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मोहर्रम से ठीक पहले कश्मीर में फिर कर्फ्यू जैसे हालात, लगाई गई सख्त पाबंदियां, सरकार को सता रहा है ये डर!

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जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के 35 दिन बाद एक बार फिर घाटी में कर्फ्यू जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं। घाटी में दोबारा कड़ी पाबंदियां लग दी गई हैं। खबरों के मुताबिक, मोहर्रम का जुलूस निकालने से रोकने के लिए श्रीनगर समेत प्रदेश भर के अलग-अलग हिस्सों में रविवार से कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लगाई गई हैं।

मोहर्रम का जुलूस (फाइल फोटो)

अधिकारियों के अनुसार, श्रीनगर के लाल चौक के वाणिज्यिक केंद्रों और आसपास के क्षेत्रों के सभी प्रवेश स्थलों पर तारबंदी की गई है, इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। मंगलवार को मोहर्रम है। मोहर्रम से ठीक दो दिन पहले इस तरह की पाबंदी लगाई गई है। हालांकि, अधिकारी यह नहीं बता रहे हैं कि आखिर अचानक से घाटी में इतनी पाबंदी क्यों लगा दी गई है। अधिकारियों का सिर्फ इतना कहा है कि कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए इस तरह के कदम उठाए गए हैं।

गौरतलब है कि मोहर्रम के मौके पर जुलूस निकाला जाता है। इस मौके पर लोग एक दूसरे मिलते हैं। अधिकारियों को आशंका है कि बड़े धार्मिक समागमों से हिंसा भड़क सकती है। ऐसे में मंगलवार को घाटी में महोर्रम के मौके पर जुलूस निकाले जाने पहले की इस तरह की कड़ी पाबंदिया लगा दी गई हैं।

अधिकारियों के अनुसार, पाबंदी के बीच सिर्फ आपात चिकित्सा की स्थिति में लोगों को बैरिकेड पार करने की इजाजत दी जा रही है। सुरक्षा बलों ने संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी कर्फ्यू पासों पर भी लोगों को जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है।

मोहर्रम का जुलूस (फाइल फोटो)

इससे पहले धारा 370 के ज्यादातर प्रावधानों को रद्द करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने केंद्र सरकार की घोषणा के बाद घाटी में पहली बार 5 अगस्त को पाबंदियां लगाई गई थीं। हालांकि, धीरे-धीरे स्थिति में सुधार को देखते हुए घाटी के कई हिस्सों से पाबंदियां हटा ली गई थीं। इस बीच पिछले करीब 35 दिनों से घाटी में चल रहे बंद की वजह लगातार जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

Priya Punia : पिता ने 22 लाख का घर बेचकर खेत में बनाया क्रिकेट का मैदान, बेटी टीम इंडिया में शामिल

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 राजस्थान के चूरू जिले के राजगढ़ उपखंड में 248 घरों की आबादी का एक छोटा गांव है जणाऊ खारी। इसी गांव की बेटी प्रिया पूनिया ने बुलंद हौसलों के दम पर कामयाबी की ऐसी कहानी लिख दी है, जो पूरे प्रदेश के युवाओं को इस बात के लिए प्रेरित कर रही है कि छोटी जगह से भी सफलता की बड़ी उड़ान भरी जा सकती है। प्रिया पूनिया ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाई है। बतौर ऑपनर बल्लेबाज प्रिया पूनिया अक्टूबर 2019 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली पांच घरेलू मैचों की सीरीज में चौके-छक्के लगाती नजर आएगी।पिता ने यूं बयां किया बेटी का सफर

खास बातचीत में प्रिया पूनिया के पिता सुरेन्द्र पूनिया ने बताया कि बेटी क्रिकेट में इस मुकाम तक कैसे पहुंच पाई। राह में उसे कौनसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और उसने कैसे उनका डटकर मुकाबला किया।भारतीय सर्वेक्षण विभाग में कार्यरत सुरेन्द्र पूनिया ने बताया कि 6 अगस्त 1996 को गांव जणाऊ खारी में बेटी प्रिया का जन्म हुआ। इसके बाद ट्रांसफर के चलते उनकी अजमेर, जयपुर व ​दिल्ली में पोस्टिंग रही। दिल्ली से ही प्रिया ने ग्रेजुएशन किया। वर्तमान में दिल्ली स्टेट की महिला टीम की ओर से क्रिकेट खेल रही है। खास बात यह है कि पिछले दस साल से ऑपनर बल्लेबाज मैदान में उतर रही है।

