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खुली प्रेस कांफ्रेंस में जेठमलानी ने कहा था, “प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव को घूस दिया गया”

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आज के भारत में बड़ी-बड़ी गाड़ियां, बड़े अपार्टमेंट ढेरों सुविधाएं, चमक धमक देख रहे हैं, वो लगभग 30 साल पहले नहीं थी। आप सोच रहे होंगे इसमें कौन सी नई बात है! सबको पता है कि इतनी सुविधाएं पहले नहीं थीं। लेकिन यदि हम कहें कि आज के भारत की तस्वीर, आज के भारत की नींव 30 साल पहले ही रखी गई थी तो शायद आपको ये बात थोड़ी बहुत अलग लगे। भारत में यह बदलाव तब नहीं हुआ जब देश आजाद हुआ, बल्कि तब हुआ जब 30 साल पहले देश कंगाल हुआ था। जी हां! 1991 में देश के प्रधानमंत्री थे नरसिम्हा राव, जिन्हें तीन बातों के लिए याद रखा जाता है। अयोध्या, आर्थिक सुधार और भ्रष्टाचार।

अयोध्या और आर्थिक सुधार तो नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दो वर्षों में ही हो गया था। बाकी बचे सालों में सिर्फ भ्रष्टाचार की ही खबरें रहती थीं। उस वक़्त का सबसे बड़ा घोटाला था हर्षद मेहता घोटाला कांड। इस घोटाले की आंच प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव तक पहुंची। शेयर मार्केट में बड़ा घोटाला कर चुके हर्षद मेहता ने दावा किया था कि पीएम नरसिम्हा राव को उसने 67 लाख रुपये की रिश्वत दी है। उसने दावा किया कि पीएम को उसने एक सूटकेस में घूस की रकम दी थी। हर्षद मेहता ने इस बारे में एक कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया था और इसमें उनका साथ देने बैठे थे राम जेठमलानी। बेबाकी में राम जेठमलानी का कोई जवाब नहीं था। रविवार को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद राम जेठमलानी का निधन हो गया।

क्या था हर्षद मेहता का आरोप ?

हर्षद मेहता ने 16 जून 1993 को मुंबई की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह आरोप लगाया था कि उसने पी।वी। नरसिम्हा राव को एक करोड़ रुपए से भरा एक सूटकेस उनके घर पर दिया। हर्षद मेहता ने कहा कि वह अपने साथ प्रधानमंत्री आवास एक सूटकेस ले गया था। उसमें 67 लाख रुपये थे। प्रेस कांफ्रेंस में मेहता ने कहा कि उसने सूटकेस राव के पर्सनल सेक्रेट्री राम खांडेकर को दे दिया। ऐसा उसने प्रधानमंत्री के कहने पर किया। एक करोड़ देने की बात थी, पर उस दिन सुबह तक 67 लाख का ही इंतजाम कर सका था। दूसरे दिन बाकी रकम पहुंचा दी।

हर्षद ने उस प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि उसने प्रधानमंत्री को यह भी बताया था कि शेयर बाजार में पैसे कमाना कितना आसान है। उसने कहा कि वह शपथ पत्र दाखिल कर प्रधानमंत्री को पैसे देने की बात कही है। हर्षद मेहता ने 16 जून 1993 को मुंबई की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह आरोप लगाया था कि उसने पी।वी। नरसिम्हा राव को एक करोड़ रुपए से भरा एक सूटकेस उनके घर पर दिया।

जेठमलानी ने कहा था , पीएम के रिश्वत लेने की बात साबित कर देंगे

जेठमलानी से पूछा गया था कि क्या हर्षद मेहता की कही गई बातों को आप साबित कर सकते हैं? तो उन्होंने कहा कि उनके पास इतने सबूत हैं कि अग्नि परीक्षा से भी बखूबी गुजर सकते हैं। जरूरत पड़ेगी तो हम प्रमाणों को पेश कर देंगे।

बहरहाल पर पीएम पर रिश्वत लेने का आरोप साबित नहीं हो सका। लेकिन न तो झूठा आरोप लगाने के आरोप में हर्षद मेहता को सजा हुई और न ही घूस लेने के आरोप में नरसिम्हा राव को। नरसिम्हा राव पर यह आरोप लगा था कि उन्होंने आंध्र के नांदियाल लोकसभा उपचुनाव में खर्च करने के लिए हर्षद मेहता से पैसे लिए थे।

दरअसल 1991 में जब वह पीएम बनने थे तो संसद के किसी सदन के सदस्य नहीं थे। बाद में वे नंदियाल से जीत कर आए। तब लोकसभा कांग्रेस को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं था। तब झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसदों को रिश्वत देकर नरसिम्हा राव ने अपनी सरकार बचाई थी। रिश्वत लेकर वोट देने का आरोप बाद में साबित भी हो गया।

