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आप छोड़ते हैं गंदी गैस तो आप करें यह आसान उपाय

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आज मै आप को एक बहुत ही खाश जानकारी देने बाला हूँ जी हाँ आप को यह भी जानकारी दें दें कि दुनिया में ऐसा कोई भी प्राणी नहीं है जो गैस न छोड़ता है चाहे वह इंसान हो जानवर हो या कोई पक्षी आप को यही भी बता दें कि सभी अपने अंदर के अनावश्यक गैस को

बाहर निकालने के लिए ऐसा करते हैं और तो और आप को यह भी जानकारी दें दें कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो काफी गंदी गैस छोड़ते हैं यानी उनकी गैस बहुत दुर्गंध देती है यह चीज आप भी इशसास किए होगे जी हाँ आप को यह भी बता दें कि ऐसे में उन लोगों के एक अनोखी दवाई बनी

है और इस दवाई से अभूत ही आसानी यह यह समस्या ठीक हो जारी हैं जी हाँ आप को यह भी बता दें कि एक फ्रांसीसी कंपनी ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसी गोली का आविष्कार किया है जो आपकी ‘गंदी गैस को खुशबू में बदल देगा जी हां आपने बिल्कुल सही पढ़ा आप को यह भी

जानकारी दें दें कि एक ऐसी गोली जो आपके गैस के दुर्गंध को वास्तव में सुगंधित बना देगा आप सोच रहे होगे कि भला ऐसा क्या हैं तो मैं आप को यह भी जनकरी दें ड्ने कि ये गोलियां क्रिस्टियन

पोंचेवल नामक एक आविष्कारक द्वारा विकसित की गई हैं और तो और जो पश्चिमी फ्रांसीसी शहर का रहने वाला है आप को यह भी जानकारी दें दें कि इसमे इस दवाई का परीक्षण भी किया हैं

ये है वो दरवाजा जिसे कहते हैं ‘नर्क का द्वार’, इसके अंदर जाने वाला कभी लौटकर नहीं आया वापस

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दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं, जो किसी न किसी वजह से रहस्यमयी बनी हुई हैं। एक ऐसी ही जगह तुर्की के प्राचीन शहर हेरापोलिस में है, जहां एक बेहद ही प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यहां ‘नर्क का द्वार’ है, जिसके अंदर जाना तो दूर, पास जाने वाला भी कभी लौटकर वापस नहीं आया।

कहा जाता है कि इस मंदिर के संपर्क में आते ही इंसान से लेकर पशु-पक्षी तक मर जाते हैं। कई साल पहले तक यह जगह रहस्यमयी बनी हुई थी, क्योंकि लोगों का ऐसा मानना था कि यहां आने वालों की मौत यूनानी देवता की जहरीली सांसों की वजह से हो रही है।

यहां लगातार हो रही मौतों की वजह से लोग इस मंदिर के दरवाजे को ‘नर्क का द्वार’ कहने लगे। कहते हैं कि ग्रीक, रोमन काल में भी लोग मौत के डर की वजह से यहां जाने से डरते थे।

हालांकि वैज्ञानिकों द्वारा लोगों की रहस्यमयी मौतों की गुत्थी सुलझा ली गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मंदिर के नीचे से लगातार जहरीली कार्बन डाई ऑक्साइड गैस रिसकर बाहर निकल रही है, जिसके संपर्क में आते ही इंसानों और पशु-पक्षियों की मौत हो जाती है।

वैज्ञानिकों के शोध के मुताबिक, मंदिर के नीचे बनी गुफा में बहुत बड़ी मात्रा में कार्बन डाई ऑक्साइड गैस पायी गई है। जहां आमतौर पर मात्र 10 फीसदी कार्बन डाई ऑक्साइड ही किसी भी इंसान को महज 30 मिनट में मौत की नींद सुला सकता है, वहीं यहां गुफा के अंदर इस जहरीली गैस की मात्रा 91 फीसदी है।

आश्चर्यजनक रूप से गुफा के अंदर से निकल रही भाप की वजह से ही यहां आने वाले कीड़े-मकोड़े और पशु-पक्षी मारे जाते हैं। ये जगह पूरी तरह से वाष्प से भरी होने की वजह से काफी धुंधली और घनी है, जिसकी वजह से यहां जमीन भी मुश्किल से ही दिखाई देती है।

