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1984 सिख दंगों के 35 साल बाद कमलनाथ की बढ़ेंगी मुश्किलें, एसआईटी दोबारा करेगी जांच

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केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा गठित विशेष जांच दल ने सिख विरोधी दंगों से जुड़े सात मामलों को फिर से खोलने का फैसला किया है। इस बारे में एक आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक इन मामलों में आरोपियों को या तो बरी कर दिया गया या मुकदमा बंद हो चुका है। दंगों के 35 साल बाद खोले गए इन मामलों में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की भूमिका की भी जांच की जाएगी। दिल्ली में अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने दावा किया है कि जिन केसों को दोबारा खोला जा रहा है उनमें से एक केस में कमलनाथ पर भी आरोप लगे हैं। सिरसा का कहना है कि कमलनाथ ने कथित तौर पर इन सात मामलों में से एक में आरोपी पांच लोगों को कथित तौर पर शरण दी थी। उन्होंने पिछले साल गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर 1984 में हुए दंगों की दोबारा जांच करने की मांग की थी। नई दिल्ली के संसद मार्ग थाने में दर्ज प्राथमिकी में कमलनाथ का नाम कभी नहीं आया। इस दौरान कमलनाथ कांग्रेस कमेटी के इंचार्ज, जनरल सेक्रेटरी और कैबिनेट मंत्री रह चुके थे। सिख विरोधी दंगों से जुड़े सात मामले 1984 में वसंत विहार, सन लाइट कालोनी, कल्याणपुरी, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस, पटेल नगर और शाहदरा पुलिस थानों में दर्ज किए गए थे।संज

गृह मंत्रालय ने कमलनाथ के बारे में किसी भी तरह की जानकारी रखने वाले व्यक्तियों, समूहों और संगठनों को बुलाया है। केस एफआईआर संख्या 601/84 पर आधारित है। यह उन सात मामलों में से एक है जिन्हें फिर से खोला गया है। यह उन गवाहों के बयान पर आधारित है जिन्होंने दावा किया था कि नाथ सिख विरोधी उस भीड़ में शामिल थे जिन्होंने गुरुद्वारा रकाबगंज को सीज कर दिया था।

इस दंगे के गवाह जैसे कि संजय सूरी (तत्कालीन क्राइम रिपोर्टर) ने दावा किया था कि नाथ हिंसक भीड़ का हिस्सा थे। हालांकि कांग्रेस नेता इस बात से इनकार करते रहे हैं। एफआईआर में भी उनका नाम नहीं था और केस का ट्रायल बंद हो चुका है। अकाली विधायक सिरसा का कहना है कि चूंकि एसआईटी मामले की दोबारा जांच करेगी इसलिए दो गवाह उसके सामने पेश होंगे और दंगों में नाथ की भूमिका के बारे में बताएंगे।

उन्होंने कहा कि पहले गवाह संजय सूरी अब इंग्लैंड में बस गए हैं और दूसरे मुख्तियार सिंह पटना में रहते हैं। सिरसा ने कहा, ‘मैंने दोनों से बात कर ली है और वह एसआईटी के सामने पेश होकर अपने बयान दर्ज कराने के लिए तैयार हैं।’ पिछले महीने एक सार्वजनिक नोटिस में 1984 के सिख विरोधी दंगों पर एसआईटी ने सभी व्यक्तियों, संगठनों, संस्थाओं और संगठनों से कहा कि वे दिल्ली में संबंधित पुलिस स्टेशनों के एसआईटी के प्रभारी अधिकारी से संपर्क करें जहां मामलों को दोबारा खोला गया है।