Shocking! इंस्टाग्राम से बॉलीवुड के ये सुपरस्टार्स करते हैं करोड़ों की कमाईं

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बॉलीवुड के सुपरस्टार्स की कमाई सिर्फ उनकी फिल्मों तक ही सीमित नहीं है. बल्कि कई ऐसे सितारे हैं जो सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए करोड़ों की कमाई करते हैं. इंस्टा इन दिनों स्टार्स के पर्सनल और प्रोफेसनल जिंदगी का एक हिस्सा बन गया है. इसी के चलते दुनिया के फेमस स्टार्स इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से करोड़ों की कमाईं कर रहे हैं. इसका खुलासा हॉपल एचक्यू द्वारा जारी इंस्टा रिच लिस्ट में हुआ है. इस लिस्ट टॉप 20में दुनिया के नामचीन लोगों में से 19 वां स्थान बॉलीवुड की सुपरस्टार प्रियंका चोपड़ा का नाम शामिल है. वहीं क्रिकेटर विराट कोहली भी इस रिच लिस्ट में शामिल होते हुए 23 वें स्थान पर हैं.

टॉप 20 लिस्ट…

चलिए आपको बतातें हैं उन सितारों के बारें में जो इंस्टा पर अपनी पोस्ट से करोड़ों कमाते हैं.

– प्रियंका चोपड़ा के अब तक 44.1m फॉलोवर्स हैं. वो अपनी हर पोस्ट के लिए 1, 8689271 रुपये चार्ज करती हैं.

– बॉलीवुड स्टार शाहिद कपूर की फीस सुनकर तो आप शॉक्ड हो जाएंगे. शाहिद अपने एक पोस्ट के लिए तकरीबन 20से 30लाख चार्ज करते हैं.

– कमाई के मामले में आलिया भट्ट का नाम भी शामिल है. जो एक पोस्ट के 50 से 1 करोड़ की फीस चार्ज करती है.

– शाहरुख खान भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में कमाई के मामले में आगे हैं. शाहरूख भी एक ट्वीट के 80 लाख से 1 करोड़ फीस चार्ज करते हैं.

– अमिताभ बच्चन भी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. वो भी किसी ब्रांड के लिए ट्वीट करते हुए 30 से 40 लाख रुपये कमा लेते हैं.

– सोनाक्षी सिन्हा भी किसी पोस्ट पर 10से 15लाख की फीस लेती हैं.
– वहीं सलमान खान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ब्रांड का प्रमोशन कम ही करते हैं. लेकिन उनकी फीस भी 1 करोड़ के करीब मानी जाती है.

इन तरीको को अपनाये नहीं होगी उठने बैठने में दिक्कत.

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जब आदमी बिना डॉक्टरी सलाह के अपनी मर्जी से दर्दनिवारक दवाएं लेने लगता है. इससे कोशिकाओं को आराम मिलने से उसे कुछ समय के लिए तो राहत मिलती है लेकिन प्रभाव समाप्त होने पर दर्द दोगुनी तीव्रता से प्रभाव दिखाता है. इसलिए विशेषज्ञ डॉक्टरी सलाह से दवा लेने के लिए कहते हैं.

दर्द दो तरह का होता है. पहला ताजा या एक्यूट जो किसी वजह से होकर 2-4 दिन में स्वत: अच्छा भी हो जाता है. दूसरा लंबे समय से चल रहा असाध्य या क्रॉनिक जो महीनों तक रहकर दिनचर्या गड़बड़ा देता है. मरीजों को इससे निजात दिलाने के लिए चिकित्सा जगत में पेन मैनेजमेंट तकनीक भी आजमाई जा रही है. इसमें दर्द को पूरी तरह समाप्त करते हैं ताकि रोगी सामान्य ज़िंदगी जी सके.कैंसर जैसी पीड़ादायक बीमारियों में असहनीय दर्द होना आम है. करीब 80 प्रतिशत मरीजों का कार्यदर्द से प्रभावित होता है. शरीर के किसी हिस्से में दर्द है व बार-बार होता है या महीनों से है तो एक बार पेन मैनेजमेंट एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए.

लक्षण
उठने बैठने में तकलीफ, अधिक भारी वस्तु न उठा पाना, लंबे समय से नींद न आना, थकावट रहना, इम्युनिटी निर्बल होना, तनाव या अवसाद, घबराहट, जहां दर्द है वहां सूजन के साथ स्कीन लाल होना.
३-५
बार लेना होता है उपचार यदि दर्द लगातार या बार-बार हो तो.
शरीर के सर्किट में गड़बड़ी से दर्द
शरीर का हर अंग सर्किट की तरह आपस में जुड़ा है. इसमें गड़बड़ी से ब्रेन दर्द का सिग्नल भेजता है.पेन मैनेजमेंट में उपचार दो तरह से होता है. डायग्नोस्टिक इंटरवेंशन में दर्द का कारण पता लगा दवा देते हैं. वहीं थैरेप्यूटिक इंटरवेंशन में दर्द कहां, कब से और क्यों हो रहा है, इसकी जाँच कर उस भाग में सीटी और अल्ट्रासाउंड प्रक्रिया से विशेष दवा डालते हंै. इनका लाभ गर्दन, पैर, चेहरे या कमरदर्द में होता है. दर्द लगातार हो तो ३-५ बार उपचार लेना होता है.

