलासपुर-गेवरारोड-बिलासपुर मेमू

8- प्रत्येक बुधवार, शनिवार, गुरुवार एवं रविवार को बिलासपुर एवं गेवरारोड से चलने वाली बिलासपुर-गेवरारोड-बिलासपुर मेमू

9- प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को बिलासपुर एवं टिटलागढ से चलने वाली 58214/58213 बिलासपुर-टिटलागढ़-बिलासपुर मेमू रदद रहेगी।

10- प्रत्येक शुक्रवार को इतवारी से चलने वाली इतवारी-टाटानगर पैसेंजर ईतवारी एवं झारसुगुड़ा के बीच रद

11-प्रत्येक शुक्रवार, गुरुवार एवं रविवार को टाटानगर-बिलासपुर-टाटानगर पैसेंजर बिलासपुर एवं झारसुगुड़ा के बीच रद

12- प्रत्येक गुरुवार एवं रविवार को रायपुर चलने वाली रायपुर-इतवारी पैसेंजर रद

13- शुक्रवार एवं सोमवार को इतवारी से चलने वाली इतवारी-रायपुर पैसेंजर

14- गुरुवार एवं रविवार को रायपुर से चलने वाली रायपुर-डोगरगढ़ मेमू

15- शुक्रवार एवं सोमवार को डोगरगढ़ से चलने वाली डोगरगढ़-रायपुर मेमू

16- गुरुवार एवं रविवार को डोंगरगढ़ से चलने वाली डोगरगढ़-गोंदिया मेमू

बीच में ही रद होने वाली ट्रेनें

1- प्रत्येक बुधवार एवं शनिवार को बिलासपुर से चलने वाली बिलासपुर-कटनी-बिलासपुर मेमू शहडोल में ही रद होगी एवं शहडोल से कटनी-बिलासपुर मेमू बिलासपुर के लिए रवाना होगी।

2- बुधवार एवं शनिवार को अंबिकापुर से चलने वाली अंबिकापुर-शहडोल-अम्बिकापुर पैसेंजर अनूपपुर में ही रद होगी एवं अनूपपुर से ही शहडोल-अंबिकापुर पैसेंजर बनकर अंबिकापुर के लिए रवाना होगी।

3- बुधवार एवं शनिवार को चिरमिरी से चलने वाली चिरमिरी-चंदिया रोड-चिरमिरी पैसेंजर को शहडोल में ही रद होगी एवं शहडोल से चंदिया रोड-चिरमिरी पैसेंजर बनकर चिरमिरी के लिए रवाना होगी।

4- प्रत्येक सोमवार को टाटानगर से चलने वाली टाटानगर-इतवारी पैसेंजर को बिलासपुर में ही रद होगी।

5- प्रत्येक शनिवार को टाटानगर से चलने वाली टाटानगर-इतवारी पैसेंजर को झारसुगुड़ा में ही रद होगी एवं झारसुगुड़ा से ही इतवारी-टाटानगर पैसेंजर बनकर रवाना होगी।

6- गुरुवार एवं रविवार को रायपुर से चलने वाली रायपुर-डोंगरगढ़ मेमू दुर्ग में ही रद

देरी से रवाना होने वाली ट्रेनें

1- बुधवार व शनिवार को बिलासपुर से चलने वाली बिलासपुर-पेंड्रा रोड मेमू एक घंटे देरी रवाना होगी।

बीच में नियंत्रित होने वाली ट्रेनें

1- मंगलवार को बरौनी से चलने वाली बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस को बिलासपुर एवं रायपुर के बीच तीन घंटे नियंत्रित

2- सोमवार एवं शुक्रवार को गोंदिया-रायपुर मेमू व डोंगरगढ़-रायपुर मेमू को दुर्ग में नियंत्रित

3- गुरुवार एवं रविवार को रायपुर-गोंदिया मेमू व रायपुर-डोंगरगढ़ मेमू एवं डोंगरगढ़-रायपुर मेमू को दुर्ग में नियंत्रित होगी।

उत्तर रेलवे के रूट पर ये ट्रेनें भी विभिन्न दिवसों पर रद्द रहेंगी

उत्तर रेलवे के वाराणसी रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य के चलते 13 सितंबर तक ट्रेन नंबर 15232 व 15231 गोंदिया-बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस रद रहेगी। 12 सितंबर तक बरौनी से चलने वाली ट्रेन नंबर 15231 बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस और 13 सितंबर तक गोंदिया से चलने वाली गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस रद रहेगी।