गृह मंत्रालय द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति जी पी माथुर (पुनरीक्षण) समिति की सिफारिश के बाद 12 फरवरी 2015 को एसआईटी का गठन किया गया था। तीन सदस्यीय एसआईटी अब तक सिख विरोधी दंगों के संबंध में दर्ज 650 मामलों में से 80 को फिर से खोल चुकी है। 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों द्वारा हत्या करने के बाद देश में सिख विरोधी दंगे हुए थे। जिसमें 3,325 लोग मारे गए थे। अकेले दिल्ली में 2,733 लोगों की जान गई थी।

32 साल का युवक बना 81 साल का बूढ़ा, न्यूयॉर्क की फ्लाइट में चढ़ने वाला था कि CISF को हुआ शक

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इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर सोमवार को एक चौंकाने वाली घटना हुई. यहां पर एक 32 साल का युवक 81 साल के बूढ़े का वेश धर कर अमेरिका (America) जाने की तैयारी में था. इस दौरान उसने सभी क्लीयरेंस भी ले ली थी, लेकिन ऐन वक्‍त पर वह सीआईएसएफ (CISF) के हात्‍‌थे चढ़ गया. बाद में उसे पुलिस (Police) के हवाले कर दिया गया. पुलिस ने बताया कि युवक अहमदाबाद का रहने वाला है और उसकी पहचान जयेश पटेल के तौर पर हुई है. नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सीआईएसएफ ने बताया कि आरोपी पटेल अमरीक सिंह के नाम पर न्यूयॉर्क (New York) जा रहा था. इस दौरान उसने खुद को बूढ़ा दिखाने के लिए चश्मा पहन रखा था और व्हीलचेयर पर एयरपोर्ट पहुंचा था. अंतिम दौर की सुरक्षा जांच के लिए जब सीआईएसएफ ने उसे रोका तो उसने व्हीलचेयर से उठने से मना कर दिया. उससे जब पूछताछ की गई तो वह आंखें मिलाकर बात भी नहीं कर रहा था. ऐसे में उस पर अधिकारियों का शक गहरा गया.

सीआईएसएफ ने बताया कि उसके पासपोर्ट पर जन्मतिथि 1 फरवरी 1938 दर्ज थी. उसने अपने बाल और दाढ़ी सफेद रंग से रंगी हुई थी. गौर से देखने पर अधिकारियों को उसकी स्किन 81 साल के बुजुर्ग व्यक्ति की नहीं लग रही थी. ऐसे में उससे सख्ती से पूछताछ की गई तो वह टूट गया और सच कबूल लिया. उसने बताया कि वह दूसरे के पासपोर्ट पर अमेरिका जाने वाला था. इसके बाद सीआईएसएफ ने उसे दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया.

दो पासपोर्ट के साथ अफगानी नागरिक गिरफ्तार
वहीं, दिल्ली एयरपोर्ट से ही सैफी नूरजई नाम के एक अन्य यात्री को गिरफ्तार किया गया. उसके पास से पुलिस ने दो पासपोर्ट बरामद किए. वह मलेशिया जाने की कोशिश में था. शक होने पर जांच की गई तो पता चला कि वह कई बार अन्य पासपोर्ट पर पाकिस्तान भी जा चुका है. उसने बताया कि वह दूसरे के पासपोर्ट पर मलेशिया जाना चाह रहा था.

आखिर क्यों बनाई जाती हैं सड़क पर पीली और सफेद रंग की लाइनें, लाइसेंस रखने वाले लोग भी नहीं जानते होंगे इसका कारण

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सडक हमें देश, दुनिया और गांवों से जोडने का काम करती है । लेकिन क्या आपने सडको में एक बात नोटिस की है कि जब भी हम सडक पर चलते हैं तो उनके बीचों—बीच एक सफेद या पीली लाइन खिंची होती है । मगर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ये लाइन क्यों होती है । तो चलिए आज हम आपको इसके बारे में बता दें ।