पिछले साल लगाए दो शतक

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी बन चुकी प्रिया पूनिया राइड हैंड की बेहतरीन बल्लेबाज है। पिछले साल अक्टूबर नवंबर में सीनियर वुमन वनडे चैंपियनशिप बैंगलुरु के आठ मैचों में प्रिया ने दो शतकों की बदौलत कुल 407 रन बनाए थे। चैंपियनशिप में प्रिया को बेस्ट तीन प्लेयर में जगह मिली। इसी प्रदर्शन के चलते प्रिया का इस साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड दौरे के लिए भारतीय महिला टीम में चयन हुआ। इसके अलावा सीनियर नेशनल महिला टी-20 चैंपियनशिप में प्रिया ने दस मैच में 47.75 की औसत से 382 रन बनाए ।

जयपुर में मकान बेच चौमूं में खरीदी जमीन

पिता सुरेन्द्र पूनिया ने बताया कि बेटी सात साल की उम्र से खेलों में दिलचस्पी लेने लगी थी। शुरुआत में इसे बैडमिंटन व लॉन टेनिस की कोचिंग करवाई, मगर वहां इसका मन नहीं लगा तो ​क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन करवा दी। फिर जयपुर ट्रांसफर होने पर प्रिया भी पिता के जयपुर आ गई। यहां उसकी क्रिकेट की कोचिंग सही नहीं हो पाने के कारण पिता ने जयपुर स्थित अपना 22 लाख रुपए का मकान बेच दिया और जयपुर के चौमूं के पास एक खेत खरीद लिया। उसमें खेती करने की बजाय बेटी के लिए क्रिकेट का मैदान बना दिया, जिस पर वह प्रेक्टिस करने लगी।

टीम इंडिया की जर्सी ने मुझमं हमेशा रोमांच भरा

दक्षिण अफ्रीका दौरे पर जा रही भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह मिलने पर प्रिया पूनिया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि टीम इंडिया की जर्सी ने हमेशा उसमें रोमांच भरा है, जिससे वह और अधिक अच्छी परफॉमेंस के लिए मेहनत कर पाती है। दक्षिण अफ्रीका रवाना होने से पहले प्रिया 12 सितंबर से बैंगलुरु में होने वाले प्रशिक्षण शिविर में भाग लेगी। बता दें कि प्रिया के चयन पर गांव जणाऊ खारी में जश्न का माहौल है। प्रिया की मां सरोज पूनिया हाउस वाइफ हैं। प्रिया का भाई राहुल पूनिया भी क्रिकेट में कॅरियर बना रहा है।

जेएनयू छात्रसंघ चुनाव: लेफ्ट यूनिटी की बढ़त के संकेत, 17 को घोषित होंगे नतीजे

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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में अब तक की मतगणना में सेंट्रल पैनल की चारों सीटों पर लेफ्ट यूनिटी को बढ़त मिलती दिख रही है। वहीं, एबीवीपी दूसरे नंबर पर चल रही है। हाईकोर्ट द्वारा चुनाव परिणाम जारी करने पर रोक लगाने के कारण आधिकारिक घोषणा 17 सितंबर को होगी। मतगणना में रविवार शाम तक सेंट्रल पैनल के तहत अध्यक्ष पद के पांच प्रत्याशियों में से लेफ्ट यूनिटी की आईशी घोष का वोट प्रतिशत सबसे अधिक है। एबीवीपी दूसरे व बसपा प्रत्याशी तीसरे स्थान पर है। मतगणना के आखिरी चरण तक यही रुझान रहा तो आईशी छात्रसंघ की नई अध्यक्ष बन सकती हैं। वहीं, उपाध्यक्ष, महासचिव व सचिव पद पर भी लेफ्ट यूनिटी के प्रत्याशी सबसे आगे चल रहे हैं।

लैंडर की लोकेशन मिलने के बाद इसरो के सामने ये बड़े सवाल

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चंद्रयान-2 के चांद की सतह से महज 2 किलोमीटर दूर संपर्क टूने के बाद रविवार को उसके चांद पर मिलने की खबर से थोड़ी सी उम्मीदें फिर जग गई है। हालांकि, इसरो चीफ के सिवन ने साफ किया कि अभी लैंडर विक्रम से कोई संपर्क नहीं हो पाया है और यही बात इसरो के वैज्ञानिकों को परेशान कर रहा है। ऑर्बिटर द्वारा खींची गई थर्मल इमेज के बाद इसरो ने कल कहा था कि उसने लैंडर का सटीक लोकेशन का पता लगा लिया है। कहा जा रहा है कि लैंडर की हार्ड लैंडिंग हुई और उसकी स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर सबुकछ ठीक रहता तो रोवर प्रज्ञान अभी चांद के बारे में पूरी दुनिया को जानकारी दे रहा होता। ऐसे में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। आखिर अब आगे क्या होगा? क्या लैंडर से संपर्क स्थापित हो पाएगा? रोवर प्रज्ञान का क्या होगा?

आइए जानते हैं ऐसे सवाल जो इसरो को डाल रहे हैं टेंशन में

विक्रम के उतरते वक्त क्या गड़बड़ हुई?

1,471 किलो के लैंडर विक्रम ने रात के 1 बजकर 38 मिनट पर चंद्रमा की तरफ उतरना शुरू किया था। उस वक्त उसकी रफ्तार बहुत तेज थी। चार इंजन शुरू हुए, जिन्होंने रफ्तार कम की। जब लैंडर सतह से 5 किमी ऊपर था, उसी वक्त वह अपने तय रास्ते से थोड़ा भटक गया। हालांकि जल्द ही अपने रास्ते पर आ गया। वह थोड़ा और नीचे उतरा, लेकिन उलट पलट हो गया। सतह से 2.1 किलोमीटर पहले विक्रम से संपर्क टूट गया।

क्या लैंडर विक्रम क्रैश हो गया?

आंकड़ों के विश्लेषण से यह पता लगाया जाएगा कि 1,471 किलो वजनी विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग हुई या क्रैश लैंडिंग। दरअसल, विक्रम को 7 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से नीचे उतरना था। इसे 18 किमी की रफ्तार से उतरने तक के लिए प्रोग्राम किया गया था। अगर यह इससे तेज रफ्तार से टकराया होगा तो क्रैश लैंडिंग हुई होगी। एक आशंका यह भी है कि उलटकर विक्रम का रुख नीचे की तरफ हो गया हो, जिससे वह तेज रफ्तार से सतह से टकराया हो। ऐसे में इससे संपर्क मुश्किल होगा।

लैंडर के नुकसान को ठीक किया जा सकता है?

एक विशेषज्ञ ने बताया कि अगर हार्ड-लैंडिंग के बाद विक्रम चांद की सतह पर सीधा होगा और उसके उपकरणों को नुकसान नहीं पहुंचा होगा तो उससे दोबारा संपर्क स्थापित होने की उम्मीदें बरकरार रहेंगी। यानी चमत्कार की उम्मीद अभी भी है। लैंडर विक्रम के अंदर ही रोवर प्रज्ञान है, जिसे सॉफ्ट-लैंडिंग के बाद चांद की सतह पर उतरना था।

संपर्क की उम्मीद कब तक है?

इसरो चीफ के सिवन ने बताया कि लैंडर को खुद ही जगह ढूंढकर सतह पर उतरना था। इसमें इसरो सेंटर से कोई निर्देश नहीं मिलना था। इसी दौरान कुछ गड़बड़ हुई और विक्रम अपने रास्ते से भटककर खो गया। उतरने के आखिरी पलों में लैंडर ने सही से काम नहीं किया। इसकी वजह से उससे संपर्क टूट गया, जो अभी तक शुरू नहीं हो सका है। विक्रम से संपर्क साधने के लिए अगले 14 दिनों तक कोशिशें की जाती रहेंगी।

क्यों हुई हार्ड लैंडिंग?

दरअसल, हार्ड लैंडिंग टर्म का इस्तेमाल तब किया जाता है जब कोई स्पेसक्राफ्ट या अंतरिक्ष संबंधी कोई विशेष उपकरण ज्यादा तेज वर्टिकल स्पीड यानी लंबवत गति और ताकत से सतह पर पहुंचा हो। सॉफ्ट-लैंडिंग या नॉर्मल लैंडिंग में स्पेसक्राफ्ट या उपकरण धीमी और नियंत्रित गति से सतह पर उतरता है ताकि उसे नुकसान न पहुंचे। इसरो अब यह पता लगाने की कोशिश में जुटा है कि आखिर किन परिस्थितियों में लैंडर को हार्ड लैंडिंग करना पड़ा।

विक्रम के ट्रांसपोंडर का क्या होगा?

उधर, इसरो के एक सूत्र ने कहा कि अभी यह पता लगाना बाकी है कि विक्रम पर रखा ट्रांसपोंडर अभी भी पूरी तरह से सुरक्षित है या नहीं।

मौत मेरे घर का रास्ता भूल गई है, 181 साल से जिंदा है यह व्यक्ति

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आज के इस दौर में इंसान 60, 70 की उम्र तक ही मुश्किल से जी पाता है, और 70, 80 की उम्र के बाद तो बुजुर्ग बस अपनी मौत का इतजार करने लग जाता है। ओर अपनी जिंदगी के आखिरी पलो के बारे में सोचने लग जाता है। लेकिन इस व्यक्ति के साथ तो सब उल्टा ही हो रहा है

ऐसे में अगर आपको ये बताया जाए कि यूपी के वाराणसी में एक बुजुर्ग ऐसे भी है जो 181 साल से जीवित है और सदियों से बेसब्री से अपनी मौत का इंतजार कर रहे है। लोग कहते हैं कि मौत इनके घर का रास्ता भूल गई है..वाराणसी में रहने वाले ‘महाष्टा मुरासी’ नाम के ये बुजुर्ग अपनी मौत की रहा देख रहे है। अपनी जिंदगी से वो इतने तंग आ चुके है कि दिन भर बस मौत को ही याद करते रहते है। इस बुजुर्ग का जन्म 1835 में कर्नाटक के बंगलुरु में हुआ था। और सन्1903 में में वाराणसी में हमेशा के लिए आकर बस गए।

महाष्टा 122 साल तक अपना पेट पालने के लिए मोची के तौर पर काम किया और 1957 में उन्होंने वो काम बंद कर दिया। कई डॉक्टर्स ने उनकी सही उम्र पता करने की कोशिश की लेकिन वो नाकाम ही रहे.। कुछ लोग तो इनकी उम्र को अभिषाप तो कुछ लोग कुदरत का करिश्मा मानते हैं। अब तो महाष्टा की उम्र महज एक पहली बनकर रह गई है।

स्विटजरलैंड ने जारी की काला धन रखने वालों की सूची, कार्रवाई के डर से कई खाते हुए खाली

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स्विटजरलैंड ने भारत सरकार को स्विस बैंक में खाता रखने वाले भारतीयों की जानकारी देना शुरु कर दी है. भारत सरकार को इसी महीने स्विस बैंक में खाता रखने वालों से जुड़ी कुछ जानकारियां प्राप्त हुई हैं. अब सरकार इन सभी जानकारियों का अध्ययन कर रही है. जिससे स्विस बैंक में कालाधन रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके. हालांकि इससे पहले ही स्विस बैंक द्वारा दी गई खातों वाली सूची में शामिल कई खाता धारकों ने कार्रवाई के डर से अपने खाते बंद कर दिए गए हैं

बता दें कि स्विट्जरलैंड की सरकार ने सूचना साझा करने की स्वचालित व्यवस्था के तहत भारत सरकार को ये जानकारियां उपलब्ध कराई हैं. हालांकि गोपनीयता की शर्त पर बैंक अधिकारियों और नियामक संस्थाओं से जुड़े अफसरों ने कहा है कि स्विट्जरलैंड से मिली जानकारियां मुख्य रूप से बिजनेसमैन और एनआरआई से जुड़ी हैं. ये एनआरआई भारतीय दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों, अमेरिका, ब्रिटेन के अलावा कुछ अफ्रीकी देशों और दक्षिण अमेरिकी देशों में कारोबार कर रहे हैं.

बता दें कि बैंक अधिकारियों का कहना है कि जब से बेहद गोपनीय माने जाने वाले स्विस बैंक खातों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई तो पिछले कुछ सालों में इन खातों से बड़े पैमाने पर पैसे निकाले जाने शुरु हो गए. यही नहीं कई खाते तो बंद कर दिए गए. हालांकि स्विट्जरलैंड द्वारा भारत को सौंपी गई जानकारी में इतनी तो सूचना है कि स्विस बैंक में पैसा रखने वालों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया जा सकता है.

बता दें कि स्विस सरकार ने हर उस खाते में लेन-देन का पूरा विवरण दिया गया है, जो 2018 में एक दिन के लिए भी सक्रिय रहा. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक यह डेटा इन खातों में अघोषित संपत्ति रखने वालों के खिलाफ ठोस मुकदमा तैयार करने में बेहद सहायक साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें जमा, ट्रांसफर और प्रतिभूतियों एवं अन्य संपत्तियों में निवेश से हुई कमाई का पूरा ब्योरा दिया गया है.

बता दें कि स्विस सरकार के पास उन 100 खातों की जानकारी भी है, जिनके बारे में आशंका है कि इन्हें 2018 से पहले बंद करा दिया गया है. स्विट्जरलैंड की सरकार एक पूर्व समझौते के तहत इन खातों की जानकारी भारत को देने वाली है. भारतीय अधिकारियों ने इन खाताधारकों के खिलाफ टैक्स चोरी के सबूत स्विस अधिकारियों को सौंपे थे. जिन लोगों का खाता इसमें शामिल है वे ऑटो पार्ट्स, केमिकल, टेक्सटाइल, रियल स्टेट, हीरा और जवाहरात, और स्टील के बिजनेस से जुड़े हैं.

17 सालों के बाद ऐसी नजर आती है कांटा लगा गर्ल, देखिए तस्वीरें

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जानकारी के लिए आपको बता दें कि आज से 17 साल पहले साल 2002 में रिलीज हुई फिल्म मुझसे शादी करोगी मैं एक गाना था कांटा लगा। आपको बता दें कि इस गाने में अभिनेत्री शेफाली जरीवाला ने डांस किया था। साल 2002 में कांटा लगा गाने ने चारों तरफ धमाल मचा दिया था। इसी गाने की वजह से अभिनेत्री शेफाली जरीवाला भी बहुत बड़ी लोकप्रिय अभिनेत्री हो गई थी। लोग इन्हें कांटा लगा गर्ल भी कहते थे

मौजूदा समय में 36 वर्षीय शेफाली जरीवाला अब बहुत ज्यादा बदल चुकी है। इन्होंने कांटा लगा गाने के अलावा और दूसरे म्यूजिक वीडियो में भी अभिनय किया है। लेकिन बाकी सभी गानों में उन्हें ज्यादा पसंद नहीं किया गया था।

डेंगू से बचने के लिए शबाना आजमी ने दी टिप्स

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दिग्गज बॉलीवुड अभिनेत्री शबाना आजमी इस बात से वाकई में बेहद हैरान हैं कि मुंबई में ज्यादातर लोग बृहन्मुंबई नगर निगम के अधिकारियों को डेंगू के मच्छरों की जांच के लिए अपने घरों में घुसने नहीं देते हैं. उन्होंने शनिवार को ट्वीट किया, “मैं उस वक्त हैरान हो गई जब डेंगू के लिए मेरे घर की जांच करने आए बीएमसी अधिकारियों ने कहा कि लोग उन्हें अपने घरों में घुसने नहीं देते हैं.”

घर में जमे हुए पानी जहां डेंगू के मच्छर अंडे देते हैं, के बारे में लोगों को सावधान करते हुए उन्होंने इसी ट्वीट में आगे लिखा, “फलों के गमले डेंगू के प्रजनक हैं. पानी को बिना भूले हर रोज बदलना चाहिए. अपने घरों में देखें कि कहीं पानी जमा हुआ तो नहीं है.”

मानसून के इस मौसम में दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, देहरादून और देश के अन्य हिस्सों में मच्छरों से होने वाली बीमारी डेंगू पूरे भारत में लगातार बढ़ रही है.खबरों के मुताबिक, हैदराबाद में एक 13 साल के लड़के ने और कोलकाता में एक 24 साल की युवती ने इस बीमारी के कारण दम तोड़ दिया है. इस बात की आशंका जताई जा रही है कि तेलंगाना में डेंगू ने 50 लोगों की जान ले ली है. देहरादून में डेंगू से अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें एक 18 साल की लड़की भी शामिल है.

ईडी ने लग्जरी कार निर्माता कंपनी रोल्स रॉयस के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा दर्ज किया

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने लंदन स्थित लग्जरी कार निर्माता कंपनी रोल्स रॉयल के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए मुकदमा दर्ज किया है। कंपनी पर आरोप है कि उसने 2007-11 के दौरान भारत की कई सार्वजनिक इकाइयों से कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए एक बिचौलिये को 77 करोड़ रुपये की घूस दी थी। अधिकारियों ने बताया, इस साल जुलाई में सीबीआई की एफआईआर के बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत यह मुकदमा दायर किया है।

सीबीआई ने रोल्स रॉयस और उसकी भारतीय इकाइयों, सिंगापुर के अशोक पाटनी की कंपनी आशमोर प्रालि, मुंबई की टर्बोटैक एनर्जी सर्विसेज इंटरनेशनल प्रालि के अलावा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. (एचएएल), ओएनजीसी और गेल के अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक साजिश और घूस की शिकायत दर्ज की थी।

शिकायत में कहा गया कि 2000 से 2013 तक एचएएल का रोल्स रॉयल के साथ कारोबार 4,700 करोड़ रुपये का रहा। रोल्स रॉयस ने 2007 से 2011 के बीच एचएएल को एवन एवं एलीसन इंजन के पुर्जों के सौ आर्डर की आपूर्ति के लिए ‘वाणिज्यिक सलाहकार’ पाटनी को 18 करोड़ रुपये का भुगतान किया।

रक्षा मंत्रालय को पाटनी और उसकी कंपनियों के रोल्स रॉयस से जुड़ाव के बारे में एक पत्र मिला था, जिसकी सूचना सीबीआई को दी गई थी। मंत्रालय की शिकायत के आधार पर केंद्रीय एजेंसी ने जांच शुरू की थी। इसके बाद रोल्स रॉयस ने कहा था कि वह किसी भी तरह का गलत व्यापारिक आचरण बर्दाश्त नहीं करेगी।

अब ईडी गलत तरीकों से बनाए धन की लॉन्ड्रिंग कर निजी संपत्ति बनाने के मामले की जांच करेगी। साथ ही ‘इंटीग्रिटी पैक्ट’ के उल्लंघन और घूस लेनदेन की भी जांच होगी।

दिल्ली: पीसीआर के पास रोज आ रहे हैं साढ़े तीन लाख फर्जी कॉल्स, जानें वजह

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 आपको आने वाले कुछ दिनों में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) से मदद मांगी होगी तो 100 नम्बर की जगह 112 नम्बर (112 number) पर कॉल करना होगा. इसके लिए दिल्ली पुलिस ने (पीसीआर नम्बर 112) पर ट्रायल (Trial) शुरू कर दिया है. लेकिन मजे की बात यह है कि ट्रायल के दौरान ही दिल्ली पुलिस को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. दिल्ली पुलिस के 112 नम्बर पर परेशानी में डालने वाली तरह-तरह के कॉल्स (Various calls) आ रहे हैं. कोई फोन कर कह रहा है कि मेरे मोबाइल नम्बर पर 10 रुपए का रीचार्ज करवा दो तो कोई कह रहा है कि मेरे मोबाइल का नेटवर्क ठीन नहीं आ रहा है.

जानकारी के मुताबिक, पीसीआर के इस नए नंबर 112 पर हर दिन करीब साढ़े तीन लाख ऐसे कॉल्स आ रहे हैं, जिनका पुलिस से कोई लेना-देना नहीं है. पुलिस का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने पीसीआर का जो नम्बर 112 शुरू किया है, उससे मिलता- जुलता नम्बर मोबाइल कंपनियों के कॉल सेंटरों का भी है. यही वजह है कि लोग फोन मिलाना तो चाहते हैं मोबाइल कॉल सेंटर को लेकिन फोन लग जाता है, दिल्ली पुलिस के पीसीआर को. जब पुलिस फोन उठाती है तो फोन करने वाले पुलिस को ही अपनी मोबाइल से संबंधित शिकायत करने लगते हैं.

कहा जा रहा है कि इस तरह की ब्लैंक और बेकार के करीब साढ़े तीन लाख कॉल हर दिन पुलिस को मिल रहे हैं. एक अधिकारी ने बताया कि इसमें एक और समस्या आ रही है कि जिन लोगों के पास स्मार्ट फोन न होकर बेसिक कीपैड वाले फोन हैं, असल में उनमें पांच नंबर को अगर कुछ देर तक दबाया जाता है तो वह ऑटोमेटिक ही पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर मिल जाता है.

नवभारत टाइम्स के मुताबिक, दूसरे स्मार्ट फोन के पावर बटन को भी तीन बार दबाने पर यह पीसीआर में मिलता है. लेकिन अधिकतर लोग अपने मोबाइल फोन में इन बटनों को दबाने में सावधानी नहीं बरत रहे हैं यही वजह है कि उनकी कॉल पुलिस हेल्पलाइन के नए नंबर पर मिल रही है. ऐसे में पुलिस को अपनी इस नई सर्विस को शुरू करने में काफी परेशानियां आ रही हैं. पुलिस का कहना है कि 112 नंबर को अब आधिकारिक रूप से लांच किया जाएगा. इस नंबर के साथ-साथ कुछ समय तक 100 नंबर भी चालू रहेगा.