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सरकार बदल सकती है SIM बाइंडिंग का नियम? इन ऐप्स को मिल सकती है खास राहत…

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केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले SIM बाइंडिंग नियमों को लेकर अब नया मोड़ सामने आ रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार इन नियमों में कुछ नरमी दिखाने पर विचार कर सकती है.

कई टेक कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने इन नियमों को लेकर चिंता जताई है जिसके बाद सरकार इस विषय पर दोबारा समीक्षा कर रही है.

क्या है SIM बाइंडिंग का नियम?

दिसंबर 2025 में Department of Telecommunications (DoT) ने नए नियम जारी किए थे. इनके अनुसार मैसेजिंग ऐप्स को यूजर के मोबाइल SIM से लगातार लिंक रहना जरूरी होगा. इसका मतलब यह है कि जिस SIM नंबर से अकाउंट बनाया गया है उसी SIM वाले डिवाइस से उस ऐप का इस्तेमाल किया जा सकेगा.

इसके अलावा नियमों में यह भी कहा गया था कि अगर कोई यूजर इन ऐप्स को वेब या डेस्कटॉप वर्जन पर इस्तेमाल करता है तो उसे हर छह घंटे में अपने आप लॉगआउट कर दिया जाएगा. इसका उद्देश्य सुरक्षा को मजबूत बनाना और गलत इस्तेमाल को रोकना बताया गया था.

टेक कंपनियों ने उठाई आपत्ति

इन नियमों को लेकर कई सोशल मीडिया और टेक कंपनियों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. कंपनियों का कहना है कि यह नियम केवल उन ऐप्स पर लागू होना चाहिए जो मुख्य रूप से मैसेजिंग के लिए बनाए गए हैं.

उनका तर्क है कि कई बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में मैसेजिंग सिर्फ एक फीचर होता है जबकि उनकी मुख्य सेवाएं अलग होती हैं. ऐसे में उन पर भी यही नियम लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा.

कुछ प्लेटफॉर्म्स को मिल सकती है छूट

रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार अब ऐसे प्लेटफॉर्म्स को छूट देने की संभावना पर विचार कर रही है जिनका मुख्य काम एक-दूसरे को मैसेज भेजना नहीं है. सूत्रों के अनुसार कानून का उद्देश्य मुख्य रूप से कम्युनिकेशन ऐप्स को कवर करना था, इसलिए इस पर थोड़ी लचीलापन दिखाया जा सकता है. हालांकि अभी तक इस विषय पर अंतिम सहमति नहीं बनी है.

कुछ कंपनियों ने शुरू की तैयारी

नियमों के लागू होने की संभावना को देखते हुए कुछ मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पहले ही बदलाव की तैयारी शुरू कर चुके हैं. उदाहरण के तौर पर

WhatsApp, JioChat और Arattai जैसे ऐप्स अपने यूजर अकाउंट को SIM से जोड़ने की तकनीकी व्यवस्था पर काम कर रहे हैं.

क्यों लाया गया था यह नियम?

SIM बाइंडिंग का प्रस्ताव Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules, 2025 के तहत सामने आया था. इन नियमों के जरिए सरकार ने उन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी टेलीकॉम नियमों के दायरे में लाने की कोशिश की है जो मोबाइल नंबर के आधार पर यूजर की पहचान करते हैं.

नियमों के अनुसार कंपनियों को यह सुनिश्चित करना था कि यूजर उसी डिवाइस पर सेवा का इस्तेमाल कर सके जिसमें रजिस्ट्रेशन के समय इस्तेमाल किया गया SIM मौजूद हो. कंपनियों को तकनीकी बदलाव लागू करने के लिए 90 दिनों का समय दिया गया था.

साइबर धोखाधड़ी रोकने की कोशिश

सरकार का मानना है कि SIM से लिंक न होने वाले डिवाइसों का इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया जा सकता है. खासकर विदेशों से बैठकर टेलीकॉम फ्रॉड करने की घटनाओं को रोकने के लिए इस तरह के नियम जरूरी बताए गए थे. इसी वजह से वेब या डेस्कटॉप लॉगिन को सीमित समय तक ही सक्रिय रखने का प्रावधान रखा गया.

उद्योग संगठनों ने जताई चिंता

टेक उद्योग से जुड़े कई संगठनों ने इन नियमों को लेकर चिंता भी व्यक्त की है. Broadband India Forum का कहना है कि इस तरह के नियम टेलीकॉम विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर भी हो सकते हैं और इससे कुछ कानूनी सवाल खड़े हो सकते हैं.