विभिन्न दिवसों पर हंसदेव एक्सप्रेस रहेगी रद

कोरबा एवं रायपुर के बीच चलने वाली कोरबा-रायपुर-कोरबा हंसदेव एक्सप्रेस और कोरबा-रायपुर-कोरबा हसदेव एक्सप्रेस के दोनों रैकों में एलएचबी कोच होने के कारण इन का प्राथमिक रखरखाव का कार्य किया जाएगा। 29 सितंबर के बीच विभिन्न दिवसों में किया जाएगा। इसमें 10, 17 एवं 24 सितम्बर को रायपुर से चलने वाली रायपुर-कोरबा हंसदेव एक्सप्रेस को बिलासपुर में ही समाप्त होगी। यह ट्रेन बिलासपुर से ही 11, 18 एवं 25 सितंबर को कोरबा-रायपुर हसदेव एक्सप्रेस बनकर रायपुर के लिए रवाना होगी। यह ट्रेन बिलासपुर एवं कोरबा के बीच रद रहेगी। 14, 21 एवं 28 सितम्बर को रायपुर से चलने वाली रायपुर-कोरबा हसदेव एक्सप्रेस को बिलासपुर में तक ही जाएगी। यह ट्रेन बिलासपुर से ही 15 सितंबर, 22 एवं 29 सितंबर को कोरबा-रायपुर हंसदेव एक्सप्रेस बनकर रायपुर के लिए रवाना होगी। यह ट्रेन बिलासपुर एवं कोरबा के बीच रद रहेगी।

मोहम्‍मद शमी को बड़ी राहत, फिलहाल सरेंडर नहीं करना होगा

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घरेलू हिंसा मामले में गिरफ्तारी वारंट का सामना कर रहे भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्‍मद शमी को फिलहाल राहत मिल गई है और उनके वकील सलीम रहमान उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगवाने में सफल रहे हैं. सलीम ने आईएएनएस से कहा कि यह कदम कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ किसी भी मामले में था और ऐसा कोई तरीका नहीं था जिससे शमी को सरेंडर करने के लिए कहा जा सके.

वेस्टइंडीज दौरा समाप्त होने के बाद मोहम्‍मद शमी अमेरिका चले गए हैं और वह अब बीसीसीआई के साथ-साथ अपने अमेरिकी वकील के भी संपर्क में थे. शमी पर उनकी पत्नी हसीन जहां ने घरेलू हिंसा के आरोप लगाए थे. अदालत ने शमी को 15 दिन के अंदर सरेंडर करने और जमानत की अर्जी देने के आदेश दिए थे.

बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने IANS से कहा था कि शमी 12 सितम्बर को भारत लौटेंगे. इस समय वह अपने वकील सलीम रहमान के संपर्क में हैं. अधिकारी ने कहा, “वेस्टइंडीज दौरा समाप्त होने के बाद शमी अमेरिका चले गए हैं और वह 12 सितम्बर को भारत लौटेंगे. कोर्ट से मिले गिरफ्तारी वारंट मामले में वह अपने वकील के संपर्क में हैं और उन्होंने इस मामले पर बोर्ड के लोगों से बात की है.”

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने दो सितम्बर को कहा था कि शमी के खिलाफ बोर्ड तब तक कोई कार्रवाई नहीं करेगा जब तक वो चार्जशीट नहीं देख लेता है.

अगले दो साल में 40 नई वंदेभारत एक्सप्रेस तैयार करने की योजना, रेलवे का होगा कायापलट

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मोदी सरकार रेलवे (Indian Railways) की तस्वीर बदलने के लिए प्रयासरत है. मेक इन इंडिया (Make in India) अभियान के तहत अगले दो साल में 40 नई वंदेभारत एक्सप्रेस (Indian Railways) तैयार करने की योजना है. वंदे भारत को टी-18 (T-18) भी कहा जाता है. इससे पहले खबर आई थी कि सरकार ने वंदे भारत ट्रेन सेट के निर्माण पर रोक लगाई हुई है क्योंकि वंदे भारत ट्रेन सेट में दो खामिया पाई गई हैं.

इन कमियों को दूर किया जा रहा है. फिलहाल दिल्ली -वाराणसी के बीच चल रही वंदेभारत ट्रेन सेट में बिजली की खपत इंटरनेशनल मानकों के मुकाबले ज्यादा है. इस ट्रेन सेट में सामान्य ट्रेन से चार गुना ज्यादा बिजली की खपत हो रही है. इसी खामी के चलते रेल मंत्रालय ने वंदे भारत ट्रेन सेट के निर्माण पर रोक लगा दी थी. वंदे भारत प्रोजेक्ट और उत्पादन में इसलिए भी विलंब हुआ क्योंकि मंत्रालय नए स्पेसिफिकेशन वाले ट्रेन सेट की तैयारी कर रहा था जो अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा कर सकें. अब ये स्पेसिफिकेशन तैयार हैं.