जानकर आप को होगा हैरानी जहां हर वक्त कड़कती रहती है आसमानी बिजली वजह हैं यह

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जैसा की हम सब जानते हैं की विज्ञान आज भले ही कितनी भी तरक्की कर चुका है पर आप को यह भी बता दें की लेकिन धरती पर आज भी ऐसी बहुत ही जगहें हैं जहां का रहस्य सुलझाने में वैज्ञानिक भी नाकाम रहे हैं जी हाँ और तो और आज मैं आप को इस चीज के बारे मे

बताने बाला भी हूँ आप को बता दें की ऐसी ही एक जगह दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में भी है जहां एक झील के ऊपर हर वक्त बिजली कड़कती रहती है जी हाँ और तो और इसका रहस्य आज तक कोई भी जान नहीं पाया है और तो और आप को यह भी बता दें की ये तो आपने सुना ही

होगा कि आसमान में बिजली एक जगह पर दो बार कभी नहीं चमकती लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस जगह पर एक घंटे में हजारों बार बिजली चमकती है जी हाँ आप को यह भी जानकर हैरानी होगा की दुनिया को हैरान कर देने वाले इस रहस्य को बीकन ऑफ मैराकाइबो कहा जाता है और तो और इसके और भी कई नाम हैं जैसे कि कैटाटुम्बो लाइटनिंग एवरलास्टिंग

स्टॉर्म ड्रैमेटिक रोल ऑफ थंडर जी हाँ आप को यह भी बता दें की इस जगह को दुनिया का कुदरती बिजली घर भी कहते हैं बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक वेनेजुएला में कैटाटुम्बो नदी जिस जगह पर मैराकाइबो झील में मिलती है और तो और आप को यह भी बता दें की वहां साल में

260 दिन तूफानी होते हैं और तो और इन 260 दिनों की तूफानी रातों में यहां रात भर बिजली चमकती रहती है औटर तो और इस बहुत ही हैरान करने वाला बात हैं

नाखूनों से ऐसे निकालें नेल पॉलिश के दाग, बनेंगे सुन्दर…

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नाख़ून आपके हाथों को सुंदर बनाते हैं और इन्हें साफ रखना भी जरुरी है. सभी लड़कियाँ तरह-तरह के रंग के नेलपॉलिश लगाते रहती हैं. फल ये होता है कि नाखून में मैल जम जाता है और उस पर नेलपॉलिश का रंग भी चढ़ जाता है जो नाखून के रंग जैसा असली दिखने लगता है. अगर नेल पोलिश आपके नाख़ून पर भी दाग छोड़ जाती है तो आपको बता देते हैं इसे कैसे ठीक करना है. आइये जानते हैं इसके कुछ टिप्स.

नाखून पर क्यूटिकल ऑयल के कुछ बूंदे डालें जिससे नाखून पर जो दाग जमा रहता है उसका एक अंश निकल जाता है. इससे जमे हुए पॉलिश का सील टूट जाता है जिसके कारण रीमूवर आसानी से नाखून के त्वचा के अंदर जाकर दाग को दूर करता है.

अगर अब भी स्टेन आपके नाखून पर हैं तो आप ऑयल-रिच एसिटोन का इस्तेमाल करके आधे-छुटे आधे रंगे नाखूनों से रंग कम कर सकते हैं. रूई के गोले को एसिटोन में भिंगोकर नाखून पर लगायें और दस मिनट तक छोड़ देने के बाद रूई के गोले से इसको साफ कर दें.

आखिर में आप पुराने टूथब्रश को बेकिंग सोडा और पानी के मिश्रण में भिगोकर उससे साफ करें. बेकिंग सोडा का ब्लीचिंग गुण स्टेन को साफ करने में मदद करेगा.

नींबू भी नैचुरल ब्लीचिंग एजेन्ट हैं जो नेलपॉलिस के दाग को साफ करने की क्षमता रखता है. नींबू रस वाले बाउल में अपने नाखून को 15 मिनटों तक भिंगोकर रखें. उसके बाद गुनगुने गर्म पानी से हाथ को धोकर उस पर मॉश्चराइजिंग लोशन लगायें. हफ़्ते में दो बार करने पर ही आपको फर्क नजर आएगा.