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि साइबर सुरक्षा के लिए SIM-KYC प्रक्रिया को और मजबूत किया जाए और टेलीकॉम कंपनियों, बैंकों तथा जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाए.

‘सड़क पर कचरा, वॉशरूम में पानी नहीं’, राष्ट्रपति दौरे में हुई चूक पर केंद्र ने ममता सरकार से मांगा जवाब…

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बंगाल में राष्ट्रपति के कार्यक्रम को लेकर हुई कथित चूक को लेकर मामला अब थमने का नाम नहीं ले रहा है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे को लेकर आरोप प्रत्यारोप के दौर के बीच केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती से रिपोर्ट मांगी है.

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह सचिव ने चार बातें बताई है. इनमें राष्ट्रपति को रिसीव करने और विदा करने के लिए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक क्यों मौजूद नहीं थे? राष्ट्रपति के लिए बनाए गए वॉशरूम में पानी नहीं था. प्रशासन ने जो रास्ता चुना था, वह कचरे से भरा था. दार्जिलिंग के जिला मजिस्ट्रेट, सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर और एडिशनल जिला मजिस्ट्रेट इसके लिए जिम्मेदार हैं. उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है?

केंद्रीय गृह सचिव ने शाम 5 बजे तक मांगा जवाब

केंद्रीय गृह सचिव ने शाम 5 बजे तक इस पर जवाब मांगा है. केंद्र और टीएमसी सरकार के बीच यह टकराव राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे को लेकर हुआ है. बीजेपी का आरोप है कि ममता बनर्जी की राज्य सरकार ने राष्ट्रपति की बेइज्जती की. बनर्जी ने बंगाल के मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी पर देश के सबसे बड़े पद का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.

राष्ट्रपति ने सीएम की गैरमौजूदगी पर जताई थी हैरानी

इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मू ने बंगाल में हुए कार्यक्रम को लेकर नाराजगी जताई थी. उन्होंने हैरानी जताई थी कि उनके दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने उनसे क्यों मुलाकात नहीं की? इसके अलावा उन्होंने कहा था कि आम तौर पर राष्ट्रपति आ रहे होते हैं, तो मुख्यमंत्री को स्वागत करना चाहिए. दूसरे अन्य मंत्रियों को भी मौजूद रहना चाहिए. लेकिन वह नहीं आईं. गवर्नर बदल गए हैं. नहीं आ सके. लेकिन क्योंकि तारीख तय हो गई थी, इसलिए मैं आई हूं.

इसके अलावा राष्ट्रपति ने कार्यक्रम को जगह बदलने पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि आज का प्रोग्राम ऐसी जगह हो रहा है, जहां लोगों का आना मुश्किल है. शायद राज्य सरकार आदिवासियों की भलाई नहीं चाहती. इसलिए उन्होंने यहां आने से रोका गया. ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं. मैं भी बंगाल की बेटी हूं. मुझे नहीं पता कि वह परेशान हैं, या नहीं. इसलिए जगह बदल गई. वैसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. आप सब ठीक रहें.

क्यों छिड़ा है विवाद?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पश्चिम बंगाल में 9वें इंटरनेशनल संथाली कॉन्क्लेव में शामिल होने पहुंची थी. यहां कार्यक्रम की जगह बदलने को लेकर और बंगाल सरकार के किसी भी मंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नाराजगी जताई. देखते ही देखते पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया. पीएम मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों समेत बीजेपी नेताओं ने टीएमसी पर गंभीर आरोप लगाए.

टीएमसी और अपनी सरकार पर हो रहे इस हमले को लेकर सीएम ममता बनर्जी ने बीजेपी की कड़ी आलोचना की. उन्होंने पलटवार करते हुए इसे मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी के दो महीने में होने वाले राज्य चुनावों से पहले आक्रामक अभियान से जोड़ दिया.

Property Alert: अब रजिस्ट्री के लिए नहीं काटने होंगे चक्कर, इस राज्य में  1 अप्रैल से बदल जाएगा पूरा प्रोसेस, जानें क्या हैं नए नियम?

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Bihar Land Registry Rule : अगर आप बिहार में जमीन या मकान खरीदने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए सबसे जरूरी है। राज्य सरकार आगामी 1 अप्रैल से रजिस्ट्री की प्रक्रिया में एक ऐतिहासिक बदलाव करने जा रही है।

अब आपको रजिस्ट्री के बाद नहीं बल्कि रजिस्ट्री से पहले ही यह पता चल जाएगा कि जमीन का असली मालिक कौन है और उस पर कोई विवाद तो नहीं है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने मिलकर इस ‘प्री-रजिस्ट्री वेरिफिकेशन’ सिस्टम को तैयार किया है।

क्या है नई व्यवस्था और कैसे काम करेगी?