8 साल के बेटे की मौत के बाद इस पिता ने लिखी दिल को छू ले लेने वाली बात, वायरल हुआ पोस्ट

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 पिता और पुत्र के बीच रिश्ता बेहद अनोखा होता है। बेटे को उंगलियां पकड़कर चलना सिखाने वाले पिता को भी उससे काफी उम्मीदें होती हैं। बेटा भी अपने पिता के बुढ़ापे का सहारा बनता है। पिता अपने बेटे के लिए सबकुछ करने को तैयार रहता है, उसकी खुशियों में खुद को खुश पाता है और बेटे के किसी परेशानी में होने पर वह भी दुखी हो जाता है। आज के दौर में कमजोर होते रिश्तों और बिखरते परिवारों के बीच इंटरनेट ने अपनी भावनाओं को जाहिर करने का स्पेस दिया है, जहां लोग अपने गम बांटते हैं और अपने खुशी के पल को भी साक्षा करते हैं।अमेरिका
बेटे की मौत के बाद पिता ने लिखा भावुक पोस्ट

अमेरिका के एक शख्स ने अपने 8 साल के बेटे की मौत के बाद सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट लिखा जो तेजी से वायरल हो रहा है। इस शख्स ने लिंक्डइन पर लिखे पोस्ट में बताया कि उसके जुड़वां बेटों में से एक की मौत हो गई है। वह चाहता है कि उसके पुराने दिन फिर से वापस आ जाएं और अपने बेटे के साथ वैसा ही समय फिर से बिता सके।

दो जुड़वां बेटों में से एक की मौत

जब पत्नी का इस शख्स के पास फोन आया कि बेटे की तबीयत खराब है, उस वक्त स्टोरमेंट अपने काम पर थे। स्टोरमेंट ने लिंक्डइन पर लिखा, ‘8 साल पहले, इसी महीने में मेरे जिंदगी में दो जुड़वां बेटे आए थे। तीन हफ्ते पहले मेरा एक बेटा मुझसे दूर चला गया। मुझे मेरे ऑफिस में एक मीटिंग के दौरान पता चला कि मैं पिछले आठ सालों में अपने वीक ऑफ्स के अलावा कई सारी छुट्टियां ली थी। मेरी पत्नी जब भी मुझे ऑफिस में कॉल करती थी, मैं कॉन्फ्रेंस रुम के बाहर जाकर बात करने लगता था।’

आधे घंटे तक बेटे के बालों को सहलाता रहा- पिता

शख्स ने आगे लिखा है, ‘इस बार भी ऐसा ही हुआ, मेरी पत्नी ने मुझे कॉल किया और मैंने तुरंत उससे पूछा कि क्या हुआ, उसकी आवाज बिल्कुल ठंडी और उदास थी। उसने बताया कि विली मर चुका है, मैंने कहा- क्या? उसने फिर से वही बात दोहराई, मैंने चिल्ला कर कहा- नहीं, आई एम सॉरी, मैं 911 पर कॉल करता हूं। जब डॉक्टर उसकी बॉडी को लेकर गए तो मैं फिर उसके रूम में गया और पूछा- क्या हो गया दोस्त, तुम्हें क्या हो गया…? मैं करीब आधे घंटे तक उसके बालों को सहलाता रहा, और विली के हाथों को पकड़े रखा। फिर वे लोग उसे लेकर चले गए।’

स्टोरमेंट
‘6 साल में ही उसने अपने लिए स्कूल में लड़की पसंद कर ली थी’

स्टोरमेंट ने लिखा, ‘5 साल पहले, विली ने कहा था कि वह बड़ा होते ही शादी कर लेगा। 6 साल की उम्र में ही उसने अपने लिए स्कूल में लड़की पसंद कर ली थी। जब हमने दूसरे शहर शिफ्ट किया तब भी वह लेटर के जरिए उसके संपर्क में था। उन दोनों ने मिलकर शादी का प्लान भी बना लिया था। उसने विली को मुक्का मारकर शादी के लिए प्रपोज किया था और विली ने हां बोल दिया था। मेरे लिए सबसे मुश्किल था डेथ सर्टिफिकेट पर साइन करना, फॉर्म भरना था- मैरिटल स्टेटस और जॉब। मैं टूट गया क्योंकि वह अक्सर इन दोनों चीजों के बारे में बात करता था। उसके जाने के एक दिन पहले सब नॉर्मल था, उसको कोई बीमारी नहीं थी।’