वायरल बुखार को ठीक करने के लिए आजमाए ये घरेलू नुस्खे

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वायरल शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है जैसे आंत, फेफड़े, वायु मार्ग और अन्‍य कई हिस्‍से। इस बात से कोई अंतर नहीं पड़ता कि आपके शरीर का कौन सा हिस्‍सा इससे प्रभावित हुआ है, आपको सामान्‍य तौर पर बुखार की शिकायत होती है। इसके अलावा सिरदर्द, बहती नाक, गले में सूजन, आवाज बैठना, खांसी, मांसपेशियों में दर्द, पेट में दर्द, डायरिया और/अथवा उल्‍टी जैसी शिकायतें हो सकती हैं।ऐसे में आप कुछ घरेलू उपाय आजमा सकते हैं।

नींबू
नींबू को बीच में से काट लें और फिर इस टुकड़े से पैरों के तलों पर मसाज करें। आप चाहें तो नींबू के इस कटे हुए टुकड़े को जुराबों में डालकर सारी रात पहनकर रख सकते हैं।

लहसुन
आपने अंकुरित लहसुन के फायदों के बारे में तो आपने सुना ही होगा। आप इस पर शहद लगाकर भी खा सकते हें। इसके अलावा लहसुन की दो कलियों को दो चम्‍मच ऑलिव ऑयल में मिलाकर इसे गर्म कर लें और इससे अपने पैरों के तलों में मसाज करें। अपने पैरों को सारी रात के लिए लपेटकर रखें।

तलवो की जलन से छुटकारा पाने के लिए कीजिये ये उपाय…

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गर्मी के दिनों में अक्सर पैरो में जलन होती हे । निम्रलिखित उपचार करके जलन से छुटकारा पाया जा सकता है। पैरों में जलन एक बहुत ही आम समस्या है और किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती हैं। जलन की भावना हल्के से लेकर गंभीर और तीव्र या क्रोनिक प्रकृति की हो सकती है। अक्सर पैरों में जलन तंत्रिका तंत्र में नुकसान या शिथिलता के कारण होती है। पैरों में जलन का उपचार, अंतर्निहित कारणों पर निर्भर करता है। यह समस्या ओवर द काउंटर दवाओं के साथ कंट्रोल की जा सकती है। इसके अलावा इस समस्या को आप कुछ सरल उपायों को अपनाकर कम कर सकते हैं। पैरों में जलन को दूर करने के कुछ घरेलू उपाय हम आपके लिए लाये हैं।

1.मेहंदी और सिरके या नींबू के रस को मिला कर एक पेस्ट तैयार करें। पेस्ट को लगाने से जलन से छुटकारा मिलता है।

2.चन्दन के पाउडर में गुलाब जल मिलाकर लेप लगाने से जलन से आराम मिलता है। पैरों पर घी मलने से जलन मिट जाती है।

3.लौकी के टुकडों को पैरों पर रगडने से आराम मिलता है।

4.रात को सोते समय मलाई में कुछ बूंदें नींबू का रस मिलाकर कर तलवों की मालिश करें। सुबह पानी से धो लें। ऐसा करने से तलवे फटते नहीं हैं।

5.एडियों और तलवों पर ऑलिव ऑयल से मसाज करें। नियमित रूप से ऐसा करने से तलवों की त्वचा कोमल बनी रहती है।

तलवों का फटना-:
गर्मी के मौसम में तलवों पर दरार पड जाती है। उन्हें नजर अंदाज करने पर दरारों से स्त्राव भी होने लगता है। यहां दिए गए कुछ उपचारों से आप इस समस्या से छुटकारा पा सकती हैं।

*तिल के तेल से पैरों की मालिश करें फिर गुनगुने पानी में थोडी देर सेंक करें। इससे तलवों की त्वचा कोमल होगी और पैरों में नमी बनी रहेगी।

आपकी एक लापरवाही से खराब हो सकती है बच्चे की आंखे, बरतें सावधानी…

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आंखे शरीर के लिए एक खिड़की का काम करती हैं। यह शरीर का सबसे अधिक डेवलप्ड सेंसर ऑर्गन है जो बहुत जल्द दिमाग तक अपनी जानकारी पहुंचाता है। इतने जरुरी अंग की देखभाल खास ढंग से करना भी बहुत जरुरी है और जब बात बच्चों की आए तो यह जानकारी और भी जरुरी हो जाती है। स्वस्थ आंखें और अच्छी दृष्टि बच्चों के विकास का एक अनिवार्य हिस्सा है। जिसे इगनोर करना हानिकारक सिद्ध हो सकता है। आज हम यहां बात करेंगे बच्चों की आंखों में से जुड़ी कुछ समस्याओं के बारे में, जिनपर गौर करना हर मां-बाप के लिए बेहद जरुरी है।

कंजक्टिवाइटिस

खेलते वक्त ज्यादा समय तक धूप में रहने से बच्चों की आंखे लाल हो जाती हैं। जिसे कंजक्टिवाइटिस के नाम से जाना जाता है। आंखो को समय-समय पर साफ न करने की वजह से बच्चों में यह प्रॉबल्म हो जाती है। कंजक्टिवाइटिस की समस्या वायरल भी हो सकती है और बैक्टीरियल भी।

मोतियाबिंद

यह समस्या ज्यादातर बढ़ी उम्र वाले लोगों में पाई जाती हैं। मगर कई बार ध्यान न देने पर छोटे बच्चे भी इस समस्या का शिकार हो जाते हैं। इस प्रॉब्लम के दौरान बच्चे की आंखों में एक झिल्ली सी बन जाती है। जिस कारण उसे देखने में प्रॉब्लम होती है। कई बार तो आंखों का ऑप्रेशन करवाने की नौबत आन पड़ती है।

स्टाई

कई बार आंखो में रुसी होने की वजह से बच्चे आंखे रगड़ते रहते हैं। आंखों में पैदा होने वाली रुसी को स्टई कहते हैं। कमजोर और मीठा ज्यादा खाने वाले बच्चों में भी स्टाई ज्यादा निकलती हैं। स्टाई होने पर आंख में दर्द, आंख से पानी जाना, पलकों पर सूजन और रोशनी में चौंध लगना जैसे लक्षण हो सकते हैं।

ग्लूकोमा

ग्लूकोमा एक ऐसी स्थिति है जब आंखों के अंदर दबाव बहुत अधिक होता है। यदि इस पर ध्यान न दिया जाए तो ये समस्या अंधेपन का कारण भी बन जाती है।

बच्चों की आंखे हेल्दी बनी रहें इसके लिए उनकी डाइट और केयर में कुछ चीजें ऐड करें। जैसे कि…

-बच्चों की आंखें कमजोर होने का मुख्य कारण पौष्टिक फूड में कमी भी है। ऐसे में बच्चों के खान-पान का विशेष ध्यान दें। साथ ही बच्चों की आंखें समय-समय पर साफ करते रहें।

-कम रोशनी में पढ़ने से हो सकती हैं बच्चों की आंखे खराब। बच्चों के पढ़ने वाले कमरे में ब्राइट लाइट्स लगाएं। जिससे पढ़ते वक्त बच्चे की आंखों पर जोर न डले।

-टीवी और मोबाइल जैसे गैजेट्स की वजह से बच्चों की आंखों पर बुरा असर पड़ता है। गैजेट्स पर गेम्स खेलने की बजाए बच्चों को आउटडोर गेम्स खेलने के लिए उत्साहित करें।

-आंखों को हेल्दी रखने के लिए विटामिन ए, बी, सी और डी की जरूरत होती है। ये सब विटामिन्स आपको फल और हरी सब्जियों में भरपूर मात्रा में मिल जाएंगे।

-आंवला का मुरब्बा होता है बच्चों की आंखों के लिए काफी फायदेमंद। खट्टा होने की वजह से बच्चे डायरेक्ट आंवला नहीं खा सकते। ऐसे में मीठा मुरब्बा उनके लिए बेस्ट रहेगा।

सेहत से जुड़ी बहुत सी समस्याओं में ये पत्ते है बेहद लाभकारी…

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 हमारी सेहत के लिए मीठा नीम बेहद गुणकारी होता हैं, इससे हर रोज यूज लेना चाहिए, जिससे हमारा शरीर कई रोगों से दूर रहेगा। इसके पत्ते भी नीम की तरह छोटे-छोटे होते हैं और लाभ भी नीम की तरह ही होते हैं।

रसोई में यूज किए जाने वाले कढ़ी पत्तों को नानी मां के नुस्खों में भी खास जगह दी गई है। सेहत से जुड़ी बहुत सी समस्याओं में ये पत्ते बेहद लाभकारी है। इनमें विटमिन बी1, बी3, बी9, सी, आयरन, कैल्शियम तथा फॉस्फोरस भरपूर मात्रा में होते हैं।

-अगर आपके दस्त हो गए हैं तो आप 3-4 कढ़ी पत्तों को 1 गिलास पानी में उबाल कर इसे गुनगुना करके पीना चाहिए।
-क्या आप भी कफ से परेशान हैं, तो आप कफ बाहर निकालने के लिए कड़ी पत्ते का यूज कीजिए। एक चम्मच शहद और एक चम्मच कढ़ी पत्ते का रस मिला लीजिए। इस रस का दिन में 3-4 बार सेवन कीजिए। कफ से राहत मिलेगी।

-अगर आप भी उल्टी की वजह से परेशान हैं तो आप कढ़ी पत्ते में कुछ बूंद नींबू का रस और चीनी मिला कर सेवन कीजिए। इससे छुटकारा मिलेगा।

-चेहरे के पिंपल और दाग धब्बे दूर करने के लिए कढ़ी पत्तों को पीसकर इसमें नींबू का रस मिलाकर लगाना चाहिए। 15 मिनच बाद चेहरा धो लीजिए। इसका कुछ दिन यूज करने से पिंपल की समस्या दूर होगी और चेहरे पर चमक भी आ जाएगी।

-हर रोज 2 ग्राम मीठी नीम यानि कढी पत्तों का चूर्ण पानी के साथ खाने से आंखोें की रोशनी तेज होने लगती है।
-शरीर पर खुजली होने या घाव होने पर कढ़ी पत्ते का यूज कर सकते हैं। इसे पानी में डाल कर नहाएं या फिर इसका रस लगाना चाहिए।

ये जश्न का नहीं, अर्थव्यवस्था को संभालने का वक़्त : प्रियंका

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आज मोदी सरकार 2.0 के 100 दिन पूरे हो गए हैं। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सरकार अपनी उपलब्धियों पर जश्न मनाने की पूरी तैयारी में लगी हुई है।

वहीं, कांग्रेस नेता सरकार पर हमलावर हो रहे हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा ने इस अवसर पर ट्वीट करते हुए सरकार को निशाने पर लिया है।

प्रियंका वाड्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, ‘भाजपा सरकार सौ दिन का जश्न मनाने जा रही है। लेकिन ऑटो सेक्टर, ट्रांसपोर्ट सेक्टर, माइनिंग सेक्टर को तो ये जश्न बर्बादी के जश्न जैसा लगेगा। हर सेक्टर से एक के बाद एक प्लांट बंद होने और नौकरियाँ जाने की खबर आ रही हैं।’

बता दें, कांग्रेस के कार्यकाल के दौआर्ण केंद्रीय वित्त मंत्री रह चुके पी चिदंबरम को भी जब तिहाड़ जेल भेजा गया तो उन्होंने जाते-जाते भी यही बात कही थी। चिदंबरम ने कहा था कि मुझे देश की अर्थव्यवस्था की चिंता है।

पिछले 100 दिनों की सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार और भाजपा की ओर से कई कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस अवसर पर सरकार क्विज प्रतियोगिता, प्रत्येक राज्य में जिला स्तर पर कार्यक्रम, प्रेस ब्रीफिंग, उपलब्धियों को लेकर पम्पलेट डिस्ट्रीब्यूशन, ई-बुकलेट और सोशल मीडिया पर सरकार के कामकाज की जानकारी दी जाएगी।

नज़रिया : लोकप्रिय चेहरों के बिना केजरीवाल कितना कमाल कर पाएंगे?

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दिल्ली के चांदनी चौक से विधायक अलका लांबा ने आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दिया और कांग्रेस में शामिल हो गई हैं.

उन्होंने एक ट्वीट में अपने इस इस्तीफ़े की घोषणा की.

उनके इस्तीफ़े के कारण स्पष्ट हैं कि पिछले कई महीने से वो लगातार पार्टी से दूर हैं. उन्होंने राजीव गांधी के एक मसले पर भी अपनी असहमति दर्ज की थी.

उनकी बातों से यह भी समझ आता था कि वो कम से कम आम आदमी पार्टी से जुड़ी नहीं रह पाएंगी, फिर सवाल उठता है कि वो कहां जातीं, तो कांग्रेस पार्टी एक बेहतर विकल्प था, क्योंकि वो वहां से ही आई थीं.

उनकी कांग्रेस में स्वाभाविक वापसी संभव थी. इसका एक संकेत यह भी है कि चुनाव होने वाले हैं और वो पार्टी से पुरानी दिल्ली की किसी सीट से चुनाव लड़ सकती हैं.

अलका लांबा के अलावा आशीष खेतान, कुमार विश्वास, आशुतोष, कपिल मिश्रा, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, शाजिया इल्मी जैसे जाने-माने चेहरों ने आम आदमी पार्टी को अलविदा कह दिया है.

किसी ने कांग्रेस की सदस्यता ले ली है तो किसी ने भाजपा की तो किसी ने राजनीति को अलविदा कह दिया है.

ये सभी पार्टी की शुरुआत के जाने-माने चेहरे थे. राजनीतिक गलियारों में यह भी कहासुनी होती है कि ये सभी एकजुट हो जाते तो एक पार्टी का गठन कर सकते थे.

योगेंद्र यादव ने एक पार्टी का गठन किया भी है. अन्ना आंदोलन के दौरान किरण बेदी भी अरविंद केजरीवाल की सहयोगी हुआ करती थीं.

ये सभी वैचारिक स्तर पर एकजुट हुए थे. पार्टी के रूप शायद यह एक प्रयोग था जिसके पहले ही साल में मतभेद सामने आने लगे थे.

इस पार्टी की बुनियाद एक आंदोलन के रूप में, साफ-सुथरी राजनीति और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ था. जब यह सत्ताधारी राजनीति के दायरे में आई तो सबकुछ बदलता चला गया.

मेरी समझ से यह एक दुहस्वप्न के रूप में ही रहा कि जिस चीज को लेकर राजनेताओं, कार्यकर्ताओं और जनता में बड़ा उत्साह था, वो सब निराश हुए.

अरविंद केजरीवाल अकेले क्या कर पाएंगे

आम आदमी पार्टी के शुरुआती और अब के स्वरूप में बहुत अंतर है. अरविंद केजरीवाल पार्टी में करीब-करीब अकेले पड़ गए हैं.

2013 और 2015 के चुनावों में आम आदमी पार्टी को जबरदस्त बढ़त मिली. पार्टी बहुमत के साथ सत्ता में आई.

उसके बाद लगता नहीं है कि जनता का विश्वास पार्टी के प्रति बहुत अधिक दिखा. पार्टी ने ग़रीब और आम लोगों के लिए बहुत सारे काम किए, ख़ासकर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में.

ग़रीब और पिछड़े लोगों के लिए लोकलुभावन योजनाओं की राजनीति हमारे देश में दूसरी पार्टियां भी करती आई हैं. लेकिन मुझे नहीं लगता है कि आम आदमी पार्टी फिलहाल किसी विचारधारा और कार्यक्रम के साथ चल रही है.

लोकसभा चुनावों में पार्टी को शिकस्त का सामना करना पड़ा. ऐसे में कहा जा सकता है कि पार्टी पहले की तुलना में कमजोर हुई है और अरविंद केजरीवाल के सामने वो सबकुछ अकेले करने की चुनौती है जो पिछले चुनावों में कई लोग मिलकर कर रहे थे.

निरंतरता

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में जिस राजनीति की शुरुआत की थी, वो स्थानीय और क्षेत्रीय समस्याओं से निकल कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समस्याओं तक पहुंची थी.

एक समय तो ऐसा लग रहा था कि आम आदमी पार्टी के नेता देश को बदल देने का सपना लेकर मैदान में आए हैं और बहुत तेज़ी से वे दिल्ली से निकल कर पूरे देश की राजनीति में हस्तक्षेप करेंगे.

लेकिन यह सबकुछ जल्दबाजी में हुआ. पांच सालों में पार्टी एक आम राजनीतिक पार्टी की तरह काम करने लगी. अंदरुनी मतभेद बढ़ने लगे.

पद और कुर्सी की लड़ाई तेज़ हुई. जिस मुद्दे और आंदोलन की राजनीति को लेकर पार्टी चली थी, उसमें निरंतरता बनी नहीं रह पाई.