अब तक लोग जमीन की रजिस्ट्री करा लेते थे और बाद में दाखिल-खारिज (Mutation) के समय उन्हें पता चलता था कि कागजात में गड़बड़ी है। अब इस सिरदर्द को खत्म करने के लिए ई-निबंधन पोर्टल पर एक नया विकल्प दिया जा रहा है। खरीदार और विक्रेता को सबसे पहले पोर्टल पर अपना अकाउंट बनाकर लॉगिन करना होगा। आवेदन के दौरान जमीन का खाता, खेसरा, जमाबंदी संख्या, रकबा (Area), थाना नंबर और चौहद्दी जैसी जानकारियां भरनी होंगी। जैसे ही आप भूमि की जानकारी का विकल्प चुनेंगे यह आवेदन सीधा आपके अंचल कार्यालय (CO Office) पहुंच जाएगा। राजस्व अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर जमीन की जांच कर अपनी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।

विवादों पर लगेगी डिजिटल लगाम बिहार में जमीन से जुड़े विवाद अदालतों में सबसे ज्यादा हैं। सरकार का मानना है कि इस कदम से:

फर्जीवाड़ा रुकेगा: कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे की जमीन या सरकारी जमीन को अपना बताकर नहीं बेच पाएगा।

पारदर्शिता आएगी: खरीदार को अंचल कार्यालय की रिपोर्ट मिलने के बाद ही पैसा देने का भरोसा मिलेगा।

दाखिल-खारिज आसान होगा: चूंकि जमीन की जांच पहले ही हो चुकी होगी, इसलिए रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन की प्रक्रिया में देरी नहीं होगी।

अंचल कार्यालयों के लिए बड़ी चुनौती

बिहार में रोजाना औसतन 6 से 8 हजार दस्तावेजों की रजिस्ट्री होती है। 1 अप्रैल के बाद अंचल कार्यालयों पर काम का बोझ काफी बढ़ जाएगा क्योंकि उन्हें हर आवेदन पर 10 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। अधिकारियों के लिए यह सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी कि रिपोर्ट समय पर और सटीक हो।

आवेदन के लिए जरूरी जानकारियां 

  • निबंधन कार्यालय और अंचल का नाम।
  • मौजा और थाना संख्या।
  • जमीन का खाता, खेसरा और जमाबंदी नंबर।
  • जमीन का प्रकार (कृषि, आवासीय या व्यावसायिक)।
  • खरीदार और विक्रेता का पूरा विवरण।

Ramadan 2026 Sehri Iftar Time: रमजान का 19वां रोजा 9 मार्च को, देखें शहर अनुसार सहरी-इफ्तार का समय…

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Ramadan 2026 19th Roza Sehri Iftar Time: रमजान के पाक महीने में मुसलमान हर रोज सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा यानी उपवास रखते हैं. रमजान रोजा, इबादत, संयम, दान और आत्मशुद्धि का प्रतीक है.

रोजा रखने की शुरुआत सहरी से होती है और दिनभर भूखे-प्यासे रहने के बाद शाम में इफ्तार के साथ रोजा खोला जाता है.

सहरी और इफ्तार

सुबह फज्र की अजान से पहले मुसलमान सेहरी करते हैं और पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर नियमों का पालन करते हैं. सहरी में किए गए भोजन से रोजेदारों को पूरे दिन ऊर्जा मिलती है. आमतौर सहरी में लोग हल्का लेकिन पौष्टिक भोजन जैसे रोटी, चावल, फल, दही, दूध, खजूर और पानी आदि लेते हैं.

सूर्यास्त के समय जब रोजा खोला जाता है तो उसे इफ्तार कहा जाता है. परंपरा के अनुसार रोजा खजूर और पानी से खोला जाता है, इसके बाद नमाज अदा की जाती है. इफ्तार में फल, पकौड़े, चाट, खजूर, जूस और कई तरह के पकवान भी शामिल होते हैं.

रमजान में रोजा रखना हर मुसलमान पर फर्ज किया गया है. लेकिन रोजा तभी पूरा होता है जब सही समय पर सहरी और इफ्तार किया जाए.