वाहन चेकिंग के लिए रोका तो स्कूटी सवार युवकों ने पुलिसकर्मियों को बीच सड़क पर जमकर पीटा…

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भागलपुर के घूरनपीर बाबा चौक के पास बाइक चेकिंग के दौरान स्कूटी सवार युवकों ने एएसआई विद्या भूषण चौबे और सिपाही सूर्य संगम को पीट दिया। महिला पुलिसकर्मियों के साथ धक्कामुक्की की।

भीड़भाड़ वाले चौराहे पर मारपीट और हंगामें से अफरातफरी मच गई। महिला पुलिसकर्मी जान बचाकर भागी। काफी संख्या में राहगीर भी चेकिंग का विरोध कर पुलिसकर्मियों से उलझ गए। बरारी थाना में अज्ञात के खिलाफ घटना की रिपोर्ट दर्ज की गई है।

शनिवार दोपहर करीब एक बचे घूरनपीर बाबा चौक के पास बाइक चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान स्कूटी सवार तीन लोगों को महिला पुलिसकर्मियों ने रोका। इसपर स्कूटी सवार उलझ गए और धमकी देने लगे। महिला पुलिसकर्मी चांदनी कुमारी ने स्कूटी से चाबी निकाल ली और सिपाही सूर्यशंकर के पास ले गए। बातचीत के दौरान स्कूटी सवार सिपाही से उलझ गए। लोगों की भीड़ जुट गई। एएसआई को धक्का देकर पीछे कर दिया। इसके बाद सिपाही को मुक्के से चेहरे पर मार दिया। खून बहने लगा।

महिला पुलिसकर्मियों से धक्कामुक्की के बाद वह चिल्लाकर भाग गई। काफी संख्या में राहगीर भी चेकिंग का विरोध करने लगे। घटना के बाद अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई। भीड़ का फायदा उठाकर स्कूटी सवार ने महिला पुलिसकर्मी से चाबी छीन ली और भाग गए। भीड़ द्वारा मोबाइल से वीडियो बनाया जा रहा था, लेकिन किसी ने बीच-बचाव नहीं किया। सूचना मिलने पर ट्रैफिक डीएसपी आरके झा मौके पर पहुंचे। घटना की जांच की। पुलिसकर्मियों से बातचीत कर घायल सिपाही को इलाज के लिए मायागंज अस्पताल भेजा। बरारी पुलिस को भी बुलाया लिया गया। डीएसपी ने कहा कि स्कूटी सवार की पहचान की जा रही है।

सीसीटीवी फुटेज से की जा रही पहचान
घूरनपीर बाबा चौक के पास नगर निगम और कई दुकानों में सीसीटीवी लगे हैं। कुछ लोगों ने मारपीट का वीडियो भी तैयार किया है। डीएसपी ने कहा कि सीसीटीवी से स्कूटी सवार व हंगामा करने वालों की पहचान की जा रही है। कहा- घटना काफी गंभीर है। महिला से धक्कामुक्की की गई है। पूर्णिया जिला बल की महिला सिपाही भागलपुर में ट्रेनिंग ले रही है। महिला पुलिसकर्मियों को ट्रैफिक ट्रेनिंग के लिए ड्यूटी पर लगाया जा रहा है।

महिला पुलिसकर्मियों पर किया जाता है कमेंट
चौराहे पर ड्यूटी के दौरान महिला पुलिसकर्मियों को देखकर बाइक सवार कमेंट करते हैं। बाइक पकड़ने या जाम छुड़ाने के दौरान लोगों उल्टा सीधा बोले लगते हैं। महिला पुलिसकर्मियों ने कहा कि ड्यूटी के दौरान कमेंट से परेशान रहते हैं। पकड़ने के दौरान बाइक सवार भाग जाते हैं। घूरनपीर बाबा चौक के पास बेवजह स्कूटी सवार उलझ गए।

वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने इन बड़ी हस्तियों का लड़ा था केस, तस्वीरों में देखें…

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दिग्गज वकील राम जेठमलानी का रविवार सुबह 95 साल की उम्र में निधन हो गया है. जेठमलानी पिछले दो हफ्ते से काफी बीमार चल रहे थे. बीमारी के चलते वो इतने कमजोर हो गए थे कि अपने बेड से उठ भी नहीं पा रहे थे. जेठमलानी ने अपने वकालत करियर में कई हाई प्रोफाइल आपराधिक मुकदमों को लड़ा.

राम जेठमलानी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारों सतवंत सिंह और केहर सिंह के वकील के तौर पर पेश हुए थे. उन्होंने एम्स के डॉक्टर और इंदिरा गांधी के शव का पोस्टमार्टम करने वाले टी डी डोगरा द्वारा दिए गए मेडिकल प्रमाणों को चैलेंज भी किया था.

जेठमलानी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों का मद्रास हाई कोर्ट में 2011 में केस लड़ा था.