दरअसल, सड़क पर बनी दो सीधी पीली लाइनों का मतलब होता है कि आप अपनी लेन में ही चलें, लाइन पार कर उस पार नहीं जाएं । अगर आपको सड़क पर पीली लाइन दिखे, लेकिन टुकड़ों में दिखे तो समझ जाए कि आपको टूटी हुई पीली लाइन के ऊपर से गुजरने की अनुमति है, लेकिन सावधानी के साथ । सड़क पर बनी सफेद रंग की लाइनों का मतलब होता है कि आप जिस लेन में चल रहे हैं, उसी में चलिए । सड़क पर बनी टूटी सफेद लाइनों का मतलब होता है कि आप लेन बदल सकते हैं ।

अगर आपको सड़क पर एक सीधी पीली लाइन दिखे तो समझ लीजिए कि आप दूसरी गाड़ियों को ओवरटेक कर सकते हैं । हालांकि अगल-अलग राज्यों में इसके मतलब अलग-अलग होते हैं ।

BSNL को मिलेगा वित्तीय पैकेज! मोदी सरकार कर रही ये तैयारी

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लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रही सरकारी टेलिकॉम कंपनी भारत संचार निगम लि. (बीएसएनएल) को मोदी सरकार वित्तीय पैकेज देने की योजना बना रही है. केंद्रीय भारी उद्योग एवं लोक उपक्रम राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसके संकेत दिए हैं. उन्‍होंने कहा कि बीएसएनएल को आगे बढ़ाना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है.

अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, ”बीएसएनएल को सरकार से कुछ पैकेज की जरूरत है. हम चाहते हैं कि बीएसएनएल को आगे बढ़ाया जाए. यह हमारी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है. ऐसे में हम पैकेज पर विचार कर रहे हैं. भविष्य में हम बीएसएनएल को कुछ पैकेज दे सकते हैं.”अर्जुन राम मेघवाल के मुताबिक बीएसएनएल की समस्याएं 1995 में शुरू हुईं. अब सरकार इस दूरसंचार कंपनी को आगे बढ़ाना चाहती है. उन्होंने कहा कि आज बीएसएनएल को बंद किए जाने का कोई मुद्दा नहीं है, यह 1995 में था.

लंबे समय से घाटे में कंपनी

बीएसएनएल एक दशक से भी अधिक समय से घाटे में हैं, लेकिन कंपनी ने इसके स्‍पष्‍ट आंकड़े नहीं दिए हैं. BSNL का तर्क है कि यह गैर-सूचीबद्ध कंपनी है, इसलिए आंकड़े सार्वजनिक करने की अनिवार्यता नहीं है. हालांकि सरकार की ओर से समय-समय पर संसद में कंपनी के घाटे के बारे में बताया जाता रहा है. न्‍यूज एजेंसी आईएएनएस की मानें तो वित्त वर्ष 2017-18 में बीएसएनएल का घाटा 7,992 करोड़ रुपये था. इससे पहले 2016-17 में कंपनी का घाटा 4,786 करोड़ रुपये रहा. इस हिसाब से सिर्फ 1 साल में 3,206 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है.

कर्मचारियों को हो रही दिक्‍कत

बीएसएनएल की बदहाली की वजह से कर्मचारियों को सैलरी मिलने में भी देरी हो रही है. दरअसल, बीएसएनएल को मासिक वेतन के रूप में 850 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता है. अभी बीएसएनएल के पास करीब 1.80 लाख कर्मचारी हैं. यह भी खबर ह‍ै कि खर्च में कटौती के लिए बीएसएनएल अपने आधे कर्मचारियों को वॉलंटरी रिटायरमेंट यानी वीआरएस देने की तैयारी में है.

ट्रेन में जल्द यात्रियों को मिल सकेगा मनपसंद खाना, 40 से 250 रुपये तक होगा दाम

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भारतीय रेलवे (Indian Railways) यात्रियों को अच्छी फैसिलिटी देने के लिए ट्रेन में मिलने वाले खाने में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है. रेलवे जल्द ही नई कैटरिंग पॉलिसी (New catering policy) लाने जा रहा है. इस पॉलिसी के तहत ट्रेन में क्लास के हिसाब से अलग-अलग खाना मिलेगा. नई कैटरिंग पॉलिसी में कॉम्बो मील्स को शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही खाने के न्यूनतम रेट 40 रुपये से लेकर 250 रुपये तक तय करने की तैयारी चल रही है.