LIC Bima Sakhi: पैसों की टेंशन खत्म! LIC की इस स्कीम से महिलाओं के खाते में हर महीने आएंगे 7000 रुपये…

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LIC Bima Sakhi: अगर आप रोजगार की तलाश में हैं और खुद के पैरों पर खड़ी होना चाहती हैं, तो एलआईसी की ‘बीमा सखी योजना’ आपके लिए एक शानदार अवसर साबित हो सकती है. इस योजना से जुड़कर महिलाएं न सिर्फ बीमा सेक्टर में अपना करियर बना सकती हैं, बल्कि शुरुआत से ही हर महीने 7,000 रुपये तक की निश्चित आमदनी भी प्राप्त कर सकती हैं.

What is LIC's Bima Sakhi Yojana? PM Modi's big initiative for women  empowerment

हर महीने होगी 7,000 रुपये की कमाई?

‘बीमा सखी योजना’ असल में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की एक ठोस सरकारी पहल है. इस योजना के तहत चुनी गई महिलाओं को देशभर में एलआईसी एजेंट के तौर पर बाकायदा प्रशिक्षित किया जाता है. इस स्कीम की सबसे खास बात यह है कि आपकी आमदनी ट्रेनिंग के दौरान ही शुरू हो जाती है.

LIC's Bima Sakhi Yojana: Empower Delhi Women Agents

योजना के प्रावधानों के अनुसार, प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को पहले साल 7,000 रुपये प्रतिमाह का पारिश्रमिक दिया जाता है. इसके बाद अनुभव बढ़ने के साथ दूसरे साल 6,000 रुपये और तीसरे साल 5,000 रुपये हर महीने मिलते हैं. जब यह ट्रेनिंग पूरी हो जाती है और महिला एक पूर्णकालिक एजेंट के रूप में अपना काम शुरू करती है, तो उसे तय लक्ष्य पूरा करने पर कमीशन आधारित शानदार इंसेंटिव भी दिया जाता है.

कौन उठा सकता है इस स्कीम का फायदा?

एलआईसी ने इस योजना को इस तरह डिजाइन किया है कि गांव से लेकर शहर तक की आम महिलाएं इसका आसानी से लाभ उठा सकें. इसके लिए किसी बहुत बड़ी डिग्री की दरकार नहीं है. अगर आपने किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से सिर्फ 10वीं कक्षा पास की है, तो आप इस योजना के लिए पूरी तरह से योग्य हैं.

Bima Sakhi Yojana 2025 Online Application at licindia.in - Check  Eligibility & Required Documents - सरकारी योजना

आयु सीमा को लेकर भी इसमें काफी छूट दी गई है. 18 वर्ष की युवा लड़की से लेकर 70 वर्ष तक की बुजुर्ग महिला भी इस स्कीम का हिस्सा बनकर अपनी कमाई शुरू कर सकती है. हालांकि, नियमों के मुताबिक जो लोग पहले से एलआईसी के कर्मचारी या एजेंट के पद पर कार्यरत हैं, वे इस योजना में आवेदन नहीं कर सकते हैं.

बस इन स्टेप्स को करें फॉलो

एलआईसी ने महिलाओं की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए आवेदन की प्रक्रिया को बेहद सरल रखा है. आप अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन, दोनों में से कोई भी तरीका चुन सकती हैं. ऑफलाइन आवेदन के लिए आपको अपने नजदीकी एलआईसी ब्रांच में जाकर संपर्क करना होगा.

LIC Bima Sakhi Yojana Details: Check Eligibility, Application Process, List  of Documents and Others

वहीं, अगर आप घर बैठे ऑनलाइन अप्लाई करना चाहती हैं, तो आपको एलआईसी की वेबसाइट (https://licindia.in/test2) पर जाना होगा. होमपेज पर आपको ‘क्लिक फॉर बीमा सखी’ का विकल्प दिखाई देगा. इस पर ते ही एक फॉर्म खुलेगा. यहां आपको अपनी सही-सही जानकारी भरनी होगी.

इसके साथ ही 10वीं पास का अटेस्टेड सर्टिफिकेट, आयु प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र की जानकारी देनी होगी. अंत में सभी दर्ज जानकारियों को एक बार दोबारा जांच लें, कैप्चा कोड भरें और फॉर्म सबमिट कर दें.

पश्चिम एशिया की जंग, भारत से भाग रहे फिरंगी! 4 दिनों में 21,000 करोड़ स्वाहा, मार्केट में मची खलबली…

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वेस्ट एशिया संकट से बिगड़ते ग्लोबल रिस्क सेंटिमेंट के बीच पिछले चार ट्रेडिंग सेशन में फॉरेन इन्वेस्टर्स ने इंडियन इक्विटीज से 21,000 करोड़ रुपए (करीब USD 2.3 बिलियन) निकाले हैं. यह लेटेस्ट बिकवाली तब हुई जब फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने फरवरी में इंडियन इक्विटीज में 22,615 करोड़ रुपए डाले थे, जो 17 महीनों में सबसे ज्यादा मंथली इनफ्लो था.