राम जेठमलानी अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान के भी वकील बने थे.

सोहराबुद्दीन हत्या कांड में वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह के वकील राम जेठमलानी ही थे.

जेठमलानी ने बहुचर्चित जेसिका लाल हत्याकांड में अभियुक्तों की वकालत की थी.

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने चारा घोटाले में फंसने पर जेठमलानी को अपना वकील बनाया था.

दिवंगत नेता और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के आय से अधिक संपत्ति मामले में फंसने पर राम जेठमलानी ने वकालत की थी.

राम जेठमलानी ने सेबी मामले में सुब्रत राय सहारा की वकालत की थी.

राम जेठमलानी जोधपुर बलात्कार मामले में आसाराम बापू के वकील रहे.

योग गुरु बाबा रामदेव के रामलीला मैदान मामले में जेठमलानी ने वकालत की.

ICC महिला टी-20 विश्व कप का कार्यक्रम घोषित, 21 फरवरी को अपने पहले मैच में इस टीम से भिड़ेगी टीम इंडिया…

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आगामी आईसीसी महिला टी-20 विश्व कप के अंतिम कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है। थाईलैंड और बांग्लादेश के रविवार को टूनार्मेंट के लिए क्वालीफाई करने के साथ ही इस वैश्विक फ्लैगशिप टूनार्मेंट में हिस्सा लेने वाले सभी देशों के नाम तय हो गए हैं। बांग्लादेश की महिला टीम ने स्काटलैंड में आयोजित क्वालीफाईंग इवेंट में जीत हासिल की और अब वह विश्व कप के लिए ग्रुप-ए में रखी गई हैं। इस ग्रुप में मौजूदा चैम्पियन आस्ट्रेलिया, भारत, न्यूजीलैंड और श्रीलंका की टीमें हैं।

दूसरी ओर, 12 साल पहले अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेलने वाली थाईलैंड की टीम ने विश्व कप के लिए क्वालीफाई करके इतिहास रच दिया। इस टीम को ग्रुप-बी में इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के साथ रखा गया है।

आईसीसी विश्व कप 2020 लोकल आर्गनाइजिंग कमिटी के सीईओ निक हाक्ले ने अपने बयान में कहा, “हम ऑस्ट्रेलिया में होने वाले इस वैश्विक आयोजन में बांग्लादेश और थाईलैंड का स्वागत करते हैं। हमें उम्मीद है कि सभी टीमों को ऑस्ट्रेलिया में भरपूर प्यार और समर्थन मिलेगा।”

थाईलैंड की टीम क्वालीफाईंग टूनार्मेंट के फाइनल में पहुंचने में सफल रही, लेकिन उसे बांग्लादेश के हाथों 70 रनों से हार मिली। अब थाई टीम अपने पहले मैच में 22 फरवरी को वेस्टइंडीज का सामना करेगी। वहीं दूसरी ओर, बांग्लादेश टीम का सामना मौजूदा चैम्पियन और मेजबान आस्ट्रेलिया से होगा। यह मैच 27 फरवरी को खेला जाएगा।

वेस्टइंडीज में 2018 में आयोजित पिछले टी-20 विश्व कप में हिस्सा लेने वाली टीमों में से शीर्ष-8 टीमों को अगले विश्व कप के लिए ऑटोमेटिक क्वालीफिकेशन मिला था।

टूनार्मेंट के पहले मैच में भारत का सामना 21 फरवरी को मेजबान ऑस्ट्रेलिया से होगा। टूनार्मेंट का फाइनल मेलबर्न में 8 मार्च को खेला जाएगा।

इसी दिन इंटरनेशनल विमेंस डे मनाया जाता है। इसी साल ऑस्ट्रेलिया में ही पुरुष टी-20 विश्व कप भी खेला जाना है, जिसमें 16 टीमें हिस्सा लेंगी। यह टूनार्मेंट 18 अक्टूबर से 15 नवम्बर तक खेला जाएगा। इसमें भारत को अपना पहला मैच 24 अक्टूबर को दक्षिण अफ्रीका के साथ खेलना है और इसी दिन टूनार्मेंट के उद्घाटन मुकाबले में आस्ट्रेलिया का सामना पाकिस्तान से होगा।

शैलजा धामी : भारतीय वायु सेना की फ्लाइंग यूनिट की पहली महिला फ्लाइट कमांडेंट…

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विंग कमांडर शैलजा धामी को भारतीय वायु सेना की फ्लाइंग यूनिट की पहली महिला फ्लाइट कमांडर बनाया गया है और उन्होंने पिछले कुछ समय से सेना में महिलाओं द्वारा हासिल की जा रही उपलब्धियों में एक बार फिर अपना नाम जोड़ लिया है. वीरों की धरती पंजाब में लुधियाना के शहीद करतार सिंह सराभा गांव में पली बढ़ी शैलजा को देश के लिए कुछ गुजरने का जज्बा अपने गांव की आबोहवा से मिला. इस गांव का नाम देश की आजादी में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शहीद के नाम पर रखा गया है.