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने बताया कि रेलवे इस दिशा में एक पॉलिसी बना रहा है. इस पॉलिसी को शीघ्र ही लागू किया जाएगा. इस पॉलिसी के तहत अगर किसी यात्री को 40-50 रुपये में खाना खाना है तो उसे पूरी-सब्जी, छोले भठूरे, राजमा चावल या कढ़ी चावल के ऑप्शन्स दिए जाएंगे.

200-250 रुपये तक थाली
वहीं अगर यात्रीगण पूरी थाली या खाने में ज्यादा वैरायटी चाहते हैं तो उसके लिए 200-250 रुपये तक लिए जाएंगे. दोनों ही खानों में क्वॉलिटी का पूरा ध्यान रखा जाएगा. उन्होंने बताया कि कम पैसों में बहुत सारी वैरायटी नहीं दी जा सकती, इसलिए हर वर्ग का ध्यान रखकर इस तरह की पॉलिसी पर काम किया जा रहा है.

रेलवे का सीधा फोकस ई कैटरिंग या फ़ूड ऑन ऑर्डर सिस्टम को इम्प्लीमेंट करना है. रेलवे ई-कैटरिंग के विस्तार पर लगातार कदम बढ़ा रहा है जिसमें वेंडर्स जैसे डोमिनोज़ के साथ करार करना है तो वहीं ई-कैटरिंग सेवा है. उसका लक्ष्य लगभग हर स्टेशन, हर ट्रेन तक पहुंचना है. इसके साथ ही रेलवे बोर्ड के चेयरमैन के मुताबिक 2022 तक 40 वंदे भारत ट्रेनों का प्रोडक्शन किया जाएगा. अभी यह ट्रेन दिल्ली से वाराणसी के बीच चल रही है.

PUBG से दूर रखने को छीना था मोबाइल, बेटे ने कर डाले पिता के टुकड़े-टुकड़े

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मोबाइल गेम PUBG की लत कितनी खतरनाक हो सकती है, इसकी एक बानगी कर्नाटक से सामने आई है. यहां बेलगावी जिले के एक 65 वर्षीय शख्‍स ने अपने बेटे को PUBG खेलने से रोका तो उसने पिता की हत्‍या कर डाली.

मृतक की पहचान रिटायर्ड पुलिसकर्मी शंकरप्‍पा कुंबर के रूप में हुई है. रविवार को उनकी अपने बेटे रघुवीर से जोरदार बहस हुई थी. इसके बाद रघुवीर ने अपने पिता का सिर और पैर काट हत्‍या कर दी ताकि वह ‘शांति से’ मोबाइल पर गेम खेल सके.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शंकरप्‍पा ने घर का इंटरनेट कनेक्‍शन बंद कर रघुवीर से फोन ले लिया था. इसके बाद उसने परिवार के बाकी सदस्‍यों को एक कमरे में बंद किया और अपने पिता को पीटना शुरू कर दिया. इसके बाद उसने पिता के टुकड़े-टुकड़े कर दिए.

युवक को मेंटल डिसऑर्डर से पीड़‍ित बताया जा रहा है. आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और पुलिस उससे पूछताछ की जा रही है. मनोचिकित्सकों ने आगाह किया है कि डिजिटल लत वास्तविक है और यह उतनी ही खतरनाक हो सकती है जितनी की नशे की लत.

पाकिस्तान की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री ने की ISRO के Chandrayaan 2 मिशन की तारीफ

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भारत और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच कश्मीर को लेकर भले ही तनाव हो, लेकिन अंतरिक्ष में कोई सरहदें नहीं हैं। इमरान के मंत्री भले ही चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) मिशन को लेकर बेवकूफी भरे बयान दे रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री नामिरा सलीम (Namira salim) ने भारत और इसरो को चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) मिशन के लिए बधाई दी है। दूसरी ओर चीन भी Chandrayaan 2 पर भारत को बधाई दी है।

क्या कहा नामिरा ने : नामिरा ने कहा है कि चंद्रमा पर लैंडिंग का प्रयास करना ही अपने आप में दक्षिण एशिया के साथ ही पूरे वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक ‘बड़ी छलांग’ है। सलीम अंतरिक्ष में जाने वाली पहली पाकिस्तानी हैं।

वे सर रिचर्ड ब्रैनसन के वर्जिन गैलेक्टिक से अंतरिक्ष में गई थीं। नामिरा ने कराची की पत्रिका ‘साइंशिया’ को कहा कि ‘मैं भारत और इसरो को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम लैंडर की एक सफल सॉफ्ट लैंडिंग कराने के उसे ऐतिहासिक प्रयास के लिए बधाई देती हूं।

Chandrayaan 2 मिशन वास्तव में दक्षिण एशिया के लिए एक बड़ी छलांग है, जो न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग को गौरवान्वित बनाता है।

नामिरा ने कहा कि दक्षिण एशिया में अंतरिक्ष के क्षेत्र में क्षेत्रीय विकास शानदार है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन देश अंतरिक्ष में आगे बढ़ता है, सभी राजनीतिक सीमाएं मिट जाती हैं और अंतरिक्ष में हमें एकजुट करती हैं, जो हमें पृथ्वी पर विभाजित करती हैं।

चीन ने बताया महान प्रयास : भारत के पड़ोसी देश चीन के लोगों ने भारत के दूसरे चंद्रमिशन से जुड़े वैज्ञानिकों की इंटरनेट पर काफी सराहना की है और उनसे उम्मीद न छोड़ने और ब्रह्मांड में खोज जारी रखने को कहा है।

चीनी माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ‘साइना वीबो’ पर भारतीय वैज्ञानिकों से उम्मीद न छोड़ने को कहा। एक चीनी इंटरनेट यूजर ने कहा कि ‘अंतरिक्ष खोज में सभी मनुष्य शामिल हैं। इससे फर्क नहीं पड़ता कि किस देश को सफलता मिली।

इसे हमारी प्रशंसा मिलनी चाहिए और जो अस्थायी रूप से विफल हुए हैं, उनका भी हौसला बढ़ाया जाना चाहिए। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष खोज के लिए महान प्रयास और त्याग किया है।

चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान लैंडर ‘विक्रम’ का शुक्रवार देर रात तब संपर्क टूट गया था जब वह सतह से करीब 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था। इसे चंद्रमा के लिए देश के दूसरे अभियान का ‘सबसे जटिल’ प्रक्रिया माना गया था।

मिशन के लिए उम्मीदें तब जगी जब चन्द्रमा के चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर ने लैंडर विक्रम की लोकेशन का पता लगा लिया। ISRO के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा था कि ऑर्बिटर के कैमरे से भेजी गईं तस्वीरों के मुताबिक यह तय जगह के बेहद नजदीक एक ‘हार्ड लैंडिंग’ थी। लैंडर वहां साबुत है, उसके टुकड़े नहीं हुए हैं। वह झुकी हुई स्थिति में है। ISRO लैंडर से संपर्क के प्रयास कर रहा है।

14 दिन बाद आज महंगी हुई पेट्रोल-डीजल की कीमत, फटाफट जानें नए रेट्स

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पेट्रोल (Petrol) और डीजल (Diesel) की कीमत आज 14 दिन बाद महंगी हुई है. पिछले महीने की 26 तारीख को पेट्रोल-डीजल की कीमत में बढ़ोतरी देखी गई थी. राजधानी दिल्ली में पेट्रोल-डीजल की कीमत आज 5 पैसे महंगी हुई हैं. मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में पेट्रोल की कीमत में 1 पैसे की बढ़ोतरी हुई है. चार महानगरों में डीजल की कीमत आज 5-6 पैसे बढ़ी है.