इससे पहले, FPIs लगातार तीन महीनों तक नेट सेलर रहे थे. डिपॉजिटरी के डेटा के मुताबिक, उन्होंने जनवरी में 35,962 करोड़ रुपए, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपए और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपए निकाले.

लेटेस्ट आउटफ्लो 2-6 मार्च के दौरान हुआ, जब FPIs ने कैश मार्केट में लगभग 21,000 करोड़ रुपए के इक्विटीज बेचे. 3 मार्च को होली की वजह से ट्रेडिंग हॉलिडे था. मार्केट एक्सपर्ट्स ने इस निकासी की मुख्य वजह वेस्ट एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन को बताया. US और इज़राइल ने 28 फरवरी को ईरान पर एक बड़ा हमला किया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए, जिससे इलाके में लड़ाई शुरू हो गई.

क्यों खराब हुआ सेंटीमेंट?

एंजल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकारजावेद खान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में संभावित रुकावटों के डर से ब्रेंट क्रूड की कीमतें USD 90 प्रति बैरल से ऊपर चली गईं, जिससे दुनिया भर में रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट शुरू हो गया. उन्होंने आगे कहा कि आउटफ्लो में योगदान देने वाले दूसरे फैक्टर्स में रुपए का 92-प्रति-डॉलर लेवल से ज़्यादा कमज़ोर होना, US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी से कैपिटल का सेफ-हेवन एसेट्स की ओर वापस जाना, और Q4 FY26 कॉर्पोरेट अर्निंग्स के लिए शुरुआती मिले-जुले आउटलुक, खासकर IT और कंजम्प्शन सेक्टर्स में मार्जिन प्रेशर शामिल हैं.

इन कारणों ने बढ़ाया रिस्क

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि मिडिल ईस्ट लड़ाई को लेकर अनिश्चितता, हालिया मार्केट करेक्शन, क्रूड की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से भारतीय अर्थव्यवस्था की कमजोरी, और रुपए की गिरावट, इन सभी ने कैश मार्केट में FPI की लगातार बिकवाली में योगदान दिया है. मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर रिसर्च, हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि क्रूड ऑयल की ज़्यादा कीमतें महंगाई, करंट अकाउंट डेफिसिट और करेंसी स्टेबिलिटी से जुड़े रिस्क को बढ़ाती हैं, जो आम तौर पर उभरते बाज़ारों के प्रति विदेशी निवेशकों की सोच पर असर डालती हैं. उन्होंने कहा कि बढ़ती अनिश्चितता के बीच ग्लोबल निवेशक भी US डॉलर जैसे सुरक्षित एसेट्स की ओर शिफ्ट हो गए हैं. इस हफ़्ते US ट्रेजरी यील्ड में हालिया तेज़ी ने उभरते बाज़ारों से कैपिटल आउटफ्लो में और योगदान दिया.

आगे भी जारी रहेगी बिकवाली?

आगे, विजयकुमार ने कहा कि जब तक जियोपॉलिटिकल स्थिति पर ज़्यादा क्लैरिटी नहीं आती और क्रूड ऑयल की कीमतें कम नहीं होतीं, तब तक FPI के खरीदार के तौर पर वापस आने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड का USD 90 प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड करना भारतीय अर्थव्यवस्था और इक्विटी बाज़ारों के लिए नेगेटिव है. FPI की बिकवाली के बावजूद, बाज़ार को घरेलू इंस्टीट्यूशनल निवेशकों (DII) और म्यूचुअल फंड सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के ज़रिए लगातार इनफ्लो से सपोर्ट मिलता रहा है.

युद्ध के शोर के बीच भारत का ‘तेल कवच’! 25 करोड़ बैरल का सुरक्षित भंडार और नए सप्लायर्स; नहीं महंगा होगा पेट्रोल और डीजल…

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच तेल सप्लाई को लेकर अक्सर चिंता जताई जाती है, लेकिन एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक भारत की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल मजबूत स्थिति में है. रिपोर्ट बताती है कि भारत के पास कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का कुल मिलाकर 250 मिलियन बैरल से ज्यादा का बफर स्टॉक मौजूद है.

यह करीब 4,000 करोड़ लीटर ईंधन के बराबर है और इससे देश की सप्लाई चेन को करीब 7 से 8 हफ्तों तक सहारा मिल सकता है.