शैलजा को उत्तर प्रदेश के हिंडन एयरबेस पर चेतक हेलिकॉप्टर यूनिट की फ्लाइट कमांडर का दायित्व सौंपा गया है. यह पिछले 15 वर्ष से भारतीय वायु सेना में उनकी सेवाओं की अगली सीढ़ी है. इससे पहले वह पहली महिला फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर रह चुकी हैं और फ्लाइंग ब्रांच की परमानेंट कमीशन प्राप्त करने वाली पहली महिला भी वही हैं. इकाई के कमान के क्रम में देखें तो फ्लाइट लेफ्टिनेंट दूसरे नंबर का पद है. शैलजा के माता पिता सरकारी नौकरी में थे. पिता हरकेश धामी बिजली बोर्ड के एसडीओ रहे और मां देव कुमारी जल आपूर्ति विभाग में थीं.

लुधियाना में जन्मीं शैलजा ने सरकारी स्कूल से शुरूआती पढ़ाई के बाद घुमार मंडी के खालसा कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की. 12वीं की पढ़ाई के दौरान एनसीसी के एयरविंग में जाना शैलजा के जीवन में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ और इसी दौरान हिसार में आयोजित ओपन ग्लाइडिंग टूर्नामेंट में स्पॉट लैंडिंग में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद शैलजा ने जैसे आसमान और हवाओं से दोस्ती कर ली, जो वक्त गुजरने के साथ साथ बढ़ती ही रही. बीएससी की पढ़ाई पूरी नहीं हुई थी और फ्लाइंग एयरफोर्स में उनका चयन हो गया. उनके कद को लेकर कुछ असमंजस की स्थिति रही, लेकिन कुछ अड़चनों के बाद उन्हें वायुसेना में चुन लिया गया.

पिछले कुछ समय में महिलाओं ने सेना में सेवाएं देते हुए कुछ साहसिक अभियानों में योगदान देने के साथ ही व्यक्तिगत तौर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. बालाकोट हवाई हमले में सहायता करने वाली उड़ान नियंत्रकों की टीम का हिस्सा रही स्क्वाड्रन लीडर मिंटी अग्रवाल को हाल ही में युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया. इसके अलावा 2018 में लड़ाकू पायलट के तौर पर भारतीय वायु सेना में शामिल की गयी अवनी चतुर्वेदी ने अकेले दम मिग 21 बायसन विमान उड़ाया. फ्लाइट लेफ्टिनेंट मोहना सिंह ने आधुनिकतम जेट विमान हॉक को उड़ाने की काबिलियत हासिल की और फ्लाइट लेफ्टिनेंट भावना कांत ने दिन के समय लड़ाकू विमान उड़ाने में महारत हासिल कर इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाया.

उम्मीद है कि आने वाले समय में भारतीय सेना के कारनामों में इन लड़कियों की वीरता के कुछ और किस्से भी जुड़ेंगे और हर क्षेत्र में लगातार सफलता की ऊंचाइयां नापने वाली देश की यह बेटियां सातवें आसमान तक अपने जौहर दिखाएंगी.

भारतीय रिजर्व बैंक ने एप बनाने के लिए कंपनी का किया चयन, नेत्रहीन भी झट से पहचान लेंगे जाली नोट…

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दृष्टिबाधित लोगों को नोटों की पहचान करने में मदद की योजना की दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक आरबीआई) ने एक और कदम बढ़ाया है। केंद्रीय बैंक ने मोबाइल एप बनाने के लिए कंपनी का चयन किया है। रिजर्व बैंक ने छह सितंबर को बंबई उच्च न्यायालय को बताया था कि इस प्रस्तावित मोबाइल एप्लिकेशन के लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी।

आरबीआई के दस्तावेज में कहा गया है कि मोबाइल आधारित एप विकसित करने के लिए 16 निर्माताओं वेंडर) ने रुचि दिखाई थी और ‘अंतिम रैंकिंग’ में पांच कंपनियां बची थीं। इसमें कहा गया है कि एप बनाने के लिए डैफोडिल सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड को चुना गया है। वर्तमान में 10, 20, 50, 100, 200, 500 और 2,000 रुपए के बैंक नोट चलन में हैं। दृष्टिबाधित लोगों के लिए नकदी आधारित लेनदेन को सफल बनाने के लिए बैंक नोट की पहचान जरूरी है।

नोट को पहचानने में उनकी मदद के लिए ‘इंटाग्लियो प्रिंटिंग’ आधारित पहचान चिह्न दिए गए हैं। यह चिह्न 100 रुपए और उससे ऊपर के नोट में हैं। यह एप महात्मा गांधी श्रृंखला और महात्मा गांधी नयी) श्रृंखला के नोटों की पहचान करने में सक्षम होगा। इसके लिए व्यक्ति को नोट को फोन के कैमरे के सामने रखकर उसकी तस्वीर खींचनी होगी।