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव का कहना है कि अक्टूबर मध्य तक नए स्पेसिफिकेशन से लेस वंदेभारत एक्सप्रेस सेट के लिए ग्लोबल टेंडर मंगाए जाएंगे. मंत्रालय का कहना है कि अगले दो साल में भारत 40 नए ट्रेन सेट का निर्माण करेगा. 2020-21 तक भारत में 15 ट्रेन सेट का निर्माण किया जाएगा जबकि 2021-22, तक 25 ट्रेन सेट का निर्माण किया जाएगा. कुल नए 40 सेट तैयार किए जाएंगे.

गौरतलब है कि इंट्रीगल कोच फैक्टरी चेन्नई (आईसीएफ) ने दो वंदे भारत एक्सप्रेस का निर्माण किया था. इसे 18 महीने में तैयार किया गया था. इस ट्रेन को ‘मेक इन इंडिया’ प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया था.

दिल्‍ली एयरपोर्ट पर दिव्‍यांग महिला से कहा- खड़ी हो, नौटंकी मत करो!

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एक व्हीलचेयर पर सवार अमेरिकी महिला (जो ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड भी रखती हैं) ने सोमवार को आरोप लगाया कि इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) की एक कांस्टेबल द्वारा उन्हें ‘प्रताड़ित’ किया गया, क्योंकि वे चेकिंग के लिए अपने व्हीलचेयर से खड़ी नहीं हो पा रहीं थी.

प्रेरक वक्ता और विकलांग अधिकार कार्यकर्ता विराली मोदी ने कहा कि वे दिल्ली से मुंबई की यात्रा कर रही थी, जब उन्हें इस प्रताड़ना का सामना करना पड़ा. साल 2006 में रीढ़ की हड्डी में लगी चोट के कारण वे पैरालिसिस का शिकार हैं. उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर उन्हें कभी भी ऐसी प्रताड़ना का सामना नहीं करना पड़ा है.

देश के सभी 60 एयरपोर्ट्स की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली सीआईएसएफ को की गई शिकायत में मोदी ने कहा, “मैं पिछले 13 सालों से दिव्यांग हूं. मैं चल नहीं सकती और खड़ी नहीं हो सकती. मैं आज (सोमवार) आईजीआई एयरपोर्ट, टर्मिनल 3 से स्पाइसजेट की फ्लाइट (एसजी8723) से यात्रा कर रही थी.” उन्होंने कहा कि अपनी दिव्यांगता के कारण उन्होंने अपने निजी व्हील चेयर को चेक इन काउंटर पर दे दिया ताकि उसे सामान के साथ विमान में रखा जा सके.

उन्होंने कहा, “मेरी मदद के लिए एक पोर्टर नियुक्त किया गया, जो मुझे विमान में मेरे सीट तक छोड़ने जा रहा था. सुरक्षा जांच तक पहुंचने पर मुझे आपकी महिला कर्मचारी (सीआईएसएफ कर्मी) द्वारा जीवन के सबसे बुरे अनुभव का सामना करना पड़ा. उसने जबरदस्ती मुझे खड़ा होने के लिए दवाब डाला, यहां तक कि मैं और मेरे पोर्टर ने उनसे कई बार कहा कि मैं खड़ी नहीं हो सकती. तो उसने मेरी सुरक्षा जांच से इनकार कर दिया.”

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मोदी ने कहा कि उन्होंने उसे अपना पासपोर्ट भी दिखाया, जिससे उनके विकलांग होने की पुष्टि होती थी. लेकिन सीआईएसएफ कर्मी उन पर चिल्लाने लगी और ‘नाटक करने का’ आरोप लगाया. अपने पत्र में उन्होंने कहा कि वह सीआईएसएफ कर्मी का नाम नहीं जान सकी, क्योंकि वह उस तरीके से खड़ी थी कि उसके नाम का टैग दिखा नहीं. उसके बाद एक वरिष्ठ कर्मी आया और जांच कर जाने दिया.

सीआईएसएफ कर्मी के व्यवहार पर निराशा व्यक्त करते हुए मोदी ने कहा, “क्या इसी तरीके से सीआईएसएफ अपने लोगों को किसी विकलांग के साथ व्यवहार करने के लिए प्रशिक्षित करती है? अगर ऐसा है तो यह हमारी सरकार के लिए शर्म की बात है.”

उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले मुंबई एयरपोर्ट पर भी एक सीआईएसएफ कर्मी द्वारा उन्हें ऐसे ही व्यवहार का सामना करना पड़ा था. उसने भी खड़ा होने पर जोर दिया और जब वह नहीं उठ सकी तो उस महिला सुरक्षाकर्मी ने उसके पांव को इतनी जोर से खींचा कि अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था.