रणनीतिक भंडार और मजबूत स्टोरेज सिस्टम

रिपोर्ट के अनुसार यह भंडार कई जगहों पर सुरक्षित रखा गया है. इसमें मैंगलोर, पाडुर और विशाखापत्तनम में बने भूमिगत रणनीतिक तेल भंडार शामिल हैं. इसके अलावा जमीन पर बने बड़े टैंक, पाइपलाइन नेटवर्क और समुद्र में मौजूद जहाजों में भी तेल का स्टॉक रखा जाता है. इस व्यवस्था की वजह से अगर किसी एक सप्लाई चैन में दिक्कत आती है तो देश की ईंधन आपूर्ति प्रभावित नहीं होती.

कई देशों से तेल खरीद रहा भारत

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा खरीद की रणनीति को भी काफी बदल दिया है. पहले भारत करीब 27 देशों से तेल आयात करता था, जबकि अब यह संख्या बढ़कर करीब 40 देशों तक पहुंच गई है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत की तेल खरीद पूरी तरह राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होती है. दुनिया के अहम समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अक्सर तेल सप्लाई के लिए संवेदनशील माना जाता है. लेकिन भारत के कुल कच्चे तेल आयात का केवल करीब 40 प्रतिशत हिस्सा ही इस रास्ते से आता है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत तेल रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और मध्य एशिया जैसे क्षेत्रों से वैकल्पिक रास्तों के जरिए पहुंचता है.

रूस अभी भी सबसे बड़ा सप्लायर

फरवरी 2026 तक रूस भारत को सबसे ज्यादा कच्चा तेल सप्लाई करने वाला देश बना हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने कभी भी किसी देश की अनुमति पर निर्भर होकर रूसी तेल नहीं खरीदा. हालांकि भारत ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए G7 के प्राइस कैप नियमों का भी पालन किया है.

एथेनॉल ब्लेंडिंग से घट रही तेल की जरूरत

देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम भी तेल की खपत कम करने में मदद कर रहा है. इसके जरिए हर साल करीब 44 मिलियन बैरल कच्चे तेल की जरूरत कम हो जाती है.

रिफाइनिंग क्षमता और कीमतों पर असर

भारत की रिफाइनिंग क्षमता अब 258 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुंच गई है, जबकि देश की खपत करीब 210 से 230 मिलियन मीट्रिक टन के बीच है. मजबूत रिफाइनिंग क्षमता की वजह से भारत ने रूस पर प्रतिबंध लगने के बाद यूरोप में ईंधन की कमी को पूरा करने में भी मदद की. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2022 से फरवरी 2026 के बीच दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 0.67 प्रतिशत कम हुई, जबकि इसी अवधि में पाकिस्तान में पेट्रोल 55 प्रतिशत और जर्मनी में 22 प्रतिशत महंगा हुआ.

कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल पर करीब 24,500 करोड़ रुपये और एलपीजी पर लगभग 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान भी उठाया. रिपोर्ट के अनुसार भारत की ऊर्जा नीति का मकसद ईंधन को सस्ता, उपलब्ध और टिकाऊ बनाए रखना है.

दिल्ली बनी देश की पहली ‘रिंग मेट्रो’ वाली राजधानी, पीएम मोदी ने किया पिंक लाइन के रिंग नेटवर्क का उद्घाटन…

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दिल्ली बनी देश की पहली ‘रिंग मेट्रो’ वाली राजधानी, पीएम मोदी ने किया  पिंक लाइन के  रिंग नेटवर्क का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को पिंक लाइन के 12.3 km लंबे मजलिस पार्क-मौजपुर-बाबरपुर हिस्से और मैजेंटा लाइन के 9.9 किलोमीटर लंबे दीपाली चौक-मजलिस पार्क एक्सटेंशन का उद्घाटन किया.

दिल्ली मेट्रो प्रोजेक्ट के फेज V(A) के तहत तीन नए कॉरिडोर की नींव रखी. पिंक लाइन का नया हिस्सा कॉरिडोर के सर्कुलर अलाइनमेंट को पूरा करेगा. इससे यह देश का पहला ऑपरेशनल रिंग मेट्रो नेटवर्क बन जाएगा.

मजलिस पार्क-मौजपुर-बाबरपुर सेक्शन में नौ स्टेशन हैं. सभी एलिवेटेड हैं और इससे नॉर्थ और नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है. ये स्टेशन हैं – मजलिस पार्क, बुराड़ी, जगतपुर-वजीराबाद, सूरघाट, सोनिया विहार, खजूरी खास, भजनपुरा, यमुना विहार और मौजपुर-बाबरपुर.