इंडियन ऑयल (Indian Oil) की वेबसाइट के अनुसार मंगलवार को ग्राहकों को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में पेट्रोल क्रमश: 71.76 रुपये, 77.45 रुपये, 74.49 रुपये और 74.56 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है. वहीं दूसरी ओर ग्राहकों को चारों महानगरों में डीजल के लिए क्रमश: 65.14 रुपये, 68.32 रुपये, 67.55 रुपये और 68.84 रुपये प्रति लीटर चुकाने पड़ेंगे.

पेट्रोल-डीजल के दाम हर दिन घटते-बढ़ते रहते हैं. पेट्रोल-डीजल का नया दाम सुबह 6 बजे से लागू हो जाता है. इनकी कीमत में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन सब कुछ जोड़ने के बादल इसकी कीमत लगभग दोगुनी हो जाती है.

अपने शहर के दाम आप रोजाना ऐसे चेक कर सकते हैं. SMS के जरिए उपभोक्ता किसी विशेष रजिस्टडर्ड नंबर पर एसएमएस भेजकर कीमतों के अपडेट की जांच कर सकते हैं और उन्हें वर्तमान मूल्य के बारे में मैसेज के माध्‍यम से सूचित किया जाएगा. इंडियन ऑयल ग्राहक RSP<डीलर कोड> 92249 9 2249 को भेज सकते हैं. बीपीसीएल ग्राहकों को RSP<डीलर कोड> 9223112222 पर भेजना होगा. एचपीसीएल ग्राहकों को HPPRICE<डीलर कोड> 9222201122 पर भेजना होगा. 

Chandrayaan 2: ‘विक्रम’ को पैरों पर खड़ा करने के लिए क्या NASA की मदद लेगा इसरो?

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भारत के महत्वाकांक्षी ‘ मिशन चंद्रयान-2’ (Chandrayaan-2) को लेकर अभी सबकुछ खत्म नहीं हुआ है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम (Vikram) से संपर्क करने की कोशिशें जारी हैं. इसरो (ISRO) के मुताबिक, विक्रम की चांद की सतह पर तिरछी हार्ड लैंडिंग हुई. इसके बाद भी वो सही-सलामत है. लैंडर विक्रम पर बस एक सिरे से झुका हुआ है. इसरो के पास विक्रम से दोबारा कनेक्शन बनाने के लिए बस 11 दिन बचे हैं. ऐसे में इसरो लैंडर विक्रम से संपर्क करने के लिए अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) की मदद लेने पर भी विचार कर रहा है, क्योंकि नासा का एक मिशन ‘लूनर रीकॉनिसेंस ऑर्बिटर (Lunar Reconnaissance Orbiter) यानी LRO चंद्रयान-2 के मुकाबले चांद के ज्यादा करीब चक्कर लगा रहा है. इससे बेहतर डेटा मिल सकता है.

दरअसल, नासा के लूनर रीकॉनिसेंस ऑर्बिटर से चांद की 3डी तस्वीरें ली गई हैं. इन तस्वीरों में चंद्रमा में हुए बदलावों को साफ तौर पर देखा जा सकता है. अगर इसरो नासा के इस ऑर्बिटर के डेटा का इस्तेमाल करती है, तो विक्रम की ताजा पोजिशन पता चल सकती है. वैसे इसरो इसके पहले भी LRO के डेटा का आंशिक रूप से इस्तेमाल लैंडिंग स्पॉट पर कर चुकी है. इसरो फिलहाल ऑर्बिटर से बेहतर डेटा मिलने का इंतजार कर रही है, इसके बाद ही कोई फैसला लिया जा सकता है.

विक्रम को लेकर कितना वक्त बचा है?
दरअसल, चांद पर अभी लूनर डे चल रहा है. ये पृथ्वी के 14 दिन के बराबर होता है. इन 14 दिनों में से 3 दिन खत्म हो चुके हैं. लूनर डे के बाद चांद पर रात हो जाएगी. ऐसा होने पर इसरो को किसी भी ऑपरेशन में दिक्कत आएगी. ऐसे में इसरो को जल्द से जल्द विक्रम का ग्राउंड स्टेशन से कनेक्ट करना बेहद जरूरी है. नहीं तो ‘मिशन चंद्रयान’ अधूरा रह सकता है.

इसरो एक वैज्ञानिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘शनिवार को हमें लैंडर विक्रम की लोकेशन पता चली थी. ऑर्बिटर ने इसकी पहली तस्वीर भेजी. इस तस्वीर में विक्रम अपने पैरों (थ्रस्टर्स) पर खड़ा दिख रहा है, लेकिन ये एक तरफ से कुछ झुका हुआ है. ऐसे में लैंडर से दोबारा संपर्क साधने सकने की बहुत कम उम्मीद है. लेकिन, इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि हम कोशिश नहीं कर रहे. जब-जब ऑर्बिटर उसके उपर से होकर गुजर रहा है, हम लैंडर से संपर्क करने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं.

लैंडर विक्रम के नीचे की तरफ 5 थ्रस्टर्स लगे हैं, जिसके जरिए इसे चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी. लैंडर के चारों तरफ भी थ्रस्टर्स लगे हुए हैं. इन्हे स्पेस में यात्रा के दौरान दिशा निर्धारित करने के लिए ऑन किया जाता है. लैंडर का जो हिस्सा झुका है, उसी हिस्से में ये थ्रस्टर्स भी हैं. अगर ऑर्बिटर के जरिये दबे हुए हिस्से (एंटीना) ने पृथ्वी से भेजे जा रहे कमांड को रिसीव कर लिया, तो विक्रम अपने एक बार फिर खड़ा हो जाएगा. ऐसे में इसरो का ‘मिशन चंद्र’ फिर से शुरू हो जाएगा, जो कि फिलहाल अटका हुआ है.

इसरो अभी तस्वीर से मिलने वाले और डेटा का इंतजार कर रहा है. अभी विक्रम पर सूरज की किरणें ठीक तरह से नहीं आ रही हैं. ऐसे में वैज्ञानिक इसपर सूरज की किरणें पड़ने का भी इंतजार कर रहे हैं. ताकि सूरज की किरण पड़ने से इसकी रोशनी में ये देखा जा सके कि विक्रम को कितना नुकसान पहुंचा है. इसमें अगले दो से तीन दिन और लग सकते हैं, क्योंकि ये चांद के ऑर्बिट पर निर्भर करता है.

इसके पहले इसरो के चेयरमैन के. सिवान ने बताया था कि शुक्रवार देर रात चांद से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर आकर लैंडर विक्रम खो गया था. चांद की सतह की ओर बढ़ा लैंडर विक्रम का चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर पहले संपर्क टूट गया था. इससे ठीक पहले सबकुछ ठीकठाक चल रहा था, लेकिन इस अनहोनी से इसरो के कंट्रोल रूम में अचानक सन्नाटा पसर गया.

लैंडर के अंदर ही है रोवर ‘प्रज्ञान’
रोवर प्रज्ञान अभी भी लैंडर के अंदर है. यह बात चंद्रयान-2 के ऑनबोर्ड कैमरे के जरिए खींची गई लैंडर की तस्वीर को देखकर पता चलती है. साथ ही इसरो ने बताया कि चंद्रयान 2 का ऑर्बिटर जो कि पूरी तरह से सुरक्षित है और सही तरह से काम कर रहा है. वह चंद्रमा के चक्कर लगातार लगा रहा है.

RSS की राह पर कांग्रेस, जनता से जुड़ने के लिए करेगी ‘प्रेरकों’ की नियुक्ति

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कांग्रेसकोचुनावों में मिल रही असफलताओं के बाद फैसला लिया है देशभर में प्रेरकों की नियुक्ति करेंगी। कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बताया है कि चुनावों में पार्टी को मिल रही हार के बाद अपने जनसंपर्क कार्यक्रमों को बड़े पैमाने पर करने के प्रयासों के तहत कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण कौशल प्रदान करने के लिए देशभर में प्रेरकों या प्रेरकों के समूह की नियुक्ति की जाएगी।

प्रेरक कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा और इतिहास के बारे में ‘प्रेरित और सूचित’ करेंगे, इसके अलावा उन्हें नियमित आधार पर जनता के साथ जुड़ने के लिए तैयार किया जाएगा।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वैचारिक संरक्षक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पास प्रचारकों या संगठन की विचारधारा को जनता तक ले जाने के लिए पूर्णकालिक स्वयंसेवक हैं। प्रचारक शाखा (शिविरों) का आयोजन करते हैं और स्वैच्छिक सामाजिक कार्य करते हैं, लेकिन सिद्धांत रूप में चुनावी राजनीति में भाग नहीं लेते है। लेकिन प्रेरकों को राजनीति में शामिल होने पर कोई रोक भी नहीं है।

दिल्ली में तीन सितंबर को कांग्रेस द्वारा आयोजित एक वर्कशॉप में प्ररेकों की नियुक्ति करने का विचार सामने आया था। यह विचार इस वर्कशॉप के दौरान असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने पार्टी के सामने रखा था जिसमें चुनाव जितने के लिए आरएसएस के मॉडल को फोलो करने के लिए कहा था। कांग्रेस को लगातार दूसरी बार आम चुनाव में हार का सामना करना पड़ा और अप्रैल-मई के लोकसभा चुनावों में वह केवल 542 सीटों में से 52 सीटें जीतने में सफल रही। वहीं राहुल गांधी अपनी पारंपारिक सीट अमेठी से चुनाव हार गए लेकिन केरल की वायनाड सीट से चुनाव जीत गए जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

कांग्रेस की इस वर्कशॉप के बाद तैयार किए गए नोट में यह रेखांकित किया गया कि सभी स्तरों पर पार्टी कार्यकर्ताओं का नियमित विकास राजनीतिक संगठन की मूलभूत आवश्यकता है। इसमें कहा कि प्रेरक पार्टी को संस्थागत क्षमता प्रदान करेंगे।

‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ को यह नोट मिला है जिसमें लिखा है कि उनके पास प्रशिक्षण के विचार के लिए एक गहरा विश्वास और प्रतिबद्धता होनी चाहिए। प्रक्रिया को समय और ऊर्जा देने के लिए तैयार होना चाहिए। उनके पास सभी से विश्वास और सम्मान जीतने और समूहवाद और श्रमिकों के प्रति सम्मान से मुक्त होने की क्षमता होनी चाहिए। दस्तावेज में कहा गया है कि प्रत्येक प्रेरक को अपने ज्ञान और आत्मविश्वास का निर्माण करने के लिए 5-7 दिनों के प्रशिक्षण से गुजरना होगा। प्रत्येक राज्य में 4-5 जिलों वाले प्रत्येक मंडल में तीन प्रेरक होंगे, लेकिन तीन महीने तक क्षेत्र में काम करने के बाद उनकी नियुक्ति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

एक बार प्रशिक्षित होने के बाद प्रेरक वर्तमान राष्ट्रीय और राज्य के राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए हर जिला पार्टी कार्यालय में मासिक संगठन संवाद आयोजित करेंगे।