यदि नोट की तस्वीर सही से ली गई होगी तो एप आडियो नोटिफिकेशन के जरिये दृष्टिबाधित व्यक्ति को नोट के मूल्य के बारे में बता देगा। अगर तस्वीर ठीक से नहीं ली गई या फिर नोट को रीड करने में कोई दिक्कत हो रही है तो एप फिर से कोशिश करने की सूचना देगा। देश में दृष्टिबाधितों की संख्या करीब 80 लाख है। आरबीआई की इस पहल से उन्हें लाभ होगा।

104 उपग्रहों को पीएसएलवी से अंतरिक्ष भेजने वाले किसान के बेटे की कहानी…

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7 सितंबर की सुबह जब बंगलुरू के इसरो स्पेस रिसर्च सेंटर से वापसी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लौट रहे थे तो इसरो प्रमुख के सिवन भावुक हो गए. महज कुछ ही घंटे पहले इसरो को चंद्रयान-2 से सिग्नल मिलना बंद हुआ था और विक्रम लैंडर चंद्रमा पर उतरा या नहीं या उसका क्या हुआ इसे लेकर सवालों के जवाब अधूरे रह गए थे.

प्रधानमंत्री मोदी के सामने भावुक हुए सिवन की तस्वीरें और वीडियो टीवी, ऑनलाइन और सोशल मीडिया पर जल्द ही चर्चा का विषय बन गया.

सिवन भले ही चंद्रयान-2 की यात्रा के पूरा नहीं हो पाने को लेकर भावुक हुए हों लेकिन वे मानसिक रूप से बेहद मजबूत हैं.

यह उन्हीं के प्रयासों की बदौलत हुआ है कि कम कीमतों में उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने के मामले में आज भारत एक बड़ा गंतव्य बन गया है.

मंगल मिशन के लिए पीएसएलवी के उपयोग से कम लागत वाली प्रभावी रणनीति विकसित करने में भी उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी.

15 फ़रवरी 2017 को पीएसएलवी के जरिए ही एक बार में 104 उपग्रहों (बेबी) को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजने में सफलता के पीछे भी सिवन ही प्रमुख मिशन आर्किटेक्ट थे.

एक टीवी इंटरव्यू में सिवन ने बेबी उपग्रह के बारे में बताया था कि यह इसरो की बहुत बड़ी सफलता है और एक साथ सौ से अधिक उपग्रह भेजने वाला भारत पहला देश बना.

आम लोगों की ज़िंदगी में अंतरिक्ष विज्ञान

उनके नेतृत्व में लिथियम बैटरी भी बनाई गई है जिसे इलेक्ट्रिक व्हीकल में इस्तेमाल किया जा सकेगा.

खुद सिवन कहते हैं कि इसरो का मुख्य उद्देश्य ‘आम जीवन में अंतरिक्ष विज्ञान का इस्तेमाल’ है. वे बताते हैं कि इसरो रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजने वाली तकनीक को उद्योग से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रहा है.

उन्होंने बताया कि अब तक इसरो ने 300 से 400 तकनीक इंडस्ट्री को ट्रांसफर किए हैं.

चिकित्सा उपकरणों के विकास के क्षेत्र में भी उन्होंने कई काम किए हैं. बेहतर माइक्रोप्रोसेसर नियंत्रित कृत्रिम अंग और कृत्रिम हृदय पंप जिसे वाम वेंट्रिकल असिस्ट डिवाइज कहा जाता है उसे फील्ड ट्रायल के लिए तैयार किया गया है.

सिवन उस टीम के प्रमुख रहे हैं जिसने सिक्स डी सिम्युलेशन सॉफ़्टवेयर ‘सितारा’ बनाई है जो इसरो के सभी प्रक्षेपण में एक अहम किरदार निभाता है.

उन्होंने एक ऐसी रणनीति का विकास किया है जिसने मौसम के पूर्वानुमान और हवा की गति की स्थिति को देखते हुए किसी भी मौसम में और साल के किसी भी दिन रॉकेट को लॉन्च करना संभव किया है.पीएसएलवी यानी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान भारत का तीसरी पीढ़ी का प्रक्षेपण रॉकेट है जिसने 1994 से 2017 के बीच 48 भारतीय और 209 विदेशी उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाया है.

पीएसएलवी को ताक़तवर बनाने में योगदान

जब सिवन 1982 में इसरो आए तो सबसे पहले उन्होंने पीएसएलवी परियोजना पर काम किया.

उन्होंने एंड टु ऐंड मिशन प्लानिंग, मिशन डिजाइन, मिशन इंटीग्रेशन ऐंड ऐनालिसिस में काफी योगदान दिया.

आज सिवन को एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, स्पेस ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम इंजीनियरिंग, लॉन्च व्हीकल और मिशन डिज़ाइन, कंट्रोल और गाइडेंस डिजाइन, मिशन के सॉफ़्टवेयर डिजाइन, मिशन के विभिन्न परीक्षणों के परिणामों के संयोजन, एयरोस्पेस से जुड़े किसी प्रयोग की समूची प्रक्रिया को तैयार करने, इसके विश्लेषण और उड़ान प्रणालियों के पुष्टिकरण में विशेषज्ञता प्राप्त है.

उनकी रणनीतियों का एक बड़ा योगदान पीएसएलवी को ताक़तवर बनाने में रहा. इसने इसरो के अन्य लॉन्च व्हीकल, आरएलवी-टीडी समेत जीएसएलवी एमके II, एमके III को एक आधार दिया.

सिवन से जुड़े विवाद

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि के. सिवन का नाम विवादों से नहीं जुड़ा है. के. सिवन जब इसरो के चेयरमैन बने तो उन्होंने स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के डायरेक्टर का डिमोशन कर दिया था, जिसको लेकर इसरो के वैज्ञानिकों ने राष्ट्रपति तक को खत लिखा कि इस फ़ैसले के पीछे कोई प्रोफेशनल वजह नहीं है.

इसके अलावा चंद्रयान 2 से पहले जब सिवन कर्नाटक के कृष्णा मठ में पूजा अर्चना करने गए थे उसकी भी आलोचना हुई थी.

बचपन तंगी में बीता

परिवार के पहले ग्रेजुएट और पहले इंजीनियर से होते हुए इसरो प्रमुख बनने वाले के सिवन का जन्म 14 अप्रैल 1957 को तमिलनाडु के कन्याकुमारी ज़िले में एक किसान परिवार में हुआ.

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के एक इंटरव्यू के मुताबिक पैसों की तंगी के कारण सिवन के छोटे भाई बहन उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर सके.

पत्रकार पल्लव बागला के साथ एक इंटरव्यू में सिवन ने बताया कि उनकी शुरुआती शिक्षा मेला सराकलाविल्लई गांव के सरकारी स्कूल में तमिल माध्यम से हुई. उन्होंने हाई स्कूल की पढ़ाई भी तमिल माध्यम से ही की थी. स्कूली शिक्षा के दौरान वे खेती में अपने पिता की मदद करते थे.

बाद में उन्होंने 1977 में गणित में मदुरै यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई की. इसके साथ ही वे अपने परिवार के पहले ग्रेजुएट बने. इसी परीक्षा में जब उन्हें 100 फ़ीसदी अंक आए तब जाकर सिवन के पिता ने उन्हें उच्च शिक्षा की इजाज़त दी.

वैज्ञानिक बनने का सफर

इसके बाद सिवन ने 1980 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलजी से एयरोनॉटिक्स में इंजीनियरिंग की. इसके दो साल बाद बेंगलुरू के भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) से उन्होंने एयरोस्पेस में स्नातकोत्तर किया और इसी वर्ष इसरो से भी जुड़ गए. फिर 2007 में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में आईआईटी बॉम्बे से अपनी पीएचडी पूरी की.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में वीएसएससी, एलपीएससी के निदेशक, जीएसएलवी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर, अंतरिक्ष आयोग के सदस्य और इसरो परिषद के उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों से होते हुए सिवन 2018 में इसरो प्रमुख बने.

डॉक्टर कलाम समेत कई पुरस्कार मिले

डॉक्टर सिवन को 2007 में इसरो मेरिट अवॉर्ड, 2011 में डॉ बिरेन रॉय स्पेस साइंस एंड डिजाइन अवॉर्ड, 2016 में इसरो अवॉर्ड फॉर आउटस्टैंडिंग अचीवमेंट समेत कई पुरस्कारों और कई यूनिवर्सिटी से डॉक्टर ऑफ़ साइंस से भी नवाजा जा चुका है. इसमें चेन्नई की सत्यभामा यूनिवर्सिटी से अप्रैल 2014 में मिला डॉक्टर ऑफ़ साइंस और 1999 में डॉ विक्रम साराभाई रिसर्च अवॉर्ड शामिल है.

कई प्रतिष्ठित जर्नल में साइंस पर उनके कई पेपर छपे हैं.

अंतरिक्ष परिवहन प्रणाली डिज़ाइन और निर्माण के सभी क्षेत्रों में अपने अनुभव के आधार पर 2015 में ‘इंटिग्रेटेड डिजाइन फॉर स्पेस ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम’ नामक उनकी किताब भी प्रकाशित हुई है.

विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में डॉक्टर के सिवन के योगदान के लिए बीते महीने तमिलनाडु सरकार ने उन्हें डॉ. कलाम पुरस्कार से सम्मानित किया है.