किन लाइनों को जोड़ेगा?

नए पिंक लाइन कॉरिडोर में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर एलिमेंट भी हैं. यमुना पर एक नया पुल और एक डबल-डेकर वायडक्ट जो मेट्रो लाइन और रोड फ्लाईओवर दोनों को ले जाता है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दीपाली चौक-मजलिस पार्क कॉरिडोर का भी उद्घाटन करेंगे. ये मैजेंटा लाइन का एक एलिवेटेड एक्सटेंशन है. यह मधुबन चौक, उत्तर पीतमपुरा-प्रशांत विहार, हैदरपुर बादली मोड़ और भलस्वा जैसे इलाकों को जोड़ेगा. इस हिस्से पर कुल सात स्टेशन होंगे.

सीएम रेखा के नेतृत्व में दिल्ली का विकास

मैजेंटा लाइन कॉरिडोर के कुछ हिस्से लगभग 28.36 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचते हैं, जिससे यह दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के सबसे ऊंचे एलिवेटेड सेक्शन में से एक बन जाता है. इसके जुड़ने से लाइन की कुल लंबाई लगभग 49 किलोमीटर हो जाएगी. अभी, कॉरिडोर का बॉटनिकल गार्डन-कृष्णा पार्क एक्सटेंशन हिस्सा चालू है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज इंटरनेशनल विमेंस डे है मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सफल नेतृत्व में राजधानी में विकास हो रहा है. चाहे राजनीति का क्षेत्र हो, प्रशासन का, विज्ञान का, खेल का, या समाज सेवा का, भारत की महिला शक्ति हर क्षेत्र में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रही है. मैं आज विमेंस डे पर देश की महिलाओं को दिल से बधाई देता हूं और देश के विकास में उनके असीम योगदान के लिए आभार व्यक्त करता हूं.

3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का संकल्प पूरा, महिला सशक्तिकरण की नई गाथा…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक अहम घोषणा की। उन्होंने कहा कि देश ने 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का संकल्प लिया था, जो अब पूरा हो चुका है।

पहले एक करोड़ से अधिक महिलाओं को यह उपलब्धि हासिल हुई थी, लेकिन अब तीन करोड़ से ज्यादा बहनों ने अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर ली है और वे लखपति दीदी बन गई हैं। पीएम मोदी ने खुशी जताते हुए बताया कि कुछ वर्ष पहले जब उन्होंने यह लक्ष्य रखा था, तो कई लोगों ने उनका मजाक उड़ाया, सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियां की गईं और तरह-तरह की आलोचनाएं हुईं। लेकिन आज वे गर्व से कह रहे हैं कि भारतीय महिलाओं में अपार क्षमता है। अगर उन्हें अवसर मिले, तो वे नई-नई उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं। सरकार की योजनाओं, खासकर स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के प्रयासों से यह संकल्प साकार हुआ है।

पीएम मोदी ने महिलाओं की ताकत पर पूरा भरोसा जताया और कहा कि देश की माताओं-बहनों के आशीर्वाद से यह लक्ष्य पूरा हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण समाज और राष्ट्र के विकास की पहली सीढ़ी है। लाखपति दीदी योजना के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण, ऋण, बाजार तक पहुंच और उद्यमिता के अवसर दिए गए, जिससे उनकी आय बढ़ी और वे आत्मनिर्भर बनीं। पहले संदेह करने वालों को आज महिलाओं की सफलता चुप करा रही है। पीएम ने इस उपलब्धि को महिलाओं की मेहनत और सरकार की प्रतिबद्धता का नतीजा बताया। अब सरकार का फोकस और अधिक महिलाओं को सशक्त बनाने पर है, ताकि विकसित भारत के सपने को साकार किया जा सके। यह उपलब्धि न केवल आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल है, बल्कि सामाजिक बदलाव की भी।

महिला सशक्तिकरण की नई गाथा

पीएम मोदी ने कहा, ‘आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। आज भारत महिला सशक्तिकरण की नई गाथा लिख रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सफल नेतृत्व में राजधानी का विकास हो रहा है। राजनीति, प्रशासन, विज्ञान, खेल या समाज सेवा का क्षेत्र भारत की नारी शक्ति हर क्षेत्र मे एक नई ऊर्जा से आगे बढ़ रही है। मैं देश की नारी शक्ति को आज महिला दिवस पर बहुत बधाई देता हूं और राष्ट्र के विकास में उनके असीमित योगदान के लिए ऋण स्वीकार करता हूं।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘द्रौपदी मुर्मू संथाल के एक बड़े उत्सव में शामिल होने के लिए बंगाल गई थीं लेकिन राष्ट्रपति को सम्मान देने के बजाय, TMC ने इस पवित्र और महत्वपूर्ण कार्यक्रम का बहिष्कार किया। वे खुद आदिवासी समाज से आती हैं और वे आदिवासी समाज के विकास के बारे में चिंतित रही हैं। TMC सरकार ने उस कार्यक्रम को बदइंतजामी के हवाले कर दिया। यह न केवल राष्ट्रपति का अपमान है बल्कि भारत के संविधान का भी अपमान है। यह संविधान की भावना का अपमान है। यह लोकतंत्र की महान परंपरा का भी अपमान है।’

भारत के आईपीओ बाजार में नई लहर: निवेशकों के लिए आने वाले अवसर…

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हाल के दिनों में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारत के प्राथमिक बाजार में गतिविधियाँ जारी हैं। अगले सप्ताह निवेशकों के लिए कई नए सार्वजनिक प्रस्तावों की शुरुआत होने वाली है।

9 मार्च से, आईपीओ बाजार में मुख्य बोर्ड और एसएमई खंड में कई लॉन्च होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, तीन मुख्य बोर्ड मुद्दे और एक एसएमई प्रस्ताव खुलने के लिए तैयार हैं, साथ ही कई कंपनियाँ अपने शेयर बाजार में पदार्पण करने जा रही हैं।

मुख्य बोर्ड आईपीओ खुलने के लिए तैयार

अगले सप्ताह के लिए एक प्रमुख प्रस्ताव राजपूताना स्टेनलेस का आईपीओ है। कंपनी लगभग 254.98 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखती है, जिसका सब्सक्रिप्शन 9 मार्च से 11 मार्च तक खुला रहेगा। इस प्रस्ताव की कीमत 116 से 122 रुपये प्रति शेयर के बीच निर्धारित की गई है। इस आईपीओ में नए शेयरों का एक ताजा मुद्दा और प्रमोटर द्वारा बिक्री का प्रस्ताव शामिल है। कंपनी के अनुसार, जुटाई गई पूंजी का एक हिस्सा गुजरात के पंचमहल जिले में एक नया निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए उपयोग किया जाएगा।

एक और कंपनी जो बाजार में प्रवेश कर रही है, वह है इनोविज़न, जो मानव संसाधन सेवाओं और टोल प्लाजा संचालन में संलग्न है। इसका 322.84 करोड़ रुपये का सार्वजनिक प्रस्ताव 10 मार्च से 12 मार्च तक खुलने वाला है, जिसमें शेयरों की कीमत 521 से 548 रुपये प्रति शेयर के बीच होगी। इस प्रस्ताव में नए शेयरों का एक ताजा मुद्दा और प्रमोटरों रंदीप हुंडल और उदय पाल सिंह द्वारा बिक्री का प्रस्ताव शामिल है।

निवेशकों के पास एक प्रमुख बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट के प्रस्ताव में भाग लेने का भी अवसर होगा। राजमार्ग इन्फ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट लगभग 6,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रहा है, जिसका आईपीओ 11 मार्च से 13 मार्च तक खुलने वाला है। इस इन्फ्राट्रस्ट का प्रायोजन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा किया गया है, और प्रस्ताव की कीमत 99 से 100 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई है।

एसएमई खंड में नई पेशकश

एसएमई खंड में भी गतिविधियाँ जारी रहेंगी, जिसमें एप्सिस एरोकोम का आईपीओ शामिल है। यह प्रस्ताव 11 मार्च से 13 मार्च तक खुलने वाला है। यह पूरी तरह से एक ताजा मुद्दा है, जिसकी कीमत लगभग 35.77 करोड़ रुपये है और इसमें लगभग 0.33 करोड़ शेयर शामिल हैं। कंपनी ने शेयरों की कीमत 104 से 110 रुपये प्रति शेयर के बीच निर्धारित की है।

कई कंपनियाँ बाजार में पदार्पण के लिए तैयार

नए आईपीओ लॉन्च के साथ-साथ, कई कंपनियाँ जो हाल ही में अपने सार्वजनिक प्रस्तावों को पूरा कर चुकी हैं, उसी सप्ताह शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद कर रही हैं। सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों में 11 मार्च को SEDEMAC Mechatronics, 9 मार्च को Acetech E-Commerce, 12 मार्च को Elfin Agro India और 13 मार्च को Srinibas Pradhan Constructions शामिल